Psychology: 257 MCQs with Answers

Psychology Questions and Answers - India Study Institute
Psychology

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Psychology Questions and Answers

India Study Institute provides Psychology Questions and Answers for HTET /CTET/ UPTET / REET and Other Exams. Attempt Psychology Questions and Answers for exam.

Psychology is one of the most important sections of the Haryana Teacher Eligibility Test (HTET). A strong understanding of Child Psychology, Learning Theories, Intelligence, Motivation, Personality, Inclusive Education, and Educational Psychology can significantly improve your HTET score. On this page, you will find comprehensive HTET Psychology Notes, chapter-wise multiple-choice questions (MCQs), previous year questions with detailed explanations, practice tests, and important concepts based on the latest HTET syllabus.

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Other Exam Papers:

Q121. शिक्षा अर्थात एजुकेशन शब्द की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है?

Right Answer: लैटिन


Explanation:

एजुकेशन शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है। यह लैटिन के एडुकेटम, एडुकेयर तथा एडुसेरे जैसे शब्दों से बना माना जाता है। एडुकेटम का अर्थ है शिक्षित करना अथवा पढ़ाने की कला, एडुकेयर का अर्थ है पालन-पोषण करना या ऊपर उठाना तथा एडुसेरे का अर्थ है आगे बढ़ाना या बाहर निकालना। इन सभी अर्थों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा बालक के भीतर छिपी शक्तियों को बाहर लाने की प्रक्रिया है। हिंदी में शिक्षा शब्द संस्कृत की शिक्ष धातु से बना है, जिसका अर्थ सीखना अथवा सिखाना होता है।

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Q122. एडुको शब्द का क्या अर्थ है?

Right Answer: प्रशिक्षित करना


Explanation:

एडुको लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है प्रशिक्षित करना अथवा भीतर से बाहर निकालना। यह शिक्षा की उस मूल अवधारणा को दर्शाता है जिसके अनुसार बालक के भीतर पहले से विद्यमान क्षमताओं, शक्तियों एवं गुणों को उभारना ही शिक्षा का वास्तविक कार्य है। यह विचार शिक्षा को केवल बाहर से ज्ञान भरने की प्रक्रिया मानने के विरुद्ध है। इसी संदर्भ में एडुकेयर का अर्थ पालन-पोषण करना तथा एडुसेरे का अर्थ आगे ले जाना है। यह अर्थ बाल केंद्रित शिक्षा तथा प्रगतिशील शिक्षा दर्शन का आधार माना जाता है।

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Q123. प्रकृति को महान शिक्षक किसने बताया है?

Right Answer: रवींद्रनाथ टैगोर


Explanation:

प्रकृति को महान शिक्षक रवींद्रनाथ टैगोर ने बताया है। उनका दृढ़ मत था कि बालक का सर्वांगीण विकास बंद कक्षाओं की चारदीवारी में नहीं, बल्कि प्रकृति की खुली गोद में ही सम्भव है। इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए उन्होंने सन 1901 में शांतिनिकेतन की स्थापना की, जहाँ कक्षाएँ वृक्षों के नीचे खुले वातावरण में लगती थीं। आगे चलकर यही विश्वभारती विश्वविद्यालय बना। वे प्रकृतिवाद तथा आदर्शवाद के समन्वयकर्ता माने जाते हैं। उन्होंने गीतांजलि की रचना की, जिसके लिए उन्हें सन 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

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Q124. उठो, जागो और आगे बढ़ते रहो, जब तक सफलता नहीं मिल जाती, यह कथन किसका है?

Right Answer: स्वामी विवेकानंद


Explanation:

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, यह प्रसिद्ध कथन स्वामी विवेकानंद का है। यह कठोपनिषद के प्रसिद्ध श्लोक उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत से प्रेरित है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था और उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे और सन 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने विश्व में भारतीय वेदांत दर्शन की धाक जमा दी। उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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Q125. शिक्षा जन्म से प्रारंभ होती है तथा माता उपयुक्त परिचारिका है, यह कथन किसका है?

Right Answer: सुकरात


Explanation:

शिक्षा जन्म से प्रारंभ होती है तथा माता उपयुक्त परिचारिका है, यह कथन यूनानी दार्शनिक सुकरात का है। इसके द्वारा उन्होंने यह बताया कि बालक की शिक्षा विद्यालय जाने से नहीं, बल्कि जन्म के साथ ही घर से आरंभ हो जाती है और माता ही उसकी प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका होती है। सुकरात प्रश्नोत्तर पर आधारित संवाद विधि के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे सुकरात प्रणाली कहा जाता है। उनका प्रसिद्ध कथन है स्वयं को जानो। वे प्लेटो के गुरु थे और प्लेटो अरस्तू के गुरु थे। युवाओं को भ्रष्ट करने के आरोप में उन्हें विष देकर मृत्युदंड दिया गया था।

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Q126. प्रकृतिवाद का जन्मदाता किसे माना जाता है?

Right Answer: रूसो


Explanation:

शिक्षा में प्रकृतिवाद का जन्मदाता फ्रांसीसी दार्शनिक जीन जैक्स रूसो को माना जाता है। उनका प्रसिद्ध कथन है कि ईश्वर की बनाई प्रत्येक वस्तु अच्छी है, किंतु मनुष्य के हाथ लगते ही वह बिगड़ जाती है। उन्होंने अपनी पुस्तक एमील में बाल केंद्रित शिक्षा का प्रतिपादन किया और कहा कि बालक को पुस्तकों के स्थान पर प्रकृति से सीधे सीखने देना चाहिए। उन्होंने निषेधात्मक शिक्षा तथा प्राकृतिक परिणामों द्वारा अनुशासन की संकल्पना दी। उनके विचारों ने पेस्टालॉजी, फ्रोबेल तथा मॉन्टेसरी जैसे शिक्षाशास्त्रियों को गहराई से प्रभावित किया।

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Q127. दर्शन अर्थात फिलॉसफी शब्द किस भाषा से लिया गया है?

Right Answer: ग्रीक


Explanation:

फिलॉसफी शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है। यह दो ग्रीक शब्दों फिलॉस तथा सोफिया से मिलकर बना है, जिनमें फिलॉस का अर्थ है प्रेम तथा सोफिया का अर्थ है ज्ञान। इस प्रकार फिलॉसफी का शाब्दिक अर्थ हुआ ज्ञान से प्रेम। इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग यूनानी गणितज्ञ एवं दार्शनिक पाइथागोरस ने किया था। दर्शन की प्रमुख शाखाओं में तत्व मीमांसा, ज्ञान मीमांसा तथा मूल्य मीमांसा सम्मिलित हैं। शिक्षा एवं दर्शन का घनिष्ठ संबंध है, क्योंकि दर्शन जीवन के लक्ष्य निर्धारित करता है और शिक्षा उन्हें प्राप्त करने का साधन प्रस्तुत करती है।

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Q128. मस्तिष्क कोरी पटिया के समान है, जिस पर अनुभव के द्वारा कुछ भी लिखा जा सकता है, यह कथन किसका है?

Right Answer: जॉन लॉक


Explanation:

मस्तिष्क कोरी पटिया के समान है, यह कथन अंग्रेज दार्शनिक जॉन लॉक का है। उन्होंने इसके लिए टेबुला रासा शब्द का प्रयोग किया, जिसका अर्थ है खाली स्लेट। उनके अनुसार जन्म के समय मानव मस्तिष्क पूर्णतः रिक्त होता है और समस्त ज्ञान इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त अनुभवों से ही अर्जित होता है। यह विचार अनुभववाद का आधार है और जन्मजात विचारों की अवधारणा को अस्वीकार करता है। शिक्षा के क्षेत्र में इस सिद्धांत का महत्वपूर्ण निहितार्थ यह है कि उचित वातावरण एवं अनुभव देकर किसी भी बालक को वांछित दिशा में विकसित किया जा सकता है।

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Q129. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, यह कथन किसका है?

Right Answer: अरस्तू


Explanation:

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, यह प्रसिद्ध कथन यूनानी दार्शनिक अरस्तू का है। उन्होंने अपनी पुस्तक पॉलिटिक्स में कहा कि जो व्यक्ति समाज में नहीं रह सकता अथवा जिसे समाज की आवश्यकता नहीं, वह या तो पशु है या फिर देवता। उनके अनुसार मनुष्य स्वभाव से ही एक राजनीतिक तथा सामाजिक प्राणी है और समाज के बिना उसका पूर्ण विकास सम्भव नहीं। अरस्तू प्लेटो के शिष्य तथा सिकंदर महान के गुरु थे। उन्हें राजनीति विज्ञान का जनक तथा तर्कशास्त्र का प्रवर्तक माना जाता है और उन्होंने यथार्थवाद का प्रतिपादन किया।

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Q130. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

Right Answer: 1953


Explanation:

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना सन 1953 में हुई थी, जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। इसे सन 1956 में संसद द्वारा पारित अधिनियम के माध्यम से एक वैधानिक निकाय का दर्जा प्रदान किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसका मुख्य कार्य उच्च शिक्षा के मानकों का निर्धारण एवं समन्वय करना तथा विश्वविद्यालयों को अनुदान उपलब्ध कराना है। इसकी स्थापना की संस्तुति सन 1948 की डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाले विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने की थी।

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Q131. योजना विधि के जन्मदाता कौन हैं?

Right Answer: डब्ल्यू. एच. किलपैट्रिक


Explanation:

योजना विधि अर्थात प्रोजेक्ट मेथड के जन्मदाता अमेरिकी शिक्षाशास्त्री विलियम हर्ड किलपैट्रिक हैं। यह विधि जॉन डीवी के प्रयोगवादी दर्शन तथा करके सीखने के सिद्धांत पर आधारित है। किलपैट्रिक के अनुसार योजना वह सोद्देश्य क्रिया है जिसे छात्र पूर्ण मनोयोग से सामाजिक वातावरण में सम्पन्न करता है। इसमें छात्र स्वयं समस्या चुनते हैं, योजना बनाते हैं तथा उसे क्रियान्वित कर मूल्यांकन करते हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से ज्ञान अर्जित होता है। इस विधि के प्रमुख सोपानों में परिस्थिति उत्पन्न करना, चयन, नियोजन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन तथा विवरण लिखना सम्मिलित हैं।

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Q132. भारत में मनोविज्ञान की प्रयोगशाला की सर्वप्रथम स्थापना किस वर्ष हुई थी?

Right Answer: 1915


Explanation:

भारत में मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला की स्थापना सन 1915 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में हुई थी। इसकी स्थापना का श्रेय डॉ. नरेंद्रनाथ सेनगुप्ता को जाता है, जिन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसी विश्वविद्यालय में सन 1916 में मनोविज्ञान का स्वतंत्र विभाग भी आरंभ हुआ, जो भारत में इस विषय के औपचारिक अध्ययन की नींव माना जाता है। विश्व की पहली मनोविज्ञान प्रयोगशाला सन 1879 में विल्हेम वुंट ने जर्मनी के लिपजिग विश्वविद्यालय में स्थापित की थी, इसीलिए उन्हें प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है।

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Q133. निर्देशन (Guidance) दिया जाना चाहिए—

Right Answer: आजीवन


Explanation:

निर्देशन (Guidance) एक सतत, व्यापक एवं जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं को समझने, अपनी क्षमताओं एवं सीमाओं को पहचानने तथा उचित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है। यह केवल तभी नहीं दिया जाता जब कोई समस्या उत्पन्न हो अथवा केवल विषय चयन के समय, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक चरण में — बाल्यावस्था, किशोरावस्था, व्यावसायिक जीवन तथा वृद्धावस्था में — आवश्यक होता है। यह विद्यालयी जीवन तक सीमित न रहकर व्यक्ति के समग्र विकास से जुड़ा रहता है, इसीलिए इसे आजीवन प्रक्रिया कहा जाता है।
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Q134. किस शिक्षा समिति ने छात्र सेवाओं में व्यावसायिक नियुक्ति सहित मार्गदर्शन एवं परामर्श शामिल करने की सिफारिश की?

Right Answer: शिक्षा आयोग (1964–66)


Explanation:

शिक्षा आयोग (1964–66), जिसे इसके अध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह कोठारी के नाम पर कोठारी आयोग कहा जाता है, स्वतंत्र भारत का सबसे व्यापक शिक्षा आयोग था। इसने 'शिक्षा एवं राष्ट्रीय विकास' शीर्षक से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा छात्र सेवाओं के अंतर्गत व्यावसायिक नियुक्ति सहित मार्गदर्शन एवं परामर्श सेवाओं को सम्मिलित करने की स्पष्ट सिफारिश की। आयोग का मत था कि विद्यालय स्तर पर निर्देशन सेवाएँ विद्यार्थियों के शैक्षिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास के लिए अनिवार्य हैं। इसी आयोग ने 10+2+3 संरचना की भी संस्तुति की थी।
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Q135. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त को प्रभावित करने वाला नहीं है?

Right Answer: व्यक्तित्व


Explanation:

अन्तर्दृष्टि का सिद्धान्त गेस्टाल्टवादी मनोवैज्ञानिक वोल्फगैंग कोहलर ने वनमानुषों पर किए गए प्रयोगों के आधार पर प्रतिपादित किया। इसके अनुसार सीखना प्रयास एवं त्रुटि से नहीं, बल्कि समस्या की सम्पूर्ण परिस्थिति को समझकर अचानक समाधान सूझ जाने से होता है। इस प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में बुद्धि सम्मिलित है, क्योंकि अधिक बुद्धिमान प्राणी शीघ्र अन्तर्दृष्टि प्राप्त करता है; पूर्व अनुभव, जो समाधान खोजने में सहायक होता है; तथा प्रत्यक्षीकरण, जिससे परिस्थिति के सभी अंग स्पष्ट होते हैं। व्यक्तित्व को इसका प्रत्यक्ष कारक नहीं माना जाता।
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Q136. 'भावनात्मक बुद्धि' (Emotional Intelligence) को पहली बार किसने परिभाषित किया?

Right Answer: पीटर सलोवे एवं जॉन मेयर


Explanation:

भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence) की अवधारणा को सन् 1990 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक पीटर सलोवे तथा जॉन मेयर ने पहली बार औपचारिक रूप से परिभाषित किया। उनके अनुसार यह अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने, नियंत्रित करने एवं उनका उपयोग चिंतन तथा व्यवहार के मार्गदर्शन में करने की क्षमता है। बाद में सन् 1995 में डेनियल गोलमैन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक के माध्यम से इस संकल्पना को विश्वभर में लोकप्रिय बनाया तथा आत्म-जागरूकता, आत्म-नियमन, अभिप्रेरणा, सहानुभूति एवं सामाजिक कौशल को इसके प्रमुख घटक बताया।
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Q137. सृजनात्मकता सम्बन्धित है—

Right Answer: अपसारी चिंतन


Explanation:

सृजनात्मकता अपसारी अर्थात् विसरित चिंतन (Divergent Thinking) से संबंधित है। जे. पी. गिलफोर्ड ने चिंतन को दो वर्गों में विभाजित किया — अभिसारी चिंतन, जिसमें व्यक्ति किसी समस्या का एक निश्चित एवं पूर्व-निर्धारित उत्तर खोजता है; तथा अपसारी चिंतन, जिसमें वह एक ही समस्या के अनेक नवीन, मौलिक एवं विविध समाधान प्रस्तुत करता है। सृजनात्मकता की प्रमुख विशेषताएँ — प्रवाहशीलता, लचीलापन, मौलिकता तथा विस्तारण — सभी अपसारी चिंतन की देन हैं। इसीलिए सृजनात्मक परीक्षणों में मुक्त उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।
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Q138. किस प्रकार के व्यक्तित्व वाले लोगों में अवसाद के प्रति प्रवणता पाई जाती है ?

Right Answer: टाइप D


Explanation:

टाइप D अर्थात् ‘डिस्ट्रेस्ड’ व्यक्तित्व की अवधारणा हृदय-रोग विशेषज्ञ जोहान डेनोलेट ने दी। इसमें दो स्थायी विशेषताएँ मिलती हैं — नकारात्मक भावुकता तथा सामाजिक अवरोध। ऐसे व्यक्ति चिन्ता, चिड़चिड़ाहट और उदासी का लगातार अनुभव करते हैं, किन्तु अस्वीकृति के भय से इन भावनाओं को दूसरों के सामने प्रकट नहीं करते। यही दमित नकारात्मक संवेग उन्हें अवसाद तथा हृदय रोग के प्रति अत्यधिक प्रवण बनाते हैं। इसके विपरीत टाइप A प्रतिस्पर्धी एवं उतावला, टाइप B शान्त एवं सहनशील तथा टाइप C भावनाओं को दबाने वाला व्यक्तित्व माना जाता है।

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Q139. गिलफोर्ड (1967) ने बुद्धि के त्रिआयामी बॉक्स जैसे मॉडल का प्रस्ताव रखा जोकि सबसे अच्छी तरह से समझाया गया है :

Right Answer: 6 संक्रियायें × 5 विषयवस्तु × 6 उत्पादों द्वारा


Explanation:

जे० पी० गिलफोर्ड का ‘बुद्धि संरचना’ (SOI) मॉडल बुद्धि को एक त्रिआयामी घनाभ के रूप में प्रस्तुत करता है। इसके तीन आयाम हैं — संक्रियाएँ, विषयवस्तु तथा उत्पाद। मॉडल के परिष्कृत रूप में छह संक्रियाएँ, पाँच विषयवस्तुएँ तथा छह उत्पाद माने गए, जिनके गुणनफल से 180 स्वतंत्र मानसिक योग्यताएँ प्राप्त होती हैं। संक्रियाओं में संज्ञान, स्मृति अभिलेखन, स्मृति धारण, अपसारी चिन्तन तथा अभिसारी चिन्तन और मूल्यांकन सम्मिलित हैं। अपसारी चिन्तन को सृजनात्मकता का आधार मानकर गिलफोर्ड ने बुद्धि को एकल कारक मानने की परम्परा को समाप्त कर दिया।

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Q140. अल्पकालिक स्मृति की 7 ± 2 पदों की सीमित भंडारण क्षमता का विचार दिया गया था :

Right Answer: मिलर (1956) द्वारा


Explanation:

जॉर्ज ए० मिलर ने 1956 के प्रसिद्ध लेख ‘द मैजिकल नंबर सेवन, प्लस ऑर माइनस टू’ में बताया कि अल्पकालिक स्मृति एक समय में लगभग सात (पाँच से नौ) पद ही धारण कर सकती है। इस सीमित क्षमता को बढ़ाने के लिए मिलर ने ‘चंकिंग’ अर्थात् गुच्छन की युक्ति सुझाई, जिसमें छोटी-छोटी इकाइयों को अर्थपूर्ण बड़े खंडों में संगठित कर लिया जाता है। टल्विंग ने स्मृति के प्रासंगिक-अर्थपरक भेद, तथा क्रैक एवं लॉकहार्ट ने प्रसंस्करण के स्तर का सिद्धान्त दिया।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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