Fine Art - Aesthetics and Principles of Art: 15 MCQs with Answers

Aesthetics and Principles of Art - Fine Art
Fine Art - Aesthetics and Principles of Art

Fine Art- Aesthetics and Principles of Art

कला दर्शन, षडंग, रंग सिद्धांत, संयोजन के सिद्धांत तथा कला चिंतकों के मतों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. अभिकथन (A) : चित्रकारी (ड्राइंग) सभी दृश्य कलाओं का एक बुनियादी घटक है। कारण (R) : क्योंकि इसके बिना रूप और छवि नहीं बनाई जा सकती है। सही विकल्प चुनिए :

Right Answer: (A) और (R) दोनों सही हैं।

अभिकथन तथा कारण दोनों सही हैं और कारण अभिकथन की उचित व्याख्या भी करता है। रेखांकन अर्थात् ड्राइंग समस्त दृश्य कलाओं का आधारभूत घटक है, क्योंकि चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य, ग्राफिक कला तथा अनुप्रयुक्त कला — सभी में पहले रेखा द्वारा रूप का ढाँचा निर्धारित किया जाता है। रेखा ही आकार की सीमा तय करती है, अनुपात स्थापित करती है और आयतन का आभास देती है। इसीलिए कला-शिक्षा में रेखांकन को प्रथम एवं अनिवार्य अभ्यास माना जाता है और उसे ‘कला का व्याकरण’ कहा जाता है।

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Q2. कौन - सा रंग सबसे अधिक सामंजस्य पैदा करता है ?

Right Answer: हरा

रंग-मनोविज्ञान में हरे रंग को सर्वाधिक सामंजस्यपूर्ण एवं सन्तुलित माना जाता है। इसका कारण यह है कि यह दृश्य वर्णक्रम के ठीक मध्य में स्थित है, अतः इसे देखने में नेत्र के लेंस को न्यूनतम समंजन करना पड़ता है और आँख पर सबसे कम दबाव पड़ता है। यह ठण्डे तथा गरम रंगों के बीच का सेतु है, क्योंकि यह पीले एवं नीले के मिश्रण से बनता है। प्रकृति में सर्वाधिक व्याप्त होने के कारण यह मानसिक शान्ति, ताजगी, संतुलन तथा वृद्धि का बोध कराता है। इसीलिए विश्राम-कक्षों एवं चिकित्सा-स्थलों में इसका प्रयोग किया जाता है।

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Q3. ललित विस्तार में कलाओं की कितनी संख्या का उल्लेख है ?

Right Answer: 86

बौद्ध ग्रन्थ ‘ललितविस्तर’ में छियासी कलाओं का उल्लेख मिलता है। यह महायान परम्परा का प्रसिद्ध ग्रन्थ है, जिसमें बुद्ध के जन्म से लेकर प्रथम धर्मोपदेश तक के जीवन का वर्णन है, और इसी में उन विद्याओं एवं कलाओं की सूची दी गई है जिनमें राजकुमार सिद्धार्थ को शिक्षित किया गया। भारतीय परम्परा में कलाओं की संख्या के विषय में अलग-अलग मत मिलते हैं — वात्स्यायन के ‘कामसूत्र’ में चौंसठ कलाओं का उल्लेख है, ‘शुक्रनीति’ में भी चौंसठ, जबकि ‘प्रबन्धकोश’ में बहत्तर कलाएँ गिनाई गई हैं।

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Q4. षडंग के किस अंग द्वारा आकृति की शारीरिक भाषा, स्वभाव, मनोदशा और व्यंग्य दर्शाया जाता है ?

Right Answer: भाव

यशोधर के ‘जयमंगला’ में उल्लिखित षडंग भारतीय चित्रकला के छह अंग हैं — रूपभेद, प्रमाण, भाव, लावण्य योजना, सादृश्य तथा वर्णिका भंग। इनमें ‘भाव’ वह अंग है जिसके द्वारा चित्रित आकृति की शारीरिक भाषा, स्वभाव, मनोदशा तथा भावाभिव्यक्ति दर्शाई जाती है; इसी से चित्र में प्राण आते हैं और दर्शक आकृति के आन्तरिक जगत से जुड़ पाता है। रूपभेद रूपों के भेद की समझ है, प्रमाण अनुपात एवं माप का ज्ञान है, लावण्य योजना सौन्दर्य एवं आकर्षण का संयोजन है, सादृश्य समानता है तथा वर्णिका भंग रंग एवं तूलिका का प्रयोग।

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Q5. कौन - सी कला रूपप्रद नहीं है ?

Right Answer: संगीत

कलाओं को दो वर्गों में बाँटा जाता है। रूपप्रद अथवा दृश्य कलाएँ वे हैं जिनकी अभिव्यक्ति मूर्त रूप में होती है और जिन्हें आँखों से देखा जा सकता है तथा जो स्थान घेरती हैं — चित्रकला, मूर्तिकला एवं वास्तुकला इसी वर्ग में आती हैं और इन्हें स्थानपरक कला भी कहते हैं। इसके विपरीत संगीत रूपप्रद कला नहीं है, क्योंकि वह श्रव्य है और उसका अस्तित्व स्थान में नहीं, बल्कि काल में है; उसे कालपरक कला कहा जाता है। काव्य एवं नृत्य भी इसी दूसरी श्रेणी से जुड़े हैं, यद्यपि नृत्य में दृश्य तत्व भी सम्मिलित रहता है।

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Q6. ऑर्गेनिक और ऑटोमेटिक कलाओं का वर्गीकरण किस कला चिंतक ने किया ?

Right Answer: हर्बर्ट रीड

अंग्रेज कला-चिन्तक एवं समीक्षक हर्बर्ट रीड ने कलाओं का वर्गीकरण ऑर्गेनिक तथा ऑटोमेटिक वर्गों में किया। ऑर्गेनिक कला वह है जिसमें रूप प्रकृति के जैविक रूपों से प्रेरित होकर सजीव, प्रवाहमान एवं वृद्धिशील प्रतीत होता है, जबकि ऑटोमेटिक कला में सृजन-प्रक्रिया चेतन नियंत्रण से मुक्त होकर अवचेतन के स्वतःस्फूर्त प्रवाह से संचालित होती है, जैसा अतियथार्थवादी कलाकारों ने किया। रीड की प्रसिद्ध कृतियाँ ‘द मीनिंग ऑफ आर्ट’ तथा ‘एजुकेशन थ्रू आर्ट’ हैं, जिनमें उन्होंने कला-शिक्षा को समग्र शिक्षा का आधार बताया।

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Q7. यदि हल्के रंग को उसी रंग की गहरी पृष्ठभूमि पर लगाएं तो क्या परिणाम प्राप्त होगा ?

Right Answer: हल्का वर्ण अधिक हल्का तथा गहरा वर्ण अधिक गहरा

यह समकालिक विरोध अर्थात् सिमल्टेनियस कॉन्ट्रास्ट का नियम है, जिसे मिशेल शेवरल ने प्रतिपादित किया। जब किसी हल्के वर्ण को उसी रंग की गहरी पृष्ठभूमि पर रखा जाता है, तो नेत्र दोनों के बीच के अन्तर को बढ़ा-चढ़ाकर ग्रहण करता है; फलस्वरूप हल्का वर्ण और अधिक हल्का तथा गहरा वर्ण और अधिक गहरा दिखाई देने लगता है। यह विशुद्ध रूप से दृक्-मनोवैज्ञानिक प्रभाव है, रंग में कोई भौतिक परिवर्तन नहीं होता। चित्रकार इसी नियम का उपयोग करके बिना अतिरिक्त रंग लगाए गहराई, उभार तथा नाटकीयता उत्पन्न करते हैं।

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Q8. कला रचना के किस सिद्धान्त के अनुसार चित्र में सभी तत्वों की समग्र समायोजन में पूर्ण साम्यावस्था हो ?

Right Answer: सन्तुलन

सन्तुलन कला रचना का वह सिद्धान्त है जिसके अनुसार चित्र में सभी तत्वों — आकार, रंग, बनावट, रेखा एवं रिक्त स्थान — का समग्र समायोजन इस प्रकार हो कि दृश्य भार चारों ओर बराबर बँटा प्रतीत हो और पूर्ण साम्यावस्था बनी रहे। सन्तुलन के दो मुख्य प्रकार होते हैं — सममित अथवा औपचारिक सन्तुलन, जिसमें केन्द्रीय अक्ष के दोनों ओर समान तत्व रखे जाते हैं और जो गम्भीरता एवं स्थिरता देता है; तथा असममित अथवा अनौपचारिक सन्तुलन, जिसमें भिन्न तत्वों को उनके दृश्य भार के अनुसार तौलकर रखा जाता है और जो अधिक गतिशील प्रभाव उत्पन्न करता है।

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Q9. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :

सूची-I
(a) जैनेन्द्र कुमार
(b) मैथिलीशरण गुप्त
(c) पं० भोला शंकर तिवारी
(d) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

सूची-II
(i) अनुभूति की अभिव्यक्ति कला है।
(ii) अभिव्यक्ति की शक्ति ही कला है।
(iii) कला में मनुष्य अपनी अभिव्यक्ति करता है।
(iv) एक ही अनुभूति को दूसरे तक पहुँचा देना ही कला है।

Right Answer: (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)

हिन्दी के इन मनीषियों ने कला की परिभाषा भिन्न-भिन्न दृष्टियों से दी। जैनेन्द्र कुमार के अनुसार कला में मनुष्य अपनी अभिव्यक्ति करता है, अर्थात् कला आत्माभिव्यक्ति का माध्यम है। मैथिलीशरण गुप्त अभिव्यक्ति की शक्ति को ही कला मानते हैं, जिसमें कौशल पर बल है। पं० भोला शंकर तिवारी की दृष्टि टॉल्सटॉय के निकट है, जिनके अनुसार एक ही अनुभूति को दूसरे तक पहुँचा देना कला है, अर्थात् सम्प्रेषण उसका सार है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के लिए कला अनुभूति की अभिव्यक्ति है और उनके सौन्दर्यशास्त्र में ‘अनुभूति’ केन्द्रीय पद है।

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Q10. मनोवैज्ञानिकों ने मुख्य कौन - से चार रंग माने हैं ?

Right Answer: लाल, पीला, नीला, हरा

मनोवैज्ञानिकों ने लाल, पीला, नीला तथा हरा — इन चार रंगों को मुख्य अथवा मनोवैज्ञानिक प्राथमिक रंग माना है। इसका आधार एवाल्ड हेरिंग का विरोधी प्रक्रिया सिद्धांत है, जिसके अनुसार दृष्टि-तंत्र रंगों को तीन विरोधी युग्मों में संसाधित करता है — लाल तथा हरा, नीला तथा पीला, और श्वेत तथा श्याम। यही कारण है कि हम लाल-हरा अथवा नीला-पीला जैसा कोई मिश्रित रंग कल्पना नहीं कर सकते, जबकि लाल-पीला अर्थात् नारंगी सरलता से देख लेते हैं। ये चार मनोवैज्ञानिक प्राथमिक रंग चित्रकला के भौतिक प्राथमिक रंगों से भिन्न हैं।

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Published: 04 August 2026 | Last Updated: 04 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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