Fine Art - Aesthetics and Principles of Art: 15 MCQs with Answers
Fine Art- Aesthetics and Principles of Art
कला दर्शन, षडंग, रंग सिद्धांत, संयोजन के सिद्धांत तथा कला चिंतकों के मतों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q11. भारत में ‘कला’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किस वेद में मिलता है ?
Right Answer: ऋग्वेद
भारतीय वाङ्मय में ‘कला’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ऋग्वेद में मिलता है, जो वेदों में प्राचीनतम है। वहाँ यह शब्द मुख्यतः अंश, भाग अथवा किसी वस्तु के सोलहवें भाग के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है, और साथ ही कौशल एवं निपुणता का भाव भी उसमें निहित है। आगे चलकर ब्राह्मण ग्रन्थों, उपनिषदों तथा पुराणों में इसका अर्थ विस्तृत होकर सृजनात्मक कौशल एवं विविध विद्याओं तक पहुँचा। भारतीय परम्परा में कला केवल सौन्दर्य-सृजन नहीं, बल्कि जीवन-कौशल भी मानी गई, इसीलिए चौंसठ कलाओं में पाक, माल्यरचना एवं वस्त्र-सज्जा भी सम्मिलित हैं।
Q12. किसने कहा था, “कला एक ऐसी गतिविधि है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति एक भावना का अनुभव करके उसे जानबूझकर दूसरों तक पहुँचाता है” ?
Right Answer: टॉल्सटॉय
यह प्रसिद्ध परिभाषा रूसी साहित्यकार एवं चिन्तक लियो टॉल्सटॉय ने अपनी कृति ‘व्हाट इज आर्ट’ में दी। उनके अनुसार कला वह गतिविधि है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति किसी भावना का स्वयं अनुभव कर, उसे रेखा, रंग, ध्वनि अथवा शब्द के सहारे जानबूझकर दूसरों तक इस प्रकार पहुँचाता है कि वे भी उसी भावना का अनुभव करने लगें। इस दृष्टि में कला का सार सम्प्रेषण एवं संक्रामकता है, केवल सौन्दर्य नहीं। टॉल्सटॉय ने इसी आधार पर उस कला की आलोचना की जो केवल अभिजात वर्ग के मनोरंजन तक सीमित रह जाए और सामान्य जन को स्पर्श न करे।
Q13. ‘सभी रूपप्रद या दृश्य कलाओं में कुछ तत्व एक समान होते हैं।’ यह कथन किसका है ?
Right Answer: हर्बर्ट रीड
यह कथन अंग्रेज कला-चिन्तक हर्बर्ट रीड का है कि सभी रूपप्रद अथवा दृश्य कलाओं में कुछ तत्व एक समान होते हैं। उनका आशय यह है कि चित्रकला, मूर्तिकला तथा वास्तुकला भले ही माध्यम एवं तकनीक में भिन्न हों, किन्तु रेखा, रूप, आकार, रंग, बनावट, आयतन तथा रिक्त स्थान — ये मूल तत्व सभी में समान रूप से क्रियाशील रहते हैं, और एकता, संतुलन, लय, अनुपात एवं प्रभाविता जैसे संयोजन-सिद्धांत भी सब पर समान रूप से लागू होते हैं। इसी सार्वभौमिक व्याकरण के कारण कला-शिक्षा में इन तत्वों का अध्ययन सर्वप्रथम कराया जाता है।
Q14. कला रचना के उस सिद्धान्त का नाम बताइए जो लक्ष्य और उसके क्रमबद्धता को दर्शाता है :
Right Answer: प्रभाविता
प्रभाविता अर्थात् डॉमिनेंस वह संयोजन-सिद्धांत है जो चित्र के लक्ष्य तथा उसकी क्रमबद्धता को निर्धारित करता है। इसके अनुसार चित्र में एक प्रमुख केन्द्र होना चाहिए, जिस पर दर्शक की दृष्टि सबसे पहले जाकर ठहरे, और शेष तत्व उसके अधीन रहकर उसे सहारा दें। इसे आकार, रंग की तीव्रता, विरोध, स्थिति अथवा एकाकीपन के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। इससे प्रमुख, गौण एवं उपगौण का एक स्पष्ट क्रम बन जाता है और दृष्टि निर्धारित मार्ग पर चलती है। यदि सभी तत्व समान महत्त्व के हों तो चित्र भ्रमित एवं नीरस हो जाता है।
Q15. संयोजन के सिद्धान्त में ‘प्रमाण/अनुपात’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
Right Answer: सम्बद्धता का सिद्धान्त
संयोजन के सिद्धांतों में ‘प्रमाण’ अथवा अनुपात को सम्बद्धता का सिद्धांत भी कहा जाता है, क्योंकि यह वस्तुतः चित्र के विभिन्न भागों के परस्पर सम्बन्ध तथा उनके सम्पूर्ण के साथ सम्बन्ध को नियंत्रित करता है। इसमें किसी एक अंग के आकार, माप एवं मात्रा की तुलना दूसरे अंग तथा समग्र रचना से की जाती है। भारतीय परम्परा में ताल-मान पद्धति तथा पाश्चात्य परम्परा में स्वर्ण अनुपात इसी सिद्धांत के मानक हैं। सही अनुपात रचना को स्वाभाविक एवं सुखद बनाता है, जबकि उसका जानबूझकर उल्लंघन नाटकीयता अथवा विकृति उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।