Biology: 60 MCQs with Answers
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0%Q21. विलोडित हौज बायोरिएक्टर को डिज़ाइन किया गया है :
Right Answer: पूरे बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की उपलब्धता करने के लिए।
विलोडित हौज बायोरिएक्टर अर्थात् स्टर्ड टैंक बायोरिएक्टर सामान्यतः बेलनाकार होता है और इसमें एक विलोडक लगा रहता है, जिसका मुख्य कार्य सम्पूर्ण बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह विलोडक संवर्धन माध्यम को निरन्तर मिलाता रहता है, जिससे कोशिकाएँ, पोषक तत्व एवं गैस समान रूप से वितरित रहते हैं और स्थानीय ताप-प्रवणता समाप्त हो जाती है। इसके साथ वायु प्रस्फुटन तंत्र, ताप एवं पी-एच नियंत्रण प्रणाली, प्रतिफेन नियंत्रण तथा प्रतिदर्श निकास द्वार लगे रहते हैं, जिससे इष्टतम वृद्धि दशाएँ बनी रहती हैं।
Q22. लैक प्रचालेक (ओपेरॉन) का दमनकारी प्रोटीन द्वारा नियमन माना जाता है :
Right Answer: ऋणात्मक नियमन
जैकब एवं मोनो द्वारा वर्णित लैक प्रचालेक में तीन संरचनात्मक जीन — z, y तथा a — एक ही प्रवर्तक के नियंत्रण में रहते हैं। नियामक जीन से बना दमनकारी प्रोटीन प्रचालक स्थल से जुड़कर आर०एन०ए० पॉलिमरेज को आगे बढ़ने से रोक देता है, जिससे प्रतिलेखन बन्द रहता है। चूँकि यहाँ नियंत्रक अणु जीन-अभिव्यक्ति को रोकता है, इसलिए इसे ऋणात्मक नियमन कहा जाता है। लैक्टोज उपस्थित होने पर एलोलैक्टोज प्रेरक के रूप में दमनकारी से जुड़कर उसकी आकृति बदल देता है और वह प्रचालक से हट जाता है, जिससे प्रतिलेखन आरम्भ हो जाता है।
Q23. पृथ्वी द्वारा विकीर्ण ऊर्जा का कौन - सा रूप ग्रीन हाउस गैसों द्वारा अवशोषित हो जाता है, जिससे वैश्विक उष्णता होती है ?
Right Answer: अवरक्त किरणें
सूर्य से आने वाली ऊर्जा मुख्यतः लघु तरंगदैर्घ्य वाले दृश्य प्रकाश के रूप में वायुमंडल को पार कर पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और उसे गरम करती है। गरम पृथ्वी इस ऊर्जा को दीर्घ तरंगदैर्घ्य वाली अवरक्त किरणों के रूप में पुनः विकीर्ण करती है। कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, जलवाष्प तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी ग्रीनहाउस गैसें इन्हीं अवरक्त किरणों को अवशोषित कर लेती हैं और उनका कुछ भाग पुनः पृथ्वी की ओर लौटा देती हैं। इसी से निचला वायुमंडल गरम होता है और वैश्विक उष्णता की स्थिति बनती है।
Q24. जब शुद्ध जल में विलेय मिलाया जाता है, तो जल विभव का मान :
Right Answer: शून्य से कम होता है।
मानक ताप एवं दाब पर शुद्ध जल का जल विभव अधिकतम होता है और उसे परिभाषा के अनुसार शून्य माना जाता है। जब उसमें कोई विलेय घोला जाता है, तो जल के मुक्त अणुओं की सान्द्रता घट जाती है और विलेय के कण जल अणुओं को अपने चारों ओर बाँध लेते हैं; फलस्वरूप जल की मुक्त ऊर्जा तथा उसकी विसरित होने की प्रवृत्ति घट जाती है। इसी कारण विलयन का जल विभव सदैव शून्य से कम अर्थात् ऋणात्मक हो जाता है। विलेय जितना अधिक होगा, विभव उतना ही अधिक ऋणात्मक होगा और परासरण द्वारा जल उसी ओर जाएगा।
Q25. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूटों की सहायता से चुनिए :
(a) अम्लीय अमीनो अम्ल – ग्लूटामिक अम्ल
(b) क्षारीय अमीनो अम्ल – वैलीन
(c) उदासीन अमीनो अम्ल – लाइसिन
(d) एरोमैटिक अमीनो अम्ल – फेनिलएलनिन
Right Answer: (b) व (c)
अमीनो अम्लों को उनके पार्श्व समूह की प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। ग्लूटामिक अम्ल में अतिरिक्त कार्बोक्सिल समूह होने से वह अम्लीय है, अतः पहला युग्म सही है। फेनिलएलनिन में बेंजीन वलय होने से वह एरोमैटिक है, अतः चौथा युग्म भी सही है। दूसरा तथा तीसरा युग्म आपस में उलट गए हैं — वैलीन शाखित शृंखला वाला उदासीन एवं जलविरागी अमीनो अम्ल है, जबकि लाइसिन में अतिरिक्त अमीनो समूह होने के कारण वह क्षारीय है। अतः यही दोनों युग्म गलत हैं।
Q26. एक विशिष्ट समय पर प्रत्येक पोषण स्तर में पाई जाने वाली जीवित पदार्थ की मात्रा को कहा जाता है :
Right Answer: स्थित शस्य / खड़ी फसल
किसी निश्चित समय पर किसी पोषण स्तर पर उपस्थित समस्त जीवित पदार्थ की मात्रा को स्थित शस्य अथवा खड़ी फसल कहा जाता है। इसे ताजे अथवा शुष्क भार में मापा जाता है और अधिक शुद्ध तुलना के लिए शुष्क भार को प्राथमिकता दी जाती है। यह एक निश्चित क्षण की स्थिति दर्शाने वाली राशि है, अतः इसका कोई काल-आयाम नहीं होता। इसके विपरीत उत्पादकता एक दर है, जो प्रति इकाई क्षेत्र प्रति इकाई समय में उत्पन्न जैवभार बताती है। सकल प्राथमिक उत्पादकता में से श्वसन-हानि घटाने पर शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता प्राप्त होती है।
Q27. निम्नलिखित में से कौन - सा एक समबीजाणुक टेरिडोफाइट पादप है ?
Right Answer: इक्वीसिटम
टेरिडोफाइट पादपों को बीजाणुओं की प्रकृति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। समबीजाणुक पौधों में एक ही प्रकार के बीजाणु बनते हैं, जिनसे उभयलिंगी युग्मकोद्भिद विकसित होता है; इक्वीसिटम, लाइकोपोडियम, टेरिस तथा एडिएन्टम इसी वर्ग में आते हैं। विषमबीजाणुक पौधों में दो प्रकार के बीजाणु — छोटे लघुबीजाणु तथा बड़े गुरुबीजाणु — बनते हैं, जिनसे क्रमशः नर एवं मादा युग्मकोद्भिद विकसित होते हैं; सिलैजिनेला, मार्सिलिया, साल्वीनिया एवं एजोला इसके उदाहरण हैं। विषमबीजाणुता को बीज बनने की दिशा में पहला कदम माना जाता है।
Q28. सिट्रिक एसिड चक्र का कौन - सा विकर झिल्ली से बँधा होता है ?
Right Answer: सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज़
सिट्रिक अम्ल चक्र अर्थात् क्रेब्स चक्र के अधिकांश एन्जाइम माइटोकॉन्ड्रिया के आधात्री में घुली अवस्था में पाए जाते हैं, किन्तु सक्सीनेट डीहाइड्रोजीनेज इसका अपवाद है, क्योंकि वह भीतरी माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से बँधा रहता है। यह एन्जाइम सक्सीनेट को फ्यूमरेट में ऑक्सीकृत करता है और इस अभिक्रिया में NAD के स्थान पर FAD अपचयित होकर FADH2 बनाता है। यही एन्जाइम इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला के संकुल-II के रूप में भी कार्य करता है, इसीलिए यह क्रेब्स चक्र तथा ऑक्सीकारक फॉस्फोरिलीकरण दोनों को सीधे जोड़ने वाली कड़ी है।
Q29. डोनन के संतुलन में आयनों के संचय के लिए ऊर्जा का स्रोत है :
Right Answer: ऊर्जा की आवश्यकता नहीं है
डोनन संतुलन उस स्थिति का वर्णन करता है जिसमें अर्धपारगम्य झिल्ली के एक ओर ऐसे आयन उपस्थित होते हैं जो झिल्ली को पार नहीं कर सकते, जैसे कोशिका के भीतर के बड़े प्रोटीन ऋणायन। इन अविसरणीय आयनों की उपस्थिति विसरणीय आयनों के असमान वितरण को बाध्य कर देती है, ताकि दोनों ओर विद्युत उदासीनता एवं रासायनिक संतुलन बना रहे। यह पूर्णतः निष्क्रिय भौतिक-रासायनिक प्रक्रिया है, अतः इसमें आयनों के संचय के लिए किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती। यही इसे सक्रिय अभिगमन से पृथक करता है, जिसमें ए०टी०पी० व्यय होता है।
Q30. निम्नलिखित युग्मों में से सही युग्म अथवा युग्मों का चयन कीजिए :
(i) डाउन सिंड्रोम – गुणसूत्र 21 की त्रिसूत्रता
(ii) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम – XXY
(iii) टर्नर सिंड्रोम – XO
Right Answer: (i), (ii) व (iii)
तीनों युग्म सही हैं। डाउन सिंड्रोम इक्कीसवें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति अर्थात् त्रिसूत्रता से होता है, जिसमें कुल गुणसूत्र संख्या 47 हो जाती है; इसमें छोटा कद, चपटी गर्दन, अर्ध-खुला मुख तथा मन्द बुद्धि जैसे लक्षण दिखते हैं। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम में लिंग गुणसूत्र XXY होते हैं, जिससे पुरुष में स्त्रियोचित लक्षण उभरते हैं और वह प्रायः बन्ध्य रहता है। टर्नर सिंड्रोम में एक X गुणसूत्र अनुपस्थित रहता है अर्थात् XO स्थिति बनती है, जिससे स्त्री का कद छोटा रहता है, अण्डाशय अविकसित रहते हैं और वह बन्ध्य होती है।