Music: 60 MCQs with Answers

Music MCQ Questions and Answers
Music

Your Progress

0%
0%
60
Total
0
Attempted
60
Remaining

Music MCQ Questions and Answers for HTET Exam

Music MCQ Questions and Answers on Hindustani classical music, ragas, talas, instruments and musicologists। संगीत विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, DSSSB TGT / PGT Music Teacher Exam, BPSC TRE (Music), Bihar STET (Paper I & II), MP TET Varg 2 & Varg 3 (Vocal/Instrumental/Dance), HTET (Music), HSSC TGT / PGT Music Recruitment, UP TGT / PGT Music UP Secondary Education Service Selection Board (UPSESSB), UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Other Exam Papers:

Tags: 

Music MCQ, Music questions and answers, संगीत प्रश्न, Music quiz, HTET Music, Music Practice set for MP TET, Music Questions and Answers for BPSC TRE, Music MCQ Questions for Bihar STET Exam, Music Questions for KVS, Music MCQ Questions Practice Set for NVS, 

Q21. मध्यकालीन भारतीय संगीत के प्रसिद्ध संगीतकारों का चयन कीजिए :

(i) रामामात्य
(ii) मतंग
(iii) स्वामी हरिदास
(iv) आचार्य बृहस्पति

Right Answer: (i), (iii)


Explanation:

रामामात्य सोलहवीं शताब्दी के विजयनगर दरबार से सम्बद्ध विद्वान थे, जिन्होंने 1550 में ‘स्वरमेलकलानिधि’ की रचना कर मेल पद्धति को व्यवस्थित रूप दिया। स्वामी हरिदास भी सोलहवीं शताब्दी के महान संत-संगीतज्ञ थे, जिन्हें तानसेन तथा बैजू बावरा का गुरु माना जाता है और जिन्होंने हवेली संगीत परम्परा को समृद्ध किया। ये दोनों मध्यकाल के हैं। इसके विपरीत मतंग प्राचीन काल के आचार्य थे, जिन्होंने ‘बृहद्देशी’ लिखकर सर्वप्रथम राग को परिभाषित किया, तथा आचार्य बृहस्पति बीसवीं शताब्दी के आधुनिक संगीत-विद्वान रहे।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q22. ‘त्रिपुष्कर’ वाद्य को स्वर में मिलाने की विधि क्या कहलाती है ?

Right Answer: मार्जना


Explanation:

प्राचीन अवनद्ध वाद्यों को वांछित स्वर में मिलाने की प्रक्रिया मार्जना कहलाती थी। इसमें चावल के आटे, जौ तथा जल से बना विशेष लेप वाद्य के चर्ममुख पर लगाया जाता था, जिससे उसकी तनाव-स्थिति बदलकर अभीष्ट स्वर उत्पन्न होता था और नाद में गूँज एवं मधुरता आ जाती थी। नाट्यशास्त्र तथा संगीत रत्नाकर दोनों में त्रिपुष्कर के सन्दर्भ में इस विधि का विस्तृत वर्णन मिलता है। यही परम्परा आगे चलकर पखावज पर गीली आटे की लोई तथा तबले पर स्थायी स्याही लगाने के रूप में विकसित हुई। सारणा तत वाद्यों से सम्बन्धित प्रक्रिया है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q23. कथन (A) : तार को कंपित करने के तरीके में बदलाव से स्वर का गुण बदल जाता है। कथन (B) : तार को छेड़ने के स्थान को बदलने से स्वर का गुण भी बदल जाता है। सही विकल्प चुनिए :

Right Answer: (A) तथा (B) दोनों सत्य हैं।


Explanation:

दोनों कथन सत्य हैं और दोनों ध्वनि विज्ञान के एक ही सिद्धांत से निकलते हैं। किसी तार में मूल स्वर के साथ अनेक अधिस्वरक भी उत्पन्न होते हैं, और स्वर का गुण अर्थात् नाद-सौन्दर्य इन अधिस्वरकों की सापेक्ष तीव्रता से निर्धारित होता है। तार को मिजराब से छेड़ा जाए, गज से घिसा जाए अथवा उँगली से खींचा जाए — प्रत्येक विधि में अधिस्वरकों का अनुपात भिन्न रहता है। इसी प्रकार तार को घुड़च के पास छेड़ने पर उच्च अधिस्वरक प्रबल होकर नाद तीखा हो जाता है, जबकि मध्य में छेड़ने पर वह कोमल एवं गोल लगता है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q24. निम्नलिखित में कौन - सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?

Right Answer: अजराड़ा – राम सहाय


Explanation:

तबले के छह प्रमुख घराने माने जाते हैं। दिल्ली घराने की स्थापना उस्ताद सिद्धार खाँ ने की, लखनऊ घराना मोदू खाँ तथा बख्शू खाँ से जुड़ा है, और फर्रुखाबाद घराने के प्रवर्तक हाजी विलायत अली खाँ थे। चौथा युग्म गलत है, क्योंकि राम सहाय बनारस घराने के संस्थापक थे, अजराड़ा के नहीं। अजराड़ा घराने की स्थापना दिल्ली घराने से निकले कल्लू खाँ तथा मीरू खाँ ने की थी और वह अपनी विशिष्ट लयकारी, आड़-कुआड़ तथा बायें के मधुर प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। छठा घराना पंजाब का है, जो पखावज अंग से प्रभावित रहा।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q25. तंत्री वाद्यों में तार पर आघात हेतु प्रयुक्त सामग्री के सही शब्द समूह का चयन कीजिए :

Right Answer: नखी, कोण, जवा, गज, मिजराब


Explanation:

तंत्री अर्थात् तत वाद्यों में तार पर आघात करने अथवा उसे कम्पित करने के लिए विभिन्न साधन प्रयुक्त होते हैं। नखी वह नाखून जैसी युक्ति है जो उँगली में पहनी जाती है, कोण अथवा प्लेक्ट्रम से तार को छेड़ा जाता है, जवा वीणा वादन में प्रयुक्त तार का छल्ला है, गज सारंगी एवं वायलिन जैसे वितत वाद्यों पर घिसा जाता है, और मिजराब सितार तथा सरोद वादन में तर्जनी में पहना जाने वाला तार का बना उपकरण है। शेष विकल्पों में दिए गए शब्द वाद्य के भागों, अवनद्ध वाद्यों की सामग्री अथवा प्राचीन तालवाद्य-प्रक्रियाओं से सम्बन्धित हैं।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q26. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए (संगीतज्ञ – सृजित राग) :

संगीतज्ञ
A. रविशंकर
B. देबू चौधरी
C. ओंकार नाथ ठाकुर
D. तानसेन

सृजित राग
i. तिलक श्याम
ii. अनुरंजनी
iii. प्रणवरंजनी
iv. दरबारी कानड़ा

Right Answer: A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)


Explanation:

पण्डित रविशंकर ने अनेक नए रागों की रचना की, जिनमें तिलक श्याम, नट भैरव, परमेश्वरी, जोगेश्वरी तथा गंगेश्वरी प्रमुख हैं। सितार वादक एवं विद्वान पण्डित देबू चौधरी ने भी कई राग गढ़े, जिनमें अनुरंजनी उल्लेखनीय है। पण्डित ओंकारनाथ ठाकुर, जो गन्धर्व महाविद्यालय एवं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से जुड़े रहे, प्रणवरंजनी के सृजनकर्ता माने जाते हैं। दरबारी कानड़ा की रचना अकबर के नवरत्न मियाँ तानसेन ने की और वह दरबार में रात्रि के अन्तिम प्रहर में गाया जाने वाला गम्भीर एवं भव्य राग है।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q27. ‘रेला’ के समानार्थी प्रचलित शब्दों का चयन कीजिए :

(i) परन
(ii) खल
(iii) पडाल
(iv) तिहाई

Right Answer: (ii), (iii)


Explanation:

रेला तबले की वह रचना है जिसमें दो या तीन बोलों को अत्यन्त द्रुत गति में निरन्तर दोहराकर एक अविच्छिन्न प्रवाह उत्पन्न किया जाता है और अन्त में तिहाई से सम पर आया जाता है। इसी प्रकार की तीव्र प्रवाहमयी रचनाओं के लिए परम्परा में खल तथा पडाल शब्द भी प्रयुक्त होते रहे हैं, अतः वे इसके समानार्थी माने जाते हैं। इसके विपरीत परन पखावज अंग की गम्भीर एवं वजनदार रचना है, तथा तिहाई किसी बोल-समूह की तीन बार आवृत्ति है जो सम पर आकर समाप्त होती है; ये दोनों रेला के पर्याय नहीं हैं।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q28. निम्नलिखित में से किस संगीतज्ञ ने ‘ए० आर० कुरैशी’ नाम से फिल्मों में संगीत दिया ?

Right Answer: अल्लारक्खा खाँ


Explanation:

उस्ताद अल्लारक्खा खाँ ने हिन्दी फिल्मों में ‘ए० आर० कुरैशी’ के नाम से संगीत दिया, क्योंकि उनका पूरा नाम अल्लारक्खा कुरैशी था। उन्होंने ‘सबक’, ‘बेवफा’, ‘खानदान’ तथा ‘मां-बाप’ जैसी फिल्मों में संगीत निर्देशन किया। पंजाब घराने से सम्बद्ध यह महान तबला वादक मुख्यतः पण्डित रविशंकर के साथ अपनी अद्वितीय संगत तथा जुगलबन्दी के लिए विश्वविख्यात हुआ और उसी के माध्यम से तबले को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान मिली। उन्हें पद्मश्री तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिले, और उस्ताद जाकिर हुसैन उनके पुत्र एवं शिष्य हैं।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q29. सारंगी का निचला हिस्सा जो खाल से मढ़ा रहता है, कहलाता है :

Right Answer: मगज


Explanation:

सारंगी एक ही लकड़ी के टुकड़े से तराशा गया वितत वाद्य है, जिसे गज से बजाया जाता है और जिसे मानव कण्ठ के सर्वाधिक निकट माना जाता है। इसके शरीर के तीन भाग होते हैं, और सबसे निचला भाग खोखली गुहा के रूप में होता है जिस पर बकरी की महीन खाल मढ़ी रहती है; इसी पर हाथी दाँत अथवा हड्डी की घुड़च टिकी होती है, जो तारों का कम्पन खाल तक पहुँचाकर नाद को गुँजा देती है। ऊपर की ओर लगभग पैंतीस से चालीस तरब के तार लगे रहते हैं, जो सहानुभूति कम्पन से वाद्य को गूँज देते हैं।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Q30. कुदऊ सिंह को अयोध्या नरेश द्वारा प्रदत्त उपाधि :

Right Answer: सदाकुंवर


Explanation:

कुदऊ सिंह उन्नीसवीं शताब्दी के महान पखावज वादक थे, जिनका जन्म बुन्देलखण्ड के बाँदा क्षेत्र में हुआ। वे नाना पानसे तथा दक्षिणी परम्परा से भिन्न अपनी विशिष्ट शैली के लिए प्रसिद्ध हुए और उनकी वादन-शक्ति एवं गमक के लिए उन्हें अनेक दरबारों में सम्मान मिला। अयोध्या नरेश ने उनकी असाधारण कला से प्रभावित होकर उन्हें ‘सदाकुंवर’ की उपाधि प्रदान की। उन्होंने अनेक शिष्य तैयार किए और उनकी परम्परा नाना साहेब पानसे तथा कुदऊ सिंह घराने के रूप में आगे बढ़ी। पखावज की परनों में उनकी रचनाएँ आज भी बजाई जाती हैं।

Was this helpful?

No suggestions yet — be the first.

Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.

Was this quiz helpful?
Published: | Last Updated: | Total Questions: 60
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

Educational Content Creator

I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

Experience: 10+ years in Education and Competitive Exam Content Creator

0 Comments

Be the first to comment.

Leave a comment

Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.