Chemistry: 60 MCQs with Answers

Chemistry MCQ Questions
Chemistry

Your Progress

0%
0%
60
Total
0
Attempted
60
Remaining
Chemistry MCQs on physical, organic and inorganic chemistry। रसायन विज्ञान विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Q31. एथीन (C₂H₄) को ऐसीटैल्डिहाइड (CH₃CHO) में बदलने वाले वाकर प्रक्रम में कौन-सा उत्प्रेरक प्रयुक्त होता है ?

Right Answer: PdCl₂

वाकर प्रक्रम में एथीन का ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकरण कर ऐसीटैल्डिहाइड बनाया जाता है और इसका मुख्य उत्प्रेरक पैलेडियम डाइक्लोराइड है, जिसे कॉपर डाइक्लोराइड के साथ जलीय माध्यम में प्रयुक्त किया जाता है। अभिक्रिया में पैलेडियम द्वि से शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में अपचयित हो जाता है, जिसे कॉपर द्वि आयन पुनः ऑक्सीकृत कर देता है और स्वयं कॉपर एक में बदलकर वायुमंडलीय ऑक्सीजन से पुनः ऑक्सीकृत हो जाता है। इस प्रकार दोनों धातुएँ चक्रीय रूप से पुनर्जनित होती रहती हैं और यह प्रक्रम औद्योगिक रूप से अत्यन्त किफायती बन जाता है।

Was this helpful?

Q32. VSEPR सिद्धांत के अनुसार I₃⁻ आयन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?

Right Answer: केन्द्रीय I परमाणु में चार इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं।

त्रिआयोडाइड आयन तब बनता है जब आयोडीन को पोटैशियम आयोडाइड के जलीय विलयन में घोला जाता है; इसी कारण आयोडीन जल में अल्प विलेय होते हुए भी KI विलयन में सरलता से घुल जाती है। इसकी संरचना BrICl⁻ जैसे अन्य त्रिपरमाणुक अन्तराहैलोजन आयनों के समान रेखीय होती है और आबंध कोण 180 डिग्री रहता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि केन्द्रीय आयोडीन परमाणु के चारों ओर कुल पाँच इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं — दो आबंधी तथा तीन एकाकी — जिससे संकरण sp³d होता है और ज्यामिति त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी में से रेखीय आकृति निकलती है।

Was this helpful?

Q33. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक डाइएथिल ईथर का समावयवी नहीं है ?

Right Answer: 2-ब्यूटेनोन

डाइएथिल ईथर का अणुसूत्र C₄H₁₀O है, अतः उसका समावयवी होने के लिए किसी यौगिक का अणुसूत्र ठीक यही होना चाहिए। ब्यूटेन-1-ऑल तथा 2-मेथिल प्रोपेन-2-ऑल दोनों एल्कोहॉल हैं, जिनका अणुसूत्र C₄H₁₀O है, अतः वे इसके क्रियात्मक समूह समावयवी हैं। n-प्रोपिल मेथिल ईथर भी C₄H₁₀O है, अतः वह श्रृंखला समावयवी है। इसके विपरीत 2-ब्यूटेनोन एक कीटोन है, जिसका अणुसूत्र C₄H₈O है; उसमें दो हाइड्रोजन कम हैं क्योंकि उसमें कार्बोनिल का द्वि आबंध है। अतः वही समावयवी नहीं है। समान अणुसूत्र किन्तु भिन्न क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों को क्रियात्मक समूह समावयवी कहते हैं।

Was this helpful?

Q34. निम्नलिखित में से किस जलीय विलयन का हिमांक न्यूनतम होगा ?

Right Answer: 0.1 m BaCl₂

हिमांक में अवनमन एक अनुसंधापक गुणधर्म है और उसका मान विलयन में उपस्थित कणों की कुल संख्या पर निर्भर करता है, जिसे वान्ट हॉफ गुणक से व्यक्त किया जाता है। सुक्रोज तथा ग्लूकोज अवियोजी हैं, अतः उनका गुणक एक है। सोडियम क्लोराइड दो आयनों में वियोजित होता है, अतः गुणक दो है। बेरियम क्लोराइड एक बेरियम तथा दो क्लोराइड आयन देकर कुल तीन कण उत्पन्न करता है, अतः उसका गुणक तीन है और वही सर्वाधिक अवनमन उत्पन्न करेगा। इसलिए समान मोललता पर बेरियम क्लोराइड के विलयन का हिमांक सबसे कम होगा।

Was this helpful?

Q35. n- हैक्सेन को ऐल्युमिनियम के सहारे क्रोमिक ऑक्साइड के ऊपर से दाब पर गुजारने और 480-550° C गरम कर देने पर प्राप्त होने वाला यौगिक है :

Right Answer: बेन्जीन

जब n-हेक्सेन को दाब के अन्तर्गत ऐलुमिना पर आधारित क्रोमिक ऑक्साइड उत्प्रेरक के ऊपर से 480 से 550 डिग्री सेल्सियस पर प्रवाहित किया जाता है, तो वह चक्रीकरण एवं विहाइड्रोजनीकरण से गुजरकर बेन्जीन में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को एरोमैटीकरण अथवा हाइड्रोफॉर्मिंग कहा जाता है और पेट्रोलियम उद्योग में यह सुगन्धित हाइड्रोकार्बन प्राप्त करने की महत्त्वपूर्ण विधि है। इसी प्रकार n-हेप्टेन से टॉलुईन प्राप्त होता है। अभिक्रिया में शृंखला पहले वलय में बदलती है और फिर क्रमशः हाइड्रोजन निकलकर स्थायी एरोमैटिक निकाय बन जाता है।

Was this helpful?

Q36. ऑक्सीकरण क्षमता निम्नलिखित में से किस क्रम में घटती है ?

Right Answer: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂

हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती जाती है, अतः सही क्रम फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन है। फ्लोरीन सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है और उसका मानक अपचयन विभव सर्वाधिक धनात्मक है। इसका कारण तीन कारकों का संयुक्त प्रभाव है — फ्लोरीन की आबंध वियोजन एंथैल्पी कम है, उसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी अनुकूल है, और सबसे महत्त्वपूर्ण यह कि छोटे आकार के कारण फ्लोराइड आयन की जलयोजन एंथैल्पी अत्यधिक ऋणात्मक होती है। नीचे जाने पर आकार बढ़ने से जलयोजन एंथैल्पी घटती है और ऑक्सीकारक क्षमता कम हो जाती है।

Was this helpful?

Q37. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन E1 विलोपन अभिक्रिया के लिए गलत है ?

Right Answer: क्षार की सांद्रता बढ़ने से अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।

E1 विलोपन दो चरणों में होता है। पहले मन्द एवं दर-निर्धारक चरण में ऐल्किल हैलाइड से हैलाइड आयन निकलकर कार्बधनायन बनता है। दूसरे तीव्र चरण में क्षार धनावेशित कार्बन के निकटवर्ती कार्बन से एक प्रोटॉन हटा लेता है, जिससे द्वि आबंध बनकर विलोपन उत्पाद प्राप्त होता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि दर-निर्धारक चरण में क्षार भाग ही नहीं लेता; इसलिए E1 अभिक्रिया की दर केवल ऐल्किल हैलाइड की सान्द्रता पर निर्भर करती है और क्षार की सान्द्रता बढ़ाने से दर नहीं बढ़ती। यही इसे E2 से अलग करता है, जो द्विअणुक होती है।

Was this helpful?

Q38. CH₃–CH=CH–CH₂–CH₂–CN पर (1) DIBAL-H, (2) H₂O की क्रिया से प्राप्त उत्पाद है :

Right Answer: CH₃–CH=CH–CH₂–CH₂–CHO

डाइआइसोब्यूटिल ऐलुमिनियम हाइड्राइड, जिसे संक्षेप में डाइबाल-एच कहा जाता है, एक विकल्पात्मक अपचायक है। यह नाइट्राइल समूह पर एक बार ही हाइड्राइड जोड़कर मध्यवर्ती इमीन-ऐलुमिनियम संकुल बनाता है, जिसका जल-अपघटन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यदि लिथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड जैसा प्रबल अपचायक प्रयुक्त किया जाए तो अपचयन आगे बढ़कर प्राथमिक ऐमीन बन जाती है। डाइबाल-एच की एक अन्य विशेषता यह है कि वह कार्बन-कार्बन द्वि आबंध को अपरिवर्तित छोड़ देता है, इसलिए उत्पाद में द्वि आबंध यथावत बना रहता है।

Was this helpful?

Q39. निम्नलिखित में से कौन-से समूह +I प्रभाव प्रदर्शित करते हैं ?

(a) COO⁻
(b) OR
(c) OH
(d) O⁻
(e) SO₂R
(f) NH₃⁺

Right Answer: (a) व (d)

धन प्रेरणिक प्रभाव वे समूह दर्शाते हैं जो सिग्मा आबंध के अनुदिश इलेक्ट्रॉन घनत्व को शृंखला की ओर धकेलते हैं। ऐसा वे समूह करते हैं जिन पर ऋण आवेश हो अथवा जो अपेक्षाकृत इलेक्ट्रॉन-समृद्ध हों; कार्बोक्सिलेट आयन तथा एल्कॉक्साइड आयन इसी कारण प्रबल धन प्रेरणिक समूह हैं। इनके अतिरिक्त ऐल्किल समूह भी हल्का धन प्रभाव दिखाते हैं। इसके विपरीत हाइड्रॉक्सिल, एल्कॉक्सी, सल्फोनिल तथा अमोनियम समूह विद्युतऋणात्मक परमाणु अथवा धन आवेश के कारण इलेक्ट्रॉन अपनी ओर खींचते हैं, अतः वे ऋण प्रेरणिक प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।

Was this helpful?

Q40. निम्नलिखित में से कौन-सा धातु आयन रंगीन नहीं है ?

Right Answer: Sc³⁺

संक्रमण धातु आयनों का रंग मुख्यतः d-d संक्रमण के कारण होता है, जिसमें दृश्य प्रकाश का कुछ भाग अवशोषित होकर इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा वाले t2g कक्षक से उच्च ऊर्जा वाले eg कक्षक में उत्तेजित हो जाता है और शेष प्रकाश हमें रंग के रूप में दिखाई देता है। ऐसा तभी सम्भव है जब d उपकोश आंशिक रूप से भरा हो। स्कैंडियम धन तीन आयन का विन्यास d⁰ है, अर्थात् उसमें कोई d इलेक्ट्रॉन ही नहीं है, इसलिए d-d संक्रमण असम्भव है और वह रंगहीन रहता है। इसके विपरीत V³⁺, Ti³⁺ तथा Cu²⁺ में d इलेक्ट्रॉन उपस्थित होने से वे रंगीन होते हैं।

Was this helpful?
Was this quiz helpful?
Published: | Last Updated: | Total Questions: 60
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

Educational Content Creator

I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

Experience: 10+ years in Education and Competitive Exam Content Creator