Fine Art - Modern and Contemporary Indian Art: 12 MCQs with Answers
Fine Art- Modern and Contemporary Indian Art
बंगाल स्कूल, कलकत्ता ग्रुप, दिल्ली शिल्पी चक्र तथा आधुनिक भारतीय चित्रकारों एवं मूर्तिकारों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. भारतीय कला के समृद्ध और विविध क्षेत्र में कौन - सी चित्रकला तकनीक एक जीवंत और आकर्षक शक्ति के रूप में विकसित हुई ?
Right Answer: समकालीन कला
समकालीन कला भारतीय कला के समृद्ध एवं विविध परिदृश्य में एक जीवंत तथा आकर्षक शक्ति के रूप में विकसित हुई है। यह स्वतंत्रता के बाद, विशेषतः बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से, परम्परागत रूपों की सीमाओं को तोड़ती हुई नए माध्यमों की ओर बढ़ी — संस्थापन कला, प्रदर्शन कला, वीडियो कला, डिजिटल माध्यम तथा मिश्रित माध्यम इसमें सम्मिलित हुए। इसमें कलाकार सामाजिक, राजनीतिक, लैंगिक एवं पर्यावरणीय प्रश्नों को सीधे उठाता है और भारतीय परम्परा को वैश्विक दृष्टि के साथ जोड़ता है। यही निरन्तर प्रयोगशीलता इसे गतिशील बनाए रखती है।
Q2. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) गुलाम मोहम्मद शेख
(b) मंजीत बावा
(c) विवान सुन्दरम
(d) जय झरोटिया
सूची-II
(i) 1937
(ii) 1941
(iii) 1943
(iv) 1945
Right Answer: (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
गुलाम मोहम्मद शेख का जन्म 1937 में सुरेन्द्रनगर, गुजरात में हुआ; वे चित्रकार, कवि तथा कला-लेखक हैं और बड़ौदा स्कूल के प्रमुख स्तम्भ रहे। मंजीत बावा का जन्म 1941 में धुरी, पंजाब में हुआ और वे सपाट गुलाबी एवं बैंगनी पृष्ठभूमि पर तैरती हुई मानव तथा पशु आकृतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। विवान सुन्दरम का जन्म 1943 में शिमला में हुआ और वे संस्थापन कला तथा फोटो-मोंताज के अग्रदूत माने जाते हैं। जय झरोटिया का जन्म 1945 में हुआ और उनके चित्रों में ग्रामीण जीवन तथा लोक-संवेदना की प्रधानता रही।
Q3. किस कलाकार की कृतियाँ आध्यात्मिक आत्मनिरीक्षण की छवियाँ हैं ?
Right Answer: बीरेन डे
बीरेन डे भारतीय नव-तांत्रिक चित्रकला के अग्रणी कलाकार थे और उनकी कृतियों को आध्यात्मिक अथवा तत्त्वमीमांसीय आत्मनिरीक्षण की छवियाँ कहा जाता है। उनके चित्रों में प्रकाश का एक आन्तरिक स्रोत केन्द्र से बाहर की ओर विकीर्ण होता प्रतीत होता है और ज्यामितीय एवं जैविक रूपों के संयोजन से ऐसी आकृतियाँ बनती हैं जो सृष्टि, ऊर्जा तथा चेतना का संकेत देती हैं। उन्होंने तंत्र के प्रतीकों को अमूर्त भाषा में ढाला, किन्तु उनका उद्देश्य धार्मिक चित्रण नहीं बल्कि आन्तरिक अनुभव की अभिव्यक्ति था। जी० आर० संतोष भी इसी धारा के प्रमुख कलाकार रहे।
Q4. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) मीरा मुखर्जी
(b) नंदगोपाल
(c) के० जी० सुब्रमण्यन
(d) मृणालिनी मुखर्जी
सूची-II
(i) फाइबर स्कल्पचर
(ii) वेल्डिंग, सिल्वरिंग और कलरिंग
(iii) लॉस्ट वैक्स प्रोसेस
(iv) टेराकोटा रिलीफ एंड ग्लास पेंटिंग
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)
मीरा मुखर्जी ने बस्तर के घड़वा शिल्पियों के बीच रहकर धातु-ढलाई की परम्परागत लॉस्ट वैक्स अर्थात् मधुच्छिष्ट विधि सीखी और उसी से आधुनिक संवेदना की विशाल कांस्य मूर्तियाँ बनाईं। नंदगोपाल ने धातु की चादरों को वेल्डिंग, सिल्वरिंग तथा कलरिंग द्वारा जोड़कर मन्दिर-स्थापत्य एवं लोक-प्रतीकों से प्रेरित रैखिक मूर्तियाँ रचीं। के० जी० सुब्रमण्यन ने टेराकोटा भित्ति-उद्धरण तथा उलटी दिशा में की जाने वाली काँच-चित्रकारी को आधुनिक कला में पुनर्स्थापित किया। मृणालिनी मुखर्जी ने भाँग के रेशे को गाँठ लगाकर विशाल फाइबर मूर्तियाँ बनाईं।
Q5. 1943 में कलकत्ता ग्रुप की स्थापना किस कलाकार समूह द्वारा की गई थी ?
Right Answer: गोपाल घोष, परितोष सेन, प्रोदोष दास गुप्ता
कलकत्ता ग्रुप की स्थापना 1943 में हुई और इसके संस्थापक सदस्यों में गोपाल घोष, परितोष सेन तथा प्रोदोष दास गुप्ता प्रमुख थे। यह स्वतंत्रता से पूर्व बना पहला ऐसा आधुनिकतावादी कलाकार समूह था जिसने बंगाल स्कूल की पुनरुत्थानवादी एवं भावुक शैली को अस्वीकार कर दिया। इसका आदर्श वाक्य था कि कला अन्तर्राष्ट्रीय होनी चाहिए और उसे समकालीन जीवन की वास्तविकता से जुड़ना चाहिए। 1943 के बंगाल अकाल तथा युद्ध की विभीषिका ने इसके कलाकारों को गहराई से प्रभावित किया। इसी दिशा में आगे चलकर 1947 में बम्बई प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप बना।
Q6. नई दिल्ली के निर्माण भवन में त्रि - आयामी मोजे़क - कंक्रीट भित्ति चित्र किसने बनाया ?
Right Answer: शंखू चौधरी
नई दिल्ली के निर्माण भवन में त्रि-आयामी मोजे़क एवं कंक्रीट का भित्ति चित्र प्रसिद्ध मूर्तिकार शंखो चौधरी ने बनाया। वे शान्तिनिकेतन में रामकिंकर बैज के शिष्य रहे और आगे चलकर बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में मूर्तिकला विभाग के संस्थापक अध्यक्ष बने। उन्होंने पत्थर, धातु, लकड़ी तथा कंक्रीट सभी माध्यमों में कार्य किया और सार्वजनिक स्थलों के लिए अनेक विशाल भित्ति एवं मुक्त-खड़ी मूर्तियाँ बनाईं। उन्हें पद्मश्री तथा ललित कला अकादमी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
Q7. ई० बी० हेवेल किस समयावधि में मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स ऐण्ड क्राफ्ट्स के अधीक्षक थे ?
Right Answer: 1884-1892
ई० बी० हेवेल 1884 से 1892 तक मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स के अधीक्षक रहे। इसके बाद 1896 में वे कलकत्ता स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य नियुक्त हुए, जहाँ उन्होंने पाठ्यक्रम में आमूल परिवर्तन कर यूरोपीय अकादमिक यथार्थवाद के स्थान पर भारतीय परम्परा — अजन्ता के भित्तिचित्र, मुगल एवं राजपूत लघुचित्र — को केन्द्र में रखा। अबनीन्द्रनाथ टैगोर के साथ मिलकर उन्होंने बंगाल स्कूल की नींव रखी। उनकी पुस्तकें ‘इंडियन स्कल्पचर एण्ड पेंटिंग’ तथा ‘द आइडियल्स ऑफ इंडियन आर्ट’ इस आन्दोलन का वैचारिक आधार बनीं।
Q8. दिल्ली शिल्पी चक्र के सदस्य कौन थे ?
Right Answer: बी० सी० सान्याल, कंवल कृष्ण, के० एस० कुलकर्णी, धनराज भगत
दिल्ली शिल्पी चक्र की स्थापना 1949 में हुई और इसके प्रमुख सदस्य बी० सी० सान्याल, कंवल कृष्ण, के० एस० कुलकर्णी तथा धनराज भगत थे। विभाजन के बाद लाहौर से दिल्ली आए कलाकारों ने इस समूह के माध्यम से राजधानी में आधुनिक कला की नींव रखी। इसका उद्देश्य कलाकारों को प्रदर्शनी का मंच देना, आपसी विचार-विमर्श बढ़ाना तथा भारतीय परम्परा एवं आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच सेतु बनाना था। इसी समय बम्बई में प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप तथा मद्रास में चोलामंडल कलाकार ग्राम जैसे प्रयास चल रहे थे।
Q9. 1904 में पहला राष्ट्रीय ध्वज किसने बनाया था ?
Right Answer: सिस्टर निवेदिता
1904 में प्रथम राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना एवं रचना सिस्टर निवेदिता ने की, जो स्वामी विवेकानन्द की आयरिश शिष्या थीं। यह ध्वज वर्गाकार था, जिसमें लाल पृष्ठभूमि पर पीले रंग का वज्र चिह्न तथा श्वेत कमल अंकित था और किनारों पर बांग्ला में ‘वन्दे मातरम्’ लिखा था। लाल रंग स्वतंत्रता संग्राम, पीला विजय तथा श्वेत कमल पवित्रता का प्रतीक था, और वज्र शक्ति एवं दृढ़ संकल्प का। इसे 1906 में कलकत्ता की एक कांग्रेस प्रदर्शनी में दिखाया गया। बाद में पिंगली वेंकैया ने 1921 में उस ध्वज की रचना की जिससे वर्तमान तिरंगा विकसित हुआ।
Q10. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) अर्पणा कौर
(b) अंजलि इला मेनन
(c) अर्पिता सिंह
(d) देवयानी कृष्ण
सूची-II
(i) अ टायर्ड वुमन ऐण्ड मैन अगेंस्ट द वॉल
(ii) टाइम इमेज
(iii) तबला वादक
(iv) फ्राउ रेडिक
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
अर्पणा कौर की ‘टाइम इमेज’ समय, स्मृति एवं स्त्री-अस्तित्व के प्रश्नों को उठाती है; उनके चित्रों में विभाजन तथा 1984 की हिंसा की स्मृतियाँ बार-बार लौटती हैं। अंजलि इला मेनन की ‘फ्राउ रेडिक’ मैसोनाइट बोर्ड पर तैलरंग से बना उनका सर्वाधिक चर्चित व्यक्तिचित्र है, जिसमें उनकी विशिष्ट पारदर्शी परत-दर-परत तकनीक दिखती है। अर्पिता सिंह की ‘अ टायर्ड वुमन ऐण्ड मैन अगेंस्ट द वॉल’ में लोक-शैली के सपाट रंग तथा स्त्री के अकेलेपन का चित्रण है। देवयानी कृष्ण ने ‘तबला वादक’ में संगीत एवं लय को रेखा में ढाला।