Biology: 63 MCQs with Answers

Biology MCQ Questions and Answers - India Study Institute
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Biology MCQ Questions and Answers

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Biology MCQs on cell biology, genetics, plant and animal physiology, ecology and biotechnology। जीव विज्ञान विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Other Exam Papers:

Q1. निम्नलिखित में से कौन - सी ह्यूमस की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: यह बहुत तेजी से विघटित होता है।


Explanation:

ह्यूमस मृदा में उपस्थित वह गहरे रंग का अनाकार कार्बनिक पदार्थ है जो पौधों एवं जन्तुओं के अवशेषों के सूक्ष्मजीवीय अपघटन से बनता है। यह कोलाइडल प्रकृति का होता है, इसलिए जल तथा पोषक तत्वों को अपनी सतह पर रोककर उनका भण्डार बना रहता है और मृदा की धनायन विनिमय क्षमता बढ़ाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि ह्यूमस अत्यन्त धीरे-धीरे विघटित होता है; यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जिससे वह लम्बे समय तक मृदा की संरचना, वायु-संचार एवं जलधारण क्षमता को बनाए रखता है और पोषक तत्व क्रमशः मुक्त करता रहता है।

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Q2. निम्नलिखित में से कौन - सा अमीनो अम्ल केवल एक प्रकूट द्वारा कूटलेखित होता है ?

Right Answer: ट्रिप्टोफैन


Explanation:

आनुवंशिक कूट अपह्रासित होता है, अर्थात् अधिकांश अमीनो अम्लों के लिए एक से अधिक प्रकूट होते हैं। इसका अपवाद केवल दो अमीनो अम्ल हैं — ट्रिप्टोफैन, जिसका एकमात्र प्रकूट UGG है, तथा मेथियोनीन, जिसका एकमात्र प्रकूट AUG है और जो प्रारम्भन प्रकूट भी है। इसके विपरीत सेरीन तथा ल्यूसीन के छह-छह प्रकूट होते हैं, वैलीन एवं ग्लाइसीन के चार-चार। अपह्रासन का जैविक लाभ यह है कि तीसरे क्षार में होने वाला उत्परिवर्तन प्रायः अमीनो अम्ल नहीं बदलता, जिसे मूक उत्परिवर्तन कहते हैं।

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Q3. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में यदि नेत्रिका - लेंस 10 X तथा अभिदृश्यक लेंस 40 X हो, तो कुल आवर्धन क्या होगा ?

Right Answer: 400 X


Explanation:

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रतिबिम्ब का निर्माण दो चरणों में होता है — पहले अभिदृश्यक लेंस वस्तु का वास्तविक एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाता है और फिर नेत्रिका लेंस उसे और आवर्धित कर आभासी प्रतिबिम्ब देता है। अतः कुल आवर्धन दोनों लेंसों के आवर्धनों के गुणनफल के बराबर होता है। यहाँ नेत्रिका का आवर्धन 10 गुना तथा अभिदृश्यक का 40 गुना है, इसलिए कुल आवर्धन 10 गुणा 40 अर्थात् 400 गुना होगा। ध्यातव्य है कि आवर्धन बढ़ाने से विभेदन क्षमता नहीं बढ़ती; वह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य तथा संख्यात्मक द्वारक पर निर्भर करती है।

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Q4. रिचमंड - लैंग प्रभाव जुड़ा हुआ है :

Right Answer: जीर्णता में देरी से


Explanation:

रिचमंड-लैंग प्रभाव साइटोकाइनिन हार्मोन से सम्बन्धित है। 1957 में रिचमंड तथा लैंग ने प्रयोग कर दिखाया कि यदि जैन्थियम की कटी हुई पत्तियों पर काइनेटिन का घोल लगाया जाए तो वे लम्बे समय तक हरी बनी रहती हैं और उनमें प्रोटीन एवं क्लोरोफिल का अपघटन विलम्बित हो जाता है। इस प्रकार साइटोकाइनिन जीर्णता को टालकर पत्ती की आयु बढ़ाता है, इसीलिए इसे जीर्णता-रोधी हार्मोन कहा जाता है। यह पोषक तत्वों को उपचारित भाग की ओर आकर्षित भी करता है, जिसे साइटोकाइनिन-प्रेरित पोषक गतिशीलता कहते हैं।

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Q5. कणों या अणुओं का उच्च सान्द्रता क्षेत्र से निम्न सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गति करना कहलाता है : बिन्दु स्राव

Right Answer: विसरण


Explanation:

कणों अथवा अणुओं का उनके उच्च सान्द्रता वाले क्षेत्र से निम्न सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर गमन विसरण कहलाता है। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है, जिसमें कोई ऊर्जा व्यय नहीं होती और गति अणुओं की स्वाभाविक तापीय गतिज ऊर्जा से होती है। पौधों में गैसों का आदान-प्रदान, वाष्पोत्सर्जन तथा सुगन्ध का फैलना इसी के उदाहरण हैं। इसके विपरीत परासरण अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार केवल विलायक का विसरण है, अन्तःशोषण कोलाइडी पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है, तथा बिन्दुस्राव पत्तियों के किनारों से तरल जल का निकलना है।

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Q6. MN रक्त समूह प्रणाली के लिए M और N की आवृत्तियाँ क्रमशः 0.6 और 0.4 हैं। MN रक्त समूह वाले व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति संभवतः होगी :

Right Answer: 48%


Explanation:

हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत के अनुसार यदि किसी द्वि-युग्मविकल्पी लक्षण में एक युग्मविकल्पी की आवृत्ति p तथा दूसरे की q हो, तो विषमयुग्मजी व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति 2pq होती है। MN रक्त समूह प्रणाली सह-प्रभाविता का उत्तम उदाहरण है, जिसमें विषमयुग्मजी व्यक्ति MN समूह के होते हैं। यहाँ M की आवृत्ति 0.6 तथा N की 0.4 दी गई है, अतः MN की आवृत्ति 2 गुणा 0.6 गुणा 0.4 अर्थात् 0.48 होगी, जो प्रतिशत में 48 प्रतिशत बैठती है। इसी प्रकार M समूह 36 प्रतिशत तथा N समूह 16 प्रतिशत होगा।

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Q7. बीजों की सुषुप्तावस्था का कारण है :

Right Answer: सभी विकल्प सही हैं।


Explanation:

बीज सुषुप्तावस्था वह अवस्था है जिसमें अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर भी जीवित बीज अंकुरित नहीं होता। इसके अनेक कारण होते हैं और प्रश्न में दिए गए सभी विकल्प सही हैं। कठोर बीजचोल जल तथा ऑक्सीजन के लिए अपारगम्य हो सकता है, जैसा अनेक फलीदार पौधों में होता है। कुछ बीजों में भ्रूण बिखराव के समय अपरिपक्व रहता है और उसे परिपक्व होने के लिए समय चाहिए। तीसरा कारण एब्सिसिक अम्ल, फीनॉल एवं पैरा-एस्कॉर्बिक अम्ल जैसे रासायनिक अवरोधकों की उपस्थिति है। सुषुप्तावस्था बीज को प्रतिकूल ऋतु में अंकुरित होने से बचाती है।

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Q8. नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही जोड़ी अथवा जोड़ियाँ चुनें :

(a) मिनामाता रोग – पारा
(b) बाइसिनोसिस रोग – कपास की धूल
(c) नॉक-नी सिंड्रोम – नाइट्रेट्स
(d) मेटहीमोग्लोबिनेमिया – फ्लोराइड्स

Right Answer: (a) व (b)


Explanation:

मिनामाता रोग जापान में मिथाइल पारे से दूषित मछली खाने से हुआ था और इसमें तंत्रिका तंत्र गम्भीर रूप से प्रभावित होता है, अतः यह युग्म सही है। बाइसिनोसिस कपास मिलों में कपास की महीन धूल लम्बे समय तक श्वास में जाने से होने वाला फेफड़ों का रोग है, इसलिए यह भी सही है। शेष दोनों युग्म आपस में उलट गए हैं — नॉक-नी सिंड्रोम अर्थात् घुटनों का भीतर की ओर मुड़ जाना फ्लोराइड की अधिकता से होता है, जबकि मेटहीमोग्लोबिनेमिया अर्थात् ब्लू बेबी सिंड्रोम पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता से होता है।

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Q9. ई० कोलाई में आधार युग्मों की संख्या की गणना करें, यदि इसके डी० एन० ए० की लम्बाई 1.7 मिमी है :

Right Answer: 5 × 10 6 bp


Explanation:

द्विकुण्डलित डी०एन०ए० में दो क्रमागत क्षार-युग्मों के बीच की दूरी 0.34 नैनोमीटर अर्थात् 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 मीटर होती है। यहाँ ई० कोलाई के डी०एन०ए० की लम्बाई 1.7 मिलीमीटर दी गई है, जो 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 मीटर के बराबर है। क्षार-युग्मों की संख्या ज्ञात करने के लिए कुल लम्बाई को एक क्षार-युग्म की लम्बाई से भाग दिया जाता है। इस प्रकार 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 को 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 से भाग देने पर लगभग 5 गुणा 10 की घात 6 क्षार-युग्म प्राप्त होते हैं।

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Q10. आवृतबीजियों में शर्करा का स्थानांतरण किस रूप में होता है ?

Right Answer: सुक्रोज़


Explanation:

आवृतबीजी पौधों में शर्करा का स्थानान्तरण मुख्यतः सुक्रोज के रूप में होता है और यह कार्य पोषवाह अर्थात् फ्लोएम की चालनी नलिकाओं द्वारा किया जाता है। सुक्रोज इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह अनअपचायक द्विशर्करा है, अतः रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय एवं स्थायी रहती है, जल में अत्यधिक घुलनशील है और परिवहन के दौरान उपापचयी क्रियाओं में सरलता से नहीं टूटती। मुंच की दाब-प्रवाह परिकल्पना के अनुसार स्रोत पर सुक्रोज के भरने तथा गंतव्य पर उतरने से उत्पन्न दाब-प्रवणता ही इस प्रवाह को चलाती है।

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Q11. RUBISCO विकर के लिए क्रियाधार है :

Right Answer: रिबुलोज़ 1, 5 बिस्फॉस्फेट


Explanation:

रुबिस्को अर्थात् रिबुलोज बिस्फॉस्फेट कार्बोक्सिलेज-ऑक्सीजनेज पृथ्वी का सर्वाधिक प्रचुर एन्जाइम माना जाता है और इसका क्रियाधार रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट है, जो पाँच कार्बन वाला यौगिक है। केल्विन चक्र के कार्बन स्थिरीकरण चरण में यह एन्जाइम कार्बन डाइऑक्साइड को रिबुलोज 1,5-बिस्फॉस्फेट से जोड़ता है, जिससे तीन कार्बन वाले फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल के दो अणु बनते हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसमें ऑक्सीजन के प्रति भी बन्धुता होती है, और ऑक्सीजन की अधिक सान्द्रता में यह प्रकाश-श्वसन आरम्भ कर देता है, जिससे उत्पादकता घट जाती है।

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Q12. साइकस की प्रवालाभ जड़ों में शैवाल क्षेत्र पाया जाता है :

Right Answer: मध्य वल्कुट में


Explanation:

साइकस में सामान्य मूसला जड़ों के अतिरिक्त विशेष प्रकार की प्रवालाभ जड़ें पाई जाती हैं, जो मूँगे जैसी शाखित होकर भूमि की सतह की ओर ऊपर उठती हैं। इनकी अनुप्रस्थ काट में मध्य वल्कुट में एक विशिष्ट शैवाल क्षेत्र दिखाई देता है, जहाँ एनाबीना तथा नॉस्टॉक जैसे नील-हरित शैवाल श्लेष्मा से भरी गुहा में निवास करते हैं। ये शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर पौधे को नाइट्रोजनयुक्त यौगिक देते हैं और बदले में आश्रय एवं भोजन प्राप्त करते हैं। यह सहजीविता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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Q13. निम्नलिखित में से कौन - सा ‘क्राई’ जीन मक्का छेदक को नियंत्रित करने में उपयोग होता है ?

Right Answer: क्राई I एबी


Explanation:

बैसिलस थुरिंजिएंसिस नामक जीवाणु से प्राप्त क्राई जीन विषैले प्रोटीन क्रिस्टल का कूटलेखन करते हैं, जिन्हें विभिन्न फसलों में स्थानान्तरित कर कीट-प्रतिरोधी बीटी किस्में बनाई जाती हैं। इनमें से क्राई I एबी जीन मक्का छेदक अर्थात् कॉर्न बोरर को नियंत्रित करने में प्रयुक्त होता है। क्राई I एसी तथा क्राई II एबी जीन कपास के गोलक कीट को नियंत्रित करते हैं, जिनसे बीटी कपास विकसित हुई, तथा क्राई III एबी भृंग को नियंत्रित करता है। यह प्रोटीन कीट की क्षारीय आँत में सक्रिय होकर उपकला कोशिकाओं में छिद्र बना देता है।

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Q14. निम्न में से गलत कथन को चुनें :

Right Answer: भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जाति विविधता बढ़ती जाती है।


Explanation:

पहला कथन गलत है, क्योंकि जाति विविधता भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ती नहीं, बल्कि घटती जाती है; इसे अक्षांशीय प्रवणता कहा जाता है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विविधता अधिक होने के कारण हैं — वहाँ लम्बे समय तक हिमयुग जैसी उथल-पुथल नहीं हुई, अतः जातियों को विकसित होने के लिए स्थिर एवं दीर्घ काल मिला; वहाँ का वातावरण अपेक्षाकृत स्थिर एवं कम मौसमी है; और वहाँ सौर ऊर्जा अधिक उपलब्ध होने से उत्पादकता ऊँची रहती है। अमेजन वर्षा वन पृथ्वी का सर्वाधिक जैव विविधतापूर्ण क्षेत्र है और कीट सर्वाधिक जाति-समृद्ध जन्तु वर्ग हैं।

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Q15. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I (उपयोगी वस्तु)
(a) कुनैन
(b) कॉफी
(c) चाय
(d) हींग

कॉलम-II (स्रोत)
(i) मूल
(ii) पर्ण
(iii) बीज
(iv) छाल

Right Answer: (a)-(iv), (b)-(iii), (c)-(ii), (d)-(i)


Explanation:

कुनैन सिनकोना वृक्ष की छाल से प्राप्त होने वाला क्षारोद है और यह मलेरिया की प्राचीनतम प्रभावी औषधि रही है। कॉफी कॉफिया अरेबिका के बीजों से बनती है, जिन्हें भूनकर एवं पीसकर उपयोग में लाया जाता है। चाय कैमेलिया साइनेन्सिस की कोमल पत्तियों तथा कलिकाओं से तैयार की जाती है, जिन्हें विभिन्न स्तर तक ऑक्सीकृत कर हरी अथवा काली चाय बनाई जाती है। हींग फेरुला एसाफोटिडा की मोटी मूल एवं प्रकन्द से निकलने वाले दूधिया रस को सुखाकर प्राप्त की जाती है और भारतीय भोजन में पाचक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है।

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Q16. एक प्ररूपी आवृतबीजीय भ्रूण - कोष परिपक्व होने पर होता है :

Right Answer: 8 केन्द्रीय व 7 कोशिकीय


Explanation:

प्ररूपी आवृतबीजी भ्रूणकोष का विकास पॉलीगोनम प्रकार का होता है, जिसमें गुरुबीजाणु का केन्द्रक तीन क्रमिक समसूत्री विभाजनों से आठ केन्द्रक उत्पन्न करता है। इसके बाद कोशिका-भित्तियाँ बनने पर सात कोशिकाएँ बनती हैं, क्योंकि दो ध्रुवीय केन्द्रक एक ही बड़ी केन्द्रीय कोशिका में रह जाते हैं। इस प्रकार परिपक्व भ्रूणकोष आठ केन्द्रकीय तथा सात कोशिकीय होता है। बीजाण्डद्वार की ओर तीन कोशिकाओं का अण्ड समुच्चय होता है, जिसमें एक अण्डकोशिका एवं दो सहायक कोशिकाएँ रहती हैं, निभाग की ओर तीन प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ तथा बीच में द्विकेन्द्रकी केन्द्रीय कोशिका।

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Q17. निम्नलिखित में से कौन - सा कथन ब्रायोफाइटा के लिए सत्य नहीं है ?

Right Answer: लैंगिक जनन असमयुग्मकी प्रकार का होता है।


Explanation:

ब्रायोफाइटा में युग्मकोद्भिद प्रावस्था प्रमुख एवं स्वपोषी होती है, जबकि बीजाणुद्भिद उस पर पोषण के लिए आश्रित रहता है। इनमें नर युग्मक चलायमान होते हैं, अतः निषेचन के लिए जल अनिवार्य है और इसी कारण इन्हें ‘पादप जगत के उभयचर’ कहा जाता है। अर्धसूत्री विभाजन केवल बीजाणुधानी की बीजाणु मातृ कोशिकाओं में होता है। चौथा कथन असत्य है, क्योंकि इनका लैंगिक जनन असमयुग्मकी नहीं बल्कि विषमयुग्मकी अर्थात् अण्डयुग्मकी प्रकार का होता है, जिसमें बड़ा निश्चल अण्ड तथा छोटा चलायमान पुंयुग्मक भाग लेते हैं।

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Q18. GEAC का पूरा नाम क्या है ?

Right Answer: जेनेटिक इंजीनियरिंग अपू्रवल कमेटी


Explanation:

जी०ई०ए०सी० का पूरा नाम जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रूवल कमेटी है, जिसे अब आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति कहा जाता है। यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्तर्गत कार्य करने वाली शीर्ष नियामक संस्था है। इसका दायित्व आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित जीवों तथा उनसे बने उत्पादों से जुड़े अनुसंधान, बड़े पैमाने पर उपयोग, पर्यावरणीय निर्मुक्ति एवं व्यावसायिक खेती के प्रस्तावों की वैज्ञानिक जाँच कर स्वीकृति देना है। यह यह भी देखती है कि ऐसे अनुसंधान जनसामान्य के लिए सुरक्षित हों।

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Q19. निम्नलिखित में से कौन - सा एक लिंग सहलग्न मेंडलीय विकार है ?

Right Answer: हीमोफीलिया


Explanation:

हीमोफीलिया एक लिंग सहलग्न अप्रभावी मेंडलीय विकार है, जिसका जीन X गुणसूत्र पर स्थित होता है। इसमें रक्त स्कन्दन कारक की कमी के कारण एक बार रक्तस्राव आरम्भ होने पर वह लम्बे समय तक नहीं रुकता। पुरुष में केवल एक X गुणसूत्र होने के कारण एक ही उत्परिवर्ती युग्मविकल्पी से रोग प्रकट हो जाता है, जबकि स्त्री तभी रोगी होती है जब दोनों X पर उत्परिवर्तन हो; अतः स्त्रियाँ प्रायः वाहक रहती हैं। इसके विपरीत फीनाइल कीटोनूरिया, दात्र कोशिका अरक्तता तथा थैलेसीमिया अलिंगसूत्री विकार हैं।

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Q20. एक पादप प्रजाति के लिए निम्नलिखित कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें :

(a) पारिज आकारिकी रूप से भिन्न होते हैं और अंतःप्रजननक्षम होते हैं।

(b) पारिस्थितिक प्ररूप आनुवंशिक रूप से भिन्न होते हैं और अंतःप्रजननक्षम होते हैं।

Right Answer: (a) व (b) दोनों सही हैं।


Explanation:

दोनों कथन सही हैं। पारिज अर्थात् इकैड किसी एक ही प्रजाति की वे आबादियाँ हैं जो भिन्न आवासों में रहने के कारण आकारिकी में भिन्न दिखाई देती हैं, किन्तु यह भिन्नता केवल पर्यावरणजन्य होती है; इन्हें समान परिस्थिति में उगाने पर अन्तर मिट जाता है और वे परस्पर सरलता से प्रजनन कर लेती हैं। पारिस्थितिक प्ररूप अर्थात् इकोटाइप वे आबादियाँ हैं जो किसी विशिष्ट आवास के लिए आनुवंशिक रूप से अनुकूलित हो चुकी हैं, अतः उनका अन्तर वंशागत होता है, फिर भी वे एक ही प्रजाति की होने के कारण अन्तःप्रजननक्षम बनी रहती हैं।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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