Music: 60 MCQs with Answers
Your Progress
0%Music MCQ Questions and Answers for HTET Exam
Music MCQ Questions and Answers on Hindustani classical music, ragas, talas, instruments and musicologists। संगीत विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, DSSSB TGT / PGT Music Teacher Exam, BPSC TRE (Music), Bihar STET (Paper I & II), MP TET Varg 2 & Varg 3 (Vocal/Instrumental/Dance), HTET (Music), HSSC TGT / PGT Music Recruitment, UP TGT / PGT Music UP Secondary Education Service Selection Board (UPSESSB), UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
Other Exam Papers:
- HTET PGT Computer Science 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Geography 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT History 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Biology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Chemistry 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Commerce 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Economics 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT English 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Home Science 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Mathematics 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Music 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Hindi 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Physics 2024 Solved Exam Paper
- HTET PGT Physical Education 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Psychology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Sanskrit 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Sociology 2024 Solved Exam Paper

- HTET PGT Fine Art 2024 Solved Exam Paper

- HTET PRT 2024 Solved Exam Paper

Tags:
Music MCQ, Music questions and answers, संगीत प्रश्न, Music quiz, HTET Music, Music Practice set for MP TET, Music Questions and Answers for BPSC TRE, Music MCQ Questions for Bihar STET Exam, Music Questions for KVS, Music MCQ Questions Practice Set for NVS,
Q51. लक्षण गीत द्वारा राग पहचानिए — ‘‘आरोहन में ‘रि ध’ न लगावत, सुर वादी मध्यम को बनावत, समय तृतीय पहर दिन कहावत।’’
Right Answer: भीमपलासी
Explanation:
लक्षण गीत के तीनों संकेत मिलकर राग भीमपलासी की ओर ले जाते हैं। इस राग के आरोह में ऋषभ तथा धैवत वर्जित रहते हैं, अतः आरोह औडव होकर ‘नि सा ग म प नि सां’ चलता है, जबकि अवरोह में सातों स्वर आने से वह सम्पूर्ण रहता है और जाति औडव-सम्पूर्ण कहलाती है। इसमें गंधार एवं निषाद कोमल तथा शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इसका वादी मध्यम एवं संवादी षड्ज है, और गाने का समय दिन का तीसरा प्रहर अर्थात् दोपहर बाद माना जाता है। यह काफी थाट का अत्यन्त लोकप्रिय एवं भावपूर्ण राग है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q52. मसीतखानी गतों की विशेषताओं में कौन - सा विकल्प असत्य है ?
Right Answer: मध्य तथा द्रुत लय प्रधान
Explanation:
मसीतखानी गत सितार वादन की विलम्बित गत है, जिसका विकास अठारहवीं शताब्दी में मसीत खाँ ने किया। इसकी रचना ध्रुपद अंग की गम्भीरता पर आधारित है, इसमें मींड एवं गमक के प्रचुर प्रयोग से श्रुतिमधुरता आती है, और यह दिल्ली बाज तथा पश्चिमी बाज दोनों से जुड़ी रही है। इसका मिजराब-बोल ‘दा रा दा रा, दिर दा रा’ के क्रम में चलता है और सम प्रायः बारहवीं मात्रा पर पड़ता है। चौथा कथन असत्य है, क्योंकि मसीतखानी गत विलम्बित लय की गत है; मध्य तथा द्रुत लय की प्रधानता तो रजाखानी गत की विशेषता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q53. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए :
ग्राम
A. षड्ज ग्राम
B. गंधार ग्राम
C. मध्यम ग्राम
श्रुति व्यवस्था
i. 4, 3, 2, 4, 3, 4, 2
ii. 3, 2, 4, 3, 4
iii. 4, 3, 2, 4, 4, 3, 2
Right Answer: A-(iii), B-(ii), C-(i)
Explanation:
प्राचीन संगीत में बाईस श्रुतियों को स्वरों में बाँटने के दो प्रमुख आधार थे। षड्ज ग्राम में श्रुति-विभाजन क्रमशः चार, तीन, दो, चार, चार, तीन तथा दो है, अर्थात् पंचम को चार श्रुतियाँ मिलती हैं। मध्यम ग्राम में पंचम एक श्रुति नीचे उतर आता है, जिससे विभाजन चार, तीन, दो, चार, तीन, चार तथा दो हो जाता है और धैवत को चार श्रुतियाँ मिल जाती हैं। यही दोनों ग्रामों का मूल भेद है। गंधार ग्राम का प्रयोग भरत के समय में ही लुप्तप्राय हो चुका था और उसे स्वर्गलोक का ग्राम कहा गया।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q54. गीत – ‘सारे जहाँ से अच्छा’ की धुन के रचयिता तथा राग - जोगेश्वरी, परमेश्वरी के रचयिता कौन हैं ?
Right Answer: रविशंकर
Explanation:
पण्डित रविशंकर ने मुहम्मद इकबाल रचित ‘सारे जहाँ से अच्छा’ को राग पीलू पर आधारित उस धुन में ढाला जो आज सर्वत्र गाई जाती है और जिसे भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने भी अपनाया। सितार के इस महान वादक ने जोगेश्वरी, परमेश्वरी, गंगेश्वरी, तिलक श्याम तथा नट भैरव सहित अनेक नए रागों की रचना की। उन्होंने पश्चिम में भारतीय संगीत को लोकप्रिय बनाया, यहूदी मेनुहिन एवं बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन के साथ कार्य किया, तथा ‘पथेर पांचाली’ और ‘गांधी’ जैसी फिल्मों को संगीत दिया। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q55. झपताल के समान मात्रा संख्या की कर्नाटक ताल का चयन कीजिए :
Right Answer: चतुरश्र जाति मठ
Explanation:
झपताल हिन्दुस्तानी संगीत का दस मात्राओं वाला ताल है, अतः उसके समान मात्रा संख्या वाला कर्नाटक ताल खोजने के लिए प्रत्येक विकल्प की गणना करनी होगी। मठ ताल की रचना लघु, द्रुत तथा लघु से होती है, इसलिए चतुरश्र जाति में उसकी मात्राएँ 4 जोड़ 2 जोड़ 4 अर्थात् ठीक दस होंगी। इसके विपरीत खण्ड जाति झप में 5 जोड़ 1 जोड़ 2 अर्थात् आठ, तिस्र जाति मठ में 3 जोड़ 2 जोड़ 3 अर्थात् आठ, तथा संकीर्ण जाति रूपक में 2 जोड़ 9 अर्थात् ग्यारह मात्राएँ होती हैं। अतः चतुरश्र जाति मठ ही उपयुक्त उत्तर है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q56. संगीत रत्नाकर में ‘महुवरि’, ‘काहला’ वाद्यों का उल्लेख किस वाद्य वर्ग में उल्लेखित है ?
Right Answer: सुषिर
Explanation:
संगीत रत्नाकर के वाद्याध्याय में वाद्यों को चार वर्गों में बाँटा गया है — तत, जिनमें तार से नाद उत्पन्न होता है; अवनद्ध, जिन पर चर्म मढ़ा रहता है; घन, जो ठोस पदार्थ के आघात से बजते हैं; तथा सुषिर, जिनमें वायु के प्रवाह से नाद उत्पन्न होता है। महुवरि तथा काहला दोनों इसी सुषिर वर्ग में गिनाए गए हैं। महुवरि वही वाद्य है जिसे आज पुंगी अथवा बीन कहा जाता है और जो सपेरों से जुड़ा है, तथा काहला एक लम्बी तुरही जैसी वाद्य थी जो राजकीय एवं युद्ध-सम्बन्धी अवसरों पर बजाई जाती थी।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q57. निम्नलिखित में कौन - सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
Right Answer: पपीहा का तार – मंद्र षड्ज
Explanation:
सितार में सामान्यतः सात मुख्य तार होते हैं, जिनका स्वर-मेल निश्चित रहता है। चिकारी के दोनों तार तार सप्तक के षड्ज तथा मध्य पंचम में मिलाए जाते हैं, बाज का मुख्य तार मन्द्र अथवा मध्य मध्यम में, और जोड़ी का तार मन्द्र षड्ज में। पपीहा अथवा पंचम के नाम से जाना जाने वाला तार मन्द्र पंचम में मिलाया जाता है, षड्ज में नहीं; इसीलिए उसे मन्द्र षड्ज से जोड़ना असुमेलित है। इनके अतिरिक्त खरज का तार अति मन्द्र षड्ज में मिलाया जाता है और लगभग ग्यारह से तेरह तरब के तार राग के स्वरों के अनुसार समायोजित किए जाते हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q58. गीत ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ के रचयिता कौन हैं ?
Right Answer: नरसी मेहता
Explanation:
‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ पन्द्रहवीं शताब्दी के गुजराती संत-कवि नरसी मेहता की रचना है। इस भजन में सच्चे वैष्णव के लक्षण गिनाए गए हैं — जो दूसरों की पीड़ा को समझे, दुखियों की सेवा कर अभिमान न करे, सबका आदर करे, वाणी, कर्म एवं मन से निर्मल रहे, पराई स्त्री को माता समान माने और लोभ एवं कपट से दूर रहे। महात्मा गाँधी को यह भजन अत्यन्त प्रिय था और उनके आश्रम की प्रार्थना सभाओं में यह नियमित रूप से गाया जाता था, जिससे यह स्वतंत्रता आन्दोलन की भावभूमि का अंग बन गया। इसे प्रायः राग खमाज अथवा मिश्र पीलू में गाया जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q59. निम्नलिखित में से किस राग युग्म में, आरोह के स्वर समान हैं ?
Right Answer: देश – वृंदावनी सारंग
Explanation:
देश तथा वृंदावनी सारंग दोनों काफी थाट के राग हैं और दोनों का आरोह पूर्णतः समान है — षड्ज, ऋषभ, मध्यम, पंचम, कोमल निषाद तथा तार षड्ज, अर्थात् दोनों में आरोह औडव है और गंधार एवं धैवत वर्जित रहते हैं। भेद अवरोह में स्पष्ट होता है, क्योंकि देश में अवरोह सम्पूर्ण होकर गंधार एवं धैवत सहित चलता है और वहाँ शुद्ध तथा कोमल दोनों निषाद प्रयुक्त होते हैं, जबकि वृंदावनी सारंग का अवरोह भी औडव ही रहता है। देश वर्षा ऋतु का तथा वृंदावनी सारंग ग्रीष्म एवं दोपहर का राग माना जाता है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q60. नाट्यशास्त्र में वर्णित तथ्यों में कौन - सा कथन सत्य है ?
Right Answer: 33 संचारी भाव वर्णित हैं।
Explanation:
भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में रस-निष्पत्ति का प्रसिद्ध सूत्र है कि विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारी भावों के संयोग से रस की उत्पत्ति होती है। इन्हीं व्यभिचारी भावों को संचारी भाव कहा जाता है, क्योंकि वे स्थायी भाव के साथ आते-जाते रहते हैं, और उनकी संख्या तैंतीस बताई गई है, जिनमें निर्वेद, ग्लानि, शंका, श्रम, मद, चिन्ता, हर्ष, गर्व, उग्रता तथा उन्माद जैसे भाव आते हैं। शेष कथन असत्य हैं — प्रावेशिकी एवं नैष्क्रामिकी ध्रुवाओं के प्रकार हैं, जातियाँ अठारह अवश्य हैं किन्तु वे भिन्न हैं, तथा नाट्यशास्त्र में अलंकार तैंतीस गिनाए गए हैं।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
0 Comments
Be the first to comment.
Leave a comment
Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.