Chemistry - Coordination Compounds: 7 MCQs with Answers

Coordination Compounds - Chemistry
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Chemistry- Coordination Compounds

उपसहसंयोजन यौगिक, नामकरण, संकरण, समावयवता तथा क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. निम्नलिखित में से किस संकुल में sp³d² संकरण पाया जाता है ?

Right Answer: [CoF₆]³⁻

किसी अष्टफलकीय संकुल में संकरण इस बात पर निर्भर करता है कि लिगन्ड प्रबल है या दुर्बल। फ्लोराइड आयन स्पेक्ट्रमी शृंखला में अत्यन्त दुर्बल लिगन्ड है, अतः [CoF₆]³⁻ में यह d-इलेक्ट्रॉनों को युग्मित नहीं करा पाता। फलस्वरूप भीतरी 3d कक्षक उपलब्ध नहीं रहते और संकरण बाहरी कक्षकों का उपयोग करते हुए sp³d² होता है, जिससे यह बाह्य कक्षक अथवा उच्च चक्रण संकुल बनता है और अनुचुम्बकीय होता है। इसके विपरीत अमोनिया, ऑक्सैलेट तथा सायनाइड प्रबल लिगन्ड हैं, अतः वे d²sp³ संकरण वाले भीतरी कक्षक संकुल बनाते हैं।

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Q2. ट्रिस (एथेन-1,2-डाइऐमीन) कोबाल्ट (III) सल्फेट है :

Right Answer: [Co(en)₃]₂(SO₄)₃

ट्रिस उपसर्ग बताता है कि एथेन-1,2-डाइऐमीन अर्थात् एथिलीनडाइऐमीन के तीन अणु लिगन्ड के रूप में उपस्थित हैं। यह उदासीन द्विदन्तुर लिगन्ड है, अतः संकुल आयन पर आवेश केवल कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था से आता है, जो नाम में रोमन तीन से दर्शाया गया है। इस प्रकार धनायन [Co(en)₃]³⁺ है। सल्फेट आयन का आवेश ऋण दो है, अतः विद्युत उदासीनता के लिए दो धनायन तथा तीन सल्फेट आयन चाहिए। इसीलिए सही सूत्र [Co(en)₃]₂(SO₄)₃ है। यह संकुल आयन अष्टफलकीय होता है और तीन द्विदन्तुर वलयों के कारण प्रकाशिक समावयवता भी दर्शाता है।

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Q3. d³ धातु आयन के अष्टफलकीय संकुलों की CFSE है :

Right Answer: −1.2 Δ₀

अष्टफलकीय क्षेत्र में पाँच d कक्षक विभाजित होकर निम्न ऊर्जा वाले तीन t2g तथा उच्च ऊर्जा वाले दो eg कक्षकों में बँट जाते हैं। t2g कक्षक में स्थित प्रत्येक इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल क्षेत्र स्थायीकरण ऊर्जा में ऋण 0.4 Δ₀ का योगदान देता है, जबकि eg कक्षक का प्रत्येक इलेक्ट्रॉन धन 0.6 Δ₀ का। d³ विन्यास में हुण्ड नियम के अनुसार तीनों इलेक्ट्रॉन तीनों t2g कक्षकों में अयुग्मित रूप से भरते हैं, चाहे लिगन्ड प्रबल हो या दुर्बल। अतः कुल स्थायीकरण ऊर्जा 3 गुणा ऋण 0.4 अर्थात् ऋण 1.2 Δ₀ होती है।

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Q4. एक मोल [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl द्वारा AgNO₃ के आधिक्य से अवक्षेपित AgCl के मोलों की संख्या है :

Right Answer: 1

किसी उपसहसंयोजन यौगिक में केवल आयनन क्षेत्र के आयन ही विलयन में मुक्त होते हैं; उपसहसंयोजन क्षेत्र अर्थात् वर्ग कोष्ठक के भीतर के लिगन्ड जल में आयनित नहीं होते। दिए गए यौगिक [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl में चार अमोनिया तथा दो क्लोराइड सीधे कोबाल्ट से जुड़े हैं, अतः वे अवक्षेपित नहीं होंगे। कोष्ठक के बाहर केवल एक क्लोराइड आयन है, जो विलयन में मुक्त होकर सिल्वर नाइट्रेट के साथ क्रिया करता है। इसलिए एक मोल यौगिक से एक ही मोल सिल्वर क्लोराइड का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होगा। वर्नर ने इसी विधि से उपसहसंयोजन सिद्धांत सिद्ध किया था।

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Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा संकुल ज्यामितीय समावयवता नहीं दर्शाता ?

Right Answer: [NiCl₄]²⁻

ज्यामितीय समावयवता तब सम्भव होती है जब लिगन्डों की सापेक्ष स्थिति भिन्न-भिन्न हो सके, जैसे वर्ग समतलीय अथवा अष्टफलकीय संकुलों में समपक्ष एवं विपक्ष विन्यास। प्लैटिनम के दोनों वर्ग समतलीय संकुल तथा कोबाल्ट का अष्टफलकीय संकुल इसी कारण समपक्ष-विपक्ष समावयवी बनाते हैं। इसके विपरीत टेट्राक्लोरोनिकलेट आयन चतुष्फलकीय है, और चतुष्फलक में सभी चारों स्थान एक-दूसरे से समान रूप से सटे होते हैं, अतः वहाँ समपक्ष अथवा विपक्ष जैसा कोई भेद उत्पन्न ही नहीं होता। इसीलिए यह ज्यामितीय समावयवता नहीं दर्शाता।

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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा लिगन्ड संक्रमण धातु में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ला सकता है ?

Right Answer: F⁻

किसी संक्रमण धातु में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था लाने की क्षमता फ्लोराइड आयन में सर्वाधिक होती है। इसका कारण यह है कि फ्लोरीन सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है, उसका आकार अत्यन्त छोटा है और उसका ऋण आवेश उच्च घनत्व में केन्द्रित रहता है, जिससे वह धातु के चारों ओर अधिक संख्या में व्यवस्थित हो सकता है। साथ ही वह इतना कठोर तथा अध्रुवणीय है कि आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होता, अर्थात् धातु को अपचयित नहीं करता। इसी कारण कोबाल्ट चार तथा मैंगनीज चार जैसी असामान्य उच्च अवस्थाएँ फ्लोराइडों में ही मिलती हैं। ऑक्साइड आयन भी यही कार्य करता है।

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Q7. प्रबल लिगन्ड क्षेत्र वाले अष्टफलकीय संकुल में d⁶ विन्यास की CFSE है :

Right Answer: −2.4 Δ₀

प्रबल लिगन्ड क्षेत्र में क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा युग्मन ऊर्जा से अधिक होती है, अतः इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा वाले तीनों t2g कक्षकों को पूर्ण रूप से भरते हैं और तभी eg में जाते हैं। d⁶ विन्यास में सभी छह इलेक्ट्रॉन तीनों t2g कक्षकों में युग्मित होकर समा जाते हैं और eg कक्षक पूर्णतः रिक्त रहते हैं; यह निम्न चक्रण अवस्था है, जिसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन न होने से संकुल प्रतिचुम्बकीय हो जाता है। प्रत्येक t2g इलेक्ट्रॉन ऋण 0.4 Δ₀ का योगदान देता है, अतः कुल क्रिस्टल क्षेत्र स्थायीकरण ऊर्जा ऋण 2.4 Δ₀ होती है।

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Published: 04 August 2026 | Last Updated: 04 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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