Chemistry: 60 MCQs with Answers
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0%Q11. Eu का मूल अवस्था में बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है :
Right Answer: 4f⁷ 6s²
यूरोपियम का परमाणु क्रमांक 63 है और उसकी मूल अवस्था का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4f⁷ 6s² है। लैंथेनॉयड शृंखला में सामान्यतः इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में भरते जाते हैं और 5d प्रायः रिक्त रहता है। यूरोपियम में 4f उपकोश ठीक अर्धपूरित हो जाता है, जो विनिमय ऊर्जा के कारण विशेष स्थायित्व प्रदान करता है; इसी कारण यूरोपियम धन दो ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाता है, जो लैंथेनॉयडों में असामान्य है। इसके विपरीत गैडोलिनियम में विन्यास 4f⁷ 5d¹ 6s² होता है, क्योंकि वहाँ अर्धपूरित 4f बनाए रखते हुए अगला इलेक्ट्रॉन 5d में जाता है।
Q12. मॉलिश परीक्षण का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया जाता है ?
Right Answer: कार्बोहाइड्रेट
मॉलिश परीक्षण कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति ज्ञात करने का सामान्य परीक्षण है। इसमें परीक्षण-नमूने में अल्कोहॉलीय अल्फा-नैफ्थॉल मिलाकर परखनली की दीवार के सहारे धीरे-धीरे सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डाला जाता है। सान्द्र अम्ल कार्बोहाइड्रेट का निर्जलीकरण कर फर्फ्यूरल अथवा हाइड्रॉक्सीमिथाइल फर्फ्यूरल बनाता है, जो अल्फा-नैफ्थॉल के साथ संघनित होकर दोनों परतों के बीच बैंगनी वलय उत्पन्न करता है। यह परीक्षण सभी कार्बोहाइड्रेटों — मोनोसैकेराइड, डाइसैकेराइड तथा पॉलीसैकेराइड — के लिए धनात्मक आता है। प्रोटीन के लिए ब्यूरेट तथा वसा के लिए धब्बा परीक्षण प्रयुक्त होते हैं।
Q13. यदि किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक k = 3 × 10⁻⁴ L mol⁻¹ s⁻¹ है, तो इसकी कोटि है :
Right Answer: 2
किसी n कोटि की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई मोल प्रति लीटर की घात एक घटा n गुणा समय की घात ऋण एक होती है। यहाँ वेग स्थिरांक की इकाई लीटर प्रति मोल प्रति सेकंड दी गई है, जिसे मोल प्रति लीटर की घात ऋण एक गुणा सेकंड की घात ऋण एक लिखा जा सकता है। इसकी तुलना सामान्य सूत्र से करने पर एक घटा n बराबर ऋण एक प्राप्त होता है, जिससे n का मान दो निकलता है। अतः अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। शून्य कोटि में यह इकाई मोल प्रति लीटर प्रति सेकंड होती है।
Q14. Ca(OH)₂ का पूर्ण आयनीकरण मानते हुए उसके 0.001 M विलयन के pH की गणना कीजिए :
Right Answer: 11.3
कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड द्विअम्लीय क्षार है, अतः पूर्ण आयनन मानने पर उसका प्रत्येक सूत्र-मात्रक दो हाइड्रॉक्साइड आयन देता है। 0.001 मोलर विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों की सान्द्रता 2 × 10⁻³ मोलर हो जाती है। इसका ऋणात्मक लघुगणक लेने पर pOH बराबर 3 घटा 0.301 अर्थात् लगभग 2.7 प्राप्त होता है। चूँकि 25 डिग्री सेल्सियस पर pH तथा pOH का योग 14 होता है, अतः pH बराबर 14 घटा 2.7 अर्थात् 11.3 आता है। यह मान सात से काफी अधिक है, जो विलयन की प्रबल क्षारीय प्रकृति दर्शाता है।
Q15. एक मोल [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl द्वारा AgNO₃ के आधिक्य से अवक्षेपित AgCl के मोलों की संख्या है :
Right Answer: 1
किसी उपसहसंयोजन यौगिक में केवल आयनन क्षेत्र के आयन ही विलयन में मुक्त होते हैं; उपसहसंयोजन क्षेत्र अर्थात् वर्ग कोष्ठक के भीतर के लिगन्ड जल में आयनित नहीं होते। दिए गए यौगिक [Co(NH₃)₄Cl₂]Cl में चार अमोनिया तथा दो क्लोराइड सीधे कोबाल्ट से जुड़े हैं, अतः वे अवक्षेपित नहीं होंगे। कोष्ठक के बाहर केवल एक क्लोराइड आयन है, जो विलयन में मुक्त होकर सिल्वर नाइट्रेट के साथ क्रिया करता है। इसलिए एक मोल यौगिक से एक ही मोल सिल्वर क्लोराइड का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होगा। वर्नर ने इसी विधि से उपसहसंयोजन सिद्धांत सिद्ध किया था।
Q16. N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g), ΔH° = −92.4 kJ mol⁻¹ है। NH₃(g) की मानक विरचन एंथैल्पी क्या है ?
Right Answer: −46.2 kJ mol⁻¹
मानक विरचन एंथैल्पी वह एंथैल्पी परिवर्तन है जो अपने तत्वों की मानक अवस्थाओं से किसी यौगिक का ठीक एक मोल बनने पर होता है। दिए गए समीकरण में एक मोल नाइट्रोजन तथा तीन मोल हाइड्रोजन से अमोनिया के दो मोल बनते हैं और उसके लिए एंथैल्पी परिवर्तन ऋण 92.4 किलोजूल प्रति मोल है। चूँकि यह मान दो मोल अमोनिया के लिए है, अतः एक मोल के लिए उसे दो से भाग देना होगा, जिससे ऋण 46.2 किलोजूल प्रति मोल प्राप्त होता है। ऋणात्मक चिह्न बताता है कि अमोनिया का निर्माण ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है।
Q17. प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए 99.9% अभिक्रिया पूर्ण होने का समय 50% पूर्ण होने का कितना गुना है ?
Right Answer: 10 गुना
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए समय का सूत्र है — t बराबर 2.303 बटा k गुणा प्रारम्भिक सान्द्रता तथा शेष सान्द्रता के अनुपात का लघुगणक। 99.9 प्रतिशत पूर्ण होने पर शेष केवल 0.1 प्रतिशत बचता है, अतः अनुपात 1000 होगा और उसका लघुगणक तीन। इस प्रकार यह समय 2.303 गुणा 3 बटा k अर्थात् 6.909 बटा k आता है। दूसरी ओर 50 प्रतिशत पूर्ण होने का समय अर्थात् अर्धआयु 0.693 बटा k होती है। दोनों का अनुपात 6.909 को 0.693 से भाग देने पर ठीक 10 आता है, अतः यह समय अर्धआयु का दस गुना होता है।
Q18. शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है ?
Right Answer: [R] = [R]₀ e⁻ᵏᵗ
शून्य कोटि की अभिक्रिया में वेग अभिकारक की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता, अतः वेग समीकरण ऋण d[R] बटा dt बराबर k होता है। इसका समाकलित रूप [R] बराबर [R]₀ घटा kt है, जिससे [R] तथा समय के बीच का ग्राफ ऋणात्मक ढाल वाली सरल रेखा बनता है और उसकी ढाल k के बराबर होती है। इसी समीकरण से अर्धआयु [R]₀ बटा 2k प्राप्त होती है, जो प्रारम्भिक सान्द्रता के समानुपाती होती है। दूसरा विकल्प गलत है, क्योंकि चरघातांकी क्षय का समीकरण प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए होता है, शून्य कोटि के लिए नहीं।
Q19. मिथेन, ग्रेफाइट एवं डाइहाइड्रोजन की 298 K पर दहन एंथैल्पियाँ क्रमशः −890.3, −393.5 एवं −285.8 kJ mol⁻¹ हैं। CH₄ की विरचन एंथैल्पी क्या होगी ?
Right Answer: −74.8 kJ mol⁻¹
हेस के नियम के अनुसार मेथेन की विरचन एंथैल्पी निकालने के लिए ग्रेफाइट तथा हाइड्रोजन की दहन एंथैल्पियों का योग लेकर उसमें से मेथेन की दहन एंथैल्पी घटाई जाती है। यहाँ ग्रेफाइट के एक मोल की दहन एंथैल्पी ऋण 393.5 तथा दो मोल हाइड्रोजन की दो गुणा ऋण 285.8 अर्थात् ऋण 571.6 किलोजूल है, जिनका योग ऋण 965.1 किलोजूल होता है। इसमें से मेथेन की दहन एंथैल्पी ऋण 890.3 घटाने पर ऋण 965.1 जोड़ 890.3 अर्थात् ऋण 74.8 किलोजूल प्रति मोल प्राप्त होता है। यही मेथेन की मानक विरचन एंथैल्पी है।
Q20. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनें :
सूची-I
I. आदर्श विलयन
II. अनादर्श विलयन (धनात्मक विचलन)
III. अनादर्श विलयन (ऋणात्मक विचलन)
सूची-II
(a) ऐसीटोन और एथेनॉल
(b) ऐसीटोन और क्लोरोफॉर्म
(c) बेन्जीन और टॉलुईन
Right Answer: I-c, II-a, III-b
बेन्जीन तथा टॉलुईन का मिश्रण आदर्श विलयन है, क्योंकि दोनों की संरचना एवं अन्तराआण्विक बल लगभग समान हैं, अतः मिश्रण पर न ऊष्मा निकलती है और न आयतन बदलता है तथा राउल्ट का नियम पूर्णतः लागू होता है। ऐसीटोन एवं एथेनॉल का मिश्रण धनात्मक विचलन दिखाता है, क्योंकि ऐसीटोन एथेनॉल के हाइड्रोजन आबंधों को तोड़ देता है, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है। ऐसीटोन एवं क्लोरोफॉर्म का मिश्रण ऋणात्मक विचलन दिखाता है, क्योंकि इनके बीच नया हाइड्रोजन आबंध बनने से आकर्षण बढ़ जाता है और वाष्प दाब घट जाता है।