Psychology: 257 MCQs with Answers
Your Progress
0%Psychology Questions and Answers
India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.
Psychology is one of the most important sections of the Haryana Teacher Eligibility Test (HTET). A strong understanding of Child Psychology, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, and Educational Psychology can significantly improve your HTET score. On this page, you will find comprehensive HTET Psychology Notes, chapter-wise multiple-choice questions (MCQs), previous year questions with detailed explanations, practice tests, and important concepts based on the latest HTET syllabus.
Our study material is designed for PRT, TGT, and PGT aspirants preparing for the Haryana Teacher Eligibility Test. Every topic is explained in a simple and exam-oriented manner to help candidates understand concepts quickly and practice effectively. Regular mock tests and topic-wise quizzes will help you identify weak areas and improve your performance before the examination.
Whether you are starting your HTET preparation or revising important psychology topics, this page provides everything you need in one place. Practice regularly, review previous year papers, and strengthen your conceptual understanding to maximize your chances of success in the HTET examination.
HTET Solved Exam Papers - HTET Previous Year Exam Papers:
HTET Psychology, HTET Psychology Notes, HTET Psychology MCQs, HTET Child Psychology, Educational Psychology, HTET Pedagogy, Child Development and Pedagogy, HTET Previous Year Questions, HTET Practice Test, HTET Mock Test, HTET PRT Psychology, HTET TGT Psychology, HTET PGT Psychology, Psychology Quiz, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, Teaching Aptitude, Haryana Teacher Eligibility Test, HTET Exam Preparation, Psychology Questions with Answers, India Study Institute
Other Exam Papers:
- HTET PGT Computer Science 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Geography 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT History 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Biology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Chemistry 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Commerce 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Economics 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT English 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Home Science 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Mathematics 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Music 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Hindi 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Physics 2024 Solved Exam Paper
- HTET PGT Physical Education 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Psychology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Sanskrit 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Sociology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Fine Art 2024 Solved Exam Paper

- HTET PRT 2024 Solved Exam Paper

Q161. भारतीय परम्परा में निम्नलिखित में से किन क्षमताओं को बुद्धि के अन्तर्गत स्वीकार किया गया है ?
Right Answer: संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक क्षमता, सांवेगिक क्षमता, उद्यमी क्षमता
Explanation:
भारतीय परम्परा में बुद्धि को केवल संज्ञानात्मक कुशलता तक सीमित न मानकर एक व्यापक एवं समग्र योग्यता माना गया है। श्रीवास्तव तथा मिश्र के अध्ययनों के अनुसार भारतीय दृष्टिकोण में बुद्धि के चार अंग स्वीकार किए जाते हैं — संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक क्षमता, सांवेगिक क्षमता तथा उद्यमी क्षमता। संज्ञानात्मक क्षमता में विवेक एवं निर्णय, सामाजिक क्षमता में दूसरों का आदर तथा सहयोग, सांवेगिक क्षमता में आत्मसंयम एवं भावनाओं की समझ और उद्यमी क्षमता में परिश्रम, प्रतिबद्धता तथा लक्ष्य-सिद्धि आती है। यह दृष्टिकोण पाश्चात्य आईक्यू-केन्द्रित संकल्पना से अधिक व्यापक है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q162. एक माप जो शृंखला में चरम स्कोर से प्रभावित नहीं होता और ऐसी शृंखला का बेहतरीन ढंग से प्रतिनिधित्व करता है, वह है :
Right Answer: माध्यिका
Explanation:
माध्यिका वह मान है जो आँकड़ों को आरोही क्रम में रखने पर श्रेणी को ठीक दो बराबर भागों में बाँट देता है। इसकी गणना केवल स्थिति पर आधारित होती है, मानों के योग पर नहीं, इसलिए श्रेणी के अत्यन्त बड़े या अत्यन्त छोटे चरम स्कोर इसे प्रभावित नहीं करते। यही कारण है कि विषम अथवा तिरछे वितरण में माध्यिका केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वोत्तम प्रतिनिधि मानी जाती है। इसके विपरीत माध्य प्रत्येक मान को सम्मिलित करता है, अतः एक भी चरम स्कोर उसे खींच लेता है, और बहुलक केवल सर्वाधिक बारम्बारता वाला मान बताता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q163. पैथोग्नोमिक वर्बलाइजे़शन नामक चर किस प्रोजेक्टिव परीक्षण द्वारा मापा जाता है ?
Right Answer: होल्ट्जमैन स्याहीधब्बा परीक्षण (एचआईटी)
Explanation:
होल्ट्जमैन स्याहीधब्बा परीक्षण का निर्माण वेन एच० होल्ट्जमैन ने रोर्शाक परीक्षण की सांख्यिकीय कमियों को दूर करने हेतु किया। इसमें पैंतालीस कार्ड होते हैं और प्रत्येक पर केवल एक अनुक्रिया ली जाती है, जिससे अनुक्रियाओं की संख्या नियंत्रित रहती है और विश्वसनीयता बढ़ जाती है। इसमें बाईस वस्तुनिष्ठ चरों का अंकन होता है, जिनमें ‘पैथोग्नोमिक वर्बलाइजे़शन’ प्रमुख है। यह चर अनुक्रिया में प्रकट होने वाले विचित्र, अवास्तविक एवं विकृत चिन्तन को मापता है और मनोविदलता जैसी गम्भीर मानसिक विकृतियों के नैदानिक संकेत देता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q164. मनोचिकित्सा में परामर्श के लिए ट्रांस सैद्धान्तिक दृष्टिकोण किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था ?
Right Answer: प्रोचास्का तथा डाईक्लीमेंटे
Explanation:
ट्रांस सैद्धान्तिक प्रतिमान जेम्स प्रोचास्का तथा कार्लो डाईक्लीमेंटे ने प्रतिपादित किया। यह विभिन्न मनोचिकित्सा पद्धतियों के सार को एकीकृत कर व्यवहार परिवर्तन को एक क्रमिक प्रक्रिया के रूप में देखता है। इसके चरण हैं — पूर्व-चिन्तन, जिसमें व्यक्ति समस्या स्वीकार ही नहीं करता; चिन्तन, जिसमें वह परिवर्तन पर विचार करता है; तैयारी, कार्यवाही तथा अनुरक्षण, और कभी-कभी पुनरावृत्ति भी। परामर्शदाता का कार्य यह पहचानना है कि सेवार्थी किस चरण में है और उसी के अनुरूप हस्तक्षेप करना। यह प्रतिमान व्यसन-मुक्ति एवं स्वास्थ्य व्यवहार कार्यक्रमों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q165. एक प्रवेश परीक्षा में एक उम्मीदवार कुल 150 उम्मीदवारों में से 35 वें स्थान पर है, उसकी प्रतिशत रैंक होगी :
Right Answer: 77
Explanation:
प्रतिशत रैंक यह बताती है कि किसी व्यक्ति से कम अंक पाने वाले उम्मीदवार कुल समूह का कितने प्रतिशत हैं। इसका सूत्र है — प्रतिशत रैंक बराबर (कुल उम्मीदवार घटा रैंक) को कुल उम्मीदवारों से भाग देकर सौ से गुणा। यहाँ कुल उम्मीदवार 150 तथा रैंक 35 है, अतः 150 में से 35 घटाने पर 115 प्राप्त होता है। 115 को 150 से भाग देने पर 0.766 आता है और सौ से गुणा करने पर लगभग 76.67 अर्थात् निकटतम पूर्णांक 77 प्राप्त होता है। इसलिए उसकी प्रतिशत रैंक 77 होगी।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q166. दृढ़ता के तीन ‘सी’ से तात्पर्य है :
Right Answer: प्रतिबद्धता, नियन्त्रण, चुनौती
Explanation:
दृढ़ता की अवधारणा सुजैन कोबासा तथा साल्वाटोर मैडी ने दी। यह एक व्यक्तित्व शैली है जो तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखती है और इसके तीन घटक अंग्रेजी अक्षर ‘सी’ से आरम्भ होते हैं। प्रतिबद्धता का अर्थ है जीवन एवं कार्य में गहरी रुचि तथा सम्मिलन। नियन्त्रण का अर्थ है यह विश्वास कि घटनाओं के परिणाम को अपने प्रयासों से प्रभावित किया जा सकता है। चुनौती का अर्थ है परिवर्तन को खतरा नहीं, बल्कि विकास का अवसर मानना। ये तीनों मिलकर तनाव के दुष्प्रभावों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q167. व्यक्तित्व कारकों के संदर्भ में, दूसरों पर विश्वास करना, स्पष्टवादिता और विनम्रता जैसी विशेषताओं का द्योतक है :
Right Answer: सहमतता
Explanation:
कोस्टा तथा मैक्री के पंचकारक प्रतिमान में सहमतता एक प्रमुख विस्तृत आयाम है। इसके अन्तर्गत दूसरों पर विश्वास करना, स्पष्टवादिता, परोपकारिता, अनुपालन, विनम्रता तथा कोमल-हृदयता जैसी उप-विशेषताएँ आती हैं। उच्च सहमतता वाले व्यक्ति सहयोगी, क्षमाशील एवं सहानुभूतिपूर्ण होते हैं, जबकि निम्न सहमतता वाले सन्देही, प्रतिस्पर्धी और आक्रामक। शेष चार कारक हैं — बहिर्मुखता, जो सामाजिकता एवं उत्साह दर्शाती है; कर्तव्यनिष्ठा, जो अनुशासन एवं संगठन से जुड़ी है; अनुभव करने का खुलापन, जो कल्पनाशीलता एवं जिज्ञासा से; तथा तंत्रिकातापिता, जो भावनात्मक अस्थिरता से सम्बन्धित है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q168. निम्नलिखित में से कौन - सी प्रविधि को दुर्भीति या अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है ?
Right Answer: क्रमिक विसंवेदनीकरण
Explanation:
क्रमिक विसंवेदनीकरण जोसेफ वोल्पे द्वारा विकसित एक व्यवहार चिकित्सा प्रविधि है, जो दुर्भीति तथा अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त होती है। यह पारस्परिक निषेध के सिद्धान्त पर आधारित है, क्योंकि शिथिलीकरण और चिन्ता एक साथ नहीं रह सकते। उपचार तीन चरणों में होता है — पहले सेवार्थी को गहन मांसपेशीय शिथिलीकरण सिखाया जाता है, फिर भय उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों की न्यूनतम से अधिकतम तक की क्रमिक सूची बनाई जाती है, और अन्त में शिथिल अवस्था में रहते हुए इन परिस्थितियों की कल्पना क्रमशः कराई जाती है, जिससे भय धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q169. मनोचिकित्सा के दौरान जब कोई व्यक्ति जीवन की किसी समस्या या परेशानी वाले पहलू को देखने या स्वीकार करने से इनकार करता है, तो वह एक रक्षा तंत्र का उपयोग कर रहा होता है, जिसे कहते हैं :
Right Answer: अस्वीकरण
Explanation:
अस्वीकरण फ्रॉयड द्वारा वर्णित एक प्रमुख रक्षा तंत्र है, जिसमें व्यक्ति किसी कष्टकारी वास्तविकता को देखने या स्वीकार करने से ही इनकार कर देता है। इससे अहम् को तात्कालिक चिन्ता से राहत मिलती है, परन्तु समस्या यथावत बनी रहती है और प्रायः और गम्भीर हो जाती है। जैसे कोई रोगी गम्भीर निदान को मानने से इनकार कर दे अथवा व्यसनी यह स्वीकार ही न करे कि उसे कोई समस्या है। इसके विपरीत दमन में अप्रिय स्मृतियाँ अचेतन में धकेल दी जाती हैं, प्रतिक्रिया निर्माण में विपरीत व्यवहार अपनाया जाता है और विस्थापन में भावना किसी सुरक्षित लक्ष्य पर निकलती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q170. किसी व्यक्ति के लिए उद्दीपक की तीव्रता में अंतर देखने के लिए आवश्यक भौतिक उद्दीपक में परिवर्तन की न्यूनतम मात्रा को कहा जाता है :
Right Answer: अंतर सीमा
Explanation:
अंतर सीमा वह न्यूनतम मात्रा है जितना किसी भौतिक उद्दीपक में परिवर्तन करने पर व्यक्ति उसकी तीव्रता में अन्तर का अनुभव कर सके। इसी परिवर्तन के फलस्वरूप जो अनुभूत अन्तर उत्पन्न होता है उसे ‘बस ध्यान देने योग्य अंतर’ कहते हैं। अर्नेस्ट वेबर ने बताया कि अंतर सीमा उद्दीपक की मूल तीव्रता के समानुपाती होती है; यही वेबर का नियम है। इसीलिए तेज प्रकाश में परिवर्तन पहचानने के लिए बड़ा अन्तर चाहिए, जबकि मन्द प्रकाश में छोटा भी पर्याप्त होता है। निरपेक्ष सीमा इससे भिन्न है और उद्दीपक की न्यूनतम पहचान-योग्य मात्रा बताती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q171. संज्ञानात्मक त्रय की विशेषता एक व्यक्ति द्वारा धारण किए गए विश्वासों से होती है। त्रय हैं :
Right Answer: स्व, संसार तथा भविष्य
Explanation:
संज्ञानात्मक त्रय की अवधारणा एरोन बेक ने अवसाद की व्याख्या हेतु दी। इसके अनुसार अवसादग्रस्त व्यक्ति तीन क्षेत्रों में स्वतः उत्पन्न नकारात्मक विचार धारण करता है — स्वयं के प्रति, जहाँ वह अपने को अयोग्य एवं दोषपूर्ण मानता है; संसार अर्थात् अपने वर्तमान अनुभवों के प्रति, जहाँ उसे प्रत्येक परिस्थिति बाधाओं से भरी दिखती है; और भविष्य के प्रति, जहाँ उसे केवल निराशा एवं असफलता दिखाई देती है। ये नकारात्मक स्कीमा संज्ञानात्मक विकृतियों को जन्म देते हैं। बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा इन्हीं स्वचालित विचारों को पहचानकर प्रमाणों की सहायता से चुनौती देती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q172. प्रायोगिक विधि के सफलतम प्रयोग के लिए आवश्यक है :
Right Answer: प्रतिभागियों का यादृच्छिक निर्धारण
Explanation:
प्रायोगिक विधि का उद्देश्य स्वतंत्र चर तथा आश्रित चर के बीच कारण-कार्य सम्बन्ध स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रयोगात्मक और नियंत्रित समूह आरम्भ में सभी दृष्टियों से समतुल्य हों। यह केवल प्रतिभागियों के यादृच्छिक निर्धारण से सम्भव होता है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के किसी भी समूह में जाने की सम्भावना समान रहती है। इससे बुद्धि, आयु, अभिप्रेरणा जैसे बाह्य चर दोनों समूहों में समान रूप से बँट जाते हैं और उनका प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है। चरों का संकरण तो प्रयोग का दोष है, जबकि प्राकृतिक निरीक्षण एक भिन्न शोध विधि है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q173. निम्नलिखित मापनियों को उनके निर्माता से मिलान कर सही कूट चुनिए :
सूची-I (मापनी)
A. मिनेसोटा मल्टीफेजिक व्यक्तित्व मापनी (MMPI)
B. पर्सनल डेटा शीट
C. सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली
D. नीओ-व्यक्तित्व मापनी - संशोधित
सूची-II (निर्माता)
(i) कोस्टा तथा मैक्री
(ii) हैथवे तथा मैकिनले
(iii) कैटल
(iv) वुडवर्थ
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(iii), (D)-(i)
Explanation:
मिनेसोटा मल्टीफेजिक व्यक्तित्व मापनी का निर्माण स्टार्क हैथवे तथा जे० सी० मैकिनले ने 1943 में किया और यह मानसिक विकृतियों के नैदानिक मूल्यांकन में प्रयुक्त होती है। पर्सनल डेटा शीट रॉबर्ट वुडवर्थ ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सैनिकों की भावनात्मक स्थिरता जाँचने हेतु बनाई और इसे पहली व्यक्तित्व प्रश्नावली माना जाता है। सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली रेमंड कैटल ने कारक विश्लेषण के आधार पर विकसित की। नीओ-व्यक्तित्व मापनी-संशोधित पॉल कोस्टा तथा रॉबर्ट मैक्री की देन है, जो पंचकारक प्रतिमान को मापती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q174. बेडली (1996) के अनुसार कॉर्टेक्स के ललाट पालि की क्षति केन्द्रीय कार्यकारी को नुकसान पहुँचाती है और पीड़ित व्यक्ति अपने प्रसंस्करण संसाधनों को उचित रूप से निर्देशित नहीं कर पाता। यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम
Explanation:
एलन बेडली के कार्यशील स्मृति प्रतिरूप में केन्द्रीय कार्यकारी सर्वोच्च नियंत्रक इकाई है, जो ध्यान बाँटने, कार्यों के बीच अदल-बदल करने तथा ध्वन्यात्मक लूप और दृश्य-स्थानिक स्केचपैड का संचालन करने का कार्य करती है। ललाट पालि की क्षति से यही इकाई क्षतिग्रस्त हो जाती है और डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम उत्पन्न होता है। इसमें रोगी योजना बनाने, कार्य आरम्भ करने, ध्यान बदलने तथा आवेग रोकने में असमर्थ हो जाता है, विचलित होता रहता है और अनुचित व्यवहार दोहराता है। यह अल्जाइमर या पार्किंसन जैसे अपह्रासी रोगों से भिन्न एक कार्यकारी नियंत्रण विकार है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q175. जब आप यह देखते हैं कि अन्य लोग भी मृत्युदण्ड के पक्ष में हैं तो आप यह अनुभव करते हैं कि यह विचार या दृष्टिकोण जनता के द्वारा वैधीकृत किया जा रहा है। यह एक प्रकार का ........... है।
Right Answer: अनुरूपता प्रभाव
Explanation:
बैंडवैगन प्रभाव वह प्रवृत्ति है जिसमें किसी विचार या व्यवहार को केवल इसलिए सही एवं वैध मान लिया जाता है क्योंकि बहुत से लोग उसे अपना रहे हैं। इसका आधार सूचनात्मक सामाजिक प्रभाव है, जिसमें व्यक्ति दूसरों के व्यवहार को वास्तविकता का प्रमाण मान लेता है। मृत्युदण्ड के उदाहरण में व्यक्ति अपने विचार को स्वयं जाँचने के बजाय जनसमर्थन को ही उसकी वैधता का प्रमाण मान लेता है। यह प्रभाव चुनाव, विज्ञापन एवं फैशन में सामान्य रूप से दिखाई देता है। अनुपालन प्रत्यक्ष अनुरोध की तथा आज्ञाकारिता किसी सत्ता के आदेश की स्वीकृति है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q176. एक शिक्षक ने छात्रों की वर्तमान स्थिति एवं प्रदर्शन का आकलन करने हेतु परीक्षा ली और उसके बाद उन कारकों की जाँच की जो विभिन्न अनुदेशात्मक प्रथाओं के कारण प्रतिकूल परिणामों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। यहाँ शिक्षक ने किया :
Right Answer: नैदानिक मूल्यांकन
Explanation:
नैदानिक मूल्यांकन का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं होता कि विद्यार्थी ने कितना सीखा, बल्कि यह पता लगाना होता है कि वह कहाँ और क्यों पिछड़ रहा है। इसमें अधिगम कठिनाइयों के अन्तर्निहित कारणों — जैसे दोषपूर्ण शिक्षण विधि, अनुपयुक्त सामग्री, पूर्वज्ञान की कमी अथवा अभिप्रेरणा का अभाव — की व्यवस्थित जाँच की जाती है, ताकि उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सके। इसके विपरीत रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण के दौरान निरन्तर प्रतिपुष्टि देता है, योगात्मक मूल्यांकन पाठ्यक्रम के अन्त में उपलब्धि आँकता है और पाठ्यक्रम मूल्यांकन स्वयं पाठ्यक्रम की गुणवत्ता जाँचता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q177. निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही कूट चुनिए :
(A) किसी व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली चिंता एक गतिशील विशेषता है जो संज्ञानात्मक एवं स्थितिजन्य कारणों से समय के साथ बदलती रहती है। ऐसी गतिशील विशेषताओं में उच्च से मध्यम स्तरीय परीक्षण-पुनःपरीक्षण विश्वसनीयता होती है।
(B) समजातीयता का अर्थ उस विस्तार से है जिसमें परीक्षण की वस्तुएँ एक-कारकीय हैं, और विषमजातीयता से तात्पर्य उस परीक्षण से है जो विभिन्न कारकों को मापता है।
Right Answer: केवल (B) सही है।
Explanation:
कथन (A) गलत है। चिन्ता जैसी अवस्थागत अर्थात् गतिशील विशेषताएँ स्थिति एवं समय के साथ तेजी से बदलती हैं, इसलिए दो अवसरों पर लिए गए मापों में अन्तर आ जाता है और परीक्षण-पुनःपरीक्षण विश्वसनीयता निम्न रहती है। उच्च परीक्षण-पुनःपरीक्षण विश्वसनीयता तो बुद्धि या शीलगुण जैसी स्थायी विशेषताओं में मिलती है। कथन (B) सही है, क्योंकि समजातीय परीक्षण की सभी वस्तुएँ एक ही कारक मापती हैं, जबकि विषमजातीय परीक्षण अनेक कारक मापता है। अतः केवल (B) सही है और यही उत्तर है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q178. अधिगम तत्वों (सूची-I) को उनकी सही परिभाषाओं (सूची-II) से सुमेलित कीजिए :
सूची-I (अधिगम तत्व)
A. अननुबंधित उद्दीपक
B. अनुबंधित अनुक्रिया
C. अनुबंधित उद्दीपक
D. अननुबंधित अनुक्रिया
सूची-II (परिभाषा)
(i) एक उद्दीपक जो पहले तटस्थ था, अब अनुबंधित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम है।
(ii) अनुबंधित उद्दीपक के प्रति एक सीखी हुई प्रतिक्रिया।
(iii) स्वाभाविक रूप से घटित होने वाला उद्दीपक जो अनैच्छिक एवं अनसीखी प्रतिक्रिया की ओर ले जाता है।
(iv) प्राकृतिक उद्दीपक के प्रति अनैच्छिक प्रतिक्रिया।
Right Answer: (A)-(iii), (B)-(ii), (C)-(i), (D)-(iv)
Explanation:
पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन में चार तत्व होते हैं। अननुबंधित उद्दीपक वह स्वाभाविक उद्दीपक है जो बिना किसी अधिगम के अनैच्छिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, जैसे भोजन। उसके प्रति होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया, जैसे लार आना, अननुबंधित अनुक्रिया कहलाती है। अनुबंधित उद्दीपक वह है जो पहले तटस्थ था, किन्तु अननुबंधित उद्दीपक के साथ बार-बार युग्मित होने पर अब स्वयं प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम हो जाता है, जैसे घण्टी। और अनुबंधित उद्दीपक के प्रति सीखी हुई प्रतिक्रिया अनुबंधित अनुक्रिया कहलाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q179. एक प्रसिद्ध अध्ययन जिसके द्वारा मार्शमेलो प्रभाव प्रतिपादित किया गया, के जनक हैं :
Right Answer: वाल्टर मिशेल
Explanation:
मार्शमेलो प्रयोग वाल्टर मिशेल ने 1960 और 1970 के दशक में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया। इसमें चार से पाँच वर्ष के बच्चे के सामने एक मार्शमेलो रखकर कहा जाता था कि यदि वह शोधकर्ता के लौटने तक प्रतीक्षा कर ले तो उसे दो मिल जाएँगे। यह प्रयोग विलम्बित परितोषण अर्थात् आत्मनियंत्रण की क्षमता मापता था। अनुवर्ती अध्ययनों में पाया गया कि जो बच्चे अधिक देर प्रतीक्षा कर सके, उनके शैक्षिक प्रदर्शन, तनाव-प्रबन्धन तथा सामाजिक कुशलता आगे चलकर बेहतर रहे। इसी से मिशेल का व्यक्तित्व का संज्ञानात्मक-सांवेगिक प्रतिमान विकसित हुआ।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q180. निम्न कथनों को पढ़कर सही कूट का चुनाव कीजिए :
(A) क्रमिक मापनी का मापन न केवल एक व्यक्ति को दूसरे से पृथक करता है, बल्कि यह भी बताता है कि किसी व्यक्ति में समूह में देखे जा रहे शीलगुण कम हैं या ज्यादा।
(B) क्रमिक मापनी में श्रेणियाँ न केवल समजातीय और परस्पर अनन्य हैं, बल्कि वे कुछ सम्बन्ध या असमानताएँ भी रखती हैं।
Right Answer: (A) तथा (B) दोनों सही हैं।
Explanation:
स्टीवंस ने मापन के चार स्तर बताए — नामिक, क्रमिक, अन्तराल तथा अनुपात। नामिक मापनी केवल वर्गीकरण करती है, जिसकी श्रेणियाँ समजातीय एवं परस्पर अनन्य होती हैं। क्रमिक मापनी इससे एक कदम आगे बढ़कर इन श्रेणियों में क्रम अथवा पद भी स्थापित करती है। इसलिए वह न केवल एक व्यक्ति को दूसरे से पृथक करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किसमें कोई शीलगुण अधिक है और किसमें कम। इस प्रकार दोनों कथन सही हैं। हाँ, क्रमिक मापनी यह नहीं बताती कि दो पदों के बीच अन्तर कितना है, क्योंकि उसके अन्तराल समान नहीं होते।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
0 Comments
Be the first to comment.
Leave a comment
Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.