Music - Raga and Swara System: 8 MCQs with Answers
Music- Raga and Swara System
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0%Q1. मध्यान्ह 12 बजे से रात्रि 12 बजे तक गाये जाने वाले राग क्या कहलाते हैं ?
Right Answer: उत्तर राग
Explanation:
राग-समय सिद्धांत में दिन-रात के चौबीस घण्टों को दो भागों में बाँटा जाता है। मध्यरात्रि बारह बजे से मध्याह्न बारह बजे तक गाए जाने वाले राग पूर्व राग कहलाते हैं, और मध्याह्न बारह बजे से मध्यरात्रि बारह बजे तक गाए जाने वाले राग उत्तर राग कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त सन्धि प्रकाश राग वे हैं जो सूर्योदय एवं सूर्यास्त के सन्धिकाल में गाए जाते हैं और जिनमें कोमल ऋषभ का प्रयोग होता है, जैसे भैरव एवं मारवा। परमेल प्रवेशक राग वे हैं जो एक थाट के रागों से दूसरे थाट के रागों में प्रवेश कराते हैं।
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Q2. हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत की ‘मेल व्यवस्था’ में, कौन - सा विकल्प समान रूप से लागू है ?
Right Answer: षड्ज, पंचम तथा शुद्ध या तीव्र मध्यम स्वर की अनिवार्यता है।
Explanation:
हिन्दुस्तानी थाट पद्धति तथा कर्नाटक मेलकर्ता पद्धति में अनेक भेद हैं, किन्तु एक आधारभूत बात दोनों में समान रूप से लागू होती है। दोनों में षड्ज तथा पंचम अचल स्वर माने जाते हैं, अर्थात् उनमें कोई विकृति नहीं होती, और मध्यम का शुद्ध अथवा तीव्र रूप में उपस्थित रहना अनिवार्य है। इस प्रकार प्रत्येक मेल में सात स्वर पूर्ण रूप से रहते हैं। शेष विकल्प गलत हैं, क्योंकि हिन्दुस्तानी में दस थाट तथा कर्नाटक में बहत्तर मेलकर्ता हैं, विकृत स्वरों की संख्या भिन्न है, और संवादी की अनिवार्यता मेल का नहीं, राग का लक्षण है।
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Q3. मध्यम ग्रामिक मूर्च्छना का सही समूह चयन कीजिए :
Right Answer: शुद्धमध्या, मार्गी, पौरवी
Explanation:
प्राचीन संगीत में प्रत्येक ग्राम की सात-सात मूर्च्छनाएँ मानी गई हैं, जो उस ग्राम के भिन्न-भिन्न स्वरों से आरम्भ होकर बनती हैं। मध्यम ग्राम की सात मूर्च्छनाएँ हैं — सौवीरी, हरिणाश्वा, कलोपनता, शुद्धमध्या, मार्गी, पौरवी तथा हृष्यका। इनमें से शुद्धमध्या, मार्गी एवं पौरवी का समूह ही पूर्णतः इसी ग्राम का है। इसके विपरीत उत्तरमन्द्रा, रजनी, उत्तरायता, शुद्धषड्जा, मत्सरीकृता, अश्वक्रान्ता तथा अभिरुद्गता षड्ज ग्राम की मूर्च्छनाएँ हैं, अतः जिन विकल्पों में इन नामों का मिश्रण है वे गलत हैं। मूर्च्छना को आधुनिक थाट-पद्धति का पूर्वरूप माना जाता है।
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Q4. निम्नलिखित में से ‘गंधार वादी’ रागों का चयन कीजिए :
(i) यमन
(ii) भूपाली
(iii) खमाज
(iv) बिहाग
Right Answer: (i), (ii), (iii), (iv) सभी
Explanation:
वादी वह स्वर है जो राग में सर्वाधिक प्रयुक्त होता है और जिसे राग का जीवस्वर अथवा राजा कहा जाता है। प्रश्न में दिए गए चारों रागों का वादी गंधार ही है। यमन में वादी गंधार तथा संवादी निषाद माना जाता है, भूपाली में वादी गंधार तथा संवादी धैवत, खमाज में वादी गंधार तथा संवादी निषाद, और बिहाग में भी वादी गंधार तथा संवादी निषाद है। यह भी ध्यातव्य है कि यमन, खमाज एवं बिहाग उत्तरांग प्रधान न होकर पूर्वांग वादी राग हैं, क्योंकि गंधार सप्तक के पूर्वार्ध में आता है।
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Q5. कथन (A) : दशविध राग वर्गीकरण में कुल 96 भाषा रागों का उल्लेख है। कथन (B) : ‘पूर्व प्रसिद्ध’ 11 तथा ‘अधुना प्रसिद्ध’ 9, कुल 20 भाषांग राग वर्णित हैं। सही विकल्प चुनिए :
Right Answer: (A) तथा (B) दोनों सत्य हैं।
Explanation:
दोनों कथन सत्य हैं। शार्ङ्गदेव ने संगीत रत्नाकर में रागों का दशविध वर्गीकरण किया, जिसमें ग्रामराग, उपराग, राग, भाषा, विभाषा, अन्तर्भाषा, रागांग, भाषांग, क्रियांग तथा उपांग सम्मिलित हैं। इनमें भाषा रागों की कुल संख्या छियानवे बताई गई है, जो ग्रामरागों से उत्पन्न देशी रागों का सबसे बड़ा वर्ग है। भाषांग रागों को दो भागों में रखा गया है — पूर्व प्रसिद्ध ग्यारह तथा अधुना प्रसिद्ध नौ, अर्थात् कुल बीस। यह वर्गीकरण मार्गी परम्परा से देशी परम्परा की ओर संक्रमण का महत्त्वपूर्ण प्रमाण है।
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Q6. लक्षण गीत द्वारा राग पहचानिए — ‘‘आरोहन में ‘रि ध’ न लगावत, सुर वादी मध्यम को बनावत, समय तृतीय पहर दिन कहावत।’’
Right Answer: भीमपलासी
Explanation:
लक्षण गीत के तीनों संकेत मिलकर राग भीमपलासी की ओर ले जाते हैं। इस राग के आरोह में ऋषभ तथा धैवत वर्जित रहते हैं, अतः आरोह औडव होकर ‘नि सा ग म प नि सां’ चलता है, जबकि अवरोह में सातों स्वर आने से वह सम्पूर्ण रहता है और जाति औडव-सम्पूर्ण कहलाती है। इसमें गंधार एवं निषाद कोमल तथा शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इसका वादी मध्यम एवं संवादी षड्ज है, और गाने का समय दिन का तीसरा प्रहर अर्थात् दोपहर बाद माना जाता है। यह काफी थाट का अत्यन्त लोकप्रिय एवं भावपूर्ण राग है।
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Q7. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए :
ग्राम
A. षड्ज ग्राम
B. गंधार ग्राम
C. मध्यम ग्राम
श्रुति व्यवस्था
i. 4, 3, 2, 4, 3, 4, 2
ii. 3, 2, 4, 3, 4
iii. 4, 3, 2, 4, 4, 3, 2
Right Answer: A-(iii), B-(ii), C-(i)
Explanation:
प्राचीन संगीत में बाईस श्रुतियों को स्वरों में बाँटने के दो प्रमुख आधार थे। षड्ज ग्राम में श्रुति-विभाजन क्रमशः चार, तीन, दो, चार, चार, तीन तथा दो है, अर्थात् पंचम को चार श्रुतियाँ मिलती हैं। मध्यम ग्राम में पंचम एक श्रुति नीचे उतर आता है, जिससे विभाजन चार, तीन, दो, चार, तीन, चार तथा दो हो जाता है और धैवत को चार श्रुतियाँ मिल जाती हैं। यही दोनों ग्रामों का मूल भेद है। गंधार ग्राम का प्रयोग भरत के समय में ही लुप्तप्राय हो चुका था और उसे स्वर्गलोक का ग्राम कहा गया।
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Q8. निम्नलिखित में से किस राग युग्म में, आरोह के स्वर समान हैं ?
Right Answer: देश – वृंदावनी सारंग
Explanation:
देश तथा वृंदावनी सारंग दोनों काफी थाट के राग हैं और दोनों का आरोह पूर्णतः समान है — षड्ज, ऋषभ, मध्यम, पंचम, कोमल निषाद तथा तार षड्ज, अर्थात् दोनों में आरोह औडव है और गंधार एवं धैवत वर्जित रहते हैं। भेद अवरोह में स्पष्ट होता है, क्योंकि देश में अवरोह सम्पूर्ण होकर गंधार एवं धैवत सहित चलता है और वहाँ शुद्ध तथा कोमल दोनों निषाद प्रयुक्त होते हैं, जबकि वृंदावनी सारंग का अवरोह भी औडव ही रहता है। देश वर्षा ऋतु का तथा वृंदावनी सारंग ग्रीष्म एवं दोपहर का राग माना जाता है।
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