Chemistry - Organic Chemistry: 12 MCQs with Answers
Chemistry- Organic Chemistry
कार्बनिक अभिक्रियाएँ, अभिक्रिया-विधि, समावयवता, प्रेरणिक प्रभाव, परीक्षण तथा नामकरण पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. किसी कार्बनिक यौगिक में असंतृप्त ज्ञात करने के लिए कौन-सा परीक्षण किया जाता है ?
Right Answer: बेयर परीक्षण
बेयर परीक्षण किसी कार्बनिक यौगिक में असंतृप्तता अर्थात् द्वि अथवा त्रि आबंध की उपस्थिति ज्ञात करने का सरल परीक्षण है। इसमें यौगिक में ठण्डा तनु क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट का बैंगनी विलयन मिलाया जाता है। असंतृप्त यौगिक की उपस्थिति में परमैंगनेट अपचयित होकर मैंगनीज डाइऑक्साइड का भूरा अवक्षेप देता है और बैंगनी रंग विलुप्त हो जाता है। इसी क्रिया में ऐल्कीन में सिन-योगात्मक रूप से दो हाइड्रॉक्सिल जुड़कर वाइसिनल ग्लाइकॉल बन जाता है। हैलोफॉर्म परीक्षण मेथिल कीटोन के लिए तथा हिन्सबर्ग परीक्षण ऐमीनों के वर्गीकरण के लिए प्रयुक्त होता है।
Q2. एथीन (C₂H₄) को ऐसीटैल्डिहाइड (CH₃CHO) में बदलने वाले वाकर प्रक्रम में कौन-सा उत्प्रेरक प्रयुक्त होता है ?
Right Answer: PdCl₂
वाकर प्रक्रम में एथीन का ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकरण कर ऐसीटैल्डिहाइड बनाया जाता है और इसका मुख्य उत्प्रेरक पैलेडियम डाइक्लोराइड है, जिसे कॉपर डाइक्लोराइड के साथ जलीय माध्यम में प्रयुक्त किया जाता है। अभिक्रिया में पैलेडियम द्वि से शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयित हो जाता है, जिसे कॉपर द्वि आयन पुनः ऑक्सीकृत कर देता है और स्वयं कॉपर एक में बदलकर वायुमंडलीय ऑक्सीजन से पुनः ऑक्सीकृत हो जाता है। इस प्रकार दोनों धातुएँ चक्रीय रूप से पुनर्जनित होती रहती हैं और यह प्रक्रम औद्योगिक रूप से अत्यन्त किफायती बन जाता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक डाइएथिल ईथर का समावयवी नहीं है ?
Right Answer: 2-ब्यूटेनोन
डाइएथिल ईथर का अणुसूत्र C₄H₁₀O है, अतः उसका समावयवी होने के लिए किसी यौगिक का अणुसूत्र ठीक यही होना चाहिए। ब्यूटेन-1-ऑल तथा 2-मेथिल प्रोपेन-2-ऑल दोनों एल्कोहॉल हैं, जिनका अणुसूत्र C₄H₁₀O है, अतः वे इसके क्रियात्मक समूह समावयवी हैं। n-प्रोपिल मेथिल ईथर भी C₄H₁₀O है, अतः वह श्रृंखला समावयवी है। इसके विपरीत 2-ब्यूटेनोन एक कीटोन है, जिसका अणुसूत्र C₄H₈O है; उसमें दो हाइड्रोजन कम हैं क्योंकि उसमें कार्बोनिल का द्वि आबंध है। अतः वही समावयवी नहीं है। समान अणुसूत्र किन्तु भिन्न क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों को क्रियात्मक समूह समावयवी कहते हैं।
Q4. n- हैक्सेन को ऐल्युमिनियम के सहारे क्रोमिक ऑक्साइड के ऊपर से दाब पर गुजारने और 480-550° C गरम कर देने पर प्राप्त होने वाला यौगिक है :
Right Answer: बेन्जीन
जब n-हेक्सेन को दाब के अन्तर्गत ऐलुमिना पर आधारित क्रोमिक ऑक्साइड उत्प्रेरक के ऊपर से 480 से 550 डिग्री सेल्सियस पर प्रवाहित किया जाता है, तो वह चक्रीकरण एवं विहाइड्रोजनीकरण से गुजरकर बेन्जीन में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को एरोमैटीकरण अथवा हाइड्रोफॉर्मिंग कहा जाता है और पेट्रोलियम उद्योग में यह सुगन्धित हाइड्रोकार्बन प्राप्त करने की महत्त्वपूर्ण विधि है। इसी प्रकार n-हेप्टेन से टॉलुईन प्राप्त होता है। अभिक्रिया में शृंखला पहले वलय में बदलती है और फिर क्रमशः हाइड्रोजन निकलकर स्थायी एरोमैटिक निकाय बन जाता है।
Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन E1 विलोपन अभिक्रिया के लिए गलत है ?
Right Answer: क्षार की सांद्रता बढ़ने से अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
E1 विलोपन दो चरणों में होता है। पहले मन्द एवं दर-निर्धारक चरण में ऐल्किल हैलाइड से हैलाइड आयन निकलकर कार्बधनायन बनता है। दूसरे तीव्र चरण में क्षार धनावेशित कार्बन के निकटवर्ती कार्बन से एक प्रोटॉन हटा लेता है, जिससे द्वि आबंध बनकर विलोपन उत्पाद प्राप्त होता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि दर-निर्धारक चरण में क्षार भाग ही नहीं लेता; इसलिए E1 अभिक्रिया की दर केवल ऐल्किल हैलाइड की सान्द्रता पर निर्भर करती है और क्षार की सान्द्रता बढ़ाने से दर नहीं बढ़ती। यही इसे E2 से अलग करता है, जो द्विअणुक होती है।
Q6. CH₃–CH=CH–CH₂–CH₂–CN पर (1) DIBAL-H, (2) H₂O की क्रिया से प्राप्त उत्पाद है :
Right Answer: CH₃–CH=CH–CH₂–CH₂–CHO
डाइआइसोब्यूटिल ऐलुमिनियम हाइड्राइड, जिसे संक्षेप में डाइबाल-एच कहा जाता है, एक विकल्पात्मक अपचायक है। यह नाइट्राइल समूह पर एक बार ही हाइड्राइड जोड़कर मध्यवर्ती इमीन-ऐलुमिनियम संकुल बनाता है, जिसका जल-अपघटन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यदि लिथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड जैसा प्रबल अपचायक प्रयुक्त किया जाए तो अपचयन आगे बढ़कर प्राथमिक ऐमीन बन जाती है। डाइबाल-एच की एक अन्य विशेषता यह है कि वह कार्बन-कार्बन द्वि आबंध को अपरिवर्तित छोड़ देता है, इसलिए उत्पाद में द्वि आबंध यथावत बना रहता है।
Q7. निम्नलिखित में से कौन-से समूह +I प्रभाव प्रदर्शित करते हैं ?
(a) COO⁻
(b) OR
(c) OH
(d) O⁻
(e) SO₂R
(f) NH₃⁺
Right Answer: (a) व (d)
धन प्रेरणिक प्रभाव वे समूह दर्शाते हैं जो सिग्मा आबंध के अनुदिश इलेक्ट्रॉन घनत्व को शृंखला की ओर धकेलते हैं। ऐसा वे समूह करते हैं जिन पर ऋण आवेश हो अथवा जो अपेक्षाकृत इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हों; कार्बोक्सिलेट आयन तथा एल्कॉक्साइड आयन इसी कारण प्रबल धन प्रेरणिक समूह हैं। इनके अतिरिक्त ऐल्किल समूह भी हल्का धन प्रभाव दिखाते हैं। इसके विपरीत हाइड्रॉक्सिल, एल्कॉक्सी, सल्फोनिल तथा अमोनियम समूह विद्युतऋणात्मक परमाणु अथवा धन आवेश के कारण इलेक्ट्रॉन अपनी ओर खींचते हैं, अतः वे ऋण प्रेरणिक प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।
Q8. CH₃–CH₂–CH₂–CH₂–OH पर क्रमशः Al₂O₃/350°C, फिर Br₂, फिर ऐल्कोहॉलीय KOH की क्रिया से A, B तथा C प्राप्त होते हैं। यौगिक ‘C’ का IUPAC नाम है :
Right Answer: 1 -ब्यूटाइन
ब्यूटेन-1-ऑल को ऐलुमिना उत्प्रेरक पर 350 डिग्री सेल्सियस पर गरम करने से निर्जलीकरण होता है और यौगिक A अर्थात् ब्यूट-1-ईन बनता है। इस ऐल्कीन में ब्रोमीन का योग होने पर यौगिक B अर्थात् 1,2-डाइब्रोमोब्यूटेन प्राप्त होता है, जो एक विसिनल डाइहैलाइड है। अन्त में इस डाइहैलाइड को ऐल्कोहॉलीय पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर दो अणु हाइड्रोजन ब्रोमाइड क्रमशः निकल जाते हैं और त्रि आबंध बन जाता है। इस प्रकार यौगिक C ब्यूट-1-आइन है। यह ऐल्कीन से ऐल्काइन बनाने की मानक विधि है।
Q9. निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा इस तथ्य की व्याख्या करती है कि o- नाइट्रोफिनॉल, p- नाइट्रोफिनॉल की तुलना में अधिक वाष्पशील है ?
Right Answer: हाइड्रोजन बंध
ऑर्थो-नाइट्रोफिनॉल पैरा-नाइट्रोफिनॉल की तुलना में अधिक वाष्पशील होता है और इसका कारण हाइड्रोजन आबंधन की प्रकृति का अन्तर है। ऑर्थो यौगिक में नाइट्रो तथा हाइड्रॉक्सिल समूह इतने पास होते हैं कि उनके बीच अणु के भीतर ही अन्तराअणुक नहीं बल्कि अन्तःअणुक हाइड्रोजन आबंध बन जाता है, जिसे चिलेशन कहते हैं। इससे अणु आपस में जुड़ नहीं पाते और उन्हें अलग करने के लिए कम ऊर्जा चाहिए। इसके विपरीत पैरा यौगिक में दोनों समूह दूर होने से अणुओं के बीच प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबंध बनते हैं, जिससे उसका क्वथनांक ऊँचा तथा वाष्पशीलता कम हो जाती है।
Q10. निम्नलिखित में से किस एल्कोहॉल की वाष्प गरम ताँबे के उत्प्रेरक पर से गुजारने पर ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन नहीं देती ?
Right Answer: (CH₃)₃COH
जब एल्कोहॉल की वाष्प लगभग 573 केल्विन पर गरम ताँबे के ऊपर से गुजारी जाती है तो विहाइड्रोजनीकरण होता है। प्राथमिक एल्कोहॉल ऐल्डिहाइड तथा द्वितीयक एल्कोहॉल कीटोन देते हैं, क्योंकि उनमें कार्बिनॉल कार्बन पर हाइड्रोजन उपलब्ध रहता है, जिसे हटाकर कार्बोनिल समूह बन जाता है। तृतीयक एल्कोहॉल में कार्बिनॉल कार्बन पर कोई हाइड्रोजन नहीं होता, अतः वहाँ कार्बोनिल बन ही नहीं सकता। ऐसी दशा में तृतीयक ब्यूटिल एल्कोहॉल निर्जलीकृत होकर ऐल्कीन अर्थात् आइसोब्यूटिलीन दे देता है। यही अभिक्रिया एल्कोहॉलों के वर्गीकरण की कसौटी बनती है।