HTET Sanskrit PGT 2024 Solved Exam Paper
HTET Sanskrit PGT 2024 Solved Exam Paper: 150 Questions with Answers
HTET Sanskrit PGT 2024 Solved Exam Paper: Exam Pattern and Preparation Notes

HTET is conducted by the Board of School Education Haryana (BSEH), Bhiwani, and PGT Sanskrit falls under HTET Level 3, for candidates teaching Classes IX to XII. Like every HTET level, this paper has 150 multiple-choice questions worth 150 marks, completed in 150 minutes, with no negative marking. Check the official BSEH website for the current year's notification before you register.
The PGT Sanskrit paper mixes Child Development and Pedagogy questions with the subject-specific portion, which usually spans Sanskrit grammar (vyakaran), literature and classical texts, translation, and Sanskrit teaching methodology. Since there's no negative marking, attempt every question rather than leaving doubtful ones blank; a guess costs nothing while a blank answer guarantees zero.
Sanskrit PGT candidates often lose marks on sandhi and samas grammar questions rather than literature-recall ones, since these rules have many exceptions that exam papers specifically target. Revise the exception cases for each grammar rule rather than assuming the general pattern always applies.
If you're also preparing for other Sanskrit teaching posts such as KVS PGT Sanskrit or DSSSB PGT Sanskrit, the core subject portion overlaps heavily with HTET, so this solved paper doubles as preparation for those exams too. Most first-time HTET PGT Sanskrit candidates underestimate how much of the paper is pedagogy and general awareness rather than pure Sanskrit content, so don't spend all your revision time on grammar while ignoring the pedagogy section.
Solve this 2024 paper under real exam conditions: set a 150-minute timer, attempt every question in one sitting, and check the answer key only once you've finished. Note down which topics cost you the most marks, whether it's grammar rules, literature, or pedagogy, and revise those specifically before your next attempt.
HTET Sanskrit PGT 2024 (Level-3) का हल सहित प्रश्न पत्र। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा आयोजित हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के संस्कृत विषय (भाग-IV) के सभी प्रश्न, चारों विकल्प, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या के साथ।
Your Progress
0%Psychology (30 Questions)
Q1. मैक्डूगल के अनुसार, 'घृणा' का संवेग किस मूल प्रवृत्ति के साथ जुड़ा हुआ है ?
Right Answer: निवृत्ति
Explanation:
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने मनोविज्ञान में 'मूल प्रवृत्तियों का सिद्धान्त' (Theory of Instincts) प्रतिपादित किया था। उनका मानना था कि मनुष्य के हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई मूल प्रवृत्ति होती है।
मैकडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृत्तियाँ (Instincts) बताई हैं और स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के जाग्रत होने पर एक विशेष संवेग (Emotion) उत्पन्न होता है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर मूल प्रवृत्ति और उनसे जुड़े संवेगों का सही मिलान इस प्रकार है:
(1) निवृत्ति (Repulsion) ➔ घृणा (Disgust) : जब इंसान के सामने कोई सड़ी-गली, खराब या अप्रिय वस्तु/स्थिति आती है, तो वह उससे दूर हटना (निवृत्ति) चाहता है। इस मूल प्रवृत्ति के कारण हमारे अंदर 'घृणा' का संवेग पैदा होता है। (यही इस प्रश्न का सही उत्तर है)।
(2) पलायन (Escape) ➔ भय (Fear) : जब किसी खतरनाक स्थिति का सामना होता है, तो इंसान के अंदर 'भय' या डर का संवेग उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह वहाँ से भागने (पलायन) की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
(3) युयुत्सा (Combat) ➔ क्रोध (Anger) : युयुत्सा का अर्थ है युद्ध करने या लड़ने की इच्छा। यह मूल प्रवृत्ति तब जाग्रत होती है जब व्यक्ति के भीतर 'क्रोध' (गुस्सा) का संवेग हावी होता है।
(4) जिज्ञासा (Curiosity) ➔ आश्चर्य (Wonder) : जब हम कोई नई, अनोखी या रहस्यमयी चीज़ देखते हैं तो हमें 'आश्चर्य' का संवेग महसूस होता है, जो हमारे अंदर उस चीज़ के बारे में और अधिक जानने की 'जिज्ञासा' (मूल प्रवृत्ति) पैदा करता है।
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Q2. सीखने की परिस्थिति में सुसंगत तथ्यों को असुसंगत तथ्यों से अलग करके प्रस्तुत करना, सीखने के किस नियम का परिचायक है ?
Right Answer: तत्त्व प्रबलता का नियम
Explanation:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ई. एल. थार्नडाइक (E. L. Thorndike) के सीखने के नियमों (Laws of Learning) से संबंधित है। थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य (Primary) नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए थे। यह प्रश्न उनके गौण नियमों पर आधारित है।
(3) तत्त्व प्रबलता का नियम (Principle of prepotency of elements): इसे 'आंशिक क्रिया का नियम' (Law of Partial Activity) भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति या अधिगमकर्ता किसी नई परिस्थिति या समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति पर आँख मूंदकर प्रतिक्रिया करने के बजाय, उसके सबसे महत्वपूर्ण या सुसंगत (Relevant) तत्वों को पहचानता है और अनावश्यक या असुसंगत (Irrelevant) तत्वों को छोड़ देता है। सुसंगत तथ्यों को अलग करके प्रस्तुत करना इसी नियम का हिस्सा है, ताकि बच्चा केवल काम की बातों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
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Q3. समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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Q4. बण्डूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धान्त के सोपानों को क्रम से व्यवस्थित कीजिए :
Right Answer: (a), (c), (d), (b)
Explanation:
अल्बर्ट बण्डूरा (Albert Bandura) ने सामाजिक अधिगम का सिद्धान्त (Social Learning Theory) प्रतिपादित किया था, जिसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) या 'मॉडलिंग' (Modeling) भी कहा जाता है।
बण्डूरा के अनुसार, बच्चे या व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। किसी भी नए व्यवहार को देखकर सीखने की इस प्रक्रिया को बण्डूरा ने चार मुख्य सोपानों (चरणों) में बाँटा है, जिनका सही क्रम इस प्रकार है:
1. अवधान या प्रत्यक्षीकरण (Attention / Perception of behaviour) - (a) सीखने की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति किसी मॉडल (जैसे- शिक्षक, माता-पिता, या टीवी का कोई पात्र) के व्यवहार को पूरे ध्यान से देखता है और उसे समझता (प्रत्यक्षीकरण) है। बिना ध्यान दिए कोई भी व्यवहार सीखा नहीं जा सकता।
2. धारण या स्मरण (Retention / Remember of behaviour) - (c) मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखने के बाद, व्यक्ति उस व्यवहार को अपने मस्तिष्क में स्मृति (Memory) के रूप में सुरक्षित कर लेता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे याद किया जा सके।
3. पुनरुत्पादन या क्रियात्मक परिणति (Reproduction / Convert the memory into action) - (d) इस चरण में व्यक्ति अपने मस्तिष्क में याद की गई बातों (स्मरण) को वास्तविक शारीरिक क्रिया या व्यवहार में बदलने का प्रयास करता है। यानी वह वैसा ही करने की कोशिश करता है जैसा उसने मॉडल को करते हुए देखा था।
4. अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation / Reinforcement of behaviour) - (b) अंतिम चरण में यह तय होता है कि व्यक्ति उस सीखे गए व्यवहार को भविष्य में दोहराएगा या नहीं। यदि मॉडल के समान व्यवहार करने पर व्यक्ति को समाज से तारीफ, पुरस्कार या सकारात्मक 'पुनर्बलन' मिलता है, तो वह उस व्यवहार को अपना लेता है। यदि उसे डांट या सजा मिलती है, तो वह उस व्यवहार को छोड़ देता है।
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Q5. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?
Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत
Explanation:
प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।
इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
- अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
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Q6. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :
Right Answer: संतुलनीकरण
Explanation:
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:
- आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
- उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
- समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
- उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
- संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
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Q7. सर्जनशील बच्चों की पहचान हेतु शिक्षक द्वारा कौन-से परीक्षण प्रशासित किए जा सकते हैं ?
Right Answer: (a), (b) एवं (d)
Explanation:
सर्जनशील (Creative) बच्चों की पहचान करने के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और नवीनता का मापन किया जाता है। दिए गए परीक्षणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(a) आकृति निर्माण परीक्षण (Figure construction test): यह परीक्षण सृजनात्मकता को मापता है। इसमें बच्चे को कुछ बुनियादी आकार (जैसे गोला, त्रिभुज) दिए जाते हैं और उनसे कोई नई और मौलिक आकृति बनाने को कहा जाता है।
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण (Product improvement test): यह भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख परीक्षण है। इसमें बच्चे को कोई साधारण वस्तु या खिलौना दिया जाता है और पूछा जाता है कि इसे और अधिक मजेदार या उपयोगी बनाने के लिए इसमें क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण (Usual uses test): यह विकल्प गलत है। सृजनात्मकता मापने के लिए 'अप्रचलित या नवीन उपयोग परीक्षण' (Unusual uses test) का प्रयोग किया जाता है (जैसे- ईंट के नए-नए उपयोग बताना)। 'प्रचलित' (Usual) उपयोग बताना सामान्य बुद्धि या स्मृति का हिस्सा है, सृजनात्मकता का नहीं।
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण (Picture completion test): यह सृजनात्मकता का एक महत्वपूर्ण अशाब्दिक परीक्षण है। इसमें अधूरी रेखाओं या चित्रों को पूरा करके एक अर्थपूर्ण और मौलिक चित्र बनाने के लिए कहा जाता है।
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Q8. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या
लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:
- (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
- (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
- (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
- (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-सी समावेशी शिक्षा की एक विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह अशक्त बच्चों की विशिष्ट शिक्षा तक सीमित रहती है
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'सभी के लिए शिक्षा' है। यह केवल अशक्त (विकलांग/दिव्यांग) बच्चों तक सीमित नहीं है। समावेशी शिक्षा का अर्थ है—सामान्य बच्चों, अशक्त बच्चों, प्रतिभाशाली बच्चों और समाज के हर वर्ग (विभिन्न भाषा, जाति, धर्म) के बच्चों को एक ही नियमित कक्षा में एक साथ बैठाकर पढ़ाना।
केवल अशक्त बच्चों को अलग से पढ़ाना "विशिष्ट शिक्षा" (Special Education) कहलाता है, जो समावेशी शिक्षा के बिल्कुल विपरीत अवधारणा है। इसलिए यह कथन समावेशी शिक्षा की विशेषता नहीं है।
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Q10. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?
Right Answer: परिपक्वता
Explanation:
परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।
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Q11. निम्नलिखित में से कौन-सी सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: केवल शैक्षिक उपलब्धि को मापना
Explanation:
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation) में "व्यापक" (Comprehensive) शब्द का स्पष्ट अर्थ छात्र के सर्वांगीण विकास (all-round development) का आकलन करना है। इस रूपरेखा के अनुसार मूल्यांकन में शैक्षिक (Scholastic - जैसे गणित, विज्ञान और भाषाएं) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic - जैसे जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल और कला) दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाना अनिवार्य है। केवल अकादमिक प्रदर्शन या शैक्षिक उपलब्धि को मापना CCE प्रणाली के "व्यापक" लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।
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Q12. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रगतिशील शिक्षा का एक घटक नहीं है ?
Right Answer: स्मरण
Explanation:
जॉन डीवी (John Dewey) जैसे शिक्षाविदों द्वारा समर्थित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) रटने (rote learning) और तथ्यों को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने का कड़ा विरोध करती है। स्मरण का मुख्य ध्यान किसी भी जानकारी के व्यावहारिक उपयोग को समझे बिना उसे केवल दोहराने और याद करने पर होता है। यह प्रगतिशील शिक्षा के मूल दर्शन के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली पाठ्यपुस्तक की सामग्री को रटने के बजाय आलोचनात्मक सोच (critical thinking), समस्या-समाधान (problem-solving) और गहरी वैचारिक समझ (conceptual understanding) को प्राथमिकता देती है।
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Q13. श्रवण बाधित बच्चों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुदेशन का तरीका उपयुक्त है?
Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)
Explanation:
व्याख्या: ये सभी तकनीकें क्यों उपयुक्त हैं?
- (a) सांकेतिक भाषा (Sign Language): यह श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचार का सबसे प्राथमिक और प्राकृतिक माध्यम है। इसमें हाथों के संकेतों, चेहरे के हाव-भाव और शरीर की भाषा का उपयोग करके विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
- (b) अंगुली वर्तनी (Finger Spelling): इसमें हाथों की उंगलियों के आकार का उपयोग करके वर्णमाला के अक्षरों को दर्शाया जाता है। यह उन शब्दों (जैसे नाम, विशिष्ट तकनीकी शब्द) के लिए बहुत उपयोगी है जिनका कोई विशिष्ट सांकेतिक चिन्ह नहीं होता।
- (c) ओष्ठ पठन (Lip Reading): इसमें बच्चा वक्ता के होंठों की हलचल को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि क्या कहा जा रहा है। यह बच्चों को समाज में संवाद करने में बहुत मदद करता है।
- (d) संकेतित भाषण (Cued Speech): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें भाषण (speech) को स्पष्ट करने के लिए हाथों के संकेतों (cues) का उपयोग किया जाता है। यह होंठों के आकार (lip shapes) और हाथों के संकेतों को मिलाता है, ताकि बच्चा ध्वनियों के बीच अंतर कर सके जो दिखने में एक जैसे लगते हैं (जैसे 'p' और 'b')।
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Q14. 'लेखन क्षमता का एक विकार जिसमें अधिगमकर्ता को अक्षर निर्माण, वर्तनी, गत्यात्मक समन्वय आदि में कठिनाई होती है' यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिस्ग्राफिया
Explanation:
डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है जो मुख्य रूप से लेखन (writing) से संबंधित होती है।
जैसा कि आपने उल्लेख किया, इस विकार से ग्रसित अधिगमकर्ता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- अक्षर निर्माण (Letter Formation): अक्षरों को सही आकार या बनावट में लिखने में कठिनाई।
- वर्तनी (Spelling): शब्दों की वर्तनी में गलतियाँ करना।
- गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination): हाथ और उंगलियों के सूक्ष्म समन्वय में कमी, जिससे कलम पकड़ने और लिखने में समस्या होती है।
- लेखन की गति: लिखने की गति का बहुत धीमा होना या लिखने के दौरान हाथ में जल्दी थकान महसूस होना।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
- डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह पढ़ने से संबंधित विकार है। इसमें बच्चे को अक्षरों को पहचानने, शब्दों को पढ़ने या वाक्यों को समझने में कठिनाई होती है।
- डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia): यह शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) से संबंधित विकार है। इसमें व्यक्ति को शारीरिक संतुलन बनाने, बोलने या सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों (जैसे बटन लगाना या जूते के फीते बांधना) में कठिनाई होती है। (नोट: लेखन में कठिनाई इसका एक उप-हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्य परिभाषा लेखन विकार के लिए 'डिस्ग्राफिया' ही है।)
- डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia): यह गणित से संबंधित विकार है। इसमें संख्याओं को समझने, गणना (calculation) करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई होती है।
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Q15. निम्नलिखित में से कौन-सी सीखने की बाल केन्द्रित विधि नहीं है ?
Right Answer: प्रदर्शन
Explanation:
शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षण विधियों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और बाल-केंद्रित (Child-centered)।
प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह मुख्य रूप से शिक्षक-केंद्रित होती है। इसमें शिक्षक स्वयं किसी प्रक्रिया, प्रयोग या उपकरण का प्रदर्शन (Demonstrate) करता है, जबकि छात्र उसे ध्यानपूर्वक देखते हैं। यहाँ सीखने की प्रक्रिया में छात्र की भूमिका मुख्य रूप से एक 'दर्शक' (Observer) की होती है, न कि 'सक्रिय सहभागी' (Active participant) की। इसीलिए इसे बाल-केंद्रित नहीं माना जाता।
अन्य विकल्प बाल-केंद्रित क्यों हैं?
(2) क्षेत्र भ्रमण (Field Trip): इसमें छात्र प्रत्यक्ष रूप से वातावरण में जाकर अनुभव प्राप्त करते हैं। यह पूर्णतः अनुभव-आधारित और छात्र-सक्रियता पर केंद्रित है।
(3) अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction): यह व्यक्तिगत गति (Self-pacing) पर आधारित विधि है। इसमें छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री को छोटे-छोटे चरणों में पढ़कर और अभ्यास करके सीखता है। शिक्षक की भूमिका यहाँ केवल एक मार्गदर्शक की होती है।
(4) प्रायोजना (Project Method): यह विधि 'करके सीखने' (Learning by doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें छात्र अपनी रुचि और समस्या समाधान के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक होती है।
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Q16. उच्च माध्यमिक स्तर के अधिगमकर्ताओं के लिए सीखने की कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: अधिगम कार्य स्मृति स्तर पर करना
Explanation:
शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (Memory Level), अवबोध स्तर (Understanding Level), और चिंतन स्तर (Reflective Level)।
- स्मृति स्तर (Memory Level): यह शिक्षण का सबसे निचला स्तर है, जो केवल रटने (Rote Learning) और तथ्यों को याद रखने पर केंद्रित होता है। उच्च माध्यमिक स्तर (11वीं-12वीं कक्षा) के विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं, जहाँ उनकी बौद्धिक क्षमताएं विकसित हो चुकी होती हैं। इस स्तर पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे केवल तथ्यों को याद न करें, बल्कि उनका विश्लेषण करें और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करें। इसलिए, केवल स्मृति स्तर तक सीमित रहना उनके लिए अनुपयुक्त और अपर्याप्त है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये क्यों उपयुक्त हैं?):
(2) ज्ञान की स्वयं खोज करने देना: यह 'डिस्कवरी लर्निंग' (Discovery Learning) पर आधारित है। उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।
(3) कक्षा अन्तःक्रिया को उचित स्थान देना: जब विद्यार्थी चर्चा करते हैं और एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी होती है। यह सामाजिक अधिगम (Social Learning) को बढ़ावा देता है।
(4) शिक्षण-अधिगम विद्यार्थी केन्द्रित होना: आधुनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित (Student-centered) है। इसका अर्थ है कि शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों और उनकी सीखने की गति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल शिक्षक के व्याख्यान पर आधारित।
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Q17. फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त के अनुसार, वह अवस्था जिसमें किशोर विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं, उसे कहा जाता है :
Right Answer: जनन अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) में पांच अवस्थाएं हैं। किशोर अवस्था (adolescence) में होने वाले परिवर्तनों के लिए जनन अवस्था ही जिम्मेदार है:
- जनन अवस्था (Genital Stage): यह अवस्था किशोरावस्था से शुरू होती है और जीवन के अंत तक चलती है। इस चरण की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की कामेच्छा (libido) फिर से जागृत होती है, लेकिन इस बार उसका ध्यान अपने स्वयं के शरीर के बजाय विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने और यौन परिपक्वता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है। किशोरों में सामाजिक और यौन आकर्षण इसी चरण का हिस्सा है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
- लिंग अवस्था (Phallic Stage - 3 से 6 वर्ष): यहाँ बच्चा अपने लिंग के प्रति जागरूक होता है। इसमें 'ओडिपस' (Oedipus) और 'इलेक्ट्रा' (Electra) ग्रंथियाँ विकसित होती हैं।
- गुदा अवस्था (Anal Stage - 1 से 3 वर्ष): इस अवस्था में बच्चा मल-त्याग के नियंत्रण (potty training) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- अव्यक्त अवस्था (Latency Stage - 6 वर्ष से यौवनारंभ तक): यह एक शांत अवस्था है जहाँ यौन भावनाएं दब जाती हैं और बच्चा सामाजिक कौशल और स्कूल के कार्यों पर ध्यान देता है।
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Q18. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?
Right Answer: दर्द परिवर्जन
Explanation:
अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या
मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)।
दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?
दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।
अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?
अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।
- (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
- (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
- (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।
चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।
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Q19. वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धान्त के सही अनुक्रम (ऊपर से नीचे) का चयन कीजिए :
Right Answer: सामान्य कारक -> लघु कारक -> प्रमुख कारक -> विशिष्ट कारक
Explanation:
1. सामान्य कारक (General Factor - g)
- शीर्ष स्तर: पदानुक्रम के सबसे ऊपर सामान्य कारक होता है।
- इसका अर्थ: यह किसी व्यक्ति की समग्र मानसिक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है। यह एक ऐसी सामान्य बुद्धि है जिसका उपयोग व्यक्ति हर प्रकार के मानसिक या संज्ञानात्मक कार्यों (cognitive tasks) में करता है।
2. प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors)
- दूसरा स्तर: सामान्य कारक आगे चलकर दो मुख्य व्यापक श्रेणियों में विभाजित हो जाता है।
- इसका अर्थ: वर्नन ने दो प्रमुख समूह कारक बताए हैं:
- शाब्दिक-शैक्षिक (v:ed): स्कूली शिक्षा, भाषा, पढ़ने-लिखने और गणित से संबंधित क्षमताएं।
- स्थानिक-यांत्रिक (k:m): व्यावहारिक, शारीरिक और यांत्रिक (mechanical) क्षमताएं, जिनमें दिशाओं और आकृतियों की समझ (spatial awareness) शामिल है।
3. लघु समूह कारक (Minor Group Factors)
- तीसरा स्तर: प्रमुख समूह कारक आगे छोटे और अधिक विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित होते हैं।
- इसका अर्थ: उदाहरण के लिए, 'शाब्दिक-शैक्षिक' कारक आगे चलकर मौखिक प्रवाह (verbal fluency), संख्यात्मक क्षमता (numerical ability), या तार्किक सोच जैसे लघु कारकों में बंट सकता है। इसी तरह स्थानिक-यांत्रिक कारक यांत्रिक समझ या हस्त-कौशल में बंट सकता है।
4. विशिष्ट कारक (Specific Factors - s)
- निचला स्तर: पदानुक्रम के सबसे निचले आधार पर विशिष्ट कारक होते हैं।
- इसका अर्थ: ये किसी एक विशेष कार्य या परीक्षण को करने के लिए आवश्यक अत्यंत विशिष्ट क्षमताएं हैं (जैसे बीजगणित के किसी विशेष समीकरण को हल करने की क्षमता या किसी खास मशीन के पुर्जे जोड़ने की क्षमता)।
संक्षेप में, वर्नन का मानना था कि यद्यपि हम सभी में एक अंतर्निहित सामान्य बुद्धि होती है, लेकिन व्यवहार में यह पहले व्यापक कौशल (प्रमुख), फिर संकीर्ण कौशल (लघु), और अंततः विशिष्ट कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल में फ़िल्टर हो जाती है।
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Q20. समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के किस संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है ?
Right Answer: शिक्षा का अधिकार
Explanation:
सही है: भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-A के तहत "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education - RTE) एक मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जाति, धर्म, लिंग या शारीरिक/मानसिक क्षमता के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। समावेशी शिक्षा इसी संवैधानिक अधिकार को धरातल पर लागू करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि दिव्यांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) मुख्यधारा के स्कूलों से बाहर न रहें।
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Q21. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?
Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं
Explanation:
'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।
(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।
(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।
(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।
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Q22. निम्नलिखित में से प्रश्नों का कौन-सा प्रकार विद्यार्थियों के भावों की अभिव्यक्ति एवं तार्किक चिंतन की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: बहु विकल्पात्मक प्रकार
Explanation:
इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार के प्रश्न भावों की अभिव्यक्ति (Expression of feelings) और तार्किक चिंतन (Logical thinking) को जाँचने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
बहु विकल्पात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs): ये प्रश्न 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं। इसमें विद्यार्थी को दिए गए विकल्पों में से केवल एक सही उत्तर चुनना होता है। यहाँ विद्यार्थी के पास अपने विचारों, भावनाओं या तर्क को विस्तार से रखने का कोई अवसर नहीं होता। यह केवल स्मृति (Memory) और पहचान (Recognition) की जाँच करता है, न कि सृजनात्मक या तार्किक चिंतन की। इसीलिए यह "उपयुक्त नहीं" है।
विश्लेषणात्मक (Analytical), समालोचनात्मक (Critical) और विवेचनात्मक (Discussion) प्रकार:
- ये प्रश्न 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
- इनमें छात्र को समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है, अपने तर्क (Logic) देने होते हैं और अपने विचारों (Feelings/Perspective) को विस्तार से लिखना होता है।
- ये तीनों प्रकार उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills - HOTS) विकसित करने के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
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Q23. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता का कारण सामाजिक वातावरण होता है, भौतिक वातावरण नहीं।
Explanation:
(1) सही है: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ ही है कि हर व्यक्ति दूसरे से अलग है, चाहे वह बुद्धि/ज्ञान (Cognitive) के स्तर पर हो या कार्य करने की क्षमता (Psychomotor) के स्तर पर।
(2) सही है: किसी व्यक्ति की प्रजाति (Species) या आनुवंशिकता (Heredity) उसके विकास और विशेषताओं को प्रभावित करती है, जो वैयक्तिक भिन्नता का एक आधार है।
(3) गलत है: यह कथन गलत है क्योंकि यह अधूरा है। वैयक्तिक भिन्नता केवल सामाजिक वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक (भौगोलिक, प्राकृतिक, जलवायु आदि) दोनों प्रकार के वातावरण का परिणाम होती है। भौतिक वातावरण भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, विकास और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। चूँकि यह कथन "भौतिक वातावरण को नकारता है" (not the physical environment), इसलिए यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।
(4) सही है: जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसके अनुभव, सोच और क्षमताएं बदलती हैं। आयु के बढ़ने के साथ-साथ दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता और अधिक स्पष्ट हो जाती है।
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Q24. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।
Explanation:
(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।
(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।
(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।
(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।
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Q25. विद्यार्थियों की समग्र उपलब्धि और प्रवीणता का मूल्यांकन करने के लिए, सीखने की अवधि के अंत में अभिकल्पित मूल्यांकन कहलाता है :
Right Answer: सीखने का मूल्यांकन
Explanation:
मूल्यांकन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है:
- सीखने का मूल्यांकन (Assessment of Learning): यह मूल्यांकन सीखने की अवधि के अंत में (जैसे सत्र के अंत में, फाइनल परीक्षा में) किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र ने निर्धारित समय में कितना और क्या सीखा है। यह आमतौर पर 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) का हिस्सा होता है। चूँकि आपका प्रश्न "अवधि के अंत" की बात कर रहा है, इसलिए सही उत्तर (1) है।
- सीखने के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): यह मूल्यांकन सीखने की प्रक्रिया के दौरान (जैसे क्लास में पढ़ाते समय सवाल पूछना) किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की कमियों को सुधारना होता है। यह 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) का हिस्सा होता है।
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Q26. बच्चों में सामाजीकरण को बढ़ावा देने में शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सहायक नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक परियोजना कार्य देना
Explanation:
सामाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों, और व्यवहारों को सीखते हैं और अन्य लोगों के साथ घुलना-मिलना सीखते हैं। एक शिक्षक का उद्देश्य कक्षा में ऐसे अवसर प्रदान करना होता है जिससे बच्चे एक-दूसरे से जुड़ सकें।
(1) वैयक्तिक परियोजना कार्य देना (Individual Project Work): जब शिक्षक किसी बच्चे को 'व्यक्तिगत' या 'अकेले' करने वाला प्रोजेक्ट देता है, तो बच्चा केवल अपने आप तक सीमित रहता है। इसमें उसे अन्य बच्चों के साथ बातचीत या सहयोग करने का मौका नहीं मिलता। इसलिए, यह सामाजीकरण को बढ़ावा देने में सहायक नहीं है।
(2) सामाजिक जिम्मेदारियाँ सौंपना: (जैसे- क्लास मॉनिटर बनाना या ग्रुप लीडर बनाना) इससे बच्चों में नेतृत्व और सहयोग की भावना आती है, जो सामाजीकरण को बढ़ाता है।
(3) सह-पाठ्यगामी गतिविधियों का आयोजन करना: (जैसे- खेलकूद, नाटक, या सांस्कृतिक कार्यक्रम) इनमें बच्चे समूह में काम करते हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास होता है।
(4) सामाजिक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करना: बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना सामाजीकरण का प्रत्यक्ष तरीका है।
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Q27. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: थायमस ग्रंथि
Explanation:
मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं।
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Q28. निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: (a), (c) एवं (d)
Explanation:
इस प्रश्न को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी "लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ" (Gender Biased Practices) शैक्षिक अभ्यासों (Classroom Practices) में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए।
यहाँ प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण दिया गया है:
- (a) सजातीय समूहन (Homogeneous Grouping): लिंग के आधार पर लड़के और लड़कियों के अलग-अलग समूह बनाना (जैसे- लड़कों का अलग ग्रुप, लड़कियों का अलग ग्रुप)। यह एक पक्षपातपूर्ण क्रिया है, जो बच्चों में दूरियां बढ़ाती है। इसे कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु (Gender-Neutral Content): ऐसी पाठ्यपुस्तकें या सामग्री जिसमें लड़के और लड़कियों को समान रूप से प्रस्तुत किया गया हो (जैसे- पाठ में महिला को डॉक्टर और पुरुष को खाना बनाते हुए दिखाना)। यह एक सकारात्मक और अच्छी क्रिया है। इसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए (यह पक्षपातपूर्ण नहीं है)।
- (c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन (Stereotypical Vocational Guidance): बच्चों को उनके लिंग के आधार पर करियर की सलाह देना (जैसे- लड़कियों को कहना कि तुम गृह विज्ञान या नर्सिंग चुनो, और लड़कों को इंजीनियरिंग या सेना में जाने को कहना)। यह पूरी तरह से लैंगिक पक्षपात है, इसे शिक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति (Biased Attitude of Teacher): शिक्षक का यह सोचना कि "लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में।" यह पूर्वाग्रह बच्चों के विकास को रोकता है, इसलिए इसे भी कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
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Q29. निम्नलिखित में से कौन आनुवंशिकता से प्रभावित नहीं होता ?
Right Answer: अभिवृत्ति
Explanation:
यहाँ सभी विकल्पों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति आनुवंशिकता (Heredity) से प्रभावित क्यों नहीं होती:
- (1) अभिक्षमता (Aptitude): अभिक्षमता का अर्थ है किसी विशिष्ट कार्य या क्षेत्र (जैसे- संगीत, गणित, या कला) में कौशल सीखने की जन्मजात क्षमता या योग्यता। यह काफी हद तक आनुवंशिकता और जैविक कारकों से प्रभावित होती है।
- (2) अभिवृत्ति (Attitude): अभिवृत्ति (या दृष्टिकोण) किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक सोचने और महसूस करने का एक तरीका है। यह पूरी तरह से अर्जित (Learned) होती है। बच्चा अपने परिवार, समाज, संस्कृति और अनुभवों (वातावरण) से सीखता है कि उसे किस चीज़ के प्रति कैसा नज़रिया रखना है। इसका आनुवंशिकता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
- (3) संवेग (Emotion): संवेगात्मक प्रवृत्तियाँ (जैसे- जल्दी क्रोधित होना, शांत रहना, या डरना) व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) से जुड़ी होती हैं। मूल स्वभाव का एक बड़ा हिस्सा आनुवंशिक बनावट और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर निर्भर करता है।
- (4) अभिरुचि (Interest): यद्यपि अभिरुचि वातावरण से बहुत अधिक प्रभावित होती है, लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध) में पाया गया है कि कुछ चीज़ों में रुचि रखने का झुकाव (जैसे- अंतर्मुखी या बहिर्मुखी गतिविधियाँ) व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना से भी थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
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Q30. सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a) एवं (c)
Explanation:
- कथन (a) "बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं" – यह कथन सत्य नहीं है। बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और वातावरण (Environment) दोनों की परस्पर क्रिया (Interaction) महत्वपूर्ण होती है। केवल एक को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। अच्छा वातावरण मिलने पर बुद्धि का बेहतर विकास होता है।
- कथन (b) "लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। महिला या पुरुष होने से किसी की बुद्धि कम या ज़्यादा नहीं होती। आधुनिक मनोविज्ञान यह स्पष्ट मानता है कि लिंग के आधार पर बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता।
- कथन (c) "तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है" – यह कथन पूरी तरह सत्य नहीं माना जाता। स्मरणशक्ति (Memory) और बुद्धि (Intelligence) दो अलग-अलग मानसिक क्षमताएं हैं। कोई व्यक्ति चीज़ों को बहुत जल्दी रट या याद रख सकता है (तीव्र स्मरणशक्ति), लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी तार्किक या समस्या-समाधान की क्षमता (बुद्धि) भी उतनी ही तीव्र हो। इसलिए तीव्र बुद्धि को केवल तीव्र स्मरणशक्ति का परिचायक नहीं माना जा सकता।
- कथन (d) "बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे स्टर्न) के अनुसार, बुद्धि की परिभाषा ही यही है कि व्यक्ति नई परिस्थितियों और वातावरण में खुद को कितनी कुशलता से ढाल या समायोजित (Adjust) कर पाता है।
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Hindi Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q1. विलोम की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: आकृष्ट - विकृष्ट
Explanation:
व्याख्या:
- आकृष्ट (सही विकल्प): 'आकृष्ट' का विलोम 'विकृष्ट' नहीं, बल्कि 'अनाकृष्ट' या 'विकर्षित' होता है। (आकृष्ट का अर्थ है 'खींचा हुआ' या 'आकर्षित', जबकि विकृष्ट का अर्थ होता है 'खींचा हुआ' ही; अतः ये विलोम नहीं हैं।)
अन्य विकल्प क्यों संगत हैं:
- (2) आह्वान - अनाह्वान: यह सही है (आह्वान का अर्थ बुलाना और अनाह्वान का अर्थ न बुलाना)।
- (3) कलंकित - निष्कलंक: यह सही है (कलंकित का अर्थ दाग लगा हुआ और निष्कलंक का अर्थ दाग रहित)।
- (4) ऐहिक - पारलौकिक: यह सही है (ऐहिक का अर्थ इस लोक से संबंधित और पारलौकिक का अर्थ परलोक से संबंधित)।
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Q2. वर्णों की ध्वनिगत विशेषताओं के संदर्भ में असंगत चुनिए :
Right Answer: ऋ - अग्र, संवृत, वृत्तमुखी
Explanation:
व्याख्या: स्वरों का वर्गीकरण ओठों की स्थिति (होठों के आकार) के आधार पर दो प्रकार से होता है:
- वृत्तमुखी (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं (उ, ऊ, ओ, औ)।
- अवृत्तमुखी (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल नहीं होते (अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ)।
विकल्प (2) में 'ऋ' को वृत्तमुखी बताया गया है, जो कि गलत है। 'ऋ' का उच्चारण करते समय होंठ गोल नहीं होते, इसलिए यह अवृत्तमुखी स्वर है (साथ ही यह अग्र और संवृत है)।
अन्य विकल्प सही क्यों हैं:
- (1) उ - पश्च, संवृत, वृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च (पिछले) भाग से बोला जाता है, उच्चारण में मुख लगभग बंद (संवृत) रहता है और होंठ गोल (वृत्तमुखी) होते हैं।
- (3) अ - मध्य, ह्रस्व, उदासीन: यह जिह्वा के मध्य भाग से बोला जाता है, एकमात्रिक (ह्रस्व) है और इसे 'उदासीन स्वर' भी कहा जाता है।
- (4) आ - पश्च, विवृत, अवृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च भाग से बोला जाता है, मुख पूरा खुलता है (विवृत) और होंठ गोल नहीं होते (अवृत्तमुखी)।
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Q3. हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :
Right Answer: शिक्षा तथा उपाधियाँ
Explanation:
व्याख्या: एक सफल और श्रेष्ठ हिंदी अध्यापक की 'विशिष्ट विशेषताओं' (Qualities/Characteristics) में उसके आंतरिक गुण, ज्ञान और कौशल आते हैं।
- (1) साहित्य का ज्ञान, (2) भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान और (3) हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों एक हिंदी शिक्षक की व्यावहारिक और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो उसे कक्षा में प्रभावी रूप से पढ़ाने के योग्य बनाती हैं।
- (4) शिक्षा तथा उपाधियाँ (Degrees and Qualifications): ये शिक्षक बनने के लिए आवश्यक 'अनिवार्य योग्यताएँ' (Eligibility criteria) तो हैं, लेकिन ये उसकी "विशिष्ट विशेषताएँ" या शिक्षण कौशल नहीं हैं। मात्र डिग्री होने से कोई व्यक्ति एक अच्छा शिक्षक नहीं बन जाता; एक अच्छे शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान और पढ़ाने की शैली (methods) से होती है।
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Q4. निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द समूह का चयन कीजिए :
Right Answer: सीधा साधा, अठोतर, उहापोह
Explanation:
व्याख्या:
- सीधा साधा: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'सीधा-सादा' होता है।
- अठोतर: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'अठोत्तर' (अठ् + उत्तर = आठ अधिक) होता है।
- उहापोह: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'ऊहापोह' (असमंजस की स्थिति) होता है, जिसमें दीर्घ 'ऊ' का प्रयोग होता है।
अन्य विकल्प क्यों शुद्ध हैं:
- विकल्प (2): 'दाशरथि' (दशरथ + इ), 'स्थायित्व' और 'विद्यार्थिपरिषद्' (समास होने पर 'विद्यार्थी' की 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' हो जाती है, जैसे- मन्त्रिपरिषद्) सभी शुद्ध हैं।
- विकल्प (3): 'सुधीजन' (सुधी + जन), 'प्रेयसी' और 'निजीकरण' सभी वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
- विकल्प (4): 'वेश्या', 'शशिभूषण' और 'शक्तीकरण' भी शुद्ध हैं (ध्यान दें: 'करण' प्रत्यय जुड़ने पर 'शक्ति' की ह्रस्व 'इ' की मात्रा दीर्घ 'ई' में बदल जाती है, जैसे- शुद्धीकरण, स्पष्टीकरण)।
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Q5. समास की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: श्रमसाध्य - करण तत्पुरुष
Explanation:
व्याख्या: सभी विकल्पों का समास विग्रह इस प्रकार है:
- श्रमसाध्य (सही): इसका विग्रह है "श्रम से साध्य" (अर्थात् जिसे श्रम के द्वारा साधा या पूरा किया जा सके)। यहाँ 'से' (के द्वारा) साधन का बोध करा रहा है, इसलिए यहाँ करण तत्पुरुष समास है।
अन्य विकल्प असंगत (गलत) क्यों हैं:
(1) चक्षुश्रवा: इसका विग्रह है "चक्षुओं (आँखों) से सुनता है जो" अर्थात् सर्प (साँप)। इसमें कोई पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो रहा है, इसलिए इसमें बहुव्रीहि समास है (इतरेतर द्वन्द्व नहीं)।
(2) आपादमस्तक: इसका विग्रह है "पाद (पैर) से लेकर मस्तक (सिर) तक"। इसमें प्रथम पद 'आ' उपसर्ग/अव्यय है, इसलिए यहाँ अव्ययीभाव समास है (बहुव्रीहि नहीं)।
(3) जातिगत: इसका विग्रह है "जाति को गत (गया हुआ)"। यहाँ 'को' विभक्ति का लोप हुआ है, इसलिए इसमें कर्म तत्पुरुष समास है (अधिकरण तत्पुरुष नहीं)।
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Q6. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: जब वह समकालीन भी हो और कालातीत भी।
Explanation:
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है: "बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता... नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है (यानी समकालीनता), पर अगर वह समय के पार न देख पाये (यानी कालातीत न हो), तो टिकाऊ नहीं हो सकता।"
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Q9. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: नएपन एवं निरंतरता दोनों को चुनना
Explanation:
गद्यांश की दूसरी ही पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: "साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।"
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Q10. निम्नलिखित में से मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है :
Right Answer: उचित लय और गति प्रदान करना
Explanation:
'लय' (Rhythm), 'आरोह-अवरोह' (आवाज़ का उतार-चढ़ाव) और 'स्वर' का प्रयोग सस्वर वाचन (Reading Aloud) यानी बोल-बोल कर पढ़ने में किया जाता है। मौन वाचन में चूँकि आवाज़ नहीं निकाली जाती और होंठ भी नहीं हिलते, इसलिए इसमें 'लय' (Rhythm) का कोई काम नहीं होता। अतः यह मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है।
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Q11. किस विकल्प में उपसर्ग विभाजन नियमानुसार है ?
Right Answer: निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
Explanation:
(3) निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार, 'निश्', 'निष्' और 'निस्' से शुरू होने वाले शब्दों में मूल रूप से 'निस्' उपसर्ग ही होता है। संधि नियमों के कारण विसर्ग या 'स्' का रूप बदलकर 'श्' या 'ष्' हो जाता है:
- निश्शुल्क: निस् + शुल्क (स् का श् होना)
- निष्पक्ष: निस् + पक्ष (स् का ष् होना)
- निस्स्वार्थ: निस् + स्वार्थ अतः इस विकल्प में उपसर्ग का विभाजन पूर्णतः नियमानुसार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(1) अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि सभी शब्दों में 'अप' उपसर्ग नहीं है:
- अपरिग्रह: अपि/अ + परिग्रह (यहाँ 'अ' उपसर्ग है, 'अप' नहीं)।
- अपरोक्ष: अ + परोक्ष (जो प्रत्यक्ष न हो - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
- अपर्ण: अ + पर्ण (बिना पत्तों का - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
(2) आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि ये शब्द उपसर्ग से नहीं, बल्कि प्रत्यय के योग से बने हैं:
- आरण्यक: अरण्य + अक (प्रत्यय)
- आवश्यक: अवश + यक/इक (प्रत्यय)
- आधुनिक: अधुना + इक (प्रत्यय) इनमें 'आ' उपसर्ग नहीं है, बल्कि प्रत्यय लगने के कारण आदि-स्वर (पहला अक्षर) 'अ' से 'आ' में बदल गया है।
(4) व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग यह विकल्प व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है क्योंकि हिंदी या संस्कृत में 'वी' (बड़ी ई) नाम का कोई उपसर्ग नहीं होता। इन सभी शब्दों में 'वि' (छोटी इ) उपसर्ग है:
- व्याधि: वि + आधि
- वीक्षण: वि + ईक्षण (यहाँ 'वि' का 'इ' और 'ईक्षण' का 'ई' मिलकर दीर्घ संधि से 'वीक्षण' बना है, पर मूल उपसर्ग 'वि' ही है)।
- व्यतिरेक: वि + अतिरेक
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Q12. संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए :
Right Answer: दैत्यारि, गत्यानुसार, अगन्याशय - यण संधि
Explanation:
विकल्प (1) का विश्लेषण (अनुपयुक्त विकल्प)
- गत्यानुसार: गति + अनुसार = गत्यानुसार ($इ + अ = य$) — यण संधि (यह सही है)
- अग्न्याशय: अग्नि + आशय = अग्न्याशय ($इ + आ = या$) — यण संधि (यह भी सही है)
दैत्यारि: दैत्य + अरि = दैत्यारि ($अ + अ = आ$) — यहाँ दीर्घ स्वर संधि है, न कि यण संधि।
नोट: चूँकि 'दैत्यारि' में दीर्घ संधि है, इसलिए यह पूरा समूह 'यण संधि' के अंतर्गत आना गलत है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण (जो कि सही हैं)
(2) दीर्घ संधि (सही)
- मिताहार: मित + आहार = मिताहार ($अ + आ = आ$)
- विकलांग: विकल + अंग = विकलांग ($अ + अ = आ$)
- भूर्ध्व: भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व ($ऊ + ऊ = ऊ$)
(3) व्यंजन संधि (सही)
- दिग्विजय: दिक् + विजय = दिग्विजय (क का ग में परिवर्तन)
- अब्ज: अप् + ज = अब्ज (प का ब में परिवर्तन)
- वृहन्नेत्र: वृहत् + नेत्र = वृहन्नेत्र (त का न में परिवर्तन)
(4) विसर्ग संधि (सही)
- वयोवृद्ध: वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
- पुरोधा: पुरः + धा = पुरोधा
- प्रादुर्भूत: प्रादुः + भूत = प्रादुर्भूत
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Q13. किस विकल्प में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग नहीं हुआ है ?
Right Answer: जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया।
Explanation:
सही विकल्प का विश्लेषण:
(1) जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया। (सार्वनामिक विशेषण नहीं है)
- क्यों? इस वाक्य में 'जिसने' और 'वह' सर्वनाम (Pronoun) के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, न कि विशेषण के रूप में। यह एक मिश्र वाक्य है जहाँ 'जिसने... वह' संबंधवाचक सर्वनाम का काम कर रहे हैं। इनके तुरंत बाद कोई संज्ञा शब्द नहीं आ रहा है जिसकी ये विशेषता बताएँ।
अन्य विकल्पों में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग (जो संगत हैं):
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करता है या उसकी विशेषता बताता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
(2) यह पुस्तक किससे मँगवाऊँ।
- यहाँ 'यह' सर्वनाम 'पुस्तक' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बता रहा है (निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
(3) ऐसे व्यक्ति पर कभी विश्वास मत करो।
- यहाँ 'ऐसे' सर्वनाम 'व्यक्ति' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है (यौगिक सार्वनामिक विशेषण)।
(4) आपके घर से कल कोई नौकर आया था।
- यहाँ 'कोई' सर्वनाम 'नौकर' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी अनिश्चितता को दर्शा रहा है (अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
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Q14. प्रत्यय की दृष्टि से संगत विभाजन चुनिए :
Right Answer: मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय
Explanation:
(1) मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय (संगत)
- ये सभी शब्द तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत 'अ' प्रत्यय के योग से बने हैं, जहाँ आदि स्वर (पहले अक्षर की मात्रा) में वृद्धि होती है:
- मिथुन + अ = मैथुन ($इ/ई \rightarrow ऐ$)
- शुचि + अ = शौच ($उ/ऊ \rightarrow औ$)
- रघु + अ = राघव ($अ \rightarrow आ$, और अंतिम 'उ' का 'व्' हो जाता है)
अन्य विकल्प क्यों असंगत (गलत) हैं?
(2) फिकैत, डकैत, लड़ैत - 'एत' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ऐत' प्रत्यय लगा है, 'एत' नहीं (मात्राओं का अंतर है—फेंक + ऐत = फिकैत, डाका + ऐत = डकैत, लड़ना + ऐत = लड़ैत)।
(3) नारदीय, स्थानीय, मानवीय - 'अनीय' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ईय' प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है, 'अनीय' नहीं (नारद + ईय = नारदीय, स्थान + ईय = स्थानीय, मानव + ईय = मानवीय)।
(4) कौशेय, सौजन्य, कौमार्य - 'एय' प्रत्यय (असंगत)
- इस विकल्प में मिले-जुले प्रत्यय हैं:
- कौशेय में 'एय' प्रत्यय है (कोश + एय)।
- परंतु सौजन्य (सुजन + य) और कौमार्य (कुमार + य) में 'य' प्रत्यय लगा है, 'एय' नहीं। इसलिए यह विभाजन पूरी तरह संगत नहीं है।
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Q15. वाक्य में प्रयुक्त क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
Right Answer: मदारी अनेक करतब दिखलाकर बच्चों को ललचाता है - अकर्मक क्रिया
Explanation:
क्यों असंगत है? इस वाक्य में 'ललचाता है' एक सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) है, अकर्मक नहीं। वाक्य में क्रिया का फल 'बच्चों' (कर्म) पर पड़ रहा है। यदि हम प्रश्न करें "मदारी किसे ललचाता है?", तो उत्तर मिलता है "बच्चों को"। इसलिए यह विकल्प गलत (असंगत) दिया गया है।
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English Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q11. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: intensive and extensive
Explanation:
In English language teaching pedagogy (which is standard for teaching exams like CTET, HTET, and UPTET), the listening skill is categorized exactly like the reading skill:
- Intensive listening: This focuses on careful attention to specific details, sounds, words, or grammar. The goal is accuracy and language focus (e.g., listening to a short dialogue to hear specific pronunciation or answer a direct question).
- Extensive listening: This involves listening to longer, more generalized materials for overall understanding, fluency, and enjoyment without worrying about understanding every single word (e.g., listening to an English podcast, story, or movie).
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Q12. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: aural-oral
Explanation:
Aural-oral skill involves training the learner to listen for the English speech sounds including stress and intonation patterns.
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Q13. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: prescriptive
Explanation:
J.C. Nesfield's grammar books (such as English Grammar: Past and Present) are classic examples of prescriptive grammar.
Here is why:
- Prescriptive Grammar: This approach lays down strict rules about how a language should or must be used. It focuses on what is grammatically "correct" versus "incorrect," often based on traditional or classical rules. Nesfield's books were written exactly for this purpose—to teach students the rigid, formal rules of Standard English.
Why the other options are incorrect:
(1) Universal Grammar: This is a modern linguistic theory (proposed by Noam Chomsky) suggesting that the ability to learn grammar is hard-wired into the human brain and that all human languages share a common structural basis.
(2) Cognitive Grammar: This is a psychological approach to language that argues grammar and meaning are deeply tied to human cognition and how we perceive the world.
(3) Descriptive Grammar: This is the modern linguistic approach that observes and describes how native speakers actually use the language in real life, without judging it as "right" or "wrong." Nesfield did the exact opposite of this.
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Q14. Choose the correct option:
Right Answer: A is true; B is false
Explanation:
In general, print materials are:
- Portable – Books and notes can be carried easily.
- Easily available – They are widely accessible in libraries, bookstores, and schools.
- Cost-effective – Especially when compared with many digital devices and multimedia resources.
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Q15. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: multilingual resources
Explanation:
When learners use their native language (mother tongue) to understand, analyze, or discuss complex material in a second language (like an English poem), this teaching approach is known as using the mother tongue as a "resource." In modern language pedagogy, this practice is often called "Translanguaging" or utilizing multilingual resources to help students grasp difficult concepts in the target language.
Why the other options are incorrect:
- (1) evaluative comprehension: This refers to making judgments or forming opinions about a text. While discussing a poem might involve evaluation, the specific act of using a native language to do so highlights the use of a multilingual strategy, not just the act of evaluating.
- (3) pre-reading skills: These are activities done before reading a text to prepare the learner (like looking at titles to predict the story or learning key vocabulary). Discussing the meaning of a poem usually happens during or after reading.
- (4) first language acquisition: This refers to the natural, subconscious process by which infants and young children learn their very first language from birth. It is a developmental milestone, not a teaching strategy used in a classroom to learn a second language.
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Reasoning (10 Questions)
Q1. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए
Right Answer: वृत्त
Explanation:
जिस प्रकार एक वर्ग (Square) का निर्माण सीधी रेखाओं (Lines) से मिलकर होता है (अर्थात वर्ग की बाहरी सीमा सीधी रेखाएँ होती हैं), ठीक उसी प्रकार एक वृत्त (Circle) का निर्माण चाप (Arc) से होता है (वृत्त की परिधि या बाहरी सीमा एक निरंतर चाप होती है)।
गोला (Sphere) और गेंद (Ball) 3D आकृतियाँ हैं, जबकि रेखा, वर्ग, चाप और वृत्त 2D ज्यामितीय आकृतियाँ (Geometric shapes) हैं। इसलिए 'वृत्त' ही सबसे सटीक उत्तर है।
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Q2. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: AYBZC
Explanation:
हल करने का तरीका:
इस शृंखला में प्रत्येक पद के अक्षरों के बीच एक निश्चित पैटर्न चल रहा है। आइए प्रत्येक पद के अक्षरों की तुलना उनके स्थानों (पहले, दूसरे, तीसरे आदि) के आधार पर करें:
- पहला अक्षर (-3 का पैटर्न): M (13) ➔ J (10) ➔ G (7) ➔ D (4) अगला अक्षर: D (4) - 3 = A (1)
- दूसरा अक्षर (+2 का पैटर्न): Q (17) ➔ S (19) ➔ U (21) ➔ W (23) अगला अक्षर: W (23) + 2 = Y (25)
- तीसरा अक्षर (-3 का पैटर्न): N (14) ➔ K (11) ➔ H (8) ➔ E (5) अगला अक्षर: E (5) - 3 = B (2)
- चौथा अक्षर (+2 का पैटर्न): R (18) ➔ T (20) ➔ V (22) ➔ X (24) अगला अक्षर: X (24) + 2 = Z (26)
- पाँचवाँ अक्षर (-3 का पैटर्न): O (15) ➔ L (12) ➔ I (9) ➔ F (6) अगला अक्षर: F (6) - 3 = C (3)
इन सभी अक्षरों को मिलाने पर, श्रेणी का अगला पद AYBZC बनता है।
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Q3. निम्न संख्या श्रेणी में लुप्त पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 65
Explanation:
हल करने का तरीका (Step-by-step logic):
यह संख्या श्रेणी एक विशेष पैटर्न का पालन कर रही है। प्रत्येक पद प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3...) के घन (cube) में 1 जोड़ने पर प्राप्त हो रहा है। इसका सूत्र $n^3 + 1$ है:
- पहला पद: $1^3 + 1 = 1 + 1 = 2$
- दूसरा पद: $2^3 + 1 = 8 + 1 = 9$
- तीसरा पद: $3^3 + 1 = 27 + 1 = 28$
- चौथा पद (लुप्त): $4^3 + 1 = 64 + 1 = 65$
- पाँचवाँ पद: $5^3 + 1 = 125 + 1 = 126$
- छठा पद: $6^3 + 1 = 216 + 1 = 217$
- सातवाँ पद: $7^3 + 1 = 343 + 1 = 344$
अतः, पैटर्न के अनुसार प्रश्नवाचक चिह्न (?) के स्थान पर 65 आएगा।
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Q4. A, P, R, X, Y और Z एक पंक्ति में बैठे हुए हैं। Y और Z मध्य में हैं और A तथा P अन्तिम शीर्षों पर हैं। R, A के एकदम बायीं ओर है। P के एकदम दायीं ओर कौन बैठा हुआ है ?
Right Answer: X
Explanation:
1. पंक्ति निर्धारित करें चूँकि कुल 6 व्यक्ति हैं, इसलिए पंक्ति में 6 स्थान होंगे: _ _ _ _ _ _
2. अंतिम सिरों पर व्यक्तियों को बिठाएं हमें प्रश्न में बताया गया है कि A और P अन्तिम शीर्षों (सिरों) पर हैं। संभावना 1: P _ _ _ _ A संभावना 2: A _ _ _ _ P
3. R का स्थान और सही सिरे निर्धारित करें यह दिया गया है कि R, A के एकदम बायीं ओर है। यदि A पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठा होता, तो उसके बायीं ओर R के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसलिए, A को अंतिम स्थान (एकदम दायीं ओर) पर ही होना चाहिए, जिससे यह तय हो जाता है कि P पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठेगा। व्यवस्था: P _ _ _ R A
4. मध्य के व्यक्तियों को बिठाएं हमें पता है कि Y और Z मध्य में हैं (यानी तीसरे और चौथे स्थान पर)। व्यवस्था: P _ [Y या Z] [Z या Y] R A
5. बचा हुआ स्थान भरें अब केवल X बचा है, और P के ठीक बगल में केवल एक ही स्थान (दूसरा स्थान) खाली है। अंतिम व्यवस्था: P X [Y/Z] [Z/Y] R A
निष्कर्ष: इस अंतिम व्यवस्था से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि P के एकदम दायीं ओर X बैठा हुआ है।
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Q6. रेखा 10 किमी सीधे चलती है और फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है
Right Answer: 5 किमी
Explanation:
मान लीजिए रेखा अपने प्रारंभिक बिंदु से उत्तर (North) दिशा की ओर चलना शुरू करती है। (आप कोई भी दिशा मान सकते हैं, अंत में दूरी समान ही आएगी)।
कदम-दर-कदम रेखा की यात्रा:
- "रेखा 10 किमी सीधे चलती है"
- रेखा उत्तर की ओर 10 किमी चली।
- (कुल दूरी: उत्तर = 10 किमी)
- "फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है"
- उत्तर से दाएँ मुड़ने का मतलब है पूर्व (East) की ओर मुड़ना।
- वह पूर्व की ओर 10 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 5 किमी चलती है" (पहला बायाँ मोड़)
- पूर्व से बाएँ मुड़ने का मतलब है वापस उत्तर (North) की ओर मुड़ना।
- वह उत्तर की ओर 5 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 + 5 = 15 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (दूसरा बायाँ मोड़)
- उत्तर से बाएँ मुड़ने का मतलब है पश्चिम (West) की ओर मुड़ना।
- वह पश्चिम की ओर 15 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 15 किमी। पूर्व में वह 10 किमी थी, लेकिन पश्चिम में 15 किमी आ गई, यानी प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की तरफ 5 किमी हो गई।)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (तीसरा बायाँ मोड़)
- पश्चिम से बाएँ मुड़ने का मतलब है दक्षिण (South) की ओर मुड़ना।
- वह दक्षिण की ओर 15 किमी चली।
अंतिम स्थिति का विश्लेषण:
- उत्तर-दक्षिण (Vertical) दूरी: वह कुल 15 किमी उत्तर की ओर गई थी (स्टेप 1 में 10 किमी + स्टेप 3 में 5 किमी) और अंत में 15 किमी दक्षिण की ओर आ गई। यानी उत्तर-दक्षिण की दूरी 15 - 15 = 0 हो गई। वह अपने प्रारंभिक बिंदु वाली क्षैतिज रेखा (horizontal line) पर आ गई है।
- पूर्व-पश्चिम (Horizontal) दूरी: वह 10 किमी पूर्व की ओर गई थी, लेकिन फिर 15 किमी पश्चिम की ओर आ गई।
- अतः प्रारंभिक बिंदु से उसकी दूरी = 15 किमी - 10 किमी = 5 किमी (प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की दिशा में)।
निष्कर्ष: वह अपने प्रारंभिक बिंदु से 5 किमी की दूरी पर है।
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Q7. पाँच व्यक्ति P, Q, R, S, और T एक अखबार पढ़ते हैं।
Right Answer: S
Explanation:
कथनों का विश्लेषण:
- "जो व्यक्ति सर्वप्रथम पढ़ता है, वह R को दे देता है।"
- इसका मतलब है कि R अखबार पढ़ने वाला दूसरा व्यक्ति है।
- क्रम: [1] [R] [3] [4] [5]
- "जो सबसे आखिरी में पढ़ता है, वो P से लेता है।"
- सबसे आखिरी व्यक्ति (5वाँ) अखबार P से लेता है, जिसका मतलब है कि P 4थे स्थान पर है।
- क्रम: [1] [R] [3] [P] [5]
- "T पढ़ने में प्रथम या अन्तिम नहीं है।"
- T पहले [1] और पाँचवें [5] स्थान पर नहीं आ सकता।
- दूसरा और चौथा स्थान पहले ही (R और P) से भरा हुआ है, इसलिए T के लिए केवल तीसरा [3] स्थान बचता है।
- क्रम: [1] [R] [T] [P] [5]
- "P और Q के बीच दो पाठक थे।"
- P चौथे स्थान पर है। P और Q के बीच 2 पाठक तभी हो सकते हैं जब Q पहले [1] स्थान पर हो (ताकि बीच में दूसरे और तीसरे स्थान वाले पाठक आ सकें)।
- क्रम: [Q] [R] [T] [P] [5]
- अंतिम पाठक कौन है?
- अब हमारे पास केवल एक व्यक्ति S बचा है और एक ही स्थान (5वाँ/आखिरी) खाली है।
- इसलिए, S आखिरी में अखबार पढ़ेगा।
- पूरा क्रम: Q ➞ R ➞ T ➞ P ➞ S
निष्कर्ष: सबसे आखिरी में अखबार S पढ़ता है।
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Q8. A, C का पिता है और D, B का पुत्र है। E, A का भ्राता है। C, D की बहन है। B, E से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
Right Answer: साली/भाभी
Explanation:
प्रश्न के कथनों का विश्लेषण:
- "A, C का पिता है"
- A पुरुष है और C का पिता है।
- "C, D की बहन है"
- C (महिला) और D भाई-बहन हैं।
- चूँकि A, C का पिता है, इसलिए A, D का भी पिता होगा।
- "D, B का पुत्र है"
- D, B का बेटा है।
- हमने ऊपर देखा कि D का पिता A है। अगर D का पिता A है और D, B का भी पुत्र है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि B, D की माता है।
- इससे यह साबित होता है कि A और B पति-पत्नी हैं (A पति है और B पत्नी है)।
- "E, A का भाई है"
- E पुरुष है।
निष्कर्ष (B का E से संबंध):
- B, A की पत्नी है।
- E, A का भाई है।
- इसलिए, B, E के भाई की पत्नी है।
- भाई की पत्नी रिश्ते में भाभी (Sister-in-law) लगती है।
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Q9. एक निश्चित कूट भाषा में "sun shines brightly" को "ba lo sul", "houses are brightly lit" को "kado ula ari ba" और "light comes from sun" को "dopi kup lo nro" लिखा जाता है। "sun" और "brightly" के लिए क्रमशः किन कूट शब्दों को लिखा गया है ?
Right Answer: lo, ba
Explanation:
आइए दिए गए कथनों को देखते हैं:
- sun shines brightly = ba lo sul
- houses are brightly lit = kado ula ari ba
- light comes from sun = dopi kup lo nro
चरण 1: "brightly" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (2) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "brightly" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "ba" समान है। इसलिए, brightly = ba
चरण 2: "sun" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (3) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "sun" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "lo" समान है। इसलिए, sun = lo
निष्कर्ष: प्रश्न में क्रमशः "sun" और "brightly" के लिए कूट शब्द पूछे गए हैं (यानी पहले sun और फिर brightly)।
- sun = lo
- brightly = ba
अतः सही युग्म lo, ba है।
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Q10. यदि 10 दिसम्बर, 2022 को शनिवार था, तो 8 दिसम्बर, 2024 को कौन-सा दिन होगा ?
Right Answer: रविवार
Explanation:
चरण 1: 10 दिसम्बर 2023 का दिन ज्ञात करें
- एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 1 विषम दिन (odd day)।
- 10 दिसम्बर 2022 से 10 दिसम्बर 2023 तक जाने पर 1 विषम दिन जुड़ता है।
- शनिवार + 1 दिन = रविवार। (यानी 10 दिसम्बर 2023 को रविवार था)।
चरण 2: 10 दिसम्बर 2024 का दिन ज्ञात करें
- 2024 एक लीप वर्ष (Leap year) है क्योंकि यह 4 से पूर्णतः विभाजित होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें फरवरी 29 दिन की होगी।
- एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 2 विषम दिन।
- 10 दिसम्बर 2023 से 10 दिसम्बर 2024 तक जाने पर 2 विषम दिन जुड़ते हैं।
- रविवार + 2 दिन = मंगलवार। (यानी 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार होगा)।
चरण 3: 8 दिसम्बर 2024 का दिन निकालें
- हमें पता है कि 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार है।
- 8 दिसम्बर, 10 दिसम्बर से ठीक 2 दिन पहले आता है।
- मंगलवार - 2 दिन = रविवार।
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Mathematics (10 Questions)
Haryana GK Questions (10 Questions)
Q1. हरियाणा लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?
Right Answer: दरबारी लाल गुप्ता
Explanation:
1 नवंबर 1966 को जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) का भी गठन किया गया था। इस नवनिर्मित आयोग के प्रथम अध्यक्ष (First Chairman) श्री दरबारी लाल गुप्ता थे।
उन्होंने 1 नवंबर 1966 से अपना कार्यभार संभाला था। वर्तमान में HPSC हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में ए और बी (A & B) ग्रुप के राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों की भर्ती के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वन्य जीव अभयारण्य शिवालिक पहाड़ियों में अवस्थित है ?
Right Answer: खोल ही-रायतान अभयारण्य
Explanation:
- खोल ही-रायतान अभयारण्य (Khol Hi-Raitan Sanctuary): यह हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित है, जो भौगोलिक दृष्टि से शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik Hills) की तलहटी और पहाड़ी क्षेत्र में आता है। यह अभयारण्य चीते (Leopard), सियार (Jackal), और विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
अन्य विकल्पों की स्थिति इस प्रकार है:
- खापरवास और भिण्डावास अभयारण्य (Khaparwas & Bhindawas Sanctuary): ये दोनों वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित हैं, जो मैदानी इलाका और आर्द्रभूमि (Wetlands) क्षेत्र है।
- नाहर अभयारण्य (Nahar Sanctuary): यह हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित है। यह क्षेत्र दक्षिणी हरियाणा में आता है, जहाँ अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) का विस्तार है, न कि शिवालिक का।
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Q3. निम्नलिखित में से किसने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में मुख्य सचिव के रूप में काम नहीं किया ?
Right Answer: एस० सी० चौधरी
Explanation:
मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। दिए गए विकल्पों में से अधिकारियों के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के रूप में कार्यकाल इस प्रकार हैं:
- एस० सी० चौधरी (S. C. Chaudhary): इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2013 से 31 जुलाई 2014 तक था। यह भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार का समय था। अतः इन्होंने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में काम नहीं किया।
- शकुन्तला जाखू (Shakuntala Jakhu): इनका कार्यकाल 31 जुलाई 2014 से 30 नवंबर 2014 तक था। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने (26 अक्टूबर 2014) के बाद शुरुआती कुछ समय तक इन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं।
- पी० के० गुप्ता (P. K. Gupta): इन्हें मनोहर लाल खट्टर की सरकार द्वारा ही 30 नवंबर 2014 को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था और इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2014 तक रहा।
- विजयवर्धन (Vijay Vardhan): इन्होंने 1 अक्टूबर 2020 से 30 नवंबर 2021 तक मुख्य सचिव के रूप में काम किया, जो पूरी तरह से मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल के अंतर्गत आता है।
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Q4. सर छोटूराम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
Right Answer: कथन (A), (B) तथा (C) सही हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: सर छोटूराम (दीनबंधु सर छोटूराम) ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। 1916 में वे रोहतक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (विशेषकर शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार) से असहमत होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
- कथन (B) सत्य है: कांग्रेस छोड़ने के बाद, उन्होंने 1923 में सर फज्ल-ए-हुसैन के साथ मिलकर किसानों और जमींदारों के हितों की रक्षा के लिए 'यूनियनिस्ट पार्टी' (Unionist Party) की स्थापना की।
- कथन (C) सत्य है: वे अविभाजित पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे। 1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद जब पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी, तो उन्होंने राजस्व मंत्री (Revenue Minister) के रूप में कार्य किया और किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून (जैसे 'साहूकार पंजीकरण अधिनियम') पारित करवाए।
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Q5. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कहाँ स्थापित किया जा रहा है ?
Right Answer: किलोहड़
Explanation:
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), सोनीपत (हरियाणा) की स्थापना सोनीपत जिले के किलोहड़ (Kilohrad) गाँव में की जा रही है। यह संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है ?
Right Answer: रेवाड़ी
Explanation:
प्रशासनिक सुविधा के लिए हरियाणा को 6 मण्डलों (Divisions) में बांटा गया है। रोहतक मण्डल राज्य का सबसे बड़ा मण्डल है, जिसमें कुल 5 जिले शामिल हैं:
- रोहतक (Rohtak)
- झज्जर (Jhajjar)
- सोनीपत (Sonipat)
- भिवानी (Bhiwani)
- चरखी दादरी (Charkhi Dadri)
रेवाड़ी (Rewari) जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है; यह गुरुग्राम (Gurugram) संभाग के अंतर्गत आता है (गुरुग्राम संभाग में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले शामिल हैं)।
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Q7. 37वें सूरजकुण्ड अन्तर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का थीम राज्य कौन-सा था ?
Right Answer: गुजरात
Explanation:
37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले (37th Surajkund International Crafts Fair) का आयोजन 2 फरवरी से 18 फरवरी 2024 तक हरियाणा के फरीदाबाद में किया गया था। इस संस्करण के लिए:
- थीम राज्य (Theme State): गुजरात था। (इस मेले में गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, कला और व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था।)
- भागीदार राष्ट्र (Partner Nation): तंजानिया (Tanzania) था।
सूरजकुंड मेले का आयोजन हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के सहयोग से किया जाता है।
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Q8. हरियाणा की महिला पहलवान जिसने 2023 का अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया
Right Answer: अंतिम पंघाल
Explanation:
हरियाणा के हिसार जिले (भगाना गांव) की महिला पहलवान अंतिम पंघाल (Antim Panghal) को कुश्ती में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2023 का अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) प्रदान किया गया था। वे अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (U-20 World Wrestling Championship) में लगातार दो बार (2022 और 2023) स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं।
- अंशु मलिक (Anshu Malik): इन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- गीतिका जाखड़ (Geetika Jakhar): इन्हें 2006 में अर्जुन पुरस्कार मिला था।
- साक्षी मलिक (Sakshi Malik): रियो ओलंपिक 2016 की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को 2016 में ही मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया गया था।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Right Answer: (A) तथा (B)
Explanation:
(A) गुजरी महल - हिसार (Gujari Mahal - Hisar): यह सही सुमेलित है। गुजरी महल हरियाणा के हिसार शहर में स्थित है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने अपनी प्रेमिका 'गुजरी' रानी के लिए करवाया था।
(B) आराम-ए-कौसर - नारनौल (Aram-e-Kausar - Narnaul): यह सही सुमेलित है। आराम-ए-कौसर (Aram-i-Kausar) हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में स्थित एक ऐतिहासिक मुग़लकालीन स्मारक और बाग है। यह मुग़ल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल में नारनौल के सूबेदार शाह कुली खान ने बनवाया था।
(C) शेख तैय्यब का मकबरा - जींद (Tomb of Sheikh Tayyab - Jind): यह गलत सुमेलित है। शेख तैय्यब का मकबरा जींद में नहीं, बल्कि हरियाणा के कैथल (Kaithal) में स्थित है। शेख तैय्यब (लाला मैदनी मल) 16वीं शताब्दी के एक सूफ़ी संत थे और अकबर के दरबार में सलाहकार भी रहे थे।
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Q10. पेहोवा अभिलेख के बारे में निम्नलिखित कथनों को पढ़िए
Right Answer: दोनों कथन सत्य हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: पेहोवा अभिलेख (Pehowa Inscription) 9वीं शताब्दी का है और यह गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के महान शासक मिहिर भोज (Mihir Bhoja) के शासनकाल से संबंधित है।
- कथन (B) सत्य है: इस अभिलेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्राचीन काल में पेहोवा (जिसे उस समय पृथूदक या Prithudaka कहा जाता था) घोड़ों के व्यापार का एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र था। इसमें विभिन्न स्थानों से आए घोड़ों के व्यापारियों (horse dealers) का जिक्र है, जो एक मेले में इकट्ठा हुए थे और उन्होंने अपनी बिक्री का कुछ हिस्सा मंदिर के रखरखाव के लिए दान करने का संकल्प लिया था।
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Sanskrit (60 Questions)
Q1. अव्ययीभावसमासस्य समीचीनं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: अनुज्येष्ठम् — ज्येष्ठस्यानुपूर्व्येण
Explanation:
अव्ययीभावसमासस्य विधानं ‘अव्ययं विभक्तिसमीपसमृद्धिव्यृद्ध्यर्थाभावात्ययासम्प्रतिशब्दप्रादुर्भावपश्चाद्यथानुपूर्व्ययौगपद्यसादृश्यसम्पत्तिसाकल्यान्तवचनेषु’ इति सूत्रेण क्रियते। तत्र आनुपूर्व्यार्थे ‘अनुज्येष्ठम्’ इति सिध्यति, यस्य विग्रहः ज्येष्ठस्य आनुपूर्व्येण इति, अर्थात् ज्येष्ठक्रमेण। अतः चतुर्थः विकल्पः एव समीचीनः। अन्येषु विकल्पेषु दोषाः सन्ति — समीपार्थे ‘उपहरि’ इति भवति, न तु अधिहरि; ‘निर्मक्षिकम्’ इति अभावार्थे प्रयुज्यते, न तु अत्ययार्थे; ‘अतिनिद्रम्’ इति च असम्प्रत्यर्थे, अर्थात् निद्रा सम्प्रति न युज्यते इति।
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Q2. हशो भवन्ति –
Right Answer: संवारा नादा घोषाश्च
Explanation:
वर्णानां बाह्यप्रयत्नाः एकादश मन्यन्ते, तेषु विवारः संवारः, श्वासः नादः, अघोषः घोषश्च प्रमुखाः। हश् इति प्रत्याहारेण सर्वे मृदुव्यञ्जनाः अर्थात् वर्गाणां तृतीयचतुर्थपञ्चमवर्णाः, अन्तःस्थाः, हकारश्च गृह्यन्ते। एतेषां वर्णानाम् उच्चारणे कण्ठः संवृतः भवति, नादः उत्पद्यते, घोषश्च जायते; अतः ते संवाराः नादाः घोषाश्च कथ्यन्ते। एतेभ्यः विपरीताः खर्-प्रत्याहारस्थाः वर्णाः अर्थात् वर्गाणां प्रथमद्वितीयवर्णाः ऊष्माणश्च विवाराः श्वासाः अघोषाश्च भवन्ति। स्वराः अपि हशाम् इव संवारादिधर्मयुक्ताः एव।
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Q3. ‘कृ’ धातोः परस्मैपद-आत्मनेपदरूपयोः समानलकारस्थयोः पुरुषवचनयोः सर्वथा उचितं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: अकार्षीः - अकृथाः
Explanation:
चतुर्थः विकल्पः एव सर्वथा उचितः, यतो हि ‘अकार्षीः’ इति लुङ्लकारे परस्मैपदे मध्यमपुरुषैकवचनम्, ‘अकृथाः’ इति च तस्मिन्नेव लकारे आत्मनेपदे मध्यमपुरुषैकवचनम्; अतः लकारः पुरुषः वचनं च त्रयम् अपि समानम्। प्रथमे विकल्पे ‘अकरवम्’ इति लङि उत्तमपुरुषैकवचनम्, ‘अकुरुत’ इति च आत्मनेपदे प्रथमपुरुषैकवचनम्, अतः पुरुषभेदः। द्वितीये तृतीये च विकल्पे लकारपुरुषवचनानां सङ्गतिः न विद्यते। ‘कृ’ धातुः उभयपदी अस्ति, अतः तस्य द्वयोः पदयोः रूपाणि सिध्यन्ति।
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Q4. ‘अस्मद्’ शब्दस्य रूपेषु ‘नः’ इति वैकल्पिकं रूपं कुत्र न भवति ?
Right Answer: ‘अस्मत्’ इति स्थाने
Explanation:
‘बहुवचनस्य वस्नसौ’ इति पाणिनीयसूत्रेण युष्मद् अस्मद् इत्येतयोः बहुवचने विकल्पेन वस् नस् इत्यादेशौ भवतः। अस्मद्शब्दस्य विषये ‘नः’ इति वैकल्पिकं रूपं द्वितीयाबहुवचने अस्मान् इत्यस्य स्थाने, चतुर्थीबहुवचने अस्मभ्यम् इत्यस्य स्थाने, षष्ठीबहुवचने च अस्माकम् इत्यस्य स्थाने भवति। किन्तु पञ्चमीबहुवचने ‘अस्मत्’ इत्यस्य स्थाने अयम् आदेशः न विधीयते। ध्यातव्यं च यत् एतौ आदेशौ अनन्वादेशे, पदस्य आदौ अप्रयुज्यमाने, तथा च समासे च न भवतः।
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Q5. सुमेलनं कुरुत :
Right Answer: (क)-iii, (ख)-iv, (ग)-i, (घ)-ii
Explanation:
‘रोऽसुपि’ इति सूत्रेण अहन् इत्यस्य रेफादेशः सुबन्तभिन्ने परे भवति, यथा अहरहः इति। ‘रो रि’ इति सूत्रेण रेफे परे पूर्वस्य रेफस्य लोपः, पूर्वस्वरस्य च दीर्घः भवति, यथा पुनः + रमते इत्यत्र पुना रमते इति। ‘अतो रोरप्लुतादप्लुते’ इति सूत्रेण अप्लुतात् अकारात् परस्य रोः स्थाने उकारादेशः भवति, ततश्च गुणे सोऽवदत् इति रूपं सिध्यति। ‘हशि च’ इति सूत्रेण हश्-प्रत्याहारे परे तथैव उकारादेशः भवति, यथा कृष्णः + जयति इत्यत्र कृष्णो जयति इति।
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Q6. ‘मेघात्यस्तः’ इत्यस्य सर्वोपयुक्तं विग्रहं चिनुत –
Right Answer: मेघम्अत्यस्तः
Explanation:
‘द्वितीया श्रितातीतपतितगतात्यस्तप्राप्तापन्नैः’ इति पाणिनीयसूत्रेण श्रित, अतीत, पतित, गत, अत्यस्त, प्राप्त, आपन्न — एतैः शब्दैः सह द्वितीयान्तस्य पदस्य तत्पुरुषसमासः विधीयते। अतः ‘मेघात्यस्तः’ इत्यस्य विग्रहः ‘मेघम् अत्यस्तः’ इति भवति, यस्य अर्थः मेघम् अतिक्रम्य क्षिप्तः इति। अत्र समासे विभक्तेः लोपः जायते, ततश्च सन्धिकार्येण मेघात्यस्तः इति रूपं सिध्यति। अन्ये विकल्पाः पञ्चमीचतुर्थीप्रथमान्तपदयुक्ताः सन्ति, अतः ते अनेन सूत्रेण न सङ्गच्छन्ते।
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Q7. ‘इदम्’ शब्दस्य पुँल्लि ङ्ग -स्त्रीलि ङ्गयोः समानविभक्तिवचनयोः युग्मं चिनुत –
Right Answer: अस्मिन् - अस्याम्
Explanation:
द्वितीयं युग्मम् एव समानविभक्तिवचनयोः वर्तते, यतो हि ‘अस्मिन्’ इति पुँल्लिङ्गे सप्तम्येकवचनम्, ‘अस्याम्’ इति च स्त्रीलिङ्गे सप्तम्येकवचनम्; अतः तत्र विभक्तिः वचनं च समानम्। प्रथमे युग्मे ‘अनेन’ इति तृतीयैकवचनम्, ‘अस्यै’ इति च चतुर्थ्येकवचनम्, अतः विभक्तिभेदः। तृतीये युग्मे ‘एषाम्’ इति षष्ठीबहुवचनम्, ‘इमाम्’ इति च द्वितीयैकवचनम्। चतुर्थे युग्मे ‘इमे’ इति पुँल्लिङ्गे प्रथमाबहुवचनम्, स्त्रीलिङ्गे तु प्रथमाद्वितीययोः द्विवचनम्, अतः वचनभेदः विद्यते।
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Q8. जातकमालायाः प ञ् चदशं जातकमस्ति –
Right Answer: मत्स्यजातकम्
Explanation:
आर्यशूरविरचिता ‘जातकमाला’ बौद्धसंस्कृतसाहित्यस्य उत्कृष्टा कृतिः अस्ति, यत्र चतुस्त्रिंशत् जातककथाः चम्पूशैल्या गद्यपद्यमिश्रितरूपेण निबद्धाः। अस्यां कृतौ बोधिसत्त्वस्य पूर्वजन्मनां कथाभिः दानम्, शीलम्, क्षान्तिः, वीर्यम् इत्यादीनां पारमितानां माहात्म्यं प्रतिपाद्यते। तस्याः पञ्चदशं जातकं मत्स्यजातकम् इति नाम्ना प्रथितम्, यत्र बोधिसत्त्वः मत्स्यरूपेण सत्यक्रियया वृष्टिम् आनयति। आर्यशूरस्य भाषा प्रौढा, अलङ्कारयुक्ता, अश्वघोषस्य शैल्या सह साम्यं धारयति च; अजन्तागुहासु अपि एतासां कथानां चित्राणि दृश्यन्ते।
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Q9. सर्वोपयुक्तं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: दध्नाम् - दधिशब्दस्य षष्ठीबहुवचनम्
Explanation:
तृतीयः विकल्पः एव सर्वोपयुक्तः, यतो हि ‘दध्नाम्’ इति दधिशब्दस्य षष्ठीबहुवचनं सम्यक् एव। दधि इति इकारान्तः नपुंसकलिङ्गशब्दः, यस्य विभक्तिषु ‘अन्’ आदेशः दृश्यते, यथा दध्ना, दध्ने, दध्नः, दध्नाम् इति। प्रथमः विकल्पः अशुद्धः, यतो हि ‘वारिणी’ इति वारिशब्दस्य प्रथमाद्वितीययोः द्विवचनम्, न तु द्वितीयाबहुवचनम्; तत्र ‘वारीणि’ इति भवितव्यम्। द्वितीयः अपि अशुद्धः, यतो हि ‘मधूनि’ इति प्रथमाद्वितीयाबहुवचनम्। चतुर्थः अपि अशुद्धः, यतो हि वधूशब्दस्य षष्ठ्येकवचनं ‘वध्वाः’ इति भवति।
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Q10. ‘ज्ञा’ धातोः समुचितं वाक्यप्रयोगं चिनुत –
Right Answer: ते वेदान्जानीतः।
Explanation:
प्रथमः प्रयोगः एव समुचितः, यतो हि ‘ते’ इति द्विवचनान्तं कर्तृपदम्, ‘जानीतः’ इति च लट्लकारस्य प्रथमपुरुषद्विवचनं क्रियापदम्; उभयोः सङ्गतिः सम्यक्। द्वितीयः प्रयोगः अशुद्धः, यतो हि ‘छात्राः’ इति बहुवचनान्तेन सह ‘अजानन्’ इति भवितव्यम्। तृतीयः अपि अशुद्धः, यतो हि ‘अहम्’ इति उत्तमपुरुषेण सह ‘ज्ञास्यामि’ इति क्रियापदम् अपेक्ष्यते, न तु ‘ज्ञास्यसि’ इति मध्यमपुरुषरूपम्। चतुर्थे प्रयोगे उत्तमपुरुषस्य समावेशात् ‘ज्ञास्यामः’ इति बहुवचनं भवितव्यम्, यतो हि उत्तमपुरुषः सर्वेषां प्रबलः।
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Q11. ‘बालकौतुकम्’ पाठोऽयं उत्तररामचरितस्य कस्या ङ्क स्य कथावस्तुना सम्बद्धोऽस्ति ?
Right Answer: प ञ् चमा ङ्क स्य
Explanation:
‘बालकौतुकम्’ इति पाठः भवभूतिविरचितस्य उत्तररामचरितस्य पञ्चमाङ्कस्य कथावस्तुना सम्बद्धः अस्ति। तस्मिन् अङ्के वाल्मीकेः आश्रमे पालितः लवः चन्द्रकेतुना सह मिलति, तयोश्च बालसुलभं स्पर्धापूर्णं संवादः प्रवर्तते, यत्र लवस्य निर्भीकता, तेजस्विता, बालसुलभं कौतुकं च मनोहररूपेण प्रकटीभवति। भवभूतेः इदं नाटकं सप्ताङ्कात्मकं करुणरसप्रधानं च, यत्र ‘एको रसः करुण एव’ इति प्रसिद्धा उक्तिः विद्यते। तृतीयः अङ्कः छायाङ्कः इति नाम्ना विशेषतया प्रसिद्धः।
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Q12. ‘यरोऽनुनासिकेऽनुनासिको वा’ सूत्रस्य सर्वथा उपयुक्तम्उदाहरणमस्ति –
Right Answer: ककुम्नायकः, ककुब्नायक
Explanation:
‘यरोऽनुनासिकेऽनुनासिको वा’ इति पाणिनीयसूत्रेण पदान्ते विद्यमानस्य यर्-प्रत्याहारवर्णस्य अनुनासिके परे विकल्पेन अनुनासिकादेशः भवति। यर् इति प्रत्याहारेण हकारं विहाय सर्वाणि व्यञ्जनानि गृह्यन्ते। ‘ककुभ् + नायकः’ इत्यत्र भकारस्य तद्वर्गीयः अनुनासिकः मकारः विकल्पेन भवति, अतः ककुम्नायकः ककुब्नायकः वा इति द्वे अपि रूपे साधुनी, येन विकल्पः सम्यक् प्रदर्श्यते। अन्येषु विकल्पेषु प्रदत्तानि रूपाणि वर्णविपर्ययदोषेण दुष्टानि सन्ति, अतः तानि इदं सूत्रं सम्यक् न उदाहरन्ति।
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Q13. ‘भवतात्’ इति वैकल्पिकं रूपं लोट्लकारे भवति –
Right Answer: प्रथम-मध्यमपुरुषैकवचने
Explanation:
‘तुह्योस्तातङाशिष्यन्यतरस्याम्’ इति पाणिनीयसूत्रेण आशीर्वादार्थे लोट्लकारस्य ‘तु’ ‘हि’ इत्येतयोः स्थाने विकल्पेन ‘तातङ्’ आदेशः विधीयते। तत्र ‘तु’ इति प्रथमपुरुषैकवचनस्य प्रत्ययः, ‘हि’ इति च मध्यमपुरुषैकवचनस्य; अतः ‘भवतात्’ इति वैकल्पिकं रूपं प्रथममध्यमपुरुषयोः एकवचने एव भवति। यथा भवतु भवतात् वा, भव भवतात् वा इति। आशीर्वादविषये एव अयं विकल्पः, अन्यत्र न; यथा ‘चिरं जीवतात्’ इति प्रयोगे आशीर्वादः स्पष्टः। तातङः टकारः इत्संज्ञकः, ङकारश्च ङित्त्वार्थः।
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Q14. अवर्णपूर्वयोः पदान्तयोः यवयोः लोपो वा भवति –
Right Answer: अशि परे
Explanation:
‘लोपः शाकल्यस्य’ इति पाणिनीयसूत्रेण शाकल्याचार्यस्य मतानुसारं पदान्तयोः यकारवकारयोः विकल्पेन लोपः भवति, यदि तयोः पूर्वः अवर्णः स्यात् तथा च परतः अश्-प्रत्याहारे विद्यमानः वर्णः स्यात्। अश् इति प्रत्याहारेण सर्वे स्वराः मृदुव्यञ्जनानि च गृह्यन्ते। यथा कया + अत्र इत्यत्र ‘कयात्र’ इति भवति, तथा च ते + अत्र इत्यत्र ‘तेऽत्र’ इति। अत्र विकल्पः इति ज्ञातव्यम्, अतः लोपाभावे यण्सन्धिः यथावत् तिष्ठति। एतत् सूत्रं वेदेषु लौकिकसंस्कृते च प्रयोगबहुलम्।
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Q15. नदीशब्दस्य रूपेषु सप्तम्येकवचनमस्ति –
Right Answer: नद्याम्
Explanation:
‘नदी’ इति ईकारान्तः स्त्रीलिङ्गशब्दः, यस्य रूपाणि ङीबन्तानां शब्दानां प्रतिनिधिरूपेण पठ्यन्ते। तस्य सप्तम्येकवचने ‘नद्याम्’ इति रूपं भवति, यत् ‘आण्नद्याः’ इति सूत्रेण सिध्यति, यत्र ङि-प्रत्ययस्य स्थाने आम् आदेशः विधीयते। तत्र ‘इको यणचि’ इति सूत्रेण ईकारस्य यकारः जायते, ततः नद्याम् इति रूपम्। ‘नद्यै’ इति चतुर्थ्येकवचनम्, ‘नद्याः’ इति पञ्चमीषष्ठ्येकवचनम्, ‘नद्यौ’ इति च प्रथमाद्वितीयाद्विवचनम् इति ज्ञातव्यम्। नदीसंज्ञा ‘यू स्त्र्याख्यौ नदी’ इति सूत्रेण विधीयते।
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Q16. विसर्जनीयस्य सः भवति –
Right Answer: खरि
Explanation:
‘विसर्जनीयस्य सः’ इति पाणिनीयसूत्रेण खर्-प्रत्याहारे विद्यमाने वर्णे परे विसर्गस्य स्थाने सकारादेशः विधीयते। खर् इति प्रत्याहारेण वर्गाणां प्रथमद्वितीयवर्णाः ऊष्माणश्च गृह्यन्ते। यथा नमः + ते इत्यत्र नमस्ते, विष्णुः + त्राता इत्यत्र विष्णुस्त्राता, इतः + ततः इत्यत्र इतस्ततः इति रूपाणि सिध्यन्ति। अनन्तरं ‘स्तोः श्चुना श्चुः’ ‘ष्टुना ष्टुः’ इत्यादिभिः सूत्रैः सकारस्य शकारः षकारः वा सम्पद्यते, यथा रामः + चलति इत्यत्र रामश्चलति इति। एतत् सूत्रं विसर्गसन्धेः मूलभूतं सूत्रम् अस्ति।
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Q17. सूत्रोदाहरणस्य असमीचीनं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: जातिरप्राणिनाम् - अश्वारोहपदाति
Explanation:
द्वन्द्वसमासे पूर्वनिपातस्य नियमाः विविधैः सूत्रैः विधीयन्ते। ‘अल्पाच्तरम्’ इति सूत्रेण अल्पस्वरं पदं पूर्वं निपतति, यथा शिवकेशवौ। ‘द्वन्द्वे घि’ इति सूत्रेण घिसंज्ञकं पदं पूर्वं भवति, यथा हरिहरौ। ‘अजाद्यदन्तम्’ इति सूत्रेण अजादि अकारान्तं च पदं पूर्वं निपतति, यथा इन्द्राग्नी। चतुर्थः विकल्पः असमीचीनः, यतो हि ‘जातिरप्राणिनाम्’ इति सूत्रं केवलम् अप्राणिवाचिनां जातिशब्दानां विषये प्रवर्तते, ‘अश्वारोहपदाति’ इत्यत्र तु प्राणिवाचकाः शब्दाः सन्ति, अतः तत् उदाहरणं न सङ्गच्छते।
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Q18. लृकारस्य भेदो नास्ति –
Right Answer: दीर्घस्वरिताननुनासिकः
Explanation:
स्वरवर्णानां भेदाः ह्रस्वदीर्घप्लुतभेदेन, उदात्तानुदात्तस्वरितभेदेन, अनुनासिकाननुनासिकभेदेन च गण्यन्ते। किन्तु लृकारस्य दीर्घरूपं लोके प्रयोगे न विद्यते, अतः तस्य दीर्घसम्बन्धिनः भेदाः न सम्भवन्ति। तेन ‘दीर्घस्वरिताननुनासिकः’ इति भेदः लृकारस्य न भवति, अन्ये तु सर्वे भेदाः सम्भवन्ति। ह्रस्वस्य त्रयः स्वराः द्विधा अनुनासिकत्वेन इति षट्, प्लुतस्य अपि तथैव षट्, एवं द्वादश भेदाः लृकारस्य मन्यन्ते; अन्येषां स्वराणां तु अष्टादश भेदाः भवन्ति।
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Q19. ‘झयः’ सूत्रस्य उदाहरणमस्ति –
Right Answer: उपसरितम्
Explanation:
‘झयः’ इति पाणिनीयसूत्रेण झयन्तात् अव्ययीभावसमासात् समासान्तः ‘टच्’ प्रत्ययः विधीयते। झय् इति प्रत्याहारे स्पर्शवर्णाः ऊष्माणश्च गृह्यन्ते। ‘उपसरितम्’ इत्यत्र ‘सरित्’ इति शब्दः तकारान्तः, तकारश्च झय्-प्रत्याहारे अन्तर्भवति, अतः तत्र टच् प्रत्ययः प्रवर्तते और सरितः समीपम् इति अर्थे उपसरितम् इति रूपं सिध्यति। अन्येषु विकल्पेषु राजन् इति नकारान्तः, दिश् इति शकारान्तः, गिर् इति च रेफान्तः शब्दः, अतः तत्र इदं सूत्रं न प्रवर्तते; तेषां समासान्तविधानम् अन्यैः सूत्रैः क्रियते।
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Q20. ‘‘तदेव गगनं सैव धरा’’ इत्यस्य कविता-संग्रहस्य रचयिता कोऽस्ति ?
Right Answer: प्रो० श्रीनिवासरथः
Explanation:
‘तदेव गगनं सैव धरा’ इति कवितासंग्रहस्य रचयिता प्रोफेसर श्रीनिवासरथः अस्ति। एषा कृतिः आधुनिकसंस्कृतकवितायाः महत्त्वपूर्णा उपलब्धिः मन्यते, यतो हि तत्र परम्परागतच्छन्दोबन्धनं परित्यज्य मुक्तच्छन्दसि समकालिकजीवनस्य संवेदनाः अभिव्यक्ताः। श्रीनिवासरथः आधुनिकसंस्कृतसाहित्ये नवीनप्रयोगानां प्रवर्तकेषु अन्यतमः, यस्य रचनासु नागरिकजीवनस्य विसंगतयः, एकाकित्वम्, आत्मान्वेषणं च प्रमुखविषयाः। तेषां भाषा सरला, बिम्बविधानं च आधुनिकम्, येन संस्कृतकविता वर्तमानयुगेन सह संयुज्यते।
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Q21. उदः परयोः स्थास्तम्भोः भवति –
Right Answer: पूर्वसवर्णः
Explanation:
‘उदः स्थास्तम्भोः पूर्वस्य’ इति पाणिनीयसूत्रेण ‘उद्’ इत्यस्मात् परयोः ‘स्था’ ‘स्तम्भ्’ इत्येतयोः धात्वोः यः सकारः, तस्य स्थाने पूर्वसवर्णः आदेशः भवति, अर्थात् पूर्ववर्तिनः दकारस्य सवर्णः थकारः विधीयते। यथा उद् + स्थानम् इत्यत्र उत्थानम्, उद् + स्थितः इत्यत्र उत्थितः, उद् + स्तम्भः इत्यत्र च उत्तम्भः इति रूपाणि सिध्यन्ति। अत्र सकारस्य लोपः इव प्रतीयते, वस्तुतस्तु तस्य स्थाने पूर्वसवर्णादेशः जातः, ततश्च ‘खरि च’ इत्यादिना दकारस्य तकारः सम्पद्यते।
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Q22. दिङ्नागस्य कुन्दमाला अस्ति –
Right Answer: नाटकम्
Explanation:
‘कुन्दमाला’ इति दिङ्नागविरचितं षडङ्कं नाटकम् अस्ति, यस्य कथावस्तु रामायणस्य उत्तरकाण्डम् आश्रित्य निबद्धम्। अस्मिन् नाटके सीतायाः परित्यागः, वाल्मीकेः आश्रमे तस्याः निवासः, लवकुशयोः जन्म, अन्ते च रामसीतयोः पुनर्मिलनं वर्णितम्। भवभूतेः उत्तररामचरितेन सह अस्य कथावस्तु बहुधा साम्यं धारयति, तथापि अत्र अन्तः सुखान्तः एव भवति। नाटकस्य नामकरणं कुन्दपुष्पाणां मालाम् आश्रित्य कृतम्, या सीतायाः रामेण सह सम्बन्धस्य स्मारिका रूपेण कथायां प्रयुक्ता।
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Q23. ‘हन्’ धातोः रूपाणां समुचितं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: अहन् - अहतम् - अहत (लङि मध्यमपुरुषः)
Explanation:
प्रथमः विकल्पः एव समुचितः, यतो हि ‘हन्’ धातोः लङ्लकारे मध्यमपुरुषस्य त्रीणि वचनानि क्रमेण अहन्, अहतम्, अहत इति भवन्ति। द्वितीयः विकल्पः अशुद्धः, यतो हि आशीर्लिङ्लकारे उत्तमपुरुषे वध्यासम्, वध्यास्व, वध्यास्म इति रूपाणि भवन्ति। तृतीयः अपि अशुद्धः, यतो हि ‘अवधीः’ इति लुङ्लकारस्य मध्यमपुरुषैकवचनम्, उत्तमपुरुषे तु अवधिषम् इति भवति। चतुर्थः अपि अशुद्धः, यतो हि लिट्लकारे प्रथमपुरुषे जघान, जघ्नतुः, जघ्नुः इति रूपाणि सिध्यन्ति; जघनिथ इति तु मध्यमपुरुषैकवचनम्।
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Q24. असमीचीनं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: संवृतं स्वराणाम्।
Explanation:
वर्णोच्चारणे आभ्यन्तरप्रयत्नाः पञ्च मन्यन्ते — स्पृष्टम्, ईषत्स्पृष्टम्, विवृतम्, संवृतम्, ईषद्विवृतं च। तत्र स्पर्शवर्णानां प्रयत्नः स्पृष्टः, अन्तःस्थानां ईषत्स्पृष्टः, ऊष्मणां ईषद्विवृतः, स्वराणां च विवृतः भवति। संवृतप्रयत्नः तु केवलं प्रयोगदशायां ह्रस्वस्य अकारस्य भवति, न तु सर्वेषां स्वराणाम्; प्रक्रियादशायां सोऽपि विवृतः एव गृह्यते। अतः ‘संवृतं स्वराणाम्’ इति कथनम् असमीचीनम्। शेषाणि त्रीणि कथनानि शिक्षाग्रन्थेषु यथोक्तानि सम्यक् एव सन्ति।
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Q25. पररूपगुणापवादसूत्रं किम् ?
Right Answer: उपसर्गादृति धातौ
Explanation:
‘उपसर्गादृति धातौ’ इति पाणिनीयसूत्रं गुणसन्धेः अपवादरूपेण पररूपम् एकादेशं विदधाति। अस्य अर्थः — अवर्णान्तात् उपसर्गात् परे ऋकारादौ धातौ सति पूर्वपरयोः स्थाने पररूपम् एकादेशः भवति। यथा प्र + ऋच्छति इत्यत्र गुणे प्रार्च्छति इति स्यात्, किन्तु अनेन सूत्रेण ‘प्रर्च्छति’ इति रूपं सिध्यति; एवमेव उप + ऋच्छति इति उपर्च्छति। ‘वृद्धिरेचि’ इति सूत्रं वृद्धिसन्धिं विदधाति, ‘एङः पदान्तादति’ इति पूर्वरूपम्, ‘एत्येधत्यूठ्सु’ इति च वृद्धेः विशेषविधानं करोति।
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Q26. ‘असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः। ताँस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः।। मन्त्रोऽयं कस्माद्उपनिषदः स ङ्क लितोऽस्ति ?
Right Answer: ईशावास्योपनिषदः
Explanation:
अयं मन्त्रः ईशावास्योपनिषदः तृतीयः मन्त्रः अस्ति। तस्य भावः — असुर्याः नाम ते लोकाः अन्धेन तमसा आवृताः सन्ति, तान् एव लोकान् मृत्युम् अनन्तरं ते जनाः प्राप्नुवन्ति ये आत्महनः अर्थात् आत्मज्ञानस्य हन्तारः सन्ति। ईशावास्योपनिषद् शुक्लयजुर्वेदस्य वाजसनेयिसंहितायाः चत्वारिंशत्तमः अध्यायः, अतः सा एका एव उपनिषद् या संहिताभागे विद्यते; तस्यां केवलम् अष्टादश मन्त्राः सन्ति। ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ इति तस्याः प्रथमः प्रसिद्धः मन्त्रः त्यागपूर्वकभोगस्य सन्देशं ददाति।
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Q27. ‘याच्’ धातोः आत्मनेपदिषु मध्यम पुरुषैकवचनस्य रूपं नास्ति –
Right Answer: अयाचिषि
Explanation:
अत्र तृतीयं रूपम् एव आत्मनेपदे मध्यमपुरुषैकवचनं न विद्यते, यतो हि ‘अयाचिषि’ इति लुङ्लकारस्य उत्तमपुरुषैकवचनस्य रूपम् अस्ति; तत्र मध्यमपुरुषैकवचने ‘अयाचिष्ठाः’ इति भवति। शेषाणि त्रीणि रूपाणि मध्यमपुरुषैकवचनस्यैव — ‘याचितासे’ इति लुट्लकारस्य, ‘अयाचथाः’ इति लङ्लकारस्य, ‘याचिषीष्ठाः’ इति च आशीर्लिङ्लकारस्य रूपम्। ‘याच्’ धातुः उभयपदी अस्ति, अतः तस्य परस्मैपदे आत्मनेपदे च रूपाणि सिध्यन्ति; अर्थभेदेन पदव्यवस्था अपि क्वचित् दृश्यते।
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Q28. ‘भारतीवसन्तगीतिः’ पं० जानकीवल्लभशास्त्रिणः कस्मिन्गीतसंग्रहे अस्ति ?
Right Answer: ‘काकली’ इति गीतसंग्रहे
Explanation:
‘भारतीवसन्तगीतिः’ इति सुप्रसिद्धं गीतं पण्डितजानकीवल्लभशास्त्रिणः ‘काकली’ इति गीतसंग्रहे संकलितम् अस्ति। आधुनिकसंस्कृतसाहित्ये गीतिकाव्यस्य पुनरुत्थाने शास्त्रिमहोदयस्य योगदानम् अनुपमम्, यतो हि तेषां गीतेषु प्रसादगुणः, मधुरा पदावली, लयात्मकता च समवेतरूपेण दृश्यन्ते। तेषां रचनासु प्रकृतिवर्णनं, देशप्रेम, मानवीयसंवेदना च प्रमुखतया प्रतिफलिताः। ते हिन्दीभाषायाम् अपि छायावादोत्तरकालस्य महत्त्वपूर्णाः कवयः आसन्, तथापि संस्कृतगीतिकाव्ये तेषां स्थानम् अत्यन्तम् उच्चम् एव मन्यते।
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Q29. विशेषणोभयपदकर्मधारयसमासस्य उदाहरणम्अस्ति –
Right Answer: स्नातानुलिप्तः
Explanation:
कर्मधारयसमासस्य अनेके भेदाः सन्ति, तेषु विशेषणोभयपदकर्मधारयः सः यत्र समासस्य उभे अपि पदे विशेषणरूपे भवतः। ‘स्नातानुलिप्तः’ इत्यत्र स्नातश्चासौ अनुलिप्तश्च इति विग्रहः, उभयमपि पदं विशेषणम् एव, अतः अयम् एव तस्य उदाहरणम्। ‘पुरुषव्याघ्रः’ इति उपमितसमासः, यत्र पुरुषः व्याघ्र इव इति भावः। ‘घनश्यामः’ इति उपमानपूर्वपदकर्मधारयः, यत्र घन इव श्यामः इति विग्रहः। ‘चन्द्राह्लादकः’ इत्यत्र च विशेषणविशेष्यभावः न तथा वर्तते।
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Q30. अधोलिखितेषु सर्वोपयुक्तं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: हरि → हरेः - हर्योः - हरीणाम्
Explanation:
अत्र द्वितीयः विकल्पः एव सर्वथा शुद्धः, यतो हि ‘हरेः, हर्योः, हरीणाम्’ इति त्रीणि रूपाणि हरिशब्दस्य षष्ठीविभक्तेः क्रमेण एकवचनं द्विवचनं बहुवचनं च सूचयन्ति, अतः तत्र पूर्णा सङ्गतिः विद्यते। प्रथमे विकल्पे पत्यौ इति सप्तम्येकवचनम्, पत्योः इति षष्ठीद्विवचनम्, पतीनाम् इति षष्ठीबहुवचनम् — एवं विभक्तिभेदः विद्यते। तृतीये विकल्पे रमायै इति चतुर्थ्येकवचनम्, रमाभ्याम् इति तृतीयाद्विवचनम्, रमाभिः इति तृतीयाबहुवचनम्। चतुर्थे विकल्पे मतीन् इति अशुद्धम्, यतो हि मतिशब्दः स्त्रीलिङ्गः, तस्य द्वितीयाबहुवचनं मतीः इति भवति।
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Q31. ‘‘उन्मेषं यो मम न सहते जातिवैरी निशाया- मिन्दोरिन्दीवरदलदृशा तस्य सौन्दर्यदर्पः। नीतः शान्तिं प्रसभमनया वक्रकान्त्येति हर्षा- ल्लग्ना मन्ये ललित तनु ! ते पादयोः पादलक्ष्मीः।।’’ काव्यप्रकाशकारमतेन अत्र कोऽल ङ्कारः ?
Right Answer: उत्प्रेक्षा
Explanation:
अस्मिन् श्लोके उत्प्रेक्षालङ्कारः विद्यते। उत्प्रेक्षायाः लक्षणम् — ‘सम्भावनमथोत्प्रेक्षा प्रकृतस्य परात्मना’ इति, अर्थात् यत्र प्रकृतस्य उपमेयस्य अप्रकृतरूपेण अर्थात् उपमानरूपेण सम्भावना क्रियते तत्र उत्प्रेक्षा। अत्र ‘मन्ये’ इति वाचकपदेन स्पष्टं सूचितं यत् कवेः इयं केवला सम्भावना, न तु निश्चयः। कविः उत्प्रेक्षते यत् चन्द्रस्य सौन्दर्यदर्पः नायिकायाः मुखकान्त्या पराजितः सन् हर्षात् इव तस्याः पादयोः पादलक्ष्मीरूपेण लग्नः। ‘मन्ये’, ‘इव’, ‘ध्रुवम्’, ‘नूनम्’ इत्यादीनि उत्प्रेक्षायाः वाचकपदानि भवन्ति।
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Q32. वाक्यद्वयं पठित्वा कारकप्रयोगदृष्ट्या सर्वोपयुक्तं चिनुत — (क) सः रजकस्य वस्त्रं ददाति। (ख) वाताय कपिला विद्युत्।
Right Answer: केवलं (ख)
Explanation:
अत्र केवलं द्वितीयं वाक्यम् एव शुद्धम्। ‘वाताय कपिला विद्युत्’ इत्यत्र ‘नक्षत्रज्योतिषोर्लक्षणविधौ’ इत्यादिपरम्परायाम् उत्पातलक्षणे चतुर्थी विभक्तिः विधीयते, अर्थात् कपिलवर्णा विद्युत् वातस्य सूचिका भवति इति। प्रथमं वाक्यम् अशुद्धम्, यतो हि यस्मै किमपि दीयते सः सम्प्रदानसंज्ञकः भवति, ‘कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम्’ इति सूत्रात्; सम्प्रदाने च चतुर्थी विधीयते। अतः ‘सः रजकाय वस्त्रं ददाति’ इति भवितव्यम्, न तु ‘रजकस्य’ इति षष्ठ्यन्तम्।
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Q33. असंगतं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया - ईशोपनिषद्
Explanation:
अत्र तृतीयः विकल्पः असंगतः, यतो हि ‘क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति’ इति प्रसिद्धं वाक्यं कठोपनिषदः, न तु ईशोपनिषदः। तस्य भावः — आत्मज्ञानस्य मार्गः क्षुरस्य तीक्ष्णधारा इव दुर्गमः अस्ति इति। शेषाः त्रयः विकल्पाः सम्यक् — ‘तत्त्वमसि’ इति महावाक्यं छान्दोग्योपनिषदि उद्दालकारुणिना श्वेतकेतुं प्रति उक्तम्, ‘ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति’ इति मुण्डकोपनिषदि, ‘स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ इति च तैत्तिरीयोपनिषदः शिक्षावल्ल्यां गुरोः उपदेशरूपेण विद्यते।
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Q34. रामायणस्य बम्बईसंस्करणानुसारं काण्डानां सर्गसंख्याभिः सह सुमेलनं कुरुत :
Right Answer: (क)-iii, (ख)-iv, (ग)-ii, (घ)-i
Explanation:
वाल्मीकिरामायणस्य बम्बईसंस्करणानुसारं सप्तसु काण्डेषु सर्गसंख्या भिन्ना भिन्ना विद्यते। तत्र अयोध्याकाण्डे एकोनविंशत्यधिकशतं सर्गाः, अरण्यकाण्डे पञ्चसप्ततिः सर्गाः, युद्धकाण्डे अष्टाविंशत्यधिकशतं सर्गाः, उत्तरकाण्डे च एकादशाधिकशतं सर्गाः सन्ति। बालकाण्डे सप्तसप्ततिः, किष्किन्धाकाण्डे सप्तषष्टिः, सुन्दरकाण्डे च अष्टषष्टिः सर्गाः विद्यन्ते। सर्वेषु काण्डेषु युद्धकाण्डम् एव बृहत्तमम्, यत्र रावणवधपर्यन्तं समग्रं युद्धवर्णनं विस्तरेण उपनिबद्धम् अस्ति।
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Q35. ‘स्नेहने पिषः’ सूत्रेण प्रत्ययो भवति –
Right Answer: ‘णमुल्’ प्रत्ययः
Explanation:
‘स्नेहने पिषः’ इति पाणिनीयसूत्रेण स्नेहनार्थे वर्तमानात् ‘पिष्’ धातोः ‘णमुल्’ प्रत्ययः विधीयते। स्नेहनम् इति अत्र मार्दवसम्पादनम् अर्थात् पेषणेन स्निग्धीकरणम्। यथा ‘पेषं पेषं पिनष्टि’ इति प्रयोगः, यत्र क्रियायाः पौनःपुन्यं द्योत्यते। णमुल् इति प्रत्ययः अव्ययसंज्ञकः भवति, अतः तस्य रूपं न परिवर्तते। एतादृशेषु प्रयोगेषु द्विर्वचनम् अपि प्रायः दृश्यते, येन क्रियायाः अभीक्ष्ण्यं व्यज्यते। णमुलः विधानं ‘अभीक्ष्ण्ये णमुल् च’ इत्यादिभिः अनेकैः सूत्रैः भिन्नेषु अर्थेषु क्रियते।
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Q36. महाभारतस्य कस्मिन्पर्वणि नलोपाख्यानमस्ति ?
Right Answer: वनपर्वणि
Explanation:
महाभारते अष्टादश पर्वाणि सन्ति, तेषु तृतीयं वनपर्व इति प्रसिद्धम्, यत्र पाण्डवानां द्वादशवर्षीयस्य वनवासस्य वर्णनम् अस्ति। तस्मिन्नेव पर्वणि बृहदश्वः मुनिः युधिष्ठिरं सान्त्वयितुं नलदमयन्त्योः आख्यानं श्रावयति, यत् नलोपाख्यानम् इति नाम्ना प्रथितम्। तत्र निषधराजः नलः द्यूते राज्यं हारयित्वा दमयन्त्या सह वनं गच्छति, ततश्च वियोगः पुनर्मिलनं च वर्णितम्। अस्मादेव आख्यानात् प्रेरणां गृहीत्वा श्रीहर्षः नैषधीयचरितम् इति महाकाव्यं रचयामास। वनपर्वणि सावित्र्युपाख्यानम् अपि विद्यते।
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Q37. भागवतपुराणस्य कस्मिन्स्कन्धे गजेन्द्रमोक्षस्य कथा अस्ति ?
Right Answer: अष्टमे
Explanation:
श्रीमद्भागवतमहापुराणे द्वादश स्कन्धाः सन्ति, तेषु अष्टमे स्कन्धे गजेन्द्रमोक्षस्य प्रसिद्धा कथा वर्णिता। तत्र गजेन्द्रः सरोवरे ग्राहेण गृहीतः सन् दीर्घकालं यावत् संघर्षं कृत्वा अन्ते सर्वाणि साधनानि परित्यज्य अनन्यभावेन भगवन्तं स्तौति, ततश्च भगवान् गरुडमारूढः आगत्य सुदर्शनचक्रेण ग्राहं हत्वा तं मोचयति। एषा कथा शरणागतेः महिमानं प्रतिपादयति। अस्मिन्नेव अष्टमे स्कन्धे समुद्रमन्थनस्य, वामनावतारस्य, मत्स्यावतारस्य च आख्यानानि अपि विस्तरेण वर्णितानि सन्ति।
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Q38. ‘अपपरी वर्जने’ सूत्रेण ‘अप’ ‘परि’ चैतौ वर्जने कौ संज्ञकौ ?
Right Answer: कर्मप्रवचनीयौ
Explanation:
‘अपपरी वर्जने’ इति पाणिनीयसूत्रेण वर्जनार्थे प्रयुज्यमानौ ‘अप’ ‘परि’ इत्येतौ शब्दौ कर्मप्रवचनीयसंज्ञकौ भवतः। वर्जनम् इति परित्यागः अर्थात् कस्यचित् बहिष्करणम्। यथा ‘अप त्रिगर्तेभ्यो वृष्टो देवः’ इति, ‘परि त्रिगर्तेभ्यो वृष्टो देवः’ इति च; अत्र त्रिगर्तान् विहाय अन्यत्र वृष्टिः अभवत् इति अर्थः। कर्मप्रवचनीयसंज्ञायाः फलम् इदं यत् ‘पञ्चम्यपाङ्परिभिः’ इति सूत्रेण तद्युक्ते पदे पञ्चमी विभक्तिः विधीयते। कर्मप्रवचनीयाः स्वयं क्रियां न वदन्ति, केवलं विभक्तिं नियमयन्ति।
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Q39. कस्मिन्छन्दसि आदौ मगणो भवति ?
Right Answer: शार्दूलविक्रीडिते
Explanation:
शार्दूलविक्रीडितं छन्दः एकोनविंशत्यक्षरं भवति, तस्य च लक्षणम् ‘सूर्याश्वैर्यदि मः सजौ सततगाः शार्दूलविक्रीडितम्’ इति। एतेन ज्ञायते यत् तत्र क्रमशः मगणः, सगणः, जगणः, सगणः, तगणः, तगणः, अन्ते च एकः गुरुः भवति; यतिश्च द्वादशे सप्तमे च वर्णे विधीयते। एवं तस्य आरम्भे मगणः एव तिष्ठति। अन्येषु विकल्पेषु मालिन्यां नगणद्वयेन आरम्भः, शिखरिण्यां यगणेन, वसन्ततिलकायां च तगणेन आरम्भः भवति, अतः तेषु आदौ मगणः न विद्यते।
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Q40. गत्यर्थानां शब्दकर्मकाणाम्अकर्मकाणां चाणौ यः कर्ता स णौ किं भवति ?
Right Answer: कर्म
Explanation:
‘गतिबुद्धिप्रत्यवसानार्थशब्दकर्माकर्मकाणामणि कर्ता स णौ’ इति पाणिनीयसूत्रेण एषा व्यवस्था विधीयते। यस्य धातोः अर्थः गत्यर्थकः, बुद्ध्यर्थकः, प्रत्यवसानार्थकः अर्थात् भक्षणार्थकः, शब्दकर्मकः वा भवति, अथवा यः धातुः अकर्मकः अस्ति, तस्य णिजन्तप्रयोगे मूलधातोः यः कर्ता आसीत् सः कर्मसंज्ञकः भवति। यथा देवदत्तः ग्रामं गच्छति इत्यस्मात् णिजन्ते ‘यज्ञदत्तः देवदत्तं ग्रामं गमयति’ इति भवति, यत्र देवदत्तः कर्मत्वं प्राप्नोति। अन्येषु धातुषु तु सः करणसंज्ञकः भवति।
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Q41. गुरुमतो हलन्तात्स्त्रियां प्रत्ययो भवति –
Right Answer: ‘अ’ प्रत्ययः
Explanation:
‘गुरोश्च हलः’ इति पाणिनीयसूत्रेण गुरुमतः हलन्तात् धातोः स्त्रियां भावे ‘अ’ प्रत्ययः विधीयते। अत्र गुरुमत् इत्यनेन तादृशः धातुः गृह्यते यस्य उपधायां गुरुसंज्ञकः स्वरः विद्यते, हलन्तः इत्यनेन च व्यञ्जनान्तः। यथा ईहा, ऊहा, लीला इत्यादीनि रूपाणि सिध्यन्ति। भावार्थे स्त्रीलिङ्गे प्रत्ययविधानम् अनेकैः सूत्रैः क्रियते, यथा ‘अ प्रत्ययात्’, ‘गुरोश्च हलः’, ‘षिद्भिदादिभ्योऽङ्’ इत्यादिभिः। अस्मिन् प्रकरणे प्रत्ययस्य स्वरूपं धातोः स्वरूपम् उपधां च आश्रित्य निर्धार्यते।
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Q42. सुमेलनं कुरुत :
Right Answer: (क)-iii, (ख)-i, (ग)-iv, (घ)-ii
Explanation:
दृष्टान्तालङ्कारे उपमानोपमेययोः धर्मयोश्च बिम्बप्रतिबिम्बभावः भवति, अतः ‘पुनरेतेषां सर्वेषां प्रतिबिम्बनम्’ इति तस्यैव लक्षणम्। निदर्शनालङ्कारे वस्तुतः असम्भवन् सम्बन्धः उपमां परिकल्पयति, अतः ‘अभवन्वस्तुसम्बन्धः उपमापरिकल्पकः’ इति निदर्शनायाः लक्षणम्। भ्रान्तिमति सादृश्यात् अन्यस्मिन् अन्यस्य निश्चयात्मकं ज्ञानं जायते, अतः ‘अन्यसंवित्तुल्यदर्शने’ इति तस्य लक्षणम्। सन्देहालङ्कारे तु उपमानोपमेययोः निश्चयः न भवति, संशयः एव तिष्ठति, अतः ‘भेदोक्तौ तदनुक्तौ च’ इति तस्य लक्षणम्।
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Q43. छन्दसां सन्दर्भे सर्वोपयुक्तं कथनं चिनुत :
Right Answer: वसन्ततिलकायां जगणद्वयं गुरुद्वयं च भवति।
Explanation:
वसन्ततिलका छन्दसि प्रतिचरणं चतुर्दश वर्णाः भवन्ति, तस्य च लक्षणम् ‘उक्ता वसन्ततिलका तभजा जगौ गः’ इति। एतस्मात् स्पष्टं यत् तत्र तगणः, भगणः, जगणद्वयं, तदनन्तरं गुरुद्वयं च विद्यते; अतः चतुर्थं कथनं सम्यक्। प्रथमं कथनम् अशुद्धम्, यतो हि वंशस्थे ‘जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ’ इति ज-त-ज-र गणाः भवन्ति। द्वितीयम् अपि अशुद्धम्, यतो हि द्रुतविलम्बिते द्वादश वर्णाः एव भवन्ति। तृतीयमपि अशुद्धम्, यतो हि अनुष्टुभि सप्तमो वर्णः द्वितीयचतुर्थचरणयोरेव लघुः भवति।
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Q44. हितोपदेशस्य चतुर्णां भागानां क्रमशः उल्लेखः कृतोऽस्ति –
Right Answer: मित्रलाभः, सुहृद्भेदः, विग्रहः, सन्धिः।
Explanation:
नारायणपण्डितविरचितस्य हितोपदेशस्य चत्वारः भागाः क्रमेण मित्रलाभः, सुहृद्भेदः, विग्रहः, सन्धिश्च इति सन्ति। अस्य ग्रन्थस्य आधारः पञ्चतन्त्रम्, किन्तु तत्र तन्त्राणि पञ्च सन्ति, अत्र तु भागाः चत्वार एव। ग्रन्थस्य उद्देश्यं राजपुत्राणां नीतिशिक्षणम्, अतः कथानां माध्यमेन व्यावहारिकं ज्ञानं प्रदीयते। ‘विद्या ददाति विनयम्’, ‘सर्वनाशे समुत्पन्ने अर्धं त्यजति पण्डितः’ इत्यादयः सुप्रसिद्धाः सुभाषितश्लोकाः अस्मादेव ग्रन्थात् गृहीताः। ग्रन्थोऽयं गद्यपद्यमिश्रितः चम्पूशैल्या निबद्धः।
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Q45. ‘पृथुकार्तस्वरपात्रं भूषितनिःशेष परिजनं देव ! विलसत्करेणुगहनं सम्प्रति सममावयोः सदनम्।।’ मम्मटमतेन अत्र कः श्लेषाल ङ्कारः ?
Right Answer: प्रकृतिश्लेषः
Explanation:
मम्मटः काव्यप्रकाशे श्लेषालङ्कारस्य अष्टौ भेदान् निरूपयति — वर्णश्लेषः, पदश्लेषः, लिङ्गश्लेषः, प्रकृतिश्लेषः, प्रत्ययश्लेषः, विभक्तिश्लेषः, वचनश्लेषः, भाषाश्लेषश्च। यत्र शब्दानां प्रकृतिः अर्थात् मूलधातुः प्रातिपदिकं वा द्व्यर्थकं भवति, तत्र प्रकृतिश्लेषः। प्रदत्ते श्लोके ‘पृथुकार्तस्वरपात्रं भूषितनिःशेषपरिजनम्’ इत्यादिपदानि प्रकृतिभेदेन द्वयोः अर्थयोः बोधकानि भवन्ति — एकतः राजभवनस्य वैभवं, अन्यतश्च वनस्य दृश्यम्। अनेन एकस्मिन्नेव वाक्ये द्वयोः चित्रयोः प्रतीतिः जायते।
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Q46. यद्देवाः पुरुषेण हविषा यज्ञम्अतन्वत, तस्य आज्यम्आसीत् –
Right Answer: वसन्तः
Explanation:
ऋग्वेदस्य दशममण्डलस्य नवतितमे सूक्ते पुरुषसूक्तम् इति प्रसिद्धं वर्तते, यत्र विराट्पुरुषात् सृष्टेः उत्पत्तिः रूपकात्मकतया वर्णिता। तत्रैव कथितम् — ‘यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत। वसन्तोऽस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्मः शरद्धविः’ इति। अस्य अर्थः — यदा देवाः पुरुषरूपेण हविषा यज्ञं व्यतन्वन्, तदा तस्य यज्ञस्य आज्यं वसन्तः आसीत्, इध्मः ग्रीष्मः, हविश्च शरत् आसीत्। अस्मिन्नेव सूक्ते चतुर्णां वर्णानाम् उत्पत्तिः अपि वर्णिता, अतः तत् समाजशास्त्रीयदृष्ट्यापि महत्त्वपूर्णम्।
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Q47. ‘नदीमन्ववसिता सेना’ अत्र ‘अनु’ इत्यस्य कर्मप्रवचनीयसंज्ञाविधायकं सूत्रमस्ति –
Right Answer: अनुर्लक्षणे
Explanation:
‘अनुर्लक्षणे’ इति पाणिनीयसूत्रेण लक्षणार्थे वर्तमानः ‘अनु’ इति शब्दः कर्मप्रवचनीयसंज्ञकः भवति। लक्षणम् इति चिह्नम् अर्थात् यस्य आश्रयेण किमपि ज्ञायते। ‘नदीम् अन्ववसिता सेना’ इत्यत्र नदी सेनायाः अवस्थानस्य चिह्नरूपेण वर्तते, अतः तत्र ‘अनु’ कर्मप्रवचनीयः। कर्मप्रवचनीययुक्ते द्वितीया विभक्तिः विधीयते इति ‘कर्मप्रवचनीययुक्ते द्वितीया’ इति सूत्रात्, तेन ‘नदीम्’ इति द्वितीयान्तं पदं सिध्यति। कर्मप्रवचनीयाः क्रियां न द्योतयन्ति, केवलं विभक्तेः नियामकाः भवन्ति।
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Q48. समीचीनं विकल्पं चिनुत –
Right Answer: मोक्षे इच्छास्ति। (वैषयिकः)
Explanation:
अधिकरणकारकं त्रिधा विभक्तम् — औपश्लेषिकम्, वैषयिकम्, अभिव्यापकं च। यत्र आधाराधेययोः साक्षात् संयोगः भवति तत् औपश्लेषिकम्, यथा कटे आस्ते, स्थाल्यां पचति। यत्र आधारः विषयरूपेण भवति तत् वैषयिकम्, यथा मोक्षे इच्छास्ति, शास्त्रे निपुणः। यत्र आधेयः आधारं सर्वात्मना व्याप्नोति तत् अभिव्यापकम्, यथा सर्वस्मिन् आत्मा अस्ति, तिलेषु तैलम्। एतेन ज्ञायते यत् द्वितीयः विकल्पः एव समीचीनः, यतो हि तत्र मोक्षे इच्छा इति वैषयिकम् अधिकरणं सम्यक् निर्दिष्टम्।
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Q49. सुमेलनं कुरुत :
Right Answer: (क)-iii, (ख)-i, (ग)-iv, (घ)-ii
Explanation:
अपत्यार्थे तद्धितप्रत्ययानां विधाने पाणिनिः गणविशेषान् आश्रित्य भिन्नान् प्रत्ययान् विदधाति। ‘शिवादिभ्योऽण्’ इति सूत्रेण शिवादिगणपठितेभ्यः अण् प्रत्ययः भवति, यथा शिवस्य अपत्यं शैवः। ‘स्त्रीभ्यो ढक्’ इति सूत्रेण स्त्रीवाचिभ्यः ढक् प्रत्ययः, यथा स्त्रैणेयः, दात्तेयः। ‘गर्गादिभ्यो यञ्’ इति सूत्रेण गर्गादिगणात् यञ् प्रत्ययः, यथा गर्गस्य अपत्यं गार्ग्यः। ‘अनृष्यानन्तर्ये बिदादिभ्योऽञ्’ इति सूत्रेण अञ् प्रत्ययः, यथा बैदः। एवं क्रमः अण्, ढक्, यञ्, अञ् इति सिध्यति।
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Q50. ‘प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा जातानि परिता बभूव। यत्कामास्ते जुहुमस्तन्न्ाोऽस्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्’’।। मन्त्रोऽयं कस्य सूक्तस्यास्ति ?
Right Answer: हिरण्यगर्भसूक्तस्य
Explanation:
अयं मन्त्रः ऋग्वेदस्य दशमे मण्डले विद्यमानस्य हिरण्यगर्भसूक्तस्य अन्तिमः मन्त्रः अस्ति। अस्मिन् सूक्ते प्रत्येकस्य मन्त्रस्य अन्ते ‘कस्मै देवाय हविषा विधेम’ इति पादः पुनः पुनः आवर्तते, येन सृष्टेः मूलकारणविषये गभीरा जिज्ञासा प्रकटीक्रियते। अन्तिमे मन्त्रे तु उत्तररूपेण ‘प्रजापते’ इति सम्बोधनं प्राप्यते, येन ज्ञायते यत् सा एव परमा सत्ता प्रजापतिशब्देन अभिहिता। सूक्तमिदं दार्शनिकदृष्ट्या अत्यन्तं महत्त्वपूर्णम्, यतो हि तत्र एकेश्वरवादस्य बीजानि स्पष्टतया दृश्यन्ते।
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Q51. किरातार्जुनीयमहाकाव्यस्य सूक्तिरस्ति –
Right Answer: अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता।
Explanation:
‘अहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता’ इति सूक्तिः महाकविभारवेः किरातार्जुनीयमहाकाव्यात् गृहीता। अस्याः भावः — बलवता सह विरोधः दुरन्तः अर्थात् दुःखेन अन्तं गच्छति, तस्य परिणामः भयङ्करः भवति इति। भारविः अर्थगौरवाय प्रसिद्धः, अतः उच्यते ‘भारवेरर्थगौरवम्’। अस्मिन् महाकाव्ये अष्टादश सर्गाः सन्ति, कथावस्तु च महाभारतस्य वनपर्वणः किरातरूपधारिणा शिवेन सह अर्जुनस्य युद्धम् आश्रित्य निबद्धम्। पञ्चदशसर्गे चित्रकाव्यस्य, पञ्चमसर्गे च प्रकृतिवर्णनस्य उत्कर्षः द्रष्टव्यः।
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Q52. अधोलिखितेषु वाक्येषु सर्वोपयुक्तं शुद्धं वाक्यमस्ति –
Right Answer: एके मृताः अपरे पलायिताः।
Explanation:
अत्र तृतीयः विकल्पः एव शुद्धः, यतो हि ‘एके मृताः अपरे पलायिताः’ इत्यत्र लिङ्गवचनपुरुषाणां सामञ्जस्यं सम्यक् विद्यते। प्रथमे विकल्पे ‘सा’ इति स्त्रीलिङ्गैकवचनं सर्वनाम ‘बालकाः’ इति पुंल्लिङ्गबहुवचनेन सह असङ्गतम्। द्वितीये विकल्पे ‘ते’ इति पुंल्लिङ्गं ‘बालिकाः’ इति स्त्रीलिङ्गेन सह न सङ्गच्छते, तत्र ‘ताः बालिकाः’ इति भवितव्यम्। चतुर्थे विकल्पे ‘वन’ शब्दः नपुंसकलिङ्गः, अतः ‘एकस्यां वने’ इति न शुद्धम्, ‘एकस्मिन् वने’ इति भवितव्यम्।
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Q53. ‘वो तो गुणवचनात्’ सूत्रेण प्रत्ययो भवति –
Right Answer: ङीष्
Explanation:
‘वोतो गुणवचनात्’ इति पाणिनीयसूत्रेण गुणवाचिनः उकारान्तात् प्रातिपदिकात् स्त्रियां विकल्पेन ‘ङीष्’ प्रत्ययः भवति। अत्र ‘वा’ इति पदात् विकल्पः सूचितः, अतः पक्षे टाप् अपि भवति। यथा पटु इति गुणवाचकात् पट्वी पटुः वा, मृदु इत्यस्मात् मृद्वी मृदुः वा, लघु इत्यस्मात् लघ्वी लघुः वा। ङीष् इत्यत्र षकारः इत्संज्ञकः, तेन ‘षिद्गौरादिभ्यश्च’ इत्यादिकार्याणि सिध्यन्ति, ईकारमात्रं च शिष्यते। गुणवचनत्वाभावे तु इदं सूत्रं न प्रवर्तते।
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Q54. ‘‘अद्य हि वेदा विच्छिद्य वीथीषु विक्षिप्यन्ते। धर्मशास्त्राण्युद्धूय धूमध्वजेषु ध्मायन्ते। पुराणानि पिष्ट्वा पानीयेषु पात्यन्ते। भाष्याणि भ्रंशयित्वा भ्राष्टेषु भर्ज्यन्ते।’’ अशोऽयं कस्माद्ग्रन्थादुद्धृतोऽस्ति –
Right Answer: शिवराजविजयात्
Explanation:
अयम् अंशः अम्बिकादत्तव्यासविरचितात् ‘शिवराजविजय’ इति गद्यकाव्यात् उद्धृतः। एतत् आधुनिकसंस्कृतगद्यसाहित्यस्य प्रथमम् ऐतिहासिकम् उपन्यासरूपं काव्यं मन्यते, यत्र छत्रपतिशिवाजिमहाराजस्य पराक्रमः विस्तरेण वर्णितः। अस्मिन् ग्रन्थे बाणभट्टस्य कादम्बर्याः शैली अनुसृता, दीर्घसमासाः, अनुप्रासबहुलता, ओजोगुणश्च प्रचुरतया प्रयुक्ताः। प्रदत्ते अंशे तत्कालीनस्य धार्मिकस्य अत्याचारस्य मार्मिकं चित्रणं विद्यते, यत्र वेदानां धर्मशास्त्राणां पुराणानां भाष्याणां च विनाशः सानुप्रासं वर्णितः।
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Q55. ‘गोदः, कम्बलदः’ अत्र ‘क’ प्रत्ययविधायक- सूत्रमस्ति –
Right Answer: आतोऽनुपसर्गे कः
Explanation:
‘गोदः’ ‘कम्बलदः’ इत्यादिषु शब्देषु ‘क’ प्रत्ययस्य विधानम् ‘आतोऽनुपसर्गे कः’ इति पाणिनीयसूत्रेण भवति। अस्य सूत्रस्य अर्थः — आकारान्तात् धातोः उपसर्गरहितात् कर्मणि उपपदे सति ‘क’ प्रत्ययः विधीयते। यथा गाम् आददाति इति गोदः, कम्बलं ददाति इति कम्बलदः, धनं ददाति इति धनदः, जलं ददाति इति जलदः। अत्र ‘दा’ धातुः आकारान्तः, उपसर्गश्च न विद्यते, अतः सूत्रम् इदं प्रवर्तते। यदि उपसर्गः स्यात् तर्हि ‘आतश्चोपसर्गे’ इति भिन्नं सूत्रं प्रवर्तेत।
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Q56. ऋग्वेदस्य वंशमण्डलानां ऋषिभिः सह सुमेलनं कुरुत :
Right Answer: (क)-ii, (ख)-iv, (ग)-i, (घ)-iii
Explanation:
ऋग्वेदस्य द्वितीयात् सप्तमपर्यन्तानि षट् मण्डलानि वंशमण्डलानि इत्युच्यन्ते, यतो हि प्रत्येकं मण्डलम् एकस्यैव ऋषिकुलस्य सूक्तैः निबद्धम्। तत्र द्वितीयं मण्डलं गृत्समदस्य, तृतीयं विश्वामित्रस्य, चतुर्थं वामदेवस्य, पञ्चमम् अत्रेः, षष्ठं भरद्वाजस्य, सप्तमं च वसिष्ठस्य कुलेन सम्बद्धम्। एतानि मण्डलानि प्राचीनतमानि मन्यन्ते, प्रथमं दशमं च मण्डले तु परवर्तीनि। तृतीयमण्डले प्रसिद्धा गायत्री, सप्तमे च वसिष्ठस्य वरुणसूक्तानि विद्यन्ते।
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Q57. देवर्षिकलानाथशास्त्रिविरचितः आत्मकथात्मको- पन्यासोऽस्ति –
Right Answer: जीवनस्य पृष्ठद्वयम्
Explanation:
‘जीवनस्य पृष्ठद्वयम्’ इति देवर्षिकलानाथशास्त्रिविरचितः आत्मकथात्मकः उपन्यासः अस्ति। आधुनिकसंस्कृतगद्यसाहित्ये उपन्यासविधायाः विकासः विंशतितमे शतके सञ्जातः, तत्र च आत्मकथात्मकाः रचनाः विशिष्टं स्थानं भजन्ते, यतो हि तासु लेखकस्य वैयक्तिकम् अनुभवजगत् सामाजिकपरिवेशेन सह संयुज्यते। देवर्षिकलानाथशास्त्री राजस्थानप्रदेशस्य प्रसिद्धः संस्कृतसाहित्यकारः आसीत्, यस्य लेखनी गद्ये पद्ये च समानरूपेण प्रवृत्ता। तस्य कृतिषु सरला प्रवाहयुक्ता च भाषा, जीवन्तानि चरित्राणि, समकालिकसमाजस्य यथार्थचित्रणं च दृश्यन्ते।
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Q58. पं० पद्मशास्त्रिविरचिते ‘लेनिनामृतमिति’ महाकाव्ये कति सर्गाः सन्ति ?
Right Answer: द्वादश
Explanation:
‘लेनिनामृतम्’ इति पण्डितपद्मशास्त्रिविरचितम् आधुनिकं संस्कृतमहाकाव्यम् अस्ति, यत्र द्वादश सर्गाः विद्यन्ते। अस्मिन् काव्ये रूसदेशस्य क्रान्तिनायकस्य लेनिनस्य जीवनचरितं महाकाव्यशैल्या वर्णितम्। आधुनिकसंस्कृतसाहित्ये एषा प्रवृत्तिः विशेषतया द्रष्टव्या यत् कवयः प्राचीनं महाकाव्यरूपं स्वीकृत्य समकालिकान् राजनैतिकान् सामाजिकांश्च विषयान् निबध्नन्ति। अत्र परम्परागताः सर्गबन्धस्य नियमाः, विविधानि छन्दांसि, प्रकृतिवर्णनं च यथावत् पालितानि, किन्तु कथावस्तु पौराणिकं न भूत्वा आधुनिकम् ऐतिहासिकं वर्तते।
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Q59. ‘‘नानाश्लेष-प्रकरणचणा, चारुवर्णोज्वलान्नो, नाना भावा-कलितरसिक-श्रेणिकान्तान्तर ङ्गाः।।’’ श्लोकांशे छन्दोऽस्ति –
Right Answer: मन्दाक्रान्ता
Explanation:
मन्दाक्रान्ता छन्दसि प्रतिचरणं सप्तदश वर्णाः भवन्ति। तस्य गणविन्यासः ‘म भ न त त’ इति पञ्चगणाः, तदनन्तरं गुरुद्वयं च भवति। यतिः चतुर्थे षष्ठे सप्तमे च वर्णे विधीयते, अतः लक्षणम् ‘मन्दाक्रान्ताम्बुधिरसनगैर्मो भनौ तौ गयुग्मम्’ इत्युच्यते। कालिदासस्य मेघदूतम् अस्मिन्नेव छन्दसि निबद्धम्, यथा ‘कश्चित्कान्ताविरहगुरुणा स्वाधिकारात्प्रमत्तः’। प्रश्ने प्रदत्तस्य श्लोकांशस्य ‘नानाश्लेषप्रकरणचणा’ इति गतिः तेनैव सह पूर्णतया मिलति, अतः अत्र मन्दाक्रान्ता छन्दः विद्यते।
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Q60. आभ्यां (प्रत्याङ्भ्यां) परस्य शृणोतेर्योगे पूर्वस्य प्रवर्तनारूपस्य व्यापारस्य कर्ता भवति –
Right Answer: सम्प्रदानम्
Explanation:
पाणिनेः ‘प्रत्याङ्भ्यां श्रुवः पूर्वस्य कर्ता’ इति सूत्रेण एषा संज्ञा विधीयते। यत्र ‘प्रति’ ‘आङ्’ इत्येताभ्याम् उपसर्गाभ्यां युक्तः ‘श्रु’ धातुः प्रयुज्यते, तत्र पूर्ववर्तिनः प्रवर्तनारूपस्य व्यापारस्य यः कर्ता, सः सम्प्रदानसंज्ञकः भवति, न तु कर्मसंज्ञकः। यथा ‘माणवकः आचार्यं प्रतिशृणोति’ इत्यत्र प्रवर्तनायाः कर्ता आचार्यः सम्प्रदानम्, अतः ‘आचार्याय प्रतिशृणोति’ इत्यपि प्रयोगः सिध्यति। सम्प्रदाने चतुर्थी इति नियमात् तत्र चतुर्थी विभक्तिः प्रयुज्यते। एवमेव ‘आशृणोति’ इत्यत्रापि बोध्यम्।
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