Music: 60 MCQs with Answers

Music MCQ Questions
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Music MCQs on Hindustani classical music, ragas, talas, instruments and musicologists। संगीत विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Q31. सितार में 8 मुख्य तार तथा ‘बन्द जवारी’ का प्रयोग किस सितार वादक की विशेषता है ?

Right Answer: विलायत खाँ

उस्ताद विलायत खाँ ने सितार की परम्परागत संरचना में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए, जिससे जो वाद्य बना उसे विलायतखानी सितार कहा जाता है। उन्होंने खरज तथा पंचम के भारी तार हटाकर मुख्य तारों की संख्या घटाई एवं पुनर्व्यवस्थित की, तरब के तार बढ़ाए और जवारी को अपेक्षाकृत बन्द रखा, जिससे नाद की तीखी झनझनाहट कम होकर स्वर गोल, गहरा और मानव कण्ठ के निकट हो गया। यह परिवर्तन उनकी गायकी अंग की शैली के अनुकूल था, जिसमें लम्बी मींड तथा बोल-अंग की प्रधानता रहती है। इसके विपरीत रविशंकर की सितार खुली जवारी एवं अधिक तारों वाली रही।

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Q32. निम्नलिखित में से कौन - सा विकल्प सही सुमेलित है ? संगीतज्ञ उपनाम

Right Answer: न्यामत खाँ – सदारंग

न्यामत खाँ मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीले के दरबारी संगीतज्ञ थे और वे ‘सदारंग’ उपनाम से ख्याल की बन्दिशें रचते थे। उनके भतीजे अथवा पुत्र फिरोज खाँ ‘अदारंग’ के नाम से जाने गए। इन दोनों ने ख्याल गायकी को व्यवस्थित एवं समृद्ध रूप देकर उसे ध्रुपद के समकक्ष प्रतिष्ठा दिलाई, और आज गाई जाने वाली अनेक प्रसिद्ध बन्दिशों में उनका नाम मुद्रा के रूप में आता है। शेष विकल्प गलत हैं — ओंकारनाथ ठाकुर की उपाधि ‘प्रणव रंग’, बड़े गुलाम अली खाँ की ‘सबरंग’ तथा भातखण्डे की ‘चतुर’ रही।

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Q33. मध्यान्ह 12 बजे से रात्रि 12 बजे तक गाये जाने वाले राग क्या कहलाते हैं ?

Right Answer: उत्तर राग

राग-समय सिद्धांत में दिन-रात के चौबीस घण्टों को दो भागों में बाँटा जाता है। मध्यरात्रि बारह बजे से मध्याह्न बारह बजे तक गाए जाने वाले राग पूर्व राग कहलाते हैं, और मध्याह्न बारह बजे से मध्यरात्रि बारह बजे तक गाए जाने वाले राग उत्तर राग कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त सन्धि प्रकाश राग वे हैं जो सूर्योदय एवं सूर्यास्त के सन्धिकाल में गाए जाते हैं और जिनमें कोमल ऋषभ का प्रयोग होता है, जैसे भैरव एवं मारवा। परमेल प्रवेशक राग वे हैं जो एक थाट के रागों से दूसरे थाट के रागों में प्रवेश कराते हैं।

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Q34. ‘कजरी’ लोकगीत से संबंधित प्रमुख स्थान कौन - सा है ?

Right Answer: मिर्जापुर

कजरी उत्तर प्रदेश तथा बिहार के पूर्वी क्षेत्र का प्रसिद्ध वर्षा-ऋतु लोकगीत है और उसका सर्वप्रमुख केन्द्र मिर्जापुर माना जाता है, इसीलिए ‘मिर्जापुरी कजरी’ की अपनी विशिष्ट पहचान है। इसे मुख्यतः श्रावण मास में, विशेषकर कजरी तीज पर, स्त्रियाँ समूह में गाती हैं और इसके भाव विरह, प्रकृति-वर्णन तथा सावन की मस्ती से जुड़े रहते हैं। बनारस तथा गाजीपुर की कजरी भी प्रसिद्ध है, और उपशास्त्रीय मंचों पर इसे ठुमरी अंग में भी प्रस्तुत किया जाता है। चैती, झूला तथा बिरहा इसी परम्परा के अन्य ऋतु-गीत हैं।

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Q35. हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत की ‘मेल व्यवस्था’ में, कौन - सा विकल्प समान रूप से लागू है ?

Right Answer: षड्ज, पंचम तथा शुद्ध या तीव्र मध्यम स्वर की अनिवार्यता है।

हिन्दुस्तानी थाट पद्धति तथा कर्नाटक मेलकर्ता पद्धति में अनेक भेद हैं, किन्तु एक आधारभूत बात दोनों में समान रूप से लागू होती है। दोनों में षड्ज तथा पंचम अचल स्वर माने जाते हैं, अर्थात् उनमें कोई विकृति नहीं होती, और मध्यम का शुद्ध अथवा तीव्र रूप में उपस्थित रहना अनिवार्य है। इस प्रकार प्रत्येक मेल में सात स्वर पूर्ण रूप से रहते हैं। शेष विकल्प गलत हैं, क्योंकि हिन्दुस्तानी में दस थाट तथा कर्नाटक में बहत्तर मेलकर्ता हैं, विकृत स्वरों की संख्या भिन्न है, और संवादी की अनिवार्यता मेल का नहीं, राग का लक्षण है।

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Q36. नीचे दिए गये विकल्पों में से विषमपदी ताल का चयन कीजिए :

Right Answer: झपताल

ताल को विभागों की समानता के आधार पर समपदी तथा विषमपदी वर्गों में बाँटा जाता है। जिस ताल के सभी विभाग बराबर मात्राओं के हों, वह समपदी कहलाता है — त्रिताल में चार-चार, कहरवा में चार-चार तथा दादरा में तीन-तीन मात्राओं के विभाग होते हैं, अतः ये तीनों समपदी हैं। झपताल दस मात्राओं का है और उसके चार विभाग क्रमशः दो, तीन, दो तथा तीन मात्राओं के होते हैं, अर्थात् विभाग असमान हैं; इसीलिए वह विषमपदी ताल कहलाता है। इसका ठेका ‘धी ना, धी धी ना, ती ना, धी धी ना’ है और सम पर ‘धी’ आता है।

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Q37. मध्यम ग्रामिक मूर्च्छना का सही समूह चयन कीजिए :

Right Answer: शुद्धमध्या, मार्गी, पौरवी

प्राचीन संगीत में प्रत्येक ग्राम की सात-सात मूर्च्छनाएँ मानी गई हैं, जो उस ग्राम के भिन्न-भिन्न स्वरों से आरम्भ होकर बनती हैं। मध्यम ग्राम की सात मूर्च्छनाएँ हैं — सौवीरी, हरिणाश्वा, कलोपनता, शुद्धमध्या, मार्गी, पौरवी तथा हृष्यका। इनमें से शुद्धमध्या, मार्गी एवं पौरवी का समूह ही पूर्णतः इसी ग्राम का है। इसके विपरीत उत्तरमन्द्रा, रजनी, उत्तरायता, शुद्धषड्जा, मत्सरीकृता, अश्वक्रान्ता तथा अभिरुद्गता षड्ज ग्राम की मूर्च्छनाएँ हैं, अतः जिन विकल्पों में इन नामों का मिश्रण है वे गलत हैं। मूर्च्छना को आधुनिक थाट-पद्धति का पूर्वरूप माना जाता है।

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Q38. देबू चौधरी द्वारा स्थापित संस्था का चयन कीजिए :

Right Answer: मुश्ताक अली खाँ सेन्टर फॉर कल्चर

पण्डित देबू चौधरी सेनिया घराने के प्रसिद्ध सितार वादक तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्होंने अपने गुरु उस्ताद मुश्ताक अली खाँ की स्मृति में ‘मुश्ताक अली खाँ सेन्टर फॉर कल्चर’ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षण एवं प्रसार के साथ सेनिया परम्परा को जीवित रखना था। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे तथा अनुरंजनी सहित कई नए राग रचे। उन्हें पद्मश्री तथा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनके पुत्र प्रतीक चौधरी भी प्रतिष्ठित सितार वादक रहे।

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Q39. भरत द्वारा प्रयुक्त श्रुति तथा स्वर स्थापना की विधि कौन - सी है ?

Right Answer: सारणा

भरत ने नाट्यशास्त्र में श्रुति एवं स्वर के स्थान निर्धारित करने के लिए दो वीणाओं का प्रयोग कर जो प्रयोग किया, उसे सारणा चतुष्टयी कहा जाता है। इसमें ध्रुवा तथा चला नामक दो समान वीणाएँ षड्ज ग्राम में मिलाई जाती हैं; फिर चला वीणा के स्वरों को क्रमशः एक-एक श्रुति नीचे उतारा जाता है और चार बार ऐसा करने पर उसके स्वर पुनः ध्रुवा वीणा के स्वरों से मिल जाते हैं। इसी से यह सिद्ध हुआ कि सप्तक में बाईस श्रुतियाँ हैं और स्वरों में क्रमशः चार, तीन, दो, चार, चार, तीन तथा दो श्रुतियाँ बँटी हैं।

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Q40. निम्नलिखित ग्रन्थों का सही रचनाकाल क्रम दर्शाने वाला विकल्प चुनिए :

(i) संगीत मकरंद
(ii) बृहद्देशी
(iii) संगीत पारिजात
(iv) श्रीमल्लक्ष्यसंगीतम्

Right Answer: (ii) (i) (iii) (iv)

इन चारों ग्रन्थों का सही कालक्रम इस प्रकार है। मतंग रचित ‘बृहद्देशी’ लगभग आठवीं शताब्दी की कृति है और इसी में सर्वप्रथम ‘राग’ शब्द की परिभाषा दी गई। नारद रचित ‘संगीत मकरंद’ लगभग ग्यारहवीं शताब्दी का है, जिसमें रागों का पुल्लिंग-स्त्रीलिंग वर्गीकरण तथा राग-समय सिद्धांत मिलता है। अहोबल रचित ‘संगीत पारिजात’ सत्रहवीं शताब्दी की रचना है, जिसमें स्वरों का स्थान वीणा की तार-लम्बाई से निर्धारित किया गया। पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे कृत ‘श्रीमल्लक्ष्यसंगीतम्’ बीसवीं शताब्दी की आधुनिक कृति है।

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Published: | Last Updated: | Total Questions: 60
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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