Fine Art: 60 MCQs with Answers
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Fine Art MCQs on Indian and Western painting, sculpture, art history and art techniques. Get Fine Art multiple choice questions with detailed answers and explanations. India Study Institute brings Fine Art MCQ Questions and Answers for HTET Exam. ललित कला विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
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Q51. मुद्रण की उस तकनीक का नाम बताइए जिसमें स्टेंसिल का उपयोग किया जाता है :
Right Answer: सेरीग्राफी
Explanation:
सेरीग्राफी अर्थात् स्क्रीन प्रिंटिंग वह मुद्रण तकनीक है जिसमें स्टेंसिल का उपयोग किया जाता है। इसमें एक फ्रेम पर सिल्क अथवा संश्लेषित जाली कसी जाती है और जिन भागों को नहीं छापना होता उन्हें स्टेंसिल अथवा प्रकाश-संवेदी इमल्शन से बन्द कर दिया जाता है। फिर स्क्वीजी से स्याही को जाली के खुले भागों से नीचे रखे कागज अथवा कपड़े पर दबाया जाता है। प्रत्येक रंग के लिए अलग स्क्रीन बनती है। इसकी विशेषता यह है कि स्याही की परत मोटी एवं चटख रहती है और इसे कागज, कपड़े, काँच तथा धातु किसी भी सतह पर छापा जा सकता है।
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Q52. तैल रंगों को मोम के साथ मिश्रित कर लगाने की क्रिया को कहते हैं :
Right Answer: एनकास्टिक
Explanation:
एनकास्टिक वह प्राचीन चित्रण प्रविधि है जिसमें रंजक को गरम मोम, विशेषतः मधुमक्खी के मोम, के साथ मिलाकर लगाया जाता है और तत्पश्चात् ऊष्मा देकर सतह पर स्थिर किया जाता है। ‘एनकास्टिक’ यूनानी शब्द से बना है जिसका अर्थ है ‘आग में जलाना’। यह अत्यन्त टिकाऊ होती है और इसमें रंग सदियों तक चमकदार बने रहते हैं, जिसका प्रमाण मिस्र के फ़यूम व्यक्तिचित्र हैं। इससे मोटी परत तथा त्रिआयामी बनावट भी बनाई जा सकती है। इसके विपरीत इम्पैस्टो में रंग को मोटी परत में लगाया जाता है और बाटिक में मोम अवरोधक का कार्य करता है।
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Q53. ‘सभी रूपप्रद या दृश्य कलाओं में कुछ तत्व एक समान होते हैं।’ यह कथन किसका है ?
Right Answer: हर्बर्ट रीड
Explanation:
यह कथन अंग्रेज कला-चिन्तक हर्बर्ट रीड का है कि सभी रूपप्रद अथवा दृश्य कलाओं में कुछ तत्व एक समान होते हैं। उनका आशय यह है कि चित्रकला, मूर्तिकला तथा वास्तुकला भले ही माध्यम एवं तकनीक में भिन्न हों, किन्तु रेखा, रूप, आकार, रंग, बनावट, आयतन तथा रिक्त स्थान — ये मूल तत्व सभी में समान रूप से क्रियाशील रहते हैं, और एकता, संतुलन, लय, अनुपात एवं प्रभाविता जैसे संयोजन-सिद्धांत भी सब पर समान रूप से लागू होते हैं। इसी सार्वभौमिक व्याकरण के कारण कला-शिक्षा में इन तत्वों का अध्ययन सर्वप्रथम कराया जाता है।
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Q54. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) पैराफिन वैक्स
(b) पायस
(c) कार्विंग
(d) आला प्राइम
सूची-II
(i) मूर्ति
(ii) तैल चित्रण
(iii) टेम्परा
(iv) बाटिक
Right Answer: (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(i), (d)-(ii)
Explanation:
पैराफिन वैक्स बाटिक में प्रयुक्त होता है, जहाँ मोम को अवरोधक के रूप में कपड़े पर लगाकर शेष भाग रँगा जाता है और बाद में मोम हटा दिया जाता है, जिससे विशिष्ट दरारदार प्रभाव उभरता है। पायस अर्थात् इमल्शन टेम्परा का माध्यम है, जिसमें रंजक को अण्डे की जर्दी अथवा गोंद के साथ मिलाया जाता है। कार्विंग मूर्तिकला की अपकर्षी प्रक्रिया है, जिसमें पत्थर अथवा लकड़ी से अनावश्यक भाग हटाकर रूप निकाला जाता है। आला प्राइम तैल चित्रण की वह विधि है जिसमें पूरा चित्र गीले-पर-गीले रंग से एक ही बैठक में पूर्ण कर लिया जाता है।
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Q55. ऐक्रेलिक रंगों के शीघ्रता से सूखने को कम करने के लिए रंगों में कौन - सा पदार्थ मिलाया जाता है ?
Right Answer: मंदक (रिटार्डर्स)
Explanation:
ऐक्रेलिक रंग जल-आधारित बहुलक पायस पर आधारित होते हैं और जल के वाष्पित होते ही अत्यन्त शीघ्र सूख जाते हैं, जिससे रंगों को आपस में मिलाकर कोमल संक्रमण बनाना कठिन हो जाता है। इस समस्या के समाधान हेतु रंगों में मंदक अर्थात् रिटार्डर मिलाया जाता है, जो प्रायः ग्लिसरीन अथवा प्रोपिलीन ग्लाइकॉल आधारित होता है और वाष्पीकरण की गति घटाकर रंग को अधिक समय तक कार्ययोग्य बनाए रखता है। इससे कलाकार को मिश्रण, छायांकन तथा गीले-पर-गीले कार्य का पर्याप्त समय मिल जाता है। इसकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए, अन्यथा परत दुर्बल हो जाती है।
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Q56. ‘चित्रलक्षण’ का रचनाकाल माना जाता है :
Right Answer: 600 ई० पूर्व से 200 ई० पूर्व के मध्य
Explanation:
‘चित्रलक्षण’ भारतीय चित्रकला का प्राचीनतम उपलब्ध शास्त्रीय ग्रन्थ माना जाता है और इसका रचनाकाल सामान्यतः 600 ईसा पूर्व से 200 ईसा पूर्व के मध्य स्वीकार किया जाता है। मूल संस्कृत ग्रन्थ अब उपलब्ध नहीं है; उसका तिब्बती अनुवाद ‘तंजूर’ में सुरक्षित रहा, जिससे इसका ज्ञान हुआ। इसमें चित्रकला की उत्पत्ति की कथा, आकृतियों के लक्षण, अंग-प्रत्यंग के माप तथा अनुपात का विस्तृत विवेचन है। परम्परा इसे नग्नजित से जोड़ती है। आगे चलकर विष्णुधर्मोत्तर पुराण का चित्रसूत्र भारतीय चित्रकला का सर्वाधिक विस्तृत शास्त्र बना।
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Q57. अल्मोड़ा गढ़वाल की प्रसिद्ध लोक कला कौन - सी है ?
Right Answer: आपना
Explanation:
ऐपण उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा तथा गढ़वाल क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक कला है, जिसे कुमाऊँ में विशेष रूप से महत्त्व प्राप्त है। इसे गेरू से लीपी गई लाल पृष्ठभूमि पर चावल के सफेद घोल से अनामिका उँगली की सहायता से बनाया जाता है। यह देहरी, आँगन, पूजा-स्थल, मन्दिर तथा चौकियों पर बनाई जाती है और विवाह, नामकरण, जनेऊ एवं त्योहारों पर इसे मांगलिक माना जाता है। इसके प्रमुख रूपांकनों में लक्ष्मी के पद-चिह्न, स्वस्तिक, शंख, कमल, बेल-बूटे तथा ज्यामितीय बिन्दु-जाल आते हैं। बिहार की अरिपन तथा दक्षिण की कोलम इसी परम्परा की समरूप कलाएँ हैं।
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Q58. मूर्तिकला की उस प्रक्रिया को पहचानें जिसमें तरल पदार्थ को आमतौर पर एक सांचे में डाला जाता है :
Right Answer: कास्टिंग
Explanation:
कास्टिंग वह मूर्तिकला प्रक्रिया है जिसमें किसी तरल पदार्थ को साँचे में डालकर उसे ठोस होने दिया जाता है और इस प्रकार मूल मॉडल की प्रतिकृति प्राप्त की जाती है। इसमें पिघली धातु, प्लास्टर ऑफ पेरिस, कंक्रीट, फाइबरग्लास अथवा रेजिन का उपयोग किया जाता है। इसकी सर्वाधिक प्रसिद्ध विधि मधुच्छिष्ट अर्थात् लॉस्ट वैक्स प्रक्रिया है, जिसमें मोम का मॉडल बनाकर उस पर मिट्टी चढ़ाई जाती है, फिर तपाकर मोम बहा दिया जाता है और उस रिक्त स्थान में धातु भरी जाती है। यह संकलनात्मक प्रक्रिया है, जबकि कार्विंग अपकर्षी और मॉडलिंग योगात्मक है।
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Q59. कला रचना के उस सिद्धान्त का नाम बताइए जो लक्ष्य और उसके क्रमबद्धता को दर्शाता है :
Right Answer: प्रभाविता
Explanation:
प्रभाविता अर्थात् डॉमिनेंस वह संयोजन-सिद्धांत है जो चित्र के लक्ष्य तथा उसकी क्रमबद्धता को निर्धारित करता है। इसके अनुसार चित्र में एक प्रमुख केन्द्र होना चाहिए, जिस पर दर्शक की दृष्टि सबसे पहले जाकर ठहरे, और शेष तत्व उसके अधीन रहकर उसे सहारा दें। इसे आकार, रंग की तीव्रता, विरोध, स्थिति अथवा एकाकीपन के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। इससे प्रमुख, गौण एवं उपगौण का एक स्पष्ट क्रम बन जाता है और दृष्टि निर्धारित मार्ग पर चलती है। यदि सभी तत्व समान महत्त्व के हों तो चित्र भ्रमित एवं नीरस हो जाता है।
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Q60. संयोजन के सिद्धान्त में ‘प्रमाण/अनुपात’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
Right Answer: सम्बद्धता का सिद्धान्त
Explanation:
संयोजन के सिद्धांतों में ‘प्रमाण’ अथवा अनुपात को सम्बद्धता का सिद्धांत भी कहा जाता है, क्योंकि यह वस्तुतः चित्र के विभिन्न भागों के परस्पर सम्बन्ध तथा उनके सम्पूर्ण के साथ सम्बन्ध को नियंत्रित करता है। इसमें किसी एक अंग के आकार, माप एवं मात्रा की तुलना दूसरे अंग तथा समग्र रचना से की जाती है। भारतीय परम्परा में ताल-मान पद्धति तथा पाश्चात्य परम्परा में स्वर्ण अनुपात इसी सिद्धांत के मानक हैं। सही अनुपात रचना को स्वाभाविक एवं सुखद बनाता है, जबकि उसका जानबूझकर उल्लंघन नाटकीयता अथवा विकृति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
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