Psychology: 257 MCQs with Answers

Psychology Questions and Answers - India Study Institute
Psychology

Your Progress

0%
0%
257
Total
0
Attempted
257
Remaining

Psychology Questions and Answers

India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.

Psychology is one of the most important sections of the Haryana Teacher Eligibility Test (HTET). A strong understanding of Child Psychology, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, and Educational Psychology can significantly improve your HTET score. On this page, you will find comprehensive HTET Psychology Notes, chapter-wise multiple-choice questions (MCQs), previous year questions with detailed explanations, practice tests, and important concepts based on the latest HTET syllabus.

Our study material is designed for PRT, TGT, and PGT aspirants preparing for the Haryana Teacher Eligibility Test. Every topic is explained in a simple and exam-oriented manner to help candidates understand concepts quickly and practice effectively. Regular mock tests and topic-wise quizzes will help you identify weak areas and improve your performance before the examination.

Whether you are starting your HTET preparation or revising important psychology topics, this page provides everything you need in one place. Practice regularly, review previous year papers, and strengthen your conceptual understanding to maximize your chances of success in the HTET examination.

HTET Solved Exam Papers - HTET Previous Year Exam Papers: 

HTET Psychology, HTET Psychology Notes, HTET Psychology MCQs, HTET Child Psychology, Educational Psychology, HTET Pedagogy, Child Development and Pedagogy, HTET Previous Year Questions, HTET Practice Test, HTET Mock Test, HTET PRT Psychology, HTET TGT Psychology, HTET PGT Psychology, Psychology Quiz, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, Teaching Aptitude, Haryana Teacher Eligibility Test, HTET Exam Preparation, Psychology Questions with Answers, India Study Institute

Other Exam Papers:

Q1. सही कूट का चयन कीजिए :

बुद्धि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?

(a) बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं। 

(b) लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती। 

(c) तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है। 

(d) बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है।

सही कूट का चयन कीजिए :

Right Answer: (a) एवं (c)


Explanation:

  • कथन (a) "बौद्धिक विकास पर आनुवंशिकता का प्रभाव पड़ता है, वातावरण का नहीं" – यह कथन सत्य नहीं है। बुद्धि के विकास में आनुवंशिकता (Heredity) और वातावरण (Environment) दोनों की परस्पर क्रिया (Interaction) महत्वपूर्ण होती है। केवल एक को ज़िम्मेदार ठहराना गलत है। अच्छा वातावरण मिलने पर बुद्धि का बेहतर विकास होता है।
  • कथन (b) "लैंगिक भिन्नता बौद्धिक भिन्नता का कारण नहीं होती" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। महिला या पुरुष होने से किसी की बुद्धि कम या ज़्यादा नहीं होती। आधुनिक मनोविज्ञान यह स्पष्ट मानता है कि लिंग के आधार पर बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता।
  • कथन (c) "तीव्र बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति की परिचायक होती है" – यह कथन पूरी तरह सत्य नहीं माना जाता। स्मरणशक्ति (Memory) और बुद्धि (Intelligence) दो अलग-अलग मानसिक क्षमताएं हैं। कोई व्यक्ति चीज़ों को बहुत जल्दी रट या याद रख सकता है (तीव्र स्मरणशक्ति), लेकिन ज़रूरी नहीं कि उसकी तार्किक या समस्या-समाधान की क्षमता (बुद्धि) भी उतनी ही तीव्र हो। इसलिए तीव्र बुद्धि को केवल तीव्र स्मरणशक्ति का परिचायक नहीं माना जा सकता।
  • कथन (d) "बुद्धि नवीन परिस्थितियों में समायोजन की योग्यता देती है" – यह कथन बिल्कुल सत्य है। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिकों (जैसे स्टर्न) के अनुसार, बुद्धि की परिभाषा ही यही है कि व्यक्ति नई परिस्थितियों और वातावरण में खुद को कितनी कुशलता से ढाल या समायोजित (Adjust) कर पाता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q2. निम्नलिखित में से कौन आनुवंशिकता से प्रभावित नहीं होता ?

Right Answer: अभिवृत्ति


Explanation:

यहाँ सभी विकल्पों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिवृत्ति आनुवंशिकता (Heredity) से प्रभावित क्यों नहीं होती:

  • (1) अभिक्षमता (Aptitude): अभिक्षमता का अर्थ है किसी विशिष्ट कार्य या क्षेत्र (जैसे- संगीत, गणित, या कला) में कौशल सीखने की जन्मजात क्षमता या योग्यता। यह काफी हद तक आनुवंशिकता और जैविक कारकों से प्रभावित होती है।
  • (2) अभिवृत्ति (Attitude): अभिवृत्ति (या दृष्टिकोण) किसी व्यक्ति, वस्तु, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक सोचने और महसूस करने का एक तरीका है। यह पूरी तरह से अर्जित (Learned) होती है। बच्चा अपने परिवार, समाज, संस्कृति और अनुभवों (वातावरण) से सीखता है कि उसे किस चीज़ के प्रति कैसा नज़रिया रखना है। इसका आनुवंशिकता से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
  • (3) संवेग (Emotion): संवेगात्मक प्रवृत्तियाँ (जैसे- जल्दी क्रोधित होना, शांत रहना, या डरना) व्यक्ति के मूल स्वभाव (Temperament) से जुड़ी होती हैं। मूल स्वभाव का एक बड़ा हिस्सा आनुवंशिक बनावट और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर निर्भर करता है।
  • (4) अभिरुचि (Interest): यद्यपि अभिरुचि वातावरण से बहुत अधिक प्रभावित होती है, लेकिन कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे जुड़वां बच्चों पर किए गए शोध) में पाया गया है कि कुछ चीज़ों में रुचि रखने का झुकाव (जैसे- अंतर्मुखी या बहिर्मुखी गतिविधियाँ) व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना से भी थोड़ा प्रभावित हो सकता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?

निम्नलिखित में से कौन-सी लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ शैक्षिक अभ्यासों में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए ?

(a) सजातीय समूहन 

(b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु 

(c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन 

(d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति 

सही कूट का चयन कीजिए :

Right Answer: (a), (c) एवं (d)


Explanation:

इस प्रश्न को ध्यान से समझने की आवश्यकता है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन-सी "लैंगिक पक्षपातपूर्ण क्रियाएँ" (Gender Biased Practices) शैक्षिक अभ्यासों (Classroom Practices) में सम्मिलित नहीं होनी चाहिए

यहाँ प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण दिया गया है:

  • (a) सजातीय समूहन (Homogeneous Grouping): लिंग के आधार पर लड़के और लड़कियों के अलग-अलग समूह बनाना (जैसे- लड़कों का अलग ग्रुप, लड़कियों का अलग ग्रुप)। यह एक पक्षपातपूर्ण क्रिया है, जो बच्चों में दूरियां बढ़ाती है। इसे कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए
  • (b) लिंग तटस्थ विषय-वस्तु (Gender-Neutral Content): ऐसी पाठ्यपुस्तकें या सामग्री जिसमें लड़के और लड़कियों को समान रूप से प्रस्तुत किया गया हो (जैसे- पाठ में महिला को डॉक्टर और पुरुष को खाना बनाते हुए दिखाना)। यह एक सकारात्मक और अच्छी क्रिया है। इसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए (यह पक्षपातपूर्ण नहीं है)।
  • (c) रूढ़िबद्ध व्यावसायिक मार्गदर्शन (Stereotypical Vocational Guidance): बच्चों को उनके लिंग के आधार पर करियर की सलाह देना (जैसे- लड़कियों को कहना कि तुम गृह विज्ञान या नर्सिंग चुनो, और लड़कों को इंजीनियरिंग या सेना में जाने को कहना)। यह पूरी तरह से लैंगिक पक्षपात है, इसे शिक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए
  • (d) शिक्षक की पूर्वाग्रही अभिवृत्ति (Biased Attitude of Teacher): शिक्षक का यह सोचना कि "लड़के गणित में अच्छे होते हैं और लड़कियाँ भाषा में।" यह पूर्वाग्रह बच्चों के विकास को रोकता है, इसलिए इसे भी कक्षा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?

Right Answer: थायमस ग्रंथि


Explanation:

मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं। 

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q5. बच्चों में सामाजीकरण को बढ़ावा देने में शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सहायक नहीं है ?

Right Answer: वैयक्तिक परियोजना कार्य देना


Explanation:

सामाजीकरण (Socialization) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे समाज के नियमों, मूल्यों, और व्यवहारों को सीखते हैं और अन्य लोगों के साथ घुलना-मिलना सीखते हैं। एक शिक्षक का उद्देश्य कक्षा में ऐसे अवसर प्रदान करना होता है जिससे बच्चे एक-दूसरे से जुड़ सकें। 

(1) वैयक्तिक परियोजना कार्य देना (Individual Project Work): जब शिक्षक किसी बच्चे को 'व्यक्तिगत' या 'अकेले' करने वाला प्रोजेक्ट देता है, तो बच्चा केवल अपने आप तक सीमित रहता है। इसमें उसे अन्य बच्चों के साथ बातचीत या सहयोग करने का मौका नहीं मिलता। इसलिए, यह सामाजीकरण को बढ़ावा देने में सहायक नहीं है। 

(2) सामाजिक जिम्मेदारियाँ सौंपना: (जैसे- क्लास मॉनिटर बनाना या ग्रुप लीडर बनाना) इससे बच्चों में नेतृत्व और सहयोग की भावना आती है, जो सामाजीकरण को बढ़ाता है।

(3) सह-पाठ्यगामी गतिविधियों का आयोजन करना: (जैसे- खेलकूद, नाटक, या सांस्कृतिक कार्यक्रम) इनमें बच्चे समूह में काम करते हैं, जिससे उनका सामाजिक विकास होता है।

(4) सामाजिक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करना: बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना सामाजीकरण का प्रत्यक्ष तरीका है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q6. विद्यार्थियों की समग्र उपलब्धि और प्रवीणता का मूल्यांकन करने के लिए, सीखने की अवधि के अंत में अभिकल्पित मूल्यांकन कहलाता है :

Right Answer: सीखने का मूल्यांकन


Explanation:

मूल्यांकन के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जिन्हें समझना बहुत आवश्यक है:

  • सीखने का मूल्यांकन (Assessment of Learning): यह मूल्यांकन सीखने की अवधि के अंत में (जैसे सत्र के अंत में, फाइनल परीक्षा में) किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र ने निर्धारित समय में कितना और क्या सीखा है। यह आमतौर पर 'योगात्मक मूल्यांकन' (Summative Assessment) का हिस्सा होता है। चूँकि आपका प्रश्न "अवधि के अंत" की बात कर रहा है, इसलिए सही उत्तर (1) है।
  • सीखने के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): यह मूल्यांकन सीखने की प्रक्रिया के दौरान (जैसे क्लास में पढ़ाते समय सवाल पूछना) किया जाता है। इसका उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की कमियों को सुधारना होता है। यह 'रचनात्मक मूल्यांकन' (Formative Assessment) का हिस्सा होता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q7. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?

Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।


Explanation:

(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।

(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।

(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।

(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?

Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता का कारण सामाजिक वातावरण होता है, भौतिक वातावरण नहीं।


Explanation:

(1) सही है: वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ ही है कि हर व्यक्ति दूसरे से अलग है, चाहे वह बुद्धि/ज्ञान (Cognitive) के स्तर पर हो या कार्य करने की क्षमता (Psychomotor) के स्तर पर।

(2) सही है: किसी व्यक्ति की प्रजाति (Species) या आनुवंशिकता (Heredity) उसके विकास और विशेषताओं को प्रभावित करती है, जो वैयक्तिक भिन्नता का एक आधार है।

(3) गलत है: यह कथन गलत है क्योंकि यह अधूरा है। वैयक्तिक भिन्नता केवल सामाजिक वातावरण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भौतिक (भौगोलिक, प्राकृतिक, जलवायु आदि) दोनों प्रकार के वातावरण का परिणाम होती है। भौतिक वातावरण भी व्यक्ति के स्वास्थ्य, विकास और व्यवहार को गहराई से प्रभावित करता है। चूँकि यह कथन "भौतिक वातावरण को नकारता है" (not the physical environment), इसलिए यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से गलत है।

(4) सही है: जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, उसके अनुभव, सोच और क्षमताएं बदलती हैं। आयु के बढ़ने के साथ-साथ दो व्यक्तियों के बीच भिन्नता और अधिक स्पष्ट हो जाती है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q9. निम्नलिखित में से प्रश्नों का कौन-सा प्रकार विद्यार्थियों के भावों की अभिव्यक्ति एवं तार्किक चिंतन की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं है ?

Right Answer: बहु विकल्पात्मक प्रकार


Explanation:

इस प्रश्न का उद्देश्य यह जानना है कि किस प्रकार के प्रश्न भावों की अभिव्यक्ति (Expression of feelings) और तार्किक चिंतन (Logical thinking) को जाँचने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

बहु विकल्पात्मक प्रश्न (Multiple Choice Questions - MCQs): ये प्रश्न 'अभिसारी चिंतन' (Convergent Thinking) पर आधारित होते हैं। इसमें विद्यार्थी को दिए गए विकल्पों में से केवल एक सही उत्तर चुनना होता है। यहाँ विद्यार्थी के पास अपने विचारों, भावनाओं या तर्क को विस्तार से रखने का कोई अवसर नहीं होता। यह केवल स्मृति (Memory) और पहचान (Recognition) की जाँच करता है, न कि सृजनात्मक या तार्किक चिंतन की। इसीलिए यह "उपयुक्त नहीं" है।

विश्लेषणात्मक (Analytical), समालोचनात्मक (Critical) और विवेचनात्मक (Discussion) प्रकार:

  • ये प्रश्न 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) को बढ़ावा देते हैं।
  • इनमें छात्र को समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विचार करना होता है, अपने तर्क (Logic) देने होते हैं और अपने विचारों (Feelings/Perspective) को विस्तार से लिखना होता है।
  • ये तीनों प्रकार उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल (Higher Order Thinking Skills - HOTS) विकसित करने के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q10. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?

Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं


Explanation:

'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:

(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।

(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।

(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।

(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q11. समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के किस संवैधानिक अधिकार की रक्षा करती है ?

Right Answer: शिक्षा का अधिकार


Explanation:

सही है: भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-A के तहत "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education - RTE) एक मौलिक अधिकार है। यह अधिकार जाति, धर्म, लिंग या शारीरिक/मानसिक क्षमता के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। समावेशी शिक्षा इसी संवैधानिक अधिकार को धरातल पर लागू करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि दिव्यांग या विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) मुख्यधारा के स्कूलों से बाहर न रहें। 

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q12. वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धान्त के सही अनुक्रम (ऊपर से नीचे) का चयन कीजिए :

Right Answer: सामान्य कारक -> लघु कारक -> प्रमुख कारक -> विशिष्ट कारक


Explanation:

1. सामान्य कारक (General Factor - g)

  • शीर्ष स्तर: पदानुक्रम के सबसे ऊपर सामान्य कारक होता है।
  • इसका अर्थ: यह किसी व्यक्ति की समग्र मानसिक ऊर्जा और बौद्धिक क्षमता को दर्शाता है। यह एक ऐसी सामान्य बुद्धि है जिसका उपयोग व्यक्ति हर प्रकार के मानसिक या संज्ञानात्मक कार्यों (cognitive tasks) में करता है।

2. प्रमुख समूह कारक (Major Group Factors)

  • दूसरा स्तर: सामान्य कारक आगे चलकर दो मुख्य व्यापक श्रेणियों में विभाजित हो जाता है।
  • इसका अर्थ: वर्नन ने दो प्रमुख समूह कारक बताए हैं:
    • शाब्दिक-शैक्षिक (v:ed): स्कूली शिक्षा, भाषा, पढ़ने-लिखने और गणित से संबंधित क्षमताएं।
    • स्थानिक-यांत्रिक (k:m): व्यावहारिक, शारीरिक और यांत्रिक (mechanical) क्षमताएं, जिनमें दिशाओं और आकृतियों की समझ (spatial awareness) शामिल है।

3. लघु समूह कारक (Minor Group Factors)

  • तीसरा स्तर: प्रमुख समूह कारक आगे छोटे और अधिक विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित होते हैं।
  • इसका अर्थ: उदाहरण के लिए, 'शाब्दिक-शैक्षिक' कारक आगे चलकर मौखिक प्रवाह (verbal fluency), संख्यात्मक क्षमता (numerical ability), या तार्किक सोच जैसे लघु कारकों में बंट सकता है। इसी तरह स्थानिक-यांत्रिक कारक यांत्रिक समझ या हस्त-कौशल में बंट सकता है।

4. विशिष्ट कारक (Specific Factors - s)

  • निचला स्तर: पदानुक्रम के सबसे निचले आधार पर विशिष्ट कारक होते हैं।
  • इसका अर्थ: ये किसी एक विशेष कार्य या परीक्षण को करने के लिए आवश्यक अत्यंत विशिष्ट क्षमताएं हैं (जैसे बीजगणित के किसी विशेष समीकरण को हल करने की क्षमता या किसी खास मशीन के पुर्जे जोड़ने की क्षमता)।

संक्षेप में, वर्नन का मानना था कि यद्यपि हम सभी में एक अंतर्निहित सामान्य बुद्धि होती है, लेकिन व्यवहार में यह पहले व्यापक कौशल (प्रमुख), फिर संकीर्ण कौशल (लघु), और अंततः विशिष्ट कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल में फ़िल्टर हो जाती है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q13. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?

Right Answer: दर्द परिवर्जन


Explanation:

अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या

मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)

दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?

दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।

अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?

अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।

  • (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
  • (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
  • (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।

चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q14. फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त के अनुसार, वह अवस्था जिसमें किशोर विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होते हैं, उसे कहा जाता है :

Right Answer: जनन अवस्था


Explanation:

सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) में पांच अवस्थाएं हैं। किशोर अवस्था (adolescence) में होने वाले परिवर्तनों के लिए जनन अवस्था ही जिम्मेदार है:

  • जनन अवस्था (Genital Stage): यह अवस्था किशोरावस्था से शुरू होती है और जीवन के अंत तक चलती है। इस चरण की मुख्य विशेषता यह है कि व्यक्ति की कामेच्छा (libido) फिर से जागृत होती है, लेकिन इस बार उसका ध्यान अपने स्वयं के शरीर के बजाय विपरीत लिंग के व्यक्तियों के साथ संबंध बनाने और यौन परिपक्वता प्राप्त करने पर केंद्रित होता है। किशोरों में सामाजिक और यौन आकर्षण इसी चरण का हिस्सा है।

अन्य विकल्पों का संक्षिप्त विवरण:

  1. लिंग अवस्था (Phallic Stage - 3 से 6 वर्ष): यहाँ बच्चा अपने लिंग के प्रति जागरूक होता है। इसमें 'ओडिपस' (Oedipus) और 'इलेक्ट्रा' (Electra) ग्रंथियाँ विकसित होती हैं।
  2. गुदा अवस्था (Anal Stage - 1 से 3 वर्ष): इस अवस्था में बच्चा मल-त्याग के नियंत्रण (potty training) पर ध्यान केंद्रित करता है।
  3. अव्यक्त अवस्था (Latency Stage - 6 वर्ष से यौवनारंभ तक): यह एक शांत अवस्था है जहाँ यौन भावनाएं दब जाती हैं और बच्चा सामाजिक कौशल और स्कूल के कार्यों पर ध्यान देता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q15. उच्च माध्यमिक स्तर के अधिगमकर्ताओं के लिए सीखने की कौन-सी रणनीति उपयुक्त नहीं है ?

Right Answer: अधिगम कार्य स्मृति स्तर पर करना


Explanation:

शिक्षण के तीन प्रमुख स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (Memory Level), अवबोध स्तर (Understanding Level), और चिंतन स्तर (Reflective Level)

  • स्मृति स्तर (Memory Level): यह शिक्षण का सबसे निचला स्तर है, जो केवल रटने (Rote Learning) और तथ्यों को याद रखने पर केंद्रित होता है। उच्च माध्यमिक स्तर (11वीं-12वीं कक्षा) के विद्यार्थी किशोरावस्था में होते हैं, जहाँ उनकी बौद्धिक क्षमताएं विकसित हो चुकी होती हैं। इस स्तर पर उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे केवल तथ्यों को याद न करें, बल्कि उनका विश्लेषण करें और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करें। इसलिए, केवल स्मृति स्तर तक सीमित रहना उनके लिए अनुपयुक्त और अपर्याप्त है।

अन्य विकल्पों का विश्लेषण (ये क्यों उपयुक्त हैं?):

(2) ज्ञान की स्वयं खोज करने देना: यह 'डिस्कवरी लर्निंग' (Discovery Learning) पर आधारित है। उच्च माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए यह बहुत प्रभावी है।

(3) कक्षा अन्तःक्रिया को उचित स्थान देना: जब विद्यार्थी चर्चा करते हैं और एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी होती है। यह सामाजिक अधिगम (Social Learning) को बढ़ावा देता है।

(4) शिक्षण-अधिगम विद्यार्थी केन्द्रित होना: आधुनिक शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित (Student-centered) है। इसका अर्थ है कि शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, रुचियों और उनकी सीखने की गति के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल शिक्षक के व्याख्यान पर आधारित।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q16. निम्नलिखित में से कौन-सी सीखने की बाल केन्द्रित विधि नहीं है ?

Right Answer: प्रदर्शन


Explanation:

शिक्षा मनोविज्ञान में शिक्षण विधियों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है: शिक्षक-केंद्रित (Teacher-centered) और बाल-केंद्रित (Child-centered)

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method): यह मुख्य रूप से शिक्षक-केंद्रित होती है। इसमें शिक्षक स्वयं किसी प्रक्रिया, प्रयोग या उपकरण का प्रदर्शन (Demonstrate) करता है, जबकि छात्र उसे ध्यानपूर्वक देखते हैं। यहाँ सीखने की प्रक्रिया में छात्र की भूमिका मुख्य रूप से एक 'दर्शक' (Observer) की होती है, न कि 'सक्रिय सहभागी' (Active participant) की। इसीलिए इसे बाल-केंद्रित नहीं माना जाता।

अन्य विकल्प बाल-केंद्रित क्यों हैं?

(2) क्षेत्र भ्रमण (Field Trip): इसमें छात्र प्रत्यक्ष रूप से वातावरण में जाकर अनुभव प्राप्त करते हैं। यह पूर्णतः अनुभव-आधारित और छात्र-सक्रियता पर केंद्रित है।

(3) अभिक्रमित अनुदेशन (Programmed Instruction): यह व्यक्तिगत गति (Self-pacing) पर आधारित विधि है। इसमें छात्र अपनी क्षमता के अनुसार सामग्री को छोटे-छोटे चरणों में पढ़कर और अभ्यास करके सीखता है। शिक्षक की भूमिका यहाँ केवल एक मार्गदर्शक की होती है।

(4) प्रायोजना (Project Method): यह विधि 'करके सीखने' (Learning by doing) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें छात्र अपनी रुचि और समस्या समाधान के आधार पर प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक होती है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q17. 'लेखन क्षमता का एक विकार जिसमें अधिगमकर्ता को अक्षर निर्माण, वर्तनी, गत्यात्मक समन्वय आदि में कठिनाई होती है' यह विकार कहलाता है :

Right Answer: डिस्ग्राफिया


Explanation:

डिस्ग्राफिया (Dysgraphia) एक विशिष्ट अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है जो मुख्य रूप से लेखन (writing) से संबंधित होती है।

जैसा कि आपने उल्लेख किया, इस विकार से ग्रसित अधिगमकर्ता को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

  • अक्षर निर्माण (Letter Formation): अक्षरों को सही आकार या बनावट में लिखने में कठिनाई।
  • वर्तनी (Spelling): शब्दों की वर्तनी में गलतियाँ करना।
  • गत्यात्मक समन्वय (Fine Motor Coordination): हाथ और उंगलियों के सूक्ष्म समन्वय में कमी, जिससे कलम पकड़ने और लिखने में समस्या होती है।
  • लेखन की गति: लिखने की गति का बहुत धीमा होना या लिखने के दौरान हाथ में जल्दी थकान महसूस होना।

अन्य विकल्पों का संक्षिप्त परिचय:

  1. डिस्लेक्सिया (Dyslexia): यह पढ़ने से संबंधित विकार है। इसमें बच्चे को अक्षरों को पहचानने, शब्दों को पढ़ने या वाक्यों को समझने में कठिनाई होती है।
  2. डिस्प्रेक्सिया (Dyspraxia): यह शारीरिक समन्वय (Motor Coordination) से संबंधित विकार है। इसमें व्यक्ति को शारीरिक संतुलन बनाने, बोलने या सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों (जैसे बटन लगाना या जूते के फीते बांधना) में कठिनाई होती है। (नोट: लेखन में कठिनाई इसका एक उप-हिस्सा हो सकती है, लेकिन मुख्य परिभाषा लेखन विकार के लिए 'डिस्ग्राफिया' ही है।)
  3. डिस्कैल्कुलिया (Dyscalculia): यह गणित से संबंधित विकार है। इसमें संख्याओं को समझने, गणना (calculation) करने और गणितीय अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई होती है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q18. श्रवण बाधित बच्चों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा अनुदेशन का तरीका उपयुक्त है?

(a) सांकेतिक भाषा

(b) अंगुली वर्तनी

(c) ओष्ठ पठन

(d) संकेतित भाषण

Right Answer: (a), (b), (c) एवं (d)


Explanation:

व्याख्या: ये सभी तकनीकें क्यों उपयुक्त हैं?

  1. (a) सांकेतिक भाषा (Sign Language): यह श्रवण बाधित बच्चों के लिए संचार का सबसे प्राथमिक और प्राकृतिक माध्यम है। इसमें हाथों के संकेतों, चेहरे के हाव-भाव और शरीर की भाषा का उपयोग करके विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
  2. (b) अंगुली वर्तनी (Finger Spelling): इसमें हाथों की उंगलियों के आकार का उपयोग करके वर्णमाला के अक्षरों को दर्शाया जाता है। यह उन शब्दों (जैसे नाम, विशिष्ट तकनीकी शब्द) के लिए बहुत उपयोगी है जिनका कोई विशिष्ट सांकेतिक चिन्ह नहीं होता।
  3. (c) ओष्ठ पठन (Lip Reading): इसमें बच्चा वक्ता के होंठों की हलचल को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि क्या कहा जा रहा है। यह बच्चों को समाज में संवाद करने में बहुत मदद करता है।
  4. (d) संकेतित भाषण (Cued Speech): यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें भाषण (speech) को स्पष्ट करने के लिए हाथों के संकेतों (cues) का उपयोग किया जाता है। यह होंठों के आकार (lip shapes) और हाथों के संकेतों को मिलाता है, ताकि बच्चा ध्वनियों के बीच अंतर कर सके जो दिखने में एक जैसे लगते हैं (जैसे 'p' और 'b')।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q19. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रगतिशील शिक्षा का एक घटक नहीं है ?

Right Answer: स्मरण


Explanation:

जॉन डीवी (John Dewey) जैसे शिक्षाविदों द्वारा समर्थित 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) रटने (rote learning) और तथ्यों को निष्क्रिय रूप से ग्रहण करने का कड़ा विरोध करती है। स्मरण का मुख्य ध्यान किसी भी जानकारी के व्यावहारिक उपयोग को समझे बिना उसे केवल दोहराने और याद करने पर होता है। यह प्रगतिशील शिक्षा के मूल दर्शन के बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यह शिक्षा प्रणाली पाठ्यपुस्तक की सामग्री को रटने के बजाय आलोचनात्मक सोच (critical thinking), समस्या-समाधान (problem-solving) और गहरी वैचारिक समझ (conceptual understanding) को प्राथमिकता देती है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q20. निम्नलिखित में से कौन-सी सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: केवल शैक्षिक उपलब्धि को मापना


Explanation:

सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE - Continuous and Comprehensive Evaluation) में "व्यापक" (Comprehensive) शब्द का स्पष्ट अर्थ छात्र के सर्वांगीण विकास (all-round development) का आकलन करना है। इस रूपरेखा के अनुसार मूल्यांकन में शैक्षिक (Scholastic - जैसे गणित, विज्ञान और भाषाएं) और सह-शैक्षिक (Co-scholastic - जैसे जीवन कौशल, दृष्टिकोण, मूल्य, खेल और कला) दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाना अनिवार्य है। केवल अकादमिक प्रदर्शन या शैक्षिक उपलब्धि को मापना CCE प्रणाली के "व्यापक" लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Was this quiz helpful?
Published: | Last Updated: | Total Questions: 257
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

Educational Content Creator

I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

Experience: 10+ years in Education and Competitive Exam Content Creator

0 Comments

Be the first to comment.

Leave a comment

Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.