Biology - Plant Physiology and Biochemistry: 8 MCQs with Answers
Biology- Plant Physiology and Biochemistry
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0%Q1. रिचमंड - लैंग प्रभाव जुड़ा हुआ है :
Right Answer: जीर्णता में देरी से
Explanation:
रिचमंड-लैंग प्रभाव साइटोकाइनिन हार्मोन से सम्बन्धित है। 1957 में रिचमंड तथा लैंग ने प्रयोग कर दिखाया कि यदि जैन्थियम की कटी हुई पत्तियों पर काइनेटिन का घोल लगाया जाए तो वे लम्बे समय तक हरी बनी रहती हैं और उनमें प्रोटीन एवं क्लोरोफिल का अपघटन विलम्बित हो जाता है। इस प्रकार साइटोकाइनिन जीर्णता को टालकर पत्ती की आयु बढ़ाता है, इसीलिए इसे जीर्णता-रोधी हार्मोन कहा जाता है। यह पोषक तत्वों को उपचारित भाग की ओर आकर्षित भी करता है, जिसे साइटोकाइनिन-प्रेरित पोषक गतिशीलता कहते हैं।
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Q2. कणों या अणुओं का उच्च सान्द्रता क्षेत्र से निम्न सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गति करना कहलाता है : बिन्दु स्राव
Right Answer: विसरण
Explanation:
कणों अथवा अणुओं का उनके उच्च सान्द्रता वाले क्षेत्र से निम्न सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर गमन विसरण कहलाता है। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है, जिसमें कोई ऊर्जा व्यय नहीं होती और गति अणुओं की स्वाभाविक तापीय गतिज ऊर्जा से होती है। पौधों में गैसों का आदान-प्रदान, वाष्पोत्सर्जन तथा सुगन्ध का फैलना इसी के उदाहरण हैं। इसके विपरीत परासरण अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार केवल विलायक का विसरण है, अन्तःशोषण कोलाइडी पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है, तथा बिन्दुस्राव पत्तियों के किनारों से तरल जल का निकलना है।
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Q3. बीजों की सुषुप्तावस्था का कारण है :
Right Answer: सभी विकल्प सही हैं।
Explanation:
बीज सुषुप्तावस्था वह अवस्था है जिसमें अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर भी जीवित बीज अंकुरित नहीं होता। इसके अनेक कारण होते हैं और प्रश्न में दिए गए सभी विकल्प सही हैं। कठोर बीजचोल जल तथा ऑक्सीजन के लिए अपारगम्य हो सकता है, जैसा अनेक फलीदार पौधों में होता है। कुछ बीजों में भ्रूण बिखराव के समय अपरिपक्व रहता है और उसे परिपक्व होने के लिए समय चाहिए। तीसरा कारण एब्सिसिक अम्ल, फीनॉल एवं पैरा-एस्कॉर्बिक अम्ल जैसे रासायनिक अवरोधकों की उपस्थिति है। सुषुप्तावस्था बीज को प्रतिकूल ऋतु में अंकुरित होने से बचाती है।
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Q4. आवृतबीजियों में शर्करा का स्थानांतरण किस रूप में होता है ?
Right Answer: सुक्रोज़
Explanation:
आवृतबीजी पौधों में शर्करा का स्थानान्तरण मुख्यतः सुक्रोज के रूप में होता है और यह कार्य पोषवाह अर्थात् फ्लोएम की चालनी नलिकाओं द्वारा किया जाता है। सुक्रोज इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह अनअपचायक द्विशर्करा है, अतः रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय एवं स्थायी रहती है, जल में अत्यधिक घुलनशील है और परिवहन के दौरान उपापचयी क्रियाओं में सरलता से नहीं टूटती। मुंच की दाब-प्रवाह परिकल्पना के अनुसार स्रोत पर सुक्रोज के भरने तथा गंतव्य पर उतरने से उत्पन्न दाब-प्रवणता ही इस प्रवाह को चलाती है।
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Q5. RUBISCO विकर के लिए क्रियाधार है :
Right Answer: रिबुलोज़ 1, 5 बिस्फॉस्फेट
Explanation:
रुबिस्को अर्थात् रिबुलोज बिस्फॉस्फेट कार्बोक्सिलेज-ऑक्सीजनेज पृथ्वी का सर्वाधिक प्रचुर एन्जाइम माना जाता है और इसका क्रियाधार रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट है, जो पाँच कार्बन वाला यौगिक है। केल्विन चक्र के कार्बन स्थिरीकरण चरण में यह एन्जाइम कार्बन डाइऑक्साइड को रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट से जोड़ता है, जिससे तीन कार्बन वाले फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के दो अणु बनते हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसमें ऑक्सीजन के प्रति भी बन्धुता होती है, और ऑक्सीजन की अधिक सान्द्रता में यह प्रकाश-श्वसन आरम्भ कर देता है, जिससे उत्पादकता घट जाती है।
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Q6. जब शुद्ध जल में विलेय मिलाया जाता है, तो जल विभव का मान :
Right Answer: शून्य से कम होता है।
Explanation:
मानक ताप एवं दाब पर शुद्ध जल का जल विभव अधिकतम होता है और उसे परिभाषा के अनुसार शून्य माना जाता है। जब उसमें कोई विलेय घोला जाता है, तो जल के मुक्त अणुओं की सान्द्रता घट जाती है और विलेय के कण जल अणुओं को अपने चारों ओर बाँध लेते हैं; फलस्वरूप जल की मुक्त ऊर्जा तथा उसकी विसरित होने की प्रवृत्ति घट जाती है। इसी कारण विलयन का जल विभव सदैव शून्य से कम अर्थात् ऋणात्मक हो जाता है। विलेय जितना अधिक होगा, विभव उतना ही अधिक ऋणात्मक होगा और परासरण द्वारा जल उसी ओर जाएगा।
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Q7. सिट्रिक एसिड चक्र का कौन - सा विकर झिल्ली से बँधा होता है ?
Right Answer: सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज़
Explanation:
सिट्रिक अम्ल चक्र अर्थात् क्रेब्स चक्र के अधिकांश एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया के आधात्री में घुली अवस्था में पाए जाते हैं, किन्तु सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज इसका अपवाद है, क्योंकि वह भीतरी माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से बँधा रहता है। यह एन्जाइम सक्सीनेट को फ्यूमरेट में ऑक्सीकृत करता है और इस अभिक्रिया में NAD के स्थान पर FAD अपचयित होकर FADH2 बनाता है। यही एन्जाइम इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला के संकुल-II के रूप में भी कार्य करता है, इसीलिए यह क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीकारक फॉस्फोरिलीकरण दोनों को सीधे जोड़ने वाली कड़ी है।
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Q8. डोनन के संतुलन में आयनों के संचय के लिए ऊर्जा का स्रोत है :
Right Answer: ऊर्जा की आवश्यकता नहीं है
Explanation:
डोनन संतुलन उस स्थिति का वर्णन करता है जिसमें अर्धपारगम्य झिल्ली के एक ओर ऐसे आयन उपस्थित होते हैं जो झिल्ली को पार नहीं कर सकते, जैसे कोशिका के भीतर के बड़े प्रोटीन ऋणायन। इन अविसरणीय आयनों की उपस्थिति विसरणीय आयनों के असमान वितरण को बाध्य कर देती है, ताकि दोनों ओर विद्युत उदासीनता एवं रासायनिक संतुलन बना रहे। यह पूर्णतः निष्क्रिय भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है, अतः इसमें आयनों के संचय के लिए किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती। यही इसे सक्रिय अभिगमन से पृथक करता है, जिसमें ए०टी०पी० व्यय होता है।
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