Psychology - Learning and Motivation: 10 MCQs with Answers

Learning and Motivation - Psychology
Psychology - Learning and Motivation

Psychology- Learning and Motivation

Learning MCQs, Practice Test & Previous Year Questions

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Learning is the process through which individuals acquire knowledge, skills, attitudes, values, and behaviors through experience, observation, practice, and instruction. An understanding of learning theories, principles, and teaching methods enables educators to create effective classroom environments and improve student outcomes. This topic covers the psychological foundations of learning and helps teachers understand how children learn, retain, and apply knowledge.

Our question bank contains carefully selected multiple-choice questions based on the latest syllabus and previous year examination trends. Every question is accompanied by a detailed explanation to strengthen conceptual understanding and improve problem-solving skills.

What You'll Learn

  • Meaning and Nature of Learning
  • Characteristics and Principles of Learning
  • Types of Learning
  • Factors Affecting Learning
  • Learning Curve and Transfer of Learning
  • Reinforcement and Motivation in Learning
  • Classical and Operant Conditioning
  • Trial and Error Learning
  • Insight Learning
  • Major Learning Theories and Educational Implications
  • Previous Year Questions with Solutions
  • Topic-wise Practice Tests and Online Quizzes

This study material is highly beneficial for candidates preparing for CTET, HTET, REET, UPTET, DSSSB, KVS, NVS, PRT, TGT, PGT, B.Ed., D.El.Ed., Super TET, State TETs, and other teaching eligibility and recruitment examinations. Regular practice will improve conceptual clarity, increase accuracy, and help you perform confidently in the final examination.

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Q1. विकास एवं अधिगम के साथ उसके संबंध के बारे में कौन-सा कथन गलत है ?

Right Answer: परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है।


Explanation:

(1) सीखने के अवसरों से वंचित होना विकास को सीमित करता है: यह कथन सही है। विकास और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। यदि एक बच्चे को सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो उसका संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाएगा।

(2) बच्चे तब तक नहीं सीख सकते जब तक वे विकासात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार न हों: यह कथन सही है। इसे 'परिपक्वता की तत्परता' (Readiness) का सिद्धांत कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा शारीरिक रूप से चलने के लिए परिपक्व नहीं है, तो उसे लाख सिखाने पर भी वह नहीं चल पाएगा।

(3) विकास परिपक्वता और सीखने का उत्पाद है: यह कथन बिल्कुल सही है (अक्सर इसे Development = Maturation X Learning के सूत्र के रूप में पढ़ा जाता है)। विकास केवल जैविक परिपक्वता (Maturation) का ही परिणाम नहीं है, बल्कि उसमें अनुभव और सीखने का भी समान योगदान होता है।

(4) परिपक्वता की सीमाओं के बावजूद जब सीखने को प्रोत्साहित किया जाता है तो विकास एक निश्चित बिन्दु से आगे जा सकता है (यह कथन गलत है): मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, विकास की एक जैविक सीमा होती है जो परिपक्वता (Maturation) द्वारा निर्धारित होती है। आप किसी बच्चे को उसकी विकासात्मक अवस्था (Stage) से बहुत आगे नहीं धकेल सकते, चाहे आप कितना भी प्रोत्साहन क्यों न दें। हर कौशल के लिए एक 'क्रिटिकल पीरियड' होता है; परिपक्वता की सीमाओं को लांघकर विकास संभव नहीं है। इसीलिए, यह कथन विकास के सिद्धांतों के विपरीत होने के कारण 'गलत' है।

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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी वंचित बालकों की सामान्य विशेषता नहीं है ?

Right Answer: वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं


Explanation:

'वंचित बालक' (Deprived Children) वे होते हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आवश्यक अवसर, संसाधन या सुविधाएं नहीं मिल पातीं। आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:

(1) वे शारीरिक रूप से अक्षम दिखते हैं (यह गलत है): यह कहना कि वंचित बालक 'शारीरिक रूप से अक्षम' (Disabled) होते हैं, पूरी तरह गलत है। वंचना (Deprivation) एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, न कि कोई शारीरिक बीमारी या विकलांगता। एक वंचित बच्चा शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो सकता है। यह उनकी अनिवार्य विशेषता नहीं है।

(2) वे सामाजिक रूप से अलाभान्वित होते हैं (सही): वंचना का एक मुख्य पहलू सामाजिक अलगाव है, जहाँ उन्हें समाज की मुख्यधारा से पर्याप्त अवसर या सम्मान नहीं मिलता।

(3) वे आर्थिक रूप से वंचित होते हैं (सही): वंचना का सबसे बड़ा कारण अक्सर गरीबी होती है, जिसके कारण बच्चे बुनियादी सुविधाओं (भोजन, शिक्षा, कपड़े) से दूर रह जाते हैं।

(4) वे संवेगात्मक रूप से हीन महसूस करते हैं (सही): जब बच्चों को बार-बार यह महसूस कराया जाता है कि वे दूसरों से पीछे हैं, या जब उन्हें पर्याप्त स्नेह और प्रोत्साहन नहीं मिलता, तो उनमें 'हीन भावना' (Inferiority Complex) विकसित होना स्वाभाविक है।

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Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरक नहीं है ?

Right Answer: दर्द परिवर्जन


Explanation:

अभिप्रेरक (Motives) के प्रकार और उनकी व्याख्या

मनोविज्ञान में अभिप्रेरकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है: जन्मजात या प्राथमिक (Innate/Primary) और अर्जित या द्वितीयक (Acquired/Secondary)।

दर्द परिवर्जन (Pain Avoidance) जन्मजात क्यों है?

दर्द परिवर्जन (दर्द से बचना) एक जैविक और जन्मजात (Innate/Biological) अभिप्रेरक है। यह हमारे जीवित रहने (survival) के लिए तंत्रिका तंत्र (nervous system) में पहले से मौजूद एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। इसे समाज या पर्यावरण से सीखने की आवश्यकता नहीं होती है — एक नवजात शिशु भी बिना किसी पूर्व अनुभव के दर्द से बचने के लिए अपना शरीर पीछे खींच लेता है। भूख, प्यास, और नींद की तरह, यह भी एक शारीरिक आवश्यकता है।

अन्य विकल्प अर्जित (Acquired) क्यों हैं?

अर्जित अभिप्रेरक (Acquired motives) वे होते हैं जिन्हें मनुष्य अपने पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक अंतःक्रिया (social interactions) के माध्यम से सीखता या विकसित करता है।

  • (1) संबंधन (Affiliation): दोस्तों, परिवार या समाज के साथ जुड़ने और समूह का हिस्सा बनने की इच्छा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह आवश्यकता समाज में रहकर सीखी जाती है।
  • (2) उपलब्धि (Achievement): जीवन में सफलता प्राप्त करने, उत्कृष्ट बनने और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने की चाह (जैसे M.Tech या किसी अन्य परीक्षा में टॉप करना)। यह हमारी परवरिश, शिक्षा और सामाजिक परिवेश द्वारा विकसित होती है।
  • (3) अनुमोदन (Approval): दूसरों (जैसे माता-पिता, शिक्षक या समाज) से स्वीकृति, प्रशंसा और मान्यता प्राप्त करने की इच्छा। यह भी पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता है जो हम अपने अनुभवों से सीखते हैं।

चूंकि संबंधन, उपलब्धि और अनुमोदन जीवन के अनुभवों से 'अर्जित' (Acquired) किए जाते हैं, इसलिए केवल 'दर्द परिवर्जन' ही ऐसा विकल्प है जो जन्मजात (Innate) है और अर्जित नहीं है।

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Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण-अधिगम को प्रभावित करने वाला वातावरणीय कारक नहीं है ?

Right Answer: परिपक्वता


Explanation:

परिपक्वता एक आंतरिक और जैविक (Biological/Internal) प्रक्रिया है। यह छात्र के शारीरिक और मानसिक विकास (उम्र के साथ समझ और क्षमताओं का बढ़ना) से संबंधित है। किसी भी चीज़ को सीखने के लिए छात्र का शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होना ज़रूरी है, लेकिन यह उसका 'व्यक्तिगत कारक' (Personal factor) है, न कि कोई बाहरी या 'वातावरणीय कारक' (Environmental factor)।

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Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा अभिप्रेरक अधिगम को सकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करता है ?

Right Answer: प्रगति की अनभिज्ञता


Explanation:

अभिप्रेरणा अधिगम की गति, दिशा एवं तीव्रता निर्धारित करती है। लक्ष्य निर्धारण व्यवहार विद्यार्थी को स्पष्ट दिशा और उद्देश्य देता है, सामाजिक अनुमोदन उसे समूह में मान्यता दिलाकर प्रोत्साहित करता है तथा प्रशंसनीय व्यवहार उसके आत्मविश्वास एवं आत्म-सम्मान को बढ़ाता है — ये तीनों अधिगम को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत यदि विद्यार्थी को अपनी प्रगति की जानकारी ही न हो तो वह न अपनी त्रुटियाँ सुधार पाता है और न ही प्रयास बढ़ा पाता है। प्रगति की अनभिज्ञता वस्तुतः प्रतिपुष्टि के अभाव को दर्शाती है। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा सीखने को प्रभावित करने वाला अधिगमकर्ता से संबंधित एक व्यक्तिगत कारक नहीं है ?

Right Answer: विषयवस्तु


Explanation:

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारकों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है — अधिगमकर्ता से संबंधित व्यक्तिगत कारक तथा विषयवस्तु एवं वातावरण से संबंधित बाह्य कारक। महत्वाकांक्षा, अभिक्षमता और तत्परता तीनों सीखने वाले के भीतर विद्यमान व्यक्तिगत गुण हैं, जो क्रमशः उसकी आकांक्षा के स्तर, अंतर्निहित क्षमता तथा मानसिक एवं शारीरिक तैयारी को दर्शाते हैं। इसके विपरीत विषयवस्तु सीखने की सामग्री है, जो अधिगमकर्ता के बाहर होती है और पाठ्यक्रम द्वारा निर्धारित की जाती है। इसकी कठिनाई, लंबाई तथा अर्थपूर्णता अधिगम को प्रभावित करती है, फिर भी यह व्यक्तिगत कारक नहीं है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक अधिगम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है ?

Right Answer: थकान


Explanation:

अधिगम को प्रभावित करने वाले अनेक कारक होते हैं। अभ्यास, इच्छा शक्ति तथा अभिप्रेरणा ऐसे कारक हैं जो अधिगम की गति और स्थायित्व दोनों को बढ़ाते हैं, अर्थात इनका प्रभाव सकारात्मक होता है। इसके विपरीत थकान शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को घटा देती है, जिससे ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता, स्मरण शक्ति और कार्य की गति कम हो जाती है। थकान की स्थिति में की गई पुनरावृत्ति भी प्रभावहीन रहती है। इसीलिए शिक्षण में विश्राम और अन्तराल का प्रावधान रखा जाता है। अतः थकान अधिगम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
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Q8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सीखने की विराम विधि के महत्व को इंगित नहीं करता ?

Right Answer: स्मृति चिह्न समेकित नहीं होते


Explanation:

विराम अथवा अन्तरालयुक्त विधि में सीखने के बीच-बीच में विश्राम दिया जाता है। इससे बालक को थकान नहीं होती, सीखने में अभिरुचि बनी रहती है और मानसिक ऊब उत्पन्न नहीं होती। साथ ही विश्राम के समय मस्तिष्क में स्मृति चिह्नों का समेकन होता है, जिससे स्मरण अधिक स्थायी बनता है। अतः यह कहना कि स्मृति चिह्न समेकित नहीं होते, इस विधि के महत्व के विपरीत है और वस्तुतः असत्य है। शोध बताते हैं कि अन्तराल प्रभाव के कारण विराम विधि अविराम विधि से श्रेष्ठ रहती है। अतः दूसरा कथन सही उत्तर है।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिगम के संबंध में सही नहीं है ?

Right Answer: अधिगम परिपक्वता के कारण व्यवहार में परिवर्तन है।


Explanation:

अधिगम की मान्य परिभाषा के अनुसार यह अभ्यास तथा अनुभवों के परिणामस्वरूप व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। अतः पहले तीन कथन अधिगम की सही व्याख्या करते हैं। किन्तु परिपक्वता के कारण होने वाला व्यवहार परिवर्तन अधिगम नहीं कहलाता, क्योंकि वह शारीरिक और स्नायविक वृद्धि का स्वाभाविक परिणाम है और उसमें अभ्यास या अनुभव की कोई भूमिका नहीं होती, जैसे शिशु का समय आने पर चलना या बोलना। मनोवैज्ञानिक अधिगम और परिपक्वता को स्पष्ट रूप से अलग मानते हैं। अतः चौथा कथन सही नहीं है।
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Q10. एक बच्चा किसी पाठ को अपनी सुविधानुसार कई भागों में बाँटकर सीखता है। यह सीखने की कौन-सी विधि है ?

Right Answer: अंश विधि


Explanation:

जब बालक किसी लंबे पाठ को अपनी सुविधा के अनुसार छोटे-छोटे भागों में बाँटकर एक-एक भाग याद करता है और अंत में सबको जोड़ लेता है, तो उसे अंश विधि अथवा खंड विधि कहते हैं। यह विधि कठिन और लंबे पाठों के लिए विशेष उपयोगी होती है क्योंकि इससे थकान कम होती है और प्रत्येक भाग पर पूरा ध्यान दिया जा सकता है। इसके विपरीत पूर्ण विधि में पाठ को एक साथ बार-बार दोहराया जाता है। अविराम विधि तथा प्रासंगिक विधि यहाँ प्रासंगिक नहीं हैं। अतः उत्तर अंश विधि है।
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Published: 29 June 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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