Mathematics - गणित शिक्षाशास्त्र: 25 MCQs with Answers

गणित शिक्षाशास्त्र - Mathematics
Mathematics - गणित शिक्षाशास्त्र

Mathematics- गणित शिक्षाशास्त्र

गणित शिक्षण एवं शिक्षाशास्त्र से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या सहित — HTET, CTET एवं अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं हेतु।

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Q1. पहली बार तर्कशास्त्र के नियमों को किसने लिखा था ?

Right Answer: अरस्तु


Explanation:

तर्कशास्त्र अर्थात् लॉजिक के नियमों को सर्वप्रथम व्यवस्थित रूप से लिखने का श्रेय यूनानी दार्शनिक अरस्तु को दिया जाता है, इसीलिए उन्हें तर्कशास्त्र का जनक कहा जाता है। उन्होंने न्यायवाक्य अर्थात् सिलोजिज़्म की संकल्पना दी तथा तादात्म्य, विरोध एवं मध्यम-निषेध जैसे चिंतन के मूल नियम प्रतिपादित किए, जो गणितीय प्रमाण की नींव हैं। थेल्स को निगमनात्मक प्रमाण का आरंभकर्ता, पायथागोरस को ज्यामितीय प्रमेय तथा यूक्लिड को स्वयंसिद्धों पर आधारित ज्यामिति के लिए जाना जाता है। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा आगमनात्मक पद्धति का दूसरा चरण है ?

Right Answer: अवलोकन


Explanation:

आगमनात्मक पद्धति में शिक्षण विशिष्ट से सामान्य की ओर बढ़ता है। इसके चरण क्रमशः इस प्रकार हैं — सर्वप्रथम शिक्षक विशिष्ट उदाहरणों की प्रस्तुति करता है, फिर विद्यार्थी उन उदाहरणों का ध्यानपूर्वक अवलोकन कर उनमें निहित समानताएँ खोजते हैं, इसके पश्चात् अवलोकन के आधार पर नियम या सूत्र का सामान्यीकरण किया जाता है, और अंत में नए उदाहरणों पर उसका सत्यापन होता है। इस क्रम के अनुसार दूसरा चरण अवलोकन है। अतः विकल्प (3) सही उत्तर है।
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Q3. कौन-सी मूल्यांकन विधि शिक्षण प्रक्रिया के दौरान छात्रों को उनकी समझ में सुधार के लिए प्रतिक्रिया प्रदान करने पर केन्द्रित होती है ?

Right Answer: प्रारूपिक मूल्यांकन


Explanation:

प्रारूपिक अर्थात् रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान निरंतर चलता रहता है। इसका उद्देश्य अंक देना नहीं, बल्कि विद्यार्थी को तत्काल प्रतिपुष्टि देकर उसकी समझ को सुधारना तथा शिक्षक को अपनी शिक्षण विधि में आवश्यक संशोधन का अवसर देना है। इसके विपरीत संकलनात्मक मूल्यांकन पाठ या सत्र की समाप्ति पर अंतिम उपलब्धि आँकता है, नैदानिक मूल्यांकन कठिनाई के मूल कारण खोजता है तथा पूर्वानुमानात्मक मूल्यांकन भावी सफलता की भविष्यवाणी करता है। अतः विकल्प (3) सही उत्तर है।
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Q4. हिल्डा टाबा के अनुसार, अवधारणा निर्माण प्रक्रिया में पहला चरण कौन-सा है ?

Right Answer: अवलोकन तथा प्रासंगिक डाटा की पहचान करना


Explanation:

हिल्डा टाबा ने आगमनात्मक चिंतन की प्रक्रिया को तीन सोपानों में बाँटा, जिनमें पहला अवधारणा निर्माण है। इस सोपान की तीन उपक्रियाएँ क्रमशः इस प्रकार हैं — सर्वप्रथम विद्यार्थी अवलोकन कर प्रासंगिक आँकड़ों एवं तथ्यों की पहचान कर उन्हें सूचीबद्ध करते हैं, फिर समान गुणों के आधार पर उनका वर्गीकरण करते हैं, और अंत में बने समूहों को उपयुक्त नाम अथवा लेबल देते हैं। इस प्रकार सूचीकरण एवं पहचान ही प्रथम चरण है। अतः विकल्प (3) सही उत्तर है।
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Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक उदाहरण है जो निहितार्थ के रूप में गणितीय प्रमेय को दर्शाता है ?

Right Answer: यदि एक अभाज्य संख्या ab को विभाजित करती है, तो वह या तो a या b को विभाजित करेगी।


Explanation:

निहितार्थ अर्थात् इम्प्लिकेशन वह कथन होता है जो ‘यदि प … तो q’ के रूप में लिखा जाता है, जिसमें एक परिकल्पना और उससे निकलने वाला निष्कर्ष स्पष्ट रूप से अलग दिखाई देते हैं। पहला विकल्प ठीक इसी संरचना में है — यदि कोई अभाज्य संख्या ab को विभाजित करती है, तो वह a या b को अवश्य विभाजित करेगी। शेष तीनों कथन सीधे तथ्यात्मक अभिकथन हैं, जिनमें शर्त और निष्कर्ष का यह स्पष्ट ढाँचा नहीं है। अतः विकल्प (1) सही उत्तर है।
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Q6. CLA कक्षा में शिक्षक की कौन-सी जिम्मेदारी नहीं है ?

Right Answer: छात्रों को बिना किसी संरचना के स्वतंत्र रूप से काम करने देना।


Explanation:

सहयोगात्मक अधिगम कक्षा में शिक्षक की भूमिका सुनियोजित प्रबंधक एवं सुगमकर्ता की होती है। उसे कार्यों की स्पष्ट संरचना बनानी होती है और अधिगम लक्ष्य निर्धारित करने होते हैं, समूहों का आकार तथा सदस्यों का चयन इस प्रकार करना होता है कि विविधता बनी रहे, तथा व्यक्तिगत उत्तरदायित्व एवं समूह उपलब्धि दोनों को पुरस्कृत करना होता है। छात्रों को बिना किसी संरचना के पूर्णतः स्वतंत्र छोड़ देना सहयोगात्मक अधिगम नहीं, बल्कि उसकी विफलता है। अतः विकल्प (4) सही उत्तर है।
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Q7. गणितीय पाठ्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए किस दृष्टिकोण का उल्लेख तार्किक और मनोवैज्ञानिक संतुलन के संयोजन के रूप में किया गया है ?

Right Answer: सर्पिल दृष्टिकोण


Explanation:

सर्पिल दृष्टिकोण में एक ही प्रकरण को विभिन्न कक्षाओं में बार-बार, किन्तु प्रत्येक बार पहले से अधिक गहराई एवं व्यापकता के साथ पढ़ाया जाता है। इस प्रकार विषय की तार्किक क्रमबद्धता भी बनी रहती है और बालक की मानसिक परिपक्वता एवं ग्रहण-क्षमता का मनोवैज्ञानिक पक्ष भी सुरक्षित रहता है। इसीलिए इसे तार्किक और मनोवैज्ञानिक संतुलन का संयोजन कहा जाता है। विषय दृष्टिकोण केवल तर्क पर तथा मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण केवल रुचि पर बल देता है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Q8. “गणित वह भाषा है जिससे भगवान ने ब्रह्मांड की रचना की”, यह किसका कथन है ?

Right Answer: गैलीलियो गैली


Explanation:

यह प्रसिद्ध कथन इतालवी वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली का है, जिन्होंने कहा था कि प्रकृति की महान् पुस्तक गणित की भाषा में लिखी गई है और उसके अक्षर त्रिभुज, वृत्त तथा अन्य ज्यामितीय आकृतियाँ हैं। इस कथन के माध्यम से उन्होंने यह स्थापित किया कि भौतिक जगत् के नियमों को समझने के लिए गणितीय विवेचन अनिवार्य है, जो आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति का आधार बना। न्यूटन एवं आइन्सटीन ने भौतिकी में तथा पायथागोरस ने ज्यामिति में योगदान दिया। अतः विकल्प (3) सही है।
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Q9. गणितीय कथन की सत्यता स्थापित करने की विधि को क्या कहा जाता है ?

Right Answer: प्रमाण


Explanation:

गणित में किसी कथन को तब तक स्वीकार नहीं किया जाता जब तक उसे तार्किक रूप से सिद्ध न कर दिया जाए। पूर्वस्वीकृत स्वयंसिद्धों, परिभाषाओं एवं पहले सिद्ध की जा चुकी प्रमेयों के आधार पर निगमनात्मक तर्क की जो शृंखला किसी कथन की सत्यता स्थापित करती है, उसे प्रमाण कहते हैं। अनुमान केवल संभावित निष्कर्ष है, परिकल्पना अभी सिद्ध न किया गया प्रस्ताव है तथा धारणा बिना प्रमाण के मान ली गई बात है — इनमें से कोई भी सत्यता स्थापित नहीं करता। अतः विकल्प (3) सही है।
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Q10. किस भारतीय गणितज्ञ ने संख्या सिद्धान्त, अंशात्मक अवकलन तथा दीर्घवृत्तीय फलनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया ?

Right Answer: श्रीनिवास रामानुजन


Explanation:

श्रीनिवास रामानुजन आधुनिक युग के उन विरले भारतीय गणितज्ञों में हैं जिन्होंने औपचारिक प्रशिक्षण के बिना ही संख्या सिद्धान्त, अनंत श्रेणियाँ, सतत भिन्न, विभाजन फलन तथा दीर्घवृत्तीय एवं मॉक थीटा फलनों पर मौलिक कार्य किया। उन्होंने लगभग 3900 परिणाम दिए, जिनमें से अनेक आज भी शोध का विषय हैं। ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट एवं बोधायन प्राचीन भारतीय गणित के आचार्य थे, जिनका कार्य क्रमशः शून्य, खगोल-गणित तथा शुल्बसूत्रों से जुड़ा है। अतः विकल्प (2) सही उत्तर है।
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Published: 27 July 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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