HTET Commerce PGT 2024 Solved Exam Paper
HTET Commerce PGT 2024 Solved Exam Paper: 150 Questions with Answers
HTET Commerce PGT 2024 Solved Exam Paper: Exam Pattern and Preparation Notes

HTET is conducted by the Board of School Education Haryana (BSEH), Bhiwani, and PGT Commerce falls under HTET Level 3, for candidates teaching Classes IX to XII. Like every HTET level, this paper has 150 multiple-choice questions worth 150 marks, completed in 150 minutes, with no negative marking. Check the official BSEH website for the current year's notification before you register.
The PGT Commerce paper mixes Child Development and Pedagogy questions with the subject-specific portion, which usually spans accountancy, business studies, economics-adjacent commerce topics, and commerce teaching methodology. Since there's no negative marking, attempt every question rather than leaving doubtful ones blank; a guess costs nothing while a blank answer guarantees zero.
Commerce PGT candidates often lose marks on accountancy numericals and journal-entry questions rather than theory questions, because a single sign error changes the whole answer. Work through each numerical on rough paper before marking your final choice, and double-check debit and credit sides separately rather than trusting your first instinct.
If you're also preparing for other Commerce teaching posts such as KVS PGT Commerce or DSSSB PGT Commerce, the core subject portion overlaps heavily with HTET, so this solved paper doubles as preparation for those exams too. Compare this paper's difficulty with our HTET Economics PGT 2024 Solved Exam Paper if you're preparing for more than one PGT commerce-stream subject, since the pedagogy section is identical across all HTET PGT papers.
Most first-time HTET PGT Commerce candidates underestimate how much of the paper is pedagogy and general awareness rather than pure Commerce content. Roughly a third of the 150 questions typically fall outside the core subject portion, covering child development, teaching methods, and general knowledge about Haryana and education policy. If you've spent all your revision time on accountancy and none on pedagogy, you're likely to lose more marks there than you expect.
Solve this 2024 paper under real exam conditions: set a 150-minute timer, attempt every question in one sitting, and check the answer key only once you've finished. Note down which topics cost you the most marks, whether it's accountancy numericals, business studies theory, or pedagogy, and revise those specifically before your next attempt.
HTET Commerce PGT 2024 (Level-3) का हल सहित प्रश्न पत्र। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी द्वारा आयोजित हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के वाणिज्य विषय (भाग-IV) के सभी प्रश्न, चारों विकल्प, सही उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या के साथ।
Your Progress
0%Psychology (30 Questions)
Q1. मैक्डूगल के अनुसार, 'घृणा' का संवेग किस मूल प्रवृत्ति के साथ जुड़ा हुआ है ?
Right Answer: निवृत्ति
Explanation:
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने मनोविज्ञान में 'मूल प्रवृत्तियों का सिद्धान्त' (Theory of Instincts) प्रतिपादित किया था। उनका मानना था कि मनुष्य के हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई मूल प्रवृत्ति होती है।
मैकडूगल ने कुल 14 मूल प्रवृत्तियाँ (Instincts) बताई हैं और स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के जाग्रत होने पर एक विशेष संवेग (Emotion) उत्पन्न होता है।
दिए गए विकल्पों के आधार पर मूल प्रवृत्ति और उनसे जुड़े संवेगों का सही मिलान इस प्रकार है:
(1) निवृत्ति (Repulsion) ➔ घृणा (Disgust) : जब इंसान के सामने कोई सड़ी-गली, खराब या अप्रिय वस्तु/स्थिति आती है, तो वह उससे दूर हटना (निवृत्ति) चाहता है। इस मूल प्रवृत्ति के कारण हमारे अंदर 'घृणा' का संवेग पैदा होता है। (यही इस प्रश्न का सही उत्तर है)।
(2) पलायन (Escape) ➔ भय (Fear) : जब किसी खतरनाक स्थिति का सामना होता है, तो इंसान के अंदर 'भय' या डर का संवेग उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप वह वहाँ से भागने (पलायन) की मूल प्रवृत्ति दर्शाता है।
(3) युयुत्सा (Combat) ➔ क्रोध (Anger) : युयुत्सा का अर्थ है युद्ध करने या लड़ने की इच्छा। यह मूल प्रवृत्ति तब जाग्रत होती है जब व्यक्ति के भीतर 'क्रोध' (गुस्सा) का संवेग हावी होता है।
(4) जिज्ञासा (Curiosity) ➔ आश्चर्य (Wonder) : जब हम कोई नई, अनोखी या रहस्यमयी चीज़ देखते हैं तो हमें 'आश्चर्य' का संवेग महसूस होता है, जो हमारे अंदर उस चीज़ के बारे में और अधिक जानने की 'जिज्ञासा' (मूल प्रवृत्ति) पैदा करता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q2. सीखने की परिस्थिति में सुसंगत तथ्यों को असुसंगत तथ्यों से अलग करके प्रस्तुत करना, सीखने के किस नियम का परिचायक है ?
Right Answer: तत्त्व प्रबलता का नियम
Explanation:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक ई. एल. थार्नडाइक (E. L. Thorndike) के सीखने के नियमों (Laws of Learning) से संबंधित है। थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य (Primary) नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए थे। यह प्रश्न उनके गौण नियमों पर आधारित है।
(3) तत्त्व प्रबलता का नियम (Principle of prepotency of elements): इसे 'आंशिक क्रिया का नियम' (Law of Partial Activity) भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति या अधिगमकर्ता किसी नई परिस्थिति या समस्या का सामना करता है, तो वह पूरी स्थिति पर आँख मूंदकर प्रतिक्रिया करने के बजाय, उसके सबसे महत्वपूर्ण या सुसंगत (Relevant) तत्वों को पहचानता है और अनावश्यक या असुसंगत (Irrelevant) तत्वों को छोड़ देता है। सुसंगत तथ्यों को अलग करके प्रस्तुत करना इसी नियम का हिस्सा है, ताकि बच्चा केवल काम की बातों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q3. समावेशी शिक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सी निःशक्त बच्चों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मुख्य उद्देश्य सामान्य बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले (निःशक्त/दिव्यांग) बच्चों को एक ही छत के नीचे, एक साथ शिक्षा प्रदान करना है। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य निःशक्त बच्चों को आत्मनिर्भर (Independent) और सशक्त बनाना है, न कि उन्हें दूसरों पर आश्रित (Dependent) रखना।
आइए अन्य विकल्पों को समझें कि वे निःशक्त बच्चों की आवश्यकताएं क्यों हैं:
(1) स्वयं की निःशक्तता से निपटने की आवश्यकता: समावेशी शिक्षा में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि वे अपनी शारीरिक या मानसिक कमियों (निःशक्तता) को स्वीकार करें और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करें। यह उनकी एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है।
(2) उचित निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता: निःशक्त बच्चों को सही शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) की बहुत आवश्यकता होती है, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों और सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
(3) दूसरों पर निर्भर रहने की आवश्यकता (सही उत्तर): शिक्षा का उद्देश्य ही इंसान को स्वावलंबी (Self-reliant) बनाना है। किसी भी दृष्टि से बच्चों को यह नहीं सिखाया जाना चाहिए कि वे अपने जीवन के लिए दूसरों पर निर्भर रहें। इसलिए, यह समावेशी शिक्षा की दृष्टि से कोई आवश्यकता नहीं है।
(4) सहायक उपकरणों की आवश्यकता: दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि या ऑडियो बुक्स, श्रवणबाधित बच्चों के लिए हियरिंग एड (Hearing aid), और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए व्हीलचेयर जैसे सहायक उपकरण (Assistive equipments) उनकी बुनियादी जरूरत हैं। ये उपकरण उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q4. बण्डूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धान्त के सोपानों को क्रम से व्यवस्थित कीजिए :
Right Answer: (a), (c), (d), (b)
Explanation:
अल्बर्ट बण्डूरा (Albert Bandura) ने सामाजिक अधिगम का सिद्धान्त (Social Learning Theory) प्रतिपादित किया था, जिसे 'अवलोकनात्मक अधिगम' (Observational Learning) या 'मॉडलिंग' (Modeling) भी कहा जाता है।
बण्डूरा के अनुसार, बच्चे या व्यक्ति दूसरों (मॉडल) के व्यवहार को देखकर सीखते हैं। किसी भी नए व्यवहार को देखकर सीखने की इस प्रक्रिया को बण्डूरा ने चार मुख्य सोपानों (चरणों) में बाँटा है, जिनका सही क्रम इस प्रकार है:
1. अवधान या प्रत्यक्षीकरण (Attention / Perception of behaviour) - (a) सीखने की शुरुआत तब होती है जब व्यक्ति किसी मॉडल (जैसे- शिक्षक, माता-पिता, या टीवी का कोई पात्र) के व्यवहार को पूरे ध्यान से देखता है और उसे समझता (प्रत्यक्षीकरण) है। बिना ध्यान दिए कोई भी व्यवहार सीखा नहीं जा सकता।
2. धारण या स्मरण (Retention / Remember of behaviour) - (c) मॉडल के व्यवहार को ध्यान से देखने के बाद, व्यक्ति उस व्यवहार को अपने मस्तिष्क में स्मृति (Memory) के रूप में सुरक्षित कर लेता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसे याद किया जा सके।
3. पुनरुत्पादन या क्रियात्मक परिणति (Reproduction / Convert the memory into action) - (d) इस चरण में व्यक्ति अपने मस्तिष्क में याद की गई बातों (स्मरण) को वास्तविक शारीरिक क्रिया या व्यवहार में बदलने का प्रयास करता है। यानी वह वैसा ही करने की कोशिश करता है जैसा उसने मॉडल को करते हुए देखा था।
4. अभिप्रेरणा या पुनर्बलन (Motivation / Reinforcement of behaviour) - (b) अंतिम चरण में यह तय होता है कि व्यक्ति उस सीखे गए व्यवहार को भविष्य में दोहराएगा या नहीं। यदि मॉडल के समान व्यवहार करने पर व्यक्ति को समाज से तारीफ, पुरस्कार या सकारात्मक 'पुनर्बलन' मिलता है, तो वह उस व्यवहार को अपना लेता है। यदि उसे डांट या सजा मिलती है, तो वह उस व्यवहार को छोड़ देता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q5. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?
Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत
Explanation:
प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।
इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
- अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q6. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :
Right Answer: संतुलनीकरण
Explanation:
जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।
इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:
- आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
- उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
- समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
- उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
- संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q7. सर्जनशील बच्चों की पहचान हेतु शिक्षक द्वारा कौन-से परीक्षण प्रशासित किए जा सकते हैं ?
Right Answer: (a), (b) एवं (d)
Explanation:
सर्जनशील (Creative) बच्चों की पहचान करने के लिए अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और नवीनता का मापन किया जाता है। दिए गए परीक्षणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(a) आकृति निर्माण परीक्षण (Figure construction test): यह परीक्षण सृजनात्मकता को मापता है। इसमें बच्चे को कुछ बुनियादी आकार (जैसे गोला, त्रिभुज) दिए जाते हैं और उनसे कोई नई और मौलिक आकृति बनाने को कहा जाता है।
(b) उत्पाद उन्नयन परीक्षण (Product improvement test): यह भी सृजनात्मकता का एक प्रमुख परीक्षण है। इसमें बच्चे को कोई साधारण वस्तु या खिलौना दिया जाता है और पूछा जाता है कि इसे और अधिक मजेदार या उपयोगी बनाने के लिए इसमें क्या बदलाव किए जा सकते हैं।
(c) प्रचलित उपयोग परीक्षण (Usual uses test): यह विकल्प गलत है। सृजनात्मकता मापने के लिए 'अप्रचलित या नवीन उपयोग परीक्षण' (Unusual uses test) का प्रयोग किया जाता है (जैसे- ईंट के नए-नए उपयोग बताना)। 'प्रचलित' (Usual) उपयोग बताना सामान्य बुद्धि या स्मृति का हिस्सा है, सृजनात्मकता का नहीं।
(d) चित्र पूर्ति परीक्षण (Picture completion test): यह सृजनात्मकता का एक महत्वपूर्ण अशाब्दिक परीक्षण है। इसमें अधूरी रेखाओं या चित्रों को पूरा करके एक अर्थपूर्ण और मौलिक चित्र बनाने के लिए कहा जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q8. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या
लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:
- (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
- (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
- (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
- (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q9. निम्नलिखित में से कौन-सी समावेशी शिक्षा की एक विशेषता नहीं है ?
Right Answer: यह अशक्त बच्चों की विशिष्ट शिक्षा तक सीमित रहती है
Explanation:
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल मंत्र 'सभी के लिए शिक्षा' है। यह केवल अशक्त (विकलांग/दिव्यांग) बच्चों तक सीमित नहीं है। समावेशी शिक्षा का अर्थ है—सामान्य बच्चों, अशक्त बच्चों, प्रतिभाशाली बच्चों और समाज के हर वर्ग (विभिन्न भाषा, जाति, धर्म) के बच्चों को एक ही नियमित कक्षा में एक साथ बैठाकर पढ़ाना।
केवल अशक्त बच्चों को अलग से पढ़ाना "विशिष्ट शिक्षा" (Special Education) कहलाता है, जो समावेशी शिक्षा के बिल्कुल विपरीत अवधारणा है। इसलिए यह कथन समावेशी शिक्षा की विशेषता नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q10. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?
Right Answer: परिपक्वता
Explanation:
परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q11. निम्नलिखित में से कौन-सी सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: केवल शैक्षिक उपलब्धि को मापना
Explanation:
सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation) में "व्यापक" (Comprehensive) शब्द का स्पष्ट अर्थ छात्र के सर्वांगीण विकास (all-round development) का आकलन करना है। इस रूपरेखा के अनुसार मूल्यांकन में शैक्षिक (Scholastic - जैसे गणित, विज्ञान और भाषाएं) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic - जैसे जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल और कला) दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाना अनिवार्य है। केवल अकादमिक प्रदर्शन या शैक्षिक उपलब्धि को मापना CCE प्रणाली के "व्यापक" लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q12. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रगतिशील शिक्षा का एक घटक नहीं है ?
Right Answer: स्मरण
Explanation:
जॉन डीवी (John Dewey) जैसे शिक्षाविदों द्वारा समर्थित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) रटने (rote learning) और तथ्यों को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने का कड़ा विरोध करती है। स्मरण का मुख्य ध्यान किसी भी जानकारी के व्यावहारिक उपयोग को समझे बिना उसे केवल दोहराने और याद करने पर होता है। यह प्रगतिशील शिक्षा के मूल दर्शन के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली पाठ्यपुस्तक की सामग्री को रटने के बजाय आलोचनात्मक सोच (critical thinking), समस्या-समाधान (problem-solving) और गहरी वैचारिक समझ (conceptual understanding) को प्राथमिकता देती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q13. श्रवण बाधित बच्चों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुदेशन का तरीका उपयुक्त है?
Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)
Explanation:
व्याख्या: ये सभी तकनीकें क्यों उपयुक्त हैं?
- (a) सांकेतिक भाषा (Sign Language): यह श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचार का सबसे प्राथमिक और प्राकृतिक माध्यम है। इसमें हाथों के संकेतों, चेहरे के हाव-भाव और शरीर की भाषा का उपयोग करके विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
- (b) अंगुली वर्तनी (Finger Spelling): इसमें हाथों की उंगलियों के आकार का उपयोग करके वर्णमाला के अक्षरों को दर्शाया जाता है। यह उन शब्दों (जैसे नाम, विशिष्ट तकनीकी शब्द) के लिए बहुत उपयोगी है जिनका कोई विशिष्ट सांकेतिक चिन्ह नहीं होता।
- (c) ओष्ठ पठन (Lip Reading): इसमें बच्चा वक्ता के होंठों की हलचल को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि क्या कहा जा रहा है। यह बच्चों को समाज में संवाद करने में बहुत मदद करता है।
- (d) संकेतित भाषण (Cued Speech): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें भाषण (speech) को स्पष्ट करने के लिए हाथों के संकेतों (cues) का उपयोग किया जाता है। यह होंठों के आकार (lip shapes) और हाथों के संकेतों को मिलाता है, ताकि बच्चा ध्वनियों के बीच अंतर कर सके जो दिखने में एक जैसे लगते हैं (जैसे 'p' और 'b')।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q14. 'लेखन क्षमता का एक विकार जिसमें अधिगमकर्ता को अक्षर निर्माण, वर्तनी, गत्यात्मक समन्वय आदि में कठिनाई होती है' यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिस्ग्राफिया
Explanation:
डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है जो मुख्य रूप से लेखन (writing) से संबंधित होती है।
जैसा कि आपने उल्लेख किया, इस विकार से ग्रसित अधिगमकर्ता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- अक्षर निर्माण (Letter Formation): अक्षरों को सही आकार या बनावट में लिखने में कठिनाई।
- वर्तनी (Spelling): शब्दों की वर्तनी में गलतियाँ करना।
- गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination): हाथ और उंगलियों के सूक्ष्म समन्वय में कमी, जिससे कलम पकड़ने और लिखने में समस्या होती है।
- लेखन की गति: लिखने की गति का बहुत धीमा होना या लिखने के दौरान हाथ में जल्दी थकान महसूस होना।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:
- डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह पढ़ने से संबंधित विकार है। इसमें बच्चे को अक्षरों को पहचानने, शब्दों को पढ़ने या वाक्यों को समझने में कठिनाई होती है।
- डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia): यह शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) से संबंधित विकार है। इसमें व्यक्ति को शारीरिक संतुलन बनाने, बोलने या सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों (जैसे बटन लगाना या जूते के फीते बांधना) में कठिनाई होती है। (नोट: लेखन में कठिनाई इसका एक उप-हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्य परिभाषा लेखन विकार के लिए 'डिस्ग्राफिया' ही है।)
- डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia): यह गणित से संबंधित विकार है। इसमें संख्याओं को समझने, गणना (calculation) करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q15. निम्नलिखित में से कौन-सी सीखने की बाल केन्द्रित विधि नहीं है ?
Right Answer: प्रदर्शन
Explanation:
शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षण विधियों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और बाल-केंद्रित (Child-centered)।
प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह मुख्य रूप से शिक्षक-केंद्रित होती है। इसमें शिक्षक स्वयं किसी प्रक्रिया, प्रयोग या उपकरण का प्रदर्शन (Demonstrate) करता है, जबकि छात्र उसे ध्यानपूर्वक देखते हैं। यहाँ सीखने की प्रक्रिया में छात्र की भूमिका मुख्य रूप से एक 'दर्शक' (Observer) की होती है, न कि 'सक्रिय सहभागी' (Active participant) की। इसीलिए इसे बाल-केंद्रित नहीं माना जाता।
अन्य विकल्प बाल-केंद्रित क्यों हैं?
(2) क्षेत्र भ्रमण (Field Trip): इसमें छात्र प्रत्यक्ष रूप से वातावरण में जाकर अनुभव प्राप्त करते हैं। यह पूर्णतः अनुभव-आधारित और छात्र-सक्रियता पर केंद्रित है।
(3) अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction): यह व्यक्तिगत गति (Self-pacing) पर आधारित विधि है। इसमें छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री को छोटे-छोटे चरणों में पढ़कर और अभ्यास करके सीखता है। शिक्षक की भूमिका यहाँ केवल एक मार्गदर्शक की होती है।
(4) प्रायोजना (Project Method): यह विधि 'करके सीखने' (Learning by doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें छात्र अपनी रुचि और समस्या समाधान के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q16. उच्च माध्यमिक स्तर के अधिगमकर्ताओं के लिए सीखने की कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: अधिगम कार्य स्मृति स्तर पर करना
Explanation:
शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (Memory Level), अवबोध स्तर (Understanding Level), और चिंतन स्तर (Reflective Level)।
- स्मृति स्तर (Memory Level): यह शिक्षण का सबसे निचला स्तर है, जो केवल रटने (Rote Learning) और तथ्यों को याद रखने पर केंद्रित होता है। उच्च माध्यमिक स्तर (11वीं-12वीं कक्षा) के विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं, जहाँ उनकी बौद्धिक क्षमताएं विकसित हो चुकी होती हैं। इस स्तर पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे केवल तथ्यों को याद न करें, बल्कि उनका विश्लेषण करें और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करें। इसलिए, केवल स्मृति स्तर तक सीमित रहना उनके लिए अनुपयुक्त और अपर्याप्त है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये क्यों उपयुक्त हैं?):
(2) ज्ञान की स्वयं खोज करने देना: यह 'डिस्कवरी लर्निंग' (Discovery Learning) पर आधारित है। उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।
(3) कक्षा अन्तःक्रिया को उचित स्थान देना: जब विद्यार्थी चर्चा करते हैं और एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी होती है। यह सामाजिक अधिगम (Social Learning) को बढ़ावा देता है।
(4) शिक्षण-अधिगम विद्यार्थी केन्द्रित होना: आधुनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित (Student-centered) है। इसका अर्थ है कि शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों और उनकी सीखने की गति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल शिक्षक के व्याख्यान पर आधारित।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q17. फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त के अनुसार, वह अवस्था जिसमें किशोर विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं, उसे कहा जाता है :
Right Answer: जनन अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) में पांच अवस्थाएं हैं। किशोर अवस्था (adolescence) में होने वाले परिवर्तनों के लिए जनन अवस्था ही जिम्मेदार है:
- जनन अवस्था (Genital Stage): यह अवस्था किशोरावस्था से शुरू होती है और जीवन के अंत तक चलती है। इस चरण की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की कामेच्छा (libido) फिर से जागृत होती है, लेकिन इस बार उसका ध्यान अपने स्वयं के शरीर के बजाय विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने और यौन परिपक्वता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है। किशोरों में सामाजिक और यौन आकर्षण इसी चरण का हिस्सा है।
अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:
- लिंग अवस्था (Phallic Stage - 3 से 6 वर्ष): यहाँ बच्चा अपने लिंग के प्रति जागरूक होता है। इसमें 'ओडिपस' (Oedipus) और 'इलेक्ट्रा' (Electra) ग्रंथियाँ विकसित होती हैं।
- गुदा अवस्था (Anal Stage - 1 से 3 वर्ष): इस अवस्था में बच्चा मल-त्याग के नियंत्रण (potty training) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- अव्यक्त अवस्था (Latency Stage - 6 वर्ष से यौवनारंभ तक): यह एक शांत अवस्था है जहाँ यौन भावनाएं दब जाती हैं और बच्चा सामाजिक कौशल और स्कूल के कार्यों पर ध्यान देता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q18. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?
Right Answer: दर्द परिवर्जन
Explanation:
अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या
मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)।
दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?
दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।
अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?
अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।
- (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
- (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
- (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।
चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q19. वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धान्त के सही अनुक्रम (ऊपर से नीचे) का चयन कीजिए :
Right Answer: सामान्य कारक -> लघु कारक -> प्रमुख कारक -> विशिष्ट कारक
Explanation:
1. सामान्य कारक (General Factor - g)
- शीर्ष स्तर: पदानुक्रम के सबसे ऊपर सामान्य कारक होता है।
- इसका अर्थ: यह किसी व्यक्ति की समग्र मानसिक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है। यह एक ऐसी सामान्य बुद्धि है जिसका उपयोग व्यक्ति हर प्रकार के मानसिक या संज्ञानात्मक कार्यों (cognitive tasks) में करता है।
2. प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors)
- दूसरा स्तर: सामान्य कारक आगे चलकर दो मुख्य व्यापक श्रेणियों में विभाजित हो जाता है।
- इसका अर्थ: वर्नन ने दो प्रमुख समूह कारक बताए हैं:
- शाब्दिक-शैक्षिक (v:ed): स्कूली शिक्षा, भाषा, पढ़ने-लिखने और गणित से संबंधित क्षमताएं।
- स्थानिक-यांत्रिक (k:m): व्यावहारिक, शारीरिक और यांत्रिक (mechanical) क्षमताएं, जिनमें दिशाओं और आकृतियों की समझ (spatial awareness) शामिल है।
3. लघु समूह कारक (Minor Group Factors)
- तीसरा स्तर: प्रमुख समूह कारक आगे छोटे और अधिक विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित होते हैं।
- इसका अर्थ: उदाहरण के लिए, 'शाब्दिक-शैक्षिक' कारक आगे चलकर मौखिक प्रवाह (verbal fluency), संख्यात्मक क्षमता (numerical ability), या तार्किक सोच जैसे लघु कारकों में बंट सकता है। इसी तरह स्थानिक-यांत्रिक कारक यांत्रिक समझ या हस्त-कौशल में बंट सकता है।
4. विशिष्ट कारक (Specific Factors - s)
- निचला स्तर: पदानुक्रम के सबसे निचले आधार पर विशिष्ट कारक होते हैं।
- इसका अर्थ: ये किसी एक विशेष कार्य या परीक्षण को करने के लिए आवश्यक अत्यंत विशिष्ट क्षमताएं हैं (जैसे बीजगणित के किसी विशेष समीकरण को हल करने की क्षमता या किसी खास मशीन के पुर्जे जोड़ने की क्षमता)।
संक्षेप में, वर्नन का मानना था कि यद्यपि हम सभी में एक अंतर्निहित सामान्य बुद्धि होती है, लेकिन व्यवहार में यह पहले व्यापक कौशल (प्रमुख), फिर संकीर्ण कौशल (लघु), और अंततः विशिष्ट कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल में फ़िल्टर हो जाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q20. समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के किस संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है ?
Right Answer: शिक्षा का अधिकार
Explanation:
सही है: भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-A के तहत "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education - RTE) एक मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जाति, धर्म, लिंग या शारीरिक/मानसिक क्षमता के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। समावेशी शिक्षा इसी संवैधानिक अधिकार को धरातल पर लागू करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि दिव्यांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) मुख्यधारा के स्कूलों से बाहर न रहें।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q21. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?
Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं
Explanation:
'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।
(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।
(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।
(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q22. निम्नलिखित में से प्रश्नों का कौन-सा प्रकार विद्यार्थियों के भावों की अभिव्यक्ति एवं तार्किक चिंतन की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं है ?
Right Answer: बहु विकल्पात्मक प्रकार
Explanation:
इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार के प्रश्न भावों की अभिव्यक्ति (Expression of feelings) और तार्किक चिंतन (Logical thinking) को जाँचने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
बहु विकल्पात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs): ये प्रश्न 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं। इसमें विद्यार्थी को दिए गए विकल्पों में से केवल एक सही उत्तर चुनना होता है। यहाँ विद्यार्थी के पास अपने विचारों, भावनाओं या तर्क को विस्तार से रखने का कोई अवसर नहीं होता। यह केवल स्मृति (Memory) और पहचान (Recognition) की जाँच करता है, न कि सृजनात्मक या तार्किक चिंतन की। इसीलिए यह "उपयुक्त नहीं" है।
विश्लेषणात्मक (Analytical), समालोचनात्मक (Critical) और विवेचनात्मक (Discussion) प्रकार:
- ये प्रश्न 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
- इनमें छात्र को समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है, अपने तर्क (Logic) देने होते हैं और अपने विचारों (Feelings/Perspective) को विस्तार से लिखना होता है।
- ये तीनों प्रकार उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills - HOTS) विकसित करने के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q23. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता का कारण सामाजिक वातावरण होता है, भौतिक वातावरण नहीं।
Explanation:
(1) सही है: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ ही है कि हर व्यक्ति दूसरे से अलग है, चाहे वह बुद्धि/ज्ञान (Cognitive) के स्तर पर हो या कार्य करने की क्षमता (Psychomotor) के स्तर पर।
(2) सही है: किसी व्यक्ति की प्रजाति (Species) या आनुवंशिकता (Heredity) उसके विकास और विशेषताओं को प्रभावित करती है, जो वैयक्तिक भिन्नता का एक आधार है।
(3) गलत है: यह कथन गलत है क्योंकि यह अधूरा है। वैयक्तिक भिन्नता केवल सामाजिक वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक (भौगोलिक, प्राकृतिक, जलवायु आदि) दोनों प्रकार के वातावरण का परिणाम होती है। भौतिक वातावरण भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, विकास और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। चूँकि यह कथन "भौतिक वातावरण को नकारता है" (not the physical environment), इसलिए यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।
(4) सही है: जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसके अनुभव, सोच और क्षमताएं बदलती हैं। आयु के बढ़ने के साथ-साथ दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता और अधिक स्पष्ट हो जाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q24. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।
Explanation:
(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।
(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।
(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।
(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q25. विद्यार्थियों की समग्र उपलब्धि और प्रवीणता का मूल्यांकन करने के लिए, सीखने की अवधि के अंत में अभिकल्पित मूल्यांकन कहलाता है :
Right Answer: सीखने का मूल्यांकन
Explanation:
मूल्यांकन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है:
- सीखने का मूल्यांकन (Assessment of Learning): यह मूल्यांकन सीखने की अवधि के अंत में (जैसे सत्र के अंत में, फाइनल परीक्षा में) किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र ने निर्धारित समय में कितना और क्या सीखा है। यह आमतौर पर 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) का हिस्सा होता है। चूँकि आपका प्रश्न "अवधि के अंत" की बात कर रहा है, इसलिए सही उत्तर (1) है।
- सीखने के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): यह मूल्यांकन सीखने की प्रक्रिया के दौरान (जैसे क्लास में पढ़ाते समय सवाल पूछना) किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की कमियों को सुधारना होता है। यह 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) का हिस्सा होता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q26. बच्चों में सामाजीकरण को बढ़ावा देने में शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सहायक नहीं है ?
Right Answer: वैयक्तिक परियोजना कार्य देना
Explanation:
सामाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों, और व्यवहारों को सीखते हैं और अन्य लोगों के साथ घुलना-मिलना सीखते हैं। एक शिक्षक का उद्देश्य कक्षा में ऐसे अवसर प्रदान करना होता है जिससे बच्चे एक-दूसरे से जुड़ सकें।
(1) वैयक्तिक परियोजना कार्य देना (Individual Project Work): जब शिक्षक किसी बच्चे को 'व्यक्तिगत' या 'अकेले' करने वाला प्रोजेक्ट देता है, तो बच्चा केवल अपने आप तक सीमित रहता है। इसमें उसे अन्य बच्चों के साथ बातचीत या सहयोग करने का मौका नहीं मिलता। इसलिए, यह सामाजीकरण को बढ़ावा देने में सहायक नहीं है।
(2) सामाजिक जिम्मेदारियाँ सौंपना: (जैसे- क्लास मॉनिटर बनाना या ग्रुप लीडर बनाना) इससे बच्चों में नेतृत्व और सहयोग की भावना आती है, जो सामाजीकरण को बढ़ाता है।
(3) सह-पाठ्यगामी गतिविधियों का आयोजन करना: (जैसे- खेलकूद, नाटक, या सांस्कृतिक कार्यक्रम) इनमें बच्चे समूह में काम करते हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास होता है।
(4) सामाजिक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करना: बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना सामाजीकरण का प्रत्यक्ष तरीका है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q27. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: थायमस ग्रंथि
Explanation:
मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q28. निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?
Right Answer: (a), (c) एवं (d)
Explanation:
इस प्रश्न को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी "लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ" (Gender Biased Practices) शैक्षिक अभ्यासों (Classroom Practices) में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए।
यहाँ प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण दिया गया है:
- (a) सजातीय समूहन (Homogeneous Grouping): लिंग के आधार पर लड़के और लड़कियों के अलग-अलग समूह बनाना (जैसे- लड़कों का अलग ग्रुप, लड़कियों का अलग ग्रुप)। यह एक पक्षपातपूर्ण क्रिया है, जो बच्चों में दूरियां बढ़ाती है। इसे कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु (Gender-Neutral Content): ऐसी पाठ्यपुस्तकें या सामग्री जिसमें लड़के और लड़कियों को समान रूप से प्रस्तुत किया गया हो (जैसे- पाठ में महिला को डॉक्टर और पुरुष को खाना बनाते हुए दिखाना)। यह एक सकारात्मक और अच्छी क्रिया है। इसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए (यह पक्षपातपूर्ण नहीं है)।
- (c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन (Stereotypical Vocational Guidance): बच्चों को उनके लिंग के आधार पर करियर की सलाह देना (जैसे- लड़कियों को कहना कि तुम गृह विज्ञान या नर्सिंग चुनो, और लड़कों को इंजीनियरिंग या सेना में जाने को कहना)। यह पूरी तरह से लैंगिक पक्षपात है, इसे शिक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
- (d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति (Biased Attitude of Teacher): शिक्षक का यह सोचना कि "लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में।" यह पूर्वाग्रह बच्चों के विकास को रोकता है, इसलिए इसे भी कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q29. निम्नलिखित में से कौन आनुवंशिकता से प्रभावित नहीं होता ?
Right Answer: अभिवृत्ति
Explanation:
यहाँ सभी विकल्पों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति आनुवंशिकता (Heredity) से प्रभावित क्यों नहीं होती:
- (1) अभिक्षमता (Aptitude): अभिक्षमता का अर्थ है किसी विशिष्ट कार्य या क्षेत्र (जैसे- संगीत, गणित, या कला) में कौशल सीखने की जन्मजात क्षमता या योग्यता। यह काफी हद तक आनुवंशिकता और जैविक कारकों से प्रभावित होती है।
- (2) अभिवृत्ति (Attitude): अभिवृत्ति (या दृष्टिकोण) किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक सोचने और महसूस करने का एक तरीका है। यह पूरी तरह से अर्जित (Learned) होती है। बच्चा अपने परिवार, समाज, संस्कृति और अनुभवों (वातावरण) से सीखता है कि उसे किस चीज़ के प्रति कैसा नज़रिया रखना है। इसका आनुवंशिकता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
- (3) संवेग (Emotion): संवेगात्मक प्रवृत्तियाँ (जैसे- जल्दी क्रोधित होना, शांत रहना, या डरना) व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) से जुड़ी होती हैं। मूल स्वभाव का एक बड़ा हिस्सा आनुवंशिक बनावट और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर निर्भर करता है।
- (4) अभिरुचि (Interest): यद्यपि अभिरुचि वातावरण से बहुत अधिक प्रभावित होती है, लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध) में पाया गया है कि कुछ चीज़ों में रुचि रखने का झुकाव (जैसे- अंतर्मुखी या बहिर्मुखी गतिविधियाँ) व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना से भी थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q30. सही कूट का चयन कीजिए :
Right Answer: (a) एवं (c)
Explanation:
- कथन (a) "बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं" – यह कथन सत्य नहीं है। बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और वातावरण (Environment) दोनों की परस्पर क्रिया (Interaction) महत्वपूर्ण होती है। केवल एक को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। अच्छा वातावरण मिलने पर बुद्धि का बेहतर विकास होता है।
- कथन (b) "लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। महिला या पुरुष होने से किसी की बुद्धि कम या ज़्यादा नहीं होती। आधुनिक मनोविज्ञान यह स्पष्ट मानता है कि लिंग के आधार पर बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता।
- कथन (c) "तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है" – यह कथन पूरी तरह सत्य नहीं माना जाता। स्मरणशक्ति (Memory) और बुद्धि (Intelligence) दो अलग-अलग मानसिक क्षमताएं हैं। कोई व्यक्ति चीज़ों को बहुत जल्दी रट या याद रख सकता है (तीव्र स्मरणशक्ति), लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी तार्किक या समस्या-समाधान की क्षमता (बुद्धि) भी उतनी ही तीव्र हो। इसलिए तीव्र बुद्धि को केवल तीव्र स्मरणशक्ति का परिचायक नहीं माना जा सकता।
- कथन (d) "बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे स्टर्न) के अनुसार, बुद्धि की परिभाषा ही यही है कि व्यक्ति नई परिस्थितियों और वातावरण में खुद को कितनी कुशलता से ढाल या समायोजित (Adjust) कर पाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Hindi Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q1. विलोम की दृष्टि से असंगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: आकृष्ट - विकृष्ट
Explanation:
व्याख्या:
- आकृष्ट (सही विकल्प): 'आकृष्ट' का विलोम 'विकृष्ट' नहीं, बल्कि 'अनाकृष्ट' या 'विकर्षित' होता है। (आकृष्ट का अर्थ है 'खींचा हुआ' या 'आकर्षित', जबकि विकृष्ट का अर्थ होता है 'खींचा हुआ' ही; अतः ये विलोम नहीं हैं।)
अन्य विकल्प क्यों संगत हैं:
- (2) आह्वान - अनाह्वान: यह सही है (आह्वान का अर्थ बुलाना और अनाह्वान का अर्थ न बुलाना)।
- (3) कलंकित - निष्कलंक: यह सही है (कलंकित का अर्थ दाग लगा हुआ और निष्कलंक का अर्थ दाग रहित)।
- (4) ऐहिक - पारलौकिक: यह सही है (ऐहिक का अर्थ इस लोक से संबंधित और पारलौकिक का अर्थ परलोक से संबंधित)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q2. वर्णों की ध्वनिगत विशेषताओं के संदर्भ में असंगत चुनिए :
Right Answer: ऋ - अग्र, संवृत, वृत्तमुखी
Explanation:
व्याख्या: स्वरों का वर्गीकरण ओठों की स्थिति (होठों के आकार) के आधार पर दो प्रकार से होता है:
- वृत्तमुखी (Rounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल हो जाते हैं (उ, ऊ, ओ, औ)।
- अवृत्तमुखी (Unrounded): जिनके उच्चारण में होंठ गोल नहीं होते (अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ)।
विकल्प (2) में 'ऋ' को वृत्तमुखी बताया गया है, जो कि गलत है। 'ऋ' का उच्चारण करते समय होंठ गोल नहीं होते, इसलिए यह अवृत्तमुखी स्वर है (साथ ही यह अग्र और संवृत है)।
अन्य विकल्प सही क्यों हैं:
- (1) उ - पश्च, संवृत, वृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च (पिछले) भाग से बोला जाता है, उच्चारण में मुख लगभग बंद (संवृत) रहता है और होंठ गोल (वृत्तमुखी) होते हैं।
- (3) अ - मध्य, ह्रस्व, उदासीन: यह जिह्वा के मध्य भाग से बोला जाता है, एकमात्रिक (ह्रस्व) है और इसे 'उदासीन स्वर' भी कहा जाता है।
- (4) आ - पश्च, विवृत, अवृत्तमुखी: जिह्वा के पश्च भाग से बोला जाता है, मुख पूरा खुलता है (विवृत) और होंठ गोल नहीं होते (अवृत्तमुखी)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q3. हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :
Right Answer: शिक्षा तथा उपाधियाँ
Explanation:
व्याख्या: एक सफल और श्रेष्ठ हिंदी अध्यापक की 'विशिष्ट विशेषताओं' (Qualities/Characteristics) में उसके आंतरिक गुण, ज्ञान और कौशल आते हैं।
- (1) साहित्य का ज्ञान, (2) भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान और (3) हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों एक हिंदी शिक्षक की व्यावहारिक और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो उसे कक्षा में प्रभावी रूप से पढ़ाने के योग्य बनाती हैं।
- (4) शिक्षा तथा उपाधियाँ (Degrees and Qualifications): ये शिक्षक बनने के लिए आवश्यक 'अनिवार्य योग्यताएँ' (Eligibility criteria) तो हैं, लेकिन ये उसकी "विशिष्ट विशेषताएँ" या शिक्षण कौशल नहीं हैं। मात्र डिग्री होने से कोई व्यक्ति एक अच्छा शिक्षक नहीं बन जाता; एक अच्छे शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान और पढ़ाने की शैली (methods) से होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q4. निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द समूह का चयन कीजिए :
Right Answer: सीधा साधा, अठोतर, उहापोह
Explanation:
व्याख्या:
- सीधा साधा: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'सीधा-सादा' होता है।
- अठोतर: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'अठोत्तर' (अठ् + उत्तर = आठ अधिक) होता है।
- उहापोह: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'ऊहापोह' (असमंजस की स्थिति) होता है, जिसमें दीर्घ 'ऊ' का प्रयोग होता है।
अन्य विकल्प क्यों शुद्ध हैं:
- विकल्प (2): 'दाशरथि' (दशरथ + इ), 'स्थायित्व' और 'विद्यार्थिपरिषद्' (समास होने पर 'विद्यार्थी' की 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' हो जाती है, जैसे- मन्त्रिपरिषद्) सभी शुद्ध हैं।
- विकल्प (3): 'सुधीजन' (सुधी + जन), 'प्रेयसी' और 'निजीकरण' सभी वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
- विकल्प (4): 'वेश्या', 'शशिभूषण' और 'शक्तीकरण' भी शुद्ध हैं (ध्यान दें: 'करण' प्रत्यय जुड़ने पर 'शक्ति' की ह्रस्व 'इ' की मात्रा दीर्घ 'ई' में बदल जाती है, जैसे- शुद्धीकरण, स्पष्टीकरण)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q5. समास की दृष्टि से संगत विकल्प चुनिए :
Right Answer: श्रमसाध्य - करण तत्पुरुष
Explanation:
व्याख्या: सभी विकल्पों का समास विग्रह इस प्रकार है:
- श्रमसाध्य (सही): इसका विग्रह है "श्रम से साध्य" (अर्थात् जिसे श्रम के द्वारा साधा या पूरा किया जा सके)। यहाँ 'से' (के द्वारा) साधन का बोध करा रहा है, इसलिए यहाँ करण तत्पुरुष समास है।
अन्य विकल्प असंगत (गलत) क्यों हैं:
(1) चक्षुश्रवा: इसका विग्रह है "चक्षुओं (आँखों) से सुनता है जो" अर्थात् सर्प (साँप)। इसमें कोई पद प्रधान न होकर किसी तीसरे अर्थ का बोध हो रहा है, इसलिए इसमें बहुव्रीहि समास है (इतरेतर द्वन्द्व नहीं)।
(2) आपादमस्तक: इसका विग्रह है "पाद (पैर) से लेकर मस्तक (सिर) तक"। इसमें प्रथम पद 'आ' उपसर्ग/अव्यय है, इसलिए यहाँ अव्ययीभाव समास है (बहुव्रीहि नहीं)।
(3) जातिगत: इसका विग्रह है "जाति को गत (गया हुआ)"। यहाँ 'को' विभक्ति का लोप हुआ है, इसलिए इसमें कर्म तत्पुरुष समास है (अधिकरण तत्पुरुष नहीं)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q6. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: जब वह समकालीन भी हो और कालातीत भी।
Explanation:
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है: "बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता... नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है (यानी समकालीनता), पर अगर वह समय के पार न देख पाये (यानी कालातीत न हो), तो टिकाऊ नहीं हो सकता।"
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q9. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Right Answer: नएपन एवं निरंतरता दोनों को चुनना
Explanation:
गद्यांश की दूसरी ही पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: "साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।"
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q10. निम्नलिखित में से मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है :
Right Answer: उचित लय और गति प्रदान करना
Explanation:
'लय' (Rhythm), 'आरोह-अवरोह' (आवाज़ का उतार-चढ़ाव) और 'स्वर' का प्रयोग सस्वर वाचन (Reading Aloud) यानी बोल-बोल कर पढ़ने में किया जाता है। मौन वाचन में चूँकि आवाज़ नहीं निकाली जाती और होंठ भी नहीं हिलते, इसलिए इसमें 'लय' (Rhythm) का कोई काम नहीं होता। अतः यह मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q11. किस विकल्प में उपसर्ग विभाजन नियमानुसार है ?
Right Answer: निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
Explanation:
(3) निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार, 'निश्', 'निष्' और 'निस्' से शुरू होने वाले शब्दों में मूल रूप से 'निस्' उपसर्ग ही होता है। संधि नियमों के कारण विसर्ग या 'स्' का रूप बदलकर 'श्' या 'ष्' हो जाता है:
- निश्शुल्क: निस् + शुल्क (स् का श् होना)
- निष्पक्ष: निस् + पक्ष (स् का ष् होना)
- निस्स्वार्थ: निस् + स्वार्थ अतः इस विकल्प में उपसर्ग का विभाजन पूर्णतः नियमानुसार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(1) अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि सभी शब्दों में 'अप' उपसर्ग नहीं है:
- अपरिग्रह: अपि/अ + परिग्रह (यहाँ 'अ' उपसर्ग है, 'अप' नहीं)।
- अपरोक्ष: अ + परोक्ष (जो प्रत्यक्ष न हो - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
- अपर्ण: अ + पर्ण (बिना पत्तों का - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
(2) आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि ये शब्द उपसर्ग से नहीं, बल्कि प्रत्यय के योग से बने हैं:
- आरण्यक: अरण्य + अक (प्रत्यय)
- आवश्यक: अवश + यक/इक (प्रत्यय)
- आधुनिक: अधुना + इक (प्रत्यय) इनमें 'आ' उपसर्ग नहीं है, बल्कि प्रत्यय लगने के कारण आदि-स्वर (पहला अक्षर) 'अ' से 'आ' में बदल गया है।
(4) व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग यह विकल्प व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है क्योंकि हिंदी या संस्कृत में 'वी' (बड़ी ई) नाम का कोई उपसर्ग नहीं होता। इन सभी शब्दों में 'वि' (छोटी इ) उपसर्ग है:
- व्याधि: वि + आधि
- वीक्षण: वि + ईक्षण (यहाँ 'वि' का 'इ' और 'ईक्षण' का 'ई' मिलकर दीर्घ संधि से 'वीक्षण' बना है, पर मूल उपसर्ग 'वि' ही है)।
- व्यतिरेक: वि + अतिरेक
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q12. संधि की दृष्टि से अनुपयुक्त विकल्प चुनिए :
Right Answer: दैत्यारि, गत्यानुसार, अगन्याशय - यण संधि
Explanation:
विकल्प (1) का विश्लेषण (अनुपयुक्त विकल्प)
- गत्यानुसार: गति + अनुसार = गत्यानुसार ($इ + अ = य$) — यण संधि (यह सही है)
- अग्न्याशय: अग्नि + आशय = अग्न्याशय ($इ + आ = या$) — यण संधि (यह भी सही है)
दैत्यारि: दैत्य + अरि = दैत्यारि ($अ + अ = आ$) — यहाँ दीर्घ स्वर संधि है, न कि यण संधि।
नोट: चूँकि 'दैत्यारि' में दीर्घ संधि है, इसलिए यह पूरा समूह 'यण संधि' के अंतर्गत आना गलत है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण (जो कि सही हैं)
(2) दीर्घ संधि (सही)
- मिताहार: मित + आहार = मिताहार ($अ + आ = आ$)
- विकलांग: विकल + अंग = विकलांग ($अ + अ = आ$)
- भूर्ध्व: भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व ($ऊ + ऊ = ऊ$)
(3) व्यंजन संधि (सही)
- दिग्विजय: दिक् + विजय = दिग्विजय (क का ग में परिवर्तन)
- अब्ज: अप् + ज = अब्ज (प का ब में परिवर्तन)
- वृहन्नेत्र: वृहत् + नेत्र = वृहन्नेत्र (त का न में परिवर्तन)
(4) विसर्ग संधि (सही)
- वयोवृद्ध: वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
- पुरोधा: पुरः + धा = पुरोधा
- प्रादुर्भूत: प्रादुः + भूत = प्रादुर्भूत
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q13. किस विकल्प में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग नहीं हुआ है ?
Right Answer: जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया।
Explanation:
सही विकल्प का विश्लेषण:
(1) जिसने परिश्रम किया, वह सफल हो गया। (सार्वनामिक विशेषण नहीं है)
- क्यों? इस वाक्य में 'जिसने' और 'वह' सर्वनाम (Pronoun) के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, न कि विशेषण के रूप में। यह एक मिश्र वाक्य है जहाँ 'जिसने... वह' संबंधवाचक सर्वनाम का काम कर रहे हैं। इनके तुरंत बाद कोई संज्ञा शब्द नहीं आ रहा है जिसकी ये विशेषता बताएँ।
अन्य विकल्पों में सार्वनामिक विशेषण का प्रयोग (जो संगत हैं):
जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा शब्द से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत करता है या उसकी विशेषता बताता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।
(2) यह पुस्तक किससे मँगवाऊँ।
- यहाँ 'यह' सर्वनाम 'पुस्तक' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी विशेषता बता रहा है (निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
(3) ऐसे व्यक्ति पर कभी विश्वास मत करो।
- यहाँ 'ऐसे' सर्वनाम 'व्यक्ति' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी ओर संकेत कर रहा है (यौगिक सार्वनामिक विशेषण)।
(4) आपके घर से कल कोई नौकर आया था।
- यहाँ 'कोई' सर्वनाम 'नौकर' (संज्ञा) से ठीक पहले आकर उसकी अनिश्चितता को दर्शा रहा है (अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q14. प्रत्यय की दृष्टि से संगत विभाजन चुनिए :
Right Answer: मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय
Explanation:
(1) मैथुन, शौच, राघव - 'अ' प्रत्यय (संगत)
- ये सभी शब्द तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत 'अ' प्रत्यय के योग से बने हैं, जहाँ आदि स्वर (पहले अक्षर की मात्रा) में वृद्धि होती है:
- मिथुन + अ = मैथुन ($इ/ई \rightarrow ऐ$)
- शुचि + अ = शौच ($उ/ऊ \rightarrow औ$)
- रघु + अ = राघव ($अ \rightarrow आ$, और अंतिम 'उ' का 'व्' हो जाता है)
अन्य विकल्प क्यों असंगत (गलत) हैं?
(2) फिकैत, डकैत, लड़ैत - 'एत' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ऐत' प्रत्यय लगा है, 'एत' नहीं (मात्राओं का अंतर है—फेंक + ऐत = फिकैत, डाका + ऐत = डकैत, लड़ना + ऐत = लड़ैत)।
(3) नारदीय, स्थानीय, मानवीय - 'अनीय' प्रत्यय (असंगत)
- इन शब्दों में 'ईय' प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है, 'अनीय' नहीं (नारद + ईय = नारदीय, स्थान + ईय = स्थानीय, मानव + ईय = मानवीय)।
(4) कौशेय, सौजन्य, कौमार्य - 'एय' प्रत्यय (असंगत)
- इस विकल्प में मिले-जुले प्रत्यय हैं:
- कौशेय में 'एय' प्रत्यय है (कोश + एय)।
- परंतु सौजन्य (सुजन + य) और कौमार्य (कुमार + य) में 'य' प्रत्यय लगा है, 'एय' नहीं। इसलिए यह विभाजन पूरी तरह संगत नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q15. वाक्य में प्रयुक्त क्रिया की दृष्टि से असंगत विकल्प का चयन कीजिए :
Right Answer: मदारी अनेक करतब दिखलाकर बच्चों को ललचाता है - अकर्मक क्रिया
Explanation:
क्यों असंगत है? इस वाक्य में 'ललचाता है' एक सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) है, अकर्मक नहीं। वाक्य में क्रिया का फल 'बच्चों' (कर्म) पर पड़ रहा है। यदि हम प्रश्न करें "मदारी किसे ललचाता है?", तो उत्तर मिलता है "बच्चों को"। इसलिए यह विकल्प गलत (असंगत) दिया गया है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
English Grammar (15 Questions) Shown in the original language — translating a language paper would change the answer.
Q11. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: intensive and extensive
Explanation:
In English language teaching pedagogy (which is standard for teaching exams like CTET, HTET, and UPTET), the listening skill is categorized exactly like the reading skill:
- Intensive listening: This focuses on careful attention to specific details, sounds, words, or grammar. The goal is accuracy and language focus (e.g., listening to a short dialogue to hear specific pronunciation or answer a direct question).
- Extensive listening: This involves listening to longer, more generalized materials for overall understanding, fluency, and enjoyment without worrying about understanding every single word (e.g., listening to an English podcast, story, or movie).
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q12. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: aural-oral
Explanation:
Aural-oral skill involves training the learner to listen for the English speech sounds including stress and intonation patterns.
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q13. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: prescriptive
Explanation:
J.C. Nesfield's grammar books (such as English Grammar: Past and Present) are classic examples of prescriptive grammar.
Here is why:
- Prescriptive Grammar: This approach lays down strict rules about how a language should or must be used. It focuses on what is grammatically "correct" versus "incorrect," often based on traditional or classical rules. Nesfield's books were written exactly for this purpose—to teach students the rigid, formal rules of Standard English.
Why the other options are incorrect:
(1) Universal Grammar: This is a modern linguistic theory (proposed by Noam Chomsky) suggesting that the ability to learn grammar is hard-wired into the human brain and that all human languages share a common structural basis.
(2) Cognitive Grammar: This is a psychological approach to language that argues grammar and meaning are deeply tied to human cognition and how we perceive the world.
(3) Descriptive Grammar: This is the modern linguistic approach that observes and describes how native speakers actually use the language in real life, without judging it as "right" or "wrong." Nesfield did the exact opposite of this.
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q14. Choose the correct option:
Right Answer: A is true; B is false
Explanation:
In general, print materials are:
- Portable – Books and notes can be carried easily.
- Easily available – They are widely accessible in libraries, bookstores, and schools.
- Cost-effective – Especially when compared with many digital devices and multimedia resources.
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q15. Fill in the blank with the correct option:
Right Answer: multilingual resources
Explanation:
When learners use their native language (mother tongue) to understand, analyze, or discuss complex material in a second language (like an English poem), this teaching approach is known as using the mother tongue as a "resource." In modern language pedagogy, this practice is often called "Translanguaging" or utilizing multilingual resources to help students grasp difficult concepts in the target language.
Why the other options are incorrect:
- (1) evaluative comprehension: This refers to making judgments or forming opinions about a text. While discussing a poem might involve evaluation, the specific act of using a native language to do so highlights the use of a multilingual strategy, not just the act of evaluating.
- (3) pre-reading skills: These are activities done before reading a text to prepare the learner (like looking at titles to predict the story or learning key vocabulary). Discussing the meaning of a poem usually happens during or after reading.
- (4) first language acquisition: This refers to the natural, subconscious process by which infants and young children learn their very first language from birth. It is a developmental milestone, not a teaching strategy used in a classroom to learn a second language.
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Reasoning (10 Questions)
Q1. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए
Right Answer: वृत्त
Explanation:
जिस प्रकार एक वर्ग (Square) का निर्माण सीधी रेखाओं (Lines) से मिलकर होता है (अर्थात वर्ग की बाहरी सीमा सीधी रेखाएँ होती हैं), ठीक उसी प्रकार एक वृत्त (Circle) का निर्माण चाप (Arc) से होता है (वृत्त की परिधि या बाहरी सीमा एक निरंतर चाप होती है)।
गोला (Sphere) और गेंद (Ball) 3D आकृतियाँ हैं, जबकि रेखा, वर्ग, चाप और वृत्त 2D ज्यामितीय आकृतियाँ (Geometric shapes) हैं। इसलिए 'वृत्त' ही सबसे सटीक उत्तर है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q2. निम्न वर्ण श्रेणी का अगला पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: AYBZC
Explanation:
हल करने का तरीका:
इस शृंखला में प्रत्येक पद के अक्षरों के बीच एक निश्चित पैटर्न चल रहा है। आइए प्रत्येक पद के अक्षरों की तुलना उनके स्थानों (पहले, दूसरे, तीसरे आदि) के आधार पर करें:
- पहला अक्षर (-3 का पैटर्न): M (13) ➔ J (10) ➔ G (7) ➔ D (4) अगला अक्षर: D (4) - 3 = A (1)
- दूसरा अक्षर (+2 का पैटर्न): Q (17) ➔ S (19) ➔ U (21) ➔ W (23) अगला अक्षर: W (23) + 2 = Y (25)
- तीसरा अक्षर (-3 का पैटर्न): N (14) ➔ K (11) ➔ H (8) ➔ E (5) अगला अक्षर: E (5) - 3 = B (2)
- चौथा अक्षर (+2 का पैटर्न): R (18) ➔ T (20) ➔ V (22) ➔ X (24) अगला अक्षर: X (24) + 2 = Z (26)
- पाँचवाँ अक्षर (-3 का पैटर्न): O (15) ➔ L (12) ➔ I (9) ➔ F (6) अगला अक्षर: F (6) - 3 = C (3)
इन सभी अक्षरों को मिलाने पर, श्रेणी का अगला पद AYBZC बनता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q3. निम्न संख्या श्रेणी में लुप्त पद ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 65
Explanation:
हल करने का तरीका (Step-by-step logic):
यह संख्या श्रेणी एक विशेष पैटर्न का पालन कर रही है। प्रत्येक पद प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3...) के घन (cube) में 1 जोड़ने पर प्राप्त हो रहा है। इसका सूत्र $n^3 + 1$ है:
- पहला पद: $1^3 + 1 = 1 + 1 = 2$
- दूसरा पद: $2^3 + 1 = 8 + 1 = 9$
- तीसरा पद: $3^3 + 1 = 27 + 1 = 28$
- चौथा पद (लुप्त): $4^3 + 1 = 64 + 1 = 65$
- पाँचवाँ पद: $5^3 + 1 = 125 + 1 = 126$
- छठा पद: $6^3 + 1 = 216 + 1 = 217$
- सातवाँ पद: $7^3 + 1 = 343 + 1 = 344$
अतः, पैटर्न के अनुसार प्रश्नवाचक चिह्न (?) के स्थान पर 65 आएगा।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q4. A, P, R, X, Y और Z एक पंक्ति में बैठे हुए हैं। Y और Z मध्य में हैं और A तथा P अन्तिम शीर्षों पर हैं। R, A के एकदम बायीं ओर है। P के एकदम दायीं ओर कौन बैठा हुआ है ?
Right Answer: X
Explanation:
1. पंक्ति निर्धारित करें चूँकि कुल 6 व्यक्ति हैं, इसलिए पंक्ति में 6 स्थान होंगे: _ _ _ _ _ _
2. अंतिम सिरों पर व्यक्तियों को बिठाएं हमें प्रश्न में बताया गया है कि A और P अन्तिम शीर्षों (सिरों) पर हैं। संभावना 1: P _ _ _ _ A संभावना 2: A _ _ _ _ P
3. R का स्थान और सही सिरे निर्धारित करें यह दिया गया है कि R, A के एकदम बायीं ओर है। यदि A पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठा होता, तो उसके बायीं ओर R के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसलिए, A को अंतिम स्थान (एकदम दायीं ओर) पर ही होना चाहिए, जिससे यह तय हो जाता है कि P पहले स्थान (एकदम बायीं ओर) पर बैठेगा। व्यवस्था: P _ _ _ R A
4. मध्य के व्यक्तियों को बिठाएं हमें पता है कि Y और Z मध्य में हैं (यानी तीसरे और चौथे स्थान पर)। व्यवस्था: P _ [Y या Z] [Z या Y] R A
5. बचा हुआ स्थान भरें अब केवल X बचा है, और P के ठीक बगल में केवल एक ही स्थान (दूसरा स्थान) खाली है। अंतिम व्यवस्था: P X [Y/Z] [Z/Y] R A
निष्कर्ष: इस अंतिम व्यवस्था से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि P के एकदम दायीं ओर X बैठा हुआ है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q6. रेखा 10 किमी सीधे चलती है और फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है
Right Answer: 5 किमी
Explanation:
मान लीजिए रेखा अपने प्रारंभिक बिंदु से उत्तर (North) दिशा की ओर चलना शुरू करती है। (आप कोई भी दिशा मान सकते हैं, अंत में दूरी समान ही आएगी)।
कदम-दर-कदम रेखा की यात्रा:
- "रेखा 10 किमी सीधे चलती है"
- रेखा उत्तर की ओर 10 किमी चली।
- (कुल दूरी: उत्तर = 10 किमी)
- "फिर दायें मुड़कर 10 किमी चलती है"
- उत्तर से दाएँ मुड़ने का मतलब है पूर्व (East) की ओर मुड़ना।
- वह पूर्व की ओर 10 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 5 किमी चलती है" (पहला बायाँ मोड़)
- पूर्व से बाएँ मुड़ने का मतलब है वापस उत्तर (North) की ओर मुड़ना।
- वह उत्तर की ओर 5 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 10 + 5 = 15 किमी, पूर्व = 10 किमी)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (दूसरा बायाँ मोड़)
- उत्तर से बाएँ मुड़ने का मतलब है पश्चिम (West) की ओर मुड़ना।
- वह पश्चिम की ओर 15 किमी चली।
- (वर्तमान स्थिति: उत्तर = 15 किमी। पूर्व में वह 10 किमी थी, लेकिन पश्चिम में 15 किमी आ गई, यानी प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की तरफ 5 किमी हो गई।)
- "फिर बायीं ओर मुड़कर 15 किमी चलती है" (तीसरा बायाँ मोड़)
- पश्चिम से बाएँ मुड़ने का मतलब है दक्षिण (South) की ओर मुड़ना।
- वह दक्षिण की ओर 15 किमी चली।
अंतिम स्थिति का विश्लेषण:
- उत्तर-दक्षिण (Vertical) दूरी: वह कुल 15 किमी उत्तर की ओर गई थी (स्टेप 1 में 10 किमी + स्टेप 3 में 5 किमी) और अंत में 15 किमी दक्षिण की ओर आ गई। यानी उत्तर-दक्षिण की दूरी 15 - 15 = 0 हो गई। वह अपने प्रारंभिक बिंदु वाली क्षैतिज रेखा (horizontal line) पर आ गई है।
- पूर्व-पश्चिम (Horizontal) दूरी: वह 10 किमी पूर्व की ओर गई थी, लेकिन फिर 15 किमी पश्चिम की ओर आ गई।
- अतः प्रारंभिक बिंदु से उसकी दूरी = 15 किमी - 10 किमी = 5 किमी (प्रारंभिक बिंदु से पश्चिम की दिशा में)।
निष्कर्ष: वह अपने प्रारंभिक बिंदु से 5 किमी की दूरी पर है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q7. पाँच व्यक्ति P, Q, R, S, और T एक अखबार पढ़ते हैं।
Right Answer: S
Explanation:
कथनों का विश्लेषण:
- "जो व्यक्ति सर्वप्रथम पढ़ता है, वह R को दे देता है।"
- इसका मतलब है कि R अखबार पढ़ने वाला दूसरा व्यक्ति है।
- क्रम: [1] [R] [3] [4] [5]
- "जो सबसे आखिरी में पढ़ता है, वो P से लेता है।"
- सबसे आखिरी व्यक्ति (5वाँ) अखबार P से लेता है, जिसका मतलब है कि P 4थे स्थान पर है।
- क्रम: [1] [R] [3] [P] [5]
- "T पढ़ने में प्रथम या अन्तिम नहीं है।"
- T पहले [1] और पाँचवें [5] स्थान पर नहीं आ सकता।
- दूसरा और चौथा स्थान पहले ही (R और P) से भरा हुआ है, इसलिए T के लिए केवल तीसरा [3] स्थान बचता है।
- क्रम: [1] [R] [T] [P] [5]
- "P और Q के बीच दो पाठक थे।"
- P चौथे स्थान पर है। P और Q के बीच 2 पाठक तभी हो सकते हैं जब Q पहले [1] स्थान पर हो (ताकि बीच में दूसरे और तीसरे स्थान वाले पाठक आ सकें)।
- क्रम: [Q] [R] [T] [P] [5]
- अंतिम पाठक कौन है?
- अब हमारे पास केवल एक व्यक्ति S बचा है और एक ही स्थान (5वाँ/आखिरी) खाली है।
- इसलिए, S आखिरी में अखबार पढ़ेगा।
- पूरा क्रम: Q ➞ R ➞ T ➞ P ➞ S
निष्कर्ष: सबसे आखिरी में अखबार S पढ़ता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q8. A, C का पिता है और D, B का पुत्र है। E, A का भ्राता है। C, D की बहन है। B, E से किस प्रकार सम्बन्धित है ?
Right Answer: साली/भाभी
Explanation:
प्रश्न के कथनों का विश्लेषण:
- "A, C का पिता है"
- A पुरुष है और C का पिता है।
- "C, D की बहन है"
- C (महिला) और D भाई-बहन हैं।
- चूँकि A, C का पिता है, इसलिए A, D का भी पिता होगा।
- "D, B का पुत्र है"
- D, B का बेटा है।
- हमने ऊपर देखा कि D का पिता A है। अगर D का पिता A है और D, B का भी पुत्र है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि B, D की माता है।
- इससे यह साबित होता है कि A और B पति-पत्नी हैं (A पति है और B पत्नी है)।
- "E, A का भाई है"
- E पुरुष है।
निष्कर्ष (B का E से संबंध):
- B, A की पत्नी है।
- E, A का भाई है।
- इसलिए, B, E के भाई की पत्नी है।
- भाई की पत्नी रिश्ते में भाभी (Sister-in-law) लगती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q9. एक निश्चित कूट भाषा में "sun shines brightly" को "ba lo sul", "houses are brightly lit" को "kado ula ari ba" और "light comes from sun" को "dopi kup lo nro" लिखा जाता है। "sun" और "brightly" के लिए क्रमशः किन कूट शब्दों को लिखा गया है ?
Right Answer: lo, ba
Explanation:
आइए दिए गए कथनों को देखते हैं:
- sun shines brightly = ba lo sul
- houses are brightly lit = kado ula ari ba
- light comes from sun = dopi kup lo nro
चरण 1: "brightly" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (2) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "brightly" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "ba" समान है। इसलिए, brightly = ba
चरण 2: "sun" के लिए कूट (code) ज्ञात करना यदि हम कथन (1) और (3) की तुलना करते हैं, तो दोनों में केवल "sun" शब्द समान है। इनके कूट शब्दों को देखने पर, दोनों में केवल "lo" समान है। इसलिए, sun = lo
निष्कर्ष: प्रश्न में क्रमशः "sun" और "brightly" के लिए कूट शब्द पूछे गए हैं (यानी पहले sun और फिर brightly)।
- sun = lo
- brightly = ba
अतः सही युग्म lo, ba है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q10. यदि 10 दिसम्बर, 2022 को शनिवार था, तो 8 दिसम्बर, 2024 को कौन-सा दिन होगा ?
Right Answer: रविवार
Explanation:
चरण 1: 10 दिसम्बर 2023 का दिन ज्ञात करें
- एक सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 1 विषम दिन (odd day)।
- 10 दिसम्बर 2022 से 10 दिसम्बर 2023 तक जाने पर 1 विषम दिन जुड़ता है।
- शनिवार + 1 दिन = रविवार। (यानी 10 दिसम्बर 2023 को रविवार था)।
चरण 2: 10 दिसम्बर 2024 का दिन ज्ञात करें
- 2024 एक लीप वर्ष (Leap year) है क्योंकि यह 4 से पूर्णतः विभाजित होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें फरवरी 29 दिन की होगी।
- एक लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, जिसका अर्थ है 52 सप्ताह और 2 विषम दिन।
- 10 दिसम्बर 2023 से 10 दिसम्बर 2024 तक जाने पर 2 विषम दिन जुड़ते हैं।
- रविवार + 2 दिन = मंगलवार। (यानी 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार होगा)।
चरण 3: 8 दिसम्बर 2024 का दिन निकालें
- हमें पता है कि 10 दिसम्बर 2024 को मंगलवार है।
- 8 दिसम्बर, 10 दिसम्बर से ठीक 2 दिन पहले आता है।
- मंगलवार - 2 दिन = रविवार।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Mathematics (10 Questions)
Haryana GK Questions (10 Questions)
Q1. हरियाणा लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?
Right Answer: दरबारी लाल गुप्ता
Explanation:
1 नवंबर 1966 को जब पंजाब से अलग होकर हरियाणा एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) का भी गठन किया गया था। इस नवनिर्मित आयोग के प्रथम अध्यक्ष (First Chairman) श्री दरबारी लाल गुप्ता थे।
उन्होंने 1 नवंबर 1966 से अपना कार्यभार संभाला था। वर्तमान में HPSC हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों में ए और बी (A & B) ग्रुप के राजपत्रित (Gazetted) अधिकारियों की भर्ती के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वन्य जीव अभयारण्य शिवालिक पहाड़ियों में अवस्थित है ?
Right Answer: खोल ही-रायतान अभयारण्य
Explanation:
- खोल ही-रायतान अभयारण्य (Khol Hi-Raitan Sanctuary): यह हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित है, जो भौगोलिक दृष्टि से शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik Hills) की तलहटी और पहाड़ी क्षेत्र में आता है। यह अभयारण्य चीते (Leopard), सियार (Jackal), और विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
अन्य विकल्पों की स्थिति इस प्रकार है:
- खापरवास और भिण्डावास अभयारण्य (Khaparwas & Bhindawas Sanctuary): ये दोनों वन्यजीव अभयारण्य हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित हैं, जो मैदानी इलाका और आर्द्रभूमि (Wetlands) क्षेत्र है।
- नाहर अभयारण्य (Nahar Sanctuary): यह हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित है। यह क्षेत्र दक्षिणी हरियाणा में आता है, जहाँ अरावली पर्वतमाला (Aravalli Range) का विस्तार है, न कि शिवालिक का।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q3. निम्नलिखित में से किसने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में मुख्य सचिव के रूप में काम नहीं किया ?
Right Answer: एस० सी० चौधरी
Explanation:
मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। दिए गए विकल्पों में से अधिकारियों के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के रूप में कार्यकाल इस प्रकार हैं:
- एस० सी० चौधरी (S. C. Chaudhary): इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2013 से 31 जुलाई 2014 तक था। यह भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार का समय था। अतः इन्होंने मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल में काम नहीं किया।
- शकुन्तला जाखू (Shakuntala Jakhu): इनका कार्यकाल 31 जुलाई 2014 से 30 नवंबर 2014 तक था। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री बनने (26 अक्टूबर 2014) के बाद शुरुआती कुछ समय तक इन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं।
- पी० के० गुप्ता (P. K. Gupta): इन्हें मनोहर लाल खट्टर की सरकार द्वारा ही 30 नवंबर 2014 को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था और इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2014 तक रहा।
- विजयवर्धन (Vijay Vardhan): इन्होंने 1 अक्टूबर 2020 से 30 नवंबर 2021 तक मुख्य सचिव के रूप में काम किया, जो पूरी तरह से मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल के अंतर्गत आता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q4. सर छोटूराम के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
Right Answer: कथन (A), (B) तथा (C) सही हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: सर छोटूराम (दीनबंधु सर छोटूराम) ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। 1916 में वे रोहतक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन (विशेषकर शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार) से असहमत होकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी।
- कथन (B) सत्य है: कांग्रेस छोड़ने के बाद, उन्होंने 1923 में सर फज्ल-ए-हुसैन के साथ मिलकर किसानों और जमींदारों के हितों की रक्षा के लिए 'यूनियनिस्ट पार्टी' (Unionist Party) की स्थापना की।
- कथन (C) सत्य है: वे अविभाजित पंजाब प्रांत के एक प्रमुख राजनीतिक नेता थे। 1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद जब पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी, तो उन्होंने राजस्व मंत्री (Revenue Minister) के रूप में कार्य किया और किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून (जैसे 'साहूकार पंजीकरण अधिनियम') पारित करवाए।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q5. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कहाँ स्थापित किया जा रहा है ?
Right Answer: किलोहड़
Explanation:
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), सोनीपत (हरियाणा) की स्थापना सोनीपत जिले के किलोहड़ (Kilohrad) गाँव में की जा रही है। यह संस्थान पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है ?
Right Answer: रेवाड़ी
Explanation:
प्रशासनिक सुविधा के लिए हरियाणा को 6 मण्डलों (Divisions) में बांटा गया है। रोहतक मण्डल राज्य का सबसे बड़ा मण्डल है, जिसमें कुल 5 जिले शामिल हैं:
- रोहतक (Rohtak)
- झज्जर (Jhajjar)
- सोनीपत (Sonipat)
- भिवानी (Bhiwani)
- चरखी दादरी (Charkhi Dadri)
रेवाड़ी (Rewari) जिला रोहतक संभाग का हिस्सा नहीं है; यह गुरुग्राम (Gurugram) संभाग के अंतर्गत आता है (गुरुग्राम संभाग में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले शामिल हैं)।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q7. 37वें सूरजकुण्ड अन्तर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का थीम राज्य कौन-सा था ?
Right Answer: गुजरात
Explanation:
37वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले (37th Surajkund International Crafts Fair) का आयोजन 2 फरवरी से 18 फरवरी 2024 तक हरियाणा के फरीदाबाद में किया गया था। इस संस्करण के लिए:
- थीम राज्य (Theme State): गुजरात था। (इस मेले में गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, कला और व्यंजनों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था।)
- भागीदार राष्ट्र (Partner Nation): तंजानिया (Tanzania) था।
सूरजकुंड मेले का आयोजन हर साल हरियाणा पर्यटन विभाग और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के सहयोग से किया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q8. हरियाणा की महिला पहलवान जिसने 2023 का अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया
Right Answer: अंतिम पंघाल
Explanation:
हरियाणा के हिसार जिले (भगाना गांव) की महिला पहलवान अंतिम पंघाल (Antim Panghal) को कुश्ती में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्ष 2023 का अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award) प्रदान किया गया था। वे अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (U-20 World Wrestling Championship) में लगातार दो बार (2022 और 2023) स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं।
- अंशु मलिक (Anshu Malik): इन्हें 2022 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- गीतिका जाखड़ (Geetika Jakhar): इन्हें 2006 में अर्जुन पुरस्कार मिला था।
- साक्षी मलिक (Sakshi Malik): रियो ओलंपिक 2016 की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को 2016 में ही मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया गया था।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q9. निम्नलिखित में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
Right Answer: (A) तथा (B)
Explanation:
(A) गुजरी महल - हिसार (Gujari Mahal - Hisar): यह सही सुमेलित है। गुजरी महल हरियाणा के हिसार शहर में स्थित है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने अपनी प्रेमिका 'गुजरी' रानी के लिए करवाया था।
(B) आराम-ए-कौसर - नारनौल (Aram-e-Kausar - Narnaul): यह सही सुमेलित है। आराम-ए-कौसर (Aram-i-Kausar) हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में स्थित एक ऐतिहासिक मुग़लकालीन स्मारक और बाग है। यह मुग़ल वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे मुग़ल सम्राट अकबर के शासनकाल में नारनौल के सूबेदार शाह कुली खान ने बनवाया था।
(C) शेख तैय्यब का मकबरा - जींद (Tomb of Sheikh Tayyab - Jind): यह गलत सुमेलित है। शेख तैय्यब का मकबरा जींद में नहीं, बल्कि हरियाणा के कैथल (Kaithal) में स्थित है। शेख तैय्यब (लाला मैदनी मल) 16वीं शताब्दी के एक सूफ़ी संत थे और अकबर के दरबार में सलाहकार भी रहे थे।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q10. पेहोवा अभिलेख के बारे में निम्नलिखित कथनों को पढ़िए
Right Answer: दोनों कथन सत्य हैं।
Explanation:
- कथन (A) सत्य है: पेहोवा अभिलेख (Pehowa Inscription) 9वीं शताब्दी का है और यह गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के महान शासक मिहिर भोज (Mihir Bhoja) के शासनकाल से संबंधित है।
- कथन (B) सत्य है: इस अभिलेख में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्राचीन काल में पेहोवा (जिसे उस समय पृथूदक या Prithudaka कहा जाता था) घोड़ों के व्यापार का एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध केंद्र था। इसमें विभिन्न स्थानों से आए घोड़ों के व्यापारियों (horse dealers) का जिक्र है, जो एक मेले में इकट्ठा हुए थे और उन्होंने अपनी बिक्री का कुछ हिस्सा मंदिर के रखरखाव के लिए दान करने का संकल्प लिया था।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Commerce (60 Questions)
Q1. प्रशिक्षण की प्रभावशीलता निर्धारित करने के लिए एक अलग दृष्टिकोण को कहा जाता है :
Right Answer: ब्रिंकरहॉफ मॉडल
Explanation:
प्रशिक्षण की प्रभावशीलता आँकने का सर्वाधिक प्रचलित प्रतिरूप किर्कपैट्रिक का चार-स्तरीय मॉडल है, जिसमें प्रतिक्रिया, अधिगम, व्यवहार तथा परिणाम का क्रमिक मूल्यांकन होता है। इससे भिन्न एवं वैकल्पिक दृष्टिकोण रॉबर्ट ब्रिंकरहॉफ ने प्रस्तुत किया, जिसे सफल प्रकरण विधि कहा जाता है। इसमें औसत प्रतिभागियों के स्थान पर सर्वाधिक सफल तथा सर्वाधिक असफल प्रकरणों को चुनकर उनका गहन अध्ययन किया जाता है, ताकि यह पता चले कि प्रशिक्षण किन परिस्थितियों में काम करता है और किनमें नहीं। इससे संगठनात्मक बाधाएँ भी उजागर हो जाती हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ट्रांजेक्शनल (लेन-देन) नेता का लक्षण नहीं है ?
Right Answer: प्रेरक प्रेरणा
Explanation:
ट्रांजेक्शनल अर्थात् लेन-देन आधारित नेता अनुयायियों को स्पष्ट भूमिका एवं कार्य-अपेक्षाएँ बताकर तथा उनके बदले पुरस्कार देकर लक्ष्य की ओर ले जाता है। उसके प्रमुख लक्षण हैं — आकस्मिक पुरस्कार, सक्रिय एवं निष्क्रिय दोनों रूपों में अपवादों द्वारा प्रबंध, तथा अहस्तक्षेप अर्थात् लेसे-फेयर, जिसमें वह उत्तरदायित्व से बचता है। इसके विपरीत ‘प्रेरक प्रेरणा’ ट्रांसफॉर्मेशनल नेतृत्व का लक्षण है, जिसमें नेता ऊँचा दृष्टिकोण प्रस्तुत कर अनुयायियों को स्वयं से ऊपर उठकर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। आदर्शीकृत प्रभाव एवं बौद्धिक उद्दीपन भी उसी के अंग हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q3. कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली के अनुसार, इनमें से कौन-सा नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: ब्लड ग्रुप
Explanation:
कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली में आँकड़ों को दो वर्गों में बाँटा जाता है। मास्टर डेटा वह स्थायी अथवा अर्ध-स्थायी सूचना है जो बार-बार नहीं बदलती और अनेक लेनदेनों में बार-बार प्रयुक्त होती है। नॉन-मास्टर डेटा वह है जो बार-बार बदलता रहता है और प्रत्येक बार नए सिरे से दर्ज करना पड़ता है। आयु, वजन तथा पसंद-नापसंद समय के साथ बदलते रहते हैं, अतः वे नॉन-मास्टर डेटा के उदाहरण हैं। ब्लड ग्रुप जीवनभर अपरिवर्तित रहता है, इसलिए वह मास्टर डेटा है और नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q4. कौन-सा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत आमतौर पर दो कारक मॉडल के रूप में तैयार किया जाता है ?
Right Answer: हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत
Explanation:
हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत को सामान्यतः दो कारक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, क्योंकि इसमें दो देश, दो वस्तुएँ तथा दो उत्पादन साधन — श्रम एवं पूँजी — मान लिए जाते हैं। इसे साधन-प्रचुरता सिद्धांत भी कहा जाता है। इसका मूल तर्क यह है कि प्रत्येक देश उस वस्तु का निर्यात करेगा जिसके उत्पादन में उसके यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध एवं इसलिए सस्ते साधन का गहन उपयोग होता है, और उस वस्तु का आयात करेगा जिसमें दुर्लभ साधन की गहनता हो। यह रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का विस्तार है, जो केवल श्रम-उत्पादकता के अन्तर पर आधारित था।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा चयन प्रक्रिया का पहला चरण है ?
Right Answer: प्रारंभिक स्क्रीनिंग
Explanation:
चयन एक नकारात्मक प्रक्रिया है, जिसमें क्रमिक बाधाओं से गुजरते हुए अनुपयुक्त अभ्यर्थियों को हटाया जाता है। इसका पहला चरण प्रारंभिक स्क्रीनिंग अर्थात् प्रारंभिक छँटनी है, जिसमें आवेदनों अथवा संक्षिप्त प्रारंभिक साक्षात्कार के आधार पर स्पष्ट रूप से अयोग्य अभ्यर्थियों को आरम्भ में ही अलग कर दिया जाता है। इससे संगठन का समय एवं धन दोनों बचते हैं। इसके बाद पूर्ण आवेदन-पत्र भरवाना, रोजगार परीक्षण, चयन साक्षात्कार, संदर्भ एवं पृष्ठभूमि की जाँच, चिकित्सा परीक्षण तथा अन्ततः नियुक्ति-पत्र देने के चरण आते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q6. निम्नलिखित में से कौन मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: कार्यकाल की स्थिरता
Explanation:
मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की प्रमुख विशेषताएँ हैं — कार्य विशेषज्ञता अर्थात् श्रम विभाजन, सत्ता का स्पष्ट संस्तरण, औपचारिक चयन जो तकनीकी योग्यता पर आधारित हो, औपचारिक नियम एवं विनियम, अवैयक्तित्व अर्थात् नियमों का बिना पक्षपात के समान प्रयोग, तथा व्यावसायिक जीवनवृत्त अभिविन्यास। ‘कार्यकाल की स्थिरता’ इस सूची में नहीं आती, क्योंकि वह हेनरी फेयोल के चौदह प्रबंधकीय सिद्धांतों में से एक है, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारियों को स्थिर कार्यकाल देने से ही उनकी कार्यकुशलता विकसित होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q7. औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए गए थे :
Right Answer: 20 मार्च, 1883 को
Explanation:
औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर 20 मार्च 1883 को हस्ताक्षर किए गए और यह बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र की प्रथम प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय संधि है। इसके अन्तर्गत पेटेंट, औद्योगिक अभिकल्प, ट्रेडमार्क, सेवा चिह्न, व्यापार नाम तथा भौगोलिक संकेत आते हैं। इसके दो आधारभूत सिद्धांत हैं — राष्ट्रीय व्यवहार, जिसके अनुसार सदस्य देश विदेशी आवेदकों को अपने नागरिकों जैसा संरक्षण देंगे; तथा प्राथमिकता का अधिकार, जिसके अन्तर्गत एक देश में आवेदन करने के बाद निर्धारित अवधि में अन्य सदस्य देशों में वही तिथि मान्य होती है। इसका प्रशासन विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन करता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q8. वह दृष्टिकोण जिससे हम अवलोकन और प्रत्यक्ष अनुभव दोनों के माध्यम से सीख सकते हैं, कहलाता है :
Right Answer: सामाजिक अधिगम सिद्धांत
Explanation:
सामाजिक अधिगम सिद्धांत अल्बर्ट बंडूरा ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार व्यक्ति केवल प्रत्यक्ष अनुभव अर्थात् स्वयं करके ही नहीं सीखता, बल्कि दूसरों को देखकर तथा उनके व्यवहार के परिणामों का प्रेक्षण करके भी सीख लेता है, जिसे प्रतिनिधिक अधिगम कहते हैं। इस प्रक्रिया के चार चरण हैं — ध्यान देना, धारण करना, प्रतिकृति बनाना तथा अभिप्रेरणा। प्रबंधन में इसका उपयोग प्रशिक्षण, प्रतिरूपण एवं संरक्षकत्व कार्यक्रमों में व्यापक रूप से होता है। बंडूरा ने आत्म-प्रभावकारिता की अवधारणा भी दी, जो अपनी क्षमता में विश्वास को दर्शाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q9. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की कौन-सी धारा केन्द्र सरकार को उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों के विनियमन हेतु केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण स्थापित करने का अधिकार देती है ?
Right Answer: धारा 10
Explanation:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 10 केन्द्र सरकार को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का अधिकार देती है, जिसे संक्षेप में केन्द्रीय प्राधिकरण कहा जाता है। इसका कार्य उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार व्यवहार तथा भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों का विनियमन करना है। यह स्वप्रेरणा से जाँच आरम्भ कर सकता है, असुरक्षित वस्तुओं की वापसी का आदेश दे सकता है, भ्रामक विज्ञापन बन्द करा सकता है और जुर्माना लगा सकता है। इसके अन्तर्गत जाँच हेतु एक महानिदेशक की व्यवस्था भी की गई है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q10. ‘पूँजीगत बजटिंग’ किस प्रकार का वित्तीय निर्णय है ?
Right Answer: निवेश निर्णय
Explanation:
वित्तीय प्रबंध के तीन प्रमुख निर्णय होते हैं — निवेश निर्णय, वित्तपोषण निर्णय तथा लाभांश निर्णय। पूँजीगत बजटिंग निवेश निर्णय के अन्तर्गत आती है, क्योंकि इसमें यह तय किया जाता है कि दीर्घकालीन निधियों को किन स्थायी सम्पत्तियों अथवा परियोजनाओं में लगाया जाए। ऐसे निर्णय अपरिवर्तनीय होते हैं, इनमें बड़ी राशि लगती है और इनका प्रभाव फर्म की भावी लाभप्रदता एवं जोखिम पर दीर्घकाल तक बना रहता है। इसके मूल्यांकन के लिए प्रतिफल अवधि, शुद्ध वर्तमान मूल्य तथा आन्तरिक प्रतिफल दर जैसी तकनीकें प्रयुक्त होती हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q11. किसी विशेष विक्रेता द्वारा बिक्री के लिए पेश की जाने वाली सभी उत्पाद शृंखलाओं और वस्तुओं के समूह को कहा जाता है :
Right Answer: उत्पाद मिश्रण
Explanation:
उत्पाद मिश्रण अथवा उत्पाद वर्गीकरण से तात्पर्य उन समस्त उत्पाद शृंखलाओं तथा वस्तुओं के समूह से है जो कोई विशेष विक्रेता क्रेताओं को बिक्री हेतु प्रस्तुत करता है। इसकी चार विमाएँ होती हैं — चौड़ाई, जो उत्पाद शृंखलाओं की संख्या बताती है; लम्बाई, जो कुल वस्तुओं की संख्या दर्शाती है; गहराई, जो प्रत्येक उत्पाद के विभिन्न रूपों को बताती है; तथा संगतता, जो शृंखलाओं के पारस्परिक सम्बन्ध को दर्शाती है। इसके विपरीत विपणन मिश्रण उत्पाद, मूल्य, स्थान एवं संवर्धन इन चार तत्त्वों का संयोजन है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q12. वह साक्षात्कार जिसमें उम्मीदवारों से यह वर्णन करने के लिए कहा जाता है कि वे वास्तव में किसी दी गई स्थिति को कैसे सँभालते हैं, कहलाता है :
Right Answer: व्यावहारिक साक्षात्कार
Explanation:
व्यावहारिक साक्षात्कार अर्थात् बिहेवियरल इंटरव्यू वह साक्षात्कार है जिसमें उम्मीदवारों से यह वर्णन करने को कहा जाता है कि वे किसी दी गई परिस्थिति को वास्तव में कैसे सँभालते हैं अथवा अतीत में कैसे सँभाला था। इसका आधार यह मान्यता है कि भूतकालीन व्यवहार भविष्य के व्यवहार का सर्वोत्तम पूर्वानुमान है। इससे उम्मीदवार के वास्तविक कौशल, निर्णय-क्षमता एवं दृष्टिकोण का आकलन रटे-रटाए उत्तरों की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय ढंग से हो जाता है। इसके विपरीत तनाव साक्षात्कार में उम्मीदवार को जानबूझकर दबाव में डालकर उसकी संयम-क्षमता परखी जाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q13. कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन किया जा सकता है :
Right Answer: 7 या अधिक व्यक्तियों द्वारा
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 3 के अनुसार किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन सात या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है, जो ज्ञापन-पत्र पर अपने नाम अभिदान कर पंजीकरण सम्बन्धी अपेक्षाओं का पालन करें। निजी कंपनी के लिए दो या अधिक व्यक्ति पर्याप्त हैं, तथा एक व्यक्ति कंपनी अर्थात् ओपीसी का गठन केवल एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जो इस अधिनियम की नई विशेषता है। सार्वजनिक कंपनी में सदस्यों की अधिकतम संख्या पर कोई सीमा नहीं है, जबकि निजी कंपनी में यह दो सौ तक सीमित है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q14. आमने-सामने की बातचीत किसका उदाहरण है ?
Right Answer: उच्च चैनल समृद्धि
Explanation:
चैनल समृद्धि से तात्पर्य किसी संचार माध्यम की उस क्षमता से है जिससे वह एक ही समय में अनेक संकेत सम्प्रेषित कर सके, तत्काल प्रतिपुष्टि दे सके और व्यक्तिगत स्पर्श बनाए रख सके। आमने-सामने की बातचीत उच्चतम चैनल समृद्धि का उदाहरण है, क्योंकि इसमें शब्दों के साथ-साथ स्वर, हाव-भाव, मुद्रा एवं नेत्र-सम्पर्क भी संदेश पहुँचाते हैं और गलतफहमी तत्क्षण दूर की जा सकती है। इसके विपरीत सामान्य पत्र, परिपत्र अथवा सूचना-पट निम्न समृद्धि वाले माध्यम हैं। जटिल एवं अस्पष्ट संदेशों के लिए समृद्ध माध्यम ही उपयुक्त होते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q15. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निम्नलिखित में से कौन ‘उपभोक्ता’ है ?
Right Answer: जो आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल के लिए किसी सेवा को किराए पर लेता है।
Explanation:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अनुसार उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो प्रतिफल देकर कोई वस्तु क्रय करता है अथवा सेवा किराए पर लेता है, और यह प्रतिफल पूर्णतः चुकाया गया, आंशिक रूप से चुकाया गया अथवा चुकाने का वचन दिया गया हो सकता है। अतः आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल पर सेवा लेने वाला व्यक्ति उपभोक्ता है। इसके विपरीत जो पुनर्विक्रय अथवा किसी वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए क्रय करता है, जो निःशुल्क सेवा लेता है, अथवा जो सेवा के अनुबंध के अन्तर्गत सेवा प्राप्त करता है, वह उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q16. ADDIE मॉडल में, 'A' का अर्थ है :
Right Answer: एनैलाइज़
Explanation:
ADDIE प्रशिक्षण एवं अनुदेशात्मक अभिकल्प का सर्वाधिक प्रचलित प्रतिरूप है और इसके पाँच अक्षर पाँच क्रमिक चरणों को दर्शाते हैं। इसमें ‘A’ का अर्थ है एनैलाइज़ अर्थात् विश्लेषण, जिसमें प्रशिक्षण की आवश्यकता, शिक्षार्थियों की विशेषताएँ तथा अपेक्षित परिणाम निर्धारित किए जाते हैं। इसके बाद डिजाइन में उद्देश्य एवं रणनीति तय होती है, डेवलप में वास्तविक सामग्री बनाई जाती है, इम्प्लीमेंट में प्रशिक्षण दिया जाता है और इवैल्युएट में उसकी प्रभावशीलता आँकी जाती है। मूल्यांकन प्रत्येक चरण के साथ सतत रूप से भी चलता रहता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q17. भारतीय कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवसाय लोकाचार सिद्धान्त जिसमें एक व्यक्ति को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है कि वह संघर्षों और घर्षण से बच सके, इस सिद्धांत को कहा जाता है :
Right Answer: ‘सद्भाव’ का सिद्धांत
Explanation:
भारतीय कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवसाय लोकाचार में ‘सद्भाव’ का सिद्धांत अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसके अन्तर्गत व्यक्ति को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है कि वह संघर्ष एवं घर्षण की स्थितियों से बचे तथा सहकर्मियों, ग्राहकों एवं समाज के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगपूर्ण सम्बन्ध बनाए रखे। इसका दार्शनिक आधार भारतीय चिन्तन की वह दृष्टि है जो सम्पूर्ण सृष्टि को परस्पर जुड़ा हुआ मानती है, अतः दूसरों के अहित में अपना हित सम्भव नहीं। इससे संगठन में टीम भावना, मनोबल तथा दीर्घकालीन स्थायित्व बढ़ता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q18. एक नेतृत्व शैली जो नेताओं के स्वयं के हित से परे जाकर और इसके बजाय अनुयायियों को बढ़ने और विकसित करने में मदद करने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करती है, कहलाती है :
Right Answer: सेवक नेतृत्व
Explanation:
सेवक नेतृत्व की अवधारणा रॉबर्ट ग्रीनलीफ ने दी। यह नेतृत्व शैली नेता के अपने हित एवं महत्त्वाकांक्षा से परे जाकर इस बात पर ध्यान केन्द्रित करती है कि अनुयायियों को बढ़ने, विकसित होने तथा अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुँचने के अवसर कैसे दिए जाएँ। ऐसा नेता पहले सेवा करता है और फिर नेतृत्व करता है; वह सुनने, सहानुभूति, संरक्षकत्व एवं समुदाय-निर्माण को प्राथमिकता देता है। इसके विपरीत आकर्षक नेतृत्व नेता के व्यक्तिगत प्रभामंडल पर टिका होता है और परिस्थितिजन्य नेतृत्व अनुयायियों की परिपक्वता के अनुसार शैली बदलने की बात करता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q19. हेनरी फेयोल थे :
Right Answer: फ्रेंच उद्योगपति
Explanation:
हेनरी फेयोल फ्रांसीसी खनन इंजीनियर एवं उद्योगपति थे, जिन्हें आधुनिक प्रबंध सिद्धांत का जनक कहा जाता है। वे कोमैम्बॉल्ट नामक कोयला-इस्पात कंपनी के प्रबंध निदेशक रहे और उन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर 1916 में ‘एडमिनिस्ट्रेशन इंडस्ट्रियल एट जनरल’ नामक कृति लिखी। उन्होंने प्रबंध के चौदह सिद्धांत तथा प्रबंध के पाँच कार्य — नियोजन, संगठन, समादेश, समन्वय एवं नियंत्रण — प्रतिपादित किए। इसके विपरीत एफ० डब्ल्यू० टेलर अमेरिकी थे और वैज्ञानिक प्रबंध के जनक माने जाते हैं, जबकि मैक्स वेबर जर्मन समाजशास्त्री थे।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q20. व्यवसाय खरीदार व्यवहार के मॉडल में ‘उत्पाद एवम्सेवा की पसंद’ निम्न में से किसके अन्तर्गत आता है ?
Right Answer: खरीदारों की प्रतिक्रिया
Explanation:
व्यवसाय क्रेता व्यवहार के प्रतिरूप में विपणन तथा अन्य उद्दीपक क्रय संगठन तक पहुँचते हैं, जहाँ क्रय केन्द्र एवं निर्णय प्रक्रिया उन्हें प्रसंस्कृत करती है, और अन्ततः क्रेता की प्रतिक्रियाएँ प्रकट होती हैं। इन्हीं प्रतिक्रियाओं में उत्पाद एवं सेवा की पसंद, आपूर्तिकर्ता का चुनाव, आदेश की मात्रा, वितरण की शर्तें, सेवा की शर्तें तथा भुगतान की शर्तें सम्मिलित होती हैं। पर्यावरण में आर्थिक, प्रौद्योगिकीय, राजनीतिक एवं प्रतिस्पर्धी शक्तियाँ आती हैं, जो क्रय निर्णय को बाहर से प्रभावित करती हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q21. निम्नलिखित में से कौन-सा आंतरिक भर्ती स्रोत नहीं है ?
Right Answer: कार्यकारी खोज फर्म
Explanation:
भर्ती के स्रोत आन्तरिक तथा बाह्य दो प्रकार के होते हैं। आन्तरिक स्रोतों में पदोन्नति, स्थानान्तरण, वर्तमान कर्मचारियों की सिफारिशें तथा कर्मचारी रेफरल सम्मिलित हैं, क्योंकि इनमें रिक्ति संगठन के भीतर से अथवा उसके कर्मचारियों के माध्यम से भरी जाती है। इनसे मनोबल बढ़ता है, लागत घटती है और चयन का जोखिम कम रहता है। कार्यकारी खोज फर्म अर्थात् एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म एक बाह्य स्रोत है, जिसे प्रायः ‘हेड हंटर’ कहा जाता है और जो उच्च प्रबंधकीय पदों के लिए बाहर से उपयुक्त प्रतिभा खोजकर लाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q22. किसी उद्योग में अपनी बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले रनर-अप फर्म को कहा जाता है :
Right Answer: मार्केट चैलेंजर
Explanation:
किसी उद्योग में बाजार हिस्सेदारी के आधार पर फर्मों को चार वर्गों में रखा जाता है। मार्केट लीडर सर्वाधिक हिस्सेदारी वाली अग्रणी फर्म होती है। मार्केट चैलेंजर वह रनर-अप फर्म है जो दूसरे या तीसरे स्थान पर होते हुए भी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करती है और नेता अथवा अपने समकक्षों पर आक्रामक रूप से आक्रमण करती है। मार्केट फॉलोवर संघर्ष से बचकर नेता का अनुसरण करते हुए अपनी स्थिति बनाए रखती है, तथा मार्केट निचर बाजार के किसी छोटे एवं उपेक्षित खण्ड में विशेषज्ञता प्राप्त कर लेती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q23. एक उद्यमी जो नवाचार पसंद करता है और किसी नई या रचनात्मक चीज पर काम करने का आनंद लेता है, उसे कहा जाता है :
Right Answer: आदर्शवादी
Explanation:
उद्यमियों के व्यक्तित्व-प्रकारों के वर्गीकरण में ‘आदर्शवादी’ वह उद्यमी है जिसे नवाचार पसंद होता है और जो किसी नई अथवा रचनात्मक वस्तु पर कार्य करने में आनन्द अनुभव करता है। ऐसे उद्यमी विचार एवं कल्पना से संचालित होते हैं और प्रायः किसी बड़े उद्देश्य से प्रेरित रहते हैं, यद्यपि नित्य की प्रशासनिक एवं वित्तीय बारीकियों में उनकी रुचि कम होती है। इसके विपरीत ‘ऑप्टिमाइजर’ व्यवस्था सुधारने में, ‘एनालिस्ट’ समस्या के व्यवस्थित विश्लेषण में तथा ‘फायर-बॉल’ अपनी ऊर्जा, उत्साह एवं तीव्र गति से कार्य करने में विश्वास रखता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q24. प्रत्याशा सिद्धांत के अनुसार, ‘किसी दिए गए कार्य को करने वाले व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली संभाव्यता प्रयासों की मात्रा ही निष्पादन की ओर ले जाती है’, को कहा जाता है :
Right Answer: प्रयास-प्रदर्शन संबंध
Explanation:
विक्टर व्रूम के प्रत्याशा सिद्धांत के अनुसार अभिप्रेरणा तीन सम्बन्धों पर निर्भर करती है। प्रयास-प्रदर्शन सम्बन्ध वह सम्भाव्यता है जिसे व्यक्ति यह मानते हुए अनुभव करता है कि एक निश्चित मात्रा में प्रयास लगाने से अपेक्षित निष्पादन प्राप्त हो जाएगा। प्रदर्शन-पुरस्कार सम्बन्ध वह विश्वास है कि निर्धारित स्तर पर निष्पादन करने से वांछित पुरस्कार अवश्य मिलेगा। पुरस्कार-व्यक्तिगत लक्ष्य सम्बन्ध यह बताता है कि मिलने वाला पुरस्कार व्यक्ति की अपनी आवश्यकताओं को कितना संतुष्ट करता है। तीनों प्रबल हों तभी अभिप्रेरणा उच्च होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q25. प्रेषक द्वारा सूचना में हेरा-फेरी करना ताकि प्राप्तकर्ता को यह अधिक अनुकूल लगे, इसे कहा जाता है :
Right Answer: छनन
Explanation:
छनन अर्थात् फिल्टरिंग संचार की एक प्रमुख बाधा है, जिसमें प्रेषक जानबूझकर सूचना में हेरा-फेरी करता है ताकि वह प्राप्तकर्ता को अधिक अनुकूल एवं स्वीकार्य लगे। संगठनों में यह प्रायः तब होता है जब अधीनस्थ अपने वरिष्ठ को केवल अच्छी खबर बताते हैं और प्रतिकूल तथ्य छिपा या हल्का कर देते हैं। संगठन में जितने अधिक ऊर्ध्वाधर स्तर होंगे, छनन की सम्भावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसके विपरीत सूचना अधिभार तब होता है जब सूचना व्यक्ति की प्रसंस्करण क्षमता से अधिक हो जाए, और संचार आशंका संवाद के प्रति अनुचित तनाव एवं भय को कहते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q26. एक बाज़ार-कवरेज रणनीति जिसमें एक फर्म एक या कुछ खंडों के बड़े हिस्से पर ध्यान केंद्रित करती है, उसे कहते हैं :
Right Answer: आला विपणन
Explanation:
आला विपणन अर्थात् निच मार्केटिंग वह बाजार-कवरेज रणनीति है जिसमें फर्म सम्पूर्ण बाजार अथवा अनेक खण्डों के छोटे-छोटे हिस्सों के स्थान पर एक या कुछ ही खण्डों के बड़े हिस्से पर ध्यान केन्द्रित करती है। इसे संकेन्द्रित विपणन भी कहा जाता है। इसका लाभ यह है कि सीमित संसाधनों वाली फर्म भी अपने चुने हुए खण्ड की आवश्यकताओं की गहरी समझ विकसित कर उसमें प्रबल स्थिति बना लेती है। जोखिम यह है कि वह खण्ड सिकुड़ जाए अथवा कोई बड़ी कंपनी उसमें प्रवेश कर ले। अविभेदित विपणन में सम्पूर्ण बाजार को एक समान माना जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q27. कंपनी अधिनियम 2013 की किस धारा के तहत केन्द्र सरकार को किसी कंपनी को अपना नाम सुधारने का निर्देश देने का अधिकार है, यदि अनजाने में उसका नाम किसी मौजूदा कंपनी के नाम से मिलता-जुलता पंजीकृत हो गया हो ?
Right Answer: धारा 16
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 16 केन्द्र सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि किसी कंपनी का नाम अनजाने में ऐसा पंजीकृत हो गया हो जो किसी पूर्व-विद्यमान कंपनी के नाम के समान अथवा उससे अत्यधिक मिलता-जुलता हो, तो वह उसे नाम बदलने का निर्देश दे सकती है। कंपनी को निर्देश मिलने के तीन माह के भीतर साधारण प्रस्ताव पारित कर नाम बदलना होता है। इसी प्रकार यदि कोई पंजीकृत ट्रेडमार्क का स्वामी आपत्ति करे तो वह निर्धारित अवधि में केन्द्र सरकार को आवेदन कर सकता है। धारा 13 नाम परिवर्तन की सामान्य प्रक्रिया बताती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q28. वह मूल्य - निर्धारण रणनीति जिसमें कम्पनी सभी ग्राहकों से समान मूल्य और भाड़ा वसूलती है, चाहे उनका स्थान कुछ भी हो, कहलाती है :
Right Answer: एकरूप - वितरित मूल्य - निर्धारण
Explanation:
एकरूप-वितरित मूल्य-निर्धारण वह रणनीति है जिसमें कंपनी अपने सभी ग्राहकों से वस्तु का समान मूल्य तथा समान भाड़ा वसूलती है, चाहे वे कहीं भी स्थित हों। इसे ‘डाक टिकट मूल्य-निर्धारण’ भी कहा जाता है, क्योंकि डाक टिकट की दर भी दूरी पर निर्भर नहीं करती। इसका लाभ यह है कि प्रशासन सरल हो जाता है, राष्ट्रव्यापी विज्ञापन में एक ही मूल्य बताया जा सकता है और दूरस्थ ग्राहक भी जुड़े रहते हैं; किन्तु निकट के ग्राहकों को यह कुछ महँगा पड़ता है। इसके विपरीत क्षेत्र मूल्य-निर्धारण में देश को भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में बाँटकर अलग-अलग दरें तय की जाती हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q29. निम्नलिखित में से कौन - सा ‘एकल उपयोग योजना’ नहीं है ?
Right Answer: नीति
Explanation:
योजनाओं को उनके उपयोग की आवृत्ति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। एकल उपयोग योजनाएँ किसी एक विशिष्ट उद्देश्य अथवा परिस्थिति के लिए बनाई जाती हैं और उद्देश्य पूरा होते ही समाप्त हो जाती हैं; कार्यक्रम, परियोजना तथा बजट इसी श्रेणी में आते हैं। इसके विपरीत स्थायी योजनाएँ बार-बार आने वाली परिस्थितियों में मार्गदर्शन देती हैं और दीर्घकाल तक प्रयोग में आती रहती हैं। नीति एक स्थायी योजना है, क्योंकि वह निर्णय लेने के लिए सामान्य दिशानिर्देश प्रस्तुत करती है। उद्देश्य, कार्यविधि तथा नियम भी स्थायी योजनाएँ हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q30. साझेदारी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: यह एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है।
Explanation:
भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार साझेदारी उन व्यक्तियों का सम्बन्ध है जो किसी ऐसे व्यवसाय के लाभ को बाँटने पर सहमत हों जो सबके द्वारा अथवा सबकी ओर से किसी एक के द्वारा चलाया जा रहा हो। यह फर्म के नाम से संचालित होती है और सामान्यतः एक सतत लाभ चाहने वाला उद्यम होती है, जो किसी एक विशिष्ट उद्यम अथवा एकल सौदे तक सीमित नहीं रहती। अतः यह कहना कि साझेदारी एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है, गलत है। ऐसी सीमित व्यवस्था तो विशेष साझेदारी अथवा संयुक्त उपक्रम की विशेषता होती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q31. कौन-सा अनुपात व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि (फंड) में मालिकों के निधि (फंड) के अनुपात को दर्शाता है ?
Right Answer: इक्विटी अनुपात
Explanation:
इक्विटी अनुपात, जिसे स्वामित्व अनुपात अथवा प्रोप्राइटरी अनुपात भी कहा जाता है, यह दर्शाता है कि व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि में स्वामियों के निधि का अनुपात कितना है। इसे स्वामियों के कोष को कुल सम्पत्तियों अथवा कुल निधि से भाग देकर निकाला जाता है। इसका ऊँचा मान यह बताता है कि व्यवसाय बाह्य ऋणों पर कम निर्भर है, अतः उसकी दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति सुदृढ़ एवं लेनदारों के लिए सुरक्षित है। इसके विपरीत ऋण-इक्विटी अनुपात बाह्य ऋण तथा स्वामियों के कोष का सम्बन्ध बताता है और उत्तोलन की मात्रा दर्शाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q32. अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक- 29 किसके लिए निर्धारित है ?
Right Answer: अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थ- व्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग
Explanation:
अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक 29 का शीर्षक ‘अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग’ है। यह मानक उन देशों की इकाइयों पर लागू होता है जहाँ मुद्रा की क्रयशक्ति इतनी तेजी से घटती है कि ऐतिहासिक लागत पर आधारित विवरण भ्रामक हो जाते हैं। इसके अनुसार वित्तीय विवरणों को तुलन-पत्र की तिथि पर प्रचलित मापन इकाई के अनुसार पुनर्व्यक्त करना आवश्यक है, जिसके लिए सामान्य मूल्य सूचकांक का उपयोग होता है। तीन वर्षों में संचयी मुद्रास्फीति सौ प्रतिशत के निकट होना इसका प्रमुख संकेतक माना जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q33. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषता नहीं है ?
Right Answer: आंतरिक नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता को समाप्त करना
Explanation:
कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं में लेनदेन की स्वचालित रिकॉर्डिंग एवं वर्गीकरण, वित्तीय आँकड़ों की तत्काल प्रोसेसिंग एवं रिपोर्टिंग, तथा स्कंध प्रबंधन एवं वेतन जैसी अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकरण सम्मिलित हैं। तीसरा विकल्प गलत है, क्योंकि कम्प्यूटरीकरण आन्तरिक नियंत्रण की आवश्यकता समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक महत्त्वपूर्ण बना देता है। आँकड़ों की सुरक्षा, प्रवेश-अधिकार, पासवर्ड, ऑडिट ट्रेल तथा नियमित बैकअप जैसे नियंत्रण न हों तो त्रुटि एवं छल-कपट का जोखिम कहीं अधिक बढ़ जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q34. यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी के पंजीकरण के संबंध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी भी दस्तावेज में कोई असत्य या गलत जानकारी प्रस्तुत करता है या कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, जिसके बारे में वह जानता है, तो वह किस धारा के तहत धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा ?
Right Answer: धारा 447 [ धारा 7(5)]
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 7 कंपनी के निगमन की प्रक्रिया से सम्बन्धित है। इसकी उपधारा 5 यह प्रावधान करती है कि यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण के सम्बन्ध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी दस्तावेज में जानबूझकर असत्य अथवा गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो वह धोखाधड़ी के लिए धारा 447 के अन्तर्गत दंडनीय होगा। धारा 447 धोखाधड़ी को परिभाषित करती है और उसके लिए न्यूनतम छह माह से लेकर दस वर्ष तक का कारावास तथा सम्बन्धित राशि के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान करती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q35. निम्न में से कौन-सा अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है ?
Right Answer: प्रभावी निर्देशन
Explanation:
अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों की व्याख्या का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में वर्षों की तुलना कर प्रवृत्ति स्पष्ट करना, विभिन्न मदों में हुए परिवर्तनों को उजागर करना, तथा एक ही उद्योग की फर्मों के बीच अन्तः-फर्म तुलना करना सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त यह तरलता, शोधन क्षमता एवं लाभप्रदता का मूल्यांकन भी करता है। ‘प्रभावी निर्देशन’ प्रबंध का एक स्वतंत्र कार्य है, जिसमें नेतृत्व, अभिप्रेरणा एवं पर्यवेक्षण आते हैं; यह अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q36. A, B तथा C 7 : 5 : 4 के अनुपात में लाभ बाँटते हैं। C की मृत्यु 30 जून 2022 को हुई तथा वर्ष 2021-22 का लाभ 24,000 रु० था। 1 अप्रैल 2022 से 30 जून 2022 तक की अवधि के लिए C के खाते में लाभ का कितना हिस्सा बनेगा ?
Right Answer: 1,500 रुपये
Explanation:
साझेदार की मृत्यु वर्ष के बीच में होने पर उसका लाभ में हिस्सा पिछले वर्ष के लाभ के आधार पर समय के अनुपात में निकाला जाता है। कुल अनुपात 7 जोड़ 5 जोड़ 4 अर्थात् 16 है, जिसमें C का भाग 4 बटा 16 यानी एक-चौथाई है। पिछले वर्ष का लाभ 24,000 रुपये था, अतः पूरे वर्ष के लिए C का हिस्सा 6,000 रुपये बनता है। किन्तु वह केवल 1 अप्रैल से 30 जून तक अर्थात् तीन माह जीवित रहा, जो वर्ष का एक-चौथाई है। इसलिए 6,000 का एक-चौथाई अर्थात् 1,500 रुपये उसके खाते में जमा किए जाएँगे।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q37. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प कंपनी गठन में ज्ञापन-पत्र की भूमिका का सही वर्णन करता है ?
Right Answer: यह कंपनी का चार्टर होता है, जो बाहरी दुनिया के साथ उसके संबंधों और उसकी गतिविधियों के दायरे को परिभाषित करता है।
Explanation:
ज्ञापन-पत्र अर्थात् मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन कंपनी का चार्टर अथवा आधारभूत दस्तावेज है, जो उसके निगमन के समय रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाता है। यह बाहरी दुनिया के साथ कंपनी के सम्बन्धों को नियंत्रित करता है और उसकी गतिविधियों का दायरा परिभाषित करता है। इसमें नाम खण्ड, पंजीकृत कार्यालय खण्ड, उद्देश्य खण्ड, दायित्व खण्ड, पूँजी खण्ड तथा अभिदान खण्ड होते हैं। इसके दायरे से बाहर किया गया कार्य ‘अल्ट्रा वायर्स’ अर्थात् शक्ति से परे होकर शून्य माना जाता है। कंपनी के आन्तरिक नियम तो अन्तर्नियम अर्थात् आर्टिकल्स में दिए जाते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q38. जब चेक का अनादर होता है, तो प्राप्त छूट, दी गई छूट, और प्राप्त छूट या दी गई छूट को रद्द कर किसके माध्यम से दर्ज किया जाता है ?
Right Answer: मुख्य जर्नल
Explanation:
जब कोई प्राप्त चेक बैंक द्वारा अनादरित कर दिया जाता है, तो केवल बैंक खाते को क्रेडिट करना पर्याप्त नहीं होता; उस लेनदेन के समय दी गई अथवा प्राप्त की गई छूट को भी रद्द करना पड़ता है, क्योंकि भुगतान वास्तव में हुआ ही नहीं। छूट की यह उलट प्रविष्टि रोकड़ बही के छूट स्तम्भों में नहीं की जा सकती, क्योंकि वे स्तम्भ केवल जोड़ने का कार्य करते हैं और उनका शेष नहीं निकाला जाता। इसलिए ऐसी समस्त प्रविष्टियाँ मुख्य जर्नल अर्थात् जर्नल प्रॉपर के माध्यम से की जाती हैं, जहाँ ग्राहक का खाता पुनः डेबिट किया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q39. A, B तथा C का पुराना लाभ-विभाजन अनुपात 3 : 2 : 1 है। D को नया साझेदार बनाया गया। तय हुआ कि C और D के बीच अनुपात वही रहेगा जो A और B के बीच है, तथा A, B और C का सापेक्ष अनुपात अपरिवर्तित रहेगा। नया अनुपात होगा :
Right Answer: 9 : 6 : 3 : 2
Explanation:
A तथा B के बीच का अनुपात 3 अनुपात 2 है, अतः शर्त के अनुसार C तथा D के बीच भी यही अनुपात रहेगा। मान लें C का भाग 3k तथा D का भाग 2k है। अब दूसरी शर्त यह है कि A, B एवं C का पारस्परिक अनुपात 3 अनुपात 2 अनुपात 1 ही बना रहे। चूँकि C का भाग 3k है, अतः उसी अनुपात में A का भाग 9k तथा B का भाग 6k होगा। इस प्रकार चारों साझेदारों का नया लाभ-विभाजन अनुपात 9k अनुपात 6k अनुपात 3k अनुपात 2k अर्थात् 9 : 6 : 3 : 2 प्राप्त होता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q40. निम्नलिखित में से किसे खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है ?
Right Answer: खाता - बही
Explanation:
खाता-बही अर्थात् लेजर को खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है, क्योंकि इसी में व्यवसाय के समस्त व्यक्तिगत, वास्तविक एवं नाममात्र खाते वर्गीकृत रूप में रखे जाते हैं। जर्नल तथा सहायक बहियों में लेनदेन कालक्रमानुसार लिखे जाते हैं, किन्तु किसी एक खाते की पूरी स्थिति वहाँ से नहीं मिलती; उसके लिए खतौनी करके खाता-बही में लाना आवश्यक होता है। यहीं से प्रत्येक खाते का शेष निकलता है, तलपट बनता है और अन्ततः अन्तिम खाते तैयार होते हैं। इसी कारण इसे लेखांकन का ‘राजा’ भी कहा जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q41. उद्योग के औसत की तुलना में किसी संगठन द्वारा प्राप्त .............. सकल लाभ अनुपात, अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने के सफल प्रयास को इंगित करता है।
Right Answer: उच्च
Explanation:
सकल लाभ अनुपात सकल लाभ तथा शुद्ध विक्रय के बीच का प्रतिशत सम्बन्ध है और यह उत्पादन एवं क्रय की कार्यकुशलता को मापता है। यदि किसी संगठन का यह अनुपात उद्योग के औसत से उच्च हो, तो इसका अर्थ है कि वह अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने में सफल रहा है, अथवा उसे बेहतर विक्रय मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत होती है, क्योंकि संचालन व्यय वहन करने के बाद भी उसके पास पर्याप्त अधिशेष बचता है। निम्न अनुपात ऊँची उत्पादन लागत अथवा अकुशल क्रय नीति का संकेत देता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q42. ............. वित्तीय विवरण तैयार करने में एक मार्गदर्शक के रूप में लेखाकारों द्वारा पालन किए जाने वाले रीति-रिवाज, उपयोग या प्रथाएँ हैं।
Right Answer: लेखांकन प्रथाएँ
Explanation:
लेखांकन प्रथाएँ अर्थात् अकाउंटिंग कन्वेंशंस वे रीति-रिवाज, परिपाटियाँ अथवा व्यवहार हैं जिनका पालन लेखाकार वित्तीय विवरण तैयार करते समय एक मार्गदर्शक के रूप में करते हैं। ये किसी विधि द्वारा निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि लम्बे व्यावहारिक अनुभव तथा सामान्य स्वीकृति से विकसित हुई हैं। इनमें रूढ़िवादिता अथवा सतर्कता, पूर्ण प्रकटीकरण, सारता तथा संगतता की प्रथाएँ प्रमुख हैं। इसके विपरीत लेखांकन अवधारणाएँ आधारभूत मान्यताएँ हैं, जैसे चालू व्यवसाय एवं द्वैत पक्ष, तथा लेखांकन मानक अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी अनिवार्य दिशानिर्देश होते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q43. किसी कम्पनी के समापन की स्थिति में आरक्षित पूँजी किस पूँजी का एक भाग है ?
Right Answer: अभिदत्त पूँजी
Explanation:
आरक्षित पूँजी अभिदत्त पूँजी के उस अयाचित भाग को कहते हैं जिसे कंपनी विशेष प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय ले लेती है कि वह केवल कंपनी के समापन के समय ही माँगा जाएगा। इसका उद्देश्य लेनदारों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है, क्योंकि समापन के समय यह राशि उपलब्ध रहती है। एक बार आरक्षित घोषित हो जाने पर इसे न तो सामान्य व्यवसाय में माँगा जा सकता है और न ही इसके विरुद्ध कोई प्रभार सृजित किया जा सकता है। इसे पूँजी संचय अथवा संचय निधि से भिन्न समझना चाहिए, क्योंकि वे लाभ से सृजित होते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q44. इनमें से कौन-सा ‘प्रावधानों’ के लिए सही नहीं है ?
Right Answer: यह व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बनाया जाता है। कुछ कानून के तहत अनिवार्य भी हैं।
Explanation:
प्रावधान चालू लेखा अवधि से सम्बन्धित किसी ज्ञात देयता अथवा व्यय के लिए बनाया जाता है, जिसकी राशि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होती, जैसे संदिग्ध ऋणों का प्रावधान अथवा कर का प्रावधान। यह लाभ के विरुद्ध प्रभार होता है, अतः लाभ हो या हानि, इसे बनाना अनिवार्य है और इससे कर योग्य लाभ घट जाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि व्यवसाय की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए तथा कानून के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से जो राशि अलग रखी जाती है वह संचय अर्थात् रिजर्व होती है, जो लाभ का विनियोजन है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q45. रमा लिमिटेड ने 10 रु० वाले 40 अंश जब्त किए जिन पर 7 रु० माँगे गए तथा अंशधारी ने 5 रु० चुका दिए थे। इनमें से 30 अंशों को 6 रु० प्रति अंश पर पुनर्निर्गमित कर दिया गया। पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित राशि होगी :
Right Answer: 30 रु०
Explanation:
जब्ती के समय 40 अंशों पर अंशधारी द्वारा चुकाई गई राशि प्रति अंश 5 रुपये थी, अतः जब्ती खाते में कुल 200 रुपये गए। इनमें से 30 अंश पुनर्निर्गमित किए गए, अतः उन पर जब्ती राशि 30 गुणा 5 अर्थात् 150 रुपये होगी। पुनर्निर्गमन 6 रुपये प्रति अंश पर हुआ, जबकि अंश 10 रुपये का है, इसलिए प्रति अंश 4 रुपये की छूट दी गई और कुल छूट 30 गुणा 4 अर्थात् 120 रुपये हुई। जब्ती राशि में से यह छूट घटाने पर 150 में से 120 घटाकर 30 रुपये शेष बचते हैं, जिन्हें पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q46. प्रिंस लिमिटेड अपना रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करना चाहता है। इसने 60,000 रुपये के बुक वैल्यू के उपकरण 8,000 रुपये के लाभ पर बेचे। गतिविधियों के तहत इसकी रोकड़ प्रवाह विवरण में रिपोर्ट की जाने वाली राशि है :
Right Answer: 68,000 रुपये
Explanation:
रोकड़ प्रवाह विवरण में सम्पत्ति की बिक्री से प्राप्त वास्तविक नकद राशि निवेश गतिविधियों के अन्तर्गत दिखाई जाती है, न कि उस पर हुआ लाभ। यहाँ उपकरण का पुस्तक मूल्य 60,000 रुपये था और उसे 8,000 रुपये के लाभ पर बेचा गया, अतः वास्तविक विक्रय मूल्य 68,000 रुपये हुआ और यही राशि निवेश गतिविधियों में नकद अन्तर्वाह के रूप में रिपोर्ट होगी। 8,000 रुपये का लाभ तो परिचालन गतिविधियों में शुद्ध लाभ से घटा दिया जाता है, ताकि उसकी दोहरी गणना न हो, क्योंकि वह नकद न होकर केवल लेखांकन लाभ है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q47. यदि कोई ग्राहक पहले चालान किए गए सामान को वापस कर देता है या ग्राहक को आगे की छूट की अनुमति दी जाती है, तो कौन-सा स्रोत दस्तावेज़ जारी किया जाता है ?
Right Answer: क्रेडिट नोट
Explanation:
क्रेडिट नोट वह स्रोत दस्तावेज है जो विक्रेता अपने ग्राहक के नाम तब जारी करता है जब ग्राहक पहले चालान किया गया माल लौटा देता है, अथवा उसे कोई अतिरिक्त छूट दी जाती है या चालान में अधिक राशि लिख दी गई हो। इससे ग्राहक का खाता उतनी राशि से क्रेडिट अर्थात् कम हो जाता है और यह विक्रय वापसी बही में लिखा जाता है। इसके विपरीत डेबिट नोट क्रेता द्वारा तब बनाया जाता है जब वह माल लौटाता है और आपूर्तिकर्ता का खाता डेबिट करता है। दोनों दस्तावेज माल की वापसी के दो पक्षों को दर्शाते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q48. चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश किस शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है ?
Right Answer: आकस्मिक देनदारियाँ
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 तथा संशोधित लेखांकन मानकों के अनुसार चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश को तुलन-पत्र में देयता के रूप में नहीं दिखाया जाता, क्योंकि उसकी घोषणा अभी अंशधारियों की वार्षिक आम सभा में होनी शेष रहती है। जब तक अंशधारी उसे स्वीकृत नहीं कर देते, तब तक वह कंपनी का वर्तमान दायित्व नहीं बनता। अतः इसे आकस्मिक देनदारियों के शीर्षक के अन्तर्गत टिप्पणी के रूप में प्रकट किया जाता है। स्वीकृति मिलने पर ही उस वर्ष में इसे देयता के रूप में मान्यता दी जाती है और भुगतान किया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q49. उद्यम द्वारा अपनी परिचालन गतिविधियों से प्राप्त या प्राप्य राशि है :
Right Answer: राजस्व
Explanation:
राजस्व से तात्पर्य उस सकल राशि से है जो उद्यम अपनी सामान्य परिचालन गतिविधियों से प्राप्त करता है अथवा जिसे प्राप्त करने का उसे अधिकार है। इसमें वस्तुओं की बिक्री, सेवाओं का प्रतिफल तथा ब्याज, स्वामिस्व एवं लाभांश जैसी प्राप्तियाँ सम्मिलित होती हैं। यह सकल अन्तर्वाह है, इसमें से व्यय घटाए नहीं जाते। इसके विपरीत लाभ अथवा मुनाफा तब निकलता है जब राजस्व में से समस्त व्यय घटा दिए जाएँ, और आय एक व्यापक पद है जिसमें राजस्व तथा अन्य लाभ दोनों सम्मिलित रहते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q50. एक कंपनी का शुद्ध लाभ मार्जिन 5% है, कुल संपत्ति 90,00,000 रुपये है और संपत्ति पर रिटर्न 9% है। इसका कुल संपत्ति कारोबार अनुपात होगा :
Right Answer: 1.8
Explanation:
संपत्ति पर प्रतिफल, शुद्ध लाभ मार्जिन तथा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात के बीच ड्यूपॉन्ट विश्लेषण के अनुसार यह सम्बन्ध होता है — संपत्ति पर प्रतिफल बराबर शुद्ध लाभ मार्जिन गुणा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात। प्रश्न में संपत्ति पर प्रतिफल 9 प्रतिशत तथा शुद्ध लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत दिया गया है। अतः कुल संपत्ति कारोबार अनुपात 9 को 5 से भाग देने पर 1.8 प्राप्त होता है। इसका अर्थ है कि कंपनी अपनी कुल संपत्तियों के मूल्य का 1.8 गुना विक्रय उत्पन्न कर रही है, जो संपत्तियों के उपयोग की कार्यकुशलता दर्शाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q51. परिसंपत्ति की मूल लागत 2,50,000 रुपये है। परिसंपत्ति का उपयोगी जीवन 10 वर्ष है और शुद्ध अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये होने का अनुमान है। हर साल लगाए जाने वाले मूल्य ह्रास की राशि की गणना करें :
Right Answer: 20,000 रु०
Explanation:
सीधी रेखा विधि में मूल्य ह्रास की वार्षिक राशि निकालने के लिए सम्पत्ति की मूल लागत में से उसका अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य घटाकर शेष को उपयोगी जीवन के वर्षों की संख्या से भाग दिया जाता है। यहाँ मूल लागत 2,50,000 रुपये तथा अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये है, अतः ह्रास योग्य राशि 2,00,000 रुपये हुई। इसे उपयोगी जीवन 10 वर्ष से भाग देने पर प्रतिवर्ष 20,000 रुपये मूल्य ह्रास प्राप्त होता है। इस विधि की विशेषता यह है कि प्रत्येक वर्ष समान राशि लगाई जाती है और जीवन के अन्त में पुस्तक मूल्य घटकर अवशिष्ट मूल्य रह जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q52. नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में सेवानिवृत्ति लाभों के लिए लेखांकन किस भारतीय लेखांकन मानक के अंतर्गत आता है ?
Right Answer: AS-15
Explanation:
नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में कर्मचारी लाभों तथा सेवानिवृत्ति लाभों का लेखांकन भारतीय लेखांकन मानक AS-15 के अन्तर्गत आता है, जिसका शीर्षक ‘कर्मचारी लाभ’ है। यह मानक अल्पकालीन लाभों जैसे वेतन एवं बोनस, सेवा-उपरान्त लाभों जैसे उपदान, पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा अन्य दीर्घकालीन लाभों की मान्यता एवं मापन की विधि निर्धारित करता है। इसमें परिभाषित अंशदान योजना तथा परिभाषित लाभ योजना का भेद किया गया है और परिभाषित लाभ योजनाओं के लिए बीमांकिक मूल्यांकन अनिवार्य है। AS-12 सरकारी अनुदान से सम्बद्ध है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q53. निम्नलिखित में से किसे जीएसटी से छूट नहीं है ?
Right Answer: अंतरराज्यीय बिक्री
Explanation:
वस्तु एवं सेवा कर एक गंतव्य आधारित उपभोग कर है, जो वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है। ब्याज को वित्तीय सेवा मानकर सामान्यतः छूट दी गई है, कर्मचारियों द्वारा दावा किया गया यात्रा व्यय आपूर्ति नहीं माना जाता और सरकार को दी जाने वाली अनेक सेवाएँ भी छूट सूची में आती हैं। इसके विपरीत अंतरराज्यीय बिक्री जीएसटी के दायरे में पूरी तरह आती है और उस पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अर्थात् आईजीएसटी लगाया जाता है, जिसे केन्द्र सरकार वसूलकर उपभोग करने वाले राज्य के साथ बाँटती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q54. ऋणपत्र पर ब्याज को आमतौर पर कंपनी के वित्तीय विवरणों में किस रूप में माना जाता है ?
Right Answer: कंपनी के मुनाफे के खिलाफ शुल्क के रूप में
Explanation:
ऋणपत्र कंपनी के लिए उधार ली गई पूँजी है, अंश पूँजी नहीं। इस पर देय ब्याज एक निश्चित संविदात्मक दायित्व है, जिसका भुगतान कंपनी को लाभ हो या हानि, दोनों ही स्थितियों में करना ही पड़ता है। इसीलिए इसे लाभ के विरुद्ध प्रभार माना जाता है, न कि लाभ का विनियोजन। इसे लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है और यह कर योग्य लाभ को भी घटा देता है, जिससे कंपनी को कर-कवच का लाभ मिलता है। इसके विपरीत अंशों पर दिया जाने वाला लाभांश लाभ का विनियोजन होता है और केवल लाभ होने पर ही दिया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q55. चालू अनुपात 2.5 : 1, तरल अनुपात 1.25 : 1, स्कंध 21 लाख रु०, तथा बैंक ओवरड्राफ्ट एवं पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं। कंपनी के चालू दायित्व ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 16,80,000 रु०
Explanation:
चालू अनुपात 2.5 अनुपात 1 है, अतः चालू सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की ढाई गुना हैं। तरल अनुपात 1.25 अनुपात 1 है, अतः तरल सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की सवा गुना हैं। यहाँ पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं, इसलिए स्कंध चालू सम्पत्तियों तथा तरल सम्पत्तियों का अन्तर होगा, अर्थात् 2.5 में से 1.25 घटाने पर 1.25 गुना चालू दायित्व। यह मान 21,00,000 रुपये दिया गया है। अतः चालू दायित्व 21,00,000 को 1.25 से भाग देने पर 16,80,000 रुपये प्राप्त होते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q56. रोकड़ बही के अनुसार शेष 2,40,000 रु०; जारी किए गए किन्तु प्रस्तुत न हुए चेक 1,36,000 रु०; जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक 90,000 रु०; बैंक शुल्क 300 रु०; बैंक द्वारा जमा ब्याज 1,250 रु०। पासबुक के अनुसार शेष होगा :
Right Answer: 2,86,950 रुपये
Explanation:
रोकड़ बही के अनुकूल शेष से आरम्भ कर पासबुक का शेष ज्ञात करने के लिए क्रमिक समायोजन किए जाते हैं। जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक की राशि जोड़ी जाती है, क्योंकि बैंक ने अभी वह घटाई नहीं है। जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक घटाए जाते हैं, क्योंकि बैंक ने उन्हें अभी जमा नहीं किया। बैंक शुल्क घटाया तथा बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज जोड़ा जाता है। अतः 2,40,000 में 1,36,000 जोड़कर, 90,000 तथा 300 घटाकर और 1,250 जोड़ने पर 2,86,950 रुपये प्राप्त होते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q57. दोनों शेष राशियों (कैश बुक और पास बुक के अनुसार बैंक शेष) में अंतर निम्नलिखित में से किस कारण से उत्पन्न नहीं हो सकता है ?
Right Answer: पसंद और नापसंद
Explanation:
रोकड़ बही तथा पासबुक के बैंक शेष में अन्तर मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होता है। पहला समय का अन्तर है, जैसे जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक अथवा जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक। दूसरा कारण दोनों में से किसी एक पक्ष द्वारा किया गया लेन-देन है, जैसे बैंक शुल्क, ब्याज अथवा सीधे जमा हुई राशि, जिसकी जानकारी दूसरे पक्ष को बाद में मिलती है। तीसरा कारण लिपिकीय त्रुटियाँ हैं। पसंद और नापसंद जैसा कोई व्यक्तिपरक कारण इस अन्तर का आधार नहीं बन सकता।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q58. किस चार्ट का उपयोग डेटा की शृंखला में मौजूद परिवर्तनों या प्रवृत्ति की पहचान करने के लिए किया जाता है ?
Right Answer: रेखा या अंकगणितीय चार्ट
Explanation:
रेखा चार्ट अथवा अंकगणितीय चार्ट का उपयोग किसी शृंखला में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों तथा प्रवृत्ति की पहचान के लिए किया जाता है। इसमें क्षैतिज अक्ष पर समय तथा उदग्र अक्ष पर चर का मान अंकित कर बिन्दुओं को क्रमशः रेखा से जोड़ दिया जाता है, जिससे उतार-चढ़ाव एवं दीर्घकालीन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। इसके विपरीत पाई चार्ट किसी समग्र के भागों का अनुपात दर्शाता है, बार ग्राफ विभिन्न वर्गों की तुलना करता है और चित्रलेख आँकड़ों को चित्रों के माध्यम से सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q59. मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में, मूल्य ह्रास की राशि :
Right Answer: वर्षों तक स्थिर रहती है
Explanation:
मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में प्रत्येक वर्ष मूल्य ह्रास की राशि समान अर्थात् स्थिर रहती है। इस विधि में प्रतिवर्ष मूल्य ह्रास के बराबर राशि लाभ-हानि खाते में डालकर उतनी ही राशि बाहर प्रतिभूतियों में निवेश कर दी जाती है, ताकि सम्पत्ति का जीवनकाल समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु नकद उपलब्ध हो। निवेश पर प्राप्त ब्याज भी पुनः उसी निधि में लगाया जाता है। वार्षिक अंशदान की गणना डूबती निधि सारणी की सहायता से की जाती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रतिस्थापन के समय धन की व्यवस्था पहले से ही हो जाती है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q60. आर० एन० कार्टर के अनुसार, ‘‘.......... व्यावसायिक लेनदेन को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान और कला है जिसके परिणामस्वरूप धन या धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है।’’
Right Answer: बही - खाता
Explanation:
आर० एन० कार्टर की यह प्रसिद्ध परिभाषा बही-खाता अर्थात् बुक-कीपिंग की है। उनके अनुसार बही-खाता उन समस्त व्यावसायिक लेनदेनों को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान एवं कला है जिनके परिणामस्वरूप धन अथवा धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है। इसे विज्ञान इसलिए कहा गया क्योंकि यह निश्चित नियमों पर चलता है और कला इसलिए क्योंकि इन नियमों का व्यावहारिक प्रयोग कौशल माँगता है। बही-खाता लेखांकन की केवल प्रथम अवस्था है; उसके आगे वर्गीकरण, सारांशीकरण, विश्लेषण एवं निर्वचन का कार्य लेखांकन करता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Delhi
- SSC CGL 12th September 2025 Shift-1 Solved Exam Paper
- SSC CGL 12th September 2025 Shift-2 Solved Exam Paper
- SSC CGL 12th September 2025 Shift-3 Solved Exam Paper
- SSC CGL 13th September 2025 Shift-1 Solved Exam Paper
- SSC CGL 13th September 2025 Shift-2 Solved Exam Paper
- SSC CGL 13th September 2025 Shift-3 Solved Exam Paper
Haryana
- HTET PGT Computer Science 2024
- HTET PGT Geography 2024 Solved Exam Paper
- HTET PGT Hindi Exam Paper 2024 Solved
- HTET PRT Solved Exam Paper 2024
- HTET Biology PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Chemistry PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Commerce PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Economics PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET English PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Fine Art PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET History PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Home Science PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Mathematics PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Music PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Physical Education PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Psychology PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Sanskrit PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET Sociology PGT 2024 Solved Exam Paper
- HTET PGT Physics 2024 Solved Exam Paper
- HSSC Group D Previous Year Solved Exam Paper November 2018
0 Comments
Be the first to comment.
Leave a comment
Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.