Mathematics: 425 MCQs with Answers
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Mathematics MCQ Questions Quiz — Topic-Wise Practice for Teaching and Government Exams
Mathematics decides more results than most candidates expect. In teacher-eligibility papers it is a full section, and in SSC and DSSSB recruitment it often separates the merit list from the waiting list. So here we are providing Mathematics MCQ Questions Quiz here. This quiz section is built to close that gap.
The questions are organised the way examiners think, not the way textbooks are printed. Each sub-topic — number system, simplification, percentage, ratio and proportion, profit and loss, time and work, speed and distance, average, algebra, geometry, mensuration, data interpretation, and mathematics pedagogy — gets its own set. You can revise one weak area at a time instead of attempting a scattered mixed test and learning nothing from the score.
Every MCQ follows the language and difficulty of the actual papers. Teaching-exam sets stay close to the NCERT syllabus and the pedagogy portion prescribed by the NCF, because that is where CTET, HTET, REET, UPTET and MPTET draw from. Recruitment-exam sets lean towards speed and shortcut-based arithmetic, which is what SSC, DSSSB, BPSC and state commissions reward.
Answers appear immediately after you submit, with a step-by-step solution and, where useful, the shorter method a trained candidate would use under time pressure. Reading why a wrong option was tempting is usually worth more than getting the sum right.
Start with any sub-topic below. Take the same quiz again after a week — the improvement in your accuracy, not just your score, is the number worth watching.
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Q161. शब्द APPLE के अक्षरों के कितने क्रमचय हैं ?
Right Answer: 60
Explanation:
APPLE शब्द में कुल पाँच अक्षर हैं, जिनमें P दो बार आता है और शेष A, L तथा E एक-एक बार। जब कुछ अक्षर पुनरावृत्त हों तो क्रमचयों की संख्या कुल अक्षरों के क्रमगुणित को पुनरावृत्त अक्षरों के क्रमगुणितों के गुणनफल से भाग देकर निकाली जाती है। यहाँ यह 5! को 2! से भाग देने पर प्राप्त होगी। 5! का मान 120 तथा 2! का मान 2 है, अतः कुल क्रमचय 120 बटा 2 अर्थात् 60 होंगे। यदि सभी अक्षर भिन्न होते तो यह संख्या 120 होती।
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Q162. ज्ञात कीजिए : lim (n→∞) (1 + 2 + 3 + …… + n) / n² = ?
Right Answer: 1/2
Explanation:
अंश में प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग है, जिसका सूत्र n(n जोड़ 1) बटा 2 होता है। इसे हर n² से भाग देने पर व्यंजक n(n जोड़ 1) बटा 2n² बनता है, जिसे सरल करने पर (n जोड़ 1) बटा 2n प्राप्त होता है। इसे पुनः लिखने पर आधा गुणा (1 जोड़ 1/n) मिलता है। अब n के अनन्त की ओर बढ़ने पर 1/n शून्य की ओर अग्रसर होता है, अतः कोष्ठक का मान एक हो जाता है और सम्पूर्ण सीमा का मान आधा प्राप्त होता है।
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Q163. श्रेणी 1/2 + 1/3² + 1/2³ + 1/3⁴ + 1/2⁵ + 1/3⁶ + …… ∞ का योग है :
Right Answer: 19/24
Explanation:
दी गई श्रेणी वस्तुतः दो गुणोत्तर श्रेणियों का मिश्रण है, अतः विषम स्थान वाले तथा सम स्थान वाले पदों को अलग-अलग जोड़ना उचित है। पहली श्रेणी 1/2 जोड़ 1/2³ जोड़ 1/2⁵ जोड़ … है, जिसका प्रथम पद आधा तथा सार्व अनुपात एक चौथाई है, अतः उसका योग आधा बटा तीन चौथाई अर्थात् दो तिहाई होगा। दूसरी श्रेणी 1/3² जोड़ 1/3⁴ जोड़ … है, जिसका प्रथम पद एक बटा नौ तथा सार्व अनुपात एक बटा नौ है, अतः योग एक बटा आठ। दोनों जोड़ने पर 19 बटा 24 प्राप्त होता है।
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Q164. वृत्त x² + y² + 6x − 4y + 4 = 0 का केन्द्र क्या है ?
Right Answer: (–3, 2)
Explanation:
वृत्त के व्यापक समीकरण x² जोड़ y² जोड़ 2gx जोड़ 2fy जोड़ c बराबर शून्य में केन्द्र के निर्देशांक ऋण g तथा ऋण f होते हैं। दिए गए समीकरण की तुलना करने पर 2g बराबर 6 अर्थात् g बराबर 3, तथा 2f बराबर ऋण 4 अर्थात् f बराबर ऋण 2 प्राप्त होता है। अतः केन्द्र के निर्देशांक ऋण 3 तथा 2 होंगे। इसकी त्रिज्या मूल g² जोड़ f² घटा c अर्थात् मूल 9 जोड़ 4 घटा 4 बराबर 3 इकाई है। इसी को पूर्ण वर्ग बनाकर भी सत्यापित किया जा सकता है।
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Q165. दीर्घवृत्त की नाभियाँ (± 2, 0) हैं तथा उसका केन्द्र मूल बिन्दु पर एवं अक्ष निर्देशांक अक्षों के अनुदिश हैं। दीर्घवृत्त का समीकरण क्या है ?
Right Answer: x²/16 + y²/12 = 1
Explanation:
नाभियाँ x अक्ष पर हैं, अतः दीर्घवृत्त का दीर्घ अक्ष क्षैतिज है और मानक रूप x² बटा a² जोड़ y² बटा b² बराबर एक होगा, जहाँ a बड़ा है। नाभियों की स्थिति से c बराबर 2 प्राप्त होता है, और उत्केन्द्रता आधी होने पर a बराबर c बटा e अर्थात् 4 निकलता है, जिससे a² बराबर 16 होता है। अब सम्बन्ध b² बराबर a² घटा c² से b² बराबर 16 घटा 4 अर्थात् 12 प्राप्त होता है। अतः अभीष्ट समीकरण x² बटा 16 जोड़ y² बटा 12 बराबर एक है।
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Q166. यदi A = [a_ij] एक n × n कोटि का अदिश आव्यूह इस प्रकार है कि प्रत्येक i के लिए a_ii = k, तो A का ट्रेस बराबर है :
Right Answer: nk
Explanation:
किसी वर्ग आव्यूह का ट्रेस उसके मुख्य विकर्ण पर स्थित सभी अवयवों के योग को कहा जाता है। अदिश आव्यूह वह विकर्ण आव्यूह होता है जिसके मुख्य विकर्ण के सभी अवयव आपस में बराबर हों तथा शेष सभी अवयव शून्य हों। यहाँ आव्यूह n गुणा n कोटि का है और प्रत्येक विकर्ण अवयव का मान k दिया गया है, अर्थात् ऐसे कुल n अवयव हैं जिनमें प्रत्येक k के बराबर है। अतः उनका योग n गुणा k अर्थात् nk होगा, और यही आव्यूह का ट्रेस है।
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Q167. परवलय y² = 12x पर एक बिन्दु की नाभि दूरी 4 है। इस बिन्दु का भुज क्या है ?
Right Answer: 1
Explanation:
मानक परवलय y² बराबर 4ax में 4a बराबर 12 होने से a बराबर 3 प्राप्त होता है, अर्थात् नाभि (3, 0) पर तथा नियता x बराबर ऋण 3 है। परवलय की परिभाषा के अनुसार किसी बिन्दु की नाभि से दूरी उसकी नियता से दूरी के बराबर होती है, और वह दूरी x जोड़ a के रूप में लिखी जाती है। यहाँ नाभि दूरी 4 दी गई है, अतः x जोड़ 3 बराबर 4 होगा। इससे भुज x का मान 1 प्राप्त होता है और उस बिन्दु की कोटि ± 2√3 निकलती है।
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Q168. यदि सीधी रेखा 2x + 3y + 4 + k(6x − y + 12) = 0, रेखा 7x + 5y − 4 = 0 पर लंबवत है, तो k का मान क्या है ?
Right Answer: −29/37
Explanation:
दिए गए रेखा-निकाय को सरल करने पर (2 जोड़ 6k)x जोड़ (3 घटा k)y जोड़ (4 जोड़ 12k) बराबर शून्य प्राप्त होता है। दो रेखाएँ परस्पर लम्बवत तभी होती हैं जब उनके गुणांकों के लिए a₁a₂ जोड़ b₁b₂ बराबर शून्य हो। दूसरी रेखा 7x जोड़ 5y घटा 4 बराबर शून्य के गुणांक 7 तथा 5 हैं। अतः 7(2 जोड़ 6k) जोड़ 5(3 घटा k) बराबर शून्य लिखने पर 14 जोड़ 42k जोड़ 15 घटा 5k बराबर शून्य मिलता है, जिससे 37k बराबर ऋण 29 और k बराबर ऋण 29 बटा 37 प्राप्त होता है।
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Q169. ज्ञात कीजिए : ∫ (−1 से 1 तक) (x − [x]) dx = ? जहाँ [x] महत्तम पूर्णांक फलन है।
Right Answer: 1
Explanation:
व्यंजक x घटा [x] वस्तुतः x का भिन्नात्मक भाग है, जो सदैव शून्य तथा एक के बीच रहता है और प्रत्येक इकाई अन्तराल में स्वयं को दोहराता है। समाकलन को दो भागों में बाँटना होगा, क्योंकि महत्तम पूर्णांक फलन शून्य पर अपना मान बदलता है। ऋण एक से शून्य तक [x] बराबर ऋण एक होता है, अतः वहाँ फलन x जोड़ 1 बनता है और उसका समाकल आधा आता है। शून्य से एक तक [x] बराबर शून्य होने से फलन x रहता है और उसका समाकल भी आधा है। दोनों जोड़ने पर उत्तर एक प्राप्त होता है।
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Q170. किसी गोले की त्रिज्या 2 सेमी होने पर उसके पृष्ठीय क्षेत्रफल के सापेक्ष उसके आयतन में परिवर्तन की दर क्या है ?
Right Answer: 1
Explanation:
गोले का आयतन चार तिहाई πr³ तथा पृष्ठीय क्षेत्रफल 4πr² होता है। दोनों की त्रिज्या के सापेक्ष दर निकालने पर dV/dr बराबर 4πr² तथा dS/dr बराबर 8πr प्राप्त होते हैं। शृंखला नियम के अनुसार आयतन में पृष्ठीय क्षेत्रफल के सापेक्ष परिवर्तन की दर dV/dS बराबर dV/dr को dS/dr से भाग देकर मिलती है। यह 4πr² बटा 8πr अर्थात् r बटा 2 के बराबर होती है। यहाँ त्रिज्या 2 सेंटीमीटर दी गई है, अतः अभीष्ट दर 2 बटा 2 अर्थात् 1 प्राप्त होती है।
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Q171. माना A = {x : x ∈ R, x > 4} और B = {x ∈ R : x < 5} हो, तो A ∩ B = ?
Right Answer: (4, 5)
Explanation:
समुच्चय A में वे सभी वास्तविक संख्याएँ हैं जो चार से कड़ाई से बड़ी हैं, अतः चार स्वयं उसमें सम्मिलित नहीं है और उसे विवृत अन्तराल के रूप में लिखा जाता है। इसी प्रकार समुच्चय B में वे संख्याएँ हैं जो पाँच से कड़ाई से छोटी हैं, अतः पाँच भी सम्मिलित नहीं है। दोनों का सर्वनिष्ठ लेने पर वे संख्याएँ बचेंगी जो चार से बड़ी तथा पाँच से छोटी हों। चूँकि दोनों अन्त्य बिन्दु बाहर हैं, अतः उत्तर विवृत अन्तराल चार से पाँच के रूप में लिखा जाएगा।
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Q172. एक ठोस शंकु के रूप में है, जो एक अर्द्धगोले पर स्थापित है। शंकु की त्रिज्या और ऊँचाई क्रमशः 3 मीटर और 4 मीटर हैं। दिये गये ठोस का आयतन ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 94.2 मी³
Explanation:
यह ठोस दो भागों से बना है, अतः उसका आयतन शंकु तथा अर्धगोले के आयतनों का योग होगा। शंकु का आयतन एक तिहाई πr²h के सूत्र से एक तिहाई गुणा 3.14 गुणा 9 गुणा 4 अर्थात् लगभग 37.68 घन मीटर आता है। अर्धगोले का आयतन दो तिहाई πr³ के सूत्र से दो तिहाई गुणा 3.14 गुणा 27 अर्थात् लगभग 56.52 घन मीटर प्राप्त होता है। दोनों को जोड़ने पर कुल आयतन लगभग 94.2 घन मीटर हो जाता है, जो दिए गए विकल्पों में दूसरा है।
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Q173. यदि α, β समीकरण x² + x + 1 = 0 के मूल हैं, तो α² + β² = ?
Right Answer: –1
Explanation:
द्विघात समीकरण x² जोड़ x जोड़ 1 बराबर शून्य में मूलों का योग ऋण b बटा a अर्थात् ऋण 1 तथा मूलों का गुणनफल c बटा a अर्थात् 1 होता है। अब मूलों के वर्गों का योग निकालने के लिए सर्वसमिका α² जोड़ β² बराबर (α जोड़ β)² घटा 2αβ का उपयोग किया जाता है। इसमें मान रखने पर (ऋण 1)² घटा 2 गुणा 1 अर्थात् 1 घटा 2 प्राप्त होता है, जो ऋण 1 के बराबर है। ध्यातव्य है कि इस समीकरण के मूल सम्मिश्र हैं, फिर भी यह सम्बन्ध लागू होता है।
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Q174. यदि f : R → R एक फलन है तथा f ( x ) = [ x ] द्वारा परिभाषित है, जहाँ [ x ] महत्तम पूर्णांक फलन है, तो :
Right Answer: f न एकैकी और न ही आच्छादी है
Explanation:
महत्तम पूर्णांक फलन किसी वास्तविक संख्या से छोटे या बराबर सबसे बड़े पूर्णांक को लौटाता है। यह फलन एकैकी नहीं है, क्योंकि 2.1, 2.5 तथा 2.9 जैसी अनेक भिन्न संख्याओं का प्रतिबिम्ब समान रूप से 2 ही आता है। यह आच्छादी भी नहीं है, क्योंकि इसका परिसर केवल पूर्णांकों का समुच्चय है, जबकि सहप्रान्त सम्पूर्ण वास्तविक संख्याओं का समुच्चय दिया गया है; अतः 2.5 जैसी संख्याएँ किसी का भी प्रतिबिम्ब नहीं बनतीं। इसलिए यह न एकैकी है और न आच्छादी।
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Q175. हल कीजिए : (a − b)³ + (b − c)³ + (c − a)³ = ?
Right Answer: 3(a − b)(b − c)(c − a)
Explanation:
बीजगणित की एक प्रसिद्ध सर्वसमिका के अनुसार यदि a जोड़ b जोड़ c बराबर शून्य हो, तो a³ जोड़ b³ जोड़ c³ बराबर 3abc होता है। यहाँ तीनों पदों को क्रमशः (a घटा b), (b घटा c) तथा (c घटा a) मान लेने पर उनका योग शून्य हो जाता है, क्योंकि सभी अक्षर आपस में कट जाते हैं। अतः उपर्युक्त सर्वसमिका सीधे लागू होती है और सम्पूर्ण व्यंजक का मान 3 गुणा (a घटा b) गुणा (b घटा c) गुणा (c घटा a) प्राप्त होता है।
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Q176. एक मानक विचलन का संख्यात्मक मान कभी भी नहीं हो सकता है :
Right Answer: ऋणात्मक
Explanation:
मानक विचलन की गणना में सर्वप्रथम प्रत्येक प्रेक्षण तथा माध्य के अन्तर का वर्ग लिया जाता है, फिर उन वर्गों का औसत निकालकर उसका धनात्मक वर्गमूल लिया जाता है। चूँकि किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता और वर्गमूल भी धनात्मक ही लिया जाता है, अतः मानक विचलन का संख्यात्मक मान कभी ऋणात्मक नहीं हो सकता। यदि सभी प्रेक्षण आपस में समान हों तो यह शून्य हो सकता है, किन्तु उससे कम कभी नहीं। यही इसका आधारभूत गुण है।
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Q177. यदि एक उर्ध्वाधर मीनार की छाया की लंबाई उसकी ऊँचाई के बराबर हो, तो सूर्य का उन्नयन कोण है :
Right Answer: 45°
Explanation:
माना मीनार की ऊँचाई h है, तब प्रश्नानुसार उसकी छाया की लम्बाई भी h के बराबर है। उन्नयन कोण θ के लिए स्पर्शज्या का मान लम्ब बटा आधार अर्थात् ऊँचाई बटा छाया के बराबर होता है। दोनों समान होने से tan θ बराबर एक प्राप्त होता है। जिस कोण की स्पर्शज्या एक होती है वह 45 अंश है, अतः सूर्य का उन्नयन कोण 45 अंश होगा। यदि छाया ऊँचाई से लम्बी हो तो कोण 45 अंश से कम तथा छोटी हो तो अधिक हो जाता है।
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Q179. समीकरणों 3 x – 5 y = 7 और –6 x + 10 y = 7 के हल हैं :
Right Answer: कोई हल नहीं
Explanation:
दो चरों वाले रैखिक समीकरण निकाय के हल की प्रकृति गुणांकों के अनुपात से तय होती है। यहाँ पहले समीकरण के गुणांक 3, ऋण 5 तथा 7 हैं और दूसरे के ऋण 6, 10 तथा 7। x एवं y के गुणांकों का अनुपात दोनों में ऋण आधा है, किन्तु अचर पदों का अनुपात 7 बटा 7 अर्थात् एक है। चूँकि a₁/a₂ बराबर b₁/b₂ किन्तु c₁/c₂ से भिन्न है, अतः रेखाएँ परस्पर समानान्तर हैं और कहीं नहीं मिलतीं। इसलिए निकाय असंगत है और उसका कोई हल नहीं है।
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Q180. यदि 10 संख्याओं का माध्य 96 है और उनमें से एक संख्या 150 है, तो शेष नौ संख्याओं का माध्य क्या होगा ?
Right Answer: 90
Explanation:
दस संख्याओं का माध्य 96 दिया गया है, अतः उन सबका कुल योग 10 गुणा 96 अर्थात् 960 होगा। इनमें से एक संख्या 150 है, जिसे कुल योग में से घटाने पर शेष नौ संख्याओं का योग 960 घटा 150 अर्थात् 810 प्राप्त होता है। अब शेष नौ संख्याओं का माध्य निकालने के लिए इस योग को नौ से भाग दिया जाता है, जिससे 810 बटा 9 अर्थात् 90 उत्तर मिलता है। ध्यातव्य है कि 150 माध्य से काफी बड़ी थी, इसीलिए उसे हटाने पर माध्य 96 से घटकर 90 हो गया।
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Frequently Asked Questions
References & Official Sources
Questions and answers are compiled from previous-year papers and official notifications published by the following examination authorities. Always verify the latest syllabus and pattern on the official website.
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