Psychology - Growth and Development: 46 MCQs with Answers

Growth and Development - Psychology
Psychology - Growth and Development

Psychology- Growth and Development

Growth and Development MCQs, Practice Test & Previous Year Questions

Welcome to the Growth and Development section, your one-stop destination for mastering one of the most important topics in Child Development and Pedagogy (CDP). This page offers a comprehensive collection of Growth and Development MCQs, online quizzes, previous year questions, practice tests, and detailed answer explanations to help you prepare effectively for teaching and competitive examinations.

Growth and Development is a fundamental topic in education and psychology that explains how children develop physically, cognitively, emotionally, socially, and morally from infancy to adulthood. Understanding the principles, stages, and factors affecting growth and development is essential for teachers, educators, and aspirants preparing for various government recruitment examinations.

Our carefully curated question bank includes exam-oriented multiple-choice questions based on the latest syllabus and previous examination patterns. Every question is accompanied by a detailed explanation to help you understand the concept and improve your problem-solving skills.

What You'll Learn

  • Meaning and Principles of Growth and Development
  • Stages of Human Growth and Development
  • Physical, Cognitive, Emotional, and Social Development
  • Language and Moral Development
  • Factors Affecting Growth and Development
  • Individual Differences among Children
  • Nature vs. Nurture
  • Educational Implications of Child Development
  • Previous Year Questions with Solutions
  • Topic-wise Practice Tests and Online Quizzes

This resource is highly beneficial for candidates preparing for CTET, HTET, REET, UPTET, DSSSB, KVS, NVS, PRT, TGT, PGT, B.Ed., D.El.Ed., Super TET, State TETs, and other teaching eligibility and recruitment examinations. Regular practice will improve your conceptual understanding, increase accuracy, and boost confidence for the final examination.

Start solving Growth and Development MCQs today and strengthen your preparation with free online quizzes, detailed explanations, and exam-oriented practice questions.

Your Progress

0%
0%
46
Total
0
Attempted
46
Remaining

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा नवीन लक्षणों के अधिग्रहण के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण नहीं है ?

Right Answer: थायमस ग्रंथि


Explanation:

मानव विकास के अध्ययन (जैसे हरलॉक के विकास के सिद्धांतों) में, विकासात्मक परिवर्तनों को मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 'नवीन लक्षणों का अधिग्रहण' (नई चीजें जुड़ना) और 'पुराने लक्षणों का लोप' (पुरानी चीजें समाप्त होना) शामिल हैं। 

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q2. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की निम्नलिखित अवस्थाओं को उनकी विशेषता के साथ सुमेलित कीजिए :

नैतिक अवस्थाएंविशेषता 
(a) इनाम के लालच में अनुपालन(i) दूसरों की स्वीकृति पाना
(b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था(ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित 
(c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध(iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य
(d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त(iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व 

सही कूट का चयन कीजिए :

Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)


Explanation:

कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धान्त की अवस्थाओं की व्याख्या

लॉरेंस कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को 3 मुख्य स्तरों और 6 अवस्थाओं में बांटा है। दिए गए विकल्पों का सही मिलान और उसका कारण इस प्रकार है:

  • (a) इनाम के लालच में अनुपालन ➔ (ii) स्वार्थपूर्ति पर आधारित यह 'पूर्व-पारंपरिक स्तर' (Pre-conventional level) की दूसरी अवस्था (साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता) है। इसमें बच्चे का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कार्य करने से उसे क्या व्यक्तिगत लाभ या इनाम मिलेगा। यह पूरी तरह से स्वार्थ और अपनी जरूरतों को पूरा करने पर आधारित होता है।
  • (b) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना अवस्था ➔ (iv) न्याय एवं कानून को महत्त्व यह 'पारंपरिक स्तर' (Conventional level) की चौथी अवस्था है। इस चरण में व्यक्ति यह समझने लगता है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सामाजिक नियमों, कानूनों और न्याय व्यवस्था का सम्मान करना और उनका पालन करना आवश्यक है।
  • (c) अच्छे अन्तः वैयक्तिक संबंध ➔ (i) दूसरों की स्वीकृति पाना यह 'पारंपरिक स्तर' की तीसरी अवस्था है, जिसे "अच्छा लड़का/अच्छी लड़की" (Good boy-Good girl) अवस्था भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपने परिवार या समाज में दूसरों की नज़र में अच्छा बनने और उनकी प्रशंसा या स्वीकृति पाने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
  • (d) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धान्त ➔ (iii) अन्तःकरण द्वारा मान्य शाश्वत मूल्य यह 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-conventional level) की छठी और सर्वोच्च अवस्था है। यहाँ व्यक्ति समाज के स्थापित कानूनों से भी ऊपर उठकर मानवता, न्याय, समानता और अपने अन्तःकरण (अंतरात्मा) के शाश्वत मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q3. पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त के अनुसार, जब अधिगमकर्ता अपने और अपने पर्यावरण के बीच उचित तालमेल बनाए रखता है, तो यह प्रक्रिया कहलाती है :

Right Answer: संतुलनीकरण


Explanation:

जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) सिद्धान्त में, संतुलनीकरण (Equilibration) वह जैविक और मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बच्चा (अधिगमकर्ता) अपनी समझ और बाहरी दुनिया (पर्यावरण) के बीच संतुलन (Balance) स्थापित करता है।

इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए पियाजे द्वारा बताई गई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है:

  • आत्मसातीकरण (Assimilation): जब कोई बच्चा किसी नई जानकारी या नए अनुभव को अपने पहले से मौजूद ज्ञान या विचार (जिसे पियाजे 'स्कीमा' कहते हैं) में आसानी से फिट कर लेता है, तो उसे आत्मसातीकरण कहते हैं।
    • उदाहरण: एक बच्चे ने कुत्ते को देखा है जिसके चार पैर हैं। जब वह पहली बार किसी बिल्ली को देखता है, तो वह उसे भी 'कुत्ता' ही कहता है।
  • समायोजीकरण / समायोजन (Accommodation): जब नई जानकारी बच्चे की पुरानी समझ से मेल नहीं खाती (यानी असंतुलन पैदा होता है), तो बच्चा अपने पुराने ज्ञान (स्कीमा) में बदलाव या संशोधन करता है।
    • उदाहरण: जब बच्चे को पता चलता है कि यह जानवर भौंकता नहीं बल्कि म्याऊँ करता है, तो वह अपने दिमाग में बिल्ली के लिए एक नया 'स्कीमा' (विचार) बनाता है।
  • संतुलनीकरण (Equilibration): यह आत्मसातीकरण और समायोजीकरण के बीच की कड़ी है। बच्चा लगातार अपने पर्यावरण से नई चीजें सीखता है। जब पुरानी समझ काम नहीं आती (असंतुलन या Disequilibrium), तो वह नई समझ (Accommodation) विकसित करता है। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अपने मानसिक विचारों और बाहरी पर्यावरण के बीच एक सफल तालमेल (Balance) बनाए रखने की प्रक्रिया को ही 'संतुलनीकरण' या 'साम्यधारण' कहा जाता है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q4. प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेगों के संबंध में कौन-सा विकल्प सही है ?

Right Answer: अनियंत्रित एवं अयुक्तिसंगत


Explanation:

प्रारंभिक किशोरावस्था (Early Adolescence - लगभग 10 से 14 वर्ष की आयु) में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्तर पर बहुत तीव्र बदलाव होते हैं। मनोवैज्ञानिक जी. स्टेनली हॉल ने किशोरावस्था को "तनाव और तूफान" (Storm and Stress) की अवस्था कहा है।

इस उम्र में संवेगों (Emotions) की प्रकृति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • अनियंत्रित (Uncontrolled): प्रारंभिक किशोरावस्था में संवेग बहुत तीव्र होते हैं और किशोरों का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत कम होता है। वे अचानक से बहुत अधिक गुस्सा हो सकते हैं, या छोटी सी बात पर बहुत अधिक दुखी हो सकते हैं। उनके मूड में तेजी से बदलाव (Mood swings) आना इस अवस्था की एक सामान्य विशेषता है।
  • अयुक्तिसंगत या तर्कहीन (Irrational): इस उम्र में मस्तिष्क का वह हिस्सा (Prefrontal Cortex) जो तार्किक सोच, विवेक और निर्णय लेने को नियंत्रित करता है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इसके विपरीत, भावनाओं को नियंत्रित करने वाला हिस्सा (Amygdala) अत्यधिक सक्रिय होता है। इसलिए, उनके संवेगात्मक निर्णय अक्सर किसी ठोस तर्क या विवेक पर आधारित नहीं होते हैं; वे बस भावनाओं के बहाव में आकर प्रतिक्रिया देते हैं।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उत्तर बाल्यावस्था की दल-क्रियाओं का उनके अधिगम पर सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित नहीं करता ?

Right Answer: पूर्वाग्रही मनोवृत्ति धारण करते हैं


Explanation:

उत्तर बाल्यावस्था (लगभग 9 से 12 वर्ष) को दल-आयु भी कहा जाता है, क्योंकि इस अवस्था में बच्चे समवयस्क दलों में अत्यधिक सक्रिय रहते हैं। इन दल-क्रियाओं से वे अनुरूप व्यवहार सीखते हैं, सामाजिक मानदण्डों का पालन करना सीखते हैं तथा सामाजिक अंतर्दृष्टि विकसित करते हैं — ये तीनों अधिगम पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। किन्तु दल के प्रति अतिनिष्ठा के कारण बच्चे अपने समूह के पक्ष में और अन्य समूहों के विरुद्ध पूर्वाग्रही मनोवृत्ति भी धारण कर लेते हैं। पूर्वाग्रह चिंतन को संकुचित करता है और वस्तुनिष्ठ अधिगम में बाधा डालता है। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा बच्चों के सामाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला एक धनात्मक कारक नहीं है ?

Right Answer: सामाजिक वंचन


Explanation:

सामाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक अपने समाज के मूल्य, मानदण्ड एवं व्यवहार-प्रतिमान सीखकर उसका उपयोगी सदस्य बनता है। उपयुक्त भाषा उसे विचार-विनिमय एवं संप्रेषण में सक्षम बनाती है, लोकतांत्रिक वातावरण उसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति, सहभागिता एवं सहिष्णुता सिखाता है, तथा सकारात्मक सामाजिक मनोवृत्ति उसे दूसरों के साथ सहयोग करना सिखाती है। इसके विपरीत सामाजिक वंचन में बालक को उचित सामाजिक अंतःक्रिया, स्नेह एवं अवसर नहीं मिल पाते, जिससे उसका भाषिक एवं संवेगात्मक विकास अवरुद्ध होता है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q7. सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया ?

Right Answer: वायगोट्स्की


Explanation:

सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत का प्रतिपादन रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वायगोट्स्की ने किया। उनके अनुसार बालक का संज्ञानात्मक विकास एकाकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक अंतःक्रिया एवं सांस्कृतिक साधनों, विशेषकर भाषा, के माध्यम से होता है। उन्होंने समीपस्थ विकास का क्षेत्र तथा पाड़ लगाना जैसी अवधारणाएँ दीं, जिनमें अधिक सक्षम साथी या शिक्षक की सहायता से बालक अपनी वर्तमान क्षमता से आगे बढ़ता है। कोह्लबर्ग ने नैतिक विकास, एरिक्सन ने मनोसामाजिक विकास तथा पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत दिया। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q8. पियाजे ने अपने संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत में किस अवधारणा पर चर्चा नहीं की है ?

Right Answer: पृथक्करण


Explanation:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की मूल अवधारणाएँ हैं — स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजीकरण एवं संतुलनीकरण। आत्मसातीकरण में बालक नई सूचना को अपने पूर्व-निर्मित मानसिक ढाँचे में समाहित कर लेता है, जबकि समायोजीकरण में वह नई सूचना के अनुरूप अपने ढाँचे को ही बदल देता है। संतुलनीकरण इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया है, जो विकास को आगे बढ़ाती है। पृथक्करण पियाजे की शब्दावली का भाग नहीं है; यह अधिगम एवं अनुबंधन से जुड़ा पद है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q9. बच्चे का विकास किस मार्ग का अनुसरण करता है ?

Right Answer: सर्पिल


Explanation:

बालक का विकास सीधी रेखा में नहीं, बल्कि सर्पिल मार्ग का अनुसरण करता है। इसका अर्थ है कि विकास की गति सदैव एक-सी नहीं रहती — कभी तीव्र होती है तो कभी धीमी, और कुछ अवस्थाओं में ठहराव भी आता है। बालक किसी कौशल में आगे बढ़ने से पहले अर्जित योग्यता को सुदृढ़ करने हेतु कुछ समय रुकता है, फिर उच्चतर स्तर पर वही प्रतिमान दोहराता है। इसी कारण विकास न पूर्णतः रेखीय है और न ही वृत्तीय, क्योंकि वह कभी अपने प्रारंभ बिंदु पर नहीं लौटता। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q10. किस मनोवैज्ञानिक ने अपने विकासात्मक सिद्धांत में ‘आंतरिक संभाषण’ प्रत्यय को प्रस्तुत किया ?

Right Answer: वायगोट्स्की


Explanation:

आंतरिक संभाषण अर्थात् Inner Speech की अवधारणा लेव वायगोट्स्की ने दी। उनके अनुसार बालक पहले दूसरों से बात करने हेतु बाह्य भाषा का प्रयोग करता है, फिर लगभग तीन से सात वर्ष की आयु में स्वयं से ऊँची आवाज़ में बोलता है, जिसे आत्मकेन्द्रित भाषण कहते हैं। धीरे-धीरे यह भाषण मौन होकर भीतर चला जाता है और आंतरिक संभाषण बन जाता है, जो चिंतन, आत्म-नियंत्रण एवं समस्या-समाधान का माध्यम बनता है। पियाजे इसे विकास के साथ लुप्त होने वाला मानते थे, जबकि वायगोट्स्की ने इसे चिंतन का आधार बताया। अतः विकल्प (2) सही है।
Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Published: 29 June 2026 | Last Updated: 21 August 2026 |


Was this topic helpful?
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

Educational Content Creator

I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

Experience: 10+ years in Education and Competitive Exam Content Creator

0 Comments

Be the first to comment.

Leave a comment

Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.