Psychology - Research Methods and Statistics: 3 MCQs with Answers
Psychology- Research Methods and Statistics
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0%Q1. प्रायोगिक विधि के सफलतम प्रयोग के लिए आवश्यक है :
Right Answer: प्रतिभागियों का यादृच्छिक निर्धारण
Explanation:
प्रायोगिक विधि का उद्देश्य स्वतंत्र चर तथा आश्रित चर के बीच कारण-कार्य सम्बन्ध स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रयोगात्मक और नियंत्रित समूह आरम्भ में सभी दृष्टियों से समतुल्य हों। यह केवल प्रतिभागियों के यादृच्छिक निर्धारण से सम्भव होता है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के किसी भी समूह में जाने की सम्भावना समान रहती है। इससे बुद्धि, आयु, अभिप्रेरणा जैसे बाह्य चर दोनों समूहों में समान रूप से बँट जाते हैं और उनका प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है। चरों का संकरण तो प्रयोग का दोष है, जबकि प्राकृतिक निरीक्षण एक भिन्न शोध विधि है।
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Q2. शोध करते समय यदि शोधकर्ता किसी घटना के बारे में किसी के व्यक्तिगत अनुभव की गहराई से समझ हासिल करना चाहता है, तो सबसे अच्छी विधि होगी :
Right Answer: व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण
Explanation:
व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण एक गुणात्मक शोध विधि है, जिसे जोनाथन स्मिथ ने विकसित किया। इसका उद्देश्य यह गहराई से समझना है कि कोई व्यक्ति किसी महत्त्वपूर्ण घटना या अनुभव को स्वयं किस प्रकार अर्थ देता है। इसमें प्रायः थोड़े से प्रतिभागियों के साथ अर्ध-संरचित गहन साक्षात्कार किए जाते हैं और उनके शब्दशः प्रतिलेख से उपविषय एवं प्रतिरूप निकाले जाते हैं। यह दोहरी व्याख्या पर आधारित है, क्योंकि शोधकर्ता उस अर्थ की व्याख्या करता है जो प्रतिभागी अपने अनुभव को दे रहा होता है। प्रवचन विश्लेषण तथा संवादी विश्लेषण भाषा एवं संवाद की संरचना पर केन्द्रित रहते हैं।
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Q3. स्मृति अनुसंधान में प्रतिनिधित्वशीलता तथा सामान्यीकरण के पहलू जुड़े हुए हैं :
Right Answer: पारिस्थितिक वैधता से
Explanation:
पारिस्थितिक वैधता से तात्पर्य है कि किसी अध्ययन की परिस्थितियाँ, सामग्री तथा कार्य वास्तविक जीवन से कितने मिलते-जुलते हैं और उसके परिणाम प्रयोगशाला के बाहर कहाँ तक लागू होते हैं। स्मृति अनुसंधान में इसके दो पक्ष माने जाते हैं — प्रतिनिधित्वशीलता, अर्थात् प्रयोग की दशाएँ रोजमर्रा की स्मृति-स्थितियों का प्रतिनिधित्व करती हों, तथा सामान्यीकरण, अर्थात् निष्कर्ष दैनिक जीवन तक विस्तारित हो सकें। एबिंगहॉस के निरर्थक अक्षर-समूह वाले प्रयोगों की इसी आधार पर आलोचना हुई और नाइजर ने वास्तविक जीवन की स्मृति के अध्ययन पर बल दिया, जिससे जीवनचरित स्मृति का क्षेत्र विकसित हुआ।
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