Fine Art: 60 MCQs with Answers

Fine Art MCQ Questions
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Fine Art MCQs on Indian and Western painting, sculpture, art history and art techniques। ललित कला विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Q31. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I
(a) ग्रेव्योर मुद्रण
(b) स्क्रीन मुद्रण
(c) अक्षर मुद्रण
(d) ऑफसेट मुद्रण

सूची-II
(i) इंग्रेविंग
(ii) इंटैग्लियो
(iii) प्लानोग्राफी
(iv) सेरीग्राफी

Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)

मुद्रण की प्रक्रियाएँ इस बात से वर्गीकृत होती हैं कि स्याही सतह के किस स्तर से आती है। ग्रेव्योर मुद्रण इंटैग्लियो वर्ग में आता है, जिसमें छवि सतह से नीचे खोदी जाती है और स्याही उन्हीं गड्ढों से कागज पर उतरती है। स्क्रीन मुद्रण सेरीग्राफी कहलाता है, जिसमें जाली पर बने स्टेंसिल के खुले भागों से स्याही दबाकर निकाली जाती है। अक्षर मुद्रण उभरी सतह से होता है, जिसका मूल इंग्रेविंग एवं रिलीफ परम्परा है। ऑफसेट मुद्रण प्लानोग्राफी अर्थात् समतल सतह से होता है और यह लिथोग्राफी के सिद्धांत पर आधारित है।

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Q32. कौन - सा रंग सबसे अधिक सामंजस्य पैदा करता है ?

Right Answer: हरा

रंग-मनोविज्ञान में हरे रंग को सर्वाधिक सामंजस्यपूर्ण एवं सन्तुलित माना जाता है। इसका कारण यह है कि यह दृश्य वर्णक्रम के ठीक मध्य में स्थित है, अतः इसे देखने में नेत्र के लेंस को न्यूनतम समंजन करना पड़ता है और आँख पर सबसे कम दबाव पड़ता है। यह ठण्डे तथा गरम रंगों के बीच का सेतु है, क्योंकि यह पीले एवं नीले के मिश्रण से बनता है। प्रकृति में सर्वाधिक व्याप्त होने के कारण यह मानसिक शान्ति, ताजगी, संतुलन तथा वृद्धि का बोध कराता है। इसीलिए विश्राम-कक्षों एवं चिकित्सा-स्थलों में इसका प्रयोग किया जाता है।

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Q33. ललित विस्तार में कलाओं की कितनी संख्या का उल्लेख है ?

Right Answer: 86

बौद्ध ग्रन्थ ‘ललितविस्तर’ में छियासी कलाओं का उल्लेख मिलता है। यह महायान परम्परा का प्रसिद्ध ग्रन्थ है, जिसमें बुद्ध के जन्म से लेकर प्रथम धर्मोपदेश तक के जीवन का वर्णन है, और इसी में उन विद्याओं एवं कलाओं की सूची दी गई है जिनमें राजकुमार सिद्धार्थ को शिक्षित किया गया। भारतीय परम्परा में कलाओं की संख्या के विषय में अलग-अलग मत मिलते हैं — वात्स्यायन के ‘कामसूत्र’ में चौंसठ कलाओं का उल्लेख है, ‘शुक्रनीति’ में भी चौंसठ, जबकि ‘प्रबन्धकोश’ में बहत्तर कलाएँ गिनाई गई हैं।

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Q34. बिहार की उस लोक कला को पहचानें जो कुटुंब कला के अन्तर्गत आती है :

Right Answer: अहृपन

अरिपन बिहार, विशेषतः मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक कला है और इसे कुटुंब कला अर्थात् परिवार से जुड़ी कला के अन्तर्गत रखा जाता है, क्योंकि यह घर की स्त्रियों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीखी एवं सिखाई जाती है। यह चावल के पिसे घोल से आँगन, देहरी तथा पूजा-स्थल पर उँगलियों से बनाई जाती है और विवाह, उपनयन, छठ तथा अन्य संस्कारों में मांगलिक अलंकरण का कार्य करती है। इसकी आकृतियाँ प्रायः ज्यामितीय एवं प्रतीकात्मक होती हैं — कमल, स्वस्तिक, सूर्य, चन्द्र तथा पद-चिह्न। उत्तराखण्ड की ऐपण तथा दक्षिण की कोलम इसी परम्परा के समरूप हैं।

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Q35. षडंग के किस अंग द्वारा आकृति की शारीरिक भाषा, स्वभाव, मनोदशा और व्यंग्य दर्शाया जाता है ?

Right Answer: भाव

यशोधर के ‘जयमंगला’ में उल्लिखित षडंग भारतीय चित्रकला के छह अंग हैं — रूपभेद, प्रमाण, भाव, लावण्य योजना, सादृश्य तथा वर्णिका भंग। इनमें ‘भाव’ वह अंग है जिसके द्वारा चित्रित आकृति की शारीरिक भाषा, स्वभाव, मनोदशा तथा भावाभिव्यक्ति दर्शाई जाती है; इसी से चित्र में प्राण आते हैं और दर्शक आकृति के आन्तरिक जगत से जुड़ पाता है। रूपभेद रूपों के भेद की समझ है, प्रमाण अनुपात एवं माप का ज्ञान है, लावण्य योजना सौन्दर्य एवं आकर्षण का संयोजन है, सादृश्य समानता है तथा वर्णिका भंग रंग एवं तूलिका का प्रयोग।

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Q36. कौन - सी कला रूपप्रद नहीं है ?

Right Answer: संगीत

कलाओं को दो वर्गों में बाँटा जाता है। रूपप्रद अथवा दृश्य कलाएँ वे हैं जिनकी अभिव्यक्ति मूर्त रूप में होती है और जिन्हें आँखों से देखा जा सकता है तथा जो स्थान घेरती हैं — चित्रकला, मूर्तिकला एवं वास्तुकला इसी वर्ग में आती हैं और इन्हें स्थानपरक कला भी कहते हैं। इसके विपरीत संगीत रूपप्रद कला नहीं है, क्योंकि वह श्रव्य है और उसका अस्तित्व स्थान में नहीं, बल्कि काल में है; उसे कालपरक कला कहा जाता है। काव्य एवं नृत्य भी इसी दूसरी श्रेणी से जुड़े हैं, यद्यपि नृत्य में दृश्य तत्व भी सम्मिलित रहता है।

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Q37. वह कौन - सी गुफा है जिसमें सम्पूर्ण मूर्तिकला विशेष रूप से शिव - पार्वती को समर्पित है ?

Right Answer: ऐलिफेन्टा

मुम्बई के निकट घारापुरी द्वीप पर स्थित ऐलिफेन्टा की गुफाओं की सम्पूर्ण मूर्तिकला विशेष रूप से शिव को समर्पित है और उनमें शिव-पार्वती से जुड़े प्रसंग प्रधान हैं। इनका निर्माण लगभग छठी से आठवीं शताब्दी के बीच हुआ। यहाँ की सबसे प्रसिद्ध प्रतिमा त्रिमूर्ति सदाशिव है, जो लगभग छह मीटर ऊँची है और शिव के तीन रूपों — सृजन, संरक्षण एवं संहार — को दर्शाती है। इसके अतिरिक्त अर्धनारीश्वर, गंगाधर, कल्याणसुन्दर अर्थात् शिव-पार्वती विवाह, रावणानुग्रह तथा नटराज के उत्कृष्ट उत्कीर्णन हैं। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है।

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Q38. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I
(a) पाबूजी की फड़
(b) चित्रकाथी
(c) कलमकारी
(d) फुलकारी

सूची-II
(i) महाराष्ट्र
(ii) पंजाब
(iii) राजस्थान
(iv) आन्ध्र प्रदेश

Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii)

पाबूजी की फड़ राजस्थान की परम्परा है, जिसमें लोकदेवता पाबूजी की गाथा एक लम्बे कपड़े पर चित्रित की जाती है और भोपा रातभर गाकर उसका वाचन करते हैं। चित्रकाथी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, विशेषतः पिंगुली गाँव की परम्परा है, जिसमें कागज के चित्रों की शृंखला दिखाकर रामायण एवं महाभारत की कथाएँ सुनाई जाती हैं। कलमकारी आन्ध्र प्रदेश की श्रीकालहस्ती एवं मछलीपट्टनम शैलियों में विकसित हुई, जिसमें बाँस की कलम तथा प्राकृतिक रंगों से कपड़े पर चित्र बनाए जाते हैं। फुलकारी पंजाब की कढ़ाई-कला है।

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Q39. ऑर्गेनिक और ऑटोमेटिक कलाओं का वर्गीकरण किस कला चिंतक ने किया ?

Right Answer: हर्बर्ट रीड

अंग्रेज कला-चिन्तक एवं समीक्षक हर्बर्ट रीड ने कलाओं का वर्गीकरण ऑर्गेनिक तथा ऑटोमेटिक वर्गों में किया। ऑर्गेनिक कला वह है जिसमें रूप प्रकृति के जैविक रूपों से प्रेरित होकर सजीव, प्रवाहमान एवं वृद्धिशील प्रतीत होता है, जबकि ऑटोमेटिक कला में सृजन-प्रक्रिया चेतन नियंत्रण से मुक्त होकर अवचेतन के स्वतःस्फूर्त प्रवाह से संचालित होती है, जैसा अतियथार्थवादी कलाकारों ने किया। रीड की प्रसिद्ध कृतियाँ ‘द मीनिंग ऑफ आर्ट’ तथा ‘एजुकेशन थ्रू आर्ट’ हैं, जिनमें उन्होंने कला-शिक्षा को समग्र शिक्षा का आधार बताया।

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Q40. यदि हल्के रंग को उसी रंग की गहरी पृष्ठभूमि पर लगाएं तो क्या परिणाम प्राप्त होगा ?

Right Answer: हल्का वर्ण अधिक हल्का तथा गहरा वर्ण अधिक गहरा

यह समकालिक विरोध अर्थात् सिमल्टेनियस कॉन्ट्रास्ट का नियम है, जिसे मिशेल शेवरल ने प्रतिपादित किया। जब किसी हल्के वर्ण को उसी रंग की गहरी पृष्ठभूमि पर रखा जाता है, तो नेत्र दोनों के बीच के अन्तर को बढ़ा-चढ़ाकर ग्रहण करता है; फलस्वरूप हल्का वर्ण और अधिक हल्का तथा गहरा वर्ण और अधिक गहरा दिखाई देने लगता है। यह विशुद्ध रूप से दृक्-मनोवैज्ञानिक प्रभाव है, रंग में कोई भौतिक परिवर्तन नहीं होता। चित्रकार इसी नियम का उपयोग करके बिना अतिरिक्त रंग लगाए गहराई, उभार तथा नाटकीयता उत्पन्न करते हैं।

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Published: | Last Updated: | Total Questions: 60
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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