Psychology: 257 MCQs with Answers
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Q181. निम्नलिखित में से कौन - सा बुद्धि का त्रिआर्किक सिद्धांत ‘‘व्यावहारिक बुद्धि या व्यावसायिक समझ’’ की सही व्याख्या करता है ?
Right Answer: सांदर्भिक बुद्धि
Explanation:
रॉबर्ट स्टर्नबर्ग के बुद्धि के त्रिआर्किक सिद्धान्त में तीन उप-सिद्धान्त हैं। घटकीय अथवा विश्लेषणात्मक बुद्धि सूचना के प्रसंस्करण, तर्क तथा समस्या-समाधान से जुड़ी है और परम्परागत परीक्षणों में यही मापी जाती है। आनुभाविक अथवा सृजनात्मक बुद्धि नवीन परिस्थितियों में मौलिक समाधान खोजने तथा अनुभव को स्वचालित बनाने की क्षमता है। सांदर्भिक अथवा व्यावहारिक बुद्धि वास्तविक जीवन के परिवेश से अनुकूलन करने, उसे अपने अनुकूल ढालने अथवा उपयुक्त परिवेश चुनने की योग्यता है। इसे ही ‘व्यावसायिक समझ’ या सांसारिक चातुर्य कहा जाता है, जो मौन ज्ञान पर आधारित होती है।
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Q182. निम्नलिखित में से कौन - सा मनोविज्ञान का परिदृश्य मानव की स्वतंत्र इच्छाओं एवं उनके विकसित होने के स्वाभाविक प्रयास एवं उनकी आन्तरिक क्षमताओं के मुखरित होने पर बल देता है :
Right Answer: मानवतावादी परिदृश्य
Explanation:
मानवतावादी परिदृश्य के प्रमुख प्रवर्तक अब्राहम मैस्लो तथा कार्ल रोजर्स रहे। इसे मनोविज्ञान की ‘तीसरी शक्ति’ कहा जाता है, क्योंकि यह मनोविश्लेषण के अचेतन निर्धारणवाद और व्यवहारवाद के पर्यावरणीय नियंत्रण दोनों को अस्वीकार करता है। यह दृष्टिकोण मानता है कि मनुष्य स्वतंत्र इच्छा रखता है, अपने चुनाव के लिए उत्तरदायी है तथा उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने और अपनी आन्तरिक क्षमताओं को मुखरित करने की प्रवृत्ति होती है। मैस्लो ने इसे आत्मसिद्धि कहा और रोजर्स ने इसके लिए बिना शर्त सकारात्मक आदर तथा सहानुभूति को आवश्यक बताया।
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Q183. लोग कभी-कभी गलती से यह मान लेते हैं कि दूसरों की राय उनसे अलग होती है, जब भी ऐसा होता है, लोग दिखाते हैं :
Right Answer: बहुलवादी अज्ञान
Explanation:
बहुलवादी अज्ञान वह स्थिति है जिसमें समूह के अधिकांश सदस्य निजी रूप से एक ही मत रखते हैं, किन्तु प्रत्येक गलती से यह मान लेता है कि दूसरों के विचार उससे भिन्न हैं। इसका कारण यह है कि लोग अपनी असहमति खुलकर व्यक्त नहीं करते और दूसरों की चुप्पी को सहमति समझ लेते हैं। परिणामस्वरूप कोई भी बोलता नहीं और अनुपयोगी परम्पराएँ बनी रहती हैं। कक्षा में शंका होते हुए भी प्रश्न न पूछना तथा आपात स्थिति में दर्शक-प्रभाव इसके उदाहरण हैं। संज्ञानात्मक असंगति फेस्टिंगर की अवधारणा है, जो परस्पर विरोधी संज्ञानों के तनाव से जुड़ी है।
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Q184. एक विद्यार्थी पाठ्यसामग्री का पुनरावलोकन करती है और कुछ समय अध्ययन के बाद निर्णय लेती है कि वह इसे अच्छे से जानती है तथा अगले विषय पर चली जाती है। स्वयं की अधिगम-स्थिति के इस मूल्यांकन को कहा जाता है :
Right Answer: मेटासंज्ञान
Explanation:
मेटासंज्ञान का अर्थ है ‘संज्ञान के बारे में संज्ञान’, अर्थात् अपनी ही चिन्तन एवं अधिगम प्रक्रियाओं की जानकारी तथा उन पर नियंत्रण। इस पद का प्रयोग जॉन फ्लेवेल ने किया। इसके दो प्रमुख अंग हैं — मेटासंज्ञानात्मक ज्ञान, जिसमें व्यक्ति जानता है कि उसे कौन-सी युक्ति कब उपयोगी लगती है, और मेटासंज्ञानात्मक नियमन, जिसमें वह योजना बनाता, प्रगति की निगरानी करता तथा परिणाम का मूल्यांकन करता है। यह निर्णय लेना कि ‘अब मैं इस विषय को पर्याप्त जानती हूँ, अगला पढ़ा जाए’ अधिगम-निर्णय अर्थात् मेटासंज्ञानात्मक निगरानी का ही उदाहरण है।
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Q185. मनोचिकित्सकीय संबंध के दौरान जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ, शारीरिक स्पर्श और खुलकर रोने की इच्छा प्रकट करता है, तब परामर्शदाता का स्थानांतरण प्रतिरूप होता है :
Right Answer: पालन - पोषणकर्ता
Explanation:
मनोचिकित्सकीय सम्बन्ध में जब सेवार्थी परामर्शदाता को अपने जीवन की किसी महत्त्वपूर्ण आकृति की तरह देखने लगता है, तो उसे स्थानांतरण कहते हैं। जब सेवार्थी अत्यधिक भावनाएँ प्रकट करता है, शारीरिक स्पर्श चाहता है और खुलकर रोना चाहता है, तो वह वस्तुतः माता-पिता जैसी देखभाल और सुरक्षा की माँग कर रहा होता है। ऐसी स्थिति में परामर्शदाता की भूमिका पालन-पोषणकर्ता की बन जाती है, जिसमें वह स्नेह, आश्वासन एवं संरक्षण प्रदान करता है। परामर्शदाता को इस प्रतिरूप के प्रति सजग रहना चाहिए, अन्यथा सेवार्थी की निर्भरता बढ़ जाती है और चिकित्सकीय सीमाएँ धुँधली पड़ जाती हैं।
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Q186. शोध करते समय यदि शोधकर्ता किसी घटना के बारे में किसी के व्यक्तिगत अनुभव की गहराई से समझ हासिल करना चाहता है, तो सबसे अच्छी विधि होगी :
Right Answer: व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण
Explanation:
व्याख्यात्मक घटनात्मक विश्लेषण एक गुणात्मक शोध विधि है, जिसे जोनाथन स्मिथ ने विकसित किया। इसका उद्देश्य यह गहराई से समझना है कि कोई व्यक्ति किसी महत्त्वपूर्ण घटना या अनुभव को स्वयं किस प्रकार अर्थ देता है। इसमें प्रायः थोड़े से प्रतिभागियों के साथ अर्ध-संरचित गहन साक्षात्कार किए जाते हैं और उनके शब्दशः प्रतिलेख से उपविषय एवं प्रतिरूप निकाले जाते हैं। यह दोहरी व्याख्या पर आधारित है, क्योंकि शोधकर्ता उस अर्थ की व्याख्या करता है जो प्रतिभागी अपने अनुभव को दे रहा होता है। प्रवचन विश्लेषण तथा संवादी विश्लेषण भाषा एवं संवाद की संरचना पर केन्द्रित रहते हैं।
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Q187. डोपामाईन नामक न्यूरोट्रांसमीटर मुख्यतः पाया जाता है :
Right Answer: मस्तिष्क और सब्सटेंशिया नाइग्रा के न्यूरॉन्स में
Explanation:
डोपामाइन एक कैटेकोलामीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मुख्यतः मस्तिष्क के न्यूरॉन्स में तथा विशेष रूप से मध्य मस्तिष्क की सब्सटेंशिया नाइग्रा में पाया जाता है। यहाँ से निग्रोस्ट्राइएटल मार्ग द्वारा यह गतिविधि के नियंत्रण को संचालित करता है, जबकि मेसोलिम्बिक मार्ग पुरस्कार, सुख एवं अभिप्रेरणा से जुड़ा है। सब्सटेंशिया नाइग्रा की कोशिकाओं के क्षय से डोपामाइन घट जाता है और पार्किंसन रोग उत्पन्न होता है, जिसमें कम्पन एवं जड़ता दिखती है। इसके विपरीत इसकी अतिसक्रियता मनोविदलता से जोड़ी जाती है। न्यूरोपेशीय जंक्शन पर तो एसीटिलकोलीन कार्य करता है।
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Q188. जब व्यक्ति ‘‘करने योग्य कार्यों की सूची’’ तैयार कर यह सोचता है कि वह उन कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लेंगे, परंतु बमुश्किल ही उन्हें पूरा कर पाता है, को कहते हैं :
Right Answer: नियोजन भ्रांति
Explanation:
नियोजन भ्रांति की अवधारणा डेनियल कानेमन तथा एमोस ट्वर्सकी ने दी। यह वह व्यवस्थित पूर्वाग्रह है जिसमें व्यक्ति किसी कार्य को पूरा करने में लगने वाले समय, लागत एवं जोखिम का कम आकलन करता है और लाभ का अधिक। ‘करने योग्य कार्यों की सूची’ बनाते समय वह आदर्श परिस्थितियों की कल्पना करता है और बीमारी, व्यवधान तथा विलम्ब जैसी सामान्य बाधाओं को गणना में नहीं लेता। रोचक बात यह है कि पिछले अनुभवों में बार-बार देरी होने पर भी यह भ्रांति बनी रहती है। इससे बचने का उपाय है समान कार्यों के वास्तविक आँकड़ों पर आधारित बाह्य दृष्टिकोण अपनाना।
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Q189. पूर्वाग्रह से संबंधित एक सिद्धान्त जो बताता है कि जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढे़गी समूह के सदस्य एक दूसरे के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण तेजी से विकसित करेंगे, कहलाता है :
Right Answer: यथार्थवादी संघर्ष सिद्धान्त
Explanation:
यथार्थवादी संघर्ष सिद्धान्त बताता है कि पूर्वाग्रह एवं अन्तर्समूह शत्रुता का मूल कारण सीमित संसाधनों के लिए वास्तविक प्रतिस्पर्धा है। जैसे-जैसे नौकरी, भूमि अथवा शक्ति के लिए स्पर्धा बढ़ती है, समूह के सदस्य दूसरे समूह के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण, रूढ़धारणाएँ तथा शत्रुता तेजी से विकसित करने लगते हैं। मुज़फ़र शेरिफ़ के प्रसिद्ध ‘रॉबर्स केव’ प्रयोग ने इसे प्रमाणित किया, जहाँ प्रतिस्पर्धी खेलों ने दो बालक-समूहों को शत्रु बना दिया। उसी अध्ययन में यह भी दिखा कि दोनों समूहों को मिलकर पूरा करने योग्य अधिस्थ लक्ष्य देने पर यह शत्रुता घट जाती है।
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Q190. स्मृति अनुसंधान में प्रतिनिधित्वशीलता तथा सामान्यीकरण के पहलू जुड़े हुए हैं :
Right Answer: पारिस्थितिक वैधता से
Explanation:
पारिस्थितिक वैधता से तात्पर्य है कि किसी अध्ययन की परिस्थितियाँ, सामग्री तथा कार्य वास्तविक जीवन से कितने मिलते-जुलते हैं और उसके परिणाम प्रयोगशाला के बाहर कहाँ तक लागू होते हैं। स्मृति अनुसंधान में इसके दो पक्ष माने जाते हैं — प्रतिनिधित्वशीलता, अर्थात् प्रयोग की दशाएँ रोजमर्रा की स्मृति-स्थितियों का प्रतिनिधित्व करती हों, तथा सामान्यीकरण, अर्थात् निष्कर्ष दैनिक जीवन तक विस्तारित हो सकें। एबिंगहॉस के निरर्थक अक्षर-समूह वाले प्रयोगों की इसी आधार पर आलोचना हुई और नाइजर ने वास्तविक जीवन की स्मृति के अध्ययन पर बल दिया, जिससे जीवनचरित स्मृति का क्षेत्र विकसित हुआ।
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Q191. शारीरिक, संवेगात्मक और मनोवैज्ञानिक परिश्रान्ति की अवस्था को कहा जाता है :
Right Answer: बर्नआउट
Explanation:
बर्नआउट दीर्घकालिक एवं अनसुलझे व्यावसायिक तनाव के कारण उत्पन्न शारीरिक, संवेगात्मक तथा मनोवैज्ञानिक परिश्रान्ति की अवस्था है। इसका व्यवस्थित अध्ययन क्रिस्टीना मास्लाक ने किया और तीन आयाम बताए — भावनात्मक थकावट, जिसमें व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह निचुड़ा हुआ अनुभव करता है; व्यक्तिनिर्वैयक्तिकीकरण, जिसमें वह सेवार्थियों के प्रति उदासीन एवं निष्ठुर हो जाता है; तथा व्यक्तिगत उपलब्धि की घटी हुई अनुभूति। शिक्षक, चिकित्सक एवं परामर्शदाता जैसे सहायक व्यवसायों में यह अधिक मिलता है। इसके लक्षण अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, कार्य से विरक्ति तथा निष्पादन में गिरावट के रूप में प्रकट होते हैं।
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Q192. अभिवृत्ति परिवर्तन के द्विचरणीय अवधारणा के प्रतिपादक थे :
Right Answer: मोहसिन
Explanation:
अभिवृत्ति परिवर्तन की द्विचरणीय अवधारणा भारतीय मनोवैज्ञानिक एस० एम० मोहसिन ने प्रस्तुत की। उनके अनुसार अभिवृत्ति एक ही झटके में नहीं बदलती, बल्कि दो चरणों से गुजरती है। प्रथम चरण में लक्ष्य-व्यक्ति उस स्रोत के प्रति अपनी अभिवृत्ति बदलता है जो परिवर्तन का प्रयास कर रहा है, अर्थात् वह स्रोत की विश्वसनीयता, आकर्षण एवं समानता को स्वीकार करता है। द्वितीय चरण में ही वह उस स्रोत द्वारा प्रस्तुत विषय-वस्तु के प्रति अपनी अभिवृत्ति बदलता है। इस प्रकार स्रोत में विश्वास अभिवृत्ति परिवर्तन की अनिवार्य पूर्वशर्त बन जाता है।
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Q193. निम्नलिखित चयनात्मक ध्यान के सिद्धांतों को उनके प्रतिपादकों के साथ मिलान कीजिए एवं सही कूट का चयन कीजिए :
सूची-I
A. निस्यंदक सिद्धांत
B. बहुविधिक सिद्धांत
C. निस्यंदक क्षीणन सिद्धांत
D. टैचिस्टोस्कोप
सूची-II
(i) ट्रायसमैन
(ii) ब्रॉडबेन्ट
(iii) ध्यान का विस्तार
(iv) जॉनसन एवं हिन्ज
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(i), (D)-(iii)
Explanation:
डोनाल्ड ब्रॉडबेन्ट का निस्यंदक सिद्धांत मानता है कि ध्यान एक आरम्भिक छननी की भाँति कार्य करता है, जो केवल चयनित संदेश को आगे भेजती है और शेष को पूरी तरह रोक देती है। ऐनी ट्रायसमैन के निस्यंदक क्षीणन सिद्धांत के अनुसार अनचाहा संदेश पूरी तरह रुकता नहीं, केवल क्षीण होकर आगे बढ़ता है, इसीलिए अपना नाम सुनते ही ध्यान चला जाता है। जॉनसन एवं हिन्ज का बहुविधिक सिद्धांत बताता है कि चयन का बिन्दु स्थिर नहीं, बल्कि कार्य की माँग के अनुसार लचीला होता है। टैचिस्टोस्कोप ध्यान का विस्तार मापने वाला उपकरण है।
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Q194. एक इमेजिंग तकनीक जो मस्तिष्क के रक्त प्रवाह और कई शारीरिक और तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन करती है, को कहते हैं :
Right Answer: पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी)
Explanation:
पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी एक कार्यात्मक इमेजिंग तकनीक है, जिसमें रक्त में अल्प मात्रा में रेडियोधर्मी अनुरेखक, प्रायः रेडियोधर्मी ग्लूकोज, प्रविष्ट कराया जाता है। मस्तिष्क का जो भाग अधिक सक्रिय होता है वहाँ रक्त प्रवाह तथा उपापचय बढ़ जाता है और वहीं अनुरेखक अधिक एकत्र होता है। उत्सर्जित पॉजिट्रॉन का पता लगाकर रंगीन मानचित्र बनाया जाता है, जो रक्त प्रवाह एवं अनेक शारीरिक तथा तंत्रिका संबंधी विशेषताओं का प्रत्यक्ष मापन देता है। इसके विपरीत सीटी तथा एमआरआई मुख्यतः संरचनात्मक चित्र देते हैं, यद्यपि एफएमआरआई कार्यात्मक सूचना भी प्रदान करता है।
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Q195. टकमैन ने बताया कि समूह पाँच विकासात्मक अनुक्रमों से गुजरता है, सही क्रम है :
Right Answer: आकृतिकरण, विप्लवन, मानक निर्माण, निष्पादन एवं समापन
Explanation:
ब्रूस टकमैन ने समूह विकास के चरण बताए, जिनमें बाद में पाँचवाँ चरण जोड़ा गया। पहला चरण आकृतिकरण है, जिसमें सदस्य एक-दूसरे को जानते हैं और औपचारिक व्यवहार करते हैं। दूसरा विप्लवन है, जिसमें भूमिका तथा नेतृत्व को लेकर संघर्ष एवं मतभेद उभरते हैं। तीसरा मानक निर्माण है, जहाँ समूह के नियम एवं मानक तय होते हैं और सामंजस्य बनता है। चौथा निष्पादन है, जिसमें समूह लक्ष्य की ओर प्रभावी ढंग से कार्य करता है। अन्तिम चरण समापन है, जिसमें कार्य पूरा होने पर समूह विसर्जित हो जाता है।
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Q196. अंजली एक अच्छी पाठक है क्योंकि पढ़ते समय वह सामग्री पर सहजता से आगे बढ़ती जाती है। इससे वह साथियों से तेज पढ़ लेती है, परन्तु यह निश्चित नहीं कि वह सामग्री समझ भी पा रही है। इस प्रतिमान की व्याख्या है :
Right Answer: नेत्रप्लुति गति
Explanation:
पढ़ते समय आँखें पंक्ति पर सतत रूप से नहीं सरकतीं, बल्कि छोटी-छोटी तीव्र छलाँगें लगाती हैं जिन्हें नेत्रप्लुति गति कहा जाता है। दो छलाँगों के बीच आँख लगभग एक चौथाई सेकण्ड के लिए ठहरती है और इसी ठहराव में वास्तविक पठन होता है, क्योंकि छलाँग के दौरान दृष्टि लगभग दबी रहती है। कुशल पाठक की छलाँगें लम्बी और ठहराव कम होते हैं, इसलिए वह तेज पढ़ता है। परन्तु ठहराव कम होने से प्रसंस्करण का समय भी घट जाता है, अतः गति बढ़ने पर समझ की गारंटी नहीं रहती। यही अंजली के प्रकरण की व्याख्या है।
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Q197. प्रोफेसर एलिजाबेथ लॉफ्टस मनोविज्ञान में एक अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व है जिन्होंने असत्य स्मृति एवं ........... की अवधारणा दी।
Right Answer: प्रत्यक्षदर्शी अनुमान
Explanation:
एलिजाबेथ लॉफ्टस स्मृति के क्षेत्र की सर्वाधिक प्रभावशाली शोधकर्ताओं में हैं। उन्होंने प्रमाणित किया कि स्मृति किसी अभिलेख की भाँति स्थिर नहीं, बल्कि पुनर्रचित होती है और घटना के बाद मिलने वाली सूचना उसे बदल सकती है। उनके प्रसिद्ध प्रयोग में दुर्घटना का वीडियो दिखाकर प्रश्न में ‘टकराई’ के स्थान पर ‘चूर-चूर हुई’ शब्द प्रयोग करने मात्र से प्रत्यक्षदर्शियों ने अधिक गति बताई और कई ने न होते हुए भी टूटा काँच याद किया। ‘शॉपिंग मॉल में खो जाना’ अध्ययन में उन्होंने असत्य स्मृति ही रोप दी। इससे प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य की विश्वसनीयता पर गम्भीर प्रश्न खड़े हुए।
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Q198. निम्नलिखित में से कौन-सी विकास की सही विशेषता नहीं है?
Right Answer: विकासात्मक पैटर्न अपूर्वानुमेय होते हैं।
Explanation:
विकास एक क्रमबद्ध एवं अपेक्षाकृत पूर्वानुमेय प्रक्रिया है। इसमें निरंतर परिवर्तन तथा वैयक्तिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। इसलिए विकासात्मक पैटर्न को पूर्णतः अपूर्वानुमेय कहना सही नहीं है।
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Q199. निम्नलिखित में से कौन-सी प्रेरकों के मापन हेतु अप्रत्यक्ष विधि है?
Right Answer: वाक्य पूर्ति तकनीक
Explanation:
वाक्य पूर्ति तकनीक एक प्रक्षेपी/अप्रत्यक्ष तकनीक है, जिसमें व्यक्ति को अधूरे वाक्यों को पूरा करने के लिए कहा जाता है। इससे उसकी अंतर्निहित आवश्यकताओं, अभिवृत्तियों और प्रेरकों का अनुमान लगाया जाता है।
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Q200. ‘आत्म-संप्रत्यय’ के आधार क्या होते हैं?
Right Answer: उपरोक्त (1) एवं (2)
Explanation:
आत्म-संप्रत्यय व्यक्ति द्वारा अपने बारे में बनाई गई धारणा है। इसमें उसकी शारीरिक छवि, सामाजिक भूमिकाएँ, क्षमताएँ तथा सामाजिक संबंध आदि सम्मिलित होते हैं।
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