Biology: 63 MCQs with Answers
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Q21. विलोडित हौज बायोरिएक्टर को डिज़ाइन किया गया है :
Right Answer: पूरे बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की उपलब्धता करने के लिए।
Explanation:
विलोडित हौज बायोरिएक्टर अर्थात् स्टर्ड टैंक बायोरिएक्टर सामान्यतः बेलनाकार होता है और इसमें एक विलोडक लगा रहता है, जिसका मुख्य कार्य सम्पूर्ण बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह विलोडक संवर्धन माध्यम को निरन्तर मिलाता रहता है, जिससे कोशिकाएँ, पोषक तत्व एवं गैस समान रूप से वितरित रहते हैं और स्थानीय ताप-प्रवणता समाप्त हो जाती है। इसके साथ वायु प्रस्फुटन तंत्र, ताप एवं पी-एच नियंत्रण प्रणाली, प्रतिफेन नियंत्रण तथा प्रतिदर्श निकास द्वार लगे रहते हैं, जिससे इष्टतम वृद्धि दशाएँ बनी रहती हैं।
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Q22. लैक प्रचालेक (ओपेरॉन) का दमनकारी प्रोटीन द्वारा नियमन माना जाता है :
Right Answer: ऋणात्मक नियमन
Explanation:
जैकब एवं मोनो द्वारा वर्णित लैक प्रचालेक में तीन संरचनात्मक जीन — z, y तथा a — एक ही प्रवर्तक के नियंत्रण में रहते हैं। नियामक जीन से बना दमनकारी प्रोटीन प्रचालक स्थल से जुड़कर आर०एन०ए० पॉलिमरेज को आगे बढ़ने से रोक देता है, जिससे प्रतिलेखन बन्द रहता है। चूँकि यहाँ नियंत्रक अणु जीन-अभिव्यक्ति को रोकता है, इसलिए इसे ऋणात्मक नियमन कहा जाता है। लैक्टोज उपस्थित होने पर एलोलैक्टोज प्रेरक के रूप में दमनकारी से जुड़कर उसकी आकृति बदल देता है और वह प्रचालक से हट जाता है, जिससे प्रतिलेखन आरम्भ हो जाता है।
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Q23. पृथ्वी द्वारा विकीर्ण ऊर्जा का कौन - सा रूप ग्रीन हाउस गैसों द्वारा अवशोषित हो जाता है, जिससे वैश्विक उष्णता होती है ?
Right Answer: अवरक्त किरणें
Explanation:
सूर्य से आने वाली ऊर्जा मुख्यतः लघु तरंगदैर्घ्य वाले दृश्य प्रकाश के रूप में वायुमंडल को पार कर पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और उसे गरम करती है। गरम पृथ्वी इस ऊर्जा को दीर्घ तरंगदैर्घ्य वाली अवरक्त किरणों के रूप में पुनः विकीर्ण करती है। कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी ग्रीनहाउस गैसें इन्हीं अवरक्त किरणों को अवशोषित कर लेती हैं और उनका कुछ भाग पुनः पृथ्वी की ओर लौटा देती हैं। इसी से निचला वायुमंडल गरम होता है और वैश्विक उष्णता की स्थिति बनती है।
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Q24. जब शुद्ध जल में विलेय मिलाया जाता है, तो जल विभव का मान :
Right Answer: शून्य से कम होता है।
Explanation:
मानक ताप एवं दाब पर शुद्ध जल का जल विभव अधिकतम होता है और उसे परिभाषा के अनुसार शून्य माना जाता है। जब उसमें कोई विलेय घोला जाता है, तो जल के मुक्त अणुओं की सान्द्रता घट जाती है और विलेय के कण जल अणुओं को अपने चारों ओर बाँध लेते हैं; फलस्वरूप जल की मुक्त ऊर्जा तथा उसकी विसरित होने की प्रवृत्ति घट जाती है। इसी कारण विलयन का जल विभव सदैव शून्य से कम अर्थात् ऋणात्मक हो जाता है। विलेय जितना अधिक होगा, विभव उतना ही अधिक ऋणात्मक होगा और परासरण द्वारा जल उसी ओर जाएगा।
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Q25. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूटों की सहायता से चुनिए :
(a) अम्लीय अमीनो अम्ल – ग्लूटामिक अम्ल
(b) क्षारीय अमीनो अम्ल – वैलीन
(c) उदासीन अमीनो अम्ल – लाइसिन
(d) एरोमैटिक अमीनो अम्ल – फेनिलएलनिन
Right Answer: (b) व (c)
Explanation:
अमीनो अम्लों को उनके पार्श्व समूह की प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ग्लूटामिक अम्ल में अतिरिक्त कार्बोक्सिल समूह होने से वह अम्लीय है, अतः पहला युग्म सही है। फेनिलएलनिन में बेंजीन वलय होने से वह एरोमैटिक है, अतः चौथा युग्म भी सही है। दूसरा तथा तीसरा युग्म आपस में उलट गए हैं — वैलीन शाखित शृंखला वाला उदासीन एवं जलविरागी अमीनो अम्ल है, जबकि लाइसिन में अतिरिक्त अमीनो समूह होने के कारण वह क्षारीय है। अतः यही दोनों युग्म गलत हैं।
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Q26. एक विशिष्ट समय पर प्रत्येक पोषण स्तर में पाई जाने वाली जीवित पदार्थ की मात्रा को कहा जाता है :
Right Answer: स्थित शस्य / खड़ी फसल
Explanation:
किसी निश्चित समय पर किसी पोषण स्तर पर उपस्थित समस्त जीवित पदार्थ की मात्रा को स्थित शस्य अथवा खड़ी फसल कहा जाता है। इसे ताजे अथवा शुष्क भार में मापा जाता है और अधिक शुद्ध तुलना के लिए शुष्क भार को प्राथमिकता दी जाती है। यह एक निश्चित क्षण की स्थिति दर्शाने वाली राशि है, अतः इसका कोई काल-आयाम नहीं होता। इसके विपरीत उत्पादकता एक दर है, जो प्रति इकाई क्षेत्र प्रति इकाई समय में उत्पन्न जैवभार बताती है। सकल प्राथमिक उत्पादकता में से श्वसन-हानि घटाने पर शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता प्राप्त होती है।
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Q27. निम्नलिखित में से कौन - सा एक समबीजाणुक टेरिडोफाइट पादप है ?
Right Answer: इक्वीसिटम
Explanation:
टेरिडोफाइट पादपों को बीजाणुओं की प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। समबीजाणुक पौधों में एक ही प्रकार के बीजाणु बनते हैं, जिनसे उभयलिंगी युग्मकोद्भिद विकसित होता है; इक्वीसिटम, लाइकोपोडियम, टेरिस तथा एडिएन्टम इसी वर्ग में आते हैं। विषमबीजाणुक पौधों में दो प्रकार के बीजाणु — छोटे लघुबीजाणु तथा बड़े गुरुबीजाणु — बनते हैं, जिनसे क्रमशः नर एवं मादा युग्मकोद्भिद विकसित होते हैं; सिलैजिनेला, मार्सिलिया, साल्वीनिया एवं एजोला इसके उदाहरण हैं। विषमबीजाणुता को बीज बनने की दिशा में पहला कदम माना जाता है।
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Q28. सिट्रिक एसिड चक्र का कौन - सा विकर झिल्ली से बँधा होता है ?
Right Answer: सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज़
Explanation:
सिट्रिक अम्ल चक्र अर्थात् क्रेब्स चक्र के अधिकांश एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया के आधात्री में घुली अवस्था में पाए जाते हैं, किन्तु सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज इसका अपवाद है, क्योंकि वह भीतरी माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से बँधा रहता है। यह एन्जाइम सक्सीनेट को फ्यूमरेट में ऑक्सीकृत करता है और इस अभिक्रिया में NAD के स्थान पर FAD अपचयित होकर FADH2 बनाता है। यही एन्जाइम इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला के संकुल-II के रूप में भी कार्य करता है, इसीलिए यह क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीकारक फॉस्फोरिलीकरण दोनों को सीधे जोड़ने वाली कड़ी है।
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Q29. डोनन के संतुलन में आयनों के संचय के लिए ऊर्जा का स्रोत है :
Right Answer: ऊर्जा की आवश्यकता नहीं है
Explanation:
डोनन संतुलन उस स्थिति का वर्णन करता है जिसमें अर्धपारगम्य झिल्ली के एक ओर ऐसे आयन उपस्थित होते हैं जो झिल्ली को पार नहीं कर सकते, जैसे कोशिका के भीतर के बड़े प्रोटीन ऋणायन। इन अविसरणीय आयनों की उपस्थिति विसरणीय आयनों के असमान वितरण को बाध्य कर देती है, ताकि दोनों ओर विद्युत उदासीनता एवं रासायनिक संतुलन बना रहे। यह पूर्णतः निष्क्रिय भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है, अतः इसमें आयनों के संचय के लिए किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती। यही इसे सक्रिय अभिगमन से पृथक करता है, जिसमें ए०टी०पी० व्यय होता है।
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Q30. निम्नलिखित युग्मों में से सही युग्म अथवा युग्मों का चयन कीजिए :
(i) डाउन सिंड्रोम – गुणसूत्र 21 की त्रिसूत्रता
(ii) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम – XXY
(iii) टर्नर सिंड्रोम – XO
Right Answer: (i), (ii) व (iii)
Explanation:
तीनों युग्म सही हैं। डाउन सिंड्रोम इक्कीसवें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति अर्थात् त्रिसूत्रता से होता है, जिसमें कुल गुणसूत्र संख्या 47 हो जाती है; इसमें छोटा कद, चपटी गर्दन, अर्ध-खुला मुख तथा मन्द बुद्धि जैसे लक्षण दिखते हैं। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम में लिंग गुणसूत्र XXY होते हैं, जिससे पुरुष में स्त्रियोचित लक्षण उभरते हैं और वह प्रायः बन्ध्य रहता है। टर्नर सिंड्रोम में एक X गुणसूत्र अनुपस्थित रहता है अर्थात् XO स्थिति बनती है, जिससे स्त्री का कद छोटा रहता है, अण्डाशय अविकसित रहते हैं और वह बन्ध्य होती है।
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Q31. युग्मित तारक केन्द्र कोशिका चक्र के किस चरण के दौरान दो जोड़ों में प्रतिकृति बनाते हैं ?
Right Answer: S
Explanation:
कोशिका चक्र की अन्तरावस्था तीन उप-प्रावस्थाओं में बँटी होती है। इनमें S अर्थात् संश्लेषण प्रावस्था वह है जिसमें डी०एन०ए० का प्रतिकरण होकर उसकी मात्रा दुगुनी हो जाती है, यद्यपि गुणसूत्र संख्या वही रहती है। इसी प्रावस्था में जन्तु कोशिका के कोशिकाद्रव्य में स्थित युग्मित तारक केन्द्र भी प्रतिकृति बनाकर दो जोड़ों में बदल जाते हैं, ताकि आगे चलकर विभाजन के समय दोनों ध्रुवों पर एक-एक जोड़ा पहुँच सके और तर्कु का निर्माण हो। G1 प्रावस्था में कोशिका वृद्धि करती है और G2 में विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन एवं ऊर्जा संचित होती है।
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Q32. मानव नेत्र में निम्नलिखित में से कौन - सा अपवर्तक माध्यम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है ?
Right Answer: परितारिका (आइरिस)
Explanation:
मानव नेत्र में प्रकाश के अपवर्तन का कार्य चार पारदर्शी माध्यम करते हैं — कॉर्निया, जलीय द्रव्य, लेंस तथा काचाभ द्रव्य। सबसे अधिक अपवर्तन कॉर्निया पर होता है, जबकि लेंस समंजन द्वारा फोकस को सूक्ष्मता से समायोजित करता है। परितारिका अर्थात् आइरिस अपवर्तक माध्यम नहीं है, क्योंकि वह अपारदर्शी पेशीय पर्दा है और उसका कार्य पुतली के व्यास को घटा-बढ़ाकर नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना है। यही परितारिका नेत्र को उसका विशिष्ट रंग भी प्रदान करती है।
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Q33. निम्नलिखित ग्रंथियों में से कौन-सी एपीक्राइन ग्रंथि का उदाहरण नहीं है ?
(a) स्वेद ग्रंथियाँ
(b) लार ग्रंथियाँ
(c) स्तन ग्रंथियाँ
(d) वसामय ग्रंथियाँ
Right Answer: (b) व (d)
Explanation:
बहिःस्रावी ग्रंथियों को स्राव की विधि के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है। मीरोक्राइन ग्रंथियों में स्राव बहिःकोशिकता द्वारा निकलता है और कोशिका को कोई क्षति नहीं होती; लार ग्रंथियाँ इसी वर्ग में आती हैं। एपीक्राइन ग्रंथियों में कोशिका का शीर्ष भाग स्राव के साथ टूटकर निकल जाता है; कुछ स्वेद ग्रंथियाँ तथा स्तन ग्रंथियाँ इसके उदाहरण हैं। होलोक्राइन ग्रंथियों में सम्पूर्ण कोशिका फटकर स्राव में परिवर्तित हो जाती है, जिसका उदाहरण वसामय ग्रंथि है। अतः लार तथा वसामय ग्रंथियाँ एपीक्राइन नहीं हैं।
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Q34. निम्नलिखित पादपों में से किसमें उन्मीलपरागणी तथा अनुन्मील्यपरागणी — दोनों प्रकार के पुष्प नहीं लगते ?
Right Answer: गुलाब
Explanation:
वायोला, ओक्सालिस तथा कोमेलाइना जैसे पौधों में दो प्रकार के पुष्प लगते हैं। उन्मीलपरागणी पुष्प सामान्य रूप से खुलते हैं, उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र अनावृत रहते हैं, अतः उनमें पर-परागण सम्भव होता है। अनुन्मील्यपरागणी पुष्प कभी खुलते ही नहीं; उनमें परागकोष एवं वर्तिकाग्र पास-पास रहते हैं और कली के भीतर ही अनिवार्य स्वपरागण होकर बीज बन जाते हैं, जिससे परागणकर्ता के अभाव में भी बीज उत्पादन सुनिश्चित रहता है। गुलाब में ऐसा द्विरूपी पुष्पन नहीं पाया जाता, अतः वही अपवाद है।
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Q35. जब दोनों गर्भाशय आंशिक रूप से संयुक्त होकर दो शृंग तथा अन्दर दो पृथक्अवकाशिकाएँ बनाते हैं, तो उसे कहते हैं :
Right Answer: द्विशृंगी गर्भाशय
Explanation:
स्तनधारियों में गर्भाशय की संरचना भ्रूणीय म्यूलरी वाहिनियों के संलयन की मात्रा पर निर्भर करती है। जब दोनों वाहिनियाँ बिल्कुल नहीं जुड़तीं तो द्विक् गर्भाशय बनता है, जिसमें दो पूर्णतः पृथक गर्भाशय एवं दो ग्रीवाएँ होती हैं, जैसा खरगोश में मिलता है। जब वे आंशिक रूप से संयुक्त होकर नीचे एक साझा भाग तथा ऊपर दो शृंग बनाती हैं और भीतर दो पृथक अवकाशिकाएँ बनी रहती हैं, तो उसे द्विशृंगी गर्भाशय कहते हैं, जो गाय, सूअर तथा कुतिया में पाया जाता है। पूर्ण संलयन से सरल गर्भाशय बनता है, जो मनुष्य एवं अन्य नरवानरों की विशेषता है।
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Q36. मनुष्य में उपापचय के पश्चात् बनने वाली अमोनिया का यूरिया में परिवर्तन (a) …… में (b) …… प्रक्रिया द्वारा होता है तथा (c) …… द्वारा उत्सर्जित कर दिया जाता है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Right Answer: (a) यकृत, (b) क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र, (c) वृक्क
Explanation:
मनुष्य यूरिया उत्सर्जी प्राणी है। प्रोटीन के विऐमीनीकरण से बनी अमोनिया अत्यन्त विषैली होती है, अतः उसे शीघ्र ही यकृत में यूरिया में बदल दिया जाता है। यह रूपान्तरण जिस चक्रीय अभिक्रिया-शृंखला द्वारा होता है उसे ऑर्निथिन चक्र अथवा क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र कहा जाता है, जिसमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड तथा एस्पार्टेट भाग लेते हैं और ऑर्निथिन, सिट्रुलीन एवं आर्जिनीन क्रमशः बनते हैं। बना हुआ यूरिया रक्त के माध्यम से वृक्क तक पहुँचता है, जहाँ छनन द्वारा वह मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
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Q37. नीचे दी गई सारणी में से गलत संयोजन चुनिए :
(a) टेस्टोस्टेरॉन – वृषण की लेडिग कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(b) एस्ट्रोजन – अण्डाशय की पुटिकीय कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(c) प्रोजेस्टेरॉन – अण्डाशय का कॉर्पस ल्युटियम – स्टेरॉयड
(d) ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन – अपरा – ग्लाइकोप्रोटीन
Right Answer: सभी संयोजन सही हैं
Explanation:
चारों संयोजन सही हैं। टेस्टोस्टेरॉन वृषण की अन्तराली अर्थात् लेडिग कोशिकाओं से स्रावित स्टेरॉयड हार्मोन है, जो शुक्राणुजनन तथा गौण लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करता है। एस्ट्रोजन अण्डाशय की वर्धमान पुटिका की कोशिकाओं से निकलने वाला स्टेरॉयड है। प्रोजेस्टेरॉन अण्डोत्सर्ग के बाद बने कॉर्पस ल्युटियम से स्रावित स्टेरॉयड है, जो गर्भाशय को रोपण हेतु तैयार करता है। ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन अपरा से स्रावित ग्लाइकोप्रोटीन है, जो कॉर्पस ल्युटियम को बनाए रखता है और गर्भ-परीक्षण का आधार है।
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Q38. वानस्पतिक रूप से कपास के रेशे होते हैं :
Right Answer: अधिचर्मीय रेशा
Explanation:
वानस्पतिक दृष्टि से कपास के रेशे अधिचर्मीय रेशे हैं, अर्थात् वे बीज की बाह्यत्वचा की कोशिकाओं से निकले एककोशिकीय अत्यन्त लम्बे रोम हैं, जिन्हें बीजरोम कहा जाता है। परिपक्व होने पर इनकी भित्ति पर सेलुलोज की मोटी परतें जमा हो जाती हैं और कोशिका मरकर चपटी एवं मुड़ी हुई नली में बदल जाती है, जिससे कताई के समय रेशे परस्पर अच्छी तरह पकड़ बना लेते हैं। इसके विपरीत जूट एवं सन के रेशे बास्ट अर्थात् पोषवाह से जुड़े दृढ़ोतक रेशे होते हैं, जो तने की छाल से प्राप्त किए जाते हैं और उन्हें सड़ाकर अलग किया जाता है।
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Q39. वाणी के लिए ब्रोका क्षेत्र उपस्थित होता है :
Right Answer: अग्रललाट पालि में
Explanation:
ब्रोका क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ गोलार्द्ध की ललाट पालि के पश्च-अधर भाग में स्थित होता है, जिसे अग्रललाट क्षेत्र से सटा हुआ माना जाता है। इसकी खोज फ्रांसीसी चिकित्सक पॉल ब्रोका ने की। यह क्षेत्र वाणी के उत्पादन को नियंत्रित करता है, अर्थात् यह विचारों को व्याकरणसम्मत शब्दों में ढालकर स्वरयंत्र, जिह्वा तथा ओष्ठ की पेशियों को आवश्यक निर्देश भेजता है। इसकी क्षति से ब्रोका वाचाघात होता है, जिसमें रोगी दूसरों की बात समझ तो लेता है, किन्तु स्वयं रुक-रुककर टूटे-फूटे शब्द ही बोल पाता है।
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Q40. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
कॉलम-I
(a) पूर्ण अनिषेकजनन
(b) अरहेनोटोकी
(c) थेलीटोकी
(d) अपूर्ण अनिषेकजनन
कॉलम-II
(i) अगुणित नर अनिषेक प्राणी
(ii) अनन्य मादा; नर दुर्लभ
(iii) चक्रीय अनिषेकजनन
(iv) द्विगुणित अनिषेकजनन
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(i), (c)-(iv), (d)-(iii)
Explanation:
अनिषेकजनन में अनिषेचित अण्डे से ही नए जीव का विकास हो जाता है। पूर्ण अनिषेकजनन में जनन पूर्णतः इसी विधि से होता है, अतः वहाँ आबादी अनन्य रूप से मादाओं की रहती है और नर अत्यन्त दुर्लभ अथवा अनुपस्थित होते हैं। अरहेनोटोकी में अनिषेचित अण्डों से अगुणित नर उत्पन्न होते हैं, जैसा मधुमक्खी के ड्रोन में देखा जाता है। थेलीटोकी में अनिषेचित अण्डों से केवल द्विगुणित मादाएँ बनती हैं। अपूर्ण अनिषेकजनन चक्रीय होता है, जिसमें अनिषेकजनन तथा लैंगिक जनन ऋतु के अनुसार बारी-बारी चलते हैं, जैसे एफिड एवं डैफनिया में।
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