Psychology: 257 MCQs with Answers

Psychology Questions and Answers - India Study Institute
Psychology

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Psychology Questions and Answers

India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.

Psychology is one of the most important sections of the Haryana Teacher Eligibility Test (HTET). A strong understanding of Child Psychology, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, and Educational Psychology can significantly improve your HTET score. On this page, you will find comprehensive HTET Psychology Notes, chapter-wise multiple-choice questions (MCQs), previous year questions with detailed explanations, practice tests, and important concepts based on the latest HTET syllabus.

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Other Exam Papers:

Q61. जब एक बच्चे का नैतिक विकास एक अच्छा लड़का या अच्छी लड़की घोषित होने की इच्छा पर आधारित होता है, तो इस नैतिकता का संबंध किससे है ?

Right Answer: अच्छे अन्तर्वैयक्तिक संबंध


Explanation:

कोहलबर्ग ने नैतिक विकास की तीन स्तर तथा छह अवस्थाएँ बताईं। जब बालक इसलिए अच्छा व्यवहार करता है कि लोग उसे अच्छा लड़का या अच्छी लड़की कहें, तब वह परंपरागत स्तर की तीसरी अवस्था में होता है, जिसे अच्छे अन्तर्वैयक्तिक संबंध अथवा गुड बॉय-गुड गर्ल अभिविन्यास कहा जाता है। इस अवस्था में सामाजिक अनुमोदन और दूसरों की अपेक्षाएँ नैतिक निर्णय का आधार बनती हैं। आज्ञाकारिता एवं दण्ड तथा व्यक्तिवाद एवं विनिमय पूर्व-परंपरागत स्तर की अवस्थाएँ हैं, जबकि सामाजिक अनुबंध उत्तर-परंपरागत स्तर से संबंधित है।
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Q62. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अर्जित प्रेरकों की सही व्याख्या नहीं करता ?

Right Answer: वे सार्विक होते हैं


Explanation:

अर्जित अथवा सामाजिक प्रेरक वे होते हैं जिन्हें व्यक्ति अपने अनुभवों, अधिगम और सामाजिक परिवेश से सीखता है, जैसे उपलब्धि, सत्ता, प्रतिष्ठा तथा संबद्धता। ये जन्मजात नहीं होते, जीवित रहने के लिए अनिवार्य नहीं होते तथा अधिगम को स्पष्ट रूप से प्रभावित करते हैं। चूँकि ये संस्कृति और परिवेश के अनुसार बदलते रहते हैं, इसलिए ये सार्विक अर्थात सभी व्यक्तियों में एक समान नहीं होते। सार्विकता जैविक या मूल प्रेरकों का गुण है, जैसे भूख और प्यास। अतः दूसरा कथन अर्जित प्रेरकों की सही व्याख्या नहीं करता।
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Q63. ‘मानसिक आयु’ का प्रत्यय किसने दिया ?

Right Answer: बिने


Explanation:

मानसिक आयु का प्रत्यय फ्रांसीसी मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड बिने ने थियोडोर साइमन के साथ मिलकर सन् 1905 में प्रस्तुत किया। इसका आशय यह है कि बालक किसी आयु-वर्ग के औसत बालक जितना मानसिक कार्य कर पाता है, वही उसकी मानसिक आयु मानी जाएगी। बाद में विलियम स्टर्न ने मानसिक आयु को वास्तविक आयु से विभाजित कर बुद्धि लब्धि की संकल्पना दी और टर्मन ने इसे सौ से गुणा कर स्टैनफोर्ड-बिने परीक्षण में प्रयोग किया। वेश्लर ने विचलन बुद्धि लब्धि दी। अतः सही उत्तर बिने है।
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Q64. शिक्षक का निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य सर्जनशील बच्चे की क्षमता को अवरुद्ध करता है ?

Right Answer: दूसरों के विचारों की अनुरूपता के लिए जोर


Explanation:

सृजनशीलता का मूल आधार अपसारी चिंतन है, जिसमें बालक एक ही समस्या के अनेक मौलिक समाधान खोजता है। शिक्षक जब बालक को अपसारी चिंतन के लिए प्रोत्साहित करता है, विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति देता है तथा नवप्रवर्तन के लिए प्रेरित करता है, तब सृजनात्मक क्षमता निखरती है। इसके विपरीत यदि शिक्षक बालक पर दूसरों के विचारों की अनुरूपता के लिए दबाव डालता है, तो बालक अपनी मौलिकता छोड़कर अनुकरण करने लगता है और उसकी कल्पनाशीलता अवरुद्ध हो जाती है। अतः अनुरूपता का आग्रह सृजनशीलता को रोकता है।
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Q65. निम्नलिखित में से कौन-सा बुद्धि परीक्षण एक अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण है ?

Right Answer: रैवेन का प्रोग्रेसिव मेट्रीसेज़ परीक्षण


Explanation:

अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण वे होते हैं जिनमें भाषा का प्रयोग नहीं होता, बल्कि आकृतियाँ, चित्र तथा प्रतिरूप देकर बालक की तर्कशक्ति मापी जाती है। रैवेन का प्रोग्रेसिव मेट्रीसेज़ परीक्षण ऐसा ही परीक्षण है, जिसमें दिए गए प्रतिरूप में लुप्त भाग को पहचानना होता है। यह परीक्षण निरक्षर, बधिर तथा भिन्न भाषा-भाषी व्यक्तियों पर भी प्रयोग किया जा सकता है। आर्मी-अल्फा, बिने-साइमन तथा जलोटा सामान्य मानसिक योग्यता परीक्षण शाब्दिक परीक्षण हैं, जिनमें भाषा की समझ आवश्यक होती है। अतः सही उत्तर रैवेन का परीक्षण है।
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Q66. अनुदेशनात्मक कार्यक्रम के दौरान प्रतिपुष्ठि द्वारा सुधार के उद्देश्य से किया गया मूल्यांकन कहलाता है :

Right Answer: निर्माणात्मक/रचनात्मक


Explanation:

निर्माणात्मक अथवा रचनात्मक मूल्यांकन वह है जो शिक्षण के दौरान लगातार चलता रहता है। इसका उद्देश्य बालक को अंक या श्रेणी देना नहीं, बल्कि प्रतिपुष्टि के माध्यम से अधिगम में सुधार लाना होता है। शिक्षक इससे जान पाता है कि कौन-सा अंश समझ में नहीं आया और तदनुसार अपनी शिक्षण विधि बदलता है। योगात्मक मूल्यांकन पाठ्यक्रम की समाप्ति पर उपलब्धि आँकने के लिए होता है, निदानात्मक मूल्यांकन कठिनाइयों के कारण खोजता है। अतः प्रतिपुष्टि द्वारा सुधार हेतु किया गया मूल्यांकन निर्माणात्मक कहलाता है।
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Q67. पैवलॉव के अधिगम सिद्धान्त का आधार किस प्रकार का सीखना है ?

Right Answer: अनुबंधित


Explanation:

इवान पैवलॉव ने कुत्ते पर किए गए अपने प्रसिद्ध प्रयोग में घंटी की ध्वनि को भोजन के साथ बार-बार प्रस्तुत किया। कुछ समय बाद केवल घंटी बजने पर ही कुत्ते के मुँह से लार टपकने लगी। इस प्रकार एक तटस्थ उद्दीपक स्वाभाविक उद्दीपक के साथ जुड़कर अनुबंधित उद्दीपक बन गया और अनुबंधित अनुक्रिया उत्पन्न हुई। इसी को अनुबंधित अथवा सम्बद्ध अनुक्रिया अधिगम कहते हैं, जो पैवलॉव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त का आधार है। सूझपूर्ण अधिगम कोहलर से तथा अनुकरणात्मक अधिगम बंडूरा से संबंधित है।
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Q68. सामाजीकरण की प्रक्रिया में साथियों का प्रभाव उत्तर बाल्यावस्था के किस नाम को संदर्भित नहीं करता है ?

Right Answer: खेल आयु


Explanation:

उत्तर बाल्यावस्था लगभग छह से बारह वर्ष तक चलती है। इस अवस्था में बालक पर साथियों का प्रभाव सबसे अधिक होता है, इसलिए इसे दल-आयु, अनुरूपता की आयु तथा संक्रमण आयु जैसे नाम दिए जाते हैं। बालक अपने समूह के नियम मानता है, वेशभूषा और व्यवहार में साथियों जैसा बनना चाहता है। इसके विपरीत खेल आयु पूर्व बाल्यावस्था का नाम है, जिसमें बालक अधिकांश समय खिलौनों तथा एकाकी खेल में बिताता है और साथियों का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है। अतः खेल आयु सही उत्तर है।
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Q69. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक अधिगम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है ?

Right Answer: थकान


Explanation:

अधिगम को प्रभावित करने वाले अनेक कारक होते हैं। अभ्यास, इच्छा शक्ति तथा अभिप्रेरणा ऐसे कारक हैं जो अधिगम की गति और स्थायित्व दोनों को बढ़ाते हैं, अर्थात इनका प्रभाव सकारात्मक होता है। इसके विपरीत थकान शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को घटा देती है, जिससे ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता, स्मरण शक्ति और कार्य की गति कम हो जाती है। थकान की स्थिति में की गई पुनरावृत्ति भी प्रभावहीन रहती है। इसीलिए शिक्षण में विश्राम और अन्तराल का प्रावधान रखा जाता है। अतः थकान अधिगम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
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Q70. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक वैयक्तिक भिन्नताओं को प्रभावित करने वाले वंशानुगत कारकों में सम्मिलित नहीं है ?

Right Answer: अभिवृत्ति


Explanation:

वंशानुक्रम से प्राप्त होने वाले कारक वे हैं जो जीन के माध्यम से माता-पिता से संतान में पहुँचते हैं, जैसे शारीरिक संरचना, रंग, कद, बुद्धि तथा अभिक्षमता। ये वैयक्तिक भिन्नताओं का जैविक आधार बनाते हैं। इसके विपरीत अभिवृत्ति किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति बनने वाली मानसिक तत्परता है, जो परिवार, विद्यालय, समाज तथा अनुभवों के संपर्क से विकसित होती है। यह जन्मजात न होकर अर्जित होती है और परिवेश बदलने पर बदल भी सकती है। अतः अभिवृत्ति वंशानुगत कारकों में सम्मिलित नहीं है।
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Q71. थॉर्नडाइक के बिल्ली पर सीखने के प्रयोग में एक विशिष्ट व्यवहार सीखने के लिए किस प्रकार के अभिप्रेरक का उपयोग किया गया था ?

Right Answer: जैविक अभिप्रेरक


Explanation:

थॉर्नडाइक ने भूखी बिल्ली को समस्या-पेटी में बंद किया और बाहर मछली रख दी। बिल्ली बाहर निकलने के लिए बार-बार प्रयास करती रही और अंततः खटका दबाकर दरवाजा खोलना सीख गई। इस पूरे प्रयोग में बिल्ली को सक्रिय बनाए रखने वाला प्रेरक भूख था, जो एक जैविक अथवा शारीरिक अभिप्रेरक है। भूख के कारण ही बिल्ली ने निरन्तर प्रयास किए और प्रयत्न एवं भूल द्वारा अधिगम हुआ। सामाजिक, बाह्य तथा वातावरणीय अभिप्रेरक इस प्रयोग में प्रभावी नहीं थे। अतः सही उत्तर जैविक अभिप्रेरक है।
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Q72. निम्नलिखित में से कौन-सी उत्तर बाल्यावस्था के बच्चों की उपयुक्त सामाजिक व्यावहारिक विशेषता नहीं है ?

Right Answer: अहं-केन्द्रितता


Explanation:

उत्तर बाल्यावस्था में बालक का सामाजिक दायरा विस्तृत होता है। वह समूह में रहकर सहयोग करना सीखता है, दूसरों के दुख में सहानुभूति दिखाता है तथा परानुभूति के द्वारा दूसरों की भावनाओं को स्वयं अनुभव करने लगता है। ये सभी गुण सामाजिक परिपक्वता के सूचक हैं। इसके विपरीत अहं-केन्द्रितता पूर्व बाल्यावस्था की विशेषता है, जिसमें बालक केवल अपने दृष्टिकोण से सोचता है और दूसरों का दृष्टिकोण समझ नहीं पाता। पियाजे ने इसे पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था से जोड़ा है। अतः अहं-केन्द्रितता उत्तर बाल्यावस्था की उपयुक्त विशेषता नहीं है।
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Q73. विकास की प्रक्रिया प्रारंभ होती है :

Right Answer: गर्भाधान से मृत्यु तक


Explanation:

आधुनिक विकासात्मक मनोविज्ञान विकास को जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया मानता है। विकास का आरंभ जन्म से नहीं, बल्कि गर्भाधान के क्षण से ही हो जाता है, क्योंकि गर्भावस्था में ही शारीरिक अंगों और तंत्रिका तंत्र का निर्माण प्रारंभ हो जाता है। इसी प्रकार विकास परिपक्वता पर रुकता नहीं, वरन वृद्धावस्था और मृत्यु तक चलता रहता है, यद्यपि बाद के वर्षों में कुछ क्षमताओं में ह्रास भी होता है। हरलॉक तथा हरिगहर्स्ट ने भी इसी मत का समर्थन किया है। अतः विकास गर्भाधान से मृत्यु तक चलता है।
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Q74. कौन-सी शिक्षण-अधिगम पद्धति बाल केन्द्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा में सम्मिलित नहीं है ?

Right Answer: भाषण


Explanation:

बाल केन्द्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा में बालक को ज्ञान का सक्रिय निर्माता माना जाता है। इसमें प्रायोजना विधि, समस्या समाधान विधि तथा प्रयोगात्मक विधि जैसी पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं, जिनमें बालक स्वयं करके, खोजकर तथा अनुभव लेकर सीखता है। इन विधियों में शिक्षक सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाता है। इसके विपरीत भाषण अथवा व्याख्यान विधि पूर्णतः शिक्षक केन्द्रित है, जिसमें बालक निष्क्रिय श्रोता बना रहता है और उसकी सहभागिता नगण्य होती है। अतः भाषण विधि बाल केन्द्रित प्रगतिशील शिक्षा में सम्मिलित नहीं है।
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Q75. निम्नलिखित में से कौन-सा एक बाह्य अभिप्रेरक नहीं है ?

Right Answer: उपलब्धि


Explanation:

बाह्य अभिप्रेरक वे होते हैं जो व्यक्ति के बाहर से मिलते हैं, जैसे पुरस्कार, प्रशंसा, अनुमोदन, सत्ता, दण्ड अथवा विश्राम। इनमें कार्य स्वयं आकर्षक नहीं होता, बल्कि कार्य करने पर मिलने वाला बाहरी लाभ प्रेरणा देता है। इसके विपरीत आन्तरिक अभिप्रेरक व्यक्ति के भीतर से उत्पन्न होते हैं। उपलब्धि की आवश्यकता ऐसी ही आन्तरिक प्रेरणा है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को उत्कृष्ट सिद्ध करने तथा कठिन लक्ष्य पाने के लिए बिना किसी बाहरी पुरस्कार के प्रयास करता है। अतः उपलब्धि बाह्य अभिप्रेरक नहीं है।
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Q76. विभिन्न आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों की समावेशी कक्षा के लिए कौन-सी शिक्षण-अधिगम व्यूहरचनाएँ महत्वपूर्ण होंगी ?

(a) बहुसंवेदी शिक्षण (b) सहयोगी अधिगम (c) साथी शिक्षण (d) दल शिक्षण

Right Answer: a, b, c एवं d


Explanation:

समावेशी कक्षा में भिन्न-भिन्न क्षमताओं तथा आवश्यकताओं वाले विद्यार्थी एक साथ पढ़ते हैं, इसलिए वहाँ किसी एक विधि से काम नहीं चलता। बहुसंवेदी शिक्षण में देखने, सुनने, छूने आदि अनेक इन्द्रियों का प्रयोग होता है जिससे हर बालक अपनी सुविधा से सीखता है। सहयोगी अधिगम में बालक छोटे समूहों में मिलकर कार्य करते हैं, साथी शिक्षण में सक्षम बालक अपने सहपाठी की सहायता करता है और दल शिक्षण में कई शिक्षक मिलकर पढ़ाते हैं। अतः चारों व्यूहरचनाएँ समावेशी कक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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Q77. प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शैक्षिक व्यवस्था की जानी चाहिए ?

Right Answer: त्वरण


Explanation:

प्रतिभाशाली बालक वे होते हैं जिनकी बुद्धि लब्धि सामान्य से बहुत अधिक होती है और जो कक्षा का पाठ्यक्रम शीघ्र ही आत्मसात कर लेते हैं। उनके लिए त्वरण की व्यवस्था उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें बालक को शीघ्र प्रवेश, कक्षा-उन्नयन अथवा संवर्धित पाठ्यक्रम देकर उसकी गति के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दिया जाता है। इससे उसकी ऊब और कुसमायोजन दूर होते हैं। उपचारात्मक शिक्षण, वाचन अभ्यास तथा वाक्-उपचार पिछड़े अथवा विशिष्ट कठिनाई वाले बालकों के लिए होते हैं। अतः त्वरण सही उत्तर है।
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Q78. वायगोट्स्की के अनुसार, वह भाषण जो स्वयं की ओर निर्देशित होता है, कहलाता है :

Right Answer: निजी भाषण


Explanation:

वायगोट्स्की के अनुसार भाषा और चिंतन का घनिष्ठ संबंध है। प्रारंभ में बालक दूसरों से बात करने के लिए सामाजिक भाषण का प्रयोग करता है। इसके बाद वह ऊँचे स्वर में स्वयं से बात करने लगता है और अपने कार्यों का निर्देशन करता है, इसे निजी अथवा वैयक्तिक भाषण कहते हैं। यह भाषण चिंतन को दिशा देता है, कठिन कार्यों में समस्या समाधान में सहायक होता है और आगे चलकर आन्तरिक वाणी में बदल जाता है। पियाजे ने इसे अहंकेन्द्रित भाषण कहकर अपरिपक्वता माना था। अतः सही उत्तर निजी भाषण है।
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Q79. किस मनोवैज्ञानिक ने अपने संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त में ‘वस्तु स्थायित्व’ का संप्रत्यय प्रस्तुत किया ?

Right Answer: पियाजे


Explanation:

वस्तु स्थायित्व का अर्थ है यह समझ लेना कि कोई वस्तु दिखाई न देने पर भी अस्तित्व में बनी रहती है। जीन पियाजे ने अपने संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त की प्रथम अवस्था, अर्थात इन्द्रियजनित गामक अवस्था में यह प्रत्यय प्रस्तुत किया। यह क्षमता लगभग आठ से बारह माह की आयु में विकसित होती है, तभी शिशु कपड़े से ढकी हुई वस्तु को खोजने लगता है। इससे पहले उसके लिए ओझल वस्तु समाप्त हो जाती थी। वायगोट्स्की, ब्रूनर तथा कोह्लबर्ग के सिद्धान्तों में यह संकल्पना नहीं आती। अतः उत्तर पियाजे है।
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Q80. ‘किसी कार्य का संतोषजनक प्रभाव उस कार्य के सीखने को प्रभावित करता है।’ सीखने का यह नियम किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया ?

Right Answer: थॉर्नडाइक


Explanation:

एडवर्ड थॉर्नडाइक ने अधिगम के तीन मुख्य नियम दिए, जिनमें प्रभाव का नियम सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार यदि किसी अनुक्रिया के बाद संतोषजनक अथवा सुखद परिणाम मिलता है, तो उस अनुक्रिया और उद्दीपक का संबंध दृढ़ हो जाता है और वह व्यवहार पुनः दोहराया जाता है। इसके विपरीत कष्टकर परिणाम मिलने पर संबंध शिथिल पड़ जाता है। यही नियम आगे चलकर पुनर्बलन की अवधारणा का आधार बना। अभ्यास का नियम तथा तत्परता का नियम भी थॉर्नडाइक ने ही दिए। अतः सही उत्तर थॉर्नडाइक है।
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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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