Chemistry: 60 MCQs with Answers
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0%Q41. CH₃–CH₂–CH₂–CH₂–OH पर क्रमशः Al₂O₃/350°C, फिर Br₂, फिर ऐल्कोहॉलीय KOH की क्रिया से A, B तथा C प्राप्त होते हैं। यौगिक ‘C’ का IUPAC नाम है :
Right Answer: 1 -ब्यूटाइन
ब्यूटेन-1-ऑल को ऐलुमिना उत्प्रेरक पर 350 डिग्री सेल्सियस पर गरम करने से निर्जलीकरण होता है और यौगिक A अर्थात् ब्यूट-1-ईन बनता है। इस ऐल्कीन में ब्रोमीन का योग होने पर यौगिक B अर्थात् 1,2-डाइब्रोमोब्यूटेन प्राप्त होता है, जो एक विसिनल डाइहैलाइड है। अन्त में इस डाइहैलाइड को ऐल्कोहॉलीय पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर दो अणु हाइड्रोजन ब्रोमाइड क्रमशः निकल जाते हैं और त्रि आबंध बन जाता है। इस प्रकार यौगिक C ब्यूट-1-आइन है। यह ऐल्कीन से ऐल्काइन बनाने की मानक विधि है।
Q42. निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा इस तथ्य की व्याख्या करती है कि o- नाइट्रोफिनॉल, p- नाइट्रोफिनॉल की तुलना में अधिक वाष्पशील है ?
Right Answer: हाइड्रोजन बंध
ऑर्थो-नाइट्रोफिनॉल पैरा-नाइट्रोफिनॉल की तुलना में अधिक वाष्पशील होता है और इसका कारण हाइड्रोजन आबंधन की प्रकृति का अन्तर है। ऑर्थो यौगिक में नाइट्रो तथा हाइड्रॉक्सिल समूह इतने पास होते हैं कि उनके बीच अणु के भीतर ही अन्तराअणुक नहीं बल्कि अन्तःअणुक हाइड्रोजन आबंध बन जाता है, जिसे चिलेशन कहते हैं। इससे अणु आपस में जुड़ नहीं पाते और उन्हें अलग करने के लिए कम ऊर्जा चाहिए। इसके विपरीत पैरा यौगिक में दोनों समूह दूर होने से अणुओं के बीच प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबंध बनते हैं, जिससे उसका क्वथनांक ऊँचा तथा वाष्पशीलता कम हो जाती है।
Q43. निम्नलिखित में प्रथम आयनन एन्थैल्पी का सही क्रम है :
Right Answer: Al < Mg < Si < S < P
तीसरे आवर्त में प्रथम आयनन एंथैल्पी सामान्यतः बाएँ से दाएँ बढ़ती है, किन्तु दो स्थानों पर अनियमितता आती है। मैग्नीशियम का 3s उपकोश पूर्ण भरा होने से वह ऐलुमिनियम से अधिक स्थायी है, अतः ऐलुमिनियम की आयनन एंथैल्पी मैग्नीशियम से कम रहती है। इसी प्रकार फॉस्फोरस का 3p उपकोश अर्धपूरित होने से विशेष स्थायी है, जबकि सल्फर में एक कक्षक में इलेक्ट्रॉन युग्मन के कारण प्रतिकर्षण बढ़ जाता है; इसलिए सल्फर की आयनन एंथैल्पी फॉस्फोरस से कम होती है। अतः सही क्रम ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, सल्फर तथा फॉस्फोरस है।
Q44. निम्नलिखित में से किन स्पीशीज़ के आकार और आबंध कोटि समान हैं ?
Right Answer: O₃, NO₂⁻
ओजोन तथा नाइट्राइट आयन दोनों में केन्द्रीय परमाणु sp² संकरित होता है और उस पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म रहता है, अतः दोनों की आकृति कोणीय अर्थात् मुड़ी हुई होती है और आबंध कोण लगभग 117 से 120 डिग्री के बीच रहता है। दोनों में अनुनाद के कारण दोनों आबंध समतुल्य हो जाते हैं और प्रत्येक की आबंध कोटि डेढ़ होती है, क्योंकि दो सिग्मा आबंधों पर एक पाई आबंध विस्थानीकृत रहता है। इसके विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड रेखीय है और उसकी आबंध कोटि दो है, तथा एजाइड आयन भी रेखीय है।
Q45. निम्नलिखित में से कौन-सा लिगन्ड संक्रमण धातु में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ला सकता है ?
Right Answer: F⁻
किसी संक्रमण धातु में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था लाने की क्षमता फ्लोराइड आयन में सर्वाधिक होती है। इसका कारण यह है कि फ्लोरीन सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है, उसका आकार अत्यन्त छोटा है और उसका ऋण आवेश उच्च घनत्व में केन्द्रित रहता है, जिससे वह धातु के चारों ओर अधिक संख्या में व्यवस्थित हो सकता है। साथ ही वह इतना कठोर तथा अध्रुवणीय है कि आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होता, अर्थात् धातु को अपचयित नहीं करता। इसी कारण कोबाल्ट चार तथा मैंगनीज चार जैसी असामान्य उच्च अवस्थाएँ फ्लोराइडों में ही मिलती हैं। ऑक्साइड आयन भी यही कार्य करता है।
Q46. प्रबल लिगन्ड क्षेत्र वाले अष्टफलकीय संकुल में d⁶ विन्यास की CFSE है :
Right Answer: −2.4 Δ₀
प्रबल लिगन्ड क्षेत्र में क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा युग्मन ऊर्जा से अधिक होती है, अतः इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा वाले तीनों t2g कक्षकों को पूर्ण रूप से भरते हैं और तभी eg में जाते हैं। d⁶ विन्यास में सभी छह इलेक्ट्रॉन तीनों t2g कक्षकों में युग्मित होकर समा जाते हैं और eg कक्षक पूर्णतः रिक्त रहते हैं; यह निम्न चक्रण अवस्था है, जिसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन न होने से संकुल प्रतिचुम्बकीय हो जाता है। प्रत्येक t2g इलेक्ट्रॉन ऋण 0.4 Δ₀ का योगदान देता है, अतः कुल क्रिस्टल क्षेत्र स्थायीकरण ऊर्जा ऋण 2.4 Δ₀ होती है।
Q47. एक तत्व जिसका परमाणु क्रमांक 87 है, आवर्त सारिणी के किस ब्लॉक से संबंधित है ?
Right Answer: s - ब्लॉक
परमाणु क्रमांक 87 वाला तत्व फ्रैंसियम है, जो आवर्त सारणी के s-ब्लॉक में आता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास रेडॉन के अक्रिय गैस संरचना के बाद 7s¹ है, अर्थात् उसका अन्तिम इलेक्ट्रॉन s उपकोश में प्रवेश करता है, और यही s-ब्लॉक की परिभाषा है। यह प्रथम वर्ग अर्थात् क्षार धातु परिवार का सबसे भारी सदस्य है, अत्यन्त रेडियोसक्रिय एवं अस्थायी है तथा प्रकृति में केवल सूक्ष्म मात्रा में पाया जाता है। इसकी खोज मार्गरीट पेरी ने 1939 में की थी और यह ज्ञात तत्वों में सर्वाधिक विद्युतधनात्मक माना जाता है।
Q48. निम्नलिखित में से किस एल्कोहॉल की वाष्प गरम ताँबे के उत्प्रेरक पर से गुजारने पर ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन नहीं देती ?
Right Answer: (CH₃)₃COH
जब एल्कोहॉल की वाष्प लगभग 573 केल्विन पर गरम ताँबे के ऊपर से गुजारी जाती है तो विहाइड्रोजनीकरण होता है। प्राथमिक एल्कोहॉल ऐल्डिहाइड तथा द्वितीयक एल्कोहॉल कीटोन देते हैं, क्योंकि उनमें कार्बिनॉल कार्बन पर हाइड्रोजन उपलब्ध रहता है, जिसे हटाकर कार्बोनिल समूह बन जाता है। तृतीयक एल्कोहॉल में कार्बिनॉल कार्बन पर कोई हाइड्रोजन नहीं होता, अतः वहाँ कार्बोनिल बन ही नहीं सकता। ऐसी दशा में तृतीयक ब्यूटिल एल्कोहॉल निर्जलीकृत होकर ऐल्कीन अर्थात् आइसोब्यूटिलीन दे देता है। यही अभिक्रिया एल्कोहॉलों के वर्गीकरण की कसौटी बनती है।
Q49. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थायी +4 ऑक्सीकरण अवस्था बनाता है ?
Right Answer: Ce
लैंथेनॉयडों में स्थायी धन चार ऑक्सीकरण अवस्था केवल सीरियम प्रदर्शित करता है। इसका कारण यह है कि सीरियम का विन्यास 4f¹ 5d¹ 6s² है, अतः चार इलेक्ट्रॉन निकल जाने पर उसे स्थायी अक्रिय गैस जैसा रिक्त 4f विन्यास प्राप्त हो जाता है। इसी से सीरियम चार आयन जलीय विलयन में भी विद्यमान रह पाता है और सेरिक अमोनियम सल्फेट तथा सेरिक अमोनियम नाइट्रेट जैसे यौगिक आयतनी विश्लेषण में प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। इसके विपरीत लैंथेनम, यूरोपियम तथा गैडोलिनियम की स्थायी अवस्था धन तीन ही रहती है।
Q50. जब ब्यूट-2-आइन को तप्त नलिका से गुजारा जाता है, तब बनने वाले यौगिक का IUPAC नाम है :
Right Answer: हेक्सामेथिल बेन्जीन
जब ब्यूट-2-आइन को लाल तप्त लोहे की नली में से प्रवाहित किया जाता है तो उसके तीन अणु आपस में जुड़कर चक्रीय त्रयीकरण द्वारा एक बेन्जीन वलय बना लेते हैं। प्रत्येक ब्यूट-2-आइन अणु में त्रि आबंध के दोनों ओर एक-एक मेथिल समूह होता है, अतः तीन अणुओं से बनने वाली वलय पर कुल छह मेथिल समूह जुड़ जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त उत्पाद हेक्सामेथिल बेन्जीन होता है। इसी विधि से ऐसीटिलीन से बेन्जीन तथा प्रोपाइन से 1,3,5-ट्राइमेथिल बेन्जीन अर्थात् मेसीटिलीन प्राप्त होता है। यह एरोमैटिक यौगिकों के संश्लेषण की एक क्लासिकल विधि है।