Psychology: 257 MCQs with Answers

Psychology Questions and Answers - India Study Institute
Psychology

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Psychology Questions and Answers

India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.

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Other Exam Papers:

Q81. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विकास के संदर्भ में सही नहीं है ?

Right Answer: सभी बच्चों का विकास एक-समान होता है।


Explanation:

विकास एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें आकार के साथ-साथ प्रकार्यात्मक परिवर्तन भी होते हैं, इसका प्रतिमान सामान्यतः पूर्वानुमेय होता है तथा यह सामान्य अनुक्रियाओं से विशिष्ट अनुक्रियाओं की ओर बढ़ता है। ये तीनों कथन विकास के स्वीकृत सिद्धान्त हैं। किन्तु यह कहना कि सभी बच्चों का विकास एक समान होता है, पूर्णतः गलत है, क्योंकि वंशानुक्रम, पोषण, स्वास्थ्य तथा वातावरण की भिन्नता के कारण प्रत्येक बालक के विकास की गति और स्तर अलग होते हैं। इसी को वैयक्तिक भिन्नता कहा जाता है। अतः तीसरा कथन असत्य है।
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Q82. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सीखने की विराम विधि के महत्व को इंगित नहीं करता ?

Right Answer: स्मृति चिह्न समेकित नहीं होते


Explanation:

विराम अथवा अन्तरालयुक्त विधि में सीखने के बीच-बीच में विश्राम दिया जाता है। इससे बालक को थकान नहीं होती, सीखने में अभिरुचि बनी रहती है और मानसिक ऊब उत्पन्न नहीं होती। साथ ही विश्राम के समय मस्तिष्क में स्मृति चिह्नों का समेकन होता है, जिससे स्मरण अधिक स्थायी बनता है। अतः यह कहना कि स्मृति चिह्न समेकित नहीं होते, इस विधि के महत्व के विपरीत है और वस्तुतः असत्य है। शोध बताते हैं कि अन्तराल प्रभाव के कारण विराम विधि अविराम विधि से श्रेष्ठ रहती है। अतः दूसरा कथन सही उत्तर है।
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Q83. निम्नलिखित में से कौन-सा निबंधात्मक प्रकार के प्रश्नों का एक रूप नहीं है ?

Right Answer: प्रत्याभिज्ञानात्मक


Explanation:

निबंधात्मक प्रश्न वे होते हैं जिनमें विद्यार्थी को अपने शब्दों में विस्तार से उत्तर लिखना पड़ता है। इनके अनेक रूप होते हैं, जैसे वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक, तुलनात्मक तथा व्याख्यात्मक। इनमें विचारों का संगठन, तर्क तथा अभिव्यक्ति की क्षमता मापी जाती है। इसके विपरीत प्रत्याभिज्ञानात्मक अर्थात पहचान करने वाले प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के होते हैं, जिनमें दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर पहचानना होता है, जैसे बहुविकल्पीय और सत्य-असत्य प्रश्न। इनमें लेखन का अवसर नहीं होता। अतः प्रत्याभिज्ञानात्मक निबंधात्मक प्रश्न का रूप नहीं है।
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Q84. किस अधिगम निर्योग्यता में निम्नलिखित हस्तक्षेप कार्यक्रम सुझाए गए हैं ? (A) भाषायी समझ के लिए प्रयास (B) वर्तनी सुधार के लिए अभ्यास

Right Answer: डिस्लेक्सिया


Explanation:

डिस्लेक्सिया एक विशिष्ट अधिगम निर्योग्यता है जिसमें बालक को शब्दों को पहचानने, पढ़ने, वर्तनी लिखने तथा भाषा को समझने में कठिनाई होती है। वह अक्षरों को उलट-पलट देता है और पढ़ी हुई सामग्री का अर्थ ग्रहण नहीं कर पाता। इसीलिए इसके उपचार में भाषायी समझ बढ़ाने के प्रयास तथा वर्तनी सुधार के लिए निरंतर अभ्यास कराए जाते हैं। डिस्ग्राफिया लेखन से, डिस्कैलकुलिया गणितीय गणना से जुड़ी कठिनाई है, जबकि डिस्मैग्निशिया एक भ्रामक विकल्प है। अतः दिए गए हस्तक्षेप कार्यक्रम डिस्लेक्सिया के लिए हैं।
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Q85. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिगम के संबंध में सही नहीं है ?

Right Answer: अधिगम परिपक्वता के कारण व्यवहार में परिवर्तन है।


Explanation:

अधिगम की मान्य परिभाषा के अनुसार यह अभ्यास तथा अनुभवों के परिणामस्वरूप व्यवहार में होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। अतः पहले तीन कथन अधिगम की सही व्याख्या करते हैं। किन्तु परिपक्वता के कारण होने वाला व्यवहार परिवर्तन अधिगम नहीं कहलाता, क्योंकि वह शारीरिक और स्नायविक वृद्धि का स्वाभाविक परिणाम है और उसमें अभ्यास या अनुभव की कोई भूमिका नहीं होती, जैसे शिशु का समय आने पर चलना या बोलना। मनोवैज्ञानिक अधिगम और परिपक्वता को स्पष्ट रूप से अलग मानते हैं। अतः चौथा कथन सही नहीं है।
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Q86. एक बच्चा किसी पाठ को अपनी सुविधानुसार कई भागों में बाँटकर सीखता है। यह सीखने की कौन-सी विधि है ?

Right Answer: अंश विधि


Explanation:

जब बालक किसी लंबे पाठ को अपनी सुविधा के अनुसार छोटे-छोटे भागों में बाँटकर एक-एक भाग याद करता है और अंत में सबको जोड़ लेता है, तो उसे अंश विधि अथवा खंड विधि कहते हैं। यह विधि कठिन और लंबे पाठों के लिए विशेष उपयोगी होती है क्योंकि इससे थकान कम होती है और प्रत्येक भाग पर पूरा ध्यान दिया जा सकता है। इसके विपरीत पूर्ण विधि में पाठ को एक साथ बार-बार दोहराया जाता है। अविराम विधि तथा प्रासंगिक विधि यहाँ प्रासंगिक नहीं हैं। अतः उत्तर अंश विधि है।
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Q87. ‘समीपस्थ विकास का क्षेत्र’ यह संप्रत्यय किस मनोवैज्ञानिक द्वारा प्रस्तुत किया गया है ?

Right Answer: वायगोट्स्की


Explanation:

समीपस्थ विकास का क्षेत्र लेव वायगोट्स्की द्वारा दी गई महत्वपूर्ण संकल्पना है। यह उस अन्तर को दर्शाता है जो बालक के स्वतंत्र रूप से किए जा सकने वाले कार्य तथा किसी अधिक सक्षम व्यक्ति की सहायता से किए जा सकने वाले कार्य के बीच होता है। इस क्षेत्र में दिया गया शिक्षण सर्वाधिक प्रभावी होता है, क्योंकि यहीं बालक की सम्भाव्य क्षमता वास्तविक क्षमता में बदलती है। इसी से पाड़ अथवा सहारा देने की अवधारणा जुड़ी है। एरिक्सन, कोह्लबर्ग तथा पियाजे ने यह प्रत्यय नहीं दिया। अतः उत्तर वायगोट्स्की है।
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Q88. गैने के अधिगम प्रतिमान के अनुसार किसी संप्रत्यय अधिगम के पूर्व किस प्रकार के अधिगम की आवश्यकता नहीं होगी ?

Right Answer: नियम अधिगम


Explanation:

रॉबर्ट गैने ने अधिगम को सरल से जटिल की ओर बढ़ने वाली आठ स्तरीय पदानुक्रमिक शृंखला माना है। इसका क्रम है संकेत अधिगम, उद्दीपक-अनुक्रिया अधिगम, शृंखला अधिगम, शाब्दिक साहचर्य, विभेदन अधिगम, संप्रत्यय अधिगम, नियम अधिगम तथा समस्या समाधान। इस क्रम के अनुसार संकेत, शृंखला तथा विभेदन अधिगम संप्रत्यय अधिगम से पहले आते हैं और उसके लिए आवश्यक पूर्वापेक्षा हैं। नियम अधिगम संप्रत्यय अधिगम के बाद आता है, क्योंकि नियम बनाने के लिए पहले संप्रत्यय समझना जरूरी है। अतः नियम अधिगम पूर्व आवश्यक नहीं होगा।
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Q89. 90-110 बुद्धि लब्धि प्रसार किस बौद्धिक श्रेणी का प्रतिनिधित्व करता है ?

Right Answer: औसत


Explanation:

बुद्धि लब्धि के आधार पर बालकों का वर्गीकरण किया जाता है। सामान्यतः नब्बे से एक सौ दस के बीच की बुद्धि लब्धि को औसत या सामान्य श्रेणी माना जाता है और जनसंख्या का सबसे बड़ा भाग, लगभग पैंतालीस से पचास प्रतिशत, इसी वर्ग में आता है। इससे नीचे अस्सी से नब्बे तक औसत से कम, एक सौ दस से एक सौ बीस तक औसत से अधिक तथा एक सौ चालीस से ऊपर प्रतिभाशाली या श्रेष्ठ श्रेणी मानी जाती है। सामान्य वितरण वक्र भी यही दर्शाता है। अतः सही उत्तर औसत है।
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Q90. निम्नांकित में से किसने नैतिक विकास का सिद्धांत दिया है ?

Right Answer: पियाजे ने


Explanation:

नैतिक विकास पर सर्वप्रथम व्यवस्थित सिद्धांत जीन पियाजे ने प्रस्तुत किया। उन्होंने बच्चों के खेल के नियमों का अध्ययन करके नैतिकता की दो अवस्थाएँ बताईं — परायत्त नैतिकता (नैतिक यथार्थवाद), जिसमें नियम अपरिवर्तनीय माने जाते हैं, और स्वायत्त नैतिकता (नैतिक सापेक्षवाद), जिसमें बच्चा नियमों को आपसी सहमति से बना मानने लगता है। बाद में कोहलबर्ग ने इसी आधार पर नैतिक विकास के तीन स्तर और छह अवस्थाएँ दीं। वायगोट्स्की सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत, फ्रायड मनोलैंगिक विकास तथा बंडुरा सामाजिक अधिगम सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, इसलिए सही उत्तर पियाजे है।

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Q91. तृतीयक चक्रीय प्रतिक्रियाएँ विकसित होती हैं :

Right Answer: संवेदात्मक गामक अवस्था के दौरान


Explanation:

तृतीयक चक्रीय प्रतिक्रियाएँ पियाजे की संवेदी-गामक (सेंसरी मोटर) अवस्था की पाँचवीं उप-अवस्था हैं, जो लगभग 12 से 18 माह की आयु में विकसित होती हैं। इस अवस्था में शिशु किसी क्रिया को ज्यों-का-त्यों दोहराने के स्थान पर उसमें जान-बूझकर परिवर्तन करके परिणाम देखता है, जैसे गेंद को कभी धीरे तो कभी जोर से गिराकर आवाज़ का अंतर समझना। इसे 'लघु वैज्ञानिक' व्यवहार कहा जाता है, क्योंकि शिशु प्रयोग द्वारा नया ज्ञान अर्जित करता है। यह पूरी अवस्था जन्म से दो वर्ष तक चलती है।

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Q92. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन विकास के सन्दर्भ में सही नहीं है ?

Right Answer: यह एकआयामी होता है।


Explanation:

विकास एक बहुआयामी (मल्टीडाइमेंशनल) प्रक्रिया है, एकआयामी नहीं। इसमें शारीरिक, संज्ञानात्मक, संवेगात्मक, सामाजिक तथा नैतिक — सभी आयाम साथ-साथ विकसित होते हैं, इसलिए कथन 'यह एकआयामी होता है' गलत है। शेष तीनों कथन सही हैं — विकास गर्भाधान से मृत्यु तक चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है; इसकी प्रवृत्ति संचयी होती है, अर्थात् पूर्व अनुभवों पर आगे का विकास आधारित रहता है; तथा विकास की गति और स्तर में वैयक्तिक विभिन्नताएँ स्पष्ट रूप से पाई जाती हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (2) है।

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Q93. उत्क्रमणीय योग्यता विकसित होने की अवस्था है :

Right Answer: मूर्त संक्रियात्मक अवस्था


Explanation:

उत्क्रमणीयता (रिवर्सिबिलिटी) अर्थात् किसी मानसिक क्रिया को उलटकर मूल स्थिति में लौटने की योग्यता पियाजे की मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7 से 11 वर्ष) में विकसित होती है। इसी अवस्था में बालक संरक्षण (कंज़र्वेशन), वर्गीकरण, क्रमबद्धता तथा विकेन्द्रीकरण जैसी संक्रियाएँ भी सीखता है। पूर्व संक्रियात्मक अवस्था में बालक आत्मकेन्द्रित रहता है और उत्क्रमणीयता का अभाव होता है। औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में अमूर्त एवं परिकल्पनात्मक चिंतन आता है, जबकि संवेदी गामक अवस्था में केवल इन्द्रिय-गत्यात्मक अनुभव होते हैं। अतः सही उत्तर मूर्त संक्रियात्मक अवस्था है।

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Q94. ‘निकटता के सिद्धांत’ की संकल्पना किसके द्वारा दी गयी है ?

Right Answer: वर्दीमर द्वारा


Explanation:

'निकटता का नियम' (लॉ ऑफ प्रॉक्सिमिटी) गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के प्रत्यक्षीकरण संगठन नियमों में से एक है, जिसे मैक्स वर्दीमर ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार जो वस्तुएँ एक-दूसरे के अधिक निकट होती हैं, उन्हें हम एक ही समूह के रूप में देखते हैं। गेस्टाल्टवादियों के अन्य प्रमुख नियम हैं — समानता का नियम, निरन्तरता का नियम, समापन का नियम तथा सरलता का नियम। वर्दीमर, कोहलर तथा कोफ्का इस सम्प्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं। थॉर्नडाइक प्रयास एवं त्रुटि, पावलॉव शास्त्रीय अनुबंधन तथा स्किनर क्रियाप्रसूत अनुबंधन के लिए प्रसिद्ध हैं। अतः सही उत्तर वर्दीमर द्वारा है।

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Q95. निम्नांकित में से किसका अध्ययन मनोविज्ञान एवं बाल विकास के प्रतिच्छेद बिन्दु पर स्थित है ?

Right Answer: विकासात्मक मनोविज्ञान


Explanation:

विकासात्मक मनोविज्ञान वह शाखा है जो मनोविज्ञान एवं बाल विकास के प्रतिच्छेद बिन्दु पर स्थित है। यह जन्म से मृत्यु तक व्यक्ति में होने वाले शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं संवेगात्मक परिवर्तनों का क्रमबद्ध अध्ययन करती है, इसलिए बाल विकास इसका केन्द्रीय भाग है। सामाजिक मनोविज्ञान समूह-व्यवहार तथा अंतर्वैयक्तिक संबंधों का, औद्योगिक मनोविज्ञान कार्यस्थल एवं उत्पादकता का तथा संगठनात्मक मनोविज्ञान संस्थागत संरचना एवं नेतृत्व का अध्ययन करता है। इन तीनों का केन्द्र वयस्क एवं संस्था है, बालक नहीं। विकासात्मक मनोविज्ञान की सहायता से ही शिक्षक बालक की आयु-स्तरीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण योजना बना पाता है। इसलिए सही उत्तर विकासात्मक मनोविज्ञान है।

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Q96. मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला के खोजकर्ता/प्रतिपादक थे :

Right Answer: विलियम वुण्ट


Explanation:

मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना सन् 1879 में जर्मनी के लिपजिग विश्वविद्यालय में विलियम वुण्ट ने की थी। इसी घटना को मनोविज्ञान के एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में जन्म माना जाता है, इसलिए वुण्ट को 'प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक' कहा जाता है। उन्होंने अन्तर्निरीक्षण विधि द्वारा चेतना के तत्वों का अध्ययन किया और संरचनावाद की नींव रखी। एल्फ्रेड एडलर व्यक्तिगत मनोविज्ञान, सिरील बर्ट बुद्धि परीक्षण तथा जीन पियाजे संज्ञानात्मक विकास के लिए जाने जाते हैं। अतः सही उत्तर विलियम वुण्ट है।

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Q97. निम्नांकित में से कौन-सी पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की अवस्था नहीं है ?

Right Answer: गुप्तावस्था


Explanation:

गुप्तावस्था (लेटेंसी स्टेज) पियाजे की नहीं, बल्कि सिगमंड फ्रायड के मनोलैंगिक विकास सिद्धांत की अवस्था है, जो लगभग 6 से 12 वर्ष तक चलती है। पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ हैं — संवेदी गामक (0-2 वर्ष), पूर्व संक्रियात्मक (2-7 वर्ष), मूर्त संक्रियात्मक (7-11 वर्ष) तथा औपचारिक संक्रियात्मक (11 वर्ष से आगे)। फ्रायड की अवस्थाएँ मौखिक, गुदा, लिंग प्रधान, गुप्तावस्था एवं जननांगीय हैं। गुप्तावस्था में लैंगिक ऊर्जा दबी रहती है और बालक का ध्यान पढ़ाई, खेल तथा समलिंगी मित्रता की ओर रहता है। अतः जो पियाजे की अवस्था नहीं है, वह गुप्तावस्था है।

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Q98. ‘काल्पनिक दर्शक / श्रोता’ किस अवस्था से सम्बंधित है ?

Right Answer: किशोरावस्था से


Explanation:

'काल्पनिक दर्शक/श्रोता' (इमेजिनरी ऑडियंस) की अवधारणा डेविड एल्काइंड ने दी और यह किशोरावस्था से सम्बंधित है। इसमें किशोर यह मानता है कि सब लोग निरंतर उसी को देख रहे हैं और उसके रूप, वस्त्र तथा व्यवहार का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिससे वह अत्यधिक आत्म-सचेत हो जाता है। इसी से जुड़ी दूसरी अवधारणा 'व्यक्तिगत दंतकथा' (पर्सनल फेबल) है, जिसमें किशोर स्वयं को अद्वितीय एवं अभेद्य समझता है। ये दोनों किशोरावस्था के आत्मकेन्द्रण को दर्शाती हैं। अतः सही उत्तर किशोरावस्था है।

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Q99. एक बच्चा कहता है कि ‘चाँद हँस रहा है’। यह निम्न में से किस विशेषता को इंगित करता है ?

Right Answer: एनिमिज्म


Explanation:

जब बच्चा कहता है कि 'चाँद हँस रहा है', तो वह निर्जीव वस्तुओं को जीवित मानकर उन्हें भावनाएँ एवं इच्छाएँ प्रदान कर रहा होता है। पियाजे ने इस विशेषता को 'एनिमिज़्म' (सजीवतावाद) कहा है और यह पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (2 से 7 वर्ष) का प्रमुख लक्षण है। इसी अवस्था में आत्मकेन्द्रण, केन्द्रीकरण, अनुत्क्रमणीयता तथा प्रतीकात्मक चिंतन भी दिखाई देते हैं। आत्मकेन्द्रण का अर्थ है दूसरों के दृष्टिकोण को न समझ पाना, जो यहाँ लागू नहीं होता। अतः सही उत्तर एनिमिज्म है।

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Q100. क्रियाप्रसूत अनुकूलन के अनुसार कौन-सा कथन सही है ?

Right Answer: नकारात्मक पुनर्बलन वांछनीय व्यवहार बढ़ाता है।


Explanation:

क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर) के अनुसार नकारात्मक पुनर्बलन किसी अप्रिय उद्दीपक को हटाकर वांछनीय व्यवहार की आवृत्ति बढ़ाता है, जैसे गृहकार्य पूरा करने पर डाँट का बंद हो जाना। यह दंड से भिन्न है — दंड व्यवहार को घटाता है जबकि पुनर्बलन (सकारात्मक या नकारात्मक) व्यवहार को बढ़ाता है। अतः 'दंड एक सकारात्मक पुनर्बलन है' कथन गलत है। सीखा हुआ व्यवहार भी विलोपन (एक्सटिंक्शन) द्वारा भुलाया जा सकता है। इसलिए सही कथन है — नकारात्मक पुनर्बलन वांछनीय व्यवहार बढ़ाता है।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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