Psychology: 257 MCQs with Answers
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Q21. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?
Right Answer: परिपक्वता
Explanation:
परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।
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Q22. निम्नलिखित में से कौन-सी समावेशी शिक्षा की एक विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह अशक्त बच्चों की विशिष्ट शिक्षा तक सीमित रहती है
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'सभी के लिए शिक्षा' है। यह केवल अशक्त (विकलांग/दिव्यांग) बच्चों तक सीमित नहीं है। समावेशी शिक्षा का अर्थ है—सामान्य बच्चों, अशक्त बच्चों, प्रतिभाशाली बच्चों और समाज के हर वर्ग (विभिन्न भाषा, जाति, धर्म) के बच्चों को एक ही नियमित कक्षा में एक साथ बैठाकर पढ़ाना।
केवल अशक्त बच्चों को अलग से पढ़ाना "विशिष्ट शिक्षा" (Special Education) कहलाता है, जो समावेशी शिक्षा के बिल्कुल विपरीत अवधारणा है। इसलिए यह कथन समावेशी शिक्षा की विशेषता नहीं है।
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Q23. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :
नैतिक अवस्थाएं विशेषता (a) इनाम के लालच में अनुपालन (i) दूसरों की स्वीकृति पाना (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व
सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या
लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:
- (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
- (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
- (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
- (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
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Q24. सर्जनशील बच्चों की पहचान हेतु शिक्षक द्वारा कौन-से परीक्षण प्रशासित किए जा सकते हैं ?
(a) आकृति निर्माण परीक्षण
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण
सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a), (b) एवं (d)
Explanation:
सर्जनशील (Creative) बच्चों की पहचान करने के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और नवीनता का मापन किया जाता है। दिए गए परीक्षणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(a) आकृति निर्माण परीक्षण (Figure construction test): यह परीक्षण सृजनात्मकता को मापता है। इसमें बच्चे को कुछ बुनियादी आकार (जैसे गोला, त्रिभुज) दिए जाते हैं और उनसे कोई नई और मौलिक आकृति बनाने को कहा जाता है।
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण (Product improvement test): यह भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख परीक्षण है। इसमें बच्चे को कोई साधारण वस्तु या खिलौना दिया जाता है और पूछा जाता है कि इसे और अधिक मजेदार या उपयोगी बनाने के लिए इसमें क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण (Usual uses test): यह विकल्प गलत है। सृजनात्मकता मापने के लिए 'अप्रचलित या नवीन उपयोग परीक्षण' (Unusual uses test) का प्रयोग किया जाता है (जैसे- ईंट के नए-नए उपयोग बताना)। 'प्रचलित' (Usual) उपयोग बताना सामान्य बुद्धि या स्मृति का हिस्सा है, सृजनात्मकता का नहीं।
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण (Picture completion test): यह सृजनात्मकता का एक महत्वपूर्ण अशाब्दिक परीक्षण है। इसमें अधूरी रेखाओं या चित्रों को पूरा करके एक अर्थपूर्ण और मौलिक चित्र बनाने के लिए कहा जाता है।
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Q25. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :
Right Answer: संतुलनीकरण
Explanation:
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:
- आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
- उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
- समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
- उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
- संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
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Q26. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?
Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत
Explanation:
प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।
इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
- अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
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Q27. बण्डूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धान्त के सोपानों को क्रम से व्यवस्थित कीजिए :
(a) व्यवहार का प्रत्यक्षीकरण
(b) व्यवहार का पुनर्बलन
(c) व्यवहार का स्मरण
(d) स्मरण की क्रियात्मक परिणति
सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a), (c), (d), (b)
Explanation:
अल्बर्ट बण्डूरा (Albert Bandura) ने सामाजिक अधिगम का सिद्धान्त (Social Learning Theory) प्रतिपादित किया था, जिसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) या 'मॉडलिंग' (Modeling) भी कहा जाता है।
बण्डूरा के अनुसार, बच्चे या व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। किसी भी नए व्यवहार को देखकर सीखने की इस प्रक्रिया को बण्डूरा ने चार मुख्य सोपानों (चरणों) में बाँटा है, जिनका सही क्रम इस प्रकार है:
1. अवधान या प्रत्यक्षीकरण (Attention / Perception of behaviour) - (a) सीखने की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति किसी मॉडल (जैसे- शिक्षक, माता-पिता, या टीवी का कोई पात्र) के व्यवहार को पूरे ध्यान से देखता है और उसे समझता (प्रत्यक्षीकरण) है। बिना ध्यान दिए कोई भी व्यवहार सीखा नहीं जा सकता।
2. धारण या स्मरण (Retention / Remember of behaviour) - (c) मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखने के बाद, व्यक्ति उस व्यवहार को अपने मस्तिष्क में स्मृति (Memory) के रूप में सुरक्षित कर लेता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे याद किया जा सके।
3. पुनरुत्पादन या क्रियात्मक परिणति (Reproduction / Convert the memory into action) - (d) इस चरण में व्यक्ति अपने मस्तिष्क में याद की गई बातों (स्मरण) को वास्तविक शारीरिक क्रिया या व्यवहार में बदलने का प्रयास करता है। यानी वह वैसा ही करने की कोशिश करता है जैसा उसने मॉडल को करते हुए देखा था।
4. अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation / Reinforcement of behaviour) - (b) अंतिम चरण में यह तय होता है कि व्यक्ति उस सीखे गए व्यवहार को भविष्य में दोहराएगा या नहीं। यदि मॉडल के समान व्यवहार करने पर व्यक्ति को समाज से तारीफ, पुरस्कार या सकारात्मक 'पुनर्बलन' मिलता है, तो वह उस व्यवहार को अपना लेता है। यदि उसे डांट या सजा मिलती है, तो वह उस व्यवहार को छोड़ देता है।
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Q28. समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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Q29. सीखने की परिस्थिति में सुसंगत तथ्यों को असुसंगत तथ्यों से अलग करके प्रस्तुत करना, सीखने के किस नियम का परिचायक है ?
Right Answer: तत्त्व प्रबलता का नियम
Explanation:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ई. एल. थार्नडाइक (E. L. Thorndike) के सीखने के नियमों (Laws of Learning) से संबंधित है। थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य (Primary) नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए थे। यह प्रश्न उनके गौण नियमों पर आधारित है।
(3) तत्त्व प्रबलता का नियम (Principle of prepotency of elements): इसे 'आंशिक क्रिया का नियम' (Law of Partial Activity) भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति या अधिगमकर्ता किसी नई परिस्थिति या समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति पर आँख मूंदकर प्रतिक्रिया करने के बजाय, उसके सबसे महत्वपूर्ण या सुसंगत (Relevant) तत्वों को पहचानता है और अनावश्यक या असुसंगत (Irrelevant) तत्वों को छोड़ देता है। सुसंगत तथ्यों को अलग करके प्रस्तुत करना इसी नियम का हिस्सा है, ताकि बच्चा केवल काम की बातों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
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Q30. मैक्डूगल के अनुसार, 'घृणा' का संवेग किस मूल प्रवृत्ति के साथ जुड़ा हुआ है ?
Right Answer: निवृत्ति
Explanation:
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने मनोविज्ञान में 'मूल प्रवृत्तियों का सिद्धान्त' (Theory of Instincts) प्रतिपादित किया था। उनका मानना था कि मनुष्य के हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई मूल प्रवृत्ति होती है।
मैकडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृत्तियाँ (Instincts) बताई हैं और स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के जाग्रत होने पर एक विशेष संवेग (Emotion) उत्पन्न होता है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर मूल प्रवृत्ति और उनसे जुड़े संवेगों का सही मिलान इस प्रकार है:
(1) निवृत्ति (Repulsion) ➔ घृणा (Disgust) : जब इंसान के सामने कोई सड़ी-गली, खराब या अप्रिय वस्तु/स्थिति आती है, तो वह उससे दूर हटना (निवृत्ति) चाहता है। इस मूल प्रवृत्ति के कारण हमारे अंदर 'घृणा' का संवेग पैदा होता है। (यही इस प्रश्न का सही उत्तर है)।
(2) पलायन (Escape) ➔ भय (Fear) : जब किसी खतरनाक स्थिति का सामना होता है, तो इंसान के अंदर 'भय' या डर का संवेग उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह वहाँ से भागने (पलायन) की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
(3) युयुत्सा (Combat) ➔ क्रोध (Anger) : युयुत्सा का अर्थ है युद्ध करने या लड़ने की इच्छा। यह मूल प्रवृत्ति तब जाग्रत होती है जब व्यक्ति के भीतर 'क्रोध' (गुस्सा) का संवेग हावी होता है।
(4) जिज्ञासा (Curiosity) ➔ आश्चर्य (Wonder) : जब हम कोई नई, अनोखी या रहस्यमयी चीज़ देखते हैं तो हमें 'आश्चर्य' का संवेग महसूस होता है, जो हमारे अंदर उस चीज़ के बारे में और अधिक जानने की 'जिज्ञासा' (मूल प्रवृत्ति) पैदा करता है।
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Q31. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उत्तर बाल्यावस्था की दल-क्रियाओं का उनके अधिगम पर सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित नहीं करता ?
Right Answer: पूर्वाग्रही मनोवृत्ति धारण करते हैं
Explanation:
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Q32. निम्नलिखित में से कौन-सा अभिप्रेरक अधिगम को सकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करता है ?
Right Answer: प्रगति की अनभिज्ञता
Explanation:
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Q33. CWSN का अर्थ है :
Right Answer: चिल्ड्रन विथ स्पेशल नीड्स (विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे)
Explanation:
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Q34. निम्नलिखित में से कौन-सा सीखने को प्रभावित करने वाला अधिगमकर्ता से संबंधित एक व्यक्तिगत कारक नहीं है ?
Right Answer: विषयवस्तु
Explanation:
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Q35. निम्नलिखित में से कौन-सा चिंतन उपकरण अधिगम को बढ़ावा देता है ? (a) प्रतिमाएँ (b) भाषा (c) संप्रत्यय (d) प्रतिज्ञप्ति — सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)
Explanation:
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Q36. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सृजनशील बालक की सही व्याख्या नहीं करता ?
Right Answer: अभिसारी चिंतन
Explanation:
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Q37. शिक्षण-अधिगम परिस्थितियों में विद्यार्थियों को दण्ड देना किस प्रकार का अभिप्रेरक है ?
Right Answer: बाह्य
Explanation:
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Q38. निम्नलिखित में से कौन-सी गति बाधित विद्यार्थियों की विशिष्ट आवश्यकता नहीं है ?
Right Answer: आश्रित व्यवहार
Explanation:
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Q39. निम्नलिखित लक्षण किस प्रकार की अधिगम कठिनाई को इंगित करते हैं ? (a) अंकों एवं प्रतीकों को लिखने की अक्षमता (b) आधारभूत अंकगणितीय गणना में कठिनाई
Right Answer: डिस्कैल्कुलिया
Explanation:
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Q40. ‘सीखने का मूल्यांकन’ को इस नाम से भी जाना जाता है :
Right Answer: योगात्मक मूल्यांकन
Explanation:
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