Chemistry - Atomic Structure and Periodic Properties: 8 MCQs with Answers
Chemistry- Atomic Structure and Periodic Properties
परमाणु संरचना, क्वांटम संख्याएँ, आवर्त सारणी तथा आवर्ती गुणधर्मों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. Eu का मूल अवस्था में बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है :
Right Answer: 4f⁷ 6s²
यूरोपियम का परमाणु क्रमांक 63 है और उसकी मूल अवस्था का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4f⁷ 6s² है। लैंथेनॉयड शृंखला में सामान्यतः इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में भरते जाते हैं और 5d प्रायः रिक्त रहता है। यूरोपियम में 4f उपकोश ठीक अर्धपूरित हो जाता है, जो विनिमय ऊर्जा के कारण विशेष स्थायित्व प्रदान करता है; इसी कारण यूरोपियम धन दो ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाता है, जो लैंथेनॉयडों में असामान्य है। इसके विपरीत गैडोलिनियम में विन्यास 4f⁷ 5d¹ 6s² होता है, क्योंकि वहाँ अर्धपूरित 4f बनाए रखते हुए अगला इलेक्ट्रॉन 5d में जाता है।
Q2. निम्नलिखित किस तत्वों के युग्म का आकार समान नहीं है ?
Right Answer: Nb / Os
आवर्त सारणी में लैंथेनॉयड संकुचन के कारण द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण शृंखला के एक ही वर्ग के तत्वों के परमाणु एवं आयनिक आकार लगभग समान हो जाते हैं। इसी कारण जर्कोनियम एवं हैफ्नियम, पैलेडियम एवं प्लैटिनम, तथा मॉलिब्डेनम एवं टंगस्टन के युग्मों का आकार लगभग बराबर रहता है और उनके रासायनिक गुण भी इतने मिलते-जुलते हैं कि उनका पृथक्करण कठिन होता है। नाइओबियम तथा ऑस्मियम एक ही वर्ग के नहीं हैं — नाइओबियम वर्ग पाँच का तथा ऑस्मियम वर्ग आठ का तत्व है, अतः उनका आकार समान नहीं होता।
Q3. ऑक्सीकरण क्षमता निम्नलिखित में से किस क्रम में घटती है ?
Right Answer: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂
हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती जाती है, अतः सही क्रम फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन है। फ्लोरीन सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है और उसका मानक अपचयन विभव सर्वाधिक धनात्मक है। इसका कारण तीन कारकों का संयुक्त प्रभाव है — फ्लोरीन की आबंध वियोजन एंथैल्पी कम है, उसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अनुकूल है, और सबसे महत्त्वपूर्ण यह कि छोटे आकार के कारण फ्लोराइड आयन की जलयोजन एंथैल्पी अत्यधिक ऋणात्मक होती है। नीचे जाने पर आकार बढ़ने से जलयोजन एंथैल्पी घटती है और ऑक्सीकारक क्षमता कम हो जाती है।
Q4. निम्नलिखित में प्रथम आयनन एन्थैल्पी का सही क्रम है :
Right Answer: Al < Mg < Si < S < P
तीसरे आवर्त में प्रथम आयनन एंथैल्पी सामान्यतः बाएँ से दाएँ बढ़ती है, किन्तु दो स्थानों पर अनियमितता आती है। मैग्नीशियम का 3s उपकोश पूर्ण भरा होने से वह ऐलुमिनियम से अधिक स्थायी है, अतः ऐलुमिनियम की आयनन एंथैल्पी मैग्नीशियम से कम रहती है। इसी प्रकार फॉस्फोरस का 3p उपकोश अर्धपूरित होने से विशेष स्थायी है, जबकि सल्फर में एक कक्षक में इलेक्ट्रॉन युग्मन के कारण प्रतिकर्षण बढ़ जाता है; इसलिए सल्फर की आयनन एंथैल्पी फॉस्फोरस से कम होती है। अतः सही क्रम ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, सल्फर तथा फॉस्फोरस है।
Q5. एक तत्व जिसका परमाणु क्रमांक 87 है, आवर्त सारिणी के किस ब्लॉक से संबंधित है ?
Right Answer: s - ब्लॉक
परमाणु क्रमांक 87 वाला तत्व फ्रैंसियम है, जो आवर्त सारणी के s-ब्लॉक में आता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास रेडॉन के अक्रिय गैस संरचना के बाद 7s¹ है, अर्थात् उसका अन्तिम इलेक्ट्रॉन s उपकोश में प्रवेश करता है, और यही s-ब्लॉक की परिभाषा है। यह प्रथम वर्ग अर्थात् क्षार धातु परिवार का सबसे भारी सदस्य है, अत्यन्त रेडियोसक्रिय एवं अस्थायी है तथा प्रकृति में केवल सूक्ष्म मात्रा में पाया जाता है। इसकी खोज मार्गरीट पेरी ने 1939 में की थी और यह ज्ञात तत्वों में सर्वाधिक विद्युतधनात्मक माना जाता है।
Q6. त्रिज्य फलन R(r) निम्नलिखित में से किस क्वांटम संख्या पर निर्भर करता है ?
Right Answer: n तथा l दोनों
किसी परमाणु कक्षक के तरंग फलन को दो भागों में विभक्त किया जाता है — त्रिज्य फलन तथा कोणीय फलन। त्रिज्य फलन नाभिक से दूरी के साथ इलेक्ट्रॉन के वितरण का वर्णन करता है और वह मुख्य क्वांटम संख्या तथा दिगंशी क्वांटम संख्या दोनों पर निर्भर करता है; इन्हीं दोनों से त्रिज्य नोडों की संख्या भी निर्धारित होती है, जो n घटा l घटा एक के बराबर होती है। इसके विपरीत कोणीय फलन दिशा एवं आकृति बताता है और वह दिगंशी तथा चुम्बकीय क्वांटम संख्या पर निर्भर करता है। चक्रण क्वांटम संख्या का तरंग फलन के स्थानिक भाग से कोई सम्बन्ध नहीं होता।
Q7. n = 4 में अनुमत इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी :
Right Answer: 32
किसी मुख्य कोश में समा सकने वाले अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² सूत्र से ज्ञात की जाती है, जहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है। n बराबर चार रखने पर यह संख्या 2 गुणा 16 अर्थात् 32 प्राप्त होती है। इसे उपकोशों के आधार पर भी देखा जा सकता है — चौथे कोश में 4s, 4p, 4d तथा 4f उपकोश होते हैं, जिनमें क्रमशः एक, तीन, पाँच तथा सात कक्षक होते हैं, अर्थात् कुल सोलह कक्षक। पाउली के अपवर्जन नियम के अनुसार प्रत्येक कक्षक में विपरीत चक्रण वाले अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं, अतः कुल 32 इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
Q8. पोटैशियम के 4s इलेक्ट्रॉन द्वारा अनुभव किया जाने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश है :
Right Answer: 2.2
प्रभावी नाभिकीय आवेश निकालने के लिए स्लेटर के नियम प्रयुक्त होते हैं, जिसके अनुसार वह वास्तविक नाभिकीय आवेश में से परिरक्षण स्थिरांक घटाकर प्राप्त होता है। पोटैशियम का परमाणु क्रमांक 19 तथा विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ है। बाह्यतम 4s इलेक्ट्रॉन के लिए ठीक भीतरी कोश के आठों इलेक्ट्रॉन 0.85 की दर से तथा उससे भी भीतर के दस इलेक्ट्रॉन पूरी 1.00 की दर से परिरक्षण करते हैं। इस प्रकार परिरक्षण स्थिरांक 8 गुणा 0.85 जोड़ 10 गुणा 1 अर्थात् 16.8 होता है, और प्रभावी नाभिकीय आवेश 19 घटा 16.8 अर्थात् 2.2 प्राप्त होता है।