HTET Biology PGT 2024 Solved Exam Paper
HTET Biology PGT 2024 Solved Exam Paper: 150 Questions with Answers
HTET Biology PGT 2024 Solved Exam Paper: Exam Pattern and Preparation Notes

HTET is conducted by the Board of School Education Haryana (BSEH), Bhiwani, and PGT Biology falls under HTET Level 3, for candidates teaching Classes IX to XII. Like every HTET level, this paper has 150 multiple-choice questions worth 150 marks, completed in 150 minutes, with no negative marking. Check the official BSEH website for the current year's notification before you register.
The PGT Biology paper mixes Child Development and Pedagogy questions with the subject-specific portion, which usually spans botany, zoology, human physiology, genetics, and ecology, along with biology teaching methodology. Since there's no negative marking, attempt every question rather than leaving doubtful ones blank; a guess costs nothing while a blank answer guarantees zero.
Biology PGT candidates often lose marks on diagram-based and classification questions rather than straightforward recall questions, because textbooks present classification tables differently than exam papers phrase them. Read each option carefully before choosing, since HTET papers frequently include two answers that look almost identical except for one term.
If you're also preparing for other Biology teaching posts such as KVS PGT Biology or DSSSB PGT Biology, the core subject portion overlaps heavily with HTET, so this solved paper doubles as preparation for those exams too. Compare this paper's difficulty with our HTET Chemistry PGT 2024 Solved Exam Paper if you're preparing for more than one PGT science subject, since the pedagogy section is identical across all HTET PGT papers.
Most first-time HTET PGT Biology candidates underestimate how much of the paper is pedagogy and general awareness rather than pure Biology content. Roughly a third of the 150 questions typically fall outside the core subject portion, covering child development, teaching methods, and general knowledge about Haryana and education policy. If you've spent all your revision time on Biology textbooks and none on pedagogy, you're likely to lose more marks there than you expect. Balance your remaining study time accordingly, and use this solved paper specifically to gauge how comfortable you are with the non-Biology sections, not just the subject questions.
Solve this 2024 paper under real exam conditions: set a 150-minute timer, attempt every question in one sitting, and check the answer key only once you've finished. Note down which topics cost you the most marks, whether it's genetics numericals, classification, or pedagogy, and revise those specifically before your next attempt rather than rereading the whole syllabus equally.
HTET Biology PGT 2024 (Level-3) का हल सहित प्रश्न पत्र। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा आयोजित हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के जीव विज्ञान विषय (भाग-IV) के सभी प्रश्न, चारों विकल्प, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या के साथ।
Your Progress
0%Psychology (30 Questions)
Q1. मैक्डूगल के अनुसार, 'घृणा' का संवेग किस मूल प्रवृत्ति के साथ जुड़ा हुआ है ?
Right Answer: निवृत्ति
Explanation:
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने मनोविज्ञान में 'मूल प्रवृत्तियों का सिद्धान्त' (Theory of Instincts) प्रतिपादित किया था। उनका मानना था कि मनुष्य के हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई मूल प्रवृत्ति होती है।
मैकडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृत्तियाँ (Instincts) बताई हैं और स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के जाग्रत होने पर एक विशेष संवेग (Emotion) उत्पन्न होता है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर मूल प्रवृत्ति और उनसे जुड़े संवेगों का सही मिलान इस प्रकार है:
(1) निवृत्ति (Repulsion) ➔ घृणा (Disgust) : जब इंसान के सामने कोई सड़ी-गली, खराब या अप्रिय वस्तु/स्थिति आती है, तो वह उससे दूर हटना (निवृत्ति) चाहता है। इस मूल प्रवृत्ति के कारण हमारे अंदर 'घृणा' का संवेग पैदा होता है। (यही इस प्रश्न का सही उत्तर है)।
(2) पलायन (Escape) ➔ भय (Fear) : जब किसी खतरनाक स्थिति का सामना होता है, तो इंसान के अंदर 'भय' या डर का संवेग उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह वहाँ से भागने (पलायन) की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
(3) युयुत्सा (Combat) ➔ क्रोध (Anger) : युयुत्सा का अर्थ है युद्ध करने या लड़ने की इच्छा। यह मूल प्रवृत्ति तब जाग्रत होती है जब व्यक्ति के भीतर 'क्रोध' (गुस्सा) का संवेग हावी होता है।
(4) जिज्ञासा (Curiosity) ➔ आश्चर्य (Wonder) : जब हम कोई नई, अनोखी या रहस्यमयी चीज़ देखते हैं तो हमें 'आश्चर्य' का संवेग महसूस होता है, जो हमारे अंदर उस चीज़ के बारे में और अधिक जानने की 'जिज्ञासा' (मूल प्रवृत्ति) पैदा करता है।
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Q2. सीखने की परिस्थिति में सुसंगत तथ्यों को असुसंगत तथ्यों से अलग करके प्रस्तुत करना, सीखने के किस नियम का परिचायक है ?
Right Answer: तत्त्व प्रबलता का नियम
Explanation:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ई. एल. थार्नडाइक (E. L. Thorndike) के सीखने के नियमों (Laws of Learning) से संबंधित है। थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य (Primary) नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए थे। यह प्रश्न उनके गौण नियमों पर आधारित है।
(3) तत्त्व प्रबलता का नियम (Principle of prepotency of elements): इसे 'आंशिक क्रिया का नियम' (Law of Partial Activity) भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति या अधिगमकर्ता किसी नई परिस्थिति या समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति पर आँख मूंदकर प्रतिक्रिया करने के बजाय, उसके सबसे महत्वपूर्ण या सुसंगत (Relevant) तत्वों को पहचानता है और अनावश्यक या असुसंगत (Irrelevant) तत्वों को छोड़ देता है। सुसंगत तथ्यों को अलग करके प्रस्तुत करना इसी नियम का हिस्सा है, ताकि बच्चा केवल काम की बातों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
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Q3. समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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Q4. बण्डूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धान्त के सोपानों को क्रम से व्यवस्थित कीजिए :
Right Answer: (a), (c), (d), (b)
Explanation:
अल्बर्ट बण्डूरा (Albert Bandura) ने सामाजिक अधिगम का सिद्धान्त (Social Learning Theory) प्रतिपादित किया था, जिसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) या 'मॉडलिंग' (Modeling) भी कहा जाता है।
बण्डूरा के अनुसार, बच्चे या व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। किसी भी नए व्यवहार को देखकर सीखने की इस प्रक्रिया को बण्डूरा ने चार मुख्य सोपानों (चरणों) में बाँटा है, जिनका सही क्रम इस प्रकार है:
1. अवधान या प्रत्यक्षीकरण (Attention / Perception of behaviour) - (a) सीखने की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति किसी मॉडल (जैसे- शिक्षक, माता-पिता, या टीवी का कोई पात्र) के व्यवहार को पूरे ध्यान से देखता है और उसे समझता (प्रत्यक्षीकरण) है। बिना ध्यान दिए कोई भी व्यवहार सीखा नहीं जा सकता।
2. धारण या स्मरण (Retention / Remember of behaviour) - (c) मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखने के बाद, व्यक्ति उस व्यवहार को अपने मस्तिष्क में स्मृति (Memory) के रूप में सुरक्षित कर लेता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे याद किया जा सके।
3. पुनरुत्पादन या क्रियात्मक परिणति (Reproduction / Convert the memory into action) - (d) इस चरण में व्यक्ति अपने मस्तिष्क में याद की गई बातों (स्मरण) को वास्तविक शारीरिक क्रिया या व्यवहार में बदलने का प्रयास करता है। यानी वह वैसा ही करने की कोशिश करता है जैसा उसने मॉडल को करते हुए देखा था।
4. अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation / Reinforcement of behaviour) - (b) अंतिम चरण में यह तय होता है कि व्यक्ति उस सीखे गए व्यवहार को भविष्य में दोहराएगा या नहीं। यदि मॉडल के समान व्यवहार करने पर व्यक्ति को समाज से तारीफ, पुरस्कार या सकारात्मक 'पुनर्बलन' मिलता है, तो वह उस व्यवहार को अपना लेता है। यदि उसे डांट या सजा मिलती है, तो वह उस व्यवहार को छोड़ देता है।
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Q5. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?
Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत
Explanation:
प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।
इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
- अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
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Q6. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :
Right Answer: संतुलनीकरण
Explanation:
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:
- आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
- उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
- समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
- उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
- संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
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Q7. सर्जनशील बच्चों की पहचान हेतु शिक्षक द्वारा कौन-से परीक्षण प्रशासित किए जा सकते हैं ?
Right Answer: (a), (b) एवं (d)
Explanation:
सर्जनशील (Creative) बच्चों की पहचान करने के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और नवीनता का मापन किया जाता है। दिए गए परीक्षणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(a) आकृति निर्माण परीक्षण (Figure construction test): यह परीक्षण सृजनात्मकता को मापता है। इसमें बच्चे को कुछ बुनियादी आकार (जैसे गोला, त्रिभुज) दिए जाते हैं और उनसे कोई नई और मौलिक आकृति बनाने को कहा जाता है।
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण (Product improvement test): यह भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख परीक्षण है। इसमें बच्चे को कोई साधारण वस्तु या खिलौना दिया जाता है और पूछा जाता है कि इसे और अधिक मजेदार या उपयोगी बनाने के लिए इसमें क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण (Usual uses test): यह विकल्प गलत है। सृजनात्मकता मापने के लिए 'अप्रचलित या नवीन उपयोग परीक्षण' (Unusual uses test) का प्रयोग किया जाता है (जैसे- ईंट के नए-नए उपयोग बताना)। 'प्रचलित' (Usual) उपयोग बताना सामान्य बुद्धि या स्मृति का हिस्सा है, सृजनात्मकता का नहीं।
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण (Picture completion test): यह सृजनात्मकता का एक महत्वपूर्ण अशाब्दिक परीक्षण है। इसमें अधूरी रेखाओं या चित्रों को पूरा करके एक अर्थपूर्ण और मौलिक चित्र बनाने के लिए कहा जाता है।
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Q8. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या
लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:
- (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
- (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
- (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
- (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-सी समावेशी शिक्षा की एक विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह अशक्त बच्चों की विशिष्ट शिक्षा तक सीमित रहती है
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'सभी के लिए शिक्षा' है। यह केवल अशक्त (विकलांग/दिव्यांग) बच्चों तक सीमित नहीं है। समावेशी शिक्षा का अर्थ है—सामान्य बच्चों, अशक्त बच्चों, प्रतिभाशाली बच्चों और समाज के हर वर्ग (विभिन्न भाषा, जाति, धर्म) के बच्चों को एक ही नियमित कक्षा में एक साथ बैठाकर पढ़ाना।
केवल अशक्त बच्चों को अलग से पढ़ाना "विशिष्ट शिक्षा" (Special Education) कहलाता है, जो समावेशी शिक्षा के बिल्कुल विपरीत अवधारणा है। इसलिए यह कथन समावेशी शिक्षा की विशेषता नहीं है।
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Q10. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?
Right Answer: परिपक्वता
Explanation:
परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।
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Q11. निम्नलिखित में से कौन-सी सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: केवल शैक्षिक उपलब्धि को मापना
Explanation:
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation) में "व्यापक" (Comprehensive) शब्द का स्पष्ट अर्थ छात्र के सर्वांगीण विकास (all-round development) का आकलन करना है। इस रूपरेखा के अनुसार मूल्यांकन में शैक्षिक (Scholastic - जैसे गणित, विज्ञान और भाषाएं) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic - जैसे जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल और कला) दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाना अनिवार्य है। केवल अकादमिक प्रदर्शन या शैक्षिक उपलब्धि को मापना CCE प्रणाली के "व्यापक" लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।
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Q12. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रगतिशील शिक्षा का एक घटक नहीं है ?
Right Answer: स्मरण
Explanation:
जॉन डीवी (John Dewey) जैसे शिक्षाविदों द्वारा समर्थित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) रटने (rote learning) और तथ्यों को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने का कड़ा विरोध करती है। स्मरण का मुख्य ध्यान किसी भी जानकारी के व्यावहारिक उपयोग को समझे बिना उसे केवल दोहराने और याद करने पर होता है। यह प्रगतिशील शिक्षा के मूल दर्शन के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली पाठ्यपुस्तक की सामग्री को रटने के बजाय आलोचनात्मक सोच (critical thinking), समस्या-समाधान (problem-solving) और गहरी वैचारिक समझ (conceptual understanding) को प्राथमिकता देती है।
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Q13. श्रवण बाधित बच्चों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुदेशन का तरीका उपयुक्त है?
Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)
Explanation:
व्याख्या: ये सभी तकनीकें क्यों उपयुक्त हैं?
- (a) सांकेतिक भाषा (Sign Language): यह श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचार का सबसे प्राथमिक और प्राकृतिक माध्यम है। इसमें हाथों के संकेतों, चेहरे के हाव-भाव और शरीर की भाषा का उपयोग करके विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
- (b) अंगुली वर्तनी (Finger Spelling): इसमें हाथों की उंगलियों के आकार का उपयोग करके वर्णमाला के अक्षरों को दर्शाया जाता है। यह उन शब्दों (जैसे नाम, विशिष्ट तकनीकी शब्द) के लिए बहुत उपयोगी है जिनका कोई विशिष्ट सांकेतिक चिन्ह नहीं होता।
- (c) ओष्ठ पठन (Lip Reading): इसमें बच्चा वक्ता के होंठों की हलचल को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि क्या कहा जा रहा है। यह बच्चों को समाज में संवाद करने में बहुत मदद करता है।
- (d) संकेतित भाषण (Cued Speech): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें भाषण (speech) को स्पष्ट करने के लिए हाथों के संकेतों (cues) का उपयोग किया जाता है। यह होंठों के आकार (lip shapes) और हाथों के संकेतों को मिलाता है, ताकि बच्चा ध्वनियों के बीच अंतर कर सके जो दिखने में एक जैसे लगते हैं (जैसे 'p' और 'b')।
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Q14. 'लेखन क्षमता का एक विकार जिसमें अधिगमकर्ता को अक्षर निर्माण, वर्तनी, गत्यात्मक समन्वय आदि में कठिनाई होती है' यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिस्ग्राफिया
Explanation:
डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है जो मुख्य रूप से लेखन (writing) से संबंधित होती है।
जैसा कि आपने उल्लेख किया, इस विकार से ग्रसित अधिगमकर्ता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- अक्षर निर्माण (Letter Formation): अक्षरों को सही आकार या बनावट में लिखने में कठिनाई।
- वर्तनी (Spelling): शब्दों की वर्तनी में गलतियाँ करना।
- गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination): हाथ और उंगलियों के सूक्ष्म समन्वय में कमी, जिससे कलम पकड़ने और लिखने में समस्या होती है।
- लेखन की गति: लिखने की गति का बहुत धीमा होना या लिखने के दौरान हाथ में जल्दी थकान महसूस होना।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
- डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह पढ़ने से संबंधित विकार है। इसमें बच्चे को अक्षरों को पहचानने, शब्दों को पढ़ने या वाक्यों को समझने में कठिनाई होती है।
- डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia): यह शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) से संबंधित विकार है। इसमें व्यक्ति को शारीरिक संतुलन बनाने, बोलने या सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों (जैसे बटन लगाना या जूते के फीते बांधना) में कठिनाई होती है। (नोट: लेखन में कठिनाई इसका एक उप-हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्य परिभाषा लेखन विकार के लिए 'डिस्ग्राफिया' ही है।)
- डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia): यह गणित से संबंधित विकार है। इसमें संख्याओं को समझने, गणना (calculation) करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई होती है।
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Q15. निम्नलिखित में से कौन-सी सीखने की बाल केन्द्रित विधि नहीं है ?
Right Answer: प्रदर्शन
Explanation:
शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षण विधियों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और बाल-केंद्रित (Child-centered)।
प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह मुख्य रूप से शिक्षक-केंद्रित होती है। इसमें शिक्षक स्वयं किसी प्रक्रिया, प्रयोग या उपकरण का प्रदर्शन (Demonstrate) करता है, जबकि छात्र उसे ध्यानपूर्वक देखते हैं। यहाँ सीखने की प्रक्रिया में छात्र की भूमिका मुख्य रूप से एक 'दर्शक' (Observer) की होती है, न कि 'सक्रिय सहभागी' (Active participant) की। इसीलिए इसे बाल-केंद्रित नहीं माना जाता।
अन्य विकल्प बाल-केंद्रित क्यों हैं?
(2) क्षेत्र भ्रमण (Field Trip): इसमें छात्र प्रत्यक्ष रूप से वातावरण में जाकर अनुभव प्राप्त करते हैं। यह पूर्णतः अनुभव-आधारित और छात्र-सक्रियता पर केंद्रित है।
(3) अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction): यह व्यक्तिगत गति (Self-pacing) पर आधारित विधि है। इसमें छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री को छोटे-छोटे चरणों में पढ़कर और अभ्यास करके सीखता है। शिक्षक की भूमिका यहाँ केवल एक मार्गदर्शक की होती है।
(4) प्रायोजना (Project Method): यह विधि 'करके सीखने' (Learning by doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें छात्र अपनी रुचि और समस्या समाधान के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक होती है।
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Q16. उच्च माध्यमिक स्तर के अधिगमकर्ताओं के लिए सीखने की कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: अधिगम कार्य स्मृति स्तर पर करना
Explanation:
शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (Memory Level), अवबोध स्तर (Understanding Level), और चिंतन स्तर (Reflective Level)।
- स्मृति स्तर (Memory Level): यह शिक्षण का सबसे निचला स्तर है, जो केवल रटने (Rote Learning) और तथ्यों को याद रखने पर केंद्रित होता है। उच्च माध्यमिक स्तर (11वीं-12वीं कक्षा) के विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं, जहाँ उनकी बौद्धिक क्षमताएं विकसित हो चुकी होती हैं। इस स्तर पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे केवल तथ्यों को याद न करें, बल्कि उनका विश्लेषण करें और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करें। इसलिए, केवल स्मृति स्तर तक सीमित रहना उनके लिए अनुपयुक्त और अपर्याप्त है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये क्यों उपयुक्त हैं?):
(2) ज्ञान की स्वयं खोज करने देना: यह 'डिस्कवरी लर्निंग' (Discovery Learning) पर आधारित है। उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।
(3) कक्षा अन्तःक्रिया को उचित स्थान देना: जब विद्यार्थी चर्चा करते हैं और एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी होती है। यह सामाजिक अधिगम (Social Learning) को बढ़ावा देता है।
(4) शिक्षण-अधिगम विद्यार्थी केन्द्रित होना: आधुनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित (Student-centered) है। इसका अर्थ है कि शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों और उनकी सीखने की गति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल शिक्षक के व्याख्यान पर आधारित।
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Q17. फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त के अनुसार, वह अवस्था जिसमें किशोर विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं, उसे कहा जाता है :
Right Answer: जनन अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) में पांच अवस्थाएं हैं। किशोर अवस्था (adolescence) में होने वाले परिवर्तनों के लिए जनन अवस्था ही जिम्मेदार है:
- जनन अवस्था (Genital Stage): यह अवस्था किशोरावस्था से शुरू होती है और जीवन के अंत तक चलती है। इस चरण की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की कामेच्छा (libido) फिर से जागृत होती है, लेकिन इस बार उसका ध्यान अपने स्वयं के शरीर के बजाय विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने और यौन परिपक्वता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है। किशोरों में सामाजिक और यौन आकर्षण इसी चरण का हिस्सा है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
- लिंग अवस्था (Phallic Stage - 3 से 6 वर्ष): यहाँ बच्चा अपने लिंग के प्रति जागरूक होता है। इसमें 'ओडिपस' (Oedipus) और 'इलेक्ट्रा' (Electra) ग्रंथियाँ विकसित होती हैं।
- गुदा अवस्था (Anal Stage - 1 से 3 वर्ष): इस अवस्था में बच्चा मल-त्याग के नियंत्रण (potty training) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- अव्यक्त अवस्था (Latency Stage - 6 वर्ष से यौवनारंभ तक): यह एक शांत अवस्था है जहाँ यौन भावनाएं दब जाती हैं और बच्चा सामाजिक कौशल और स्कूल के कार्यों पर ध्यान देता है।
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Q18. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?
Right Answer: दर्द परिवर्जन
Explanation:
अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या
मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)।
दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?
दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।
अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?
अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।
- (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
- (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
- (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।
चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।
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Q19. वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धान्त के सही अनुक्रम (ऊपर से नीचे) का चयन कीजिए :
Right Answer: सामान्य कारक -> लघु कारक -> प्रमुख कारक -> विशिष्ट कारक
Explanation:
1. सामान्य कारक (General Factor - g)
- शीर्ष स्तर: पदानुक्रम के सबसे ऊपर सामान्य कारक होता है।
- इसका अर्थ: यह किसी व्यक्ति की समग्र मानसिक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है। यह एक ऐसी सामान्य बुद्धि है जिसका उपयोग व्यक्ति हर प्रकार के मानसिक या संज्ञानात्मक कार्यों (cognitive tasks) में करता है।
2. प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors)
- दूसरा स्तर: सामान्य कारक आगे चलकर दो मुख्य व्यापक श्रेणियों में विभाजित हो जाता है।
- इसका अर्थ: वर्नन ने दो प्रमुख समूह कारक बताए हैं:
- शाब्दिक-शैक्षिक (v:ed): स्कूली शिक्षा, भाषा, पढ़ने-लिखने और गणित से संबंधित क्षमताएं।
- स्थानिक-यांत्रिक (k:m): व्यावहारिक, शारीरिक और यांत्रिक (mechanical) क्षमताएं, जिनमें दिशाओं और आकृतियों की समझ (spatial awareness) शामिल है।
3. लघु समूह कारक (Minor Group Factors)
- तीसरा स्तर: प्रमुख समूह कारक आगे छोटे और अधिक विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित होते हैं।
- इसका अर्थ: उदाहरण के लिए, 'शाब्दिक-शैक्षिक' कारक आगे चलकर मौखिक प्रवाह (verbal fluency), संख्यात्मक क्षमता (numerical ability), या तार्किक सोच जैसे लघु कारकों में बंट सकता है। इसी तरह स्थानिक-यांत्रिक कारक यांत्रिक समझ या हस्त-कौशल में बंट सकता है।
4. विशिष्ट कारक (Specific Factors - s)
- निचला स्तर: पदानुक्रम के सबसे निचले आधार पर विशिष्ट कारक होते हैं।
- इसका अर्थ: ये किसी एक विशेष कार्य या परीक्षण को करने के लिए आवश्यक अत्यंत विशिष्ट क्षमताएं हैं (जैसे बीजगणित के किसी विशेष समीकरण को हल करने की क्षमता या किसी खास मशीन के पुर्जे जोड़ने की क्षमता)।
संक्षेप में, वर्नन का मानना था कि यद्यपि हम सभी में एक अंतर्निहित सामान्य बुद्धि होती है, लेकिन व्यवहार में यह पहले व्यापक कौशल (प्रमुख), फिर संकीर्ण कौशल (लघु), और अंततः विशिष्ट कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल में फ़िल्टर हो जाती है।
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Q20. समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के किस संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है ?
Right Answer: शिक्षा का अधिकार
Explanation:
सही है: भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-A के तहत "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education - RTE) एक मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जाति, धर्म, लिंग या शारीरिक/मानसिक क्षमता के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। समावेशी शिक्षा इसी संवैधानिक अधिकार को धरातल पर लागू करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि दिव्यांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) मुख्यधारा के स्कूलों से बाहर न रहें।
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Q21. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?
Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं
Explanation:
'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।
(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।
(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।
(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।
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Q22. निम्नलिखित में से प्रश्नों का कौन-सा प्रकार विद्यार्थियों के भावों की अभिव्यक्ति एवं तार्किक चिंतन की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: बहु विकल्पात्मक प्रकार
Explanation:
इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार के प्रश्न भावों की अभिव्यक्ति (Expression of feelings) और तार्किक चिंतन (Logical thinking) को जाँचने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
बहु विकल्पात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs): ये प्रश्न 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं। इसमें विद्यार्थी को दिए गए विकल्पों में से केवल एक सही उत्तर चुनना होता है। यहाँ विद्यार्थी के पास अपने विचारों, भावनाओं या तर्क को विस्तार से रखने का कोई अवसर नहीं होता। यह केवल स्मृति (Memory) और पहचान (Recognition) की जाँच करता है, न कि सृजनात्मक या तार्किक चिंतन की। इसीलिए यह "उपयुक्त नहीं" है।
विश्लेषणात्मक (Analytical), समालोचनात्मक (Critical) और विवेचनात्मक (Discussion) प्रकार:
- ये प्रश्न 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
- इनमें छात्र को समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है, अपने तर्क (Logic) देने होते हैं और अपने विचारों (Feelings/Perspective) को विस्तार से लिखना होता है।
- ये तीनों प्रकार उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills - HOTS) विकसित करने के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
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Q23. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता का कारण सामाजिक वातावरण होता है, भौतिक वातावरण नहीं।
Explanation:
(1) सही है: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ ही है कि हर व्यक्ति दूसरे से अलग है, चाहे वह बुद्धि/ज्ञान (Cognitive) के स्तर पर हो या कार्य करने की क्षमता (Psychomotor) के स्तर पर।
(2) सही है: किसी व्यक्ति की प्रजाति (Species) या आनुवंशिकता (Heredity) उसके विकास और विशेषताओं को प्रभावित करती है, जो वैयक्तिक भिन्नता का एक आधार है।
(3) गलत है: यह कथन गलत है क्योंकि यह अधूरा है। वैयक्तिक भिन्नता केवल सामाजिक वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक (भौगोलिक, प्राकृतिक, जलवायु आदि) दोनों प्रकार के वातावरण का परिणाम होती है। भौतिक वातावरण भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, विकास और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। चूँकि यह कथन "भौतिक वातावरण को नकारता है" (not the physical environment), इसलिए यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।
(4) सही है: जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसके अनुभव, सोच और क्षमताएं बदलती हैं। आयु के बढ़ने के साथ-साथ दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता और अधिक स्पष्ट हो जाती है।
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Q24. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।
Explanation:
(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।
(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।
(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।
(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।
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Q25. विद्यार्थियों की समग्र उपलब्धि और प्रवीणता का मूल्यांकन करने के लिए, सीखने की अवधि के अंत में अभिकल्पित मूल्यांकन कहलाता है :
Right Answer: सीखने का मूल्यांकन
Explanation:
मूल्यांकन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है:
- सीखने का मूल्यांकन (Assessment of Learning): यह मूल्यांकन सीखने की अवधि के अंत में (जैसे सत्र के अंत में, फाइनल परीक्षा में) किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र ने निर्धारित समय में कितना और क्या सीखा है। यह आमतौर पर 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) का हिस्सा होता है। चूँकि आपका प्रश्न "अवधि के अंत" की बात कर रहा है, इसलिए सही उत्तर (1) है।
- सीखने के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): यह मूल्यांकन सीखने की प्रक्रिया के दौरान (जैसे क्लास में पढ़ाते समय सवाल पूछना) किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की कमियों को सुधारना होता है। यह 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) का हिस्सा होता है।
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Q26. बच्चों में सामाजीकरण को बढ़ावा देने में शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सहायक नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक परियोजना कार्य देना
Explanation:
सामाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों, और व्यवहारों को सीखते हैं और अन्य लोगों के साथ घुलना-मिलना सीखते हैं। एक शिक्षक का उद्देश्य कक्षा में ऐसे अवसर प्रदान करना होता है जिससे बच्चे एक-दूसरे से जुड़ सकें।
(1) वैयक्तिक परियोजना कार्य देना (Individual Project Work): जब शिक्षक किसी बच्चे को 'व्यक्तिगत' या 'अकेले' करने वाला प्रोजेक्ट देता है, तो बच्चा केवल अपने आप तक सीमित रहता है। इसमें उसे अन्य बच्चों के साथ बातचीत या सहयोग करने का मौका नहीं मिलता। इसलिए, यह सामाजीकरण को बढ़ावा देने में सहायक नहीं है।
(2) सामाजिक जिम्मेदारियाँ सौंपना: (जैसे- क्लास मॉनिटर बनाना या ग्रुप लीडर बनाना) इससे बच्चों में नेतृत्व और सहयोग की भावना आती है, जो सामाजीकरण को बढ़ाता है।
(3) सह-पाठ्यगामी गतिविधियों का आयोजन करना: (जैसे- खेलकूद, नाटक, या सांस्कृतिक कार्यक्रम) इनमें बच्चे समूह में काम करते हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास होता है।
(4) सामाजिक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करना: बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना सामाजीकरण का प्रत्यक्ष तरीका है।
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Q27. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: थायमस ग्रंथि
Explanation:
मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं।
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Q28. निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: (a), (c) एवं (d)
Explanation:
इस प्रश्न को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी "लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ" (Gender Biased Practices) शैक्षिक अभ्यासों (Classroom Practices) में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए।
यहाँ प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण दिया गया है:
- (a) सजातीय समूहन (Homogeneous Grouping): लिंग के आधार पर लड़के और लड़कियों के अलग-अलग समूह बनाना (जैसे- लड़कों का अलग ग्रुप, लड़कियों का अलग ग्रुप)। यह एक पक्षपातपूर्ण क्रिया है, जो बच्चों में दूरियां बढ़ाती है। इसे कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु (Gender-Neutral Content): ऐसी पाठ्यपुस्तकें या सामग्री जिसमें लड़के और लड़कियों को समान रूप से प्रस्तुत किया गया हो (जैसे- पाठ में महिला को डॉक्टर और पुरुष को खाना बनाते हुए दिखाना)। यह एक सकारात्मक और अच्छी क्रिया है। इसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए (यह पक्षपातपूर्ण नहीं है)।
- (c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन (Stereotypical Vocational Guidance): बच्चों को उनके लिंग के आधार पर करियर की सलाह देना (जैसे- लड़कियों को कहना कि तुम गृह विज्ञान या नर्सिंग चुनो, और लड़कों को इंजीनियरिंग या सेना में जाने को कहना)। यह पूरी तरह से लैंगिक पक्षपात है, इसे शिक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति (Biased Attitude of Teacher): शिक्षक का यह सोचना कि "लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में।" यह पूर्वाग्रह बच्चों के विकास को रोकता है, इसलिए इसे भी कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
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Q29. निम्नलिखित में से कौन आनुवंशिकता से प्रभावित नहीं होता ?
Right Answer: अभिवृत्ति
Explanation:
यहाँ सभी विकल्पों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति आनुवंशिकता (Heredity) से प्रभावित क्यों नहीं होती:
- (1) अभिक्षमता (Aptitude): अभिक्षमता का अर्थ है किसी विशिष्ट कार्य या क्षेत्र (जैसे- संगीत, गणित, या कला) में कौशल सीखने की जन्मजात क्षमता या योग्यता। यह काफी हद तक आनुवंशिकता और जैविक कारकों से प्रभावित होती है।
- (2) अभिवृत्ति (Attitude): अभिवृत्ति (या दृष्टिकोण) किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक सोचने और महसूस करने का एक तरीका है। यह पूरी तरह से अर्जित (Learned) होती है। बच्चा अपने परिवार, समाज, संस्कृति और अनुभवों (वातावरण) से सीखता है कि उसे किस चीज़ के प्रति कैसा नज़रिया रखना है। इसका आनुवंशिकता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
- (3) संवेग (Emotion): संवेगात्मक प्रवृत्तियाँ (जैसे- जल्दी क्रोधित होना, शांत रहना, या डरना) व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) से जुड़ी होती हैं। मूल स्वभाव का एक बड़ा हिस्सा आनुवंशिक बनावट और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर निर्भर करता है।
- (4) अभिरुचि (Interest): यद्यपि अभिरुचि वातावरण से बहुत अधिक प्रभावित होती है, लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध) में पाया गया है कि कुछ चीज़ों में रुचि रखने का झुकाव (जैसे- अंतर्मुखी या बहिर्मुखी गतिविधियाँ) व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना से भी थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
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Q30. सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a) एवं (c)
Explanation:
- कथन (a) "बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं" – यह कथन सत्य नहीं है। बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और वातावरण (Environment) दोनों की परस्पर क्रिया (Interaction) महत्वपूर्ण होती है। केवल एक को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। अच्छा वातावरण मिलने पर बुद्धि का बेहतर विकास होता है।
- कथन (b) "लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। महिला या पुरुष होने से किसी की बुद्धि कम या ज़्यादा नहीं होती। आधुनिक मनोविज्ञान यह स्पष्ट मानता है कि लिंग के आधार पर बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता।
- कथन (c) "तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है" – यह कथन पूरी तरह सत्य नहीं माना जाता। स्मरणशक्ति (Memory) और बुद्धि (Intelligence) दो अलग-अलग मानसिक क्षमताएं हैं। कोई व्यक्ति चीज़ों को बहुत जल्दी रट या याद रख सकता है (तीव्र स्मरणशक्ति), लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी तार्किक या समस्या-समाधान की क्षमता (बुद्धि) भी उतनी ही तीव्र हो। इसलिए तीव्र बुद्धि को केवल तीव्र स्मरणशक्ति का परिचायक नहीं माना जा सकता।
- कथन (d) "बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे स्टर्न) के अनुसार, बुद्धि की परिभाषा ही यही है कि व्यक्ति नई परिस्थितियों और वातावरण में खुद को कितनी कुशलता से ढाल या समायोजित (Adjust) कर पाता है।
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Hindi Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q1. विलोम की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: आकृष्ट - विकृष्ट
Explanation:
व्याख्या:
- आकृष्ट (सही विकल्प): 'आकृष्ट' का विलोम 'विकृष्ट' नहीं, बल्कि 'अनाकृष्ट' या 'विकर्षित' होता है। (आकृष्ट का अर्थ है 'खींचा हुआ' या 'आकर्षित', जबकि विकृष्ट का अर्थ होता है 'खींचा हुआ' ही; अतः ये विलोम नहीं हैं।)
अन्य विकल्प क्यों संगत हैं:
- (2) आह्वान - अनाह्वान: यह सही है (आह्वान का अर्थ बुलाना और अनाह्वान का अर्थ न बुलाना)।
- (3) कलंकित - निष्कलंक: यह सही है (कलंकित का अर्थ दाग लगा हुआ और निष्कलंक का अर्थ दाग रहित)।
- (4) ऐहिक - पारलौकिक: यह सही है (ऐहिक का अर्थ इस लोक से संबंधित और पारलौकिक का अर्थ परलोक से संबंधित)।
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Q2. वर्णों की ध्वनिगत विशेषताओं के संदर्भ में असंगत चुनिए :
Right Answer: ऋ - अग्र, संवृत, वृत्तमुखी
Explanation:
व्याख्या: स्वरों का वर्गीकरण ओठों की स्थिति (होठों के आकार) के आधार पर दो प्रकार से होता है:
- वृत्तमुखी (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं (उ, ऊ, ओ, औ)।
- अवृत्तमुखी (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल नहीं होते (अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ)।
विकल्प (2) में 'ऋ' को वृत्तमुखी बताया गया है, जो कि गलत है। 'ऋ' का उच्चारण करते समय होंठ गोल नहीं होते, इसलिए यह अवृत्तमुखी स्वर है (साथ ही यह अग्र और संवृत है)।
अन्य विकल्प सही क्यों हैं:
- (1) उ - पश्च, संवृत, वृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च (पिछले) भाग से बोला जाता है, उच्चारण में मुख लगभग बंद (संवृत) रहता है और होंठ गोल (वृत्तमुखी) होते हैं।
- (3) अ - मध्य, ह्रस्व, उदासीन: यह जिह्वा के मध्य भाग से बोला जाता है, एकमात्रिक (ह्रस्व) है और इसे 'उदासीन स्वर' भी कहा जाता है।
- (4) आ - पश्च, विवृत, अवृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च भाग से बोला जाता है, मुख पूरा खुलता है (विवृत) और होंठ गोल नहीं होते (अवृत्तमुखी)।
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Q3. हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :
Right Answer: शिक्षा तथा उपाधियाँ
Explanation:
व्याख्या: एक सफल और श्रेष्ठ हिंदी अध्यापक की 'विशिष्ट विशेषताओं' (Qualities/Characteristics) में उसके आंतरिक गुण, ज्ञान और कौशल आते हैं।
- (1) साहित्य का ज्ञान, (2) भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान और (3) हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों एक हिंदी शिक्षक की व्यावहारिक और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो उसे कक्षा में प्रभावी रूप से पढ़ाने के योग्य बनाती हैं।
- (4) शिक्षा तथा उपाधियाँ (Degrees and Qualifications): ये शिक्षक बनने के लिए आवश्यक 'अनिवार्य योग्यताएँ' (Eligibility criteria) तो हैं, लेकिन ये उसकी "विशिष्ट विशेषताएँ" या शिक्षण कौशल नहीं हैं। मात्र डिग्री होने से कोई व्यक्ति एक अच्छा शिक्षक नहीं बन जाता; एक अच्छे शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान और पढ़ाने की शैली (methods) से होती है।
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Q4. निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द समूह का चयन कीजिए :
Right Answer: सीधा साधा, अठोतर, उहापोह
Explanation:
व्याख्या:
- सीधा साधा: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'सीधा-सादा' होता है।
- अठोतर: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'अठोत्तर' (अठ् + उत्तर = आठ अधिक) होता है।
- उहापोह: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'ऊहापोह' (असमंजस की स्थिति) होता है, जिसमें दीर्घ 'ऊ' का प्रयोग होता है।
अन्य विकल्प क्यों शुद्ध हैं:
- विकल्प (2): 'दाशरथि' (दशरथ + इ), 'स्थायित्व' और 'विद्यार्थिपरिषद्' (समास होने पर 'विद्यार्थी' की 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' हो जाती है, जैसे- मन्त्रिपरिषद्) सभी शुद्ध हैं।
- विकल्प (3): 'सुधीजन' (सुधी + जन), 'प्रेयसी' और 'निजीकरण' सभी वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
- विकल्प (4): 'वेश्या', 'शशिभूषण' और 'शक्तीकरण' भी शुद्ध हैं (ध्यान दें: 'करण' प्रत्यय जुड़ने पर 'शक्ति' की ह्रस्व 'इ' की मात्रा दीर्घ 'ई' में बदल जाती है, जैसे- शुद्धीकरण, स्पष्टीकरण)।
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Q5. समास की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: श्रमसाध्य - करण तत्पुरुष
Explanation:
व्याख्या: सभी विकल्पों का समास विग्रह इस प्रकार है:
- श्रमसाध्य (सही): इसका विग्रह है "श्रम से साध्य" (अर्थात् जिसे श्रम के द्वारा साधा या पूरा किया जा सके)। यहाँ 'से' (के द्वारा) साधन का बोध करा रहा है, इसलिए यहाँ करण तत्पुरुष समास है।
अन्य विकल्प असंगत (गलत) क्यों हैं:
(1) चक्षुश्रवा: इसका विग्रह है "चक्षुओं (आँखों) से सुनता है जो" अर्थात् सर्प (साँप)। इसमें कोई पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो रहा है, इसलिए इसमें बहुव्रीहि समास है (इतरेतर द्वन्द्व नहीं)।
(2) आपादमस्तक: इसका विग्रह है "पाद (पैर) से लेकर मस्तक (सिर) तक"। इसमें प्रथम पद 'आ' उपसर्ग/अव्यय है, इसलिए यहाँ अव्ययीभाव समास है (बहुव्रीहि नहीं)।
(3) जातिगत: इसका विग्रह है "जाति को गत (गया हुआ)"। यहाँ 'को' विभक्ति का लोप हुआ है, इसलिए इसमें कर्म तत्पुरुष समास है (अधिकरण तत्पुरुष नहीं)।
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Q6. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: जब वह समकालीन भी हो और कालातीत भी।
Explanation:
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है: "बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता... नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है (यानी समकालीनता), पर अगर वह समय के पार न देख पाये (यानी कालातीत न हो), तो टिकाऊ नहीं हो सकता।"
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Q9. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: नएपन एवं निरंतरता दोनों को चुनना
Explanation:
गद्यांश की दूसरी ही पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: "साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।"
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Q10. निम्नलिखित में से मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है :
Right Answer: उचित लय और गति प्रदान करना
Explanation:
'लय' (Rhythm), 'आरोह-अवरोह' (आवाज़ का उतार-चढ़ाव) और 'स्वर' का प्रयोग सस्वर वाचन (Reading Aloud) यानी बोल-बोल कर पढ़ने में किया जाता है। मौन वाचन में चूँकि आवाज़ नहीं निकाली जाती और होंठ भी नहीं हिलते, इसलिए इसमें 'लय' (Rhythm) का कोई काम नहीं होता। अतः यह मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है।
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Q11. किस विकल्प में उपसर्ग विभाजन नियमानुसार है ?
Right Answer: निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
Explanation:
(3) निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार, 'निश्', 'निष्' और 'निस्' से शुरू होने वाले शब्दों में मूल रूप से 'निस्' उपसर्ग ही होता है। संधि नियमों के कारण विसर्ग या 'स्' का रूप बदलकर 'श्' या 'ष्' हो जाता है:
- निश्शुल्क: निस् + शुल्क (स् का श् होना)
- निष्पक्ष: निस् + पक्ष (स् का ष् होना)
- निस्स्वार्थ: निस् + स्वार्थ अतः इस विकल्प में उपसर्ग का विभाजन पूर्णतः नियमानुसार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(1) अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि सभी शब्दों में 'अप' उपसर्ग नहीं है:
- अपरिग्रह: अपि/अ + परिग्रह (यहाँ 'अ' उपसर्ग है, 'अप' नहीं)।
- अपरोक्ष: अ + परोक्ष (जो प्रत्यक्ष न हो - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
- अपर्ण: अ + पर्ण (बिना पत्तों का - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
(2) आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि ये शब्द उपसर्ग से नहीं, बल्कि प्रत्यय के योग से बने हैं:
- आरण्यक: अरण्य + अक (प्रत्यय)
- आवश्यक: अवश + यक/इक (प्रत्यय)
- आधुनिक: अधुना + इक (प्रत्यय) इनमें 'आ' उपसर्ग नहीं है, बल्कि प्रत्यय लगने के कारण आदि-स्वर (पहला अक्षर) 'अ' से 'आ' में बदल गया है।
(4) व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग यह विकल्प व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है क्योंकि हिंदी या संस्कृत में 'वी' (बड़ी ई) नाम का कोई उपसर्ग नहीं होता। इन सभी शब्दों में 'वि' (छोटी इ) उपसर्ग है:
- व्याधि: वि + आधि
- वीक्षण: वि + ईक्षण (यहाँ 'वि' का 'इ' और 'ईक्षण' का 'ई' मिलकर दीर्घ संधि से 'वीक्षण' बना है, पर मूल उपसर्ग 'वि' ही है)।
- व्यतिरेक: वि + अतिरेक
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Q12. संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए :
Right Answer: दैत्यारि, गत्यानुसार, अगन्याशय - यण संधि
Explanation:
विकल्प (1) का विश्लेषण (अनुपयुक्त विकल्प)
- गत्यानुसार: गति + अनुसार = गत्यानुसार ($इ + अ = य$) — यण संधि (यह सही है)
- अग्न्याशय: अग्नि + आशय = अग्न्याशय ($इ + आ = या$) — यण संधि (यह भी सही है)
दैत्यारि: दैत्य + अरि = दैत्यारि ($अ + अ = आ$) — यहाँ दीर्घ स्वर संधि है, न कि यण संधि।
नोट: चूँकि 'दैत्यारि' में दीर्घ संधि है, इसलिए यह पूरा समूह 'यण संधि' के अंतर्गत आना गलत है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण (जो कि सही हैं)
(2) दीर्घ संधि (सही)
- मिताहार: मित + आहार = मिताहार ($अ + आ = आ$)
- विकलांग: विकल + अंग = विकलांग ($अ + अ = आ$)
- भूर्ध्व: भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व ($ऊ + ऊ = ऊ$)
(3) व्यंजन संधि (सही)
- दिग्विजय: दिक् + विजय = दिग्विजय (क का ग में परिवर्तन)
- अब्ज: अप् + ज = अब्ज (प का ब में परिवर्तन)
- वृहन्नेत्र: वृहत् + नेत्र = वृहन्नेत्र (त का न में परिवर्तन)
(4) विसर्ग संधि (सही)
- वयोवृद्ध: वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
- पुरोधा: पुरः + धा = पुरोधा
- प्रादुर्भूत: प्रादुः + भूत = प्रादुर्भूत
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Q13. किस विकल्प में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग नहीं हुआ है ?
Right Answer: जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया।
Explanation:
सही विकल्प का विश्लेषण:
(1) जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया। (सार्वनामिक विशेषण नहीं है)
- क्यों? इस वाक्य में 'जिसने' और 'वह' सर्वनाम (Pronoun) के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, न कि विशेषण के रूप में। यह एक मिश्र वाक्य है जहाँ 'जिसने... वह' संबंधवाचक सर्वनाम का काम कर रहे हैं। इनके तुरंत बाद कोई संज्ञा शब्द नहीं आ रहा है जिसकी ये विशेषता बताएँ।
अन्य विकल्पों में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग (जो संगत हैं):
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करता है या उसकी विशेषता बताता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
(2) यह पुस्तक किससे मँगवाऊँ।
- यहाँ 'यह' सर्वनाम 'पुस्तक' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बता रहा है (निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
(3) ऐसे व्यक्ति पर कभी विश्वास मत करो।
- यहाँ 'ऐसे' सर्वनाम 'व्यक्ति' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है (यौगिक सार्वनामिक विशेषण)।
(4) आपके घर से कल कोई नौकर आया था।
- यहाँ 'कोई' सर्वनाम 'नौकर' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी अनिश्चितता को दर्शा रहा है (अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
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Q14. प्रत्यय की दृष्टि से संगत विभाजन चुनिए :
Right Answer: मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय
Explanation:
(1) मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय (संगत)
- ये सभी शब्द तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत 'अ' प्रत्यय के योग से बने हैं, जहाँ आदि स्वर (पहले अक्षर की मात्रा) में वृद्धि होती है:
- मिथुन + अ = मैथुन ($इ/ई \rightarrow ऐ$)
- शुचि + अ = शौच ($उ/ऊ \rightarrow औ$)
- रघु + अ = राघव ($अ \rightarrow आ$, और अंतिम 'उ' का 'व्' हो जाता है)
अन्य विकल्प क्यों असंगत (गलत) हैं?
(2) फिकैत, डकैत, लड़ैत - 'एत' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ऐत' प्रत्यय लगा है, 'एत' नहीं (मात्राओं का अंतर है—फेंक + ऐत = फिकैत, डाका + ऐत = डकैत, लड़ना + ऐत = लड़ैत)।
(3) नारदीय, स्थानीय, मानवीय - 'अनीय' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ईय' प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है, 'अनीय' नहीं (नारद + ईय = नारदीय, स्थान + ईय = स्थानीय, मानव + ईय = मानवीय)।
(4) कौशेय, सौजन्य, कौमार्य - 'एय' प्रत्यय (असंगत)
- इस विकल्प में मिले-जुले प्रत्यय हैं:
- कौशेय में 'एय' प्रत्यय है (कोश + एय)।
- परंतु सौजन्य (सुजन + य) और कौमार्य (कुमार + य) में 'य' प्रत्यय लगा है, 'एय' नहीं। इसलिए यह विभाजन पूरी तरह संगत नहीं है।
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Q15. वाक्य में प्रयुक्त क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
Right Answer: मदारी अनेक करतब दिखलाकर बच्चों को ललचाता है - अकर्मक क्रिया
Explanation:
क्यों असंगत है? इस वाक्य में 'ललचाता है' एक सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) है, अकर्मक नहीं। वाक्य में क्रिया का फल 'बच्चों' (कर्म) पर पड़ रहा है। यदि हम प्रश्न करें "मदारी किसे ललचाता है?", तो उत्तर मिलता है "बच्चों को"। इसलिए यह विकल्प गलत (असंगत) दिया गया है।
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English Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q11. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: intensive and extensive
Explanation:
In English language teaching pedagogy (which is standard for teaching exams like CTET, HTET, and UPTET), the listening skill is categorized exactly like the reading skill:
- Intensive listening: This focuses on careful attention to specific details, sounds, words, or grammar. The goal is accuracy and language focus (e.g., listening to a short dialogue to hear specific pronunciation or answer a direct question).
- Extensive listening: This involves listening to longer, more generalized materials for overall understanding, fluency, and enjoyment without worrying about understanding every single word (e.g., listening to an English podcast, story, or movie).
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Q12. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: aural-oral
Explanation:
Aural-oral skill involves training the learner to listen for the English speech sounds including stress and intonation patterns.
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Q13. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: prescriptive
Explanation:
J.C. Nesfield's grammar books (such as English Grammar: Past and Present) are classic examples of prescriptive grammar.
Here is why:
- Prescriptive Grammar: This approach lays down strict rules about how a language should or must be used. It focuses on what is grammatically "correct" versus "incorrect," often based on traditional or classical rules. Nesfield's books were written exactly for this purpose—to teach students the rigid, formal rules of Standard English.
Why the other options are incorrect:
(1) Universal Grammar: This is a modern linguistic theory (proposed by Noam Chomsky) suggesting that the ability to learn grammar is hard-wired into the human brain and that all human languages share a common structural basis.
(2) Cognitive Grammar: This is a psychological approach to language that argues grammar and meaning are deeply tied to human cognition and how we perceive the world.
(3) Descriptive Grammar: This is the modern linguistic approach that observes and describes how native speakers actually use the language in real life, without judging it as "right" or "wrong." Nesfield did the exact opposite of this.
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Q14. Choose the correct option:
Right Answer: A is true; B is false
Explanation:
In general, print materials are:
- Portable – Books and notes can be carried easily.
- Easily available – They are widely accessible in libraries, bookstores, and schools.
- Cost-effective – Especially when compared with many digital devices and multimedia resources.
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Q15. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: multilingual resources
Explanation:
When learners use their native language (mother tongue) to understand, analyze, or discuss complex material in a second language (like an English poem), this teaching approach is known as using the mother tongue as a "resource." In modern language pedagogy, this practice is often called "Translanguaging" or utilizing multilingual resources to help students grasp difficult concepts in the target language.
Why the other options are incorrect:
- (1) evaluative comprehension: This refers to making judgments or forming opinions about a text. While discussing a poem might involve evaluation, the specific act of using a native language to do so highlights the use of a multilingual strategy, not just the act of evaluating.
- (3) pre-reading skills: These are activities done before reading a text to prepare the learner (like looking at titles to predict the story or learning key vocabulary). Discussing the meaning of a poem usually happens during or after reading.
- (4) first language acquisition: This refers to the natural, subconscious process by which infants and young children learn their very first language from birth. It is a developmental milestone, not a teaching strategy used in a classroom to learn a second language.
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Reasoning (10 Questions)
Q1. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए
Right Answer: वृत्त
Explanation:
जिस प्रकार एक वर्ग (Square) का निर्माण सीधी रेखाओं (Lines) से मिलकर होता है (अर्थात वर्ग की बाहरी सीमा सीधी रेखाएँ होती हैं), ठीक उसी प्रकार एक वृत्त (Circle) का निर्माण चाप (Arc) से होता है (वृत्त की परिधि या बाहरी सीमा एक निरंतर चाप होती है)।
गोला (Sphere) और गेंद (Ball) 3D आकृतियाँ हैं, जबकि रेखा, वर्ग, चाप और वृत्त 2D ज्यामितीय आकृतियाँ (Geometric shapes) हैं। इसलिए 'वृत्त' ही सबसे सटीक उत्तर है।
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Q2. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: AYBZC
Explanation:
हल करने का तरीका:
इस शृंखला में प्रत्येक पद के अक्षरों के बीच एक निश्चित पैटर्न चल रहा है। आइए प्रत्येक पद के अक्षरों की तुलना उनके स्थानों (पहले, दूसरे, तीसरे आदि) के आधार पर करें:
- पहला अक्षर (-3 का पैटर्न): M (13) ➔ J (10) ➔ G (7) ➔ D (4) अगला अक्षर: D (4) - 3 = A (1)
- दूसरा अक्षर (+2 का पैटर्न): Q (17) ➔ S (19) ➔ U (21) ➔ W (23) अगला अक्षर: W (23) + 2 = Y (25)
- तीसरा अक्षर (-3 का पैटर्न): N (14) ➔ K (11) ➔ H (8) ➔ E (5) अगला अक्षर: E (5) - 3 = B (2)
- चौथा अक्षर (+2 का पैटर्न): R (18) ➔ T (20) ➔ V (22) ➔ X (24) अगला अक्षर: X (24) + 2 = Z (26)
- पाँचवाँ अक्षर (-3 का पैटर्न): O (15) ➔ L (12) ➔ I (9) ➔ F (6) अगला अक्षर: F (6) - 3 = C (3)
इन सभी अक्षरों को मिलाने पर, श्रेणी का अगला पद AYBZC बनता है।
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Q3. निम्न संख्या श्रेणी में लुप्त पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 65
Explanation:
हल करने का तरीका (Step-by-step logic):
यह संख्या श्रेणी एक विशेष पैटर्न का पालन कर रही है। प्रत्येक पद प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3...) के घन (cube) में 1 जोड़ने पर प्राप्त हो रहा है। इसका सूत्र $n^3 + 1$ है:
- पहला पद: $1^3 + 1 = 1 + 1 = 2$
- दूसरा पद: $2^3 + 1 = 8 + 1 = 9$
- तीसरा पद: $3^3 + 1 = 27 + 1 = 28$
- चौथा पद (लुप्त): $4^3 + 1 = 64 + 1 = 65$
- पाँचवाँ पद: $5^3 + 1 = 125 + 1 = 126$
- छठा पद: $6^3 + 1 = 216 + 1 = 217$
- सातवाँ पद: $7^3 + 1 = 343 + 1 = 344$
अतः, पैटर्न के अनुसार प्रश्नवाचक चिह्न (?) के स्थान पर 65 आएगा।
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Q4. A, P, R, X, Y और Z एक पंक्ति में बैठे हुए हैं। Y और Z मध्य में हैं और A तथा P अन्तिम शीर्षों पर हैं। R, A के एकदम बायीं ओर है। P के एकदम दायीं ओर कौन बैठा हुआ है ?
Right Answer: X
Explanation:
1. पंक्ति निर्धारित करें चूँकि कुल 6 व्यक्ति हैं, इसलिए पंक्ति में 6 स्थान होंगे: _ _ _ _ _ _
2. अंतिम सिरों पर व्यक्तियों को बिठाएं हमें प्रश्न में बताया गया है कि A और P अन्तिम शीर्षों (सिरों) पर हैं। संभावना 1: P _ _ _ _ A संभावना 2: A _ _ _ _ P
3. R का स्थान और सही सिरे निर्धारित करें यह दिया गया है कि R, A के एकदम बायीं ओर है। यदि A पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठा होता, तो उसके बायीं ओर R के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसलिए, A को अंतिम स्थान (एकदम दायीं ओर) पर ही होना चाहिए, जिससे यह तय हो जाता है कि P पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठेगा। व्यवस्था: P _ _ _ R A
4. मध्य के व्यक्तियों को बिठाएं हमें पता है कि Y और Z मध्य में हैं (यानी तीसरे और चौथे स्थान पर)। व्यवस्था: P _ [Y या Z] [Z या Y] R A
5. बचा हुआ स्थान भरें अब केवल X बचा है, और P के ठीक बगल में केवल एक ही स्थान (दूसरा स्थान) खाली है। अंतिम व्यवस्था: P X [Y/Z] [Z/Y] R A
निष्कर्ष: इस अंतिम व्यवस्था से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि P के एकदम दायीं ओर X बैठा हुआ है।
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Q6. रेखा 10 किमी सीधे चलती है और फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है
Right Answer: 5 किमी
Explanation:
मान लीजिए रेखा अपने प्रारंभिक बिंदु से उत्तर (North) दिशा की ओर चलना शुरू करती है। (आप कोई भी दिशा मान सकते हैं, अंत में दूरी समान ही आएगी)।
कदम-दर-कदम रेखा की यात्रा:
- "रेखा 10 किमी सीधे चलती है"
- रेखा उत्तर की ओर 10 किमी चली।
- (कुल दूरी: उत्तर = 10 किमी)
- "फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है"
- उत्तर से दाएँ मुड़ने का मतलब है पूर्व (East) की ओर मुड़ना।
- वह पूर्व की ओर 10 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 5 किमी चलती है" (पहला बायाँ मोड़)
- पूर्व से बाएँ मुड़ने का मतलब है वापस उत्तर (North) की ओर मुड़ना।
- वह उत्तर की ओर 5 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 + 5 = 15 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (दूसरा बायाँ मोड़)
- उत्तर से बाएँ मुड़ने का मतलब है पश्चिम (West) की ओर मुड़ना।
- वह पश्चिम की ओर 15 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 15 किमी। पूर्व में वह 10 किमी थी, लेकिन पश्चिम में 15 किमी आ गई, यानी प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की तरफ 5 किमी हो गई।)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (तीसरा बायाँ मोड़)
- पश्चिम से बाएँ मुड़ने का मतलब है दक्षिण (South) की ओर मुड़ना।
- वह दक्षिण की ओर 15 किमी चली।
अंतिम स्थिति का विश्लेषण:
- उत्तर-दक्षिण (Vertical) दूरी: वह कुल 15 किमी उत्तर की ओर गई थी (स्टेप 1 में 10 किमी + स्टेप 3 में 5 किमी) और अंत में 15 किमी दक्षिण की ओर आ गई। यानी उत्तर-दक्षिण की दूरी 15 - 15 = 0 हो गई। वह अपने प्रारंभिक बिंदु वाली क्षैतिज रेखा (horizontal line) पर आ गई है।
- पूर्व-पश्चिम (Horizontal) दूरी: वह 10 किमी पूर्व की ओर गई थी, लेकिन फिर 15 किमी पश्चिम की ओर आ गई।
- अतः प्रारंभिक बिंदु से उसकी दूरी = 15 किमी - 10 किमी = 5 किमी (प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की दिशा में)।
निष्कर्ष: वह अपने प्रारंभिक बिंदु से 5 किमी की दूरी पर है।
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Q7. पाँच व्यक्ति P, Q, R, S, और T एक अखबार पढ़ते हैं।
Right Answer: S
Explanation:
कथनों का विश्लेषण:
- "जो व्यक्ति सर्वप्रथम पढ़ता है, वह R को दे देता है।"
- इसका मतलब है कि R अखबार पढ़ने वाला दूसरा व्यक्ति है।
- क्रम: [1] [R] [3] [4] [5]
- "जो सबसे आखिरी में पढ़ता है, वो P से लेता है।"
- सबसे आखिरी व्यक्ति (5वाँ) अखबार P से लेता है, जिसका मतलब है कि P 4थे स्थान पर है।
- क्रम: [1] [R] [3] [P] [5]
- "T पढ़ने में प्रथम या अन्तिम नहीं है।"
- T पहले [1] और पाँचवें [5] स्थान पर नहीं आ सकता।
- दूसरा और चौथा स्थान पहले ही (R और P) से भरा हुआ है, इसलिए T के लिए केवल तीसरा [3] स्थान बचता है।
- क्रम: [1] [R] [T] [P] [5]
- "P और Q के बीच दो पाठक थे।"
- P चौथे स्थान पर है। P और Q के बीच 2 पाठक तभी हो सकते हैं जब Q पहले [1] स्थान पर हो (ताकि बीच में दूसरे और तीसरे स्थान वाले पाठक आ सकें)।
- क्रम: [Q] [R] [T] [P] [5]
- अंतिम पाठक कौन है?
- अब हमारे पास केवल एक व्यक्ति S बचा है और एक ही स्थान (5वाँ/आखिरी) खाली है।
- इसलिए, S आखिरी में अखबार पढ़ेगा।
- पूरा क्रम: Q ➞ R ➞ T ➞ P ➞ S
निष्कर्ष: सबसे आखिरी में अखबार S पढ़ता है।
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Q8. A, C का पिता है और D, B का पुत्र है। E, A का भ्राता है। C, D की बहन है। B, E से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
Right Answer: साली/भाभी
Explanation:
प्रश्न के कथनों का विश्लेषण:
- "A, C का पिता है"
- A पुरुष है और C का पिता है।
- "C, D की बहन है"
- C (महिला) और D भाई-बहन हैं।
- चूँकि A, C का पिता है, इसलिए A, D का भी पिता होगा।
- "D, B का पुत्र है"
- D, B का बेटा है।
- हमने ऊपर देखा कि D का पिता A है। अगर D का पिता A है और D, B का भी पुत्र है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि B, D की माता है।
- इससे यह साबित होता है कि A और B पति-पत्नी हैं (A पति है और B पत्नी है)।
- "E, A का भाई है"
- E पुरुष है।
निष्कर्ष (B का E से संबंध):
- B, A की पत्नी है।
- E, A का भाई है।
- इसलिए, B, E के भाई की पत्नी है।
- भाई की पत्नी रिश्ते में भाभी (Sister-in-law) लगती है।
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Q9. एक निश्चित कूट भाषा में "sun shines brightly" को "ba lo sul", "houses are brightly lit" को "kado ula ari ba" और "light comes from sun" को "dopi kup lo nro" लिखा जाता है। "sun" और "brightly" के लिए क्रमशः किन कूट शब्दों को लिखा गया है ?
Right Answer: lo, ba
Explanation:
आइए दिए गए कथनों को देखते हैं:
- sun shines brightly = ba lo sul
- houses are brightly lit = kado ula ari ba
- light comes from sun = dopi kup lo nro
चरण 1: "brightly" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (2) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "brightly" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "ba" समान है। इसलिए, brightly = ba
चरण 2: "sun" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (3) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "sun" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "lo" समान है। इसलिए, sun = lo
निष्कर्ष: प्रश्न में क्रमशः "sun" और "brightly" के लिए कूट शब्द पूछे गए हैं (यानी पहले sun और फिर brightly)।
- sun = lo
- brightly = ba
अतः सही युग्म lo, ba है।
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Q10. यदि 10 दिसम्बर, 2022 को शनिवार था, तो 8 दिसम्बर, 2024 को कौन-सा दिन होगा ?
Right Answer: रविवार
Explanation:
चरण 1: 10 दिसम्बर 2023 का दिन ज्ञात करें
- एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 1 विषम दिन (odd day)।
- 10 दिसम्बर 2022 से 10 दिसम्बर 2023 तक जाने पर 1 विषम दिन जुड़ता है।
- शनिवार + 1 दिन = रविवार। (यानी 10 दिसम्बर 2023 को रविवार था)।
चरण 2: 10 दिसम्बर 2024 का दिन ज्ञात करें
- 2024 एक लीप वर्ष (Leap year) है क्योंकि यह 4 से पूर्णतः विभाजित होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें फरवरी 29 दिन की होगी।
- एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 2 विषम दिन।
- 10 दिसम्बर 2023 से 10 दिसम्बर 2024 तक जाने पर 2 विषम दिन जुड़ते हैं।
- रविवार + 2 दिन = मंगलवार। (यानी 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार होगा)।
चरण 3: 8 दिसम्बर 2024 का दिन निकालें
- हमें पता है कि 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार है।
- 8 दिसम्बर, 10 दिसम्बर से ठीक 2 दिन पहले आता है।
- मंगलवार - 2 दिन = रविवार।
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Mathematics (10 Questions)
Haryana GK Questions (10 Questions)
Q1. हरियाणा लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?
Right Answer: दरबारी लाल गुप्ता
Explanation:
1 नवंबर 1966 को जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) का भी गठन किया गया था। इस नवनिर्मित आयोग के प्रथम अध्यक्ष (First Chairman) श्री दरबारी लाल गुप्ता थे।
उन्होंने 1 नवंबर 1966 से अपना कार्यभार संभाला था। वर्तमान में HPSC हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में ए और बी (A & B) ग्रुप के राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों की भर्ती के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वन्य जीव अभयारण्य शिवालिक पहाड़ियों में अवस्थित है ?
Right Answer: खोल ही-रायतान अभयारण्य
Explanation:
- खोल ही-रायतान अभयारण्य (Khol Hi-Raitan Sanctuary): यह हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित है, जो भौगोलिक दृष्टि से शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik Hills) की तलहटी और पहाड़ी क्षेत्र में आता है। यह अभयारण्य चीते (Leopard), सियार (Jackal), और विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
अन्य विकल्पों की स्थिति इस प्रकार है:
- खापरवास और भिण्डावास अभयारण्य (Khaparwas & Bhindawas Sanctuary): ये दोनों वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित हैं, जो मैदानी इलाका और आर्द्रभूमि (Wetlands) क्षेत्र है।
- नाहर अभयारण्य (Nahar Sanctuary): यह हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित है। यह क्षेत्र दक्षिणी हरियाणा में आता है, जहाँ अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) का विस्तार है, न कि शिवालिक का।
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Q3. निम्नलिखित में से किसने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में मुख्य सचिव के रूप में काम नहीं किया ?
Right Answer: एस० सी० चौधरी
Explanation:
मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। दिए गए विकल्पों में से अधिकारियों के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के रूप में कार्यकाल इस प्रकार हैं:
- एस० सी० चौधरी (S. C. Chaudhary): इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2013 से 31 जुलाई 2014 तक था। यह भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार का समय था। अतः इन्होंने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में काम नहीं किया।
- शकुन्तला जाखू (Shakuntala Jakhu): इनका कार्यकाल 31 जुलाई 2014 से 30 नवंबर 2014 तक था। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने (26 अक्टूबर 2014) के बाद शुरुआती कुछ समय तक इन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं।
- पी० के० गुप्ता (P. K. Gupta): इन्हें मनोहर लाल खट्टर की सरकार द्वारा ही 30 नवंबर 2014 को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था और इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2014 तक रहा।
- विजयवर्धन (Vijay Vardhan): इन्होंने 1 अक्टूबर 2020 से 30 नवंबर 2021 तक मुख्य सचिव के रूप में काम किया, जो पूरी तरह से मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल के अंतर्गत आता है।
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Q4. सर छोटूराम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
Right Answer: कथन (A), (B) तथा (C) सही हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: सर छोटूराम (दीनबंधु सर छोटूराम) ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। 1916 में वे रोहतक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (विशेषकर शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार) से असहमत होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
- कथन (B) सत्य है: कांग्रेस छोड़ने के बाद, उन्होंने 1923 में सर फज्ल-ए-हुसैन के साथ मिलकर किसानों और जमींदारों के हितों की रक्षा के लिए 'यूनियनिस्ट पार्टी' (Unionist Party) की स्थापना की।
- कथन (C) सत्य है: वे अविभाजित पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे। 1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद जब पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी, तो उन्होंने राजस्व मंत्री (Revenue Minister) के रूप में कार्य किया और किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून (जैसे 'साहूकार पंजीकरण अधिनियम') पारित करवाए।
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Q5. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कहाँ स्थापित किया जा रहा है ?
Right Answer: किलोहड़
Explanation:
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), सोनीपत (हरियाणा) की स्थापना सोनीपत जिले के किलोहड़ (Kilohrad) गाँव में की जा रही है। यह संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है ?
Right Answer: रेवाड़ी
Explanation:
प्रशासनिक सुविधा के लिए हरियाणा को 6 मण्डलों (Divisions) में बांटा गया है। रोहतक मण्डल राज्य का सबसे बड़ा मण्डल है, जिसमें कुल 5 जिले शामिल हैं:
- रोहतक (Rohtak)
- झज्जर (Jhajjar)
- सोनीपत (Sonipat)
- भिवानी (Bhiwani)
- चरखी दादरी (Charkhi Dadri)
रेवाड़ी (Rewari) जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है; यह गुरुग्राम (Gurugram) संभाग के अंतर्गत आता है (गुरुग्राम संभाग में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले शामिल हैं)।
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Q7. 37वें सूरजकुण्ड अन्तर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का थीम राज्य कौन-सा था ?
Right Answer: गुजरात
Explanation:
37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले (37th Surajkund International Crafts Fair) का आयोजन 2 फरवरी से 18 फरवरी 2024 तक हरियाणा के फरीदाबाद में किया गया था। इस संस्करण के लिए:
- थीम राज्य (Theme State): गुजरात था। (इस मेले में गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, कला और व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था।)
- भागीदार राष्ट्र (Partner Nation): तंजानिया (Tanzania) था।
सूरजकुंड मेले का आयोजन हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के सहयोग से किया जाता है।
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Q8. हरियाणा की महिला पहलवान जिसने 2023 का अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया
Right Answer: अंतिम पंघाल
Explanation:
हरियाणा के हिसार जिले (भगाना गांव) की महिला पहलवान अंतिम पंघाल (Antim Panghal) को कुश्ती में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2023 का अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) प्रदान किया गया था। वे अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (U-20 World Wrestling Championship) में लगातार दो बार (2022 और 2023) स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं।
- अंशु मलिक (Anshu Malik): इन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- गीतिका जाखड़ (Geetika Jakhar): इन्हें 2006 में अर्जुन पुरस्कार मिला था।
- साक्षी मलिक (Sakshi Malik): रियो ओलंपिक 2016 की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को 2016 में ही मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया गया था।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Right Answer: (A) तथा (B)
Explanation:
(A) गुजरी महल - हिसार (Gujari Mahal - Hisar): यह सही सुमेलित है। गुजरी महल हरियाणा के हिसार शहर में स्थित है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने अपनी प्रेमिका 'गुजरी' रानी के लिए करवाया था।
(B) आराम-ए-कौसर - नारनौल (Aram-e-Kausar - Narnaul): यह सही सुमेलित है। आराम-ए-कौसर (Aram-i-Kausar) हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में स्थित एक ऐतिहासिक मुग़लकालीन स्मारक और बाग है। यह मुग़ल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल में नारनौल के सूबेदार शाह कुली खान ने बनवाया था।
(C) शेख तैय्यब का मकबरा - जींद (Tomb of Sheikh Tayyab - Jind): यह गलत सुमेलित है। शेख तैय्यब का मकबरा जींद में नहीं, बल्कि हरियाणा के कैथल (Kaithal) में स्थित है। शेख तैय्यब (लाला मैदनी मल) 16वीं शताब्दी के एक सूफ़ी संत थे और अकबर के दरबार में सलाहकार भी रहे थे।
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Q10. पेहोवा अभिलेख के बारे में निम्नलिखित कथनों को पढ़िए
Right Answer: दोनों कथन सत्य हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: पेहोवा अभिलेख (Pehowa Inscription) 9वीं शताब्दी का है और यह गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के महान शासक मिहिर भोज (Mihir Bhoja) के शासनकाल से संबंधित है।
- कथन (B) सत्य है: इस अभिलेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्राचीन काल में पेहोवा (जिसे उस समय पृथूदक या Prithudaka कहा जाता था) घोड़ों के व्यापार का एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र था। इसमें विभिन्न स्थानों से आए घोड़ों के व्यापारियों (horse dealers) का जिक्र है, जो एक मेले में इकट्ठा हुए थे और उन्होंने अपनी बिक्री का कुछ हिस्सा मंदिर के रखरखाव के लिए दान करने का संकल्प लिया था।
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Biology (60 Questions)
Q1. काले पानी के बुखार का रोगजनक है :
Right Answer: प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम
Explanation:
काले पानी का बुखार अर्थात् ब्लैकवाटर फीवर मलेरिया की एक गम्भीर एवं प्राणघातक जटिलता है, जिसका रोगजनक प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम है। इसमें लाल रक्त कणिकाओं का व्यापक एवं तीव्र अपघटन होता है, जिससे मुक्त हीमोग्लोबिन रक्त में भर जाता है और वृक्कों द्वारा मूत्र के साथ बाहर निकलने लगता है; इसी कारण मूत्र का रंग गहरा लाल-काला हो जाता है और रोग को यह नाम मिला। इसके साथ तीव्र ज्वर, पीलिया, रक्ताल्पता तथा वृक्क निष्क्रियता हो जाती है। प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम मस्तिष्कीय मलेरिया के लिए भी उत्तरदायी है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन - सी अवरोधिनी, यकृत - अग्न्याशयी वाहिनी की ग्रहणी में प्रवेश को नियंत्रित करती है ?
Right Answer: ओडी अवरोधिनी
Explanation:
यकृत से आने वाली सामान्य पित्त वाहिनी तथा अग्न्याशय से आने वाली अग्न्याशयी वाहिनी मिलकर यकृत-अग्न्याशयी वाहिनी बनाती हैं, जो ग्रहणी में हेपेटोपैंक्रियाटिक एम्पुला के द्वारा खुलती है। इस द्वार को घेरने वाली वर्तुल पेशी ओडी अवरोधिनी कहलाती है, जो पित्त एवं अग्न्याशयी रस के ग्रहणी में प्रवेश को नियंत्रित करती है। भोजन के अभाव में यह संकुचित रहती है, जिससे पित्त पित्ताशय में एकत्र होता रहता है, और वसायुक्त भोजन आने पर कोलेसिस्टोकाइनिन के प्रभाव से शिथिल हो जाती है। बोयडन अवरोधिनी सामान्य पित्त वाहिनी के अन्तिम भाग पर स्थित होती है।
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Q3. मटर में निम्नलिखित में से किस लक्षण का अध्ययन मेंडल द्वारा नहीं किया गया था ?
Right Answer: पुष्प का आकार
Explanation:
ग्रेगर मेंडल ने उद्यान मटर पर अपने प्रयोगों में सात विपर्यासी लक्षण चुने — तने की लम्बाई, पुष्प का रंग, पुष्प की स्थिति, बीज का आकार, बीज का रंग, फली का आकार तथा फली का रंग। पुष्प का आकार इस सूची में सम्मिलित नहीं था। मेंडल की सफलता का बड़ा कारण यही था कि उन्होंने ऐसे लक्षण चुने जिनके केवल दो स्पष्ट एवं परस्पर विपरीत रूप थे, कोई मध्यवर्ती अवस्था नहीं थी। साथ ही मटर स्वपरागित होती है, एक ऋतु में ही जीवन-चक्र पूरा करती है और उसमें कृत्रिम परागण सरल है।
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Q4. फलों और बीजों के कठोर और पथरीले छिलकों की विशेषता होती है :
Right Answer: दृढ़कोशिकाएँ
Explanation:
फलों एवं बीजों के कठोर तथा पथरीले छिलके दृढ़कोशिकाओं अर्थात् स्क्लेरीड्स से बनते हैं। ये दृढ़ोतक का एक प्रकार हैं, जिनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमाव से अत्यधिक मोटी हो जाती है, गुहा लगभग समाप्त हो जाती है और परिपक्व होने पर कोशिका मृत हो जाती है। इनकी भित्ति में सरल गर्त स्पष्ट दिखाई देते हैं। नारियल, अखरोट तथा बादाम के कठोर आवरण, नाशपाती के गूदे के कणिकामय पिण्ड तथा फलियों के बीजचोल इन्हीं से बनते हैं। ये बीज को यांत्रिक चोट, सूखने तथा कीटों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
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Q5. निम्नलिखित में से कौन - सा कथन गलत है ?
Right Answer: संवर्धनीय मछली विपुल प्रजनक नहीं होनी चाहिए।
Explanation:
मत्स्य संवर्धन के लिए चुनी जाने वाली मछली में कुछ निश्चित गुण अपेक्षित होते हैं। वह तीव्र गति से बढ़ने वाली होनी चाहिए, ताकि कम समय में विपणन योग्य आकार प्राप्त हो; शाकाहारी अथवा प्लवक-भक्षी होनी चाहिए, जिससे आहार-लागत कम रहे; तथा स्वादिष्ट होनी चाहिए, अन्यथा बाजार में माँग नहीं बनेगी। चौथा कथन गलत है, क्योंकि संवर्धनीय मछली का विपुल प्रजनक होना वांछनीय गुण है — इससे पर्याप्त मात्रा में अंगुलिकाएँ सरलता एवं कम लागत पर उपलब्ध हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त उसका रोग-प्रतिरोधी एवं सीमित जल में अनुकूलनशील होना भी आवश्यक है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन - सा रोग हाइपरथायरॉइडिज़्म के कारण नहीं होता है ?
Right Answer: हाशिमोटो रोग
Explanation:
अवटु ग्रंथि की अतिसक्रियता अर्थात् हाइपरथायरॉइडिज्म से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। ग्रेव्स रोग, जिसे बेस्डो रोग तथा एक्सोफ्थैल्मिक गॉयटर भी कहा जाता है, इसका सर्वाधिक सामान्य रूप है, जिसमें नेत्रगोलक बाहर की ओर उभर आते हैं। प्लमर रोग अर्थात् विषाक्त बहुगुलिकीय गलगण्ड भी अतिसक्रियता से ही होता है। इसके विपरीत हाशिमोटो रोग एक स्वप्रतिरक्षी अवस्था है, जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली अवटु ग्रंथि पर आक्रमण कर उसे नष्ट करने लगती है और परिणामस्वरूप हाइपोथायरॉइडिज्म अर्थात् हार्मोन की कमी हो जाती है।
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Q7. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूट की सहायता से चुनें :
Right Answer: (a) और (b)
Explanation:
पहले दो युग्म आपस में उलट गए हैं, अतः वही गलत हैं। यूनानी विद्वान थियोफ्रेस्टस, जिन्हें वनस्पति विज्ञान का जनक कहा जाता है, ने ‘हिस्टोरिया प्लांटेरम’ की रचना की और लगभग पाँच सौ पौधों का वर्णन किया। कैरोलस लिनियस ने 1753 में ‘स्पीशीज प्लांटेरम’ प्रकाशित की, जिससे द्विनाम पद्धति स्थापित हुई। शेष दोनों युग्म सही हैं — गास्पर्ड बॉहिन ने ‘पीनेक्स थियेट्री बोटेनिसाय’ लिखी, जिसमें लिनियस से पूर्व ही द्विपद नामकरण का संकेत मिलता है, तथा बेंथम एवं हुकर ने ‘जेनेरा प्लांटेरम’ में प्राकृतिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।
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Q8. प्रोस्टेग्लैंडिन व्युत्पन्न हैं :
Right Answer: वसा अम्ल के
Explanation:
प्रोस्टेग्लैंडिन वसा अम्ल से व्युत्पन्न होने वाले जैव-सक्रिय यौगिक हैं, जो बीस कार्बन वाले एरेकिडोनिक अम्ल से साइक्लो-ऑक्सीजिनेज एन्जाइम की क्रिया द्वारा बनते हैं। ये ईकोसैनॉइड वर्ग में आते हैं और इन्हें स्थानीय हार्मोन कहा जाता है, क्योंकि ये किसी विशिष्ट ग्रंथि में नहीं बनते तथा रक्त द्वारा दूर तक न जाकर अपने उत्पत्ति-स्थल के आसपास ही कार्य करते हैं। ये शोथ, ज्वर, पीड़ा-संवेदन, रक्त वाहिनियों के संकुचन-प्रसार, प्लेटलेट एकत्रीकरण तथा गर्भाशय संकुचन में भूमिका निभाते हैं। एस्पिरिन इन्हीं के संश्लेषण को अवरुद्ध कर पीड़ा एवं ज्वर घटाती है।
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Q9. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
Right Answer: (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)
Explanation:
एधा अर्थात् कैम्बियम एक पार्श्व विभज्योतक है, जिसकी कोशिकाएँ निरन्तर विभाजित होकर द्वितीयक वृद्धि उत्पन्न करती हैं। दृढ़ोतक सरल स्थायी ऊतक है, क्योंकि वह केवल एक ही प्रकार की मोटी लिग्निनयुक्त मृत कोशिकाओं से बना होता है और पौधे को यांत्रिक दृढ़ता देता है। जलरंध्र अर्थात् हाइडेथोड स्रावी ऊतक का उदाहरण है, जिससे बिन्दुस्राव द्वारा तरल जल बाहर निकलता है। पोषवाह अर्थात् फ्लोएम जटिल ऊतक है, क्योंकि वह चालनी नलिका, सखी कोशिका, फ्लोएम मृदूतक तथा फ्लोएम रेशा — इन विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनता है।
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Q10. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
Right Answer: (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)
Explanation:
रूसी वैज्ञानिक ए० आई० ओपेरिन ने हैल्डेन के साथ आजीवात्जनन अर्थात् रासायनिक उद्विकास का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार आदिम पृथ्वी की अपचायक परिस्थितियों में सरल अकार्बनिक अणुओं से क्रमशः कार्बनिक अणु एवं जीवन उत्पन्न हुआ; मिलर एवं यूरे ने इसे प्रयोगशाला में सिद्ध किया। लैमार्क ने अंगों के उपयोग एवं अनुपयोग तथा उपार्जित लक्षणों की वंशागति की बात कही। डार्विन ने विभिन्नता, जीवन-संघर्ष तथा प्राकृतिक चयन द्वारा विकास की व्याख्या की। ह्यूगो डीव्रीज ने ईवनिंग प्रिमरोज पर कार्य कर उत्परिवर्तनवाद अर्थात् साल्टेशन का सिद्धांत दिया।
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Q11. विदलन के रेखांशिक तल में, विदलन खाँच का निर्माण होता है :
Right Answer: जन्तु ध्रुव व पीतक ध्रुव के मध्य से गुजरती हुई
Explanation:
विदलन के तल के आधार पर उसे रेखांशिक तथा अक्षांशिक वर्गों में बाँटा जाता है। रेखांशिक अथवा मध्याह्नीय विदलन में विदलन खाँच अण्डे के जन्तु ध्रुव से आरम्भ होकर उसके केन्द्र से गुजरती हुई पीतक ध्रुव तक पहुँचती है, ठीक उसी प्रकार जैसे पृथ्वी पर देशान्तर रेखाएँ दोनों ध्रुवों को जोड़ती हैं। इससे बनने वाली दोनों कोशिकाएँ प्रायः समान आकार की होती हैं और दोनों में पीतक का वितरण भी समान रहता है। इसके विपरीत अक्षांशिक विदलन की खाँच विषुवतीय तल के समानान्तर चलती है और मेढक में यह विषुवतीय तल के कुछ ऊपर पड़ती है।
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Q12. निम्नलिखित में से कौन - सा लाख का सर्वाधिक शुद्ध रूप है ?
Right Answer: शैल लाख
Explanation:
लाख लैसिफर लैका नामक कीट के स्राव से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक रेजिन है, जिसे कुसुम, पलाश तथा बेर जैसे पोषक वृक्षों की टहनियों से खुरचकर एकत्र किया जाता है। इसका कच्चा रूप छड़ी लाख कहलाता है, जिसे कूटकर एवं धोकर दानेदार बीज लाख प्राप्त होता है। बीज लाख को गरम कर छानने तथा पतली चादर के रूप में फैलाकर सुखाने पर शैल लाख बनता है, जो लाख का सर्वाधिक शुद्ध एवं परिष्कृत रूप है। शैल लाख का उपयोग वार्निश, पॉलिश, विद्युत रोधक, सीलिंग वैक्स तथा खाद्य पदार्थों की परत चढ़ाने में होता है।
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Q13. निम्नलिखित में से कौन - सा लक्षण सभी साइनोबैक्टीरिया के लिए सत्य नहीं है ?
Right Answer: उनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने की क्षमता होती है।
Explanation:
साइनोबैक्टीरिया अर्थात् नील-हरित शैवाल प्रोकैरियोटिक जीव हैं, अतः उनमें झिल्लीबद्ध केन्द्रक तथा अन्य झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते। उनमें क्लोरोफिल-a पाया जाता है, जिससे वे ऑक्सीजन मुक्त करने वाला प्रकाश संश्लेषण करते हैं, और उनकी कोशिका भित्ति सेलुलोज की नहीं बल्कि पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। पहला कथन सभी के लिए सत्य नहीं है, क्योंकि नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता केवल उन्हीं जातियों में होती है जिनमें हेटरोसिस्ट नामक विशिष्ट मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ बनती हैं, जैसे एनाबीना एवं नॉस्टॉक; अनेक अन्य साइनोबैक्टीरिया यह कार्य नहीं करते।
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Q14. यकृत निवाहिका तंत्र प्रारंभ होता है :
Right Answer: पाचन तंत्र से यकृत
Explanation:
यकृत निवाहिका तंत्र एक विशिष्ट शिरा-तंत्र है, जो पाचन तंत्र से आरम्भ होकर यकृत में समाप्त होता है। आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, अग्न्याशय तथा प्लीहा से आने वाली शिराएँ मिलकर यकृत निवाहिका शिरा बनाती हैं, जो अवशोषित पोषक तत्वों से भरा रक्त सीधे हृदय भेजने के बजाय पहले यकृत में ले जाती है। यहाँ यकृत ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है, अमीनो अम्लों का विऐमीनीकरण करता है तथा विषैले पदार्थों एवं औषधियों को निष्प्रभावी बनाता है। यह निवाहिका तंत्र इसलिए कहलाता है क्योंकि इसके दोनों सिरों पर केशिका जाल होता है।
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Q15. गुणसूत्रों का एक एकल सेट जिसमें एक प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की एक प्रति होती है, कहलाता है :
Right Answer: एकगुणित सेट
Explanation:
गुणसूत्रों का वह एकल समुच्चय जिसमें किसी प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की केवल एक प्रति उपस्थित हो, एकगुणित अर्थात् मोनोप्लॉइड सेट कहलाता है और इसे x से निरूपित किया जाता है। यह उस प्रजाति का आधारभूत गुणसूत्र समुच्चय होता है। इसके विपरीत अगुणित अर्थात् हैप्लॉइड संख्या n युग्मक में उपस्थित गुणसूत्रों की वास्तविक संख्या है। द्विगुणित प्रजातियों में x तथा n बराबर होते हैं, किन्तु बहुगुणित प्रजातियों में नहीं; जैसे षड्गुणित गेहूँ में x छह होता है परन्तु n इक्कीस, क्योंकि उसमें तीन जीनोम सम्मिलित हैं।
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Q16. निम्नलिखित में से गलत जोड़ा चुनिए : सामान्य जुकाम हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
Right Answer: सामान्य जुकाम – हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
Explanation:
सामान्य जुकाम किसी जीवाणु से नहीं, बल्कि राइनोवाइरस नामक विषाणु से होता है, जिसकी दो सौ से अधिक किस्में ज्ञात हैं; अतः उसे हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी से जोड़ना गलत है। हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी तो न्यूमोनिया एवं मस्तिष्कावरण शोथ से सम्बद्ध जीवाणु है। शेष तीनों जोड़े सही हैं — मलेरिया प्लैज़्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से होता है और मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है, दाद माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन तथा एपिडर्मोफाइटन नामक कवकों से होता है, और हस्तिपाद वुचेरेरिया बैंक्रोफ्टाई नामक फाइलेरिया कृमि से होता है।
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Q17. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन कीजिए :
Right Answer: ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम द्वारा साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन होता है।
Explanation:
साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम नामक कवक से किया जाता है और यह प्रतिरक्षा-निरोधक औषधि के रूप में अंग-प्रत्यारोपण के रोगियों में प्रयुक्त होती है, जिससे प्रतिरोपित अंग अस्वीकृत न हो। शेष तीनों कथन गलत हैं। एस्पर्जिलस नाइजर से एसीटिक अम्ल नहीं, बल्कि सिट्रिक अम्ल प्राप्त होता है; एसीटिक अम्ल एसीटोबैक्टर एसिटी से बनता है। स्टैटिन्स का उत्पादन मोनैस्कस पर्पुरियस नामक यीस्ट से होता है और वे रक्त कोलेस्टेरॉल घटाती हैं। लैक्टिक अम्ल के व्यावसायिक उत्पादन में लैक्टोबैसिलस जीवाणु का उपयोग होता है।
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Q18. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
Explanation:
ज्वारीय आयतन वह वायु है जो सामान्य श्वसन में एक बार अन्दर ली या बाहर छोड़ी जाती है और यह लगभग 500 मिलीलीटर होती है। अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त वायु है जिसे सामान्य अन्तःश्वसन के बाद बलपूर्वक और भीतर खींचा जा सके, जो लगभग 2500 से 3000 मिलीलीटर होती है। निःश्वसन सुरक्षित आयतन सामान्य निःश्वसन के बाद बलपूर्वक बाहर निकाली जा सकने वाली वायु है, लगभग 1000 से 1100 मिलीलीटर। अवशिष्ट आयतन वह वायु है जो अधिकतम निःश्वसन के बाद भी फेफड़ों में शेष रह जाती है, लगभग 1100 से 1200 मिलीलीटर।
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Q19. मधुमक्खी पालन में उपयोग किये जाने वाले कृत्रिम छत्ते के भागों को नीचे से ऊपर की ओर क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
Right Answer: (c), (d), (b), (a)
Explanation:
आधुनिक मधुमक्खी पालन में न्यूटन अथवा लैंगस्ट्रॉथ प्रकार का चल-फ्रेम छत्ता प्रयुक्त होता है, जिसमें भाग नीचे से ऊपर की ओर एक निश्चित क्रम में रखे जाते हैं। सबसे नीचे तलपट के ऊपर अध्यासन कक्ष होता है, जहाँ रानी अण्डे देती है और शिशु मधुमक्खियाँ पलती हैं। उसके ऊपर रानी पृथक्कारक की जाली लगाई जाती है, जिसके छिद्रों से श्रमिक तो निकल जाते हैं किन्तु बड़े आकार की रानी ऊपर नहीं जा पाती। उसके ऊपर मधु प्रकोष्ठ रखा जाता है, जहाँ शुद्ध शहद संचित होता है, और सबसे ऊपर ऊपरी कक्ष अर्थात् आवरण रहता है।
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Q20. ओस्टिक्थीज़ के संदर्भ में सही कथन अथवा कथनों का चयन कीजिए :
Right Answer: (a) व (b)
Explanation:
ओस्टिक्थीज अर्थात् अस्थिल मछलियों का अन्तःकंकाल अस्थिमय होता है। इनमें प्रायः वायु कोष अथवा वाताशय पाया जाता है, जो उत्प्लावन नियंत्रित कर मछली को बिना निरन्तर तैरे जल में स्थिर रहने देता है। इनके शरीर के दोनों ओर चार जोड़ी क्लोम छिद्र होते हैं, जो हड्डीदार प्रच्छद अर्थात् ऑपरकुलम से ढके रहते हैं। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि प्लेकोइड शल्क उपास्थिल मछलियों अर्थात् कॉन्ड्रिक्थीज की विशेषता हैं; अस्थिल मछलियों की त्वचा साइक्लॉइड अथवा टीनॉइड शल्कों से ढकी होती है। रोहू, कतला तथा हिप्पोकैम्पस इसी वर्ग के हैं।
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Q21. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
Explanation:
अनिषेकजनन में अनिषेचित अण्डे से ही नए जीव का विकास हो जाता है। पूर्ण अनिषेकजनन में जनन पूर्णतः इसी विधि से होता है, अतः वहाँ आबादी अनन्य रूप से मादाओं की रहती है और नर अत्यन्त दुर्लभ अथवा अनुपस्थित होते हैं। अरहेनोटोकी में अनिषेचित अण्डों से अगुणित नर उत्पन्न होते हैं, जैसा मधुमक्खी के ड्रोन में देखा जाता है। थेलीटोकी में अनिषेचित अण्डों से केवल द्विगुणित मादाएँ बनती हैं। अपूर्ण अनिषेकजनन चक्रीय होता है, जिसमें अनिषेकजनन तथा लैंगिक जनन ऋतु के अनुसार बारी-बारी चलते हैं, जैसे एफिड एवं डैफनिया में।
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Q22. वाणी के लिए ब्रोका क्षेत्र उपस्थित होता है :
Right Answer: अग्रललाट पालि में
Explanation:
ब्रोका क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ गोलार्द्ध की ललाट पालि के पश्च-अधर भाग में स्थित होता है, जिसे अग्रललाट क्षेत्र से सटा हुआ माना जाता है। इसकी खोज फ्रांसीसी चिकित्सक पॉल ब्रोका ने की। यह क्षेत्र वाणी के उत्पादन को नियंत्रित करता है, अर्थात् यह विचारों को व्याकरणसम्मत शब्दों में ढालकर स्वरयंत्र, जिह्वा तथा ओष्ठ की पेशियों को आवश्यक निर्देश भेजता है। इसकी क्षति से ब्रोका वाचाघात होता है, जिसमें रोगी दूसरों की बात समझ तो लेता है, किन्तु स्वयं रुक-रुककर टूटे-फूटे शब्द ही बोल पाता है।
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Q23. वानस्पतिक रूप से कपास के रेशे होते हैं :
Right Answer: अधिचर्मीय रेशा
Explanation:
वानस्पतिक दृष्टि से कपास के रेशे अधिचर्मीय रेशे हैं, अर्थात् वे बीज की बाह्यत्वचा की कोशिकाओं से निकले एककोशिकीय अत्यन्त लम्बे रोम हैं, जिन्हें बीजरोम कहा जाता है। परिपक्व होने पर इनकी भित्ति पर सेलुलोज की मोटी परतें जमा हो जाती हैं और कोशिका मरकर चपटी एवं मुड़ी हुई नली में बदल जाती है, जिससे कताई के समय रेशे परस्पर अच्छी तरह पकड़ बना लेते हैं। इसके विपरीत जूट एवं सन के रेशे बास्ट अर्थात् पोषवाह से जुड़े दृढ़ोतक रेशे होते हैं, जो तने की छाल से प्राप्त किए जाते हैं और उन्हें सड़ाकर अलग किया जाता है।
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Q24. नीचे दी गई सारणी में से गलत संयोजन चुनिए :
Right Answer: सभी संयोजन सही हैं
Explanation:
चारों संयोजन सही हैं। टेस्टोस्टेरॉन वृषण की अन्तराली अर्थात् लेडिग कोशिकाओं से स्रावित स्टेरॉयड हार्मोन है, जो शुक्राणुजनन तथा गौण लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करता है। एस्ट्रोजन अण्डाशय की वर्धमान पुटिका की कोशिकाओं से निकलने वाला स्टेरॉयड है। प्रोजेस्टेरॉन अण्डोत्सर्ग के बाद बने कॉर्पस ल्युटियम से स्रावित स्टेरॉयड है, जो गर्भाशय को रोपण हेतु तैयार करता है। ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन अपरा से स्रावित ग्लाइकोप्रोटीन है, जो कॉर्पस ल्युटियम को बनाए रखता है और गर्भ-परीक्षण का आधार है।
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Q25. मनुष्य में उपापचय के पश्चात् बनने वाली अमोनिया का यूरिया में परिवर्तन (a) …… में (b) …… प्रक्रिया द्वारा होता है तथा (c) …… द्वारा उत्सर्जित कर दिया जाता है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Right Answer: (a) यकृत, (b) क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र, (c) वृक्क
Explanation:
मनुष्य यूरिया उत्सर्जी प्राणी है। प्रोटीन के विऐमीनीकरण से बनी अमोनिया अत्यन्त विषैली होती है, अतः उसे शीघ्र ही यकृत में यूरिया में बदल दिया जाता है। यह रूपान्तरण जिस चक्रीय अभिक्रिया-शृंखला द्वारा होता है उसे ऑर्निथिन चक्र अथवा क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र कहा जाता है, जिसमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड तथा एस्पार्टेट भाग लेते हैं और ऑर्निथिन, सिट्रुलीन एवं आर्जिनीन क्रमशः बनते हैं। बना हुआ यूरिया रक्त के माध्यम से वृक्क तक पहुँचता है, जहाँ छनन द्वारा वह मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
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Q26. जब दोनों गर्भाशय आंशिक रूप से संयुक्त होकर दो शृंग तथा अन्दर दो पृथक्अवकाशिकाएँ बनाते हैं, तो उसे कहते हैं :
Right Answer: द्विशृंगी गर्भाशय
Explanation:
स्तनधारियों में गर्भाशय की संरचना भ्रूणीय म्यूलरी वाहिनियों के संलयन की मात्रा पर निर्भर करती है। जब दोनों वाहिनियाँ बिल्कुल नहीं जुड़तीं तो द्विक् गर्भाशय बनता है, जिसमें दो पूर्णतः पृथक गर्भाशय एवं दो ग्रीवाएँ होती हैं, जैसा खरगोश में मिलता है। जब वे आंशिक रूप से संयुक्त होकर नीचे एक साझा भाग तथा ऊपर दो शृंग बनाती हैं और भीतर दो पृथक अवकाशिकाएँ बनी रहती हैं, तो उसे द्विशृंगी गर्भाशय कहते हैं, जो गाय, सूअर तथा कुतिया में पाया जाता है। पूर्ण संलयन से सरल गर्भाशय बनता है, जो मनुष्य एवं अन्य नरवानरों की विशेषता है।
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Q27. निम्नलिखित पादपों में से किसमें उन्मीलपरागणी तथा अनुन्मील्यपरागणी — दोनों प्रकार के पुष्प नहीं लगते ?
Right Answer: गुलाब
Explanation:
वायोला, ओक्सालिस तथा कोमेलाइना जैसे पौधों में दो प्रकार के पुष्प लगते हैं। उन्मीलपरागणी पुष्प सामान्य रूप से खुलते हैं, उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र अनावृत रहते हैं, अतः उनमें पर-परागण सम्भव होता है। अनुन्मील्यपरागणी पुष्प कभी खुलते ही नहीं; उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र पास-पास रहते हैं और कली के भीतर ही अनिवार्य स्वपरागण होकर बीज बन जाते हैं, जिससे परागणकर्ता के अभाव में भी बीज उत्पादन सुनिश्चित रहता है। गुलाब में ऐसा द्विरूपी पुष्पन नहीं पाया जाता, अतः वही अपवाद है।
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Q28. निम्नलिखित ग्रंथियों में से कौन-सी एपीक्राइन ग्रंथि का उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: (b) व (d)
Explanation:
बहिःस्रावी ग्रंथियों को स्राव की विधि के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है। मीरोक्राइन ग्रंथियों में स्राव बहिःकोशिकता द्वारा निकलता है और कोशिका को कोई क्षति नहीं होती; लार ग्रंथियाँ इसी वर्ग में आती हैं। एपीक्राइन ग्रंथियों में कोशिका का शीर्ष भाग स्राव के साथ टूटकर निकल जाता है; कुछ स्वेद ग्रंथियाँ तथा स्तन ग्रंथियाँ इसके उदाहरण हैं। होलोक्राइन ग्रंथियों में सम्पूर्ण कोशिका फटकर स्राव में परिवर्तित हो जाती है, जिसका उदाहरण वसामय ग्रंथि है। अतः लार तथा वसामय ग्रंथियाँ एपीक्राइन नहीं हैं।
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Q29. मानव नेत्र में निम्नलिखित में से कौन - सा अपवर्तक माध्यम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है ?
Right Answer: परितारिका (आइरिस)
Explanation:
मानव नेत्र में प्रकाश के अपवर्तन का कार्य चार पारदर्शी माध्यम करते हैं — कॉर्निया, जलीय द्रव्य, लेंस तथा काचाभ द्रव्य। सबसे अधिक अपवर्तन कॉर्निया पर होता है, जबकि लेंस समंजन द्वारा फोकस को सूक्ष्मता से समायोजित करता है। परितारिका अर्थात् आइरिस अपवर्तक माध्यम नहीं है, क्योंकि वह अपारदर्शी पेशीय पर्दा है और उसका कार्य पुतली के व्यास को घटा-बढ़ाकर नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना है। यही परितारिका नेत्र को उसका विशिष्ट रंग भी प्रदान करती है।
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Q30. युग्मित तारक केन्द्र कोशिका चक्र के किस चरण के दौरान दो जोड़ों में प्रतिकृति बनाते हैं ?
Right Answer: S
Explanation:
कोशिका चक्र की अन्तरावस्था तीन उप-प्रावस्थाओं में बँटी होती है। इनमें S अर्थात् संश्लेषण प्रावस्था वह है जिसमें डी०एन०ए० का प्रतिकरण होकर उसकी मात्रा दुगुनी हो जाती है, यद्यपि गुणसूत्र संख्या वही रहती है। इसी प्रावस्था में जन्तु कोशिका के कोशिकाद्रव्य में स्थित युग्मित तारक केन्द्र भी प्रतिकृति बनाकर दो जोड़ों में बदल जाते हैं, ताकि आगे चलकर विभाजन के समय दोनों ध्रुवों पर एक-एक जोड़ा पहुँच सके और तर्कु का निर्माण हो। G1 प्रावस्था में कोशिका वृद्धि करती है और G2 में विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन एवं ऊर्जा संचित होती है।
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Q31. निम्नलिखित युग्मों में से सही युग्म अथवा युग्मों का चयन कीजिए :
Right Answer: (i), (ii) व (iii)
Explanation:
तीनों युग्म सही हैं। डाउन सिंड्रोम इक्कीसवें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति अर्थात् त्रिसूत्रता से होता है, जिसमें कुल गुणसूत्र संख्या 47 हो जाती है; इसमें छोटा कद, चपटी गर्दन, अर्ध-खुला मुख तथा मन्द बुद्धि जैसे लक्षण दिखते हैं। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम में लिंग गुणसूत्र XXY होते हैं, जिससे पुरुष में स्त्रियोचित लक्षण उभरते हैं और वह प्रायः बन्ध्य रहता है। टर्नर सिंड्रोम में एक X गुणसूत्र अनुपस्थित रहता है अर्थात् XO स्थिति बनती है, जिससे स्त्री का कद छोटा रहता है, अण्डाशय अविकसित रहते हैं और वह बन्ध्य होती है।
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Q32. डोनन के संतुलन में आयनों के संचय के लिए ऊर्जा का स्रोत है :
Right Answer: ऊर्जा की आवश्यकता नहीं है
Explanation:
डोनन संतुलन उस स्थिति का वर्णन करता है जिसमें अर्धपारगम्य झिल्ली के एक ओर ऐसे आयन उपस्थित होते हैं जो झिल्ली को पार नहीं कर सकते, जैसे कोशिका के भीतर के बड़े प्रोटीन ऋणायन। इन अविसरणीय आयनों की उपस्थिति विसरणीय आयनों के असमान वितरण को बाध्य कर देती है, ताकि दोनों ओर विद्युत उदासीनता एवं रासायनिक संतुलन बना रहे। यह पूर्णतः निष्क्रिय भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है, अतः इसमें आयनों के संचय के लिए किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती। यही इसे सक्रिय अभिगमन से पृथक करता है, जिसमें ए०टी०पी० व्यय होता है।
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Q33. सिट्रिक एसिड चक्र का कौन - सा विकर झिल्ली से बँधा होता है ?
Right Answer: सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज़
Explanation:
सिट्रिक अम्ल चक्र अर्थात् क्रेब्स चक्र के अधिकांश एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया के आधात्री में घुली अवस्था में पाए जाते हैं, किन्तु सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज इसका अपवाद है, क्योंकि वह भीतरी माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से बँधा रहता है। यह एन्जाइम सक्सीनेट को फ्यूमरेट में ऑक्सीकृत करता है और इस अभिक्रिया में NAD के स्थान पर FAD अपचयित होकर FADH2 बनाता है। यही एन्जाइम इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला के संकुल-II के रूप में भी कार्य करता है, इसीलिए यह क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीकारक फॉस्फोरिलीकरण दोनों को सीधे जोड़ने वाली कड़ी है।
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Q34. निम्नलिखित में से कौन - सा एक समबीजाणुक टेरिडोफाइट पादप है ?
Right Answer: इक्वीसिटम
Explanation:
टेरिडोफाइट पादपों को बीजाणुओं की प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। समबीजाणुक पौधों में एक ही प्रकार के बीजाणु बनते हैं, जिनसे उभयलिंगी युग्मकोद्भिद विकसित होता है; इक्वीसिटम, लाइकोपोडियम, टेरिस तथा एडिएन्टम इसी वर्ग में आते हैं। विषमबीजाणुक पौधों में दो प्रकार के बीजाणु — छोटे लघुबीजाणु तथा बड़े गुरुबीजाणु — बनते हैं, जिनसे क्रमशः नर एवं मादा युग्मकोद्भिद विकसित होते हैं; सिलैजिनेला, मार्सिलिया, साल्वीनिया एवं एजोला इसके उदाहरण हैं। विषमबीजाणुता को बीज बनने की दिशा में पहला कदम माना जाता है।
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Q35. एक विशिष्ट समय पर प्रत्येक पोषण स्तर में पाई जाने वाली जीवित पदार्थ की मात्रा को कहा जाता है :
Right Answer: स्थित शस्य / खड़ी फसल
Explanation:
किसी निश्चित समय पर किसी पोषण स्तर पर उपस्थित समस्त जीवित पदार्थ की मात्रा को स्थित शस्य अथवा खड़ी फसल कहा जाता है। इसे ताजे अथवा शुष्क भार में मापा जाता है और अधिक शुद्ध तुलना के लिए शुष्क भार को प्राथमिकता दी जाती है। यह एक निश्चित क्षण की स्थिति दर्शाने वाली राशि है, अतः इसका कोई काल-आयाम नहीं होता। इसके विपरीत उत्पादकता एक दर है, जो प्रति इकाई क्षेत्र प्रति इकाई समय में उत्पन्न जैवभार बताती है। सकल प्राथमिक उत्पादकता में से श्वसन-हानि घटाने पर शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता प्राप्त होती है।
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Q36. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूटों की सहायता से चुनिए :
Right Answer: (b) व (c)
Explanation:
अमीनो अम्लों को उनके पार्श्व समूह की प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ग्लूटामिक अम्ल में अतिरिक्त कार्बोक्सिल समूह होने से वह अम्लीय है, अतः पहला युग्म सही है। फेनिलएलनिन में बेंजीन वलय होने से वह एरोमैटिक है, अतः चौथा युग्म भी सही है। दूसरा तथा तीसरा युग्म आपस में उलट गए हैं — वैलीन शाखित शृंखला वाला उदासीन एवं जलविरागी अमीनो अम्ल है, जबकि लाइसिन में अतिरिक्त अमीनो समूह होने के कारण वह क्षारीय है। अतः यही दोनों युग्म गलत हैं।
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Q37. जब शुद्ध जल में विलेय मिलाया जाता है, तो जल विभव का मान :
Right Answer: शून्य से कम होता है।
Explanation:
मानक ताप एवं दाब पर शुद्ध जल का जल विभव अधिकतम होता है और उसे परिभाषा के अनुसार शून्य माना जाता है। जब उसमें कोई विलेय घोला जाता है, तो जल के मुक्त अणुओं की सान्द्रता घट जाती है और विलेय के कण जल अणुओं को अपने चारों ओर बाँध लेते हैं; फलस्वरूप जल की मुक्त ऊर्जा तथा उसकी विसरित होने की प्रवृत्ति घट जाती है। इसी कारण विलयन का जल विभव सदैव शून्य से कम अर्थात् ऋणात्मक हो जाता है। विलेय जितना अधिक होगा, विभव उतना ही अधिक ऋणात्मक होगा और परासरण द्वारा जल उसी ओर जाएगा।
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Q38. पृथ्वी द्वारा विकीर्ण ऊर्जा का कौन - सा रूप ग्रीन हाउस गैसों द्वारा अवशोषित हो जाता है, जिससे वैश्विक उष्णता होती है ?
Right Answer: अवरक्त किरणें
Explanation:
सूर्य से आने वाली ऊर्जा मुख्यतः लघु तरंगदैर्घ्य वाले दृश्य प्रकाश के रूप में वायुमंडल को पार कर पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और उसे गरम करती है। गरम पृथ्वी इस ऊर्जा को दीर्घ तरंगदैर्घ्य वाली अवरक्त किरणों के रूप में पुनः विकीर्ण करती है। कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी ग्रीनहाउस गैसें इन्हीं अवरक्त किरणों को अवशोषित कर लेती हैं और उनका कुछ भाग पुनः पृथ्वी की ओर लौटा देती हैं। इसी से निचला वायुमंडल गरम होता है और वैश्विक उष्णता की स्थिति बनती है।
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Q39. लैक प्रचालेक (ओपेरॉन) का दमनकारी प्रोटीन द्वारा नियमन माना जाता है :
Right Answer: ऋणात्मक नियमन
Explanation:
जैकब एवं मोनो द्वारा वर्णित लैक प्रचालेक में तीन संरचनात्मक जीन — z, y तथा a — एक ही प्रवर्तक के नियंत्रण में रहते हैं। नियामक जीन से बना दमनकारी प्रोटीन प्रचालक स्थल से जुड़कर आर०एन०ए० पॉलिमरेज को आगे बढ़ने से रोक देता है, जिससे प्रतिलेखन बन्द रहता है। चूँकि यहाँ नियंत्रक अणु जीन-अभिव्यक्ति को रोकता है, इसलिए इसे ऋणात्मक नियमन कहा जाता है। लैक्टोज उपस्थित होने पर एलोलैक्टोज प्रेरक के रूप में दमनकारी से जुड़कर उसकी आकृति बदल देता है और वह प्रचालक से हट जाता है, जिससे प्रतिलेखन आरम्भ हो जाता है।
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Q40. विलोडित हौज बायोरिएक्टर को डिज़ाइन किया गया है :
Right Answer: पूरे बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की उपलब्धता करने के लिए।
Explanation:
विलोडित हौज बायोरिएक्टर अर्थात् स्टर्ड टैंक बायोरिएक्टर सामान्यतः बेलनाकार होता है और इसमें एक विलोडक लगा रहता है, जिसका मुख्य कार्य सम्पूर्ण बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह विलोडक संवर्धन माध्यम को निरन्तर मिलाता रहता है, जिससे कोशिकाएँ, पोषक तत्व एवं गैस समान रूप से वितरित रहते हैं और स्थानीय ताप-प्रवणता समाप्त हो जाती है। इसके साथ वायु प्रस्फुटन तंत्र, ताप एवं पी-एच नियंत्रण प्रणाली, प्रतिफेन नियंत्रण तथा प्रतिदर्श निकास द्वार लगे रहते हैं, जिससे इष्टतम वृद्धि दशाएँ बनी रहती हैं।
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Q41. एक पादप प्रजाति के लिए निम्नलिखित कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें :
Right Answer: (a) व (b) दोनों सही हैं।
Explanation:
दोनों कथन सही हैं। पारिज अर्थात् इकैड किसी एक ही प्रजाति की वे आबादियाँ हैं जो भिन्न आवासों में रहने के कारण आकारिकी में भिन्न दिखाई देती हैं, किन्तु यह भिन्नता केवल पर्यावरणजन्य होती है; इन्हें समान परिस्थिति में उगाने पर अन्तर मिट जाता है और वे परस्पर सरलता से प्रजनन कर लेती हैं। पारिस्थितिक प्ररूप अर्थात् इकोटाइप वे आबादियाँ हैं जो किसी विशिष्ट आवास के लिए आनुवंशिक रूप से अनुकूलित हो चुकी हैं, अतः उनका अन्तर वंशागत होता है, फिर भी वे एक ही प्रजाति की होने के कारण अन्तःप्रजननक्षम बनी रहती हैं।
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Q42. निम्नलिखित में से कौन - सा एक लिंग सहलग्न मेंडलीय विकार है ?
Right Answer: हीमोफीलिया
Explanation:
हीमोफीलिया एक लिंग सहलग्न अप्रभावी मेंडलीय विकार है, जिसका जीन X गुणसूत्र पर स्थित होता है। इसमें रक्त स्कन्दन कारक की कमी के कारण एक बार रक्तस्राव आरम्भ होने पर वह लम्बे समय तक नहीं रुकता। पुरुष में केवल एक X गुणसूत्र होने के कारण एक ही उत्परिवर्ती युग्मविकल्पी से रोग प्रकट हो जाता है, जबकि स्त्री तभी रोगी होती है जब दोनों X पर उत्परिवर्तन हो; अतः स्त्रियाँ प्रायः वाहक रहती हैं। इसके विपरीत फीनाइल कीटोनूरिया, दात्र कोशिका अरक्तता तथा थैलेसीमिया अलिंगसूत्री विकार हैं।
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Q43. GEAC का पूरा नाम क्या है ?
Right Answer: जेनेटिक इंजीनियरिंग अपू्रवल कमेटी
Explanation:
जी०ई०ए०सी० का पूरा नाम जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी है, जिसे अब आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति कहा जाता है। यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्तर्गत कार्य करने वाली शीर्ष नियामक संस्था है। इसका दायित्व आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित जीवों तथा उनसे बने उत्पादों से जुड़े अनुसंधान, बड़े पैमाने पर उपयोग, पर्यावरणीय निर्मुक्ति एवं व्यावसायिक खेती के प्रस्तावों की वैज्ञानिक जाँच कर स्वीकृति देना है। यह यह भी देखती है कि ऐसे अनुसंधान जनसामान्य के लिए सुरक्षित हों।
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Q44. निम्नलिखित में से कौन - सा कथन ब्रायोफाइटा के लिए सत्य नहीं है ?
Right Answer: लैंगिक जनन असमयुग्मकी प्रकार का होता है।
Explanation:
ब्रायोफाइटा में युग्मकोद्भिद प्रावस्था प्रमुख एवं स्वपोषी होती है, जबकि बीजाणुद्भिद उस पर पोषण के लिए आश्रित रहता है। इनमें नर युग्मक चलायमान होते हैं, अतः निषेचन के लिए जल अनिवार्य है और इसी कारण इन्हें ‘पादप जगत के उभयचर’ कहा जाता है। अर्धसूत्री विभाजन केवल बीजाणुधानी की बीजाणु मातृ कोशिकाओं में होता है। चौथा कथन असत्य है, क्योंकि इनका लैंगिक जनन असमयुग्मकी नहीं बल्कि विषमयुग्मकी अर्थात् अण्डयुग्मकी प्रकार का होता है, जिसमें बड़ा निश्चल अण्ड तथा छोटा चलायमान पुंयुग्मक भाग लेते हैं।
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Q45. एक प्ररूपी आवृतबीजीय भ्रूण - कोष परिपक्व होने पर होता है :
Right Answer: 8 केन्द्रीय व 7 कोशिकीय
Explanation:
प्ररूपी आवृतबीजी भ्रूणकोष का विकास पॉलीगोनम प्रकार का होता है, जिसमें गुरुबीजाणु का केन्द्रक तीन क्रमिक समसूत्री विभाजनों से आठ केन्द्रक उत्पन्न करता है। इसके बाद कोशिका-भित्तियाँ बनने पर सात कोशिकाएँ बनती हैं, क्योंकि दो ध्रुवीय केन्द्रक एक ही बड़ी केन्द्रीय कोशिका में रह जाते हैं। इस प्रकार परिपक्व भ्रूणकोष आठ केन्द्रकीय तथा सात कोशिकीय होता है। बीजाण्डद्वार की ओर तीन कोशिकाओं का अण्ड समुच्चय होता है, जिसमें एक अण्डकोशिका एवं दो सहायक कोशिकाएँ रहती हैं, निभाग की ओर तीन प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ तथा बीच में द्विकेन्द्रकी केन्द्रीय कोशिका।
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Q46. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
Right Answer: (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
Explanation:
कुनैन सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त होने वाला क्षारोद है और यह मलेरिया की प्राचीनतम प्रभावी औषधि रही है। कॉफी कॉफिया अरेबिका के बीजों से बनती है, जिन्हें भूनकर एवं पीसकर उपयोग में लाया जाता है। चाय कैमेलिया साइनेन्सिस की कोमल पत्तियों तथा कलिकाओं से तैयार की जाती है, जिन्हें विभिन्न स्तर तक ऑक्सीकृत कर हरी अथवा काली चाय बनाई जाती है। हींग फेरुला एसाफोटिडा की मोटी मूल एवं प्रकन्द से निकलने वाले दूधिया रस को सुखाकर प्राप्त की जाती है और भारतीय भोजन में पाचक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है।
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Q47. निम्न में से गलत कथन को चुनें :
Right Answer: भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जाति विविधता बढ़ती जाती है।
Explanation:
पहला कथन गलत है, क्योंकि जाति विविधता भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ती नहीं, बल्कि घटती जाती है; इसे अक्षांशीय प्रवणता कहा जाता है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विविधता अधिक होने के कारण हैं — वहाँ लम्बे समय तक हिमयुग जैसी उथल-पुथल नहीं हुई, अतः जातियों को विकसित होने के लिए स्थिर एवं दीर्घ काल मिला; वहाँ का वातावरण अपेक्षाकृत स्थिर एवं कम मौसमी है; और वहाँ सौर ऊर्जा अधिक उपलब्ध होने से उत्पादकता ऊँची रहती है। अमेजन वर्षा वन पृथ्वी का सर्वाधिक जैव विविधतापूर्ण क्षेत्र है और कीट सर्वाधिक जाति-समृद्ध जन्तु वर्ग हैं।
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Q48. निम्नलिखित में से कौन - सा ‘क्राई’ जीन मक्का छेदक को नियंत्रित करने में उपयोग होता है ?
Right Answer: क्राई I एबी
Explanation:
बैसिलस थुरिंजिएंसिस नामक जीवाणु से प्राप्त क्राई जीन विषैले प्रोटीन क्रिस्टल का कूटलेखन करते हैं, जिन्हें विभिन्न फसलों में स्थानान्तरित कर कीट-प्रतिरोधी बीटी किस्में बनाई जाती हैं। इनमें से क्राई I एबी जीन मक्का छेदक अर्थात् कॉर्न बोरर को नियंत्रित करने में प्रयुक्त होता है। क्राई I एसी तथा क्राई II एबी जीन कपास के गोलक कीट को नियंत्रित करते हैं, जिनसे बीटी कपास विकसित हुई, तथा क्राई III एबी भृंग को नियंत्रित करता है। यह प्रोटीन कीट की क्षारीय आँत में सक्रिय होकर उपकला कोशिकाओं में छिद्र बना देता है।
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Q49. साइकस की प्रवालाभ जड़ों में शैवाल क्षेत्र पाया जाता है :
Right Answer: मध्य वल्कुट में
Explanation:
साइकस में सामान्य मूसला जड़ों के अतिरिक्त विशेष प्रकार की प्रवालाभ जड़ें पाई जाती हैं, जो मूँगे जैसी शाखित होकर भूमि की सतह की ओर ऊपर उठती हैं। इनकी अनुप्रस्थ काट में मध्य वल्कुट में एक विशिष्ट शैवाल क्षेत्र दिखाई देता है, जहाँ एनाबीना तथा नॉस्टॉक जैसे नील-हरित शैवाल श्लेष्मा से भरी गुहा में निवास करते हैं। ये शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर पौधे को नाइट्रोजनयुक्त यौगिक देते हैं और बदले में आश्रय एवं भोजन प्राप्त करते हैं। यह सहजीविता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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Q50. RUBISCO विकर के लिए क्रियाधार है :
Right Answer: रिबुलोज़ 1, 5 बिस्फॉस्फेट
Explanation:
रुबिस्को अर्थात् रिबुलोज बिस्फॉस्फेट कार्बोक्सिलेज-ऑक्सीजनेज पृथ्वी का सर्वाधिक प्रचुर एन्जाइम माना जाता है और इसका क्रियाधार रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट है, जो पाँच कार्बन वाला यौगिक है। केल्विन चक्र के कार्बन स्थिरीकरण चरण में यह एन्जाइम कार्बन डाइऑक्साइड को रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट से जोड़ता है, जिससे तीन कार्बन वाले फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के दो अणु बनते हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसमें ऑक्सीजन के प्रति भी बन्धुता होती है, और ऑक्सीजन की अधिक सान्द्रता में यह प्रकाश-श्वसन आरम्भ कर देता है, जिससे उत्पादकता घट जाती है।
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Q51. आवृतबीजियों में शर्करा का स्थानांतरण किस रूप में होता है ?
Right Answer: सुक्रोज़
Explanation:
आवृतबीजी पौधों में शर्करा का स्थानान्तरण मुख्यतः सुक्रोज के रूप में होता है और यह कार्य पोषवाह अर्थात् फ्लोएम की चालनी नलिकाओं द्वारा किया जाता है। सुक्रोज इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह अनअपचायक द्विशर्करा है, अतः रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय एवं स्थायी रहती है, जल में अत्यधिक घुलनशील है और परिवहन के दौरान उपापचयी क्रियाओं में सरलता से नहीं टूटती। मुंच की दाब-प्रवाह परिकल्पना के अनुसार स्रोत पर सुक्रोज के भरने तथा गंतव्य पर उतरने से उत्पन्न दाब-प्रवणता ही इस प्रवाह को चलाती है।
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Q52. ई० कोलाई में आधार युग्मों की संख्या की गणना करें, यदि इसके डी० एन० ए० की लम्बाई 1.7 मिमी है :
Right Answer: 5 × 10 6 bp
Explanation:
द्विकुण्डलित डी०एन०ए० में दो क्रमागत क्षार-युग्मों के बीच की दूरी 0.34 नैनोमीटर अर्थात् 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 मीटर होती है। यहाँ ई० कोलाई के डी०एन०ए० की लम्बाई 1.7 मिलीमीटर दी गई है, जो 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 मीटर के बराबर है। क्षार-युग्मों की संख्या ज्ञात करने के लिए कुल लम्बाई को एक क्षार-युग्म की लम्बाई से भाग दिया जाता है। इस प्रकार 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 को 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 से भाग देने पर लगभग 5 गुणा 10 की घात 6 क्षार-युग्म प्राप्त होते हैं।
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Q53. नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही जोड़ी अथवा जोड़ियाँ चुनें :
Right Answer: (a) व (b)
Explanation:
मिनामाता रोग जापान में मिथाइल पारे से दूषित मछली खाने से हुआ था और इसमें तंत्रिका तंत्र गम्भीर रूप से प्रभावित होता है, अतः यह युग्म सही है। बाइसिनोसिस कपास मिलों में कपास की महीन धूल लम्बे समय तक श्वास में जाने से होने वाला फेफड़ों का रोग है, इसलिए यह भी सही है। शेष दोनों युग्म आपस में उलट गए हैं — नॉक-नी सिंड्रोम अर्थात् घुटनों का भीतर की ओर मुड़ जाना फ्लोराइड की अधिकता से होता है, जबकि मेटहीमोग्लोबिनेमिया अर्थात् ब्लू बेबी सिंड्रोम पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता से होता है।
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Q54. बीजों की सुषुप्तावस्था का कारण है :
Right Answer: सभी विकल्प सही हैं।
Explanation:
बीज सुषुप्तावस्था वह अवस्था है जिसमें अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर भी जीवित बीज अंकुरित नहीं होता। इसके अनेक कारण होते हैं और प्रश्न में दिए गए सभी विकल्प सही हैं। कठोर बीजचोल जल तथा ऑक्सीजन के लिए अपारगम्य हो सकता है, जैसा अनेक फलीदार पौधों में होता है। कुछ बीजों में भ्रूण बिखराव के समय अपरिपक्व रहता है और उसे परिपक्व होने के लिए समय चाहिए। तीसरा कारण एब्सिसिक अम्ल, फीनॉल एवं पैरा-एस्कॉर्बिक अम्ल जैसे रासायनिक अवरोधकों की उपस्थिति है। सुषुप्तावस्था बीज को प्रतिकूल ऋतु में अंकुरित होने से बचाती है।
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Q55. MN रक्त समूह प्रणाली के लिए M और N की आवृत्तियाँ क्रमशः 0.6 और 0.4 हैं। MN रक्त समूह वाले व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति संभवतः होगी :
Right Answer: 48%
Explanation:
हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत के अनुसार यदि किसी द्वि-युग्मविकल्पी लक्षण में एक युग्मविकल्पी की आवृत्ति p तथा दूसरे की q हो, तो विषमयुग्मजी व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति 2pq होती है। MN रक्त समूह प्रणाली सह-प्रभाविता का उत्तम उदाहरण है, जिसमें विषमयुग्मजी व्यक्ति MN समूह के होते हैं। यहाँ M की आवृत्ति 0.6 तथा N की 0.4 दी गई है, अतः MN की आवृत्ति 2 गुणा 0.6 गुणा 0.4 अर्थात् 0.48 होगी, जो प्रतिशत में 48 प्रतिशत बैठती है। इसी प्रकार M समूह 36 प्रतिशत तथा N समूह 16 प्रतिशत होगा।
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Q56. कणों या अणुओं का उच्च सान्द्रता क्षेत्र से निम्न सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गति करना कहलाता है : बिन्दु स्राव
Right Answer: विसरण
Explanation:
कणों अथवा अणुओं का उनके उच्च सान्द्रता वाले क्षेत्र से निम्न सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर गमन विसरण कहलाता है। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है, जिसमें कोई ऊर्जा व्यय नहीं होती और गति अणुओं की स्वाभाविक तापीय गतिज ऊर्जा से होती है। पौधों में गैसों का आदान-प्रदान, वाष्पोत्सर्जन तथा सुगन्ध का फैलना इसी के उदाहरण हैं। इसके विपरीत परासरण अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार केवल विलायक का विसरण है, अन्तःशोषण कोलाइडी पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है, तथा बिन्दुस्राव पत्तियों के किनारों से तरल जल का निकलना है।
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Q57. रिचमंड - लैंग प्रभाव जुड़ा हुआ है :
Right Answer: जीर्णता में देरी से
Explanation:
रिचमंड-लैंग प्रभाव साइटोकाइनिन हार्मोन से सम्बन्धित है। 1957 में रिचमंड तथा लैंग ने प्रयोग कर दिखाया कि यदि जैन्थियम की कटी हुई पत्तियों पर काइनेटिन का घोल लगाया जाए तो वे लम्बे समय तक हरी बनी रहती हैं और उनमें प्रोटीन एवं क्लोरोफिल का अपघटन विलम्बित हो जाता है। इस प्रकार साइटोकाइनिन जीर्णता को टालकर पत्ती की आयु बढ़ाता है, इसीलिए इसे जीर्णता-रोधी हार्मोन कहा जाता है। यह पोषक तत्वों को उपचारित भाग की ओर आकर्षित भी करता है, जिसे साइटोकाइनिन-प्रेरित पोषक गतिशीलता कहते हैं।
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Q58. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में यदि नेत्रिका - लेंस 10 X तथा अभिदृश्यक लेंस 40 X हो, तो कुल आवर्धन क्या होगा ?
Right Answer: 400 X
Explanation:
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रतिबिम्ब का निर्माण दो चरणों में होता है — पहले अभिदृश्यक लेंस वस्तु का वास्तविक एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाता है और फिर नेत्रिका लेंस उसे और आवर्धित कर आभासी प्रतिबिम्ब देता है। अतः कुल आवर्धन दोनों लेंसों के आवर्धनों के गुणनफल के बराबर होता है। यहाँ नेत्रिका का आवर्धन 10 गुना तथा अभिदृश्यक का 40 गुना है, इसलिए कुल आवर्धन 10 गुणा 40 अर्थात् 400 गुना होगा। ध्यातव्य है कि आवर्धन बढ़ाने से विभेदन क्षमता नहीं बढ़ती; वह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य तथा संख्यात्मक द्वारक पर निर्भर करती है।
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Q59. निम्नलिखित में से कौन - सा अमीनो अम्ल केवल एक प्रकूट द्वारा कूटलेखित होता है ?
Right Answer: ट्रिप्टोफैन
Explanation:
आनुवंशिक कूट अपह्रासित होता है, अर्थात् अधिकांश अमीनो अम्लों के लिए एक से अधिक प्रकूट होते हैं। इसका अपवाद केवल दो अमीनो अम्ल हैं — ट्रिप्टोफैन, जिसका एकमात्र प्रकूट UGG है, तथा मेथियोनीन, जिसका एकमात्र प्रकूट AUG है और जो प्रारम्भन प्रकूट भी है। इसके विपरीत सेरीन तथा ल्यूसीन के छह-छह प्रकूट होते हैं, वैलीन एवं ग्लाइसीन के चार-चार। अपह्रासन का जैविक लाभ यह है कि तीसरे क्षार में होने वाला उत्परिवर्तन प्रायः अमीनो अम्ल नहीं बदलता, जिसे मूक उत्परिवर्तन कहते हैं।
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Q60. निम्नलिखित में से कौन - सी ह्यूमस की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह बहुत तेजी से विघटित होता है।
Explanation:
ह्यूमस मृदा में उपस्थित वह गहरे रंग का अनाकार कार्बनिक पदार्थ है जो पौधों एवं जन्तुओं के अवशेषों के सूक्ष्मजीवीय अपघटन से बनता है। यह कोलाइडल प्रकृति का होता है, इसलिए जल तथा पोषक तत्वों को अपनी सतह पर रोककर उनका भण्डार बना रहता है और मृदा की धनायन विनिमय क्षमता बढ़ाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि ह्यूमस अत्यन्त धीरे-धीरे विघटित होता है; यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जिससे वह लम्बे समय तक मृदा की संरचना, वायु-संचार एवं जलधारण क्षमता को बनाए रखता है और पोषक तत्व क्रमशः मुक्त करता रहता है।
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