Psychology - Guidance and Counselling: 4 MCQs with Answers

Guidance and Counselling - Psychology
Psychology - Guidance and Counselling

Psychology- Guidance and Counselling

निर्देशन एवं परामर्श से संबंधित प्रश्न — निर्देशन की प्रकृति, प्रकार तथा शिक्षा आयोगों की सिफारिशें।

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Q1. निर्देशन (Guidance) दिया जाना चाहिए—

Right Answer: आजीवन


Explanation:

निर्देशन (Guidance) एक सतत, व्यापक एवं जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं को समझने, अपनी क्षमताओं एवं सीमाओं को पहचानने तथा उचित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है। यह केवल तभी नहीं दिया जाता जब कोई समस्या उत्पन्न हो अथवा केवल विषय चयन के समय, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक चरण में — बाल्यावस्था, किशोरावस्था, व्यावसायिक जीवन तथा वृद्धावस्था में — आवश्यक होता है। यह विद्यालयी जीवन तक सीमित न रहकर व्यक्ति के समग्र विकास से जुड़ा रहता है, इसीलिए इसे आजीवन प्रक्रिया कहा जाता है।
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Q2. किस शिक्षा समिति ने छात्र सेवाओं में व्यावसायिक नियुक्ति सहित मार्गदर्शन एवं परामर्श शामिल करने की सिफारिश की?

Right Answer: शिक्षा आयोग (1964–66)


Explanation:

शिक्षा आयोग (1964–66), जिसे इसके अध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह कोठारी के नाम पर कोठारी आयोग कहा जाता है, स्वतंत्र भारत का सबसे व्यापक शिक्षा आयोग था। इसने 'शिक्षा एवं राष्ट्रीय विकास' शीर्षक से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा छात्र सेवाओं के अंतर्गत व्यावसायिक नियुक्ति सहित मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवाओं को सम्मिलित करने की स्पष्ट सिफारिश की। आयोग का मत था कि विद्यालय स्तर पर निर्देशन सेवाएँ विद्यार्थियों के शैक्षिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास के लिए अनिवार्य हैं। इसी आयोग ने 10+2+3 संरचना की भी संस्तुति की थी।
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Q3. मनोचिकित्सा में परामर्श के लिए ट्रांस सैद्धान्तिक दृष्टिकोण किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था ?

Right Answer: प्रोचास्का तथा डाईक्लीमेंटे


Explanation:

ट्रांस सैद्धान्तिक प्रतिमान जेम्स प्रोचास्का तथा कार्लो डाईक्लीमेंटे ने प्रतिपादित किया। यह विभिन्न मनोचिकित्सा पद्धतियों के सार को एकीकृत कर व्यवहार परिवर्तन को एक क्रमिक प्रक्रिया के रूप में देखता है। इसके चरण हैं — पूर्व-चिन्तन, जिसमें व्यक्ति समस्या स्वीकार ही नहीं करता; चिन्तन, जिसमें वह परिवर्तन पर विचार करता है; तैयारी, कार्यवाही तथा अनुरक्षण, और कभी-कभी पुनरावृत्ति भी। परामर्शदाता का कार्य यह पहचानना है कि सेवार्थी किस चरण में है और उसी के अनुरूप हस्तक्षेप करना। यह प्रतिमान व्यसन-मुक्ति एवं स्वास्थ्य व्यवहार कार्यक्रमों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।

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Q4. मनोचिकित्सकीय संबंध के दौरान जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ, शारीरिक स्पर्श और खुलकर रोने की इच्छा प्रकट करता है, तब परामर्शदाता का स्थानांतरण प्रतिरूप होता है :

Right Answer: पालन - पोषणकर्ता


Explanation:

मनोचिकित्सकीय सम्बन्ध में जब सेवार्थी परामर्शदाता को अपने जीवन की किसी महत्त्वपूर्ण आकृति की तरह देखने लगता है, तो उसे स्थानांतरण कहते हैं। जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ प्रकट करता है, शारीरिक स्पर्श चाहता है और खुलकर रोना चाहता है, तो वह वस्तुतः माता-पिता जैसी देखभाल और सुरक्षा की माँग कर रहा होता है। ऐसी स्थिति में परामर्शदाता की भूमिका पालन-पोषणकर्ता की बन जाती है, जिसमें वह स्नेह, आश्वासन एवं संरक्षण प्रदान करता है। परामर्शदाता को इस प्रतिरूप के प्रति सजग रहना चाहिए, अन्यथा सेवार्थी की निर्भरता बढ़ जाती है और चिकित्सकीय सीमाएँ धुँधली पड़ जाती हैं।

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Published: 29 July 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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