Chemistry - d-Block and f-Block Elements: 6 MCQs with Answers
Chemistry- d-Block and f-Block Elements
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0%Q1. निम्नलिखित कौन-सा ऑक्साइड, चालकता तथा दिखने में कॉपर धातु की तरह प्रतीत होता है ?
Right Answer: ReO₃
Explanation:
रीनियम ट्राइऑक्साइड एक असामान्य संक्रमण धातु ऑक्साइड है, जो दिखने में ताँबे जैसा चमकीला लाल-सुनहरा होता है और उसकी विद्युत चालकता भी धात्विक ताँबे के समकक्ष होती है। इसकी संरचना घनीय होती है, जिसमें ReO₆ अष्टफलक अपने कोनों से जुड़े रहते हैं और रीनियम का एक शेष d इलेक्ट्रॉन विस्थानीकृत होकर पूरे ठोस में स्वतंत्र रूप से गति करता है; यही चालकता का कारण है। ताप घटाने पर इसकी चालकता बढ़ती है, जो धातुओं का ही लक्षण है। इसे प्रायः ‘धात्विक ऑक्साइड’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताया जाता है।
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Q2. निम्नलिखित कौन-सा लैन्थेनॉयड MO ऑक्साइडों में +4 ऑक्सीकरण अवस्था नहीं दर्शाता है ?
Right Answer: Yb
Explanation:
लैंथेनॉयडों की सर्वाधिक स्थायी एवं सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था धन तीन है, किन्तु कुछ तत्व धन दो अथवा धन चार अवस्थाएँ भी दिखाते हैं। जो तत्व धन चार अवस्था दर्शाते हैं वे हैं सीरियम, प्रेजियोडिमियम, नियोडिमियम, टर्बियम तथा डिस्प्रोसियम, क्योंकि इनमें ऐसा करने पर विन्यास रिक्त अथवा अर्धपूरित 4f के निकट पहुँच जाता है। इटरबियम इस सूची में नहीं आता; उसका 4f उपकोश लगभग पूर्ण होता है, इसलिए वह धन दो अवस्था दर्शाता है, जिसमें 4f पूर्णतः भर जाता है और विशेष स्थायित्व मिलता है।
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Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा धातु आयन रंगीन नहीं है ?
Right Answer: Sc³⁺
Explanation:
संक्रमण धातु आयनों का रंग मुख्यतः d-d संक्रमण के कारण होता है, जिसमें दृश्य प्रकाश का कुछ भाग अवशोषित होकर इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा वाले t2g कक्षक से उच्च ऊर्जा वाले eg कक्षक में उत्तेजित हो जाता है और शेष प्रकाश हमें रंग के रूप में दिखाई देता है। ऐसा तभी सम्भव है जब d उपकोश आंशिक रूप से भरा हो। स्कैंडियम धन तीन आयन का विन्यास d⁰ है, अर्थात् उसमें कोई d इलेक्ट्रॉन ही नहीं है, इसलिए d-d संक्रमण असम्भव है और वह रंगहीन रहता है। इसके विपरीत V³⁺, Ti³⁺ तथा Cu²⁺ में d इलेक्ट्रॉन उपस्थित होने से वे रंगीन होते हैं।
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Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थायी +4 ऑक्सीकरण अवस्था बनाता है ?
Right Answer: Ce
Explanation:
लैंथेनॉयडों में स्थायी धन चार ऑक्सीकरण अवस्था केवल सीरियम प्रदर्शित करता है। इसका कारण यह है कि सीरियम का विन्यास 4f¹ 5d¹ 6s² है, अतः चार इलेक्ट्रॉन निकल जाने पर उसे स्थायी अक्रिय गैस जैसा रिक्त 4f विन्यास प्राप्त हो जाता है। इसी से सीरियम चार आयन जलीय विलयन में भी विद्यमान रह पाता है और सेरिक अमोनियम सल्फेट तथा सेरिक अमोनियम नाइट्रेट जैसे यौगिक आयतनी विश्लेषण में प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। इसके विपरीत लैंथेनम, यूरोपियम तथा गैडोलिनियम की स्थायी अवस्था धन तीन ही रहती है।
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Q5. जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है त्रिधनात्मक लैंथेनॉन आयन Ln 3+ की आयनिक त्रिज्या :
Right Answer: घटती है
Explanation:
लैंथेनॉयड शृंखला में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ धन तीन आयनों की त्रिज्या क्रमशः घटती जाती है और इस परिघटना को लैंथेनॉयड संकुचन कहा जाता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक पग पर जुड़ने वाला इलेक्ट्रॉन भीतरी 4f उपकोश में जाता है, जिसकी आकृति विसरित होती है और जो परिरक्षण अत्यन्त दुर्बल रूप से करता है। इसके विपरीत नाभिकीय आवेश एक-एक इकाई निरन्तर बढ़ता जाता है, अतः प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़कर बाह्य इलेक्ट्रॉनों को भीतर की ओर खींच लेता है। इसी संकुचन के कारण द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण शृंखला के तत्वों के आकार लगभग समान हो जाते हैं।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन निम्नतम सहसंयोजी है ?
Right Answer: VCl₂
Explanation:
फजान के नियमों के अनुसार धनायन का आवेश जितना अधिक तथा आकार जितना छोटा होगा, उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी और यौगिक में सहसंयोजी लक्षण उतना ही बढ़ जाएगा। वैनेडियम के इन क्लोराइडों में ऑक्सीकरण अवस्था क्रमशः धन दो, धन तीन, धन चार तथा VOCl₃ में धन पाँच है। सबसे कम ऑक्सीकरण अवस्था वाला VCl₂ है, अतः उसका धनायन सबसे बड़ा एवं सबसे कम ध्रुवणकारी है और वही सर्वाधिक आयनिक अर्थात् न्यूनतम सहसंयोजी होगा। यही कारण है कि VCl₂ ठोस एवं ऊँचे गलनांक वाला है, जबकि VCl₄ तथा VOCl₃ वाष्पशील द्रव हैं।
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