Psychology: 257 MCQs with Answers

Psychology Questions and Answers - India Study Institute
Psychology

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Psychology Questions and Answers

India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.

Psychology is one of the most important sections of the Haryana Teacher Eligibility Test (HTET). A strong understanding of Child Psychology, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, and Educational Psychology can significantly improve your HTET score. On this page, you will find comprehensive HTET Psychology Notes, chapter-wise multiple-choice questions (MCQs), previous year questions with detailed explanations, practice tests, and important concepts based on the latest HTET syllabus.

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HTET Solved Exam Papers - HTET Previous Year Exam Papers: 

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Other Exam Papers:

Q41. निम्नलिखित में से कौन-सी एक उपयुक्त शिक्षण-अधिगम व्यूहरचना नहीं है ?

Right Answer: रटन्त अधिगम


Explanation:

आधुनिक शिक्षाशास्त्र अर्थपूर्ण एवं बाल-केन्द्रित अधिगम पर बल देता है। सहकारी अधिगम में विद्यार्थी छोटे समूहों में मिलकर सीखते हैं, जिससे सामाजिक कौशल एवं सहयोग विकसित होता है। आनंदपूर्ण सीखना खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से भय-मुक्त वातावरण देता है। बहुसंवेदी शिक्षण में देखने, सुनने, छूने आदि अनेक ज्ञानेन्द्रियों का प्रयोग होने से धारण-शक्ति बढ़ती है। इसके विपरीत रटन्त अधिगम में बालक बिना समझे केवल यांत्रिक रूप से याद करता है, जिससे ज्ञान अस्थायी रहता है और स्थानांतरण नहीं हो पाता। अतः विकल्प (3) सही उत्तर है।
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Q42. निम्नलिखित में से कौन-सा बच्चों के सामाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला एक धनात्मक कारक नहीं है ?

Right Answer: सामाजिक वंचन


Explanation:

सामाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक अपने समाज के मूल्य, मानदण्ड एवं व्यवहार-प्रतिमान सीखकर उसका उपयोगी सदस्य बनता है। उपयुक्त भाषा उसे विचार-विनिमय एवं संप्रेषण में सक्षम बनाती है, लोकतांत्रिक वातावरण उसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति, सहभागिता एवं सहिष्णुता सिखाता है, तथा सकारात्मक सामाजिक मनोवृत्ति उसे दूसरों के साथ सहयोग करना सिखाती है। इसके विपरीत सामाजिक वंचन में बालक को उचित सामाजिक अंतःक्रिया, स्नेह एवं अवसर नहीं मिल पाते, जिससे उसका भाषिक एवं संवेगात्मक विकास अवरुद्ध होता है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q43. ‘ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त अनुभूति’ किस प्रकार का संज्ञान है ?

Right Answer: संवेदना


Explanation:

संज्ञान की सबसे प्रारंभिक एवं सरल इकाई संवेदना है। जब कोई उद्दीपक आँख, कान, नाक, जीभ अथवा त्वचा जैसी ज्ञानेन्द्रिय को उत्तेजित करता है और वह अनुभूति तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचती है, तो उसे संवेदना कहते हैं। यह कच्ची, अर्थहीन अनुभूति होती है। जब पूर्व अनुभव एवं स्मृति के आधार पर इस संवेदना को अर्थ प्रदान किया जाता है, तब वह प्रत्यक्षीकरण बन जाती है। संवेग भावात्मक दशा है और कल्पना अनुपस्थित वस्तु का मानसिक प्रतिबिंब है। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
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Q44. ‘करके सीखना’ किस प्रकार की शिक्षा का प्रमुख सिद्धांत है ?

Right Answer: प्रगतिशील शिक्षा


Explanation:

‘करके सीखना’ अर्थात् Learning by Doing प्रगतिशील शिक्षा का मूल सिद्धांत है, जिसका प्रतिपादन जॉन डीवी ने किया। प्रगतिशील शिक्षा बालक को निष्क्रिय श्रोता नहीं, बल्कि सक्रिय अन्वेषक मानती है, जो स्वयं करके, प्रयोग करके एवं अनुभव से ज्ञान का निर्माण करता है। इसमें पाठ्यपुस्तक-केन्द्रित रटन्त पद्धति के स्थान पर गतिविधि, परियोजना एवं समस्या-समाधान को महत्त्व दिया जाता है। समावेशी शिक्षा सभी बच्चों को समान अवसर देने से संबंधित है, जबकि प्रतिगामी शिक्षा परंपरागत एवं पीछे ले जाने वाली होती है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q45. सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया ?

Right Answer: वायगोट्स्की


Explanation:

सामाजिक-सांस्कृतिक विकास सिद्धांत का प्रतिपादन रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वायगोट्स्की ने किया। उनके अनुसार बालक का संज्ञानात्मक विकास एकाकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक अंतःक्रिया एवं सांस्कृतिक साधनों, विशेषकर भाषा, के माध्यम से होता है। उन्होंने समीपस्थ विकास का क्षेत्र तथा पाड़ लगाना जैसी अवधारणाएँ दीं, जिनमें अधिक सक्षम साथी या शिक्षक की सहायता से बालक अपनी वर्तमान क्षमता से आगे बढ़ता है। कोह्लबर्ग ने नैतिक विकास, एरिक्सन ने मनोसामाजिक विकास तथा पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत दिया। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q46. पियाजे ने अपने संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत में किस अवधारणा पर चर्चा नहीं की है ?

Right Answer: पृथक्करण


Explanation:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की मूल अवधारणाएँ हैं — स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजीकरण एवं संतुलनीकरण। आत्मसातीकरण में बालक नई सूचना को अपने पूर्व-निर्मित मानसिक ढाँचे में समाहित कर लेता है, जबकि समायोजीकरण में वह नई सूचना के अनुरूप अपने ढाँचे को ही बदल देता है। संतुलनीकरण इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया है, जो विकास को आगे बढ़ाती है। पृथक्करण पियाजे की शब्दावली का भाग नहीं है; यह अधिगम एवं अनुबंधन से जुड़ा पद है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q47. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैयक्तिक भिन्नता के संबंध में सही नहीं है ?

Right Answer: वैयक्तिक भिन्नता मनोगत्यात्मक क्षेत्रों में नहीं पाई जाती है।


Explanation:

वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ है कि कोई भी दो व्यक्ति पूर्णतः समान नहीं होते। ये भिन्नताएँ तीनों पक्षों में पाई जाती हैं — संज्ञानात्मक क्षेत्र में बुद्धि, स्मृति एवं चिंतन के स्तर पर; भावात्मक क्षेत्र में रुचि एवं अभिवृत्ति के स्तर पर; तथा मनोगत्यात्मक क्षेत्र में लेखन, चित्रकला, खेल एवं शारीरिक कौशल के स्तर पर। आनुवंशिकता, पर्यावरण एवं परिपक्वता तीनों इन्हें प्रभावित करते हैं। अतः यह कहना कि मनोगत्यात्मक क्षेत्रों में वैयक्तिक भिन्नता नहीं पाई जाती, पूर्णतः असत्य है। विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q48. विद्यार्थियों को अधिगम अनुभव प्रदान करने का कौन-सा तरीका उपयुक्त नहीं है ?

Right Answer: एक संवेदी के प्रयोग पर बल देना


Explanation:

प्रभावी अधिगम अनुभव के लिए नवीन ज्ञान को पूर्व ज्ञान से जोड़ना आवश्यक है, क्योंकि इससे अधिगम अर्थपूर्ण बनता है। विषयों का पारस्परिक सहसंबंध ज्ञान को खंडित होने से बचाता है और उसका जीवन में स्थानांतरण सरल करता है। प्रतिपुष्टि विद्यार्थी को अपनी प्रगति एवं त्रुटियों की जानकारी देकर सुधार का अवसर देती है। इसके विपरीत केवल एक ही ज्ञानेन्द्रिय के प्रयोग पर बल देना अनुचित है; बहुसंवेदी शिक्षण में देखने, सुनने, छूने एवं करने का समन्वय होने से धारण-शक्ति कहीं अधिक बढ़ती है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q49. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन समावेशी शिक्षा को सही रूप में परिभाषित करता है ?

Right Answer: यह सभी बच्चों के लिए है


Explanation:

समावेशी शिक्षा की आधुनिक अवधारणा किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रत्येक बालक, चाहे वह दिव्यांग हो या सामान्य, किसी भी जाति, धर्म, लिंग, भाषा अथवा आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, उसे एक ही सामान्य कक्षा में समान अवसर, सम्मान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। इसमें विद्यालय स्वयं को बालक की आवश्यकता के अनुरूप बदलता है, न कि बालक को विद्यालय के अनुरूप ढाला जाता है। इसीलिए इसे सभी बच्चों के लिए शिक्षा कहा जाता है। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q50. बच्चे का विकास किस मार्ग का अनुसरण करता है ?

Right Answer: सर्पिल


Explanation:

बालक का विकास सीधी रेखा में नहीं, बल्कि सर्पिल मार्ग का अनुसरण करता है। इसका अर्थ है कि विकास की गति सदैव एक-सी नहीं रहती — कभी तीव्र होती है तो कभी धीमी, और कुछ अवस्थाओं में ठहराव भी आता है। बालक किसी कौशल में आगे बढ़ने से पहले अर्जित योग्यता को सुदृढ़ करने हेतु कुछ समय रुकता है, फिर उच्चतर स्तर पर वही प्रतिमान दोहराता है। इसी कारण विकास न पूर्णतः रेखीय है और न ही वृत्तीय, क्योंकि वह कभी अपने प्रारंभ बिंदु पर नहीं लौटता। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
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Q51. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में कौन-सा सह-शैक्षणिक आकलन के अन्तर्गत नहीं आता ?

Right Answer: गृहकार्य


Explanation:

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन बालक के व्यक्तित्व के दोनों पक्षों का आकलन करता है। शैक्षणिक पक्ष में विषयवस्तु से जुड़ी उपलब्धि आती है, जिसका आकलन कक्षा-कार्य, गृहकार्य, प्रोजेक्ट एवं परीक्षाओं द्वारा होता है। सह-शैक्षणिक पक्ष में जीवन-कौशल, अभिवृत्ति एवं मूल्य, तथा खेल, संगीत, चित्रकला जैसी सौन्दर्यात्मक एवं सृजनात्मक गतिविधियाँ सम्मिलित होती हैं। गृहकार्य सीधे पाठ्यवस्तु की समझ से जुड़ा होने के कारण शैक्षणिक आकलन का अंग है, सह-शैक्षणिक का नहीं। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
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Q52. किस मनोवैज्ञानिक का मानना है कि सभी प्रकार के संवेग मूल प्रवृत्ति से उत्पन्न होते हैं ?

Right Answer: मैक्डूगल


Explanation:

विलियम मैक्डूगल ने मूल प्रवृत्ति सिद्धांत प्रस्तुत करते हुए कहा कि मानव व्यवहार का मूल स्रोत जन्मजात मूल प्रवृत्तियाँ हैं और प्रत्येक मूल प्रवृत्ति के साथ एक विशिष्ट संवेग जुड़ा रहता है। उदाहरणार्थ पलायन मूल प्रवृत्ति के साथ भय, युयुत्सा के साथ क्रोध तथा जिज्ञासा के साथ आश्चर्य का संवेग संबद्ध है। उन्होंने चौदह मूल प्रवृत्तियाँ एवं उनसे जुड़े संवेग बताए। वुडवर्थ प्रेरणा, वाटसन व्यवहारवाद तथा आइज़ेंक व्यक्तित्व के विमाओं के लिए जाने जाते हैं। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q53. लैंगिक पक्षपातहीन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-से कार्य को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ?

Right Answer: लिंग तटस्थ उदाहरण


Explanation:

लैंगिक पक्षपातहीन कक्षा वह है जिसमें बालक एवं बालिका दोनों को समान अवसर, अपेक्षा एवं सम्मान प्राप्त हो। इसके लिए शिक्षक को लिंग तटस्थ उदाहरण प्रयोग करने चाहिए, जिनमें दोनों लिंगों को विविध भूमिकाओं में प्रस्तुत किया जाए। लिंग के आधार पर समरूप समूहन विभाजन को बढ़ाता है, रूढ़िबद्ध विषयवस्तु परंपरागत भूमिकाओं को और पुष्ट करती है तथा पक्षपातपूर्ण भाषा किसी एक लिंग को हीन दर्शाती है — ये तीनों लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q54. बच्चों के संवेगों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?

Right Answer: संवेगों में विस्थापन का गुण नहीं होता


Explanation:

संवेग व्यक्तिपरक होते हैं, क्योंकि एक ही परिस्थिति भिन्न-भिन्न बच्चों में भिन्न अनुभूति उत्पन्न करती है; वे किसी उद्दीपक की प्रतिक्रिया में उत्पन्न होते हैं; तथा उनकी अभिव्यक्ति भी सबमें एक-सी नहीं होती। किन्तु यह कहना गलत है कि संवेगों में विस्थापन का गुण नहीं होता। विस्थापन संवेगों की एक प्रमुख विशेषता है, जिसमें बालक मूल स्रोत पर संवेग प्रकट न कर पाने पर उसे किसी अन्य निरीह वस्तु या व्यक्ति पर स्थानांतरित कर देता है, जैसे पिता से डाँट खाकर छोटे भाई पर क्रोध निकालना। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q55. किस मनोवैज्ञानिक ने अपने विकासात्मक सिद्धांत में ‘आंतरिक संभाषण’ प्रत्यय को प्रस्तुत किया ?

Right Answer: वायगोट्स्की


Explanation:

आंतरिक संभाषण अर्थात् Inner Speech की अवधारणा लेव वायगोट्स्की ने दी। उनके अनुसार बालक पहले दूसरों से बात करने हेतु बाह्य भाषा का प्रयोग करता है, फिर लगभग तीन से सात वर्ष की आयु में स्वयं से ऊँची आवाज़ में बोलता है, जिसे आत्मकेन्द्रित भाषण कहते हैं। धीरे-धीरे यह भाषण मौन होकर भीतर चला जाता है और आंतरिक संभाषण बन जाता है, जो चिंतन, आत्म-नियंत्रण एवं समस्या-समाधान का माध्यम बनता है। पियाजे इसे विकास के साथ लुप्त होने वाला मानते थे, जबकि वायगोट्स्की ने इसे चिंतन का आधार बताया। अतः विकल्प (2) सही है।
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Q56. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘पुराने लक्षणों के लुप्त होने’ के अन्तर्गत विकासात्मक परिवर्तनों का उदाहरण नहीं है ?

Right Answer: प्राथमिक लैंगिक विशेषताएँ


Explanation:

विकास के क्रम में कुछ लक्षण नवीन रूप में अर्जित होते हैं तो कुछ पुराने लक्षण लुप्त हो जाते हैं। थायमस ग्रंथि किशोरावस्था के बाद क्रमशः सिकुड़कर लगभग निष्क्रिय हो जाती है, नवजात के शरीर पर उगने वाले महीन बाल-केश कुछ समय बाद झड़ जाते हैं तथा अस्थायी दूध के दाँत गिरकर स्थायी दाँतों से प्रतिस्थापित हो जाते हैं — ये तीनों लुप्त होने वाले लक्षण हैं। इसके विपरीत प्राथमिक लैंगिक विशेषताएँ जन्म से उपस्थित रहती हैं और किशोरावस्था में परिपक्व होती हैं, लुप्त नहीं होतीं। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q57. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक वर्नन के पदानुक्रमिक बुद्धि सिद्धांत से संबंधित नहीं है ?

Right Answer: व्यक्तिगत कारक


Explanation:

पी. ई. वर्नन ने बुद्धि का पदानुक्रमिक सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसमें बुद्धि को एक क्रमबद्ध संरचना के रूप में देखा गया। इसके शीर्ष पर सामान्य कारक होता है, उसके नीचे दो प्रमुख या मुख्य समूह कारक आते हैं — शाब्दिक-शैक्षिक तथा व्यावहारिक-यांत्रिक। इनके नीचे अनेक लघु समूह कारक तथा सबसे निचले स्तर पर अनगिनत विशिष्ट कारक होते हैं। इस प्रकार प्रमुख कारक, लघु कारक एवं विशिष्ट कारक तीनों इस सिद्धांत के अंग हैं। ‘व्यक्तिगत कारक’ इस पदानुक्रम की शब्दावली में सम्मिलित नहीं है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q58. निम्नलिखित में से कौन केवल पर्यावरण से प्रभावित होता है ?

Right Answer: अभिवृत्ति


Explanation:

आनुवंशिकता एवं पर्यावरण दोनों मिलकर व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, किन्तु उनका अनुपात सभी गुणों में समान नहीं होता। मानसिक क्षमताओं अर्थात् बुद्धि पर आनुवंशिकता का प्रबल प्रभाव रहता है; संवेग की मूल क्षमता भी जन्मजात होती है; अभिरुचि में भी वंशानुगत प्रवृत्ति का कुछ योगदान माना जाता है। इसके विपरीत अभिवृत्ति पूर्णतः अर्जित होती है — बालक इसे परिवार, विद्यालय, समाज, संस्कृति एवं अनुभवों से सीखता है। कोई भी बालक किसी वस्तु के प्रति पूर्वनिर्धारित अभिवृत्ति लेकर जन्म नहीं लेता। अतः विकल्प (3) सही उत्तर है।
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Q59. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प बच्चों में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों से संबंधित नहीं है ?

Right Answer: प्रत्यक्षण


Explanation:

शारीरिक विकास के अंतर्गत वे परिवर्तन आते हैं जिन्हें मापा या देखा जा सकता है। ऊँचाई में वृद्धि, सिर एवं छाती की परिधि में परिवर्तन तथा हृदय, फेफड़े एवं पाचन तंत्र जैसे आंतरिक अंगों का आकार एवं कार्यक्षमता में विकास — ये सभी शारीरिक परिवर्तन के उदाहरण हैं। इसके विपरीत प्रत्यक्षण एक मानसिक अथवा संज्ञानात्मक प्रक्रिया है, जिसमें ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त संवेदनाओं को पूर्व अनुभव के आधार पर अर्थ प्रदान किया जाता है। यह संज्ञानात्मक विकास का अंग है, शारीरिक विकास का नहीं। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q60. श्रवण-बाधित विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम हेतु कौन-सा प्रशिक्षण आवश्यक नहीं है ?

(a) ओष्ठ पठन (b) संकेत भाषा (c) ब्रेल लिपि (d) गामक प्रशिक्षण

Right Answer: c एवं d


Explanation:

श्रवण-बाधित विद्यार्थियों की कठिनाई सुनने तथा बोलने से जुड़ी होती है, इसलिए उनके शिक्षण-अधिगम में ओष्ठ पठन, संकेत भाषा और गामक प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी माने जाते हैं। ओष्ठ पठन से बालक होंठों की गति देखकर बात समझ लेता है, संकेत भाषा संप्रेषण का सशक्त माध्यम बनती है तथा गामक प्रशिक्षण वाक् अंगों को सक्रिय करता है। इसके विपरीत ब्रेल लिपि उभरे हुए बिंदुओं पर आधारित स्पर्श लिपि है, जिसका निर्माण दृष्टिबाधित बालकों के पढ़ने और लिखने के लिए किया गया था। अतः श्रवण-बाधित बालकों हेतु ब्रेल प्रशिक्षण आवश्यक नहीं है।
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Published: | Last Updated: | Total Questions: 257
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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