Music - Tala and Laykari: 12 MCQs with Answers

Tala and Laykari - Music
Music - Tala and Laykari

Music- Tala and Laykari

ताल, मात्रा, विभाग, यति, लयकारी तथा हिन्दुस्तानी एवं कर्नाटक ताल पद्धति पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प (ताल – चिन्ह – मात्रा) सुमेलित नहीं है ?

Right Answer: मिश्र जाति झपताल – 100 – 13 मात्रा


Explanation:

कर्नाटक ताल पद्धति में प्रत्येक ताल लघु, द्रुत तथा अनुद्रुत के संयोजन से बनता है, जिनमें लघु की मात्रा जाति पर निर्भर करती है, द्रुत सदैव दो तथा अनुद्रुत सदैव एक मात्रा का होता है। तिस्र जाति ध्रुव में 3+2+3+3 अर्थात् 11, चतुरश्र जाति मठ में 4+2+4 अर्थात् 10 तथा खंड जाति अठ में 5+5+2+2 अर्थात् 14 मात्राएँ होती हैं। झप ताल लघु, अनुद्रुत तथा द्रुत से बनता है, अतः मिश्र जाति में उसकी मात्राएँ 7+1+2 अर्थात् 10 होंगी, 13 नहीं। यही युग्म असुमेलित है।

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Q2. आदि - विलंबित, बीच में – मध्य, अन्त में – दु्रतलय, किस यति को दर्शाता है ?

Right Answer: गोपुच्छा


Explanation:

यति से तात्पर्य किसी रचना में लय के क्रमिक विस्तार अथवा संकोच से है और भारतीय संगीत में इसके छह प्रकार माने गए हैं। जब रचना का आरम्भ विलम्बित लय से हो, मध्य में मध्य लय आए और अन्त में द्रुत लय हो जाए, तो वह गोपुच्छा यति कहलाती है, क्योंकि गाय की पूँछ भी ऊपर से मोटी और नीचे जाकर पतली होती जाती है। इसके विपरीत स्रोतोगता यति में क्रम उल्टा रहता है, अर्थात् द्रुत से विलम्बित की ओर; समा यति में लय आद्यन्त समान रहती है; और मृदंगा यति में दोनों सिरे संकीर्ण तथा मध्य विस्तृत रहता है।

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Q3. विभाग चिन्हों के आधार पर सूलताल का चयन करें :

Right Answer: × 0 2 3 0


Explanation:

सूलताल दस मात्राओं का ताल है, जो मुख्यतः ध्रुपद एवं धमार गायन तथा पखावज वादन में प्रयुक्त होता है। इसमें पाँच विभाग होते हैं और प्रत्येक विभाग दो-दो मात्राओं का रहता है। इसके विभाग चिन्ह क्रमशः सम, खाली, दूसरी ताली, तीसरी ताली तथा खाली हैं, अर्थात् × 0 2 3 0। इसका ठेका ‘धा धा दिन ता, किट धा, तिरकिट, धिन ना, किट तक, गदि घेन’ के रूप में बजाया जाता है। दस मात्रा होते हुए भी इसका विभाजन झपताल से पूर्णतः भिन्न है, क्योंकि झपताल में विभाग 2-3-2-3 के क्रम में आते हैं।

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Q4. एकताल के एक आवर्तन की ‘तिगुन’ तथा ‘आड़’ को किस ताल के एक पूर्ण आवर्तन में किया जा सकेगा ?

Right Answer: चौताल


Explanation:

एकताल बारह मात्राओं का ताल है और चौताल भी बारह मात्राओं का ही होता है, यद्यपि दोनों के विभाग एवं ठेके भिन्न हैं। किसी लयकारी को पूर्ण आवर्तन में समाप्त करने के लिए आवश्यक है कि उसकी मात्रा संख्या लक्ष्य ताल की मात्रा संख्या के अनुरूप हो। एकताल के एक आवर्तन की तिगुन तथा आड़ लयकारी बारह मात्राओं के विस्तार पर ही आधारित रहती है, अतः वह चौताल के एक पूर्ण आवर्तन में सम पर आकर समाप्त हो जाएगी। तिलवाड़ा सोलह, रूपक सात तथा झपताल दस मात्राओं का होने से वहाँ सम नहीं मिलेगा।

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Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म (मार्ग – कला की मात्रा) सही सुमेलित है ?

Right Answer: वार्तिक – 4 मात्रा


Explanation:

प्राचीन मार्गी ताल पद्धति में क्रिया की गति के आधार पर तीन मार्ग माने गए — चित्र, वार्तिक तथा दक्षिण। इनमें चित्र मार्ग सर्वाधिक द्रुत होता है और उसमें एक कला की मात्रा सबसे कम रहती है; वार्तिक उससे विलम्बित तथा दक्षिण सर्वाधिक विलम्बित होता है, जिसमें एक कला में सर्वाधिक मात्राएँ आती हैं। इस क्रम में कला की मात्रा क्रमशः दुगुनी होती जाती है, अतः चित्र में दो, वार्तिक में चार तथा दक्षिण में आठ मात्राएँ मानी जाती हैं। दिए गए विकल्पों में केवल वार्तिक तथा चार मात्रा का युग्म ही इस क्रम के अनुरूप है।

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Q6. लक्षणों द्वारा ताल पहचानिए — (i) समपदी ताल (ii) 4 ताली, 2 खाली

Right Answer: चौताल


Explanation:

चौताल बारह मात्राओं का ताल है, जो ध्रुपद एवं धमार गायन तथा पखावज वादन का प्रमुख ताल माना जाता है। इसमें छह विभाग होते हैं और प्रत्येक विभाग दो-दो मात्राओं का रहता है, इसलिए यह समपदी ताल कहलाता है, क्योंकि इसके सभी खण्ड बराबर हैं। इसके विभाग चिन्ह इस प्रकार हैं — सम, खाली, दूसरी ताली, खाली, तीसरी ताली तथा चौथी ताली, अर्थात् कुल चार ताली एवं दो खाली। इसका ठेका ‘धा धा, दिन ता, किट धा, दिन ता, तिट कत, गदि गन’ है। इसे चारताल भी कहा जाता है।

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Q7. कर्नाटक ताल को पहचानिए : "7 + 2 + 2"

Right Answer: मिश्र जाति त्रिपुट


Explanation:

कर्नाटक संगीत में त्रिपुट ताल की रचना एक लघु तथा दो द्रुत से होती है। द्रुत सदैव दो मात्राओं का होता है, जबकि लघु की मात्रा उसकी जाति पर निर्भर करती है — तिस्र में तीन, चतुरश्र में चार, खंड में पाँच, मिश्र में सात तथा संकीर्ण में नौ। अतः मिश्र जाति त्रिपुट ताल में मात्राएँ 7 जोड़ 2 जोड़ 2 अर्थात् ग्यारह होंगी, जिसका खण्ड-विन्यास ठीक 7+2+2 है। यही प्रश्न में दिया गया है। ध्यातव्य है कि आदि ताल वस्तुतः चतुरश्र जाति त्रिपुट ताल ही है, जिसमें 4+2+2 अर्थात् आठ मात्राएँ होती हैं।

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Q8. झपताल के एक आवर्तन की ‘पौने दोगुन’ लयकारी कितनी मात्रा के बाद प्रारंभ होगी ?

Right Answer: 4


Explanation:

पौने दोगुन लयकारी में मूल लय की तुलना में पौने दो अर्थात् सात-चौथाई गति से बोल बजाए जाते हैं, जिसका अर्थ है कि ताल की चार मात्राओं में रचना की सात मात्राएँ समा जाती हैं। झपताल दस मात्राओं का ताल है, अतः उसके एक आवर्तन की सामग्री पौने दोगुन में केवल दस गुणा चार बटा सात अर्थात् लगभग पौने छह मात्राओं में समाप्त हो जाएगी। सम पर आकर समाप्त होने के लिए उसे आवर्तन के अन्त से इतनी ही पहले आरम्भ करना पड़ेगा, अर्थात् लगभग चौथी मात्रा के बाद। इसीलिए यह लयकारी चार मात्रा के बाद प्रारम्भ की जाती है।

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Q9. ‘रेला’ के समानार्थी प्रचलित शब्दों का चयन कीजिए :

(i) परन
(ii) खल
(iii) पडाल
(iv) तिहाई

Right Answer: (ii), (iii)


Explanation:

रेला तबले की वह रचना है जिसमें दो या तीन बोलों को अत्यन्त द्रुत गति में निरन्तर दोहराकर एक अविच्छिन्न प्रवाह उत्पन्न किया जाता है और अन्त में तिहाई से सम पर आया जाता है। इसी प्रकार की तीव्र प्रवाहमयी रचनाओं के लिए परम्परा में खल तथा पडाल शब्द भी प्रयुक्त होते रहे हैं, अतः वे इसके समानार्थी माने जाते हैं। इसके विपरीत परन पखावज अंग की गम्भीर एवं वजनदार रचना है, तथा तिहाई किसी बोल-समूह की तीन बार आवृत्ति है जो सम पर आकर समाप्त होती है; ये दोनों रेला के पर्याय नहीं हैं।

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Q10. नीचे दिए गये विकल्पों में से विषमपदी ताल का चयन कीजिए :

Right Answer: झपताल


Explanation:

ताल को विभागों की समानता के आधार पर समपदी तथा विषमपदी वर्गों में बाँटा जाता है। जिस ताल के सभी विभाग बराबर मात्राओं के हों, वह समपदी कहलाता है — त्रिताल में चार-चार, कहरवा में चार-चार तथा दादरा में तीन-तीन मात्राओं के विभाग होते हैं, अतः ये तीनों समपदी हैं। झपताल दस मात्राओं का है और उसके चार विभाग क्रमशः दो, तीन, दो तथा तीन मात्राओं के होते हैं, अर्थात् विभाग असमान हैं; इसीलिए वह विषमपदी ताल कहलाता है। इसका ठेका ‘धी ना, धी धी ना, ती ना, धी धी ना’ है और सम पर ‘धी’ आता है।

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Published: 04 August 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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