Chemistry: 62 MCQs with Answers
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Chemistry MCQs on physical, organic and inorganic chemistry। रसायन विज्ञान विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
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Q51. O₂ के लिए ताप बढ़ने पर हेनरी स्थिरांक K𝐇 का मान बढ़ता है। तब ताप घटाने पर उसकी विलेयता :
Right Answer: बढ़ेगी
Explanation:
हेनरी का नियम कहता है कि गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है और हेनरी स्थिरांक जितना अधिक होगा, विलेयता उतनी ही कम होगी। ऑक्सीजन के लिए हेनरी स्थिरांक का मान ताप बढ़ने के साथ बढ़ता है, अर्थात् गरम करने पर उसकी विलेयता घटती जाती है। इसका कारण यह है कि गैसों का विलयन बनना ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है, अतः ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार ताप बढ़ाने पर साम्य गैस निकलने की दिशा में खिसक जाता है। इसलिए ताप घटाने पर ऑक्सीजन की विलेयता बढ़ेगी; यही कारण है कि ठण्डे जल में जलीय जीवों के लिए अधिक घुलित ऑक्सीजन उपलब्ध रहती है।
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Q52. त्रिज्य फलन R(r) निम्नलिखित में से किस क्वांटम संख्या पर निर्भर करता है ?
Right Answer: n तथा l दोनों
Explanation:
किसी परमाणु कक्षक के तरंग फलन को दो भागों में विभक्त किया जाता है — त्रिज्य फलन तथा कोणीय फलन। त्रिज्य फलन नाभिक से दूरी के साथ इलेक्ट्रॉन के वितरण का वर्णन करता है और वह मुख्य क्वांटम संख्या तथा दिगंशी क्वांटम संख्या दोनों पर निर्भर करता है; इन्हीं दोनों से त्रिज्य नोडों की संख्या भी निर्धारित होती है, जो n घटा l घटा एक के बराबर होती है। इसके विपरीत कोणीय फलन दिशा एवं आकृति बताता है और वह दिगंशी तथा चुम्बकीय क्वांटम संख्या पर निर्भर करता है। चक्रण क्वांटम संख्या का तरंग फलन के स्थानिक भाग से कोई सम्बन्ध नहीं होता।
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Q53. कथन-[A] : अन्तस्थ ऐल्कीन प्राथमिक ऐल्किल बोरेन देती हैं, जिनका क्षारीय H₂O₂ से ऑक्सीकरण करने पर प्राथमिक एल्कोहॉल बनता है। कथन-[B] : उपरोक्त समग्र जलयोजन सिस-योग द्वारा होता है। सही विकल्प चुनिए :
Right Answer: दोनों कथन [A] और [B] सत्य हैं।
Explanation:
दोनों कथन सही हैं। हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण में डाइबोरेन का बोरॉन ऐल्कीन के कम प्रतिस्थापित कार्बन पर जुड़ता है, क्योंकि वहाँ त्रिविम बाधा कम होती है; इसीलिए अन्तस्थ ऐल्कीन से प्राथमिक ऐल्किल बोरेन बनता है। इसके बाद क्षारीय हाइड्रोजन परॉक्साइड से ऑक्सीकरण करने पर बोरॉन का स्थान हाइड्रॉक्सिल समूह ले लेता है और प्राथमिक एल्कोहॉल प्राप्त होता है। यह मार्कोवनिकोफ नियम के विपरीत उत्पाद देता है। साथ ही हाइड्रोजन एवं बोरॉन दोनों द्वि आबंध के एक ही ओर से जुड़ते हैं, अतः समग्र जलयोजन सिस अर्थात् समपक्ष योग द्वारा होता है।
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Q54. तापमान के बढ़ने के साथ धातुओं की चालकता :
Right Answer: घटती है
Explanation:
धातुओं में विद्युत चालन मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से होता है, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक चालक कहा जाता है। ताप बढ़ाने पर धातु के धनायन अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर अधिक तीव्रता से कम्पन करने लगते हैं, जिससे प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों का इन कम्पित आयनों से टकराव बढ़ जाता है और उनका औसत मुक्त पथ घट जाता है। परिणामस्वरूप प्रतिरोध बढ़ता है और चालकता घट जाती है। इसके विपरीत विद्युत अपघट्य विलयनों में ताप बढ़ाने पर श्यानता घटती तथा आयनों की गतिशीलता बढ़ती है, अतः वहाँ चालकता बढ़ जाती है। अर्धचालकों में भी ताप के साथ चालकता बढ़ती है।
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Q55. निम्नलिखित में से किसमें आयनिक गुण का प्रतिशत सबसे अधिक है ?
Right Answer: HF
Explanation:
किसी सहसंयोजी आबंध में आयनिक लक्षण का प्रतिशत दोनों परमाणुओं की विद्युतऋणात्मकता के अन्तर पर निर्भर करता है; अन्तर जितना अधिक होगा, आबंध उतना ही ध्रुवीय एवं आयनिक होगा। हाइड्रोजन हैलाइडों में फ्लोरीन सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है, अतः हाइड्रोजन फ्लोराइड में यह अन्तर सबसे अधिक लगभग 1.9 होता है और उसका आयनिक लक्षण भी सर्वाधिक, लगभग 43 प्रतिशत, आँका जाता है। नीचे जाने पर हैलोजन की विद्युतऋणात्मकता घटती जाती है, अतः HCl, HBr तथा HI में आयनिक लक्षण क्रमशः घटता जाता है। इसी अत्यधिक ध्रुवता एवं हाइड्रोजन आबंधन के कारण हाइड्रोजन फ्लोराइड दुर्बल अम्ल है।
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Q56. जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है त्रिधनात्मक लैंथेनॉन आयन Ln 3+ की आयनिक त्रिज्या :
Right Answer: घटती है
Explanation:
लैंथेनॉयड शृंखला में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ धन तीन आयनों की त्रिज्या क्रमशः घटती जाती है और इस परिघटना को लैंथेनॉयड संकुचन कहा जाता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक पग पर जुड़ने वाला इलेक्ट्रॉन भीतरी 4f उपकोश में जाता है, जिसकी आकृति विसरित होती है और जो परिरक्षण अत्यन्त दुर्बल रूप से करता है। इसके विपरीत नाभिकीय आवेश एक-एक इकाई निरन्तर बढ़ता जाता है, अतः प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़कर बाह्य इलेक्ट्रॉनों को भीतर की ओर खींच लेता है। इसी संकुचन के कारण द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण शृंखला के तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं।
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Q57. n = 4 में अनुमत इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी :
Right Answer: 32
Explanation:
किसी मुख्य कोश में समा सकने वाले अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² सूत्र से ज्ञात की जाती है, जहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है। n बराबर चार रखने पर यह संख्या 2 गुणा 16 अर्थात् 32 प्राप्त होती है। इसे उपकोशों के आधार पर भी देखा जा सकता है — चौथे कोश में 4s, 4p, 4d तथा 4f उपकोश होते हैं, जिनमें क्रमशः एक, तीन, पाँच तथा सात कक्षक होते हैं, अर्थात् कुल सोलह कक्षक। पाउली के अपवर्जन नियम के अनुसार प्रत्येक कक्षक में विपरीत चक्रण वाले अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं, अतः कुल 32 इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
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Q58. यदि 5.85 g NaCl को 90 g जल में विलयित किया जाए, तो NaCl का मोल भिन्न होगा :
Right Answer: 0.0196
Explanation:
मोल प्रभाज निकालने के लिए पहले दोनों घटकों के मोल ज्ञात किए जाते हैं। सोडियम क्लोराइड का मोलर द्रव्यमान 58.5 ग्राम प्रति मोल है, अतः 5.85 ग्राम में 0.1 मोल होंगे। जल का मोलर द्रव्यमान 18 ग्राम प्रति मोल है, अतः 90 ग्राम जल में ठीक 5 मोल होंगे। कुल मोल 0.1 जोड़ 5 अर्थात् 5.1 हुए। सोडियम क्लोराइड का मोल प्रभाज उसके मोल को कुल मोल से भाग देने पर मिलता है, अर्थात् 0.1 बटा 5.1 जो लगभग 0.0196 आता है। यहाँ लवण के आयनन को गणना में नहीं लिया गया है।
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Q59. पोटैशियम के 4s इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश है :
Right Answer: 2.2
Explanation:
प्रभावी नाभिकीय आवेश निकालने के लिए स्लेटर के नियम प्रयुक्त होते हैं, जिसके अनुसार वह वास्तविक नाभिकीय आवेश में से परिरक्षण स्थिरांक घटाकर प्राप्त होता है। पोटैशियम का परमाणु क्रमांक 19 तथा विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ है। बाह्यतम 4s इलेक्ट्रॉन के लिए ठीक भीतरी कोश के आठों इलेक्ट्रॉन 0.85 की दर से तथा उससे भी भीतर के दस इलेक्ट्रॉन पूरी 1.00 की दर से परिरक्षण करते हैं। इस प्रकार परिरक्षण स्थिरांक 8 गुणा 0.85 जोड़ 10 गुणा 1 अर्थात् 16.8 होता है, और प्रभावी नाभिकीय आवेश 19 घटा 16.8 अर्थात् 2.2 प्राप्त होता है।
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Q60. निम्नलिखित में से कौन निम्नतम सहसंयोजी है ?
Right Answer: VCl₂
Explanation:
फजान के नियमों के अनुसार धनायन का आवेश जितना अधिक तथा आकार जितना छोटा होगा, उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी और यौगिक में सहसंयोजी लक्षण उतना ही बढ़ जाएगा। वैनेडियम के इन क्लोराइडों में ऑक्सीकरण अवस्था क्रमशः धन दो, धन तीन, धन चार तथा VOCl₃ में धन पाँच है। सबसे कम ऑक्सीकरण अवस्था वाला VCl₂ है, अतः उसका धनायन सबसे बड़ा एवं सबसे कम ध्रुवणकारी है और वही सर्वाधिक आयनिक अर्थात् न्यूनतम सहसंयोजी होगा। यही कारण है कि VCl₂ ठोस एवं ऊँचे गलनांक वाला है, जबकि VCl₄ तथा VOCl₃ वाष्पशील द्रव हैं।
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