Biology: 60 MCQs with Answers

Biology MCQ Questions
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Biology MCQs on cell biology, genetics, plant and animal physiology, ecology and biotechnology। जीव विज्ञान विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Q1. निम्नलिखित में से कौन - सी ह्यूमस की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: यह बहुत तेजी से विघटित होता है।

ह्यूमस मृदा में उपस्थित वह गहरे रंग का अनाकार कार्बनिक पदार्थ है जो पौधों एवं जन्तुओं के अवशेषों के सूक्ष्मजीवीय अपघटन से बनता है। यह कोलाइडल प्रकृति का होता है, इसलिए जल तथा पोषक तत्वों को अपनी सतह पर रोककर उनका भण्डार बना रहता है और मृदा की धनायन विनिमय क्षमता बढ़ाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि ह्यूमस अत्यन्त धीरे-धीरे विघटित होता है; यही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जिससे वह लम्बे समय तक मृदा की संरचना, वायु-संचार एवं जलधारण क्षमता को बनाए रखता है और पोषक तत्व क्रमशः मुक्त करता रहता है।

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Q2. निम्नलिखित में से कौन - सा अमीनो अम्ल केवल एक प्रकूट द्वारा कूटलेखित होता है ?

Right Answer: ट्रिप्टोफैन

आनुवंशिक कूट अपह्रासित होता है, अर्थात् अधिकांश अमीनो अम्लों के लिए एक से अधिक प्रकूट होते हैं। इसका अपवाद केवल दो अमीनो अम्ल हैं — ट्रिप्टोफैन, जिसका एकमात्र प्रकूट UGG है, तथा मेथियोनीन, जिसका एकमात्र प्रकूट AUG है और जो प्रारम्भन प्रकूट भी है। इसके विपरीत सेरीन तथा ल्यूसीन के छह-छह प्रकूट होते हैं, वैलीन एवं ग्लाइसीन के चार-चार। अपह्रासन का जैविक लाभ यह है कि तीसरे क्षार में होने वाला उत्परिवर्तन प्रायः अमीनो अम्ल नहीं बदलता, जिसे मूक उत्परिवर्तन कहते हैं।

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Q3. एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में यदि नेत्रिका - लेंस 10 X तथा अभिदृश्यक लेंस 40 X हो, तो कुल आवर्धन क्या होगा ?

Right Answer: 400 X

संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में प्रतिबिम्ब का निर्माण दो चरणों में होता है — पहले अभिदृश्यक लेंस वस्तु का वास्तविक एवं आवर्धित प्रतिबिम्ब बनाता है और फिर नेत्रिका लेंस उसे और आवर्धित कर आभासी प्रतिबिम्ब देता है। अतः कुल आवर्धन दोनों लेंसों के आवर्धनों के गुणनफल के बराबर होता है। यहाँ नेत्रिका का आवर्धन 10 गुना तथा अभिदृश्यक का 40 गुना है, इसलिए कुल आवर्धन 10 गुणा 40 अर्थात् 400 गुना होगा। ध्यातव्य है कि आवर्धन बढ़ाने से विभेदन क्षमता नहीं बढ़ती; वह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य तथा संख्यात्मक द्वारक पर निर्भर करती है।

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Q4. रिचमंड - लैंग प्रभाव जुड़ा हुआ है :

Right Answer: जीर्णता में देरी से

रिचमंड-लैंग प्रभाव साइटोकाइनिन हार्मोन से सम्बन्धित है। 1957 में रिचमंड तथा लैंग ने प्रयोग कर दिखाया कि यदि जैन्थियम की कटी हुई पत्तियों पर काइनेटिन का घोल लगाया जाए तो वे लम्बे समय तक हरी बनी रहती हैं और उनमें प्रोटीन एवं क्लोरोफिल का अपघटन विलम्बित हो जाता है। इस प्रकार साइटोकाइनिन जीर्णता को टालकर पत्ती की आयु बढ़ाता है, इसीलिए इसे जीर्णता-रोधी हार्मोन कहा जाता है। यह पोषक तत्वों को उपचारित भाग की ओर आकर्षित भी करता है, जिसे साइटोकाइनिन-प्रेरित पोषक गतिशीलता कहते हैं।

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Q5. कणों या अणुओं का उच्च सान्द्रता क्षेत्र से निम्न सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गति करना कहलाता है : बिन्दु स्राव

Right Answer: विसरण

कणों अथवा अणुओं का उनके उच्च सान्द्रता वाले क्षेत्र से निम्न सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर गमन विसरण कहलाता है। यह एक निष्क्रिय प्रक्रिया है, जिसमें कोई ऊर्जा व्यय नहीं होती और गति अणुओं की स्वाभाविक तापीय गतिज ऊर्जा से होती है। पौधों में गैसों का आदान-प्रदान, वाष्पोत्सर्जन तथा सुगन्ध का फैलना इसी के उदाहरण हैं। इसके विपरीत परासरण अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार केवल विलायक का विसरण है, अन्तःशोषण कोलाइडी पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है, तथा बिन्दुस्राव पत्तियों के किनारों से तरल जल का निकलना है।

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Q6. MN रक्त समूह प्रणाली के लिए M और N की आवृत्तियाँ क्रमशः 0.6 और 0.4 हैं। MN रक्त समूह वाले व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति संभवतः होगी :

Right Answer: 48%

हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत के अनुसार यदि किसी द्वि-युग्मविकल्पी लक्षण में एक युग्मविकल्पी की आवृत्ति p तथा दूसरे की q हो, तो विषमयुग्मजी व्यक्तियों की अपेक्षित आवृत्ति 2pq होती है। MN रक्त समूह प्रणाली सह-प्रभाविता का उत्तम उदाहरण है, जिसमें विषमयुग्मजी व्यक्ति MN समूह के होते हैं। यहाँ M की आवृत्ति 0.6 तथा N की 0.4 दी गई है, अतः MN की आवृत्ति 2 गुणा 0.6 गुणा 0.4 अर्थात् 0.48 होगी, जो प्रतिशत में 48 प्रतिशत बैठती है। इसी प्रकार M समूह 36 प्रतिशत तथा N समूह 16 प्रतिशत होगा।

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Q7. बीजों की सुषुप्तावस्था का कारण है :

Right Answer: सभी विकल्प सही हैं।

बीज सुषुप्तावस्था वह अवस्था है जिसमें अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर भी जीवित बीज अंकुरित नहीं होता। इसके अनेक कारण होते हैं और प्रश्न में दिए गए सभी विकल्प सही हैं। कठोर बीजचोल जल तथा ऑक्सीजन के लिए अपारगम्य हो सकता है, जैसा अनेक फलीदार पौधों में होता है। कुछ बीजों में भ्रूण बिखराव के समय अपरिपक्व रहता है और उसे परिपक्व होने के लिए समय चाहिए। तीसरा कारण एब्सिसिक अम्ल, फीनॉल एवं पैरा-एस्कॉर्बिक अम्ल जैसे रासायनिक अवरोधकों की उपस्थिति है। सुषुप्तावस्था बीज को प्रतिकूल ऋतु में अंकुरित होने से बचाती है।

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Q8. नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही जोड़ी अथवा जोड़ियाँ चुनें :

(a) मिनामाता रोग – पारा
(b) बाइसिनोसिस रोग – कपास की धूल
(c) नॉक-नी सिंड्रोम – नाइट्रेट्स
(d) मेटहीमोग्लोबिनेमिया – फ्लोराइड्स

Right Answer: (a) व (b)

मिनामाता रोग जापान में मिथाइल पारे से दूषित मछली खाने से हुआ था और इसमें तंत्रिका तंत्र गम्भीर रूप से प्रभावित होता है, अतः यह युग्म सही है। बाइसिनोसिस कपास मिलों में कपास की महीन धूल लम्बे समय तक श्वास में जाने से होने वाला फेफड़ों का रोग है, इसलिए यह भी सही है। शेष दोनों युग्म आपस में उलट गए हैं — नॉक-नी सिंड्रोम अर्थात् घुटनों का भीतर की ओर मुड़ जाना फ्लोराइड की अधिकता से होता है, जबकि मेटहीमोग्लोबिनेमिया अर्थात् ब्लू बेबी सिंड्रोम पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता से होता है।

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Q9. ई० कोलाई में आधार युग्मों की संख्या की गणना करें, यदि इसके डी० एन० ए० की लम्बाई 1.7 मिमी है :

Right Answer: 5 × 10 6 bp

द्विकुण्डलित डी०एन०ए० में दो क्रमागत क्षार-युग्मों के बीच की दूरी 0.34 नैनोमीटर अर्थात् 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 मीटर होती है। यहाँ ई० कोलाई के डी०एन०ए० की लम्बाई 1.7 मिलीमीटर दी गई है, जो 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 मीटर के बराबर है। क्षार-युग्मों की संख्या ज्ञात करने के लिए कुल लम्बाई को एक क्षार-युग्म की लम्बाई से भाग दिया जाता है। इस प्रकार 1.7 गुणा 10 की घात ऋण 3 को 0.34 गुणा 10 की घात ऋण 9 से भाग देने पर लगभग 5 गुणा 10 की घात 6 क्षार-युग्म प्राप्त होते हैं।

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Q10. आवृतबीजियों में शर्करा का स्थानांतरण किस रूप में होता है ?

Right Answer: सुक्रोज़

आवृतबीजी पौधों में शर्करा का स्थानान्तरण मुख्यतः सुक्रोज के रूप में होता है और यह कार्य पोषवाह अर्थात् फ्लोएम की चालनी नलिकाओं द्वारा किया जाता है। सुक्रोज इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह अनअपचायक द्विशर्करा है, अतः रासायनिक रूप से अपेक्षाकृत निष्क्रिय एवं स्थायी रहती है, जल में अत्यधिक घुलनशील है और परिवहन के दौरान उपापचयी क्रियाओं में सरलता से नहीं टूटती। मुंच की दाब-प्रवाह परिकल्पना के अनुसार स्रोत पर सुक्रोज के भरने तथा गंतव्य पर उतरने से उत्पन्न दाब-प्रवणता ही इस प्रवाह को चलाती है।

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Published: | Last Updated: | Total Questions: 60
Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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