Fine Art - Folk and Traditional Art: 6 MCQs with Answers
Fine Art- Folk and Traditional Art
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0%Q1. उत्तराखण्ड की पेंटिंग भगवान कृष्ण के जीवन के प्रसंगों को दर्शाती है और पारंपारिक रूप से जन्माष्टमी के दौरान बनाई जाती है, उन्हें किस नाम से जाना जाता है ?
Right Answer: कुमाऊंनी पेंटिंग
Explanation:
उत्तराखण्ड की कुमाऊँनी चित्रकला में भगवान कृष्ण के जीवन के प्रसंग चित्रित किए जाते हैं और इन्हें परम्परागत रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर बनाया जाता है। इन्हें प्रायः कागज अथवा कपड़े पर प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता था और घर की दीवार पर लगाकर पूजा की जाती थी। कुमाऊँ की चित्र-परम्परा में लोक-शैली के साथ पहाड़ी लघुचित्र शैली का प्रभाव भी दिखाई देता है। इसी क्षेत्र की ऐपण कला अलग है, जो चावल के घोल से भूमि एवं दीवार पर अलंकरण के रूप में बनाई जाती है। भील तथा पिथोरा चित्रकला मध्य प्रदेश एवं गुजरात की जनजातीय परम्पराएँ हैं।
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Q2. भारतीय कला जो अपने जटिल पैटर्न, चमकीले रंगों और मिट्टी, लकड़ी, पत्थर जैसी अप्रसंस्कृत सामग्रियों के उपयोग के लिए जानी जाती है :
Right Answer: लोक कला
Explanation:
लोक कला अपने जटिल अलंकरण-पैटर्न, चमकीले एवं सपाट रंगों तथा मिट्टी, लकड़ी, पत्थर, गोबर, चावल के घोल एवं प्राकृतिक रंजकों जैसी अप्रसंस्कृत सामग्रियों के उपयोग के लिए जानी जाती है। यह किसी औपचारिक कला-विद्यालय में नहीं, बल्कि परिवार एवं समुदाय में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित होती है और प्रायः त्योहार, विवाह तथा अनुष्ठान से जुड़ी रहती है। इसमें परिप्रेक्ष्य एवं यथार्थ अनुपात के स्थान पर प्रतीकात्मकता तथा द्विआयामी सपाट चित्रण मिलता है। मधुबनी, वर्ली, गोंड, पट्टचित्र तथा कलमकारी इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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Q3. पटना, बिहार की 800 साल पुरानी जटिल और दुर्लभ कला कौन - सी है ?
Right Answer: टिकुली कला
Explanation:
टिकुली कला बिहार की लगभग आठ सौ वर्ष पुरानी जटिल एवं दुर्लभ कला है, जिसका केन्द्र पटना रहा है। मूल रूप से यह काँच पर सोने की पन्नी चढ़ाकर बनाई जाने वाली सुसज्जित बिन्दी अर्थात् टिकुली बनाने की परम्परा थी, जिसे विवाहित स्त्रियाँ माथे पर धारण करती थीं। इसमें अत्यन्त बारीक काम होता था और मुगलकाल में इसे विशेष संरक्षण मिला। बीसवीं शताब्दी में यह कला लगभग समाप्त हो चली थी, किन्तु उपेन्द्र महारथी के प्रयासों से इसे पुनर्जीवित किया गया और अब हार्डबोर्ड पर एनामेल रंगों से मधुबनी शैली के दृश्य बनाकर इसका आधुनिक रूप विकसित हुआ है।
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Q4. बिहार की उस लोक कला को पहचानें जो कुटुंब कला के अन्तर्गत आती है :
Right Answer: अहृपन
Explanation:
अरिपन बिहार, विशेषतः मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक कला है और इसे कुटुंब कला अर्थात् परिवार से जुड़ी कला के अन्तर्गत रखा जाता है, क्योंकि यह घर की स्त्रियों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीखी एवं सिखाई जाती है। यह चावल के पिसे घोल से आँगन, देहरी तथा पूजा-स्थल पर उँगलियों से बनाई जाती है और विवाह, उपनयन, छठ तथा अन्य संस्कारों में मांगलिक अलंकरण का कार्य करती है। इसकी आकृतियाँ प्रायः ज्यामितीय एवं प्रतीकात्मक होती हैं — कमल, स्वस्तिक, सूर्य, चन्द्र तथा पद-चिह्न। उत्तराखण्ड की ऐपण तथा दक्षिण की कोलम इसी परम्परा के समरूप हैं।
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Q5. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) पाबूजी की फड़
(b) चित्रकाथी
(c) कलमकारी
(d) फुलकारी
सूची-II
(i) महाराष्ट्र
(ii) पंजाब
(iii) राजस्थान
(iv) आन्ध्र प्रदेश
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(ii)
Explanation:
पाबूजी की फड़ राजस्थान की परम्परा है, जिसमें लोकदेवता पाबूजी की गाथा एक लम्बे कपड़े पर चित्रित की जाती है और भोपा रातभर गाकर उसका वाचन करते हैं। चित्रकाथी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, विशेषतः पिंगुली गाँव की परम्परा है, जिसमें कागज के चित्रों की शृंखला दिखाकर रामायण एवं महाभारत की कथाएँ सुनाई जाती हैं। कलमकारी आन्ध्र प्रदेश की श्रीकालहस्ती एवं मछलीपट्टनम शैलियों में विकसित हुई, जिसमें बाँस की कलम तथा प्राकृतिक रंगों से कपड़े पर चित्र बनाए जाते हैं। फुलकारी पंजाब की कढ़ाई-कला है।
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Q6. अल्मोड़ा गढ़वाल की प्रसिद्ध लोक कला कौन - सी है ?
Right Answer: आपना
Explanation:
ऐपण उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा तथा गढ़वाल क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक कला है, जिसे कुमाऊँ में विशेष रूप से महत्त्व प्राप्त है। इसे गेरू से लीपी गई लाल पृष्ठभूमि पर चावल के सफेद घोल से अनामिका उँगली की सहायता से बनाया जाता है। यह देहरी, आँगन, पूजा-स्थल, मन्दिर तथा चौकियों पर बनाई जाती है और विवाह, नामकरण, जनेऊ एवं त्योहारों पर इसे मांगलिक माना जाता है। इसके प्रमुख रूपांकनों में लक्ष्मी के पद-चिह्न, स्वस्तिक, शंख, कमल, बेल-बूटे तथा ज्यामितीय बिन्दु-जाल आते हैं। बिहार की अरिपन तथा दक्षिण की कोलम इसी परम्परा की समरूप कलाएँ हैं।
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