Psychology: 257 MCQs with Answers
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Q141. विद्यार्थियों की मदद के लिए अधिक याद रखने में किसने ‘पीक्यूआरएसटी’ स्मृति सहायक संकेत युक्ति का विकास किया ?
Right Answer: थॉमस एवं रॉबिन्सन
Explanation:
‘पीक्यूआरएसटी’ (PQRST) अध्ययन-युक्ति का विकास थॉमस एवं रॉबिन्सन ने किया। इसके पाँच चरण हैं — Preview अर्थात् पाठ का पूर्वावलोकन, Question अर्थात् शीर्षकों को प्रश्नों में बदलना, Read अर्थात् उत्तर खोजते हुए पढ़ना, Self-recitation अर्थात् स्वयं दोहराना तथा Test अर्थात् स्वयं का परीक्षण करना। यह युक्ति सामग्री के विस्तृत एवं गहन प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करती है, जिससे धारण एवं पुनःस्मरण दोनों बेहतर होते हैं। यह रॉबिन्सन की पूर्ववर्ती SQ3R विधि का ही परिष्कृत रूप है और विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी मानी जाती है।
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Q142. जब लोगों को एहसास होता है कि उनके जीवन में कम साल बचे हैं, तो वे अपनी ऊर्जा और ध्यान को दूरगामी लक्ष्यों से हटाकर वर्तमान पर केंद्रित करने लगते हैं। यह सिद्धान्त कहलाता है :
Right Answer: सामाजिक - भावनात्मक चयनात्मकता सिद्धान्त
Explanation:
सामाजिक-भावनात्मक चयनात्मकता सिद्धान्त लॉरा कार्स्टेनसन ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार समय-सीमा की अनुभूति ही यह तय करती है कि व्यक्ति किन लक्ष्यों को प्राथमिकता देगा। युवावस्था में भविष्य असीमित लगता है, इसलिए ज्ञान-अर्जन तथा नए सम्पर्क बनाने जैसे भविष्योन्मुखी लक्ष्य प्रबल रहते हैं। वृद्धावस्था में जब शेष समय सीमित प्रतीत होने लगता है, तब व्यक्ति भावनात्मक सन्तुष्टि देने वाले घनिष्ठ सम्बन्धों तथा वर्तमान क्षण को महत्त्व देने लगता है। यही कारण है कि वृद्धजन सामाजिक दायरा छोटा कर लेते हैं, फिर भी उनका भावनात्मक कल्याण प्रायः बना रहता है।
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Q143. कोहलर ने अधिगम संबंधित प्रयोग 1913-17 के दौरान केनेरी द्वीप पर किए। उस चिम्पैंजी, जिस पर अर्न्तदृष्टि अधिगम प्रयोग सम्पादित किये गये, का नाम था :
Right Answer: सुल्तान
Explanation:
वोल्फगैंग कोहलर ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान 1913 से 1917 तक कैनरी द्वीप समूह के टेनेरिफे में वनमानुषों पर अध्ययन किया। जिस चिम्पैंजी पर उनके सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रयोग हुए उसका नाम सुल्तान था। एक प्रयोग में सुल्तान ने दो छोटी छड़ियों को जोड़कर पिंजरे से दूर रखा केला खींच लिया और दूसरे में बक्सों को एक के ऊपर एक रखकर छत से लटके केले तक पहुँच गया। यह समाधान क्रमिक प्रयास-त्रुटि से नहीं, बल्कि सम्बन्धों की अचानक समझ अर्थात् अन्तर्दृष्टि से हुआ, जो गेस्टाल्ट अधिगम का आधार बना।
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Q144. किस सिद्धान्त ने सुझाव दिया कि संवेगात्मक अनुभूति और संवेगों में होने वाली शारीरिक प्रतिक्रियाएँ एक दूसरे से भिन्न हैं, दोनों साथ - साथ उत्पन्न होते हैं ?
Right Answer: कैनन-बार्ड सिद्धान्त
Explanation:
कैनन-बार्ड सिद्धान्त वाल्टर कैनन एवं फिलिप बार्ड ने प्रस्तुत किया। इसके अनुसार उद्दीपक की सूचना थैलेमस तक पहुँचती है और वहाँ से एक साथ दो मार्गों पर भेजी जाती है — प्रमस्तिष्क वल्कुट की ओर, जहाँ संवेग की सचेत अनुभूति होती है, तथा स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की ओर, जहाँ शारीरिक उत्तेजना उत्पन्न होती है। इस प्रकार संवेगात्मक अनुभूति और शारीरिक प्रतिक्रियाएँ स्वतंत्र होते हुए भी साथ-साथ घटित होती हैं। जेम्स-लैंज सिद्धान्त इसके विपरीत शारीरिक परिवर्तन को संवेग का कारण मानता है, जबकि शैक्टर-सिंगर उत्तेजना के संज्ञानात्मक नामकरण पर बल देते हैं।
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Q145. व्यक्तियों में सक्षमता का सद्गुण मनोसामाजिक विकास प्रक्रिया के किस विकासात्मक चरण के सफल समाधान के दौरान होता है ?
Right Answer: परिश्रम बनाम हीनता
Explanation:
एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धान्त में प्रत्येक अवस्था का सफल समाधान एक विशिष्ट सद्गुण उत्पन्न करता है। ‘परिश्रम बनाम हीनता’ चौथी अवस्था है, जो लगभग छह से बारह वर्ष अर्थात् विद्यालयी आयु में आती है। इस काल में बालक पढ़ाई, खेल तथा कौशलों में परिश्रम कर उपलब्धि प्राप्त करना चाहता है। सफल होने पर उसमें ‘सक्षमता’ का सद्गुण विकसित होता है, जबकि निरन्तर असफलता एवं आलोचना उसे हीनता की भावना देती है। इसी प्रकार विश्वास से आशा, स्वायत्तता से इच्छाशक्ति, पहल से उद्देश्य तथा पहचान से निष्ठा का सद्गुण उत्पन्न होता है।
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Q146. इडिपस मनोग्रन्थी मनोलैंगिक विकास के किस चरण से जुड़ी है ?
Right Answer: शिश्नीय अवस्था
Explanation:
सिगमंड फ्रॉयड के मनोलैंगिक विकास सिद्धान्त में शिश्नीय अवस्था तीसरी अवस्था है, जो लगभग तीन से छह वर्ष तक चलती है। इसी अवस्था में कामशक्ति का केन्द्र जननांग क्षेत्र बन जाता है और बालक में इडिपस मनोग्रन्थी उत्पन्न होती है, जिसमें वह माता के प्रति आकर्षण तथा पिता के प्रति प्रतिद्वंद्विता अनुभव करता है। बालिकाओं में इसका समरूप इलेक्ट्रा मनोग्रन्थी कहलाता है। समाधान समलिंगी अभिभावक के साथ तादात्म्य द्वारा होता है, जिससे लिंग-भूमिका तथा पराहम् का विकास होता है। मौखिक, गुदीय, अव्यक्त तथा जननांगीय अन्य अवस्थाएँ हैं।
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Q147. जब लोग भ्रामक और बेईमान तरीके से दूसरों के साथ छेड़छाड़ और शोषण करके अपनी शक्ति प्रेरणा व्यक्त करते हैं, तो प्रयुक्त शब्द होता है :
Right Answer: मेकियावेलिनिस्म
Explanation:
मेकियावेलियनिज्म शब्द सोलहवीं शताब्दी के इतालवी विचारक निकोलो मेकियावेली की कृति ‘द प्रिंस’ से लिया गया है। मनोविज्ञान में रिचर्ड क्रिस्टी तथा फ्लोरेंस गीस ने इसे एक व्यक्तित्व शीलगुण के रूप में मापा। उच्च मेकियावेलियन व्यक्ति भावनात्मक रूप से तटस्थ रहते हैं, नैतिक नियमों को लचीला मानते हैं तथा अपने स्वार्थ हेतु छल, चापलूसी और भ्रामक तरीकों से दूसरों को नियंत्रित एवं शोषित करते हैं। इसी रूप में वे अपनी शक्ति-प्रेरणा व्यक्त करते हैं। नार्सिसिज्म तथा मनोविकृति के साथ मिलकर यह व्यक्तित्व की ‘श्याम त्रयी’ बनाता है।
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Q148. शंखपालि का एक क्षेत्र जिसकी क्षति स्पष्ट रूप से भाषण और लिखित भाषा की समझ को खराब करती है, कहलाता है :
Right Answer: वर्निक क्षेत्र
Explanation:
वर्निक क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ शंखपालि (टेम्पोरल लोब) के पश्च भाग में स्थित होता है और इसकी खोज कार्ल वर्निक ने 1874 में की। यह क्षेत्र बोले गए तथा लिखे गए शब्दों के अर्थ को समझने का कार्य करता है। इसकी क्षति से वर्निक वाचाघात होता है, जिसमें रोगी धाराप्रवाह किन्तु निरर्थक वाक्य बोलता है और दूसरों की बात समझ नहीं पाता। इसके विपरीत ब्रोका क्षेत्र ललाट पालि में होता है और वाणी के उत्पादन से जुड़ा है, जबकि आर्क्युएट फैसिक्युलस इन दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाला तन्त्रिका पथ है।
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Q149. दूसरों के दृष्टिकोण पर विचार करने, वस्तुओं को एक आयाम के आधार पर वर्गीकृत करने और संबंध अवधारणाओं को समझने की क्षमता संज्ञानात्मक विकास के किस चरण से चिह्नित होती है ?
Right Answer: मूर्त संक्रियात्मक
Explanation:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त में मूर्त संक्रियात्मक अवस्था लगभग सात से ग्यारह वर्ष तक रहती है। इस अवस्था में बालक आत्मकेन्द्रितता से बाहर आकर दूसरों के दृष्टिकोण पर विचार कर पाता है। वह वस्तुओं को किसी एक आयाम के आधार पर वर्गीकृत करना, क्रमबद्ध करना तथा सम्बन्धपरक अवधारणाओं को समझना सीख जाता है। संरक्षण, उत्क्रमणीयता और विकेन्द्रण इसी अवस्था की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। किन्तु उसका चिन्तन मूर्त वस्तुओं तक ही सीमित रहता है; अमूर्त एवं परिकल्पनात्मक तर्क औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में ही सम्भव हो पाता है।
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Q150. वेक्टर - आइडी विवरण प्रणाली सिद्धान्त (वीआइडीएएस) व्यक्तित्व सिद्धान्त किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया था ?
Right Answer: रेमंड कैटल
Explanation:
वेक्टर-आइडी विवरण प्रणाली (VIDAS) रेमंड बी० कैटल की देन है। कैटल ने व्यक्तित्व के अध्ययन में कारक विश्लेषण का व्यापक प्रयोग किया और शीलगुणों को सतही तथा मूल शीलगुणों में बाँटा। उनकी इस प्रणाली में प्रत्येक शीलगुण को एक सांख्यिकीय सदिश (वेक्टर) तथा एक विशिष्ट पहचान संख्या द्वारा व्यवस्थित रूप से वर्णित किया जाता है, जिससे व्यक्तित्व का वर्णन वस्तुनिष्ठ एवं मापनीय बन सके। इसी पद्धति पर उन्होंने सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली विकसित की। हेनरी मुरे का अभिप्रेरक-दबाव, सुलिवन का अन्तर्वैयक्तिक तथा फ्रोम का मानवतावादी सिद्धान्त इससे भिन्न हैं।
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Q151. चिन्ता विकृति में सेवार्थी को ……… चिन्ता और ……… डर ……… मात्रा में होती है।
Right Answer: अवास्तविक, अतार्किक , तीव्र
Explanation:
चिन्ता विकृति में सेवार्थी की चिन्ता वास्तविक संकट के अनुपात में नहीं होती, इसलिए उसे अवास्तविक कहा जाता है। उसका भय तर्क तथा प्रमाण से मेल नहीं खाता, अतः अतार्किक होता है, और दोनों की मात्रा इतनी तीव्र होती है कि दैनिक कार्य, अध्ययन एवं सामाजिक जीवन बाधित हो जाता है। साथ ही धड़कन बढ़ना, पसीना आना, काँपना तथा साँस फूलना जैसे शारीरिक लक्षण भी उभरते हैं। सामान्य चिन्ता उपयोगी होती है क्योंकि वह सतर्क करती है, परन्तु विकृति में यही चिन्ता अनियंत्रित, दीर्घकालिक और दुर्बल करने वाली बन जाती है।
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Q152. निम्नलिखित समायोजनात्मक युक्तियों को उनके उदाहरणों के साथ मिलान कीजिए एवं सही कूट का चयन कीजिए :
सूची-I (युक्ति)
A. कृत्य अभिविन्यस्त युक्ति
B. संवेग अभिविन्यस्त युक्ति
C. परिहार अभिविन्यस्त युक्ति
D. समस्या केन्द्रित युक्ति
सूची-II (उदाहरण)
(i) यह चिन्ता करना कि मुझे क्या करना है
(ii) अपने समय की बेहतर सारणी बनाना
(iii) मैंने कार्य करने की योजना बनाई तथा उसका क्रियान्वयन किया
(iv) मित्र को फोन करना या टीवी देखना
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(i), (C)-(iv), (D)-(iii)
Explanation:
एंडलर तथा पार्कर ने तनाव से निपटने की तीन शैलियाँ बताईं। कृत्य अभिविन्यस्त युक्ति में व्यक्ति समस्या को सुलझाने हेतु ठोस कदम उठाता है, जैसे अपने समय की बेहतर सारणी बनाना। संवेग अभिविन्यस्त युक्ति में वह समस्या के स्थान पर अपनी भावनाओं में उलझा रहता है, जैसे यह चिन्ता करते रहना कि मुझे क्या करना है। परिहार अभिविन्यस्त युक्ति में वह ध्यान बँटाकर स्थिति से बचता है, जैसे मित्र को फोन करना या टीवी देखना। लजारस एवं फोल्कमैन की समस्या केन्द्रित युक्ति में योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जाता है।
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Q153. शिक्षा में ‘बाल मार्गदर्शन’, ‘मानसिक स्वच्छता’ तथा ‘बच्चों की स्वतंत्रता’ जैसे नवीन विचारों को प्रोत्साहन देने वाली विचारधारा है :
Right Answer: मनोविश्लेषण
Explanation:
मनोविश्लेषण की स्थापना सिगमंड फ्रॉयड ने की और इसने शिक्षा को गहराई से प्रभावित किया। इस विचारधारा ने बताया कि बाल्यावस्था के अनुभव, दमित इच्छाएँ तथा अचेतन संघर्ष व्यक्तित्व और समायोजन को निर्धारित करते हैं। इसी समझ से बाल मार्गदर्शन केन्द्रों की स्थापना हुई, मानसिक स्वच्छता आन्दोलन चला तथा बच्चों को अत्यधिक दमन एवं कठोर अनुशासन से मुक्त रखकर स्वतंत्र अभिव्यक्ति देने पर बल दिया गया। खेल, कला एवं कहानी को भावनात्मक विरेचन का साधन माना गया। व्यवहारवाद बाह्य व्यवहार तथा मानवतावाद आत्म-सिद्धि पर केन्द्रित रहा।
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Q154. निम्नलिखित में से किसे वाचिक अधिगम के निर्धारकों के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है ?
Right Answer: गुच्छन
Explanation:
वाचिक अधिगम के प्रमुख निर्धारकों में सामग्री की सार्थकता, उससे पूर्व-परिचय अर्थात् जानकारी, पदों की समानता, सूची की लम्बाई तथा अनुक्रमिक पराधीनता सम्मिलित हैं। सार्थक एवं परिचित सामग्री शीघ्र सीखी जाती है, जबकि अनुक्रमिक पराधीनता बताती है कि किसी पद का पुनःस्मरण अपने पूर्ववर्ती पद पर कितना निर्भर करता है। इसके विपरीत गुच्छन एक संगठनात्मक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति पुनःस्मरण के समय पदों को अर्थ या वर्ग के आधार पर समूहबद्ध कर लेता है। यह अधिगम का निर्धारक नहीं, बल्कि स्मृति-संगठन एवं पुनःस्मरण की युक्ति है।
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Q155. किसी व्यक्ति के व्यवहार, क्षमताओं और गुणों से संबंधित दृष्टिकोण, निर्णय और मूल्यों की समग्रता को कहा जाता है :
Right Answer: आत्मप्रत्यय
Explanation:
आत्मप्रत्यय से तात्पर्य उन समस्त दृष्टिकोणों, निर्णयों तथा मूल्यों की समग्रता से है जो व्यक्ति अपने व्यवहार, क्षमताओं एवं गुणों के विषय में धारण करता है। यह ‘मैं कौन हूँ’ प्रश्न का उत्तर है और अनुभवों, दूसरों की प्रतिक्रियाओं तथा सामाजिक तुलना से क्रमशः विकसित होता है। कार्ल रोजर्स ने इसे वास्तविक स्व तथा आदर्श स्व में विभाजित किया और दोनों के बीच अधिक अन्तर को कुसमायोजन का कारण बताया। इसके विपरीत आत्मसम्मान आत्मप्रत्यय का मूल्यांकनात्मक पक्ष है, जबकि आत्मबोध स्वयं के प्रति सचेत होने की अवस्था है।
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Q156. बच्चे के पालन-पोषण की एक शैली जिसमें माता-पिता बच्चों के साथ अपने संबंधों में बहुत ही उचित और सुसंगत होते हैं और धीरे-धीरे उनकी क्षमताओं को पहचानकर उनकी जिम्मेदारी का स्तर बढ़ाते हैं, वह है :
Right Answer: आधिकारिक शैली
Explanation:
डायना बॉमरिंड ने पालन-पोषण की शैलियों का वर्गीकरण किया। आधिकारिक शैली में माता-पिता स्नेह तथा नियंत्रण दोनों का सन्तुलन रखते हैं। वे स्पष्ट, उचित और सुसंगत नियम बनाते हैं, उनके पीछे का कारण समझाते हैं, बच्चों की बात सुनते हैं तथा उनकी बढ़ती क्षमताओं को पहचानकर धीरे-धीरे उत्तरदायित्व का स्तर बढ़ाते हैं। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास, आत्मनियंत्रण, सामाजिक कुशलता और उपलब्धि प्रेरणा अधिक विकसित होती है। इसके विपरीत अधिनायकवादी शैली कठोर एवं स्नेहहीन, अनुमोदक शैली स्नेहपूर्ण किन्तु नियंत्रणहीन तथा उपेक्षापूर्ण शैली दोनों ही दृष्टियों से अभावग्रस्त होती है।
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Q157. अवसाद निम्नलिखित में से किसकी कम सक्रियता के कारण होता है ?
Right Answer: सेरोटोनिन
Explanation:
सेरोटोनिन एक मोनोएमीन न्यूरोट्रांसमीटर है जो मनोदशा, निद्रा, भूख, आवेग नियंत्रण तथा चिन्ता के नियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अवसाद के मोनोएमीन परिकल्पना के अनुसार सिनैप्स में सेरोटोनिन की कम सक्रियता ही उदासी, निराशा, निद्रा-विकार एवं आत्मघाती विचारों से जुड़ी होती है। इसीलिए चयनात्मक सेरोटोनिन पुनर्ग्रहण संदमक अर्थात् एसएसआरआई औषधियाँ, जैसे फ्लुऑक्सेटीन, सिनैप्स में इसकी उपलब्धता बढ़ाकर अवसाद का उपचार करती हैं। डोपामाइन की अधिकता मनोविदलता से, गाबा की कमी चिन्ता से तथा ग्लूटामेट उत्तेजक संचरण एवं अधिगम से सम्बन्धित है।
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Q158. निम्नलिखित में से किसको ‘‘श्रेष्ठता का विशिष्ट स्तर प्राप्त करने की इच्छा’’ के रूप में परिभाषित किया जाता है ?
Right Answer: उपलब्धि अभिप्रेरक
Explanation:
उपलब्धि अभिप्रेरक को श्रेष्ठता का कोई विशिष्ट मानक प्राप्त करने की इच्छा के रूप में परिभाषित किया जाता है। हेनरी मुरे ने इसे मूल आवश्यकताओं में सम्मिलित किया और डेविड मैक्लीलैंड तथा जॉन एटकिन्सन ने इसका विस्तृत अध्ययन प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण की सहायता से किया। उच्च उपलब्धि अभिप्रेरणा वाले व्यक्ति मध्यम कठिनाई वाले कार्य चुनते हैं, उत्तरदायित्व लेना पसंद करते हैं, तुरन्त प्रतिपुष्टि चाहते हैं तथा असफलता से हतोत्साहित नहीं होते। सम्बन्धन अभिप्रेरक घनिष्ठ सम्बन्धों की, शक्ति अभिप्रेरक प्रभाव जमाने की तथा अनुमोदन अभिप्रेरक सामाजिक स्वीकृति की इच्छा है।
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Q159. किस मनोवैज्ञानिक ने परीक्षण और त्रुटि प्रक्रिया के रूप में सीखने में यादृच्छिकता पर जोर दिया था ?
Right Answer: ई० एल० थॉर्नडाइक
Explanation:
ई० एल० थॉर्नडाइक ने बिल्लियों पर प्रसिद्ध ‘पहेली बॉक्स’ प्रयोग किए। भूखी बिल्ली को बन्द बक्से में रखा जाता और बाहर मछली रखी जाती थी। बिल्ली आरम्भ में अनेक यादृच्छिक एवं अव्यवस्थित प्रयास करती, जिनमें से कोई एक संयोगवश साँकल खोल देता। बार-बार के प्रयासों में गलत प्रतिक्रियाएँ घटती गईं और सही प्रतिक्रिया शीघ्र होने लगी। इसी आधार पर उन्होंने अधिगम को प्रयास एवं त्रुटि की प्रक्रिया कहा तथा तत्परता, अभ्यास एवं प्रभाव के नियम दिए। पावलोव ने अनुबंधन, स्किनर ने क्रियाप्रसूत तथा टोलमैन ने चिह्न अधिगम पर बल दिया।
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Q160. मनोभाषाविज्ञानियों के मतानुसार बच्चों का वाक्यात्मक विकास कितने चरणों में होता है ?
Right Answer: पाँच
Explanation:
मनोभाषाविज्ञानियों, विशेषतः रॉजर ब्राउन के अनुसार बच्चों का वाक्यात्मक विकास पाँच चरणों में होता है और इनका निर्धारण आयु से नहीं, बल्कि औसत कथन-लम्बाई से किया जाता है। प्रथम चरण में दो शब्दों के तार-संदेश जैसे वाक्य बनते हैं। द्वितीय चरण में व्याकरणिक रूपिम, जैसे बहुवचन तथा काल-सूचक प्रत्यय जुड़ते हैं। तृतीय चरण में प्रश्नवाचक एवं निषेधात्मक वाक्य आते हैं। चतुर्थ चरण में अन्तःस्थापित उपवाक्य तथा पंचम चरण में समुच्चयबोधकों द्वारा जुड़े जटिल एवं संयुक्त वाक्य प्रकट होते हैं, जिससे भाषा वयस्क जैसी बनने लगती है।
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