HTET Psychology PGT 2024 Solved Exam Paper
HTET Psychology PGT 2024 Solved Exam Paper: 150 Questions with Answers
HTET Psychology PGT 2024 Solved Exam Paper: Exam Pattern and Preparation Notes

HTET is conducted by the Board of School Education Haryana (BSEH), Bhiwani, and PGT Psychology falls under HTET Level 3, for candidates teaching Classes IX to XII. Like every HTET level, this paper has 150 multiple-choice questions worth 150 marks, completed in 150 minutes, with no negative marking. Check the official BSEH website for the current year's notification before you register.
The PGT Psychology paper mixes Child Development and Pedagogy questions with the subject-specific portion, which usually spans general psychology theories, developmental psychology, learning and cognition, and psychology teaching methodology. Since there's no negative marking, attempt every question rather than leaving doubtful ones blank; a guess costs nothing while a blank answer guarantees zero.
Psychology PGT candidates often lose marks on theorist-attribution questions rather than concept-explanation ones, since exam papers frequently pair a psychological concept with multiple plausible theorists. Build a mental list linking each major theory to its originator rather than just understanding the concept in isolation.
If you're also preparing for other Psychology teaching posts such as KVS PGT Psychology or DSSSB PGT Psychology, the core subject portion overlaps heavily with HTET, so this solved paper doubles as preparation for those exams too. Most first-time HTET PGT Psychology candidates underestimate how much of the paper is general pedagogy rather than pure Psychology content, since the two overlap conceptually but are tested as separate sections.
Solve this 2024 paper under real exam conditions: set a 150-minute timer, attempt every question in one sitting, and check the answer key only once you've finished. Note down which topics cost you the most marks, whether it's theorist attribution, developmental stages, or pedagogy, and revise those specifically before your next attempt.
HTET Psychology PGT 2024 (Level-3) का हल सहित प्रश्न पत्र। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा आयोजित हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के मनोविज्ञान विषय (भाग-IV) के सभी प्रश्न, चारों विकल्प, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या के साथ।
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0%Psychology (90 Questions)
Q1. प्रोफेसर एलिजाबेथ लॉफ्टस मनोविज्ञान में एक अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व है जिन्होंने असत्य स्मृति एवं ........... की अवधारणा दी।
Right Answer: प्रत्यक्षदर्शी अनुमान
Explanation:
एलिजाबेथ लॉफ्टस स्मृति के क्षेत्र की सर्वाधिक प्रभावशाली शोधकर्ताओं में हैं। उन्होंने प्रमाणित किया कि स्मृति किसी अभिलेख की भाँति स्थिर नहीं, बल्कि पुनर्रचित होती है और घटना के बाद मिलने वाली सूचना उसे बदल सकती है। उनके प्रसिद्ध प्रयोग में दुर्घटना का वीडियो दिखाकर प्रश्न में ‘टकराई’ के स्थान पर ‘चूर-चूर हुई’ शब्द प्रयोग करने मात्र से प्रत्यक्षदर्शियों ने अधिक गति बताई और कई ने न होते हुए भी टूटा काँच याद किया। ‘शॉपिंग मॉल में खो जाना’ अध्ययन में उन्होंने असत्य स्मृति ही रोप दी। इससे प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य की विश्वसनीयता पर गम्भीर प्रश्न खड़े हुए।
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Q2. अंजली एक अच्छी पाठक है क्योंकि पढ़ते समय वह सामग्री पर सहजता से आगे बढ़ती जाती है। इससे वह साथियों से तेज पढ़ लेती है, परन्तु यह निश्चित नहीं कि वह सामग्री समझ भी पा रही है। इस प्रतिमान की व्याख्या है :
Right Answer: नेत्रप्लुति गति
Explanation:
पढ़ते समय आँखें पंक्ति पर सतत रूप से नहीं सरकतीं, बल्कि छोटी-छोटी तीव्र छलाँगें लगाती हैं जिन्हें नेत्रप्लुति गति कहा जाता है। दो छलाँगों के बीच आँख लगभग एक चौथाई सेकण्ड के लिए ठहरती है और इसी ठहराव में वास्तविक पठन होता है, क्योंकि छलाँग के दौरान दृष्टि लगभग दबी रहती है। कुशल पाठक की छलाँगें लम्बी और ठहराव कम होते हैं, इसलिए वह तेज पढ़ता है। परन्तु ठहराव कम होने से प्रसंस्करण का समय भी घट जाता है, अतः गति बढ़ने पर समझ की गारंटी नहीं रहती। यही अंजली के प्रकरण की व्याख्या है।
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Q3. टकमैन ने बताया कि समूह पाँच विकासात्मक अनुक्रमों से गुजरता है, सही क्रम है :
Right Answer: आकृतिकरण, विप्लवन, मानक निर्माण, निष्पादन एवं समापन
Explanation:
ब्रूस टकमैन ने समूह विकास के चरण बताए, जिनमें बाद में पाँचवाँ चरण जोड़ा गया। पहला चरण आकृतिकरण है, जिसमें सदस्य एक-दूसरे को जानते हैं और औपचारिक व्यवहार करते हैं। दूसरा विप्लवन है, जिसमें भूमिका तथा नेतृत्व को लेकर संघर्ष एवं मतभेद उभरते हैं। तीसरा मानक निर्माण है, जहाँ समूह के नियम एवं मानक तय होते हैं और सामंजस्य बनता है। चौथा निष्पादन है, जिसमें समूह लक्ष्य की ओर प्रभावी ढंग से कार्य करता है। अन्तिम चरण समापन है, जिसमें कार्य पूरा होने पर समूह विसर्जित हो जाता है।
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Q4. एक इमेजिंग तकनीक जो मस्तिष्क के रक्त प्रवाह और कई शारीरिक और तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन करती है, को कहते हैं :
Right Answer: पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी)
Explanation:
पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक कार्यात्मक इमेजिंग तकनीक है, जिसमें रक्त में अल्प मात्रा में रेडियोधर्मी अनुरेखक, प्रायः रेडियोधर्मी ग्लूकोज, प्रविष्ट कराया जाता है। मस्तिष्क का जो भाग अधिक सक्रिय होता है वहाँ रक्त प्रवाह तथा उपापचय बढ़ जाता है और वहीं अनुरेखक अधिक एकत्र होता है। उत्सर्जित पॉजिट्रॉन का पता लगाकर रंगीन मानचित्र बनाया जाता है, जो रक्त प्रवाह एवं अनेक शारीरिक तथा तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन देता है। इसके विपरीत सीटी तथा एमआरआई मुख्यतः संरचनात्मक चित्र देते हैं, यद्यपि एफएमआरआई कार्यात्मक सूचना भी प्रदान करता है।
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Q5. निम्नलिखित चयनात्मक ध्यान के सिद्धांतों को उनके प्रतिपादकों के साथ मिलान कीजिए एवं सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(i), (D)-(iii)
Explanation:
डोनाल्ड ब्रॉडबेन्ट का निस्यंदक सिद्धांत मानता है कि ध्यान एक आरम्भिक छननी की भाँति कार्य करता है, जो केवल चयनित संदेश को आगे भेजती है और शेष को पूरी तरह रोक देती है। ऐनी ट्रायसमैन के निस्यंदक क्षीणन सिद्धांत के अनुसार अनचाहा संदेश पूरी तरह रुकता नहीं, केवल क्षीण होकर आगे बढ़ता है, इसीलिए अपना नाम सुनते ही ध्यान चला जाता है। जॉनसन एवं हिन्ज का बहुविधिक सिद्धांत बताता है कि चयन का बिन्दु स्थिर नहीं, बल्कि कार्य की माँग के अनुसार लचीला होता है। टैचिस्टोस्कोप ध्यान का विस्तार मापने वाला उपकरण है।
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Q6. अभिवृत्ति परिवर्तन के द्विचरणीय अवधारणा के प्रतिपादक थे :
Right Answer: मोहसिन
Explanation:
अभिवृत्ति परिवर्तन की द्विचरणीय अवधारणा भारतीय मनोवैज्ञानिक एस० एम० मोहसिन ने प्रस्तुत की। उनके अनुसार अभिवृत्ति एक ही झटके में नहीं बदलती, बल्कि दो चरणों से गुजरती है। प्रथम चरण में लक्ष्य-व्यक्ति उस स्रोत के प्रति अपनी अभिवृत्ति बदलता है जो परिवर्तन का प्रयास कर रहा है, अर्थात् वह स्रोत की विश्वसनीयता, आकर्षण एवं समानता को स्वीकार करता है। द्वितीय चरण में ही वह उस स्रोत द्वारा प्रस्तुत विषय-वस्तु के प्रति अपनी अभिवृत्ति बदलता है। इस प्रकार स्रोत में विश्वास अभिवृत्ति परिवर्तन की अनिवार्य पूर्वशर्त बन जाता है।
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Q7. शारीरिक, संवेगात्मक और मनोवैज्ञानिक परिश्रान्ति की अवस्था को कहा जाता है :
Right Answer: बर्नआउट
Explanation:
बर्नआउट दीर्घकालिक एवं अनसुलझे व्यावसायिक तनाव के कारण उत्पन्न शारीरिक, संवेगात्मक तथा मनोवैज्ञानिक परिश्रान्ति की अवस्था है। इसका व्यवस्थित अध्ययन क्रिस्टीना मास्लाक ने किया और तीन आयाम बताए — भावनात्मक थकावट, जिसमें व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह निचुड़ा हुआ अनुभव करता है; व्यक्तिनिर्वैयक्तिकीकरण, जिसमें वह सेवार्थियों के प्रति उदासीन एवं निष्ठुर हो जाता है; तथा व्यक्तिगत उपलब्धि की घटी हुई अनुभूति। शिक्षक, चिकित्सक एवं परामर्शदाता जैसे सहायक व्यवसायों में यह अधिक मिलता है। इसके लक्षण अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, कार्य से विरक्ति तथा निष्पादन में गिरावट के रूप में प्रकट होते हैं।
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Q8. स्मृति अनुसंधान में प्रतिनिधित्वशीलता तथा सामान्यीकरण के पहलू जुड़े हुए हैं :
Right Answer: पारिस्थितिक वैधता से
Explanation:
पारिस्थितिक वैधता से तात्पर्य है कि किसी अध्ययन की परिस्थितियाँ, सामग्री तथा कार्य वास्तविक जीवन से कितने मिलते-जुलते हैं और उसके परिणाम प्रयोगशाला के बाहर कहाँ तक लागू होते हैं। स्मृति अनुसंधान में इसके दो पक्ष माने जाते हैं — प्रतिनिधित्वशीलता, अर्थात् प्रयोग की दशाएँ रोजमर्रा की स्मृति-स्थितियों का प्रतिनिधित्व करती हों, तथा सामान्यीकरण, अर्थात् निष्कर्ष दैनिक जीवन तक विस्तारित हो सकें। एबिंगहॉस के निरर्थक अक्षर-समूह वाले प्रयोगों की इसी आधार पर आलोचना हुई और नाइजर ने वास्तविक जीवन की स्मृति के अध्ययन पर बल दिया, जिससे जीवनचरित स्मृति का क्षेत्र विकसित हुआ।
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Q9. पूर्वाग्रह से संबंधित एक सिद्धान्त जो बताता है कि जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढे़गी समूह के सदस्य एक दूसरे के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण तेजी से विकसित करेंगे, कहलाता है :
Right Answer: यथार्थवादी संघर्ष सिद्धान्त
Explanation:
यथार्थवादी संघर्ष सिद्धान्त बताता है कि पूर्वाग्रह एवं अन्तर्समूह शत्रुता का मूल कारण सीमित संसाधनों के लिए वास्तविक प्रतिस्पर्धा है। जैसे-जैसे नौकरी, भूमि अथवा शक्ति के लिए स्पर्धा बढ़ती है, समूह के सदस्य दूसरे समूह के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण, रूढ़धारणाएँ तथा शत्रुता तेजी से विकसित करने लगते हैं। मुज़फ़र शेरिफ़ के प्रसिद्ध ‘रॉबर्स केव’ प्रयोग ने इसे प्रमाणित किया, जहाँ प्रतिस्पर्धी खेलों ने दो बालक-समूहों को शत्रु बना दिया। उसी अध्ययन में यह भी दिखा कि दोनों समूहों को मिलकर पूरा करने योग्य अधिस्थ लक्ष्य देने पर यह शत्रुता घट जाती है।
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Q10. जब व्यक्ति ‘‘करने योग्य कार्यों की सूची’’ तैयार कर यह सोचता है कि वह उन कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लेंगे, परंतु बमुश्किल ही उन्हें पूरा कर पाता है, को कहते हैं :
Right Answer: नियोजन भ्रांति
Explanation:
नियोजन भ्रांति की अवधारणा डेनियल कानेमन तथा एमोस ट्वर्सकी ने दी। यह वह व्यवस्थित पूर्वाग्रह है जिसमें व्यक्ति किसी कार्य को पूरा करने में लगने वाले समय, लागत एवं जोखिम का कम आकलन करता है और लाभ का अधिक। ‘करने योग्य कार्यों की सूची’ बनाते समय वह आदर्श परिस्थितियों की कल्पना करता है और बीमारी, व्यवधान तथा विलम्ब जैसी सामान्य बाधाओं को गणना में नहीं लेता। रोचक बात यह है कि पिछले अनुभवों में बार-बार देरी होने पर भी यह भ्रांति बनी रहती है। इससे बचने का उपाय है समान कार्यों के वास्तविक आँकड़ों पर आधारित बाह्य दृष्टिकोण अपनाना।
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Q11. डोपामाईन नामक न्यूरोट्रांसमीटर मुख्यतः पाया जाता है :
Right Answer: मस्तिष्क और सब्सटेंशिया नाइग्रा के न्यूरॉन्स में
Explanation:
डोपामाइन एक कैटेकोलामीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मुख्यतः मस्तिष्क के न्यूरॉन्स में तथा विशेष रूप से मध्य मस्तिष्क की सब्सटेंशिया नाइग्रा में पाया जाता है। यहाँ से निग्रोस्ट्राइएटल मार्ग द्वारा यह गतिविधि के नियंत्रण को संचालित करता है, जबकि मेसोलिम्बिक मार्ग पुरस्कार, सुख एवं अभिप्रेरणा से जुड़ा है। सब्सटेंशिया नाइग्रा की कोशिकाओं के क्षय से डोपामाइन घट जाता है और पार्किंसन रोग उत्पन्न होता है, जिसमें कम्पन एवं जड़ता दिखती है। इसके विपरीत इसकी अतिसक्रियता मनोविदलता से जोड़ी जाती है। न्यूरोपेशीय जंक्शन पर तो एसीटिलकोलीन कार्य करता है।
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Q12. शोध करते समय यदि शोधकर्ता किसी घटना के बारे में किसी के व्यक्तिगत अनुभव की गहराई से समझ हासिल करना चाहता है, तो सबसे अच्छी विधि होगी :
Right Answer: व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण
Explanation:
व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण एक गुणात्मक शोध विधि है, जिसे जोनाथन स्मिथ ने विकसित किया। इसका उद्देश्य यह गहराई से समझना है कि कोई व्यक्ति किसी महत्त्वपूर्ण घटना या अनुभव को स्वयं किस प्रकार अर्थ देता है। इसमें प्रायः थोड़े से प्रतिभागियों के साथ अर्ध-संरचित गहन साक्षात्कार किए जाते हैं और उनके शब्दशः प्रतिलेख से उपविषय एवं प्रतिरूप निकाले जाते हैं। यह दोहरी व्याख्या पर आधारित है, क्योंकि शोधकर्ता उस अर्थ की व्याख्या करता है जो प्रतिभागी अपने अनुभव को दे रहा होता है। प्रवचन विश्लेषण तथा संवादी विश्लेषण भाषा एवं संवाद की संरचना पर केन्द्रित रहते हैं।
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Q13. मनोचिकित्सकीय संबंध के दौरान जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ, शारीरिक स्पर्श और खुलकर रोने की इच्छा प्रकट करता है, तब परामर्शदाता का स्थानांतरण प्रतिरूप होता है :
Right Answer: पालन - पोषणकर्ता
Explanation:
मनोचिकित्सकीय सम्बन्ध में जब सेवार्थी परामर्शदाता को अपने जीवन की किसी महत्त्वपूर्ण आकृति की तरह देखने लगता है, तो उसे स्थानांतरण कहते हैं। जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ प्रकट करता है, शारीरिक स्पर्श चाहता है और खुलकर रोना चाहता है, तो वह वस्तुतः माता-पिता जैसी देखभाल और सुरक्षा की माँग कर रहा होता है। ऐसी स्थिति में परामर्शदाता की भूमिका पालन-पोषणकर्ता की बन जाती है, जिसमें वह स्नेह, आश्वासन एवं संरक्षण प्रदान करता है। परामर्शदाता को इस प्रतिरूप के प्रति सजग रहना चाहिए, अन्यथा सेवार्थी की निर्भरता बढ़ जाती है और चिकित्सकीय सीमाएँ धुँधली पड़ जाती हैं।
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Q14. एक विद्यार्थी पाठ्यसामग्री का पुनरावलोकन करती है और कुछ समय अध्ययन के बाद निर्णय लेती है कि वह इसे अच्छे से जानती है तथा अगले विषय पर चली जाती है। स्वयं की अधिगम-स्थिति के इस मूल्यांकन को कहा जाता है :
Right Answer: मेटासंज्ञान
Explanation:
मेटासंज्ञान का अर्थ है ‘संज्ञान के बारे में संज्ञान’, अर्थात् अपनी ही चिन्तन एवं अधिगम प्रक्रियाओं की जानकारी तथा उन पर नियंत्रण। इस पद का प्रयोग जॉन फ्लेवेल ने किया। इसके दो प्रमुख अंग हैं — मेटासंज्ञानात्मक ज्ञान, जिसमें व्यक्ति जानता है कि उसे कौन-सी युक्ति कब उपयोगी लगती है, और मेटासंज्ञानात्मक नियमन, जिसमें वह योजना बनाता, प्रगति की निगरानी करता तथा परिणाम का मूल्यांकन करता है। यह निर्णय लेना कि ‘अब मैं इस विषय को पर्याप्त जानती हूँ, अगला पढ़ा जाए’ अधिगम-निर्णय अर्थात् मेटासंज्ञानात्मक निगरानी का ही उदाहरण है।
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Q15. लोग कभी-कभी गलती से यह मान लेते हैं कि दूसरों की राय उनसे अलग होती है, जब भी ऐसा होता है, लोग दिखाते हैं :
Right Answer: बहुलवादी अज्ञान
Explanation:
बहुलवादी अज्ञान वह स्थिति है जिसमें समूह के अधिकांश सदस्य निजी रूप से एक ही मत रखते हैं, किन्तु प्रत्येक गलती से यह मान लेता है कि दूसरों के विचार उससे भिन्न हैं। इसका कारण यह है कि लोग अपनी असहमति खुलकर व्यक्त नहीं करते और दूसरों की चुप्पी को सहमति समझ लेते हैं। परिणामस्वरूप कोई भी बोलता नहीं और अनुपयोगी परम्पराएँ बनी रहती हैं। कक्षा में शंका होते हुए भी प्रश्न न पूछना तथा आपात स्थिति में दर्शक-प्रभाव इसके उदाहरण हैं। संज्ञानात्मक असंगति फेस्टिंगर की अवधारणा है, जो परस्पर विरोधी संज्ञानों के तनाव से जुड़ी है।
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Q16. निम्नलिखित में से कौन - सा मनोविज्ञान का परिदृश्य मानव की स्वतंत्र इच्छाओं एवं उनके विकसित होने के स्वाभाविक प्रयास एवं उनकी आन्तरिक क्षमताओं के मुखरित होने पर बल देता है :
Right Answer: मानवतावादी परिदृश्य
Explanation:
मानवतावादी परिदृश्य के प्रमुख प्रवर्तक अब्राहम मैस्लो तथा कार्ल रोजर्स रहे। इसे मनोविज्ञान की ‘तीसरी शक्ति’ कहा जाता है, क्योंकि यह मनोविश्लेषण के अचेतन निर्धारणवाद और व्यवहारवाद के पर्यावरणीय नियंत्रण दोनों को अस्वीकार करता है। यह दृष्टिकोण मानता है कि मनुष्य स्वतंत्र इच्छा रखता है, अपने चुनाव के लिए उत्तरदायी है तथा उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने और अपनी आन्तरिक क्षमताओं को मुखरित करने की प्रवृत्ति होती है। मैस्लो ने इसे आत्मसिद्धि कहा और रोजर्स ने इसके लिए बिना शर्त सकारात्मक आदर तथा सहानुभूति को आवश्यक बताया।
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Q17. निम्नलिखित में से कौन - सा बुद्धि का त्रिआर्किक सिद्धांत ‘‘व्यावहारिक बुद्धि या व्यावसायिक समझ’’ की सही व्याख्या करता है ?
Right Answer: सांदर्भिक बुद्धि
Explanation:
रॉबर्ट स्टर्नबर्ग के बुद्धि के त्रिआर्किक सिद्धान्त में तीन उप-सिद्धान्त हैं। घटकीय अथवा विश्लेषणात्मक बुद्धि सूचना के प्रसंस्करण, तर्क तथा समस्या-समाधान से जुड़ी है और परम्परागत परीक्षणों में यही मापी जाती है। आनुभाविक अथवा सृजनात्मक बुद्धि नवीन परिस्थितियों में मौलिक समाधान खोजने तथा अनुभव को स्वचालित बनाने की क्षमता है। सांदर्भिक अथवा व्यावहारिक बुद्धि वास्तविक जीवन के परिवेश से अनुकूलन करने, उसे अपने अनुकूल ढालने अथवा उपयुक्त परिवेश चुनने की योग्यता है। इसे ही ‘व्यावसायिक समझ’ या सांसारिक चातुर्य कहा जाता है, जो मौन ज्ञान पर आधारित होती है।
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Q18. निम्न कथनों को पढ़कर सही कूट का चुनाव कीजिए :
Right Answer: (A) तथा (B) दोनों सही हैं।
Explanation:
स्टीवंस ने मापन के चार स्तर बताए — नामिक, क्रमिक, अन्तराल तथा अनुपात। नामिक मापनी केवल वर्गीकरण करती है, जिसकी श्रेणियाँ समजातीय एवं परस्पर अनन्य होती हैं। क्रमिक मापनी इससे एक कदम आगे बढ़कर इन श्रेणियों में क्रम अथवा पद भी स्थापित करती है। इसलिए वह न केवल एक व्यक्ति को दूसरे से पृथक करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किसमें कोई शीलगुण अधिक है और किसमें कम। इस प्रकार दोनों कथन सही हैं। हाँ, क्रमिक मापनी यह नहीं बताती कि दो पदों के बीच अन्तर कितना है, क्योंकि उसके अन्तराल समान नहीं होते।
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Q19. एक प्रसिद्ध अध्ययन जिसके द्वारा मार्शमेलो प्रभाव प्रतिपादित किया गया, के जनक हैं :
Right Answer: वाल्टर मिशेल
Explanation:
मार्शमेलो प्रयोग वाल्टर मिशेल ने 1960 और 1970 के दशक में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया। इसमें चार से पाँच वर्ष के बच्चे के सामने एक मार्शमेलो रखकर कहा जाता था कि यदि वह शोधकर्ता के लौटने तक प्रतीक्षा कर ले तो उसे दो मिल जाएँगे। यह प्रयोग विलम्बित परितोषण अर्थात् आत्मनियंत्रण की क्षमता मापता था। अनुवर्ती अध्ययनों में पाया गया कि जो बच्चे अधिक देर प्रतीक्षा कर सके, उनके शैक्षिक प्रदर्शन, तनाव-प्रबन्धन तथा सामाजिक कुशलता आगे चलकर बेहतर रहे। इसी से मिशेल का व्यक्तित्व का संज्ञानात्मक-सांवेगिक प्रतिमान विकसित हुआ।
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Q20. अधिगम तत्वों (सूची-I) को उनकी सही परिभाषाओं (सूची-II) से सुमेलित कीजिए :
Right Answer: (A)-(iii), (B)-(ii), (C)-(i), (D)-(iv)
Explanation:
पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन में चार तत्व होते हैं। अननुबंधित उद्दीपक वह स्वाभाविक उद्दीपक है जो बिना किसी अधिगम के अनैच्छिक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, जैसे भोजन। उसके प्रति होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया, जैसे लार आना, अननुबंधित अनुक्रिया कहलाती है। अनुबंधित उद्दीपक वह है जो पहले तटस्थ था, किन्तु अननुबंधित उद्दीपक के साथ बार-बार युग्मित होने पर अब स्वयं प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम हो जाता है, जैसे घण्टी। और अनुबंधित उद्दीपक के प्रति सीखी हुई प्रतिक्रिया अनुबंधित अनुक्रिया कहलाती है।
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Q21. निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही कूट चुनिए :
Right Answer: केवल (B) सही है।
Explanation:
कथन (A) गलत है। चिन्ता जैसी अवस्थागत अर्थात् गतिशील विशेषताएँ स्थिति एवं समय के साथ तेजी से बदलती हैं, इसलिए दो अवसरों पर लिए गए मापों में अन्तर आ जाता है और परीक्षण-पुनःपरीक्षण विश्वसनीयता निम्न रहती है। उच्च परीक्षण-पुनःपरीक्षण विश्वसनीयता तो बुद्धि या शीलगुण जैसी स्थायी विशेषताओं में मिलती है। कथन (B) सही है, क्योंकि समजातीय परीक्षण की सभी वस्तुएँ एक ही कारक मापती हैं, जबकि विषमजातीय परीक्षण अनेक कारक मापता है। अतः केवल (B) सही है और यही उत्तर है।
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Q22. एक शिक्षक ने छात्रों की वर्तमान स्थिति एवं प्रदर्शन का आकलन करने हेतु परीक्षा ली और उसके बाद उन कारकों की जाँच की जो विभिन्न अनुदेशात्मक प्रथाओं के कारण प्रतिकूल परिणामों से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। यहाँ शिक्षक ने किया :
Right Answer: नैदानिक मूल्यांकन
Explanation:
नैदानिक मूल्यांकन का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं होता कि विद्यार्थी ने कितना सीखा, बल्कि यह पता लगाना होता है कि वह कहाँ और क्यों पिछड़ रहा है। इसमें अधिगम कठिनाइयों के अन्तर्निहित कारणों — जैसे दोषपूर्ण शिक्षण विधि, अनुपयुक्त सामग्री, पूर्वज्ञान की कमी अथवा अभिप्रेरणा का अभाव — की व्यवस्थित जाँच की जाती है, ताकि उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सके। इसके विपरीत रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण के दौरान निरन्तर प्रतिपुष्टि देता है, योगात्मक मूल्यांकन पाठ्यक्रम के अन्त में उपलब्धि आँकता है और पाठ्यक्रम मूल्यांकन स्वयं पाठ्यक्रम की गुणवत्ता जाँचता है।
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Q23. जब आप यह देखते हैं कि अन्य लोग भी मृत्युदण्ड के पक्ष में हैं तो आप यह अनुभव करते हैं कि यह विचार या दृष्टिकोण जनता के द्वारा वैधीकृत किया जा रहा है। यह एक प्रकार का ........... है।
Right Answer: अनुरूपता प्रभाव
Explanation:
बैंडवैगन प्रभाव वह प्रवृत्ति है जिसमें किसी विचार या व्यवहार को केवल इसलिए सही एवं वैध मान लिया जाता है क्योंकि बहुत से लोग उसे अपना रहे हैं। इसका आधार सूचनात्मक सामाजिक प्रभाव है, जिसमें व्यक्ति दूसरों के व्यवहार को वास्तविकता का प्रमाण मान लेता है। मृत्युदण्ड के उदाहरण में व्यक्ति अपने विचार को स्वयं जाँचने के बजाय जनसमर्थन को ही उसकी वैधता का प्रमाण मान लेता है। यह प्रभाव चुनाव, विज्ञापन एवं फैशन में सामान्य रूप से दिखाई देता है। अनुपालन प्रत्यक्ष अनुरोध की तथा आज्ञाकारिता किसी सत्ता के आदेश की स्वीकृति है।
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Q24. बेडली (1996) के अनुसार कॉर्टेक्स के ललाट पालि की क्षति केन्द्रीय कार्यकारी को नुकसान पहुँचाती है और पीड़ित व्यक्ति अपने प्रसंस्करण संसाधनों को उचित रूप से निर्देशित नहीं कर पाता। यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम
Explanation:
एलन बेडली के कार्यशील स्मृति प्रतिरूप में केन्द्रीय कार्यकारी सर्वोच्च नियंत्रक इकाई है, जो ध्यान बाँटने, कार्यों के बीच अदल-बदल करने तथा ध्वन्यात्मक लूप और दृश्य-स्थानिक स्केचपैड का संचालन करने का कार्य करती है। ललाट पालि की क्षति से यही इकाई क्षतिग्रस्त हो जाती है और डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम उत्पन्न होता है। इसमें रोगी योजना बनाने, कार्य आरम्भ करने, ध्यान बदलने तथा आवेग रोकने में असमर्थ हो जाता है, विचलित होता रहता है और अनुचित व्यवहार दोहराता है। यह अल्जाइमर या पार्किंसन जैसे अपह्रासी रोगों से भिन्न एक कार्यकारी नियंत्रण विकार है।
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Q25. निम्नलिखित मापनियों को उनके निर्माता से मिलान कर सही कूट चुनिए :
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(iii), (D)-(i)
Explanation:
मिनेसोटा मल्टीफेजिक व्यक्तित्व मापनी का निर्माण स्टार्क हैथवे तथा जे० सी० मैकिनले ने 1943 में किया और यह मानसिक विकृतियों के नैदानिक मूल्यांकन में प्रयुक्त होती है। पर्सनल डेटा शीट रॉबर्ट वुडवर्थ ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सैनिकों की भावनात्मक स्थिरता जाँचने हेतु बनाई और इसे पहली व्यक्तित्व प्रश्नावली माना जाता है। सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली रेमंड कैटल ने कारक विश्लेषण के आधार पर विकसित की। नीओ-व्यक्तित्व मापनी-संशोधित पॉल कोस्टा तथा रॉबर्ट मैक्री की देन है, जो पंचकारक प्रतिमान को मापती है।
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Q26. प्रायोगिक विधि के सफलतम प्रयोग के लिए आवश्यक है :
Right Answer: प्रतिभागियों का यादृच्छिक निर्धारण
Explanation:
प्रायोगिक विधि का उद्देश्य स्वतंत्र चर तथा आश्रित चर के बीच कारण-कार्य सम्बन्ध स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रयोगात्मक और नियंत्रित समूह आरम्भ में सभी दृष्टियों से समतुल्य हों। यह केवल प्रतिभागियों के यादृच्छिक निर्धारण से सम्भव होता है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के किसी भी समूह में जाने की सम्भावना समान रहती है। इससे बुद्धि, आयु, अभिप्रेरणा जैसे बाह्य चर दोनों समूहों में समान रूप से बँट जाते हैं और उनका प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है। चरों का संकरण तो प्रयोग का दोष है, जबकि प्राकृतिक निरीक्षण एक भिन्न शोध विधि है।
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Q27. संज्ञानात्मक त्रय की विशेषता एक व्यक्ति द्वारा धारण किए गए विश्वासों से होती है। त्रय हैं :
Right Answer: स्व, संसार तथा भविष्य
Explanation:
संज्ञानात्मक त्रय की अवधारणा एरोन बेक ने अवसाद की व्याख्या हेतु दी। इसके अनुसार अवसादग्रस्त व्यक्ति तीन क्षेत्रों में स्वतः उत्पन्न नकारात्मक विचार धारण करता है — स्वयं के प्रति, जहाँ वह अपने को अयोग्य एवं दोषपूर्ण मानता है; संसार अर्थात् अपने वर्तमान अनुभवों के प्रति, जहाँ उसे प्रत्येक परिस्थिति बाधाओं से भरी दिखती है; और भविष्य के प्रति, जहाँ उसे केवल निराशा एवं असफलता दिखाई देती है। ये नकारात्मक स्कीमा संज्ञानात्मक विकृतियों को जन्म देते हैं। बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा इन्हीं स्वचालित विचारों को पहचानकर प्रमाणों की सहायता से चुनौती देती है।
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Q28. किसी व्यक्ति के लिए उद्दीपक की तीव्रता में अंतर देखने के लिए आवश्यक भौतिक उद्दीपक में परिवर्तन की न्यूनतम मात्रा को कहा जाता है :
Right Answer: अंतर सीमा
Explanation:
अंतर सीमा वह न्यूनतम मात्रा है जितना किसी भौतिक उद्दीपक में परिवर्तन करने पर व्यक्ति उसकी तीव्रता में अन्तर का अनुभव कर सके। इसी परिवर्तन के फलस्वरूप जो अनुभूत अन्तर उत्पन्न होता है उसे ‘बस ध्यान देने योग्य अंतर’ कहते हैं। अर्नेस्ट वेबर ने बताया कि अंतर सीमा उद्दीपक की मूल तीव्रता के समानुपाती होती है; यही वेबर का नियम है। इसीलिए तेज प्रकाश में परिवर्तन पहचानने के लिए बड़ा अन्तर चाहिए, जबकि मन्द प्रकाश में छोटा भी पर्याप्त होता है। निरपेक्ष सीमा इससे भिन्न है और उद्दीपक की न्यूनतम पहचान-योग्य मात्रा बताती है।
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Q29. मनोचिकित्सा के दौरान जब कोई व्यक्ति जीवन की किसी समस्या या परेशानी वाले पहलू को देखने या स्वीकार करने से इनकार करता है, तो वह एक रक्षा तंत्र का उपयोग कर रहा होता है, जिसे कहते हैं :
Right Answer: अस्वीकरण
Explanation:
अस्वीकरण फ्रॉयड द्वारा वर्णित एक प्रमुख रक्षा तंत्र है, जिसमें व्यक्ति किसी कष्टकारी वास्तविकता को देखने या स्वीकार करने से ही इनकार कर देता है। इससे अहम् को तात्कालिक चिन्ता से राहत मिलती है, परन्तु समस्या यथावत बनी रहती है और प्रायः और गम्भीर हो जाती है। जैसे कोई रोगी गम्भीर निदान को मानने से इनकार कर दे अथवा व्यसनी यह स्वीकार ही न करे कि उसे कोई समस्या है। इसके विपरीत दमन में अप्रिय स्मृतियाँ अचेतन में धकेल दी जाती हैं, प्रतिक्रिया निर्माण में विपरीत व्यवहार अपनाया जाता है और विस्थापन में भावना किसी सुरक्षित लक्ष्य पर निकलती है।
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Q30. निम्नलिखित में से कौन - सी प्रविधि को दुर्भीति या अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है ?
Right Answer: क्रमिक विसंवेदनीकरण
Explanation:
क्रमिक विसंवेदनीकरण जोसेफ वोल्पे द्वारा विकसित एक व्यवहार चिकित्सा प्रविधि है, जो दुर्भीति तथा अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त होती है। यह पारस्परिक निषेध के सिद्धान्त पर आधारित है, क्योंकि शिथिलीकरण और चिन्ता एक साथ नहीं रह सकते। उपचार तीन चरणों में होता है — पहले सेवार्थी को गहन मांसपेशीय शिथिलीकरण सिखाया जाता है, फिर भय उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों की न्यूनतम से अधिकतम तक की क्रमिक सूची बनाई जाती है, और अन्त में शिथिल अवस्था में रहते हुए इन परिस्थितियों की कल्पना क्रमशः कराई जाती है, जिससे भय धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।
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Q31. व्यक्तित्व कारकों के संदर्भ में, दूसरों पर विश्वास करना, स्पष्टवादिता और विनम्रता जैसी विशेषताओं का द्योतक है :
Right Answer: सहमतता
Explanation:
कोस्टा तथा मैक्री के पंचकारक प्रतिमान में सहमतता एक प्रमुख विस्तृत आयाम है। इसके अन्तर्गत दूसरों पर विश्वास करना, स्पष्टवादिता, परोपकारिता, अनुपालन, विनम्रता तथा कोमल-हृदयता जैसी उप-विशेषताएँ आती हैं। उच्च सहमतता वाले व्यक्ति सहयोगी, क्षमाशील एवं सहानुभूतिपूर्ण होते हैं, जबकि निम्न सहमतता वाले सन्देही, प्रतिस्पर्धी और आक्रामक। शेष चार कारक हैं — बहिर्मुखता, जो सामाजिकता एवं उत्साह दर्शाती है; कर्तव्यनिष्ठा, जो अनुशासन एवं संगठन से जुड़ी है; अनुभव करने का खुलापन, जो कल्पनाशीलता एवं जिज्ञासा से; तथा तंत्रिकातापिता, जो भावनात्मक अस्थिरता से सम्बन्धित है।
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Q32. दृढ़ता के तीन ‘सी’ से तात्पर्य है :
Right Answer: प्रतिबद्धता, नियन्त्रण, चुनौती
Explanation:
दृढ़ता की अवधारणा सुजैन कोबासा तथा साल्वाटोर मैडी ने दी। यह एक व्यक्तित्व शैली है जो तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखती है और इसके तीन घटक अंग्रेजी अक्षर ‘सी’ से आरम्भ होते हैं। प्रतिबद्धता का अर्थ है जीवन एवं कार्य में गहरी रुचि तथा सम्मिलन। नियन्त्रण का अर्थ है यह विश्वास कि घटनाओं के परिणाम को अपने प्रयासों से प्रभावित किया जा सकता है। चुनौती का अर्थ है परिवर्तन को खतरा नहीं, बल्कि विकास का अवसर मानना। ये तीनों मिलकर तनाव के दुष्प्रभावों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं।
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Q33. एक प्रवेश परीक्षा में एक उम्मीदवार कुल 150 उम्मीदवारों में से 35 वें स्थान पर है, उसकी प्रतिशत रैंक होगी :
Right Answer: 77
Explanation:
प्रतिशत रैंक यह बताती है कि किसी व्यक्ति से कम अंक पाने वाले उम्मीदवार कुल समूह का कितने प्रतिशत हैं। इसका सूत्र है — प्रतिशत रैंक बराबर (कुल उम्मीदवार घटा रैंक) को कुल उम्मीदवारों से भाग देकर सौ से गुणा। यहाँ कुल उम्मीदवार 150 तथा रैंक 35 है, अतः 150 में से 35 घटाने पर 115 प्राप्त होता है। 115 को 150 से भाग देने पर 0.766 आता है और सौ से गुणा करने पर लगभग 76.67 अर्थात् निकटतम पूर्णांक 77 प्राप्त होता है। इसलिए उसकी प्रतिशत रैंक 77 होगी।
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Q34. मनोचिकित्सा में परामर्श के लिए ट्रांस सैद्धान्तिक दृष्टिकोण किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था ?
Right Answer: प्रोचास्का तथा डाईक्लीमेंटे
Explanation:
ट्रांस सैद्धान्तिक प्रतिमान जेम्स प्रोचास्का तथा कार्लो डाईक्लीमेंटे ने प्रतिपादित किया। यह विभिन्न मनोचिकित्सा पद्धतियों के सार को एकीकृत कर व्यवहार परिवर्तन को एक क्रमिक प्रक्रिया के रूप में देखता है। इसके चरण हैं — पूर्व-चिन्तन, जिसमें व्यक्ति समस्या स्वीकार ही नहीं करता; चिन्तन, जिसमें वह परिवर्तन पर विचार करता है; तैयारी, कार्यवाही तथा अनुरक्षण, और कभी-कभी पुनरावृत्ति भी। परामर्शदाता का कार्य यह पहचानना है कि सेवार्थी किस चरण में है और उसी के अनुरूप हस्तक्षेप करना। यह प्रतिमान व्यसन-मुक्ति एवं स्वास्थ्य व्यवहार कार्यक्रमों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
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Q35. पैथोग्नोमिक वर्बलाइजे़शन नामक चर किस प्रोजेक्टिव परीक्षण द्वारा मापा जाता है ?
Right Answer: होल्ट्जमैन स्याहीधब्बा परीक्षण (एचआईटी)
Explanation:
होल्ट्जमैन स्याहीधब्बा परीक्षण का निर्माण वेन एच० होल्ट्जमैन ने रोर्शाक परीक्षण की सांख्यिकीय कमियों को दूर करने हेतु किया। इसमें पैंतालीस कार्ड होते हैं और प्रत्येक पर केवल एक अनुक्रिया ली जाती है, जिससे अनुक्रियाओं की संख्या नियंत्रित रहती है और विश्वसनीयता बढ़ जाती है। इसमें बाईस वस्तुनिष्ठ चरों का अंकन होता है, जिनमें ‘पैथोग्नोमिक वर्बलाइजे़शन’ प्रमुख है। यह चर अनुक्रिया में प्रकट होने वाले विचित्र, अवास्तविक एवं विकृत चिन्तन को मापता है और मनोविदलता जैसी गम्भीर मानसिक विकृतियों के नैदानिक संकेत देता है।
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Q36. एक माप जो शृंखला में चरम स्कोर से प्रभावित नहीं होता और ऐसी शृंखला का बेहतरीन ढंग से प्रतिनिधित्व करता है, वह है :
Right Answer: माध्यिका
Explanation:
माध्यिका वह मान है जो आँकड़ों को आरोही क्रम में रखने पर श्रेणी को ठीक दो बराबर भागों में बाँट देता है। इसकी गणना केवल स्थिति पर आधारित होती है, मानों के योग पर नहीं, इसलिए श्रेणी के अत्यन्त बड़े या अत्यन्त छोटे चरम स्कोर इसे प्रभावित नहीं करते। यही कारण है कि विषम अथवा तिरछे वितरण में माध्यिका केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वोत्तम प्रतिनिधि मानी जाती है। इसके विपरीत माध्य प्रत्येक मान को सम्मिलित करता है, अतः एक भी चरम स्कोर उसे खींच लेता है, और बहुलक केवल सर्वाधिक बारम्बारता वाला मान बताता है।
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Q37. भारतीय परम्परा में निम्नलिखित में से किन क्षमताओं को बुद्धि के अन्तर्गत स्वीकार किया गया है ?
Right Answer: संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक क्षमता, सांवेगिक क्षमता, उद्यमी क्षमता
Explanation:
भारतीय परम्परा में बुद्धि को केवल संज्ञानात्मक कुशलता तक सीमित न मानकर एक व्यापक एवं समग्र योग्यता माना गया है। श्रीवास्तव तथा मिश्र के अध्ययनों के अनुसार भारतीय दृष्टिकोण में बुद्धि के चार अंग स्वीकार किए जाते हैं — संज्ञानात्मक क्षमता, सामाजिक क्षमता, सांवेगिक क्षमता तथा उद्यमी क्षमता। संज्ञानात्मक क्षमता में विवेक एवं निर्णय, सामाजिक क्षमता में दूसरों का आदर तथा सहयोग, सांवेगिक क्षमता में आत्मसंयम एवं भावनाओं की समझ और उद्यमी क्षमता में परिश्रम, प्रतिबद्धता तथा लक्ष्य-सिद्धि आती है। यह दृष्टिकोण पाश्चात्य आईक्यू-केन्द्रित संकल्पना से अधिक व्यापक है।
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Q38. मनोभाषाविज्ञानियों के मतानुसार बच्चों का वाक्यात्मक विकास कितने चरणों में होता है ?
Right Answer: पाँच
Explanation:
मनोभाषाविज्ञानियों, विशेषतः रॉजर ब्राउन के अनुसार बच्चों का वाक्यात्मक विकास पाँच चरणों में होता है और इनका निर्धारण आयु से नहीं, बल्कि औसत कथन-लम्बाई से किया जाता है। प्रथम चरण में दो शब्दों के तार-संदेश जैसे वाक्य बनते हैं। द्वितीय चरण में व्याकरणिक रूपिम, जैसे बहुवचन तथा काल-सूचक प्रत्यय जुड़ते हैं। तृतीय चरण में प्रश्नवाचक एवं निषेधात्मक वाक्य आते हैं। चतुर्थ चरण में अन्तःस्थापित उपवाक्य तथा पंचम चरण में समुच्चयबोधकों द्वारा जुड़े जटिल एवं संयुक्त वाक्य प्रकट होते हैं, जिससे भाषा वयस्क जैसी बनने लगती है।
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Q39. किस मनोवैज्ञानिक ने परीक्षण और त्रुटि प्रक्रिया के रूप में सीखने में यादृच्छिकता पर जोर दिया था ?
Right Answer: ई० एल० थॉर्नडाइक
Explanation:
ई० एल० थॉर्नडाइक ने बिल्लियों पर प्रसिद्ध ‘पहेली बॉक्स’ प्रयोग किए। भूखी बिल्ली को बन्द बक्से में रखा जाता और बाहर मछली रखी जाती थी। बिल्ली आरम्भ में अनेक यादृच्छिक एवं अव्यवस्थित प्रयास करती, जिनमें से कोई एक संयोगवश साँकल खोल देता। बार-बार के प्रयासों में गलत प्रतिक्रियाएँ घटती गईं और सही प्रतिक्रिया शीघ्र होने लगी। इसी आधार पर उन्होंने अधिगम को प्रयास एवं त्रुटि की प्रक्रिया कहा तथा तत्परता, अभ्यास एवं प्रभाव के नियम दिए। पावलोव ने अनुबंधन, स्किनर ने क्रियाप्रसूत तथा टोलमैन ने चिह्न अधिगम पर बल दिया।
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Q40. निम्नलिखित में से किसको ‘‘श्रेष्ठता का विशिष्ट स्तर प्राप्त करने की इच्छा’’ के रूप में परिभाषित किया जाता है ?
Right Answer: उपलब्धि अभिप्रेरक
Explanation:
उपलब्धि अभिप्रेरक को श्रेष्ठता का कोई विशिष्ट मानक प्राप्त करने की इच्छा के रूप में परिभाषित किया जाता है। हेनरी मुरे ने इसे मूल आवश्यकताओं में सम्मिलित किया और डेविड मैक्लीलैंड तथा जॉन एटकिन्सन ने इसका विस्तृत अध्ययन प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण की सहायता से किया। उच्च उपलब्धि अभिप्रेरणा वाले व्यक्ति मध्यम कठिनाई वाले कार्य चुनते हैं, उत्तरदायित्व लेना पसंद करते हैं, तुरन्त प्रतिपुष्टि चाहते हैं तथा असफलता से हतोत्साहित नहीं होते। सम्बन्धन अभिप्रेरक घनिष्ठ सम्बन्धों की, शक्ति अभिप्रेरक प्रभाव जमाने की तथा अनुमोदन अभिप्रेरक सामाजिक स्वीकृति की इच्छा है।
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Q41. अवसाद निम्नलिखित में से किसकी कम सक्रियता के कारण होता है ?
Right Answer: सेरोटोनिन
Explanation:
सेरोटोनिन एक मोनोएमीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मनोदशा, निद्रा, भूख, आवेग नियंत्रण तथा चिन्ता के नियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अवसाद के मोनोएमीन परिकल्पना के अनुसार सिनैप्स में सेरोटोनिन की कम सक्रियता ही उदासी, निराशा, निद्रा-विकार एवं आत्मघाती विचारों से जुड़ी होती है। इसीलिए चयनात्मक सेरोटोनिन पुनर्ग्रहण संदमक अर्थात् एसएसआरआई औषधियाँ, जैसे फ्लुऑक्सेटीन, सिनैप्स में इसकी उपलब्धता बढ़ाकर अवसाद का उपचार करती हैं। डोपामाइन की अधिकता मनोविदलता से, गाबा की कमी चिन्ता से तथा ग्लूटामेट उत्तेजक संचरण एवं अधिगम से सम्बन्धित है।
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Q42. बच्चे के पालन-पोषण की एक शैली जिसमें माता-पिता बच्चों के साथ अपने संबंधों में बहुत ही उचित और सुसंगत होते हैं और धीरे-धीरे उनकी क्षमताओं को पहचानकर उनकी जिम्मेदारी का स्तर बढ़ाते हैं, वह है :
Right Answer: आधिकारिक शैली
Explanation:
डायना बॉमरिंड ने पालन-पोषण की शैलियों का वर्गीकरण किया। आधिकारिक शैली में माता-पिता स्नेह तथा नियंत्रण दोनों का सन्तुलन रखते हैं। वे स्पष्ट, उचित और सुसंगत नियम बनाते हैं, उनके पीछे का कारण समझाते हैं, बच्चों की बात सुनते हैं तथा उनकी बढ़ती क्षमताओं को पहचानकर धीरे-धीरे उत्तरदायित्व का स्तर बढ़ाते हैं। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास, आत्मनियंत्रण, सामाजिक कुशलता और उपलब्धि प्रेरणा अधिक विकसित होती है। इसके विपरीत अधिनायकवादी शैली कठोर एवं स्नेहहीन, अनुमोदक शैली स्नेहपूर्ण किन्तु नियंत्रणहीन तथा उपेक्षापूर्ण शैली दोनों ही दृष्टियों से अभावग्रस्त होती है।
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Q43. किसी व्यक्ति के व्यवहार, क्षमताओं और गुणों से संबंधित दृष्टिकोण, निर्णय और मूल्यों की समग्रता को कहा जाता है :
Right Answer: आत्मप्रत्यय
Explanation:
आत्मप्रत्यय से तात्पर्य उन समस्त दृष्टिकोणों, निर्णयों तथा मूल्यों की समग्रता से है जो व्यक्ति अपने व्यवहार, क्षमताओं एवं गुणों के विषय में धारण करता है। यह ‘मैं कौन हूँ’ प्रश्न का उत्तर है और अनुभवों, दूसरों की प्रतिक्रियाओं तथा सामाजिक तुलना से क्रमशः विकसित होता है। कार्ल रोजर्स ने इसे वास्तविक स्व तथा आदर्श स्व में विभाजित किया और दोनों के बीच अधिक अन्तर को कुसमायोजन का कारण बताया। इसके विपरीत आत्मसम्मान आत्मप्रत्यय का मूल्यांकनात्मक पक्ष है, जबकि आत्मबोध स्वयं के प्रति सचेत होने की अवस्था है।
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Q44. निम्नलिखित में से किसे वाचिक अधिगम के निर्धारकों के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है ?
Right Answer: गुच्छन
Explanation:
वाचिक अधिगम के प्रमुख निर्धारकों में सामग्री की सार्थकता, उससे पूर्व-परिचय अर्थात् जानकारी, पदों की समानता, सूची की लम्बाई तथा अनुक्रमिक पराधीनता सम्मिलित हैं। सार्थक एवं परिचित सामग्री शीघ्र सीखी जाती है, जबकि अनुक्रमिक पराधीनता बताती है कि किसी पद का पुनःस्मरण अपने पूर्ववर्ती पद पर कितना निर्भर करता है। इसके विपरीत गुच्छन एक संगठनात्मक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति पुनःस्मरण के समय पदों को अर्थ या वर्ग के आधार पर समूहबद्ध कर लेता है। यह अधिगम का निर्धारक नहीं, बल्कि स्मृति-संगठन एवं पुनःस्मरण की युक्ति है।
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Q45. शिक्षा में ‘बाल मार्गदर्शन’, ‘मानसिक स्वच्छता’ तथा ‘बच्चों की स्वतंत्रता’ जैसे नवीन विचारों को प्रोत्साहन देने वाली विचारधारा है :
Right Answer: मनोविश्लेषण
Explanation:
मनोविश्लेषण की स्थापना सिगमंड फ्रॉयड ने की और इसने शिक्षा को गहराई से प्रभावित किया। इस विचारधारा ने बताया कि बाल्यावस्था के अनुभव, दमित इच्छाएँ तथा अचेतन संघर्ष व्यक्तित्व और समायोजन को निर्धारित करते हैं। इसी समझ से बाल मार्गदर्शन केन्द्रों की स्थापना हुई, मानसिक स्वच्छता आन्दोलन चला तथा बच्चों को अत्यधिक दमन एवं कठोर अनुशासन से मुक्त रखकर स्वतंत्र अभिव्यक्ति देने पर बल दिया गया। खेल, कला एवं कहानी को भावनात्मक विरेचन का साधन माना गया। व्यवहारवाद बाह्य व्यवहार तथा मानवतावाद आत्म-सिद्धि पर केन्द्रित रहा।
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Q46. निम्नलिखित समायोजनात्मक युक्तियों को उनके उदाहरणों के साथ मिलान कीजिए एवं सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(i), (C)-(iv), (D)-(iii)
Explanation:
एंडलर तथा पार्कर ने तनाव से निपटने की तीन शैलियाँ बताईं। कृत्य अभिविन्यस्त युक्ति में व्यक्ति समस्या को सुलझाने हेतु ठोस कदम उठाता है, जैसे अपने समय की बेहतर सारणी बनाना। संवेग अभिविन्यस्त युक्ति में वह समस्या के स्थान पर अपनी भावनाओं में उलझा रहता है, जैसे यह चिन्ता करते रहना कि मुझे क्या करना है। परिहार अभिविन्यस्त युक्ति में वह ध्यान बँटाकर स्थिति से बचता है, जैसे मित्र को फोन करना या टीवी देखना। लजारस एवं फोल्कमैन की समस्या केन्द्रित युक्ति में योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जाता है।
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Q47. चिन्ता विकृति में सेवार्थी को ……… चिन्ता और ……… डर ……… मात्रा में होती है।
Right Answer: अवास्तविक, अतार्किक , तीव्र
Explanation:
चिन्ता विकृति में सेवार्थी की चिन्ता वास्तविक संकट के अनुपात में नहीं होती, इसलिए उसे अवास्तविक कहा जाता है। उसका भय तर्क तथा प्रमाण से मेल नहीं खाता, अतः अतार्किक होता है, और दोनों की मात्रा इतनी तीव्र होती है कि दैनिक कार्य, अध्ययन एवं सामाजिक जीवन बाधित हो जाता है। साथ ही धड़कन बढ़ना, पसीना आना, काँपना तथा साँस फूलना जैसे शारीरिक लक्षण भी उभरते हैं। सामान्य चिन्ता उपयोगी होती है क्योंकि वह सतर्क करती है, परन्तु विकृति में यही चिन्ता अनियंत्रित, दीर्घकालिक और दुर्बल करने वाली बन जाती है।
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Q48. वेक्टर - आइडी विवरण प्रणाली सिद्धान्त (वीआइडीएएस) व्यक्तित्व सिद्धान्त किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था ?
Right Answer: रेमंड कैटल
Explanation:
वेक्टर-आइडी विवरण प्रणाली (VIDAS) रेमंड बी० कैटल की देन है। कैटल ने व्यक्तित्व के अध्ययन में कारक विश्लेषण का व्यापक प्रयोग किया और शीलगुणों को सतही तथा मूल शीलगुणों में बाँटा। उनकी इस प्रणाली में प्रत्येक शीलगुण को एक सांख्यिकीय सदिश (वेक्टर) तथा एक विशिष्ट पहचान संख्या द्वारा व्यवस्थित रूप से वर्णित किया जाता है, जिससे व्यक्तित्व का वर्णन वस्तुनिष्ठ एवं मापनीय बन सके। इसी पद्धति पर उन्होंने सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली विकसित की। हेनरी मुरे का अभिप्रेरक-दबाव, सुलिवन का अन्तर्वैयक्तिक तथा फ्रोम का मानवतावादी सिद्धान्त इससे भिन्न हैं।
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Q49. दूसरों के दृष्टिकोण पर विचार करने, वस्तुओं को एक आयाम के आधार पर वर्गीकृत करने और संबंध अवधारणाओं को समझने की क्षमता संज्ञानात्मक विकास के किस चरण से चिह्नित होती है ?
Right Answer: मूर्त संक्रियात्मक
Explanation:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त में मूर्त संक्रियात्मक अवस्था लगभग सात से ग्यारह वर्ष तक रहती है। इस अवस्था में बालक आत्मकेन्द्रितता से बाहर आकर दूसरों के दृष्टिकोण पर विचार कर पाता है। वह वस्तुओं को किसी एक आयाम के आधार पर वर्गीकृत करना, क्रमबद्ध करना तथा सम्बन्धपरक अवधारणाओं को समझना सीख जाता है। संरक्षण, उत्क्रमणीयता और विकेन्द्रण इसी अवस्था की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। किन्तु उसका चिन्तन मूर्त वस्तुओं तक ही सीमित रहता है; अमूर्त एवं परिकल्पनात्मक तर्क औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में ही सम्भव हो पाता है।
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Q50. शंखपालि का एक क्षेत्र जिसकी क्षति स्पष्ट रूप से भाषण और लिखित भाषा की समझ को खराब करती है, कहलाता है :
Right Answer: वर्निक क्षेत्र
Explanation:
वर्निक क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ शंखपालि (टेम्पोरल लोब) के पश्च भाग में स्थित होता है और इसकी खोज कार्ल वर्निक ने 1874 में की। यह क्षेत्र बोले गए तथा लिखे गए शब्दों के अर्थ को समझने का कार्य करता है। इसकी क्षति से वर्निक वाचाघात होता है, जिसमें रोगी धाराप्रवाह किन्तु निरर्थक वाक्य बोलता है और दूसरों की बात समझ नहीं पाता। इसके विपरीत ब्रोका क्षेत्र ललाट पालि में होता है और वाणी के उत्पादन से जुड़ा है, जबकि आर्क्युएट फैसिक्युलस इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाला तन्त्रिका पथ है।
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Q51. जब लोग भ्रामक और बेईमान तरीके से दूसरों के साथ छेड़छाड़ और शोषण करके अपनी शक्ति प्रेरणा व्यक्त करते हैं, तो प्रयुक्त शब्द होता है :
Right Answer: मेकियावेलिनिस्म
Explanation:
मेकियावेलियनिज्म शब्द सोलहवीं शताब्दी के इतालवी विचारक निकोलो मेकियावेली की कृति ‘द प्रिंस’ से लिया गया है। मनोविज्ञान में रिचर्ड क्रिस्टी तथा फ्लोरेंस गीस ने इसे एक व्यक्तित्व शीलगुण के रूप में मापा। उच्च मेकियावेलियन व्यक्ति भावनात्मक रूप से तटस्थ रहते हैं, नैतिक नियमों को लचीला मानते हैं तथा अपने स्वार्थ हेतु छल, चापलूसी और भ्रामक तरीकों से दूसरों को नियंत्रित एवं शोषित करते हैं। इसी रूप में वे अपनी शक्ति-प्रेरणा व्यक्त करते हैं। नार्सिसिज्म तथा मनोविकृति के साथ मिलकर यह व्यक्तित्व की ‘श्याम त्रयी’ बनाता है।
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Q52. इडिपस मनोग्रन्थी मनोलैंगिक विकास के किस चरण से जुड़ी है ?
Right Answer: शिश्नीय अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त में शिश्नीय अवस्था तीसरी अवस्था है, जो लगभग तीन से छह वर्ष तक चलती है। इसी अवस्था में कामशक्ति का केन्द्र जननांग क्षेत्र बन जाता है और बालक में इडिपस मनोग्रन्थी उत्पन्न होती है, जिसमें वह माता के प्रति आकर्षण तथा पिता के प्रति प्रतिद्वंद्विता अनुभव करता है। बालिकाओं में इसका समरूप इलेक्ट्रा मनोग्रन्थी कहलाता है। समाधान समलिंगी अभिभावक के साथ तादात्म्य द्वारा होता है, जिससे लिंग-भूमिका तथा पराहम् का विकास होता है। मौखिक, गुदीय, अव्यक्त तथा जननांगीय अन्य अवस्थाएँ हैं।
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Q53. व्यक्तियों में सक्षमता का सद्गुण मनोसामाजिक विकास प्रक्रिया के किस विकासात्मक चरण के सफल समाधान के दौरान होता है ?
Right Answer: परिश्रम बनाम हीनता
Explanation:
एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धान्त में प्रत्येक अवस्था का सफल समाधान एक विशिष्ट सद्गुण उत्पन्न करता है। ‘परिश्रम बनाम हीनता’ चौथी अवस्था है, जो लगभग छह से बारह वर्ष अर्थात् विद्यालयी आयु में आती है। इस काल में बालक पढ़ाई, खेल तथा कौशलों में परिश्रम कर उपलब्धि प्राप्त करना चाहता है। सफल होने पर उसमें ‘सक्षमता’ का सद्गुण विकसित होता है, जबकि निरन्तर असफलता एवं आलोचना उसे हीनता की भावना देती है। इसी प्रकार विश्वास से आशा, स्वायत्तता से इच्छाशक्ति, पहल से उद्देश्य तथा पहचान से निष्ठा का सद्गुण उत्पन्न होता है।
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Q54. किस सिद्धान्त ने सुझाव दिया कि संवेगात्मक अनुभूति और संवेगों में होने वाली शारीरिक प्रतिक्रियाएँ एक दूसरे से भिन्न हैं, दोनों साथ - साथ उत्पन्न होते हैं ?
Right Answer: कैनन-बार्ड सिद्धान्त
Explanation:
कैनन-बार्ड सिद्धान्त वाल्टर कैनन एवं फिलिप बार्ड ने प्रस्तुत किया। इसके अनुसार उद्दीपक की सूचना थैलेमस तक पहुँचती है और वहाँ से एक साथ दो मार्गों पर भेजी जाती है — प्रमस्तिष्क वल्कुट की ओर, जहाँ संवेग की सचेत अनुभूति होती है, तथा स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की ओर, जहाँ शारीरिक उत्तेजना उत्पन्न होती है। इस प्रकार संवेगात्मक अनुभूति और शारीरिक प्रतिक्रियाएँ स्वतंत्र होते हुए भी साथ-साथ घटित होती हैं। जेम्स-लैंज सिद्धान्त इसके विपरीत शारीरिक परिवर्तन को संवेग का कारण मानता है, जबकि शैक्टर-सिंगर उत्तेजना के संज्ञानात्मक नामकरण पर बल देते हैं।
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Q55. कोहलर ने अधिगम संबंधित प्रयोग 1913-17 के दौरान केनेरी द्वीप पर किए। उस चिम्पैंजी, जिस पर अर्न्तदृष्टि अधिगम प्रयोग सम्पादित किये गये, का नाम था :
Right Answer: सुल्तान
Explanation:
वोल्फगैंग कोहलर ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1913 से 1917 तक कैनरी द्वीप समूह के टेनेरिफे में वनमानुषों पर अध्ययन किया। जिस चिम्पैंजी पर उनके सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रयोग हुए उसका नाम सुल्तान था। एक प्रयोग में सुल्तान ने दो छोटी छड़ियों को जोड़कर पिंजरे से दूर रखा केला खींच लिया और दूसरे में बक्सों को एक के ऊपर एक रखकर छत से लटके केले तक पहुँच गया। यह समाधान क्रमिक प्रयास-त्रुटि से नहीं, बल्कि सम्बन्धों की अचानक समझ अर्थात् अन्तर्दृष्टि से हुआ, जो गेस्टाल्ट अधिगम का आधार बना।
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Q56. जब लोगों को एहसास होता है कि उनके जीवन में कम साल बचे हैं, तो वे अपनी ऊर्जा और ध्यान को दूरगामी लक्ष्यों से हटाकर वर्तमान पर केंद्रित करने लगते हैं। यह सिद्धान्त कहलाता है :
Right Answer: सामाजिक - भावनात्मक चयनात्मकता सिद्धान्त
Explanation:
सामाजिक-भावनात्मक चयनात्मकता सिद्धान्त लॉरा कार्स्टेनसन ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार समय-सीमा की अनुभूति ही यह तय करती है कि व्यक्ति किन लक्ष्यों को प्राथमिकता देगा। युवावस्था में भविष्य असीमित लगता है, इसलिए ज्ञान-अर्जन तथा नए सम्पर्क बनाने जैसे भविष्योन्मुखी लक्ष्य प्रबल रहते हैं। वृद्धावस्था में जब शेष समय सीमित प्रतीत होने लगता है, तब व्यक्ति भावनात्मक सन्तुष्टि देने वाले घनिष्ठ सम्बन्धों तथा वर्तमान क्षण को महत्त्व देने लगता है। यही कारण है कि वृद्धजन सामाजिक दायरा छोटा कर लेते हैं, फिर भी उनका भावनात्मक कल्याण प्रायः बना रहता है।
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Q57. विद्यार्थियों की मदद के लिए अधिक याद रखने में किसने ‘पीक्यूआरएसटी’ स्मृति सहायक संकेत युक्ति का विकास किया ?
Right Answer: थॉमस एवं रॉबिन्सन
Explanation:
‘पीक्यूआरएसटी’ (PQRST) अध्ययन-युक्ति का विकास थॉमस एवं रॉबिन्सन ने किया। इसके पाँच चरण हैं — Preview अर्थात् पाठ का पूर्वावलोकन, Question अर्थात् शीर्षकों को प्रश्नों में बदलना, Read अर्थात् उत्तर खोजते हुए पढ़ना, Self-recitation अर्थात् स्वयं दोहराना तथा Test अर्थात् स्वयं का परीक्षण करना। यह युक्ति सामग्री के विस्तृत एवं गहन प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करती है, जिससे धारण एवं पुनःस्मरण दोनों बेहतर होते हैं। यह रॉबिन्सन की पूर्ववर्ती SQ3R विधि का ही परिष्कृत रूप है और विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी मानी जाती है।
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Q58. अल्पकालिक स्मृति की 7 ± 2 पदों की सीमित भंडारण क्षमता का विचार दिया गया था :
Right Answer: मिलर (1956) द्वारा
Explanation:
जॉर्ज ए० मिलर ने 1956 के प्रसिद्ध लेख ‘द मैजिकल नंबर सेवन, प्लस ऑर माइनस टू’ में बताया कि अल्पकालिक स्मृति एक समय में लगभग सात (पाँच से नौ) पद ही धारण कर सकती है। इस सीमित क्षमता को बढ़ाने के लिए मिलर ने ‘चंकिंग’ अर्थात् गुच्छन की युक्ति सुझाई, जिसमें छोटी-छोटी इकाइयों को अर्थपूर्ण बड़े खंडों में संगठित कर लिया जाता है। टल्विंग ने स्मृति के प्रासंगिक-अर्थपरक भेद, तथा क्रैक एवं लॉकहार्ट ने प्रसंस्करण के स्तर का सिद्धान्त दिया।
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Q59. गिलफोर्ड (1967) ने बुद्धि के त्रिआयामी बॉक्स जैसे मॉडल का प्रस्ताव रखा जोकि सबसे अच्छी तरह से समझाया गया है :
Right Answer: 6 संक्रियायें × 5 विषयवस्तु × 6 उत्पादों द्वारा
Explanation:
जे० पी० गिलफोर्ड का ‘बुद्धि संरचना’ (SOI) मॉडल बुद्धि को एक त्रिआयामी घनाभ के रूप में प्रस्तुत करता है। इसके तीन आयाम हैं — संक्रियाएँ, विषयवस्तु तथा उत्पाद। मॉडल के परिष्कृत रूप में छह संक्रियाएँ, पाँच विषयवस्तुएँ तथा छह उत्पाद माने गए, जिनके गुणनफल से 180 स्वतंत्र मानसिक योग्यताएँ प्राप्त होती हैं। संक्रियाओं में संज्ञान, स्मृति अभिलेखन, स्मृति धारण, अपसारी चिन्तन तथा अभिसारी चिन्तन और मूल्यांकन सम्मिलित हैं। अपसारी चिन्तन को सृजनात्मकता का आधार मानकर गिलफोर्ड ने बुद्धि को एकल कारक मानने की परम्परा को समाप्त कर दिया।
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Q60. किस प्रकार के व्यक्तित्व वाले लोगों में अवसाद के प्रति प्रवणता पाई जाती है ?
Right Answer: टाइप D
Explanation:
टाइप D अर्थात् ‘डिस्ट्रेस्ड’ व्यक्तित्व की अवधारणा हृदय-रोग विशेषज्ञ जोहान डेनोलेट ने दी। इसमें दो स्थायी विशेषताएँ मिलती हैं — नकारात्मक भावुकता तथा सामाजिक अवरोध। ऐसे व्यक्ति चिन्ता, चिड़चिड़ाहट और उदासी का लगातार अनुभव करते हैं, किन्तु अस्वीकृति के भय से इन भावनाओं को दूसरों के सामने प्रकट नहीं करते। यही दमित नकारात्मक संवेग उन्हें अवसाद तथा हृदय रोग के प्रति अत्यधिक प्रवण बनाते हैं। इसके विपरीत टाइप A प्रतिस्पर्धी एवं उतावला, टाइप B शान्त एवं सहनशील तथा टाइप C भावनाओं को दबाने वाला व्यक्तित्व माना जाता है।
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Q61. मैक्डूगल के अनुसार, 'घृणा' का संवेग किस मूल प्रवृत्ति के साथ जुड़ा हुआ है ?
Right Answer: निवृत्ति
Explanation:
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने मनोविज्ञान में 'मूल प्रवृत्तियों का सिद्धान्त' (Theory of Instincts) प्रतिपादित किया था। उनका मानना था कि मनुष्य के हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई मूल प्रवृत्ति होती है।
मैकडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृत्तियाँ (Instincts) बताई हैं और स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के जाग्रत होने पर एक विशेष संवेग (Emotion) उत्पन्न होता है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर मूल प्रवृत्ति और उनसे जुड़े संवेगों का सही मिलान इस प्रकार है:
(1) निवृत्ति (Repulsion) ➔ घृणा (Disgust) : जब इंसान के सामने कोई सड़ी-गली, खराब या अप्रिय वस्तु/स्थिति आती है, तो वह उससे दूर हटना (निवृत्ति) चाहता है। इस मूल प्रवृत्ति के कारण हमारे अंदर 'घृणा' का संवेग पैदा होता है। (यही इस प्रश्न का सही उत्तर है)।
(2) पलायन (Escape) ➔ भय (Fear) : जब किसी खतरनाक स्थिति का सामना होता है, तो इंसान के अंदर 'भय' या डर का संवेग उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह वहाँ से भागने (पलायन) की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
(3) युयुत्सा (Combat) ➔ क्रोध (Anger) : युयुत्सा का अर्थ है युद्ध करने या लड़ने की इच्छा। यह मूल प्रवृत्ति तब जाग्रत होती है जब व्यक्ति के भीतर 'क्रोध' (गुस्सा) का संवेग हावी होता है।
(4) जिज्ञासा (Curiosity) ➔ आश्चर्य (Wonder) : जब हम कोई नई, अनोखी या रहस्यमयी चीज़ देखते हैं तो हमें 'आश्चर्य' का संवेग महसूस होता है, जो हमारे अंदर उस चीज़ के बारे में और अधिक जानने की 'जिज्ञासा' (मूल प्रवृत्ति) पैदा करता है।
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Q62. सीखने की परिस्थिति में सुसंगत तथ्यों को असुसंगत तथ्यों से अलग करके प्रस्तुत करना, सीखने के किस नियम का परिचायक है ?
Right Answer: तत्त्व प्रबलता का नियम
Explanation:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ई. एल. थार्नडाइक (E. L. Thorndike) के सीखने के नियमों (Laws of Learning) से संबंधित है। थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य (Primary) नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए थे। यह प्रश्न उनके गौण नियमों पर आधारित है।
(3) तत्त्व प्रबलता का नियम (Principle of prepotency of elements): इसे 'आंशिक क्रिया का नियम' (Law of Partial Activity) भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति या अधिगमकर्ता किसी नई परिस्थिति या समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति पर आँख मूंदकर प्रतिक्रिया करने के बजाय, उसके सबसे महत्वपूर्ण या सुसंगत (Relevant) तत्वों को पहचानता है और अनावश्यक या असुसंगत (Irrelevant) तत्वों को छोड़ देता है। सुसंगत तथ्यों को अलग करके प्रस्तुत करना इसी नियम का हिस्सा है, ताकि बच्चा केवल काम की बातों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
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Q63. समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
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Q64. बण्डूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धान्त के सोपानों को क्रम से व्यवस्थित कीजिए :
Right Answer: (a), (c), (d), (b)
Explanation:
अल्बर्ट बण्डूरा (Albert Bandura) ने सामाजिक अधिगम का सिद्धान्त (Social Learning Theory) प्रतिपादित किया था, जिसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) या 'मॉडलिंग' (Modeling) भी कहा जाता है।
बण्डूरा के अनुसार, बच्चे या व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। किसी भी नए व्यवहार को देखकर सीखने की इस प्रक्रिया को बण्डूरा ने चार मुख्य सोपानों (चरणों) में बाँटा है, जिनका सही क्रम इस प्रकार है:
1. अवधान या प्रत्यक्षीकरण (Attention / Perception of behaviour) - (a) सीखने की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति किसी मॉडल (जैसे- शिक्षक, माता-पिता, या टीवी का कोई पात्र) के व्यवहार को पूरे ध्यान से देखता है और उसे समझता (प्रत्यक्षीकरण) है। बिना ध्यान दिए कोई भी व्यवहार सीखा नहीं जा सकता।
2. धारण या स्मरण (Retention / Remember of behaviour) - (c) मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखने के बाद, व्यक्ति उस व्यवहार को अपने मस्तिष्क में स्मृति (Memory) के रूप में सुरक्षित कर लेता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे याद किया जा सके।
3. पुनरुत्पादन या क्रियात्मक परिणति (Reproduction / Convert the memory into action) - (d) इस चरण में व्यक्ति अपने मस्तिष्क में याद की गई बातों (स्मरण) को वास्तविक शारीरिक क्रिया या व्यवहार में बदलने का प्रयास करता है। यानी वह वैसा ही करने की कोशिश करता है जैसा उसने मॉडल को करते हुए देखा था।
4. अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation / Reinforcement of behaviour) - (b) अंतिम चरण में यह तय होता है कि व्यक्ति उस सीखे गए व्यवहार को भविष्य में दोहराएगा या नहीं। यदि मॉडल के समान व्यवहार करने पर व्यक्ति को समाज से तारीफ, पुरस्कार या सकारात्मक 'पुनर्बलन' मिलता है, तो वह उस व्यवहार को अपना लेता है। यदि उसे डांट या सजा मिलती है, तो वह उस व्यवहार को छोड़ देता है।
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Q65. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?
Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत
Explanation:
प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।
इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
- अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
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Q66. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :
Right Answer: संतुलनीकरण
Explanation:
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:
- आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
- उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
- समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
- उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
- संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
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Q67. सर्जनशील बच्चों की पहचान हेतु शिक्षक द्वारा कौन-से परीक्षण प्रशासित किए जा सकते हैं ?
Right Answer: (a), (b) एवं (d)
Explanation:
सर्जनशील (Creative) बच्चों की पहचान करने के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और नवीनता का मापन किया जाता है। दिए गए परीक्षणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(a) आकृति निर्माण परीक्षण (Figure construction test): यह परीक्षण सृजनात्मकता को मापता है। इसमें बच्चे को कुछ बुनियादी आकार (जैसे गोला, त्रिभुज) दिए जाते हैं और उनसे कोई नई और मौलिक आकृति बनाने को कहा जाता है।
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण (Product improvement test): यह भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख परीक्षण है। इसमें बच्चे को कोई साधारण वस्तु या खिलौना दिया जाता है और पूछा जाता है कि इसे और अधिक मजेदार या उपयोगी बनाने के लिए इसमें क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण (Usual uses test): यह विकल्प गलत है। सृजनात्मकता मापने के लिए 'अप्रचलित या नवीन उपयोग परीक्षण' (Unusual uses test) का प्रयोग किया जाता है (जैसे- ईंट के नए-नए उपयोग बताना)। 'प्रचलित' (Usual) उपयोग बताना सामान्य बुद्धि या स्मृति का हिस्सा है, सृजनात्मकता का नहीं।
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण (Picture completion test): यह सृजनात्मकता का एक महत्वपूर्ण अशाब्दिक परीक्षण है। इसमें अधूरी रेखाओं या चित्रों को पूरा करके एक अर्थपूर्ण और मौलिक चित्र बनाने के लिए कहा जाता है।
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Q68. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या
लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:
- (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
- (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
- (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
- (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
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Q69. निम्नलिखित में से कौन-सी समावेशी शिक्षा की एक विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह अशक्त बच्चों की विशिष्ट शिक्षा तक सीमित रहती है
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'सभी के लिए शिक्षा' है। यह केवल अशक्त (विकलांग/दिव्यांग) बच्चों तक सीमित नहीं है। समावेशी शिक्षा का अर्थ है—सामान्य बच्चों, अशक्त बच्चों, प्रतिभाशाली बच्चों और समाज के हर वर्ग (विभिन्न भाषा, जाति, धर्म) के बच्चों को एक ही नियमित कक्षा में एक साथ बैठाकर पढ़ाना।
केवल अशक्त बच्चों को अलग से पढ़ाना "विशिष्ट शिक्षा" (Special Education) कहलाता है, जो समावेशी शिक्षा के बिल्कुल विपरीत अवधारणा है। इसलिए यह कथन समावेशी शिक्षा की विशेषता नहीं है।
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Q70. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?
Right Answer: परिपक्वता
Explanation:
परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।
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Q71. निम्नलिखित में से कौन-सी सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: केवल शैक्षिक उपलब्धि को मापना
Explanation:
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation) में "व्यापक" (Comprehensive) शब्द का स्पष्ट अर्थ छात्र के सर्वांगीण विकास (all-round development) का आकलन करना है। इस रूपरेखा के अनुसार मूल्यांकन में शैक्षिक (Scholastic - जैसे गणित, विज्ञान और भाषाएं) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic - जैसे जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल और कला) दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाना अनिवार्य है। केवल अकादमिक प्रदर्शन या शैक्षिक उपलब्धि को मापना CCE प्रणाली के "व्यापक" लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।
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Q72. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रगतिशील शिक्षा का एक घटक नहीं है ?
Right Answer: स्मरण
Explanation:
जॉन डीवी (John Dewey) जैसे शिक्षाविदों द्वारा समर्थित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) रटने (rote learning) और तथ्यों को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने का कड़ा विरोध करती है। स्मरण का मुख्य ध्यान किसी भी जानकारी के व्यावहारिक उपयोग को समझे बिना उसे केवल दोहराने और याद करने पर होता है। यह प्रगतिशील शिक्षा के मूल दर्शन के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली पाठ्यपुस्तक की सामग्री को रटने के बजाय आलोचनात्मक सोच (critical thinking), समस्या-समाधान (problem-solving) और गहरी वैचारिक समझ (conceptual understanding) को प्राथमिकता देती है।
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Q73. श्रवण बाधित बच्चों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुदेशन का तरीका उपयुक्त है?
Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)
Explanation:
व्याख्या: ये सभी तकनीकें क्यों उपयुक्त हैं?
- (a) सांकेतिक भाषा (Sign Language): यह श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचार का सबसे प्राथमिक और प्राकृतिक माध्यम है। इसमें हाथों के संकेतों, चेहरे के हाव-भाव और शरीर की भाषा का उपयोग करके विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
- (b) अंगुली वर्तनी (Finger Spelling): इसमें हाथों की उंगलियों के आकार का उपयोग करके वर्णमाला के अक्षरों को दर्शाया जाता है। यह उन शब्दों (जैसे नाम, विशिष्ट तकनीकी शब्द) के लिए बहुत उपयोगी है जिनका कोई विशिष्ट सांकेतिक चिन्ह नहीं होता।
- (c) ओष्ठ पठन (Lip Reading): इसमें बच्चा वक्ता के होंठों की हलचल को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि क्या कहा जा रहा है। यह बच्चों को समाज में संवाद करने में बहुत मदद करता है।
- (d) संकेतित भाषण (Cued Speech): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें भाषण (speech) को स्पष्ट करने के लिए हाथों के संकेतों (cues) का उपयोग किया जाता है। यह होंठों के आकार (lip shapes) और हाथों के संकेतों को मिलाता है, ताकि बच्चा ध्वनियों के बीच अंतर कर सके जो दिखने में एक जैसे लगते हैं (जैसे 'p' और 'b')।
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Q74. 'लेखन क्षमता का एक विकार जिसमें अधिगमकर्ता को अक्षर निर्माण, वर्तनी, गत्यात्मक समन्वय आदि में कठिनाई होती है' यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिस्ग्राफिया
Explanation:
डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है जो मुख्य रूप से लेखन (writing) से संबंधित होती है।
जैसा कि आपने उल्लेख किया, इस विकार से ग्रसित अधिगमकर्ता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- अक्षर निर्माण (Letter Formation): अक्षरों को सही आकार या बनावट में लिखने में कठिनाई।
- वर्तनी (Spelling): शब्दों की वर्तनी में गलतियाँ करना।
- गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination): हाथ और उंगलियों के सूक्ष्म समन्वय में कमी, जिससे कलम पकड़ने और लिखने में समस्या होती है।
- लेखन की गति: लिखने की गति का बहुत धीमा होना या लिखने के दौरान हाथ में जल्दी थकान महसूस होना।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
- डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह पढ़ने से संबंधित विकार है। इसमें बच्चे को अक्षरों को पहचानने, शब्दों को पढ़ने या वाक्यों को समझने में कठिनाई होती है।
- डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia): यह शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) से संबंधित विकार है। इसमें व्यक्ति को शारीरिक संतुलन बनाने, बोलने या सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों (जैसे बटन लगाना या जूते के फीते बांधना) में कठिनाई होती है। (नोट: लेखन में कठिनाई इसका एक उप-हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्य परिभाषा लेखन विकार के लिए 'डिस्ग्राफिया' ही है।)
- डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia): यह गणित से संबंधित विकार है। इसमें संख्याओं को समझने, गणना (calculation) करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई होती है।
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Q75. निम्नलिखित में से कौन-सी सीखने की बाल केन्द्रित विधि नहीं है ?
Right Answer: प्रदर्शन
Explanation:
शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षण विधियों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और बाल-केंद्रित (Child-centered)।
प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह मुख्य रूप से शिक्षक-केंद्रित होती है। इसमें शिक्षक स्वयं किसी प्रक्रिया, प्रयोग या उपकरण का प्रदर्शन (Demonstrate) करता है, जबकि छात्र उसे ध्यानपूर्वक देखते हैं। यहाँ सीखने की प्रक्रिया में छात्र की भूमिका मुख्य रूप से एक 'दर्शक' (Observer) की होती है, न कि 'सक्रिय सहभागी' (Active participant) की। इसीलिए इसे बाल-केंद्रित नहीं माना जाता।
अन्य विकल्प बाल-केंद्रित क्यों हैं?
(2) क्षेत्र भ्रमण (Field Trip): इसमें छात्र प्रत्यक्ष रूप से वातावरण में जाकर अनुभव प्राप्त करते हैं। यह पूर्णतः अनुभव-आधारित और छात्र-सक्रियता पर केंद्रित है।
(3) अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction): यह व्यक्तिगत गति (Self-pacing) पर आधारित विधि है। इसमें छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री को छोटे-छोटे चरणों में पढ़कर और अभ्यास करके सीखता है। शिक्षक की भूमिका यहाँ केवल एक मार्गदर्शक की होती है।
(4) प्रायोजना (Project Method): यह विधि 'करके सीखने' (Learning by doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें छात्र अपनी रुचि और समस्या समाधान के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक होती है।
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Q76. उच्च माध्यमिक स्तर के अधिगमकर्ताओं के लिए सीखने की कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: अधिगम कार्य स्मृति स्तर पर करना
Explanation:
शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (Memory Level), अवबोध स्तर (Understanding Level), और चिंतन स्तर (Reflective Level)।
- स्मृति स्तर (Memory Level): यह शिक्षण का सबसे निचला स्तर है, जो केवल रटने (Rote Learning) और तथ्यों को याद रखने पर केंद्रित होता है। उच्च माध्यमिक स्तर (11वीं-12वीं कक्षा) के विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं, जहाँ उनकी बौद्धिक क्षमताएं विकसित हो चुकी होती हैं। इस स्तर पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे केवल तथ्यों को याद न करें, बल्कि उनका विश्लेषण करें और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करें। इसलिए, केवल स्मृति स्तर तक सीमित रहना उनके लिए अनुपयुक्त और अपर्याप्त है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये क्यों उपयुक्त हैं?):
(2) ज्ञान की स्वयं खोज करने देना: यह 'डिस्कवरी लर्निंग' (Discovery Learning) पर आधारित है। उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।
(3) कक्षा अन्तःक्रिया को उचित स्थान देना: जब विद्यार्थी चर्चा करते हैं और एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी होती है। यह सामाजिक अधिगम (Social Learning) को बढ़ावा देता है।
(4) शिक्षण-अधिगम विद्यार्थी केन्द्रित होना: आधुनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित (Student-centered) है। इसका अर्थ है कि शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों और उनकी सीखने की गति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल शिक्षक के व्याख्यान पर आधारित।
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Q77. फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त के अनुसार, वह अवस्था जिसमें किशोर विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं, उसे कहा जाता है :
Right Answer: जनन अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) में पांच अवस्थाएं हैं। किशोर अवस्था (adolescence) में होने वाले परिवर्तनों के लिए जनन अवस्था ही जिम्मेदार है:
- जनन अवस्था (Genital Stage): यह अवस्था किशोरावस्था से शुरू होती है और जीवन के अंत तक चलती है। इस चरण की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की कामेच्छा (libido) फिर से जागृत होती है, लेकिन इस बार उसका ध्यान अपने स्वयं के शरीर के बजाय विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने और यौन परिपक्वता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है। किशोरों में सामाजिक और यौन आकर्षण इसी चरण का हिस्सा है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
- लिंग अवस्था (Phallic Stage - 3 से 6 वर्ष): यहाँ बच्चा अपने लिंग के प्रति जागरूक होता है। इसमें 'ओडिपस' (Oedipus) और 'इलेक्ट्रा' (Electra) ग्रंथियाँ विकसित होती हैं।
- गुदा अवस्था (Anal Stage - 1 से 3 वर्ष): इस अवस्था में बच्चा मल-त्याग के नियंत्रण (potty training) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- अव्यक्त अवस्था (Latency Stage - 6 वर्ष से यौवनारंभ तक): यह एक शांत अवस्था है जहाँ यौन भावनाएं दब जाती हैं और बच्चा सामाजिक कौशल और स्कूल के कार्यों पर ध्यान देता है।
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Q78. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?
Right Answer: दर्द परिवर्जन
Explanation:
अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या
मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)।
दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?
दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।
अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?
अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।
- (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
- (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
- (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।
चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।
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Q79. वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धान्त के सही अनुक्रम (ऊपर से नीचे) का चयन कीजिए :
Right Answer: सामान्य कारक -> लघु कारक -> प्रमुख कारक -> विशिष्ट कारक
Explanation:
1. सामान्य कारक (General Factor - g)
- शीर्ष स्तर: पदानुक्रम के सबसे ऊपर सामान्य कारक होता है।
- इसका अर्थ: यह किसी व्यक्ति की समग्र मानसिक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है। यह एक ऐसी सामान्य बुद्धि है जिसका उपयोग व्यक्ति हर प्रकार के मानसिक या संज्ञानात्मक कार्यों (cognitive tasks) में करता है।
2. प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors)
- दूसरा स्तर: सामान्य कारक आगे चलकर दो मुख्य व्यापक श्रेणियों में विभाजित हो जाता है।
- इसका अर्थ: वर्नन ने दो प्रमुख समूह कारक बताए हैं:
- शाब्दिक-शैक्षिक (v:ed): स्कूली शिक्षा, भाषा, पढ़ने-लिखने और गणित से संबंधित क्षमताएं।
- स्थानिक-यांत्रिक (k:m): व्यावहारिक, शारीरिक और यांत्रिक (mechanical) क्षमताएं, जिनमें दिशाओं और आकृतियों की समझ (spatial awareness) शामिल है।
3. लघु समूह कारक (Minor Group Factors)
- तीसरा स्तर: प्रमुख समूह कारक आगे छोटे और अधिक विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित होते हैं।
- इसका अर्थ: उदाहरण के लिए, 'शाब्दिक-शैक्षिक' कारक आगे चलकर मौखिक प्रवाह (verbal fluency), संख्यात्मक क्षमता (numerical ability), या तार्किक सोच जैसे लघु कारकों में बंट सकता है। इसी तरह स्थानिक-यांत्रिक कारक यांत्रिक समझ या हस्त-कौशल में बंट सकता है।
4. विशिष्ट कारक (Specific Factors - s)
- निचला स्तर: पदानुक्रम के सबसे निचले आधार पर विशिष्ट कारक होते हैं।
- इसका अर्थ: ये किसी एक विशेष कार्य या परीक्षण को करने के लिए आवश्यक अत्यंत विशिष्ट क्षमताएं हैं (जैसे बीजगणित के किसी विशेष समीकरण को हल करने की क्षमता या किसी खास मशीन के पुर्जे जोड़ने की क्षमता)।
संक्षेप में, वर्नन का मानना था कि यद्यपि हम सभी में एक अंतर्निहित सामान्य बुद्धि होती है, लेकिन व्यवहार में यह पहले व्यापक कौशल (प्रमुख), फिर संकीर्ण कौशल (लघु), और अंततः विशिष्ट कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल में फ़िल्टर हो जाती है।
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Q80. समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के किस संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है ?
Right Answer: शिक्षा का अधिकार
Explanation:
सही है: भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-A के तहत "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education - RTE) एक मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जाति, धर्म, लिंग या शारीरिक/मानसिक क्षमता के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। समावेशी शिक्षा इसी संवैधानिक अधिकार को धरातल पर लागू करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि दिव्यांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) मुख्यधारा के स्कूलों से बाहर न रहें।
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Q81. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?
Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं
Explanation:
'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।
(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।
(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।
(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।
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Q82. निम्नलिखित में से प्रश्नों का कौन-सा प्रकार विद्यार्थियों के भावों की अभिव्यक्ति एवं तार्किक चिंतन की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: बहु विकल्पात्मक प्रकार
Explanation:
इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार के प्रश्न भावों की अभिव्यक्ति (Expression of feelings) और तार्किक चिंतन (Logical thinking) को जाँचने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
बहु विकल्पात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs): ये प्रश्न 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं। इसमें विद्यार्थी को दिए गए विकल्पों में से केवल एक सही उत्तर चुनना होता है। यहाँ विद्यार्थी के पास अपने विचारों, भावनाओं या तर्क को विस्तार से रखने का कोई अवसर नहीं होता। यह केवल स्मृति (Memory) और पहचान (Recognition) की जाँच करता है, न कि सृजनात्मक या तार्किक चिंतन की। इसीलिए यह "उपयुक्त नहीं" है।
विश्लेषणात्मक (Analytical), समालोचनात्मक (Critical) और विवेचनात्मक (Discussion) प्रकार:
- ये प्रश्न 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
- इनमें छात्र को समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है, अपने तर्क (Logic) देने होते हैं और अपने विचारों (Feelings/Perspective) को विस्तार से लिखना होता है।
- ये तीनों प्रकार उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills - HOTS) विकसित करने के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
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Q83. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता का कारण सामाजिक वातावरण होता है, भौतिक वातावरण नहीं।
Explanation:
(1) सही है: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ ही है कि हर व्यक्ति दूसरे से अलग है, चाहे वह बुद्धि/ज्ञान (Cognitive) के स्तर पर हो या कार्य करने की क्षमता (Psychomotor) के स्तर पर।
(2) सही है: किसी व्यक्ति की प्रजाति (Species) या आनुवंशिकता (Heredity) उसके विकास और विशेषताओं को प्रभावित करती है, जो वैयक्तिक भिन्नता का एक आधार है।
(3) गलत है: यह कथन गलत है क्योंकि यह अधूरा है। वैयक्तिक भिन्नता केवल सामाजिक वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक (भौगोलिक, प्राकृतिक, जलवायु आदि) दोनों प्रकार के वातावरण का परिणाम होती है। भौतिक वातावरण भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, विकास और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। चूँकि यह कथन "भौतिक वातावरण को नकारता है" (not the physical environment), इसलिए यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।
(4) सही है: जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसके अनुभव, सोच और क्षमताएं बदलती हैं। आयु के बढ़ने के साथ-साथ दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता और अधिक स्पष्ट हो जाती है।
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Q84. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।
Explanation:
(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।
(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।
(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।
(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।
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Q85. विद्यार्थियों की समग्र उपलब्धि और प्रवीणता का मूल्यांकन करने के लिए, सीखने की अवधि के अंत में अभिकल्पित मूल्यांकन कहलाता है :
Right Answer: सीखने का मूल्यांकन
Explanation:
मूल्यांकन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है:
- सीखने का मूल्यांकन (Assessment of Learning): यह मूल्यांकन सीखने की अवधि के अंत में (जैसे सत्र के अंत में, फाइनल परीक्षा में) किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र ने निर्धारित समय में कितना और क्या सीखा है। यह आमतौर पर 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) का हिस्सा होता है। चूँकि आपका प्रश्न "अवधि के अंत" की बात कर रहा है, इसलिए सही उत्तर (1) है।
- सीखने के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): यह मूल्यांकन सीखने की प्रक्रिया के दौरान (जैसे क्लास में पढ़ाते समय सवाल पूछना) किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की कमियों को सुधारना होता है। यह 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) का हिस्सा होता है।
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Q86. बच्चों में सामाजीकरण को बढ़ावा देने में शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सहायक नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक परियोजना कार्य देना
Explanation:
सामाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों, और व्यवहारों को सीखते हैं और अन्य लोगों के साथ घुलना-मिलना सीखते हैं। एक शिक्षक का उद्देश्य कक्षा में ऐसे अवसर प्रदान करना होता है जिससे बच्चे एक-दूसरे से जुड़ सकें।
(1) वैयक्तिक परियोजना कार्य देना (Individual Project Work): जब शिक्षक किसी बच्चे को 'व्यक्तिगत' या 'अकेले' करने वाला प्रोजेक्ट देता है, तो बच्चा केवल अपने आप तक सीमित रहता है। इसमें उसे अन्य बच्चों के साथ बातचीत या सहयोग करने का मौका नहीं मिलता। इसलिए, यह सामाजीकरण को बढ़ावा देने में सहायक नहीं है।
(2) सामाजिक जिम्मेदारियाँ सौंपना: (जैसे- क्लास मॉनिटर बनाना या ग्रुप लीडर बनाना) इससे बच्चों में नेतृत्व और सहयोग की भावना आती है, जो सामाजीकरण को बढ़ाता है।
(3) सह-पाठ्यगामी गतिविधियों का आयोजन करना: (जैसे- खेलकूद, नाटक, या सांस्कृतिक कार्यक्रम) इनमें बच्चे समूह में काम करते हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास होता है।
(4) सामाजिक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करना: बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना सामाजीकरण का प्रत्यक्ष तरीका है।
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Q87. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: थायमस ग्रंथि
Explanation:
मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं।
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Q88. निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: (a), (c) एवं (d)
Explanation:
इस प्रश्न को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी "लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ" (Gender Biased Practices) शैक्षिक अभ्यासों (Classroom Practices) में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए।
यहाँ प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण दिया गया है:
- (a) सजातीय समूहन (Homogeneous Grouping): लिंग के आधार पर लड़के और लड़कियों के अलग-अलग समूह बनाना (जैसे- लड़कों का अलग ग्रुप, लड़कियों का अलग ग्रुप)। यह एक पक्षपातपूर्ण क्रिया है, जो बच्चों में दूरियां बढ़ाती है। इसे कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु (Gender-Neutral Content): ऐसी पाठ्यपुस्तकें या सामग्री जिसमें लड़के और लड़कियों को समान रूप से प्रस्तुत किया गया हो (जैसे- पाठ में महिला को डॉक्टर और पुरुष को खाना बनाते हुए दिखाना)। यह एक सकारात्मक और अच्छी क्रिया है। इसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए (यह पक्षपातपूर्ण नहीं है)।
- (c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन (Stereotypical Vocational Guidance): बच्चों को उनके लिंग के आधार पर करियर की सलाह देना (जैसे- लड़कियों को कहना कि तुम गृह विज्ञान या नर्सिंग चुनो, और लड़कों को इंजीनियरिंग या सेना में जाने को कहना)। यह पूरी तरह से लैंगिक पक्षपात है, इसे शिक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति (Biased Attitude of Teacher): शिक्षक का यह सोचना कि "लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में।" यह पूर्वाग्रह बच्चों के विकास को रोकता है, इसलिए इसे भी कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
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Q89. निम्नलिखित में से कौन आनुवंशिकता से प्रभावित नहीं होता ?
Right Answer: अभिवृत्ति
Explanation:
यहाँ सभी विकल्पों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति आनुवंशिकता (Heredity) से प्रभावित क्यों नहीं होती:
- (1) अभिक्षमता (Aptitude): अभिक्षमता का अर्थ है किसी विशिष्ट कार्य या क्षेत्र (जैसे- संगीत, गणित, या कला) में कौशल सीखने की जन्मजात क्षमता या योग्यता। यह काफी हद तक आनुवंशिकता और जैविक कारकों से प्रभावित होती है।
- (2) अभिवृत्ति (Attitude): अभिवृत्ति (या दृष्टिकोण) किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक सोचने और महसूस करने का एक तरीका है। यह पूरी तरह से अर्जित (Learned) होती है। बच्चा अपने परिवार, समाज, संस्कृति और अनुभवों (वातावरण) से सीखता है कि उसे किस चीज़ के प्रति कैसा नज़रिया रखना है। इसका आनुवंशिकता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
- (3) संवेग (Emotion): संवेगात्मक प्रवृत्तियाँ (जैसे- जल्दी क्रोधित होना, शांत रहना, या डरना) व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) से जुड़ी होती हैं। मूल स्वभाव का एक बड़ा हिस्सा आनुवंशिक बनावट और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर निर्भर करता है।
- (4) अभिरुचि (Interest): यद्यपि अभिरुचि वातावरण से बहुत अधिक प्रभावित होती है, लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध) में पाया गया है कि कुछ चीज़ों में रुचि रखने का झुकाव (जैसे- अंतर्मुखी या बहिर्मुखी गतिविधियाँ) व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना से भी थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
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Q90. सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a) एवं (c)
Explanation:
- कथन (a) "बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं" – यह कथन सत्य नहीं है। बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और वातावरण (Environment) दोनों की परस्पर क्रिया (Interaction) महत्वपूर्ण होती है। केवल एक को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। अच्छा वातावरण मिलने पर बुद्धि का बेहतर विकास होता है।
- कथन (b) "लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। महिला या पुरुष होने से किसी की बुद्धि कम या ज़्यादा नहीं होती। आधुनिक मनोविज्ञान यह स्पष्ट मानता है कि लिंग के आधार पर बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता।
- कथन (c) "तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है" – यह कथन पूरी तरह सत्य नहीं माना जाता। स्मरणशक्ति (Memory) और बुद्धि (Intelligence) दो अलग-अलग मानसिक क्षमताएं हैं। कोई व्यक्ति चीज़ों को बहुत जल्दी रट या याद रख सकता है (तीव्र स्मरणशक्ति), लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी तार्किक या समस्या-समाधान की क्षमता (बुद्धि) भी उतनी ही तीव्र हो। इसलिए तीव्र बुद्धि को केवल तीव्र स्मरणशक्ति का परिचायक नहीं माना जा सकता।
- कथन (d) "बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे स्टर्न) के अनुसार, बुद्धि की परिभाषा ही यही है कि व्यक्ति नई परिस्थितियों और वातावरण में खुद को कितनी कुशलता से ढाल या समायोजित (Adjust) कर पाता है।
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Hindi Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q1. विलोम की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: आकृष्ट - विकृष्ट
Explanation:
व्याख्या:
- आकृष्ट (सही विकल्प): 'आकृष्ट' का विलोम 'विकृष्ट' नहीं, बल्कि 'अनाकृष्ट' या 'विकर्षित' होता है। (आकृष्ट का अर्थ है 'खींचा हुआ' या 'आकर्षित', जबकि विकृष्ट का अर्थ होता है 'खींचा हुआ' ही; अतः ये विलोम नहीं हैं।)
अन्य विकल्प क्यों संगत हैं:
- (2) आह्वान - अनाह्वान: यह सही है (आह्वान का अर्थ बुलाना और अनाह्वान का अर्थ न बुलाना)।
- (3) कलंकित - निष्कलंक: यह सही है (कलंकित का अर्थ दाग लगा हुआ और निष्कलंक का अर्थ दाग रहित)।
- (4) ऐहिक - पारलौकिक: यह सही है (ऐहिक का अर्थ इस लोक से संबंधित और पारलौकिक का अर्थ परलोक से संबंधित)।
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Q2. वर्णों की ध्वनिगत विशेषताओं के संदर्भ में असंगत चुनिए :
Right Answer: ऋ - अग्र, संवृत, वृत्तमुखी
Explanation:
व्याख्या: स्वरों का वर्गीकरण ओठों की स्थिति (होठों के आकार) के आधार पर दो प्रकार से होता है:
- वृत्तमुखी (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं (उ, ऊ, ओ, औ)।
- अवृत्तमुखी (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल नहीं होते (अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ)।
विकल्प (2) में 'ऋ' को वृत्तमुखी बताया गया है, जो कि गलत है। 'ऋ' का उच्चारण करते समय होंठ गोल नहीं होते, इसलिए यह अवृत्तमुखी स्वर है (साथ ही यह अग्र और संवृत है)।
अन्य विकल्प सही क्यों हैं:
- (1) उ - पश्च, संवृत, वृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च (पिछले) भाग से बोला जाता है, उच्चारण में मुख लगभग बंद (संवृत) रहता है और होंठ गोल (वृत्तमुखी) होते हैं।
- (3) अ - मध्य, ह्रस्व, उदासीन: यह जिह्वा के मध्य भाग से बोला जाता है, एकमात्रिक (ह्रस्व) है और इसे 'उदासीन स्वर' भी कहा जाता है।
- (4) आ - पश्च, विवृत, अवृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च भाग से बोला जाता है, मुख पूरा खुलता है (विवृत) और होंठ गोल नहीं होते (अवृत्तमुखी)।
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Q3. हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :
Right Answer: शिक्षा तथा उपाधियाँ
Explanation:
व्याख्या: एक सफल और श्रेष्ठ हिंदी अध्यापक की 'विशिष्ट विशेषताओं' (Qualities/Characteristics) में उसके आंतरिक गुण, ज्ञान और कौशल आते हैं।
- (1) साहित्य का ज्ञान, (2) भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान और (3) हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों एक हिंदी शिक्षक की व्यावहारिक और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो उसे कक्षा में प्रभावी रूप से पढ़ाने के योग्य बनाती हैं।
- (4) शिक्षा तथा उपाधियाँ (Degrees and Qualifications): ये शिक्षक बनने के लिए आवश्यक 'अनिवार्य योग्यताएँ' (Eligibility criteria) तो हैं, लेकिन ये उसकी "विशिष्ट विशेषताएँ" या शिक्षण कौशल नहीं हैं। मात्र डिग्री होने से कोई व्यक्ति एक अच्छा शिक्षक नहीं बन जाता; एक अच्छे शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान और पढ़ाने की शैली (methods) से होती है।
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Q4. निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द समूह का चयन कीजिए :
Right Answer: सीधा साधा, अठोतर, उहापोह
Explanation:
व्याख्या:
- सीधा साधा: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'सीधा-सादा' होता है।
- अठोतर: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'अठोत्तर' (अठ् + उत्तर = आठ अधिक) होता है।
- उहापोह: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'ऊहापोह' (असमंजस की स्थिति) होता है, जिसमें दीर्घ 'ऊ' का प्रयोग होता है।
अन्य विकल्प क्यों शुद्ध हैं:
- विकल्प (2): 'दाशरथि' (दशरथ + इ), 'स्थायित्व' और 'विद्यार्थिपरिषद्' (समास होने पर 'विद्यार्थी' की 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' हो जाती है, जैसे- मन्त्रिपरिषद्) सभी शुद्ध हैं।
- विकल्प (3): 'सुधीजन' (सुधी + जन), 'प्रेयसी' और 'निजीकरण' सभी वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
- विकल्प (4): 'वेश्या', 'शशिभूषण' और 'शक्तीकरण' भी शुद्ध हैं (ध्यान दें: 'करण' प्रत्यय जुड़ने पर 'शक्ति' की ह्रस्व 'इ' की मात्रा दीर्घ 'ई' में बदल जाती है, जैसे- शुद्धीकरण, स्पष्टीकरण)।
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Q5. समास की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: श्रमसाध्य - करण तत्पुरुष
Explanation:
व्याख्या: सभी विकल्पों का समास विग्रह इस प्रकार है:
- श्रमसाध्य (सही): इसका विग्रह है "श्रम से साध्य" (अर्थात् जिसे श्रम के द्वारा साधा या पूरा किया जा सके)। यहाँ 'से' (के द्वारा) साधन का बोध करा रहा है, इसलिए यहाँ करण तत्पुरुष समास है।
अन्य विकल्प असंगत (गलत) क्यों हैं:
(1) चक्षुश्रवा: इसका विग्रह है "चक्षुओं (आँखों) से सुनता है जो" अर्थात् सर्प (साँप)। इसमें कोई पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो रहा है, इसलिए इसमें बहुव्रीहि समास है (इतरेतर द्वन्द्व नहीं)।
(2) आपादमस्तक: इसका विग्रह है "पाद (पैर) से लेकर मस्तक (सिर) तक"। इसमें प्रथम पद 'आ' उपसर्ग/अव्यय है, इसलिए यहाँ अव्ययीभाव समास है (बहुव्रीहि नहीं)।
(3) जातिगत: इसका विग्रह है "जाति को गत (गया हुआ)"। यहाँ 'को' विभक्ति का लोप हुआ है, इसलिए इसमें कर्म तत्पुरुष समास है (अधिकरण तत्पुरुष नहीं)।
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Q6. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: जब वह समकालीन भी हो और कालातीत भी।
Explanation:
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है: "बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता... नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है (यानी समकालीनता), पर अगर वह समय के पार न देख पाये (यानी कालातीत न हो), तो टिकाऊ नहीं हो सकता।"
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Q9. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: नएपन एवं निरंतरता दोनों को चुनना
Explanation:
गद्यांश की दूसरी ही पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: "साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।"
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Q10. निम्नलिखित में से मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है :
Right Answer: उचित लय और गति प्रदान करना
Explanation:
'लय' (Rhythm), 'आरोह-अवरोह' (आवाज़ का उतार-चढ़ाव) और 'स्वर' का प्रयोग सस्वर वाचन (Reading Aloud) यानी बोल-बोल कर पढ़ने में किया जाता है। मौन वाचन में चूँकि आवाज़ नहीं निकाली जाती और होंठ भी नहीं हिलते, इसलिए इसमें 'लय' (Rhythm) का कोई काम नहीं होता। अतः यह मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है।
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Q11. किस विकल्प में उपसर्ग विभाजन नियमानुसार है ?
Right Answer: निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
Explanation:
(3) निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार, 'निश्', 'निष्' और 'निस्' से शुरू होने वाले शब्दों में मूल रूप से 'निस्' उपसर्ग ही होता है। संधि नियमों के कारण विसर्ग या 'स्' का रूप बदलकर 'श्' या 'ष्' हो जाता है:
- निश्शुल्क: निस् + शुल्क (स् का श् होना)
- निष्पक्ष: निस् + पक्ष (स् का ष् होना)
- निस्स्वार्थ: निस् + स्वार्थ अतः इस विकल्प में उपसर्ग का विभाजन पूर्णतः नियमानुसार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(1) अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि सभी शब्दों में 'अप' उपसर्ग नहीं है:
- अपरिग्रह: अपि/अ + परिग्रह (यहाँ 'अ' उपसर्ग है, 'अप' नहीं)।
- अपरोक्ष: अ + परोक्ष (जो प्रत्यक्ष न हो - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
- अपर्ण: अ + पर्ण (बिना पत्तों का - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
(2) आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि ये शब्द उपसर्ग से नहीं, बल्कि प्रत्यय के योग से बने हैं:
- आरण्यक: अरण्य + अक (प्रत्यय)
- आवश्यक: अवश + यक/इक (प्रत्यय)
- आधुनिक: अधुना + इक (प्रत्यय) इनमें 'आ' उपसर्ग नहीं है, बल्कि प्रत्यय लगने के कारण आदि-स्वर (पहला अक्षर) 'अ' से 'आ' में बदल गया है।
(4) व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग यह विकल्प व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है क्योंकि हिंदी या संस्कृत में 'वी' (बड़ी ई) नाम का कोई उपसर्ग नहीं होता। इन सभी शब्दों में 'वि' (छोटी इ) उपसर्ग है:
- व्याधि: वि + आधि
- वीक्षण: वि + ईक्षण (यहाँ 'वि' का 'इ' और 'ईक्षण' का 'ई' मिलकर दीर्घ संधि से 'वीक्षण' बना है, पर मूल उपसर्ग 'वि' ही है)।
- व्यतिरेक: वि + अतिरेक
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Q12. संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए :
Right Answer: दैत्यारि, गत्यानुसार, अगन्याशय - यण संधि
Explanation:
विकल्प (1) का विश्लेषण (अनुपयुक्त विकल्प)
- गत्यानुसार: गति + अनुसार = गत्यानुसार ($इ + अ = य$) — यण संधि (यह सही है)
- अग्न्याशय: अग्नि + आशय = अग्न्याशय ($इ + आ = या$) — यण संधि (यह भी सही है)
दैत्यारि: दैत्य + अरि = दैत्यारि ($अ + अ = आ$) — यहाँ दीर्घ स्वर संधि है, न कि यण संधि।
नोट: चूँकि 'दैत्यारि' में दीर्घ संधि है, इसलिए यह पूरा समूह 'यण संधि' के अंतर्गत आना गलत है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण (जो कि सही हैं)
(2) दीर्घ संधि (सही)
- मिताहार: मित + आहार = मिताहार ($अ + आ = आ$)
- विकलांग: विकल + अंग = विकलांग ($अ + अ = आ$)
- भूर्ध्व: भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व ($ऊ + ऊ = ऊ$)
(3) व्यंजन संधि (सही)
- दिग्विजय: दिक् + विजय = दिग्विजय (क का ग में परिवर्तन)
- अब्ज: अप् + ज = अब्ज (प का ब में परिवर्तन)
- वृहन्नेत्र: वृहत् + नेत्र = वृहन्नेत्र (त का न में परिवर्तन)
(4) विसर्ग संधि (सही)
- वयोवृद्ध: वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
- पुरोधा: पुरः + धा = पुरोधा
- प्रादुर्भूत: प्रादुः + भूत = प्रादुर्भूत
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Q13. किस विकल्प में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग नहीं हुआ है ?
Right Answer: जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया।
Explanation:
सही विकल्प का विश्लेषण:
(1) जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया। (सार्वनामिक विशेषण नहीं है)
- क्यों? इस वाक्य में 'जिसने' और 'वह' सर्वनाम (Pronoun) के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, न कि विशेषण के रूप में। यह एक मिश्र वाक्य है जहाँ 'जिसने... वह' संबंधवाचक सर्वनाम का काम कर रहे हैं। इनके तुरंत बाद कोई संज्ञा शब्द नहीं आ रहा है जिसकी ये विशेषता बताएँ।
अन्य विकल्पों में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग (जो संगत हैं):
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करता है या उसकी विशेषता बताता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
(2) यह पुस्तक किससे मँगवाऊँ।
- यहाँ 'यह' सर्वनाम 'पुस्तक' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बता रहा है (निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
(3) ऐसे व्यक्ति पर कभी विश्वास मत करो।
- यहाँ 'ऐसे' सर्वनाम 'व्यक्ति' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है (यौगिक सार्वनामिक विशेषण)।
(4) आपके घर से कल कोई नौकर आया था।
- यहाँ 'कोई' सर्वनाम 'नौकर' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी अनिश्चितता को दर्शा रहा है (अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
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Q14. प्रत्यय की दृष्टि से संगत विभाजन चुनिए :
Right Answer: मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय
Explanation:
(1) मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय (संगत)
- ये सभी शब्द तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत 'अ' प्रत्यय के योग से बने हैं, जहाँ आदि स्वर (पहले अक्षर की मात्रा) में वृद्धि होती है:
- मिथुन + अ = मैथुन ($इ/ई \rightarrow ऐ$)
- शुचि + अ = शौच ($उ/ऊ \rightarrow औ$)
- रघु + अ = राघव ($अ \rightarrow आ$, और अंतिम 'उ' का 'व्' हो जाता है)
अन्य विकल्प क्यों असंगत (गलत) हैं?
(2) फिकैत, डकैत, लड़ैत - 'एत' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ऐत' प्रत्यय लगा है, 'एत' नहीं (मात्राओं का अंतर है—फेंक + ऐत = फिकैत, डाका + ऐत = डकैत, लड़ना + ऐत = लड़ैत)।
(3) नारदीय, स्थानीय, मानवीय - 'अनीय' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ईय' प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है, 'अनीय' नहीं (नारद + ईय = नारदीय, स्थान + ईय = स्थानीय, मानव + ईय = मानवीय)।
(4) कौशेय, सौजन्य, कौमार्य - 'एय' प्रत्यय (असंगत)
- इस विकल्प में मिले-जुले प्रत्यय हैं:
- कौशेय में 'एय' प्रत्यय है (कोश + एय)।
- परंतु सौजन्य (सुजन + य) और कौमार्य (कुमार + य) में 'य' प्रत्यय लगा है, 'एय' नहीं। इसलिए यह विभाजन पूरी तरह संगत नहीं है।
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Q15. वाक्य में प्रयुक्त क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
Right Answer: मदारी अनेक करतब दिखलाकर बच्चों को ललचाता है - अकर्मक क्रिया
Explanation:
क्यों असंगत है? इस वाक्य में 'ललचाता है' एक सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) है, अकर्मक नहीं। वाक्य में क्रिया का फल 'बच्चों' (कर्म) पर पड़ रहा है। यदि हम प्रश्न करें "मदारी किसे ललचाता है?", तो उत्तर मिलता है "बच्चों को"। इसलिए यह विकल्प गलत (असंगत) दिया गया है।
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English Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q11. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: intensive and extensive
Explanation:
In English language teaching pedagogy (which is standard for teaching exams like CTET, HTET, and UPTET), the listening skill is categorized exactly like the reading skill:
- Intensive listening: This focuses on careful attention to specific details, sounds, words, or grammar. The goal is accuracy and language focus (e.g., listening to a short dialogue to hear specific pronunciation or answer a direct question).
- Extensive listening: This involves listening to longer, more generalized materials for overall understanding, fluency, and enjoyment without worrying about understanding every single word (e.g., listening to an English podcast, story, or movie).
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Q12. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: aural-oral
Explanation:
Aural-oral skill involves training the learner to listen for the English speech sounds including stress and intonation patterns.
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Q13. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: prescriptive
Explanation:
J.C. Nesfield's grammar books (such as English Grammar: Past and Present) are classic examples of prescriptive grammar.
Here is why:
- Prescriptive Grammar: This approach lays down strict rules about how a language should or must be used. It focuses on what is grammatically "correct" versus "incorrect," often based on traditional or classical rules. Nesfield's books were written exactly for this purpose—to teach students the rigid, formal rules of Standard English.
Why the other options are incorrect:
(1) Universal Grammar: This is a modern linguistic theory (proposed by Noam Chomsky) suggesting that the ability to learn grammar is hard-wired into the human brain and that all human languages share a common structural basis.
(2) Cognitive Grammar: This is a psychological approach to language that argues grammar and meaning are deeply tied to human cognition and how we perceive the world.
(3) Descriptive Grammar: This is the modern linguistic approach that observes and describes how native speakers actually use the language in real life, without judging it as "right" or "wrong." Nesfield did the exact opposite of this.
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Q14. Choose the correct option:
Right Answer: A is true; B is false
Explanation:
In general, print materials are:
- Portable – Books and notes can be carried easily.
- Easily available – They are widely accessible in libraries, bookstores, and schools.
- Cost-effective – Especially when compared with many digital devices and multimedia resources.
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Q15. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: multilingual resources
Explanation:
When learners use their native language (mother tongue) to understand, analyze, or discuss complex material in a second language (like an English poem), this teaching approach is known as using the mother tongue as a "resource." In modern language pedagogy, this practice is often called "Translanguaging" or utilizing multilingual resources to help students grasp difficult concepts in the target language.
Why the other options are incorrect:
- (1) evaluative comprehension: This refers to making judgments or forming opinions about a text. While discussing a poem might involve evaluation, the specific act of using a native language to do so highlights the use of a multilingual strategy, not just the act of evaluating.
- (3) pre-reading skills: These are activities done before reading a text to prepare the learner (like looking at titles to predict the story or learning key vocabulary). Discussing the meaning of a poem usually happens during or after reading.
- (4) first language acquisition: This refers to the natural, subconscious process by which infants and young children learn their very first language from birth. It is a developmental milestone, not a teaching strategy used in a classroom to learn a second language.
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Reasoning (10 Questions)
Q1. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए
Right Answer: वृत्त
Explanation:
जिस प्रकार एक वर्ग (Square) का निर्माण सीधी रेखाओं (Lines) से मिलकर होता है (अर्थात वर्ग की बाहरी सीमा सीधी रेखाएँ होती हैं), ठीक उसी प्रकार एक वृत्त (Circle) का निर्माण चाप (Arc) से होता है (वृत्त की परिधि या बाहरी सीमा एक निरंतर चाप होती है)।
गोला (Sphere) और गेंद (Ball) 3D आकृतियाँ हैं, जबकि रेखा, वर्ग, चाप और वृत्त 2D ज्यामितीय आकृतियाँ (Geometric shapes) हैं। इसलिए 'वृत्त' ही सबसे सटीक उत्तर है।
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Q2. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: AYBZC
Explanation:
हल करने का तरीका:
इस शृंखला में प्रत्येक पद के अक्षरों के बीच एक निश्चित पैटर्न चल रहा है। आइए प्रत्येक पद के अक्षरों की तुलना उनके स्थानों (पहले, दूसरे, तीसरे आदि) के आधार पर करें:
- पहला अक्षर (-3 का पैटर्न): M (13) ➔ J (10) ➔ G (7) ➔ D (4) अगला अक्षर: D (4) - 3 = A (1)
- दूसरा अक्षर (+2 का पैटर्न): Q (17) ➔ S (19) ➔ U (21) ➔ W (23) अगला अक्षर: W (23) + 2 = Y (25)
- तीसरा अक्षर (-3 का पैटर्न): N (14) ➔ K (11) ➔ H (8) ➔ E (5) अगला अक्षर: E (5) - 3 = B (2)
- चौथा अक्षर (+2 का पैटर्न): R (18) ➔ T (20) ➔ V (22) ➔ X (24) अगला अक्षर: X (24) + 2 = Z (26)
- पाँचवाँ अक्षर (-3 का पैटर्न): O (15) ➔ L (12) ➔ I (9) ➔ F (6) अगला अक्षर: F (6) - 3 = C (3)
इन सभी अक्षरों को मिलाने पर, श्रेणी का अगला पद AYBZC बनता है।
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Q3. निम्न संख्या श्रेणी में लुप्त पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 65
Explanation:
हल करने का तरीका (Step-by-step logic):
यह संख्या श्रेणी एक विशेष पैटर्न का पालन कर रही है। प्रत्येक पद प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3...) के घन (cube) में 1 जोड़ने पर प्राप्त हो रहा है। इसका सूत्र $n^3 + 1$ है:
- पहला पद: $1^3 + 1 = 1 + 1 = 2$
- दूसरा पद: $2^3 + 1 = 8 + 1 = 9$
- तीसरा पद: $3^3 + 1 = 27 + 1 = 28$
- चौथा पद (लुप्त): $4^3 + 1 = 64 + 1 = 65$
- पाँचवाँ पद: $5^3 + 1 = 125 + 1 = 126$
- छठा पद: $6^3 + 1 = 216 + 1 = 217$
- सातवाँ पद: $7^3 + 1 = 343 + 1 = 344$
अतः, पैटर्न के अनुसार प्रश्नवाचक चिह्न (?) के स्थान पर 65 आएगा।
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Q4. A, P, R, X, Y और Z एक पंक्ति में बैठे हुए हैं। Y और Z मध्य में हैं और A तथा P अन्तिम शीर्षों पर हैं। R, A के एकदम बायीं ओर है। P के एकदम दायीं ओर कौन बैठा हुआ है ?
Right Answer: X
Explanation:
1. पंक्ति निर्धारित करें चूँकि कुल 6 व्यक्ति हैं, इसलिए पंक्ति में 6 स्थान होंगे: _ _ _ _ _ _
2. अंतिम सिरों पर व्यक्तियों को बिठाएं हमें प्रश्न में बताया गया है कि A और P अन्तिम शीर्षों (सिरों) पर हैं। संभावना 1: P _ _ _ _ A संभावना 2: A _ _ _ _ P
3. R का स्थान और सही सिरे निर्धारित करें यह दिया गया है कि R, A के एकदम बायीं ओर है। यदि A पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठा होता, तो उसके बायीं ओर R के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसलिए, A को अंतिम स्थान (एकदम दायीं ओर) पर ही होना चाहिए, जिससे यह तय हो जाता है कि P पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठेगा। व्यवस्था: P _ _ _ R A
4. मध्य के व्यक्तियों को बिठाएं हमें पता है कि Y और Z मध्य में हैं (यानी तीसरे और चौथे स्थान पर)। व्यवस्था: P _ [Y या Z] [Z या Y] R A
5. बचा हुआ स्थान भरें अब केवल X बचा है, और P के ठीक बगल में केवल एक ही स्थान (दूसरा स्थान) खाली है। अंतिम व्यवस्था: P X [Y/Z] [Z/Y] R A
निष्कर्ष: इस अंतिम व्यवस्था से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि P के एकदम दायीं ओर X बैठा हुआ है।
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Q6. रेखा 10 किमी सीधे चलती है और फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है
Right Answer: 5 किमी
Explanation:
मान लीजिए रेखा अपने प्रारंभिक बिंदु से उत्तर (North) दिशा की ओर चलना शुरू करती है। (आप कोई भी दिशा मान सकते हैं, अंत में दूरी समान ही आएगी)।
कदम-दर-कदम रेखा की यात्रा:
- "रेखा 10 किमी सीधे चलती है"
- रेखा उत्तर की ओर 10 किमी चली।
- (कुल दूरी: उत्तर = 10 किमी)
- "फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है"
- उत्तर से दाएँ मुड़ने का मतलब है पूर्व (East) की ओर मुड़ना।
- वह पूर्व की ओर 10 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 5 किमी चलती है" (पहला बायाँ मोड़)
- पूर्व से बाएँ मुड़ने का मतलब है वापस उत्तर (North) की ओर मुड़ना।
- वह उत्तर की ओर 5 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 + 5 = 15 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (दूसरा बायाँ मोड़)
- उत्तर से बाएँ मुड़ने का मतलब है पश्चिम (West) की ओर मुड़ना।
- वह पश्चिम की ओर 15 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 15 किमी। पूर्व में वह 10 किमी थी, लेकिन पश्चिम में 15 किमी आ गई, यानी प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की तरफ 5 किमी हो गई।)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (तीसरा बायाँ मोड़)
- पश्चिम से बाएँ मुड़ने का मतलब है दक्षिण (South) की ओर मुड़ना।
- वह दक्षिण की ओर 15 किमी चली।
अंतिम स्थिति का विश्लेषण:
- उत्तर-दक्षिण (Vertical) दूरी: वह कुल 15 किमी उत्तर की ओर गई थी (स्टेप 1 में 10 किमी + स्टेप 3 में 5 किमी) और अंत में 15 किमी दक्षिण की ओर आ गई। यानी उत्तर-दक्षिण की दूरी 15 - 15 = 0 हो गई। वह अपने प्रारंभिक बिंदु वाली क्षैतिज रेखा (horizontal line) पर आ गई है।
- पूर्व-पश्चिम (Horizontal) दूरी: वह 10 किमी पूर्व की ओर गई थी, लेकिन फिर 15 किमी पश्चिम की ओर आ गई।
- अतः प्रारंभिक बिंदु से उसकी दूरी = 15 किमी - 10 किमी = 5 किमी (प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की दिशा में)।
निष्कर्ष: वह अपने प्रारंभिक बिंदु से 5 किमी की दूरी पर है।
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Q7. पाँच व्यक्ति P, Q, R, S, और T एक अखबार पढ़ते हैं।
Right Answer: S
Explanation:
कथनों का विश्लेषण:
- "जो व्यक्ति सर्वप्रथम पढ़ता है, वह R को दे देता है।"
- इसका मतलब है कि R अखबार पढ़ने वाला दूसरा व्यक्ति है।
- क्रम: [1] [R] [3] [4] [5]
- "जो सबसे आखिरी में पढ़ता है, वो P से लेता है।"
- सबसे आखिरी व्यक्ति (5वाँ) अखबार P से लेता है, जिसका मतलब है कि P 4थे स्थान पर है।
- क्रम: [1] [R] [3] [P] [5]
- "T पढ़ने में प्रथम या अन्तिम नहीं है।"
- T पहले [1] और पाँचवें [5] स्थान पर नहीं आ सकता।
- दूसरा और चौथा स्थान पहले ही (R और P) से भरा हुआ है, इसलिए T के लिए केवल तीसरा [3] स्थान बचता है।
- क्रम: [1] [R] [T] [P] [5]
- "P और Q के बीच दो पाठक थे।"
- P चौथे स्थान पर है। P और Q के बीच 2 पाठक तभी हो सकते हैं जब Q पहले [1] स्थान पर हो (ताकि बीच में दूसरे और तीसरे स्थान वाले पाठक आ सकें)।
- क्रम: [Q] [R] [T] [P] [5]
- अंतिम पाठक कौन है?
- अब हमारे पास केवल एक व्यक्ति S बचा है और एक ही स्थान (5वाँ/आखिरी) खाली है।
- इसलिए, S आखिरी में अखबार पढ़ेगा।
- पूरा क्रम: Q ➞ R ➞ T ➞ P ➞ S
निष्कर्ष: सबसे आखिरी में अखबार S पढ़ता है।
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Q8. A, C का पिता है और D, B का पुत्र है। E, A का भ्राता है। C, D की बहन है। B, E से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
Right Answer: साली/भाभी
Explanation:
प्रश्न के कथनों का विश्लेषण:
- "A, C का पिता है"
- A पुरुष है और C का पिता है।
- "C, D की बहन है"
- C (महिला) और D भाई-बहन हैं।
- चूँकि A, C का पिता है, इसलिए A, D का भी पिता होगा।
- "D, B का पुत्र है"
- D, B का बेटा है।
- हमने ऊपर देखा कि D का पिता A है। अगर D का पिता A है और D, B का भी पुत्र है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि B, D की माता है।
- इससे यह साबित होता है कि A और B पति-पत्नी हैं (A पति है और B पत्नी है)।
- "E, A का भाई है"
- E पुरुष है।
निष्कर्ष (B का E से संबंध):
- B, A की पत्नी है।
- E, A का भाई है।
- इसलिए, B, E के भाई की पत्नी है।
- भाई की पत्नी रिश्ते में भाभी (Sister-in-law) लगती है।
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Q9. एक निश्चित कूट भाषा में "sun shines brightly" को "ba lo sul", "houses are brightly lit" को "kado ula ari ba" और "light comes from sun" को "dopi kup lo nro" लिखा जाता है। "sun" और "brightly" के लिए क्रमशः किन कूट शब्दों को लिखा गया है ?
Right Answer: lo, ba
Explanation:
आइए दिए गए कथनों को देखते हैं:
- sun shines brightly = ba lo sul
- houses are brightly lit = kado ula ari ba
- light comes from sun = dopi kup lo nro
चरण 1: "brightly" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (2) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "brightly" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "ba" समान है। इसलिए, brightly = ba
चरण 2: "sun" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (3) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "sun" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "lo" समान है। इसलिए, sun = lo
निष्कर्ष: प्रश्न में क्रमशः "sun" और "brightly" के लिए कूट शब्द पूछे गए हैं (यानी पहले sun और फिर brightly)।
- sun = lo
- brightly = ba
अतः सही युग्म lo, ba है।
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Q10. यदि 10 दिसम्बर, 2022 को शनिवार था, तो 8 दिसम्बर, 2024 को कौन-सा दिन होगा ?
Right Answer: रविवार
Explanation:
चरण 1: 10 दिसम्बर 2023 का दिन ज्ञात करें
- एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 1 विषम दिन (odd day)।
- 10 दिसम्बर 2022 से 10 दिसम्बर 2023 तक जाने पर 1 विषम दिन जुड़ता है।
- शनिवार + 1 दिन = रविवार। (यानी 10 दिसम्बर 2023 को रविवार था)।
चरण 2: 10 दिसम्बर 2024 का दिन ज्ञात करें
- 2024 एक लीप वर्ष (Leap year) है क्योंकि यह 4 से पूर्णतः विभाजित होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें फरवरी 29 दिन की होगी।
- एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 2 विषम दिन।
- 10 दिसम्बर 2023 से 10 दिसम्बर 2024 तक जाने पर 2 विषम दिन जुड़ते हैं।
- रविवार + 2 दिन = मंगलवार। (यानी 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार होगा)।
चरण 3: 8 दिसम्बर 2024 का दिन निकालें
- हमें पता है कि 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार है।
- 8 दिसम्बर, 10 दिसम्बर से ठीक 2 दिन पहले आता है।
- मंगलवार - 2 दिन = रविवार।
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Mathematics (10 Questions)
Haryana GK Questions (10 Questions)
Q1. हरियाणा लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?
Right Answer: दरबारी लाल गुप्ता
Explanation:
1 नवंबर 1966 को जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) का भी गठन किया गया था। इस नवनिर्मित आयोग के प्रथम अध्यक्ष (First Chairman) श्री दरबारी लाल गुप्ता थे।
उन्होंने 1 नवंबर 1966 से अपना कार्यभार संभाला था। वर्तमान में HPSC हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में ए और बी (A & B) ग्रुप के राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों की भर्ती के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वन्य जीव अभयारण्य शिवालिक पहाड़ियों में अवस्थित है ?
Right Answer: खोल ही-रायतान अभयारण्य
Explanation:
- खोल ही-रायतान अभयारण्य (Khol Hi-Raitan Sanctuary): यह हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित है, जो भौगोलिक दृष्टि से शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik Hills) की तलहटी और पहाड़ी क्षेत्र में आता है। यह अभयारण्य चीते (Leopard), सियार (Jackal), और विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
अन्य विकल्पों की स्थिति इस प्रकार है:
- खापरवास और भिण्डावास अभयारण्य (Khaparwas & Bhindawas Sanctuary): ये दोनों वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित हैं, जो मैदानी इलाका और आर्द्रभूमि (Wetlands) क्षेत्र है।
- नाहर अभयारण्य (Nahar Sanctuary): यह हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित है। यह क्षेत्र दक्षिणी हरियाणा में आता है, जहाँ अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) का विस्तार है, न कि शिवालिक का।
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Q3. निम्नलिखित में से किसने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में मुख्य सचिव के रूप में काम नहीं किया ?
Right Answer: एस० सी० चौधरी
Explanation:
मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। दिए गए विकल्पों में से अधिकारियों के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के रूप में कार्यकाल इस प्रकार हैं:
- एस० सी० चौधरी (S. C. Chaudhary): इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2013 से 31 जुलाई 2014 तक था। यह भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार का समय था। अतः इन्होंने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में काम नहीं किया।
- शकुन्तला जाखू (Shakuntala Jakhu): इनका कार्यकाल 31 जुलाई 2014 से 30 नवंबर 2014 तक था। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने (26 अक्टूबर 2014) के बाद शुरुआती कुछ समय तक इन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं।
- पी० के० गुप्ता (P. K. Gupta): इन्हें मनोहर लाल खट्टर की सरकार द्वारा ही 30 नवंबर 2014 को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था और इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2014 तक रहा।
- विजयवर्धन (Vijay Vardhan): इन्होंने 1 अक्टूबर 2020 से 30 नवंबर 2021 तक मुख्य सचिव के रूप में काम किया, जो पूरी तरह से मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल के अंतर्गत आता है।
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Q4. सर छोटूराम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
Right Answer: कथन (A), (B) तथा (C) सही हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: सर छोटूराम (दीनबंधु सर छोटूराम) ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। 1916 में वे रोहतक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (विशेषकर शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार) से असहमत होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
- कथन (B) सत्य है: कांग्रेस छोड़ने के बाद, उन्होंने 1923 में सर फज्ल-ए-हुसैन के साथ मिलकर किसानों और जमींदारों के हितों की रक्षा के लिए 'यूनियनिस्ट पार्टी' (Unionist Party) की स्थापना की।
- कथन (C) सत्य है: वे अविभाजित पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे। 1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद जब पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी, तो उन्होंने राजस्व मंत्री (Revenue Minister) के रूप में कार्य किया और किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून (जैसे 'साहूकार पंजीकरण अधिनियम') पारित करवाए।
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Q5. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कहाँ स्थापित किया जा रहा है ?
Right Answer: किलोहड़
Explanation:
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), सोनीपत (हरियाणा) की स्थापना सोनीपत जिले के किलोहड़ (Kilohrad) गाँव में की जा रही है। यह संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है ?
Right Answer: रेवाड़ी
Explanation:
प्रशासनिक सुविधा के लिए हरियाणा को 6 मण्डलों (Divisions) में बांटा गया है। रोहतक मण्डल राज्य का सबसे बड़ा मण्डल है, जिसमें कुल 5 जिले शामिल हैं:
- रोहतक (Rohtak)
- झज्जर (Jhajjar)
- सोनीपत (Sonipat)
- भिवानी (Bhiwani)
- चरखी दादरी (Charkhi Dadri)
रेवाड़ी (Rewari) जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है; यह गुरुग्राम (Gurugram) संभाग के अंतर्गत आता है (गुरुग्राम संभाग में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले शामिल हैं)।
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Q7. 37वें सूरजकुण्ड अन्तर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का थीम राज्य कौन-सा था ?
Right Answer: गुजरात
Explanation:
37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले (37th Surajkund International Crafts Fair) का आयोजन 2 फरवरी से 18 फरवरी 2024 तक हरियाणा के फरीदाबाद में किया गया था। इस संस्करण के लिए:
- थीम राज्य (Theme State): गुजरात था। (इस मेले में गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, कला और व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था।)
- भागीदार राष्ट्र (Partner Nation): तंजानिया (Tanzania) था।
सूरजकुंड मेले का आयोजन हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के सहयोग से किया जाता है।
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Q8. हरियाणा की महिला पहलवान जिसने 2023 का अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया
Right Answer: अंतिम पंघाल
Explanation:
हरियाणा के हिसार जिले (भगाना गांव) की महिला पहलवान अंतिम पंघाल (Antim Panghal) को कुश्ती में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2023 का अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) प्रदान किया गया था। वे अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (U-20 World Wrestling Championship) में लगातार दो बार (2022 और 2023) स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं।
- अंशु मलिक (Anshu Malik): इन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- गीतिका जाखड़ (Geetika Jakhar): इन्हें 2006 में अर्जुन पुरस्कार मिला था।
- साक्षी मलिक (Sakshi Malik): रियो ओलंपिक 2016 की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को 2016 में ही मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया गया था।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Right Answer: (A) तथा (B)
Explanation:
(A) गुजरी महल - हिसार (Gujari Mahal - Hisar): यह सही सुमेलित है। गुजरी महल हरियाणा के हिसार शहर में स्थित है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने अपनी प्रेमिका 'गुजरी' रानी के लिए करवाया था।
(B) आराम-ए-कौसर - नारनौल (Aram-e-Kausar - Narnaul): यह सही सुमेलित है। आराम-ए-कौसर (Aram-i-Kausar) हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में स्थित एक ऐतिहासिक मुग़लकालीन स्मारक और बाग है। यह मुग़ल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल में नारनौल के सूबेदार शाह कुली खान ने बनवाया था।
(C) शेख तैय्यब का मकबरा - जींद (Tomb of Sheikh Tayyab - Jind): यह गलत सुमेलित है। शेख तैय्यब का मकबरा जींद में नहीं, बल्कि हरियाणा के कैथल (Kaithal) में स्थित है। शेख तैय्यब (लाला मैदनी मल) 16वीं शताब्दी के एक सूफ़ी संत थे और अकबर के दरबार में सलाहकार भी रहे थे।
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Q10. पेहोवा अभिलेख के बारे में निम्नलिखित कथनों को पढ़िए
Right Answer: दोनों कथन सत्य हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: पेहोवा अभिलेख (Pehowa Inscription) 9वीं शताब्दी का है और यह गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के महान शासक मिहिर भोज (Mihir Bhoja) के शासनकाल से संबंधित है।
- कथन (B) सत्य है: इस अभिलेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्राचीन काल में पेहोवा (जिसे उस समय पृथूदक या Prithudaka कहा जाता था) घोड़ों के व्यापार का एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र था। इसमें विभिन्न स्थानों से आए घोड़ों के व्यापारियों (horse dealers) का जिक्र है, जो एक मेले में इकट्ठा हुए थे और उन्होंने अपनी बिक्री का कुछ हिस्सा मंदिर के रखरखाव के लिए दान करने का संकल्प लिया था।
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- SSC CGL 12th September 2025 Shift-1 Solved Exam Paper
- SSC CGL 12th September 2025 Shift-2 Solved Exam Paper
- SSC CGL 12th September 2025 Shift-3 Solved Exam Paper
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Haryana
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