Fine Art: 60 MCQs with Answers
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0%Q1. भारतीय कला के समृद्ध और विविध क्षेत्र में कौन - सी चित्रकला तकनीक एक जीवंत और आकर्षक शक्ति के रूप में विकसित हुई ?
Right Answer: समकालीन कला
समकालीन कला भारतीय कला के समृद्ध एवं विविध परिदृश्य में एक जीवंत तथा आकर्षक शक्ति के रूप में विकसित हुई है। यह स्वतंत्रता के बाद, विशेषतः बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से, परम्परागत रूपों की सीमाओं को तोड़ती हुई नए माध्यमों की ओर बढ़ी — संस्थापन कला, प्रदर्शन कला, वीडियो कला, डिजिटल माध्यम तथा मिश्रित माध्यम इसमें सम्मिलित हुए। इसमें कलाकार सामाजिक, राजनीतिक, लैंगिक एवं पर्यावरणीय प्रश्नों को सीधे उठाता है और भारतीय परम्परा को वैश्विक दृष्टि के साथ जोड़ता है। यही निरन्तर प्रयोगशीलता इसे गतिशील बनाए रखती है।
Q2. सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त मुहरों पर पशुओं की आकृतियाँ, सिंधु लिपि, पुरुष आकृतियाँ किस पत्थर से बनी हैं ?
Right Answer: स्टीटाइट (सेलखड़ी)
सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त अधिकांश मुहरें स्टीटाइट अर्थात् सेलखड़ी नामक मुलायम पत्थर से बनाई गई थीं। यह पत्थर इतना कोमल होता है कि उस पर बारीक उत्कीर्णन सरलता से हो जाता है, और तपाने पर वह कठोर एवं टिकाऊ हो जाता है। मुहरें प्रायः वर्गाकार होती थीं, जिन पर एक ओर पशु-आकृतियाँ — विशेषकर एकशृंगी, कूबड़दार बैल, हाथी एवं गैंडा — तथा ऊपर सिंधु लिपि के चिह्न अंकित रहते थे और पीछे की ओर डोरी बाँधने हेतु घुण्डी होती थी। पशुपति मुहर तथा मोहनजोदड़ो की पुजारी प्रतिमा इसी परम्परा के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
Q3. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) गुलाम मोहम्मद शेख
(b) मंजीत बावा
(c) विवान सुन्दरम
(d) जय झरोटिया
सूची-II
(i) 1937
(ii) 1941
(iii) 1943
(iv) 1945
Right Answer: (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
गुलाम मोहम्मद शेख का जन्म 1937 में सुरेन्द्रनगर, गुजरात में हुआ; वे चित्रकार, कवि तथा कला-लेखक हैं और बड़ौदा स्कूल के प्रमुख स्तम्भ रहे। मंजीत बावा का जन्म 1941 में धुरी, पंजाब में हुआ और वे सपाट गुलाबी एवं बैंगनी पृष्ठभूमि पर तैरती हुई मानव तथा पशु आकृतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। विवान सुन्दरम का जन्म 1943 में शिमला में हुआ और वे संस्थापन कला तथा फोटो-मोंताज के अग्रदूत माने जाते हैं। जय झरोटिया का जन्म 1945 में हुआ और उनके चित्रों में ग्रामीण जीवन तथा लोक-संवेदना की प्रधानता रही।
Q4. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) मुकुल डे — श्रीमती मोदी के घर पर एक महिला का चित्र
(b) आर० एन० चक्रवर्ती — द बोअर्स ऐण्ड द डक्स
(c) सुरिंद्र चड्ढा — शीर्षक रहित
(d) परमजीत सिंह — प्लेजर ऑफ नेचर
सूची-II
(i) सिल्कस्क्रीन
(ii) लिथोग्राफी
(iii) एक्वाटिंट
(iv) एचिंग
Right Answer: (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)
मुकुल डे भारत में आधुनिक छापाचित्रण के प्रवर्तक माने जाते हैं और वे विशेषतः एचिंग तथा ड्राईपॉइंट में निपुण थे; उन्होंने विदेश जाकर विधिवत प्रशिक्षण लेने वाले प्रथम भारतीय के रूप में यह विधा भारत में स्थापित की। आर० एन० चक्रवर्ती ने एक्वाटिंट माध्यम में कार्य किया, जिसमें राल के कणों से बनी छिद्रपूर्ण जमीन द्वारा जलरंग जैसे कोमल तानवर्ण प्राप्त होते हैं। सुरिंद्र चड्ढा लिथोग्राफी में तथा परमजीत सिंह सिल्कस्क्रीन में कार्यरत रहे। ये चारों स्वतंत्रता के बाद भारतीय ग्राफिक कला के विकास के महत्त्वपूर्ण नाम हैं।
Q5. किस कलाकार की कृतियाँ आध्यात्मिक आत्मनिरीक्षण की छवियाँ हैं ?
Right Answer: बीरेन डे
बीरेन डे भारतीय नव-तांत्रिक चित्रकला के अग्रणी कलाकार थे और उनकी कृतियों को आध्यात्मिक अथवा तत्त्वमीमांसीय आत्मनिरीक्षण की छवियाँ कहा जाता है। उनके चित्रों में प्रकाश का एक आन्तरिक स्रोत केन्द्र से बाहर की ओर विकीर्ण होता प्रतीत होता है और ज्यामितीय एवं जैविक रूपों के संयोजन से ऐसी आकृतियाँ बनती हैं जो सृष्टि, ऊर्जा तथा चेतना का संकेत देती हैं। उन्होंने तंत्र के प्रतीकों को अमूर्त भाषा में ढाला, किन्तु उनका उद्देश्य धार्मिक चित्रण नहीं बल्कि आन्तरिक अनुभव की अभिव्यक्ति था। जी० आर० संतोष भी इसी धारा के प्रमुख कलाकार रहे।
Q6. उत्तराखण्ड की पेंटिंग भगवान कृष्ण के जीवन के प्रसंगों को दर्शाती है और पारंपारिक रूप से जन्माष्टमी के दौरान बनाई जाती है, उन्हें किस नाम से जाना जाता है ?
Right Answer: कुमाऊंनी पेंटिंग
उत्तराखण्ड की कुमाऊँनी चित्रकला में भगवान कृष्ण के जीवन के प्रसंग चित्रित किए जाते हैं और इन्हें परम्परागत रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर बनाया जाता है। इन्हें प्रायः कागज अथवा कपड़े पर प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता था और घर की दीवार पर लगाकर पूजा की जाती थी। कुमाऊँ की चित्र-परम्परा में लोक-शैली के साथ पहाड़ी लघुचित्र शैली का प्रभाव भी दिखाई देता है। इसी क्षेत्र की ऐपण कला अलग है, जो चावल के घोल से भूमि एवं दीवार पर अलंकरण के रूप में बनाई जाती है। भील तथा पिथोरा चित्रकला मध्य प्रदेश एवं गुजरात की जनजातीय परम्पराएँ हैं।
Q7. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) मीरा मुखर्जी
(b) नंदगोपाल
(c) के० जी० सुब्रमण्यन
(d) मृणालिनी मुखर्जी
सूची-II
(i) फाइबर स्कल्पचर
(ii) वेल्डिंग, सिल्वरिंग और कलरिंग
(iii) लॉस्ट वैक्स प्रोसेस
(iv) टेराकोटा रिलीफ एंड ग्लास पेंटिंग
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(ii), (c)-(iv), (d)-(i)
मीरा मुखर्जी ने बस्तर के घड़वा शिल्पियों के बीच रहकर धातु-ढलाई की परम्परागत लॉस्ट वैक्स अर्थात् मधुच्छिष्ट विधि सीखी और उसी से आधुनिक संवेदना की विशाल कांस्य मूर्तियाँ बनाईं। नंदगोपाल ने धातु की चादरों को वेल्डिंग, सिल्वरिंग तथा कलरिंग द्वारा जोड़कर मन्दिर-स्थापत्य एवं लोक-प्रतीकों से प्रेरित रैखिक मूर्तियाँ रचीं। के० जी० सुब्रमण्यन ने टेराकोटा भित्ति-उद्धरण तथा उलटी दिशा में की जाने वाली काँच-चित्रकारी को आधुनिक कला में पुनर्स्थापित किया। मृणालिनी मुखर्जी ने भाँग के रेशे को गाँठ लगाकर विशाल फाइबर मूर्तियाँ बनाईं।
Q8. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए :
सूची-I
(a) हड़प्पा से पुरुष धड़
(b) हड़प्पा से पुरुष नर्तक
(c) मोहनजोदड़ो से पुजारी
(d) मोहनजोदड़ो से आकृतियाँ
सूची-II
(i) लाल चूना पत्थर
(ii) ग्रे चूना पत्थर
(iii) अलबास्टर
(iv) टेराकोटा
Right Answer: (a)-(i), (b)-(ii), (c)-(iii), (d)-(iv)
हड़प्पा से प्राप्त प्रसिद्ध पुरुष धड़ लाल चूना पत्थर से बना है और उसकी मांसलता तथा संतुलन भारतीय मूर्तिकला की परिपक्वता का आरम्भिक प्रमाण है। वहीं से मिली नर्तक की छोटी प्रतिमा ग्रे चूना पत्थर की है, जिसमें शरीर का त्रिभंग मुड़ाव स्पष्ट है। मोहनजोदड़ो की विश्वविख्यात ‘पुजारी’ प्रतिमा अलबास्टर अर्थात् स्टीटाइट जैसे मुलायम पत्थर से बनी है, जिसमें अर्धनिमीलित नेत्र एवं तिपतिया अलंकरण वाला उत्तरीय दिखाया गया है। मोहनजोदड़ो से बड़ी संख्या में टेराकोटा की छोटी आकृतियाँ भी मिली हैं।
Q9. (दारासुरम) ऐरावतेश्वर मंदिर की मूर्तिकला किस काल की है ?
Right Answer: चोल काल
दारासुरम स्थित ऐरावतेश्वर मंदिर का निर्माण बारहवीं शताब्दी में चोल शासक राजराज द्वितीय ने करवाया, अतः इसकी मूर्तिकला चोल काल की है। यह तमिलनाडु के तंजावुर जिले में है और तंजावुर के बृहदीश्वर तथा गंगईकोण्डचोलपुरम के मंदिरों के साथ इसे यूनेस्को ने ‘महान चोल मन्दिर’ के अन्तर्गत विश्व धरोहर घोषित किया है। मंदिर का नाम ऐरावत हाथी से जुड़ा है, जिसने यहाँ शिव की पूजा कर श्राप से मुक्ति पाई थी। इसका मंडप रथ के आकार का है, स्तम्भों पर सूक्ष्म उत्कीर्णन है और सोपान की सीढ़ियों से संगीतमय ध्वनि निकलती है।
Q10. 1943 में कलकत्ता ग्रुप की स्थापना किस कलाकार समूह द्वारा की गई थी ?
Right Answer: गोपाल घोष, परितोष सेन, प्रोदोष दास गुप्ता
कलकत्ता ग्रुप की स्थापना 1943 में हुई और इसके संस्थापक सदस्यों में गोपाल घोष, परितोष सेन तथा प्रोदोष दास गुप्ता प्रमुख थे। यह स्वतंत्रता से पूर्व बना पहला ऐसा आधुनिकतावादी कलाकार समूह था जिसने बंगाल स्कूल की पुनरुत्थानवादी एवं भावुक शैली को अस्वीकार कर दिया। इसका आदर्श वाक्य था कि कला अन्तर्राष्ट्रीय होनी चाहिए और उसे समकालीन जीवन की वास्तविकता से जुड़ना चाहिए। 1943 के बंगाल अकाल तथा युद्ध की विभीषिका ने इसके कलाकारों को गहराई से प्रभावित किया। इसी दिशा में आगे चलकर 1947 में बम्बई प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप बना।