Biology: 60 MCQs with Answers
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0%Q31. युग्मित तारक केन्द्र कोशिका चक्र के किस चरण के दौरान दो जोड़ों में प्रतिकृति बनाते हैं ?
Right Answer: S
कोशिका चक्र की अन्तरावस्था तीन उप-प्रावस्थाओं में बँटी होती है। इनमें S अर्थात् संश्लेषण प्रावस्था वह है जिसमें डी०एन०ए० का प्रतिकरण होकर उसकी मात्रा दुगुनी हो जाती है, यद्यपि गुणसूत्र संख्या वही रहती है। इसी प्रावस्था में जन्तु कोशिका के कोशिकाद्रव्य में स्थित युग्मित तारक केन्द्र भी प्रतिकृति बनाकर दो जोड़ों में बदल जाते हैं, ताकि आगे चलकर विभाजन के समय दोनों ध्रुवों पर एक-एक जोड़ा पहुँच सके और तर्कु का निर्माण हो। G1 प्रावस्था में कोशिका वृद्धि करती है और G2 में विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन एवं ऊर्जा संचित होती है।
Q32. मानव नेत्र में निम्नलिखित में से कौन - सा अपवर्तक माध्यम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है ?
Right Answer: परितारिका (आइरिस)
मानव नेत्र में प्रकाश के अपवर्तन का कार्य चार पारदर्शी माध्यम करते हैं — कॉर्निया, जलीय द्रव्य, लेंस तथा काचाभ द्रव्य। सबसे अधिक अपवर्तन कॉर्निया पर होता है, जबकि लेंस समंजन द्वारा फोकस को सूक्ष्मता से समायोजित करता है। परितारिका अर्थात् आइरिस अपवर्तक माध्यम नहीं है, क्योंकि वह अपारदर्शी पेशीय पर्दा है और उसका कार्य पुतली के व्यास को घटा-बढ़ाकर नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना है। यही परितारिका नेत्र को उसका विशिष्ट रंग भी प्रदान करती है।
Q33. निम्नलिखित ग्रंथियों में से कौन-सी एपीक्राइन ग्रंथि का उदाहरण नहीं है ?
(a) स्वेद ग्रंथियाँ
(b) लार ग्रंथियाँ
(c) स्तन ग्रंथियाँ
(d) वसामय ग्रंथियाँ
Right Answer: (b) व (d)
बहिःस्रावी ग्रंथियों को स्राव की विधि के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है। मीरोक्राइन ग्रंथियों में स्राव बहिःकोशिकता द्वारा निकलता है और कोशिका को कोई क्षति नहीं होती; लार ग्रंथियाँ इसी वर्ग में आती हैं। एपीक्राइन ग्रंथियों में कोशिका का शीर्ष भाग स्राव के साथ टूटकर निकल जाता है; कुछ स्वेद ग्रंथियाँ तथा स्तन ग्रंथियाँ इसके उदाहरण हैं। होलोक्राइन ग्रंथियों में सम्पूर्ण कोशिका फटकर स्राव में परिवर्तित हो जाती है, जिसका उदाहरण वसामय ग्रंथि है। अतः लार तथा वसामय ग्रंथियाँ एपीक्राइन नहीं हैं।
Q34. निम्नलिखित पादपों में से किसमें उन्मीलपरागणी तथा अनुन्मील्यपरागणी — दोनों प्रकार के पुष्प नहीं लगते ?
Right Answer: गुलाब
वायोला, ओक्सालिस तथा कोमेलाइना जैसे पौधों में दो प्रकार के पुष्प लगते हैं। उन्मीलपरागणी पुष्प सामान्य रूप से खुलते हैं, उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र अनावृत रहते हैं, अतः उनमें पर-परागण सम्भव होता है। अनुन्मील्यपरागणी पुष्प कभी खुलते ही नहीं; उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र पास-पास रहते हैं और कली के भीतर ही अनिवार्य स्वपरागण होकर बीज बन जाते हैं, जिससे परागणकर्ता के अभाव में भी बीज उत्पादन सुनिश्चित रहता है। गुलाब में ऐसा द्विरूपी पुष्पन नहीं पाया जाता, अतः वही अपवाद है।
Q35. जब दोनों गर्भाशय आंशिक रूप से संयुक्त होकर दो शृंग तथा अन्दर दो पृथक्अवकाशिकाएँ बनाते हैं, तो उसे कहते हैं :
Right Answer: द्विशृंगी गर्भाशय
स्तनधारियों में गर्भाशय की संरचना भ्रूणीय म्यूलरी वाहिनियों के संलयन की मात्रा पर निर्भर करती है। जब दोनों वाहिनियाँ बिल्कुल नहीं जुड़तीं तो द्विक् गर्भाशय बनता है, जिसमें दो पूर्णतः पृथक गर्भाशय एवं दो ग्रीवाएँ होती हैं, जैसा खरगोश में मिलता है। जब वे आंशिक रूप से संयुक्त होकर नीचे एक साझा भाग तथा ऊपर दो शृंग बनाती हैं और भीतर दो पृथक अवकाशिकाएँ बनी रहती हैं, तो उसे द्विशृंगी गर्भाशय कहते हैं, जो गाय, सूअर तथा कुतिया में पाया जाता है। पूर्ण संलयन से सरल गर्भाशय बनता है, जो मनुष्य एवं अन्य नरवानरों की विशेषता है।
Q36. मनुष्य में उपापचय के पश्चात् बनने वाली अमोनिया का यूरिया में परिवर्तन (a) …… में (b) …… प्रक्रिया द्वारा होता है तथा (c) …… द्वारा उत्सर्जित कर दिया जाता है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Right Answer: (a) यकृत, (b) क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र, (c) वृक्क
मनुष्य यूरिया उत्सर्जी प्राणी है। प्रोटीन के विऐमीनीकरण से बनी अमोनिया अत्यन्त विषैली होती है, अतः उसे शीघ्र ही यकृत में यूरिया में बदल दिया जाता है। यह रूपान्तरण जिस चक्रीय अभिक्रिया-शृंखला द्वारा होता है उसे ऑर्निथिन चक्र अथवा क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र कहा जाता है, जिसमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड तथा एस्पार्टेट भाग लेते हैं और ऑर्निथिन, सिट्रुलीन एवं आर्जिनीन क्रमशः बनते हैं। बना हुआ यूरिया रक्त के माध्यम से वृक्क तक पहुँचता है, जहाँ छनन द्वारा वह मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
Q37. नीचे दी गई सारणी में से गलत संयोजन चुनिए :
(a) टेस्टोस्टेरॉन – वृषण की लेडिग कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(b) एस्ट्रोजन – अण्डाशय की पुटिकीय कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(c) प्रोजेस्टेरॉन – अण्डाशय का कॉर्पस ल्युटियम – स्टेरॉयड
(d) ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन – अपरा – ग्लाइकोप्रोटीन
Right Answer: सभी संयोजन सही हैं
चारों संयोजन सही हैं। टेस्टोस्टेरॉन वृषण की अन्तराली अर्थात् लेडिग कोशिकाओं से स्रावित स्टेरॉयड हार्मोन है, जो शुक्राणुजनन तथा गौण लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करता है। एस्ट्रोजन अण्डाशय की वर्धमान पुटिका की कोशिकाओं से निकलने वाला स्टेरॉयड है। प्रोजेस्टेरॉन अण्डोत्सर्ग के बाद बने कॉर्पस ल्युटियम से स्रावित स्टेरॉयड है, जो गर्भाशय को रोपण हेतु तैयार करता है। ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन अपरा से स्रावित ग्लाइकोप्रोटीन है, जो कॉर्पस ल्युटियम को बनाए रखता है और गर्भ-परीक्षण का आधार है।
Q38. वानस्पतिक रूप से कपास के रेशे होते हैं :
Right Answer: अधिचर्मीय रेशा
वानस्पतिक दृष्टि से कपास के रेशे अधिचर्मीय रेशे हैं, अर्थात् वे बीज की बाह्यत्वचा की कोशिकाओं से निकले एककोशिकीय अत्यन्त लम्बे रोम हैं, जिन्हें बीजरोम कहा जाता है। परिपक्व होने पर इनकी भित्ति पर सेलुलोज की मोटी परतें जमा हो जाती हैं और कोशिका मरकर चपटी एवं मुड़ी हुई नली में बदल जाती है, जिससे कताई के समय रेशे परस्पर अच्छी तरह पकड़ बना लेते हैं। इसके विपरीत जूट एवं सन के रेशे बास्ट अर्थात् पोषवाह से जुड़े दृढ़ोतक रेशे होते हैं, जो तने की छाल से प्राप्त किए जाते हैं और उन्हें सड़ाकर अलग किया जाता है।
Q39. वाणी के लिए ब्रोका क्षेत्र उपस्थित होता है :
Right Answer: अग्रललाट पालि में
ब्रोका क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ गोलार्द्ध की ललाट पालि के पश्च-अधर भाग में स्थित होता है, जिसे अग्रललाट क्षेत्र से सटा हुआ माना जाता है। इसकी खोज फ्रांसीसी चिकित्सक पॉल ब्रोका ने की। यह क्षेत्र वाणी के उत्पादन को नियंत्रित करता है, अर्थात् यह विचारों को व्याकरणसम्मत शब्दों में ढालकर स्वरयंत्र, जिह्वा तथा ओष्ठ की पेशियों को आवश्यक निर्देश भेजता है। इसकी क्षति से ब्रोका वाचाघात होता है, जिसमें रोगी दूसरों की बात समझ तो लेता है, किन्तु स्वयं रुक-रुककर टूटे-फूटे शब्द ही बोल पाता है।
Q40. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
कॉलम-I
(a) पूर्ण अनिषेकजनन
(b) अरहेनोटोकी
(c) थेलीटोकी
(d) अपूर्ण अनिषेकजनन
कॉलम-II
(i) अगुणित नर अनिषेक प्राणी
(ii) अनन्य मादा; नर दुर्लभ
(iii) चक्रीय अनिषेकजनन
(iv) द्विगुणित अनिषेकजनन
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
अनिषेकजनन में अनिषेचित अण्डे से ही नए जीव का विकास हो जाता है। पूर्ण अनिषेकजनन में जनन पूर्णतः इसी विधि से होता है, अतः वहाँ आबादी अनन्य रूप से मादाओं की रहती है और नर अत्यन्त दुर्लभ अथवा अनुपस्थित होते हैं। अरहेनोटोकी में अनिषेचित अण्डों से अगुणित नर उत्पन्न होते हैं, जैसा मधुमक्खी के ड्रोन में देखा जाता है। थेलीटोकी में अनिषेचित अण्डों से केवल द्विगुणित मादाएँ बनती हैं। अपूर्ण अनिषेकजनन चक्रीय होता है, जिसमें अनिषेकजनन तथा लैंगिक जनन ऋतु के अनुसार बारी-बारी चलते हैं, जैसे एफिड एवं डैफनिया में।