Fine Art - Indian Art History and Sculpture: 14 MCQs with Answers
Fine Art- Indian Art History and Sculpture
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0%Q1. सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त मुहरों पर पशुओं की आकृतियाँ, सिंधु लिपि, पुरुष आकृतियाँ किस पत्थर से बनी हैं ?
Right Answer: स्टीटाइट (सेलखड़ी)
Explanation:
सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त अधिकांश मुहरें स्टीटाइट अर्थात् सेलखड़ी नामक मुलायम पत्थर से बनाई गई थीं। यह पत्थर इतना कोमल होता है कि उस पर बारीक उत्कीर्णन सरलता से हो जाता है, और तपाने पर वह कठोर एवं टिकाऊ हो जाता है। मुहरें प्रायः वर्गाकार होती थीं, जिन पर एक ओर पशु-आकृतियाँ — विशेषकर एकशृंगी, कूबड़दार बैल, हाथी एवं गैंडा — तथा ऊपर सिंधु लिपि के चिह्न अंकित रहते थे और पीछे की ओर डोरी बाँधने हेतु घुण्डी होती थी। पशुपति मुहर तथा मोहनजोदड़ो की पुजारी प्रतिमा इसी परम्परा के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
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Q2. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) हड़प्पा से पुरुष धड़
(b) हड़प्पा से पुरुष नर्तक
(c) मोहनजोदड़ो से पुजारी
(d) मोहनजोदड़ो से आकृतियाँ
सूची-II
(i) लाल चूना पत्थर
(ii) ग्रे चूना पत्थर
(iii) अलबास्टर
(iv) टेराकोटा
Right Answer: (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
Explanation:
हड़प्पा से प्राप्त प्रसिद्ध पुरुष धड़ लाल चूना पत्थर से बना है और उसकी मांसलता तथा संतुलन भारतीय मूर्तिकला की परिपक्वता का आरम्भिक प्रमाण है। वहीं से मिली नर्तक की छोटी प्रतिमा ग्रे चूना पत्थर की है, जिसमें शरीर का त्रिभंग मुड़ाव स्पष्ट है। मोहनजोदड़ो की विश्वविख्यात ‘पुजारी’ प्रतिमा अलबास्टर अर्थात् स्टीटाइट जैसे मुलायम पत्थर से बनी है, जिसमें अर्धनिमीलित नेत्र एवं तिपतिया अलंकरण वाला उत्तरीय दिखाया गया है। मोहनजोदड़ो से बड़ी संख्या में टेराकोटा की छोटी आकृतियाँ भी मिली हैं।
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Q3. (दारासुरम) ऐरावतेश्वर मंदिर की मूर्तिकला किस काल की है ?
Right Answer: चोल काल
Explanation:
दारासुरम स्थित ऐरावतेश्वर मंदिर का निर्माण बारहवीं शताब्दी में चोल शासक राजराज द्वितीय ने करवाया, अतः इसकी मूर्तिकला चोल काल की है। यह तमिलनाडु के तंजावुर जिले में है और तंजावुर के बृहदीश्वर तथा गंगईकोण्डचोलपुरम के मंदिरों के साथ इसे यूनेस्को ने ‘महान चोल मन्दिर’ के अन्तर्गत विश्व धरोहर घोषित किया है। मंदिर का नाम ऐरावत हाथी से जुड़ा है, जिसने यहाँ शिव की पूजा कर श्राप से मुक्ति पाई थी। इसका मंडप रथ के आकार का है, स्तम्भों पर सूक्ष्म उत्कीर्णन है और सोपान की सीढ़ियों से संगीतमय ध्वनि निकलती है।
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Q4. डॉ० आनन्द कुमारस्वामी के अनुसार मौर्य मूर्तिकला दो भागों में विभक्त है। उन्हें पहचानिए :
Right Answer: दरबारी कला और लोकप्रिय कला
Explanation:
डॉ० आनन्द कुमारस्वामी ने मौर्यकालीन मूर्तिकला को दो वर्गों में विभाजित किया — दरबारी कला तथा लोकप्रिय कला। दरबारी कला राजकीय संरक्षण में बनी और उसमें अशोक के एकाश्म स्तम्भ, उनके शीर्ष पर बने सिंह एवं वृषभ, तथा चमकदार मौर्य पॉलिश सम्मिलित है, जिसमें परिष्कार एवं तकनीकी उत्कृष्टता प्रधान है। लोकप्रिय कला जनसामान्य की परम्परा से निकली और उसमें दीदारगंज की चामरग्राहिणी यक्षी, परखम का यक्ष तथा टेराकोटा की मूर्तियाँ आती हैं, जिनमें स्थानीय स्वाद, स्थूलता एवं लोक-आस्था झलकती है। यह विभाजन आज भी मान्य है।
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Q5. उस गुफा की पहचान करें जिसमें एक के ऊपर एक लगभग 20 परतों में चित्रकारी की गई है :
Right Answer: भीमबेटका
Explanation:
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका की शैलाश्रय शृंखला में कुछ स्थानों पर लगभग बीस परतों में एक के ऊपर एक चित्रकारी की गई है, जो यह दर्शाता है कि इन आश्रयों का उपयोग हजारों वर्षों तक निरन्तर होता रहा। इसकी खोज 1957-58 में वी० एस० वाकणकर ने की और यूनेस्को ने 2003 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया। यहाँ लगभग सात सौ शैलाश्रय हैं, जिनमें से चार सौ से अधिक में चित्र मिलते हैं। ये चित्र पुरापाषाण काल से लेकर मध्यकाल तक के हैं और इनमें आखेट, नृत्य, पशु, घुड़सवार तथा युद्ध के दृश्य अंकित हैं।
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Q6. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) अभय मुद्रा
(b) ध्यान मुद्रा
(c) धर्मचक्र मुद्रा
(d) भूमिस्पर्श मुद्रा
सूची-II
(i) उपदेश देना
(ii) डरो मत
(iii) धरती को छूना
(iv) ध्यान
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
बुद्ध की प्रतिमाओं में हस्त-मुद्राएँ उनके जीवन की विशिष्ट घटनाओं तथा उपदेशों का संकेत देती हैं। अभय मुद्रा में दाहिना हाथ कंधे तक उठा और हथेली सामने की ओर खुली रहती है, जो ‘डरो मत’ का आश्वासन देती है। ध्यान मुद्रा में दोनों हाथ गोद में एक के ऊपर एक रखे रहते हैं और यह समाधि की अवस्था दर्शाती है। धर्मचक्र मुद्रा में दोनों हाथ वक्ष के समीप चक्र की आकृति बनाते हैं, जो सारनाथ के प्रथम उपदेश का प्रतीक है। भूमिस्पर्श मुद्रा में दाहिना हाथ नीचे झुककर धरती को छूता है, जो बोधि-प्राप्ति के क्षण का स्मरण कराता है।
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Q7. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) शिकार का दृश्य
(b) घायल सूअर
(c) घुड़सवार — शेल्टर दीवार पर उकेरा गया
(d) डोलमेन्स
सूची-II
(i) सिंगनपुर रॉक पेंटिंग — बैंगनी, हल्का पीला, बरगंडी
(ii) मिर्जापुर रॉक पेंटिंग — बैंगनी, हल्का पीला, बरगंडी
(iii) बरथा दर झरने के पास भरतपुर
(iv) रायचूर
Right Answer: (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
Explanation:
भारत में शैलचित्रों के अनेक महत्त्वपूर्ण केन्द्र मिले हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित सिंगनपुर के शैलाश्रयों में आखेट के जीवंत दृश्य बैंगनी, हल्के पीले तथा बरगंडी रंगों में अंकित हैं। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र के शैलचित्रों में घायल सूअर का प्रसिद्ध चित्रण मिलता है, जिसमें आहत पशु की पीड़ा एवं गति अत्यन्त सजीव रूप में उकेरी गई है। भरतपुर के निकट बरथा दर झरने के पास के आश्रय की दीवार पर घुड़सवार का चित्रण है, जो अपेक्षाकृत परवर्ती काल का है। रायचूर क्षेत्र अपने महापाषाणीय डोलमेन्स के लिए प्रसिद्ध है।
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Q8. चट्टान पर उत्कीर्णन या कार्विंग को क्या कहा जाता है ?
Right Answer: पेट्रोग्लिफ्स
Explanation:
चट्टान की सतह पर खोदकर, गोदकर, रगड़कर अथवा छेनी से काटकर बनाई गई आकृतियों को पेट्रोग्लिफ कहा जाता है। यह शब्द यूनानी मूल का है, जिसमें ‘पेट्रो’ का अर्थ पत्थर तथा ‘ग्लिफ’ का अर्थ उत्कीर्णन है। इसके विपरीत चट्टान पर रंग से बनाए गए चित्र पिक्टोग्राफ कहलाते हैं। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, लद्दाख तथा कर्नाटक में विशाल पेट्रोग्लिफ मिले हैं, जिनमें पशु, मानव आकृतियाँ एवं ज्यामितीय चिह्न अंकित हैं। पेट्रोफॉर्म वे आकृतियाँ हैं जो जमीन पर पत्थर रखकर बनाई जाती हैं। ये दोनों मिलकर शैलकला के अध्ययन का आधार बनते हैं।
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Q9. जानवर द्वारा एक आदमी का शिकार करते हुए चित्र किस गुफा में पाया गया है ?
Right Answer: लेखामोंडा
Explanation:
लेखामोंडा की गुफा में वह असाधारण शैलचित्र मिला है जिसमें एक पशु मनुष्य का शिकार करता हुआ दिखाया गया है। यह प्रागैतिहासिक शैलकला में दुर्लभ विषय है, क्योंकि अधिकांश चित्रों में मनुष्य ही आखेटक के रूप में दिखाई देता है। ऐसे चित्र यह संकेत देते हैं कि आदिम मानव के लिए वन्य पशु केवल आहार नहीं, अपितु निरन्तर भय एवं संघर्ष का स्रोत भी थे। शैलचित्रों का यह वर्ग तत्कालीन जीवन की असुरक्षा को अभिव्यक्त करता है। भीमबेटका, पचमढ़ी तथा केरल की एडक्कल गुफाएँ भारत के अन्य प्रमुख शैलकला केन्द्र हैं।
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Q10. बृहदीश्वर मंदिर के ‘गंगइकोंडा’ की उपाधि किसने ग्रहण की ?
Right Answer: राजेन्द्र I
Explanation:
‘गंगईकोण्ड’ अर्थात् गंगा को जीतने वाले की उपाधि चोल सम्राट राजेन्द्र प्रथम ने ग्रहण की। उन्होंने अपने सेनापति के नेतृत्व में उत्तर की ओर विशाल अभियान भेजा, जो बंगाल तक पहुँचा और पाल शासक महीपाल को पराजित कर गंगाजल लेकर लौटा। इसी विजय के स्मरण में उन्होंने नई राजधानी गंगईकोण्डचोलपुरम बसाई और वहाँ अपने पिता राजराज प्रथम के तंजावुर स्थित बृहदीश्वर मंदिर की शैली पर एक विशाल शिव मंदिर बनवाया। उन्होंने श्रीविजय के विरुद्ध नौसैनिक अभियान भी भेजा, जिससे चोल शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैल गई।
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