Psychology - Psychological Disorders and Therapies: 4 MCQs with Answers
Psychology- Psychological Disorders and Therapies
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0%Q1. चिन्ता विकृति में सेवार्थी को ……… चिन्ता और ……… डर ……… मात्रा में होती है।
Right Answer: अवास्तविक, अतार्किक , तीव्र
Explanation:
चिन्ता विकृति में सेवार्थी की चिन्ता वास्तविक संकट के अनुपात में नहीं होती, इसलिए उसे अवास्तविक कहा जाता है। उसका भय तर्क तथा प्रमाण से मेल नहीं खाता, अतः अतार्किक होता है, और दोनों की मात्रा इतनी तीव्र होती है कि दैनिक कार्य, अध्ययन एवं सामाजिक जीवन बाधित हो जाता है। साथ ही धड़कन बढ़ना, पसीना आना, काँपना तथा साँस फूलना जैसे शारीरिक लक्षण भी उभरते हैं। सामान्य चिन्ता उपयोगी होती है क्योंकि वह सतर्क करती है, परन्तु विकृति में यही चिन्ता अनियंत्रित, दीर्घकालिक और दुर्बल करने वाली बन जाती है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन - सी प्रविधि को दुर्भीति या अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है ?
Right Answer: क्रमिक विसंवेदनीकरण
Explanation:
क्रमिक विसंवेदनीकरण जोसेफ वोल्पे द्वारा विकसित एक व्यवहार चिकित्सा प्रविधि है, जो दुर्भीति तथा अविवेकी भय के उपचार में प्रयुक्त होती है। यह पारस्परिक निषेध के सिद्धान्त पर आधारित है, क्योंकि शिथिलीकरण और चिन्ता एक साथ नहीं रह सकते। उपचार तीन चरणों में होता है — पहले सेवार्थी को गहन मांसपेशीय शिथिलीकरण सिखाया जाता है, फिर भय उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों की न्यूनतम से अधिकतम तक की क्रमिक सूची बनाई जाती है, और अन्त में शिथिल अवस्था में रहते हुए इन परिस्थितियों की कल्पना क्रमशः कराई जाती है, जिससे भय धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।
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Q3. मनोचिकित्सा के दौरान जब कोई व्यक्ति जीवन की किसी समस्या या परेशानी वाले पहलू को देखने या स्वीकार करने से इनकार करता है, तो वह एक रक्षा तंत्र का उपयोग कर रहा होता है, जिसे कहते हैं :
Right Answer: अस्वीकरण
Explanation:
अस्वीकरण फ्रॉयड द्वारा वर्णित एक प्रमुख रक्षा तंत्र है, जिसमें व्यक्ति किसी कष्टकारी वास्तविकता को देखने या स्वीकार करने से ही इनकार कर देता है। इससे अहम् को तात्कालिक चिन्ता से राहत मिलती है, परन्तु समस्या यथावत बनी रहती है और प्रायः और गम्भीर हो जाती है। जैसे कोई रोगी गम्भीर निदान को मानने से इनकार कर दे अथवा व्यसनी यह स्वीकार ही न करे कि उसे कोई समस्या है। इसके विपरीत दमन में अप्रिय स्मृतियाँ अचेतन में धकेल दी जाती हैं, प्रतिक्रिया निर्माण में विपरीत व्यवहार अपनाया जाता है और विस्थापन में भावना किसी सुरक्षित लक्ष्य पर निकलती है।
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Q4. संज्ञानात्मक त्रय की विशेषता एक व्यक्ति द्वारा धारण किए गए विश्वासों से होती है। त्रय हैं :
Right Answer: स्व, संसार तथा भविष्य
Explanation:
संज्ञानात्मक त्रय की अवधारणा एरोन बेक ने अवसाद की व्याख्या हेतु दी। इसके अनुसार अवसादग्रस्त व्यक्ति तीन क्षेत्रों में स्वतः उत्पन्न नकारात्मक विचार धारण करता है — स्वयं के प्रति, जहाँ वह अपने को अयोग्य एवं दोषपूर्ण मानता है; संसार अर्थात् अपने वर्तमान अनुभवों के प्रति, जहाँ उसे प्रत्येक परिस्थिति बाधाओं से भरी दिखती है; और भविष्य के प्रति, जहाँ उसे केवल निराशा एवं असफलता दिखाई देती है। ये नकारात्मक स्कीमा संज्ञानात्मक विकृतियों को जन्म देते हैं। बेक की संज्ञानात्मक चिकित्सा इन्हीं स्वचालित विचारों को पहचानकर प्रमाणों की सहायता से चुनौती देती है।
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