Psychology - Biological Bases of Behaviour: 5 MCQs with Answers

Biological Bases of Behaviour - Psychology
Psychology - Biological Bases of Behaviour

Psychology- Biological Bases of Behaviour

मस्तिष्क की संरचना, तंत्रिका तंत्र, न्यूरोट्रांसमीटर, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ तथा मस्तिष्क इमेजिंग तकनीकों से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न।

Your Progress

0%
0%
5
Total
0
Attempted
5
Remaining

Q1. शंखपालि का एक क्षेत्र जिसकी क्षति स्पष्ट रूप से भाषण और लिखित भाषा की समझ को खराब करती है, कहलाता है :

Right Answer: वर्निक क्षेत्र


Explanation:

वर्निक क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ शंखपालि (टेम्पोरल लोब) के पश्च भाग में स्थित होता है और इसकी खोज कार्ल वर्निक ने 1874 में की। यह क्षेत्र बोले गए तथा लिखे गए शब्दों के अर्थ को समझने का कार्य करता है। इसकी क्षति से वर्निक वाचाघात होता है, जिसमें रोगी धाराप्रवाह किन्तु निरर्थक वाक्य बोलता है और दूसरों की बात समझ नहीं पाता। इसके विपरीत ब्रोका क्षेत्र ललाट पालि में होता है और वाणी के उत्पादन से जुड़ा है, जबकि आर्क्युएट फैसिक्युलस इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाला तन्त्रिका पथ है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q2. अवसाद निम्नलिखित में से किसकी कम सक्रियता के कारण होता है ?

Right Answer: सेरोटोनिन


Explanation:

सेरोटोनिन एक मोनोएमीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मनोदशा, निद्रा, भूख, आवेग नियंत्रण तथा चिन्ता के नियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अवसाद के मोनोएमीन परिकल्पना के अनुसार सिनैप्स में सेरोटोनिन की कम सक्रियता ही उदासी, निराशा, निद्रा-विकार एवं आत्मघाती विचारों से जुड़ी होती है। इसीलिए चयनात्मक सेरोटोनिन पुनर्ग्रहण संदमक अर्थात् एसएसआरआई औषधियाँ, जैसे फ्लुऑक्सेटीन, सिनैप्स में इसकी उपलब्धता बढ़ाकर अवसाद का उपचार करती हैं। डोपामाइन की अधिकता मनोविदलता से, गाबा की कमी चिन्ता से तथा ग्लूटामेट उत्तेजक संचरण एवं अधिगम से सम्बन्धित है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q3. बेडली (1996) के अनुसार कॉर्टेक्स के ललाट पालि की क्षति केन्द्रीय कार्यकारी को नुकसान पहुँचाती है और पीड़ित व्यक्ति अपने प्रसंस्करण संसाधनों को उचित रूप से निर्देशित नहीं कर पाता। यह विकार कहलाता है :

Right Answer: डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम


Explanation:

एलन बेडली के कार्यशील स्मृति प्रतिरूप में केन्द्रीय कार्यकारी सर्वोच्च नियंत्रक इकाई है, जो ध्यान बाँटने, कार्यों के बीच अदल-बदल करने तथा ध्वन्यात्मक लूप और दृश्य-स्थानिक स्केचपैड का संचालन करने का कार्य करती है। ललाट पालि की क्षति से यही इकाई क्षतिग्रस्त हो जाती है और डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम उत्पन्न होता है। इसमें रोगी योजना बनाने, कार्य आरम्भ करने, ध्यान बदलने तथा आवेग रोकने में असमर्थ हो जाता है, विचलित होता रहता है और अनुचित व्यवहार दोहराता है। यह अल्जाइमर या पार्किंसन जैसे अपह्रासी रोगों से भिन्न एक कार्यकारी नियंत्रण विकार है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q4. डोपामाईन नामक न्यूरोट्रांसमीटर मुख्यतः पाया जाता है :

Right Answer: मस्तिष्क और सब्सटेंशिया नाइग्रा के न्यूरॉन्स में


Explanation:

डोपामाइन एक कैटेकोलामीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मुख्यतः मस्तिष्क के न्यूरॉन्स में तथा विशेष रूप से मध्य मस्तिष्क की सब्सटेंशिया नाइग्रा में पाया जाता है। यहाँ से निग्रोस्ट्राइएटल मार्ग द्वारा यह गतिविधि के नियंत्रण को संचालित करता है, जबकि मेसोलिम्बिक मार्ग पुरस्कार, सुख एवं अभिप्रेरणा से जुड़ा है। सब्सटेंशिया नाइग्रा की कोशिकाओं के क्षय से डोपामाइन घट जाता है और पार्किंसन रोग उत्पन्न होता है, जिसमें कम्पन एवं जड़ता दिखती है। इसके विपरीत इसकी अतिसक्रियता मनोविदलता से जोड़ी जाती है। न्यूरोपेशीय जंक्शन पर तो एसीटिलकोलीन कार्य करता है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q5. एक इमेजिंग तकनीक जो मस्तिष्क के रक्त प्रवाह और कई शारीरिक और तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन करती है, को कहते हैं :

Right Answer: पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी)


Explanation:

पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक कार्यात्मक इमेजिंग तकनीक है, जिसमें रक्त में अल्प मात्रा में रेडियोधर्मी अनुरेखक, प्रायः रेडियोधर्मी ग्लूकोज, प्रविष्ट कराया जाता है। मस्तिष्क का जो भाग अधिक सक्रिय होता है वहाँ रक्त प्रवाह तथा उपापचय बढ़ जाता है और वहीं अनुरेखक अधिक एकत्र होता है। उत्सर्जित पॉजिट्रॉन का पता लगाकर रंगीन मानचित्र बनाया जाता है, जो रक्त प्रवाह एवं अनेक शारीरिक तथा तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन देता है। इसके विपरीत सीटी तथा एमआरआई मुख्यतः संरचनात्मक चित्र देते हैं, यद्यपि एफएमआरआई कार्यात्मक सूचना भी प्रदान करता है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Published: 03 August 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


Was this topic helpful?
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

Educational Content Creator

I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

Experience: 10+ years in Education and Competitive Exam Content Creator

0 Comments

Be the first to comment.

Leave a comment

Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.