Biology - Plant Diversity and Anatomy: 10 MCQs with Answers

Plant Diversity and Anatomy - Biology
Biology - Plant Diversity and Anatomy

Biology- Plant Diversity and Anatomy

शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी, आवृतबीजी, पादप ऊतक तथा आर्थिक वनस्पति विज्ञान पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. साइकस की प्रवालाभ जड़ों में शैवाल क्षेत्र पाया जाता है :

Right Answer: मध्य वल्कुट में


Explanation:

साइकस में सामान्य मूसला जड़ों के अतिरिक्त विशेष प्रकार की प्रवालाभ जड़ें पाई जाती हैं, जो मूँगे जैसी शाखित होकर भूमि की सतह की ओर ऊपर उठती हैं। इनकी अनुप्रस्थ काट में मध्य वल्कुट में एक विशिष्ट शैवाल क्षेत्र दिखाई देता है, जहाँ एनाबीना तथा नॉस्टॉक जैसे नील-हरित शैवाल श्लेष्मा से भरी गुहा में निवास करते हैं। ये शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर पौधे को नाइट्रोजनयुक्त यौगिक देते हैं और बदले में आश्रय एवं भोजन प्राप्त करते हैं। यह सहजीविता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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Q2. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I (उपयोगी वस्तु)
(a) कुनैन
(b) कॉफी
(c) चाय
(d) हींग

कॉलम-II (स्रोत)
(i) मूल
(ii) पर्ण
(iii) बीज
(iv) छाल

Right Answer: (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)


Explanation:

कुनैन सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त होने वाला क्षारोद है और यह मलेरिया की प्राचीनतम प्रभावी औषधि रही है। कॉफी कॉफिया अरेबिका के बीजों से बनती है, जिन्हें भूनकर एवं पीसकर उपयोग में लाया जाता है। चाय कैमेलिया साइनेन्सिस की कोमल पत्तियों तथा कलिकाओं से तैयार की जाती है, जिन्हें विभिन्न स्तर तक ऑक्सीकृत कर हरी अथवा काली चाय बनाई जाती है। हींग फेरुला एसाफोटिडा की मोटी मूल एवं प्रकन्द से निकलने वाले दूधिया रस को सुखाकर प्राप्त की जाती है और भारतीय भोजन में पाचक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है।

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Q3. एक प्ररूपी आवृतबीजीय भ्रूण - कोष परिपक्व होने पर होता है :

Right Answer: 8 केन्द्रीय व 7 कोशिकीय


Explanation:

प्ररूपी आवृतबीजी भ्रूणकोष का विकास पॉलीगोनम प्रकार का होता है, जिसमें गुरुबीजाणु का केन्द्रक तीन क्रमिक समसूत्री विभाजनों से आठ केन्द्रक उत्पन्न करता है। इसके बाद कोशिका-भित्तियाँ बनने पर सात कोशिकाएँ बनती हैं, क्योंकि दो ध्रुवीय केन्द्रक एक ही बड़ी केन्द्रीय कोशिका में रह जाते हैं। इस प्रकार परिपक्व भ्रूणकोष आठ केन्द्रकीय तथा सात कोशिकीय होता है। बीजाण्डद्वार की ओर तीन कोशिकाओं का अण्ड समुच्चय होता है, जिसमें एक अण्डकोशिका एवं दो सहायक कोशिकाएँ रहती हैं, निभाग की ओर तीन प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ तथा बीच में द्विकेन्द्रकी केन्द्रीय कोशिका।

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Q4. निम्नलिखित में से कौन - सा कथन ब्रायोफाइटा के लिए सत्य नहीं है ?

Right Answer: लैंगिक जनन असमयुग्मकी प्रकार का होता है।


Explanation:

ब्रायोफाइटा में युग्मकोद्भिद प्रावस्था प्रमुख एवं स्वपोषी होती है, जबकि बीजाणुद्भिद उस पर पोषण के लिए आश्रित रहता है। इनमें नर युग्मक चलायमान होते हैं, अतः निषेचन के लिए जल अनिवार्य है और इसी कारण इन्हें ‘पादप जगत के उभयचर’ कहा जाता है। अर्धसूत्री विभाजन केवल बीजाणुधानी की बीजाणु मातृ कोशिकाओं में होता है। चौथा कथन असत्य है, क्योंकि इनका लैंगिक जनन असमयुग्मकी नहीं बल्कि विषमयुग्मकी अर्थात् अण्डयुग्मकी प्रकार का होता है, जिसमें बड़ा निश्चल अण्ड तथा छोटा चलायमान पुंयुग्मक भाग लेते हैं।

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Q5. निम्नलिखित में से कौन - सा एक समबीजाणुक टेरिडोफाइट पादप है ?

Right Answer: इक्वीसिटम


Explanation:

टेरिडोफाइट पादपों को बीजाणुओं की प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। समबीजाणुक पौधों में एक ही प्रकार के बीजाणु बनते हैं, जिनसे उभयलिंगी युग्मकोद्भिद विकसित होता है; इक्वीसिटम, लाइकोपोडियम, टेरिस तथा एडिएन्टम इसी वर्ग में आते हैं। विषमबीजाणुक पौधों में दो प्रकार के बीजाणु — छोटे लघुबीजाणु तथा बड़े गुरुबीजाणु — बनते हैं, जिनसे क्रमशः नर एवं मादा युग्मकोद्भिद विकसित होते हैं; सिलैजिनेला, मार्सिलिया, साल्वीनिया एवं एजोला इसके उदाहरण हैं। विषमबीजाणुता को बीज बनने की दिशा में पहला कदम माना जाता है।

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Q6. निम्नलिखित पादपों में से किसमें उन्मीलपरागणी तथा अनुन्मील्यपरागणी — दोनों प्रकार के पुष्प नहीं लगते ?

Right Answer: गुलाब


Explanation:

वायोला, ओक्सालिस तथा कोमेलाइना जैसे पौधों में दो प्रकार के पुष्प लगते हैं। उन्मीलपरागणी पुष्प सामान्य रूप से खुलते हैं, उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र अनावृत रहते हैं, अतः उनमें पर-परागण सम्भव होता है। अनुन्मील्यपरागणी पुष्प कभी खुलते ही नहीं; उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र पास-पास रहते हैं और कली के भीतर ही अनिवार्य स्वपरागण होकर बीज बन जाते हैं, जिससे परागणकर्ता के अभाव में भी बीज उत्पादन सुनिश्चित रहता है। गुलाब में ऐसा द्विरूपी पुष्पन नहीं पाया जाता, अतः वही अपवाद है।

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Q7. वानस्पतिक रूप से कपास के रेशे होते हैं :

Right Answer: अधिचर्मीय रेशा


Explanation:

वानस्पतिक दृष्टि से कपास के रेशे अधिचर्मीय रेशे हैं, अर्थात् वे बीज की बाह्यत्वचा की कोशिकाओं से निकले एककोशिकीय अत्यन्त लम्बे रोम हैं, जिन्हें बीजरोम कहा जाता है। परिपक्व होने पर इनकी भित्ति पर सेलुलोज की मोटी परतें जमा हो जाती हैं और कोशिका मरकर चपटी एवं मुड़ी हुई नली में बदल जाती है, जिससे कताई के समय रेशे परस्पर अच्छी तरह पकड़ बना लेते हैं। इसके विपरीत जूट एवं सन के रेशे बास्ट अर्थात् पोषवाह से जुड़े दृढ़ोतक रेशे होते हैं, जो तने की छाल से प्राप्त किए जाते हैं और उन्हें सड़ाकर अलग किया जाता है।

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Q8. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I
(a) विभज्योतक ऊतक
(b) सरल ऊतक
(c) स्रावी ऊतक
(d) जटिल ऊतक

कॉलम-II
(i) दृढ़ोतक
(ii) जलरंध्र
(iii) पोषवाह
(iv) एधा

Right Answer: (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)


Explanation:

एधा अर्थात् कैम्बियम एक पार्श्व विभज्योतक है, जिसकी कोशिकाएँ निरन्तर विभाजित होकर द्वितीयक वृद्धि उत्पन्न करती हैं। दृढ़ोतक सरल स्थायी ऊतक है, क्योंकि वह केवल एक ही प्रकार की मोटी लिग्निनयुक्त मृत कोशिकाओं से बना होता है और पौधे को यांत्रिक दृढ़ता देता है। जलरंध्र अर्थात् हाइडेथोड स्रावी ऊतक का उदाहरण है, जिससे बिन्दुस्राव द्वारा तरल जल बाहर निकलता है। पोषवाह अर्थात् फ्लोएम जटिल ऊतक है, क्योंकि वह चालनी नलिका, सखी कोशिका, फ्लोएम मृदूतक तथा फ्लोएम रेशा — इन विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनता है।

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Q9. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूट की सहायता से चुनें :

(a) थियोफ्रेस्टस – स्पीशीज प्लांटेरम
(b) लिनियस – हिस्टोरिया प्लांटेरम
(c) गास्पर्ड बॉहिन – पीनेक्स थियेट्री बोटेनिसाय
(d) बेंथम और हुकर – जेनेरा प्लांटेरम

Right Answer: (a) और (b)


Explanation:

पहले दो युग्म आपस में उलट गए हैं, अतः वही गलत हैं। यूनानी विद्वान थियोफ्रेस्टस, जिन्हें वनस्पति विज्ञान का जनक कहा जाता है, ने ‘हिस्टोरिया प्लांटेरम’ की रचना की और लगभग पाँच सौ पौधों का वर्णन किया। कैरोलस लिनियस ने 1753 में ‘स्पीशीज प्लांटेरम’ प्रकाशित की, जिससे द्विनाम पद्धति स्थापित हुई। शेष दोनों युग्म सही हैं — गास्पर्ड बॉहिन ने ‘पीनेक्स थियेट्री बोटेनिसाय’ लिखी, जिसमें लिनियस से पूर्व ही द्विपद नामकरण का संकेत मिलता है, तथा बेंथम एवं हुकर ने ‘जेनेरा प्लांटेरम’ में प्राकृतिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।

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Q10. फलों और बीजों के कठोर और पथरीले छिलकों की विशेषता होती है :

Right Answer: दृढ़कोशिकाएँ


Explanation:

फलों एवं बीजों के कठोर तथा पथरीले छिलके दृढ़कोशिकाओं अर्थात् स्क्लेरीड्स से बनते हैं। ये दृढ़ोतक का एक प्रकार हैं, जिनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमाव से अत्यधिक मोटी हो जाती है, गुहा लगभग समाप्त हो जाती है और परिपक्व होने पर कोशिका मृत हो जाती है। इनकी भित्ति में सरल गर्त स्पष्ट दिखाई देते हैं। नारियल, अखरोट तथा बादाम के कठोर आवरण, नाशपाती के गूदे के कणिकामय पिण्ड तथा फलियों के बीजचोल इन्हीं से बनते हैं। ये बीज को यांत्रिक चोट, सूखने तथा कीटों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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Published: 04 August 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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