Psychology: 197 MCQs with Answers
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0%HTET Psychology – Complete Notes, MCQs, Previous Year Questions & Study Material
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Q181. निम्नलिखित में से कौन - सा बुद्धि का त्रिआर्किक सिद्धांत ‘‘व्यावहारिक बुद्धि या व्यावसायिक समझ’’ की सही व्याख्या करता है ?
Right Answer: सांदर्भिक बुद्धि
रॉबर्ट स्टर्नबर्ग के बुद्धि के त्रिआर्किक सिद्धान्त में तीन उप-सिद्धान्त हैं। घटकीय अथवा विश्लेषणात्मक बुद्धि सूचना के प्रसंस्करण, तर्क तथा समस्या-समाधान से जुड़ी है और परम्परागत परीक्षणों में यही मापी जाती है। आनुभाविक अथवा सृजनात्मक बुद्धि नवीन परिस्थितियों में मौलिक समाधान खोजने तथा अनुभव को स्वचालित बनाने की क्षमता है। सांदर्भिक अथवा व्यावहारिक बुद्धि वास्तविक जीवन के परिवेश से अनुकूलन करने, उसे अपने अनुकूल ढालने अथवा उपयुक्त परिवेश चुनने की योग्यता है। इसे ही ‘व्यावसायिक समझ’ या सांसारिक चातुर्य कहा जाता है, जो मौन ज्ञान पर आधारित होती है।
Q182. निम्नलिखित में से कौन - सा मनोविज्ञान का परिदृश्य मानव की स्वतंत्र इच्छाओं एवं उनके विकसित होने के स्वाभाविक प्रयास एवं उनकी आन्तरिक क्षमताओं के मुखरित होने पर बल देता है :
Right Answer: मानवतावादी परिदृश्य
मानवतावादी परिदृश्य के प्रमुख प्रवर्तक अब्राहम मैस्लो तथा कार्ल रोजर्स रहे। इसे मनोविज्ञान की ‘तीसरी शक्ति’ कहा जाता है, क्योंकि यह मनोविश्लेषण के अचेतन निर्धारणवाद और व्यवहारवाद के पर्यावरणीय नियंत्रण दोनों को अस्वीकार करता है। यह दृष्टिकोण मानता है कि मनुष्य स्वतंत्र इच्छा रखता है, अपने चुनाव के लिए उत्तरदायी है तथा उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने और अपनी आन्तरिक क्षमताओं को मुखरित करने की प्रवृत्ति होती है। मैस्लो ने इसे आत्मसिद्धि कहा और रोजर्स ने इसके लिए बिना शर्त सकारात्मक आदर तथा सहानुभूति को आवश्यक बताया।
Q183. लोग कभी-कभी गलती से यह मान लेते हैं कि दूसरों की राय उनसे अलग होती है, जब भी ऐसा होता है, लोग दिखाते हैं :
Right Answer: बहुलवादी अज्ञान
बहुलवादी अज्ञान वह स्थिति है जिसमें समूह के अधिकांश सदस्य निजी रूप से एक ही मत रखते हैं, किन्तु प्रत्येक गलती से यह मान लेता है कि दूसरों के विचार उससे भिन्न हैं। इसका कारण यह है कि लोग अपनी असहमति खुलकर व्यक्त नहीं करते और दूसरों की चुप्पी को सहमति समझ लेते हैं। परिणामस्वरूप कोई भी बोलता नहीं और अनुपयोगी परम्पराएँ बनी रहती हैं। कक्षा में शंका होते हुए भी प्रश्न न पूछना तथा आपात स्थिति में दर्शक-प्रभाव इसके उदाहरण हैं। संज्ञानात्मक असंगति फेस्टिंगर की अवधारणा है, जो परस्पर विरोधी संज्ञानों के तनाव से जुड़ी है।