Biology: 63 MCQs with Answers

Biology MCQ Questions and Answers - India Study Institute
Biology

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Biology MCQ Questions and Answers

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Biology MCQs on cell biology, genetics, plant and animal physiology, ecology and biotechnology। जीव विज्ञान विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Other Exam Papers:

Q41. ओस्टिक्थीज़ के संदर्भ में सही कथन अथवा कथनों का चयन कीजिए :

(a) इनमें वायु कोष उपस्थित होता है।
(b) इनमें चार जोड़ी क्लोम छिद्र दोनों ओर प्रच्छद से ढके होते हैं।
(c) त्वचा प्लेकोइड शल्कों से ढकी होती है।

Right Answer: (a) व (b)


Explanation:

ओस्टिक्थीज अर्थात् अस्थिल मछलियों का अन्तःकंकाल अस्थिमय होता है। इनमें प्रायः वायु कोष अथवा वाताशय पाया जाता है, जो उत्प्लावन नियंत्रित कर मछली को बिना निरन्तर तैरे जल में स्थिर रहने देता है। इनके शरीर के दोनों ओर चार जोड़ी क्लोम छिद्र होते हैं, जो हड्डीदार प्रच्छद अर्थात् ऑपरकुलम से ढके रहते हैं। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि प्लेकोइड शल्क उपास्थिल मछलियों अर्थात् कॉन्ड्रिक्थीज की विशेषता हैं; अस्थिल मछलियों की त्वचा साइक्लॉइड अथवा टीनॉइड शल्कों से ढकी होती है। रोहू, कतला तथा हिप्पोकैम्पस इसी वर्ग के हैं।

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Q42. मधुमक्खी पालन में उपयोग किये जाने वाले कृत्रिम छत्ते के भागों को नीचे से ऊपर की ओर क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(a) ऊपरी कक्ष
(b) मधु प्रकोष्ठ
(c) अध्यासन कक्ष
(d) रानी पृथक्कारक

Right Answer: (c), (d), (b), (a)


Explanation:

आधुनिक मधुमक्खी पालन में न्यूटन अथवा लैंगस्ट्रॉथ प्रकार का चल-फ्रेम छत्ता प्रयुक्त होता है, जिसमें भाग नीचे से ऊपर की ओर एक निश्चित क्रम में रखे जाते हैं। सबसे नीचे तलपट के ऊपर अध्यासन कक्ष होता है, जहाँ रानी अण्डे देती है और शिशु मधुमक्खियाँ पलती हैं। उसके ऊपर रानी पृथक्कारक की जाली लगाई जाती है, जिसके छिद्रों से श्रमिक तो निकल जाते हैं किन्तु बड़े आकार की रानी ऊपर नहीं जा पाती। उसके ऊपर मधु प्रकोष्ठ रखा जाता है, जहाँ शुद्ध शहद संचित होता है, और सबसे ऊपर ऊपरी कक्ष अर्थात् आवरण रहता है।

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Q43. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I
(a) ज्वारीय आयतन
(b) अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन
(c) निःश्वसन सुरक्षित आयतन
(d) अवशिष्ट आयतन

कॉलम-II
(i) 2500-3000 मिली वायु
(ii) 1000-1100 मिली वायु
(iii) 500 मिली वायु
(iv) 1100-1200 मिली वायु

Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)


Explanation:

ज्वारीय आयतन वह वायु है जो सामान्य श्वसन में एक बार अन्दर ली या बाहर छोड़ी जाती है और यह लगभग 500 मिलीलीटर होती है। अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त वायु है जिसे सामान्य अन्तःश्वसन के बाद बलपूर्वक और भीतर खींचा जा सके, जो लगभग 2500 से 3000 मिलीलीटर होती है। निःश्वसन सुरक्षित आयतन सामान्य निःश्वसन के बाद बलपूर्वक बाहर निकाली जा सकने वाली वायु है, लगभग 1000 से 1100 मिलीलीटर। अवशिष्ट आयतन वह वायु है जो अधिकतम निःश्वसन के बाद भी फेफड़ों में शेष रह जाती है, लगभग 1100 से 1200 मिलीलीटर।

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Q44. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन कीजिए :

Right Answer: ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम द्वारा साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन होता है।


Explanation:

साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम नामक कवक से किया जाता है और यह प्रतिरक्षा-निरोधक औषधि के रूप में अंग-प्रत्यारोपण के रोगियों में प्रयुक्त होती है, जिससे प्रतिरोपित अंग अस्वीकृत न हो। शेष तीनों कथन गलत हैं। एस्पर्जिलस नाइजर से एसीटिक अम्ल नहीं, बल्कि सिट्रिक अम्ल प्राप्त होता है; एसीटिक अम्ल एसीटोबैक्टर एसिटी से बनता है। स्टैटिन्स का उत्पादन मोनैस्कस पर्पुरियस नामक यीस्ट से होता है और वे रक्त कोलेस्टेरॉल घटाती हैं। लैक्टिक अम्ल के व्यावसायिक उत्पादन में लैक्टोबैसिलस जीवाणु का उपयोग होता है।

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Q45. निम्नलिखित में से गलत जोड़ा चुनिए : सामान्य जुकाम हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी

Right Answer: सामान्य जुकाम – हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी


Explanation:

सामान्य जुकाम किसी जीवाणु से नहीं, बल्कि राइनोवाइरस नामक विषाणु से होता है, जिसकी दो सौ से अधिक किस्में ज्ञात हैं; अतः उसे हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी से जोड़ना गलत है। हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी तो न्यूमोनिया एवं मस्तिष्कावरण शोथ से सम्बद्ध जीवाणु है। शेष तीनों जोड़े सही हैं — मलेरिया प्लैज़्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से होता है और मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है, दाद माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन तथा एपिडर्मोफाइटन नामक कवकों से होता है, और हस्तिपाद वुचेरेरिया बैंक्रोफ्टाई नामक फाइलेरिया कृमि से होता है।

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Q46. गुणसूत्रों का एक एकल सेट जिसमें एक प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की एक प्रति होती है, कहलाता है :

Right Answer: एकगुणित सेट


Explanation:

गुणसूत्रों का वह एकल समुच्चय जिसमें किसी प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की केवल एक प्रति उपस्थित हो, एकगुणित अर्थात् मोनोप्लॉइड सेट कहलाता है और इसे x से निरूपित किया जाता है। यह उस प्रजाति का आधारभूत गुणसूत्र समुच्चय होता है। इसके विपरीत अगुणित अर्थात् हैप्लॉइड संख्या n युग्मक में उपस्थित गुणसूत्रों की वास्तविक संख्या है। द्विगुणित प्रजातियों में x तथा n बराबर होते हैं, किन्तु बहुगुणित प्रजातियों में नहीं; जैसे षड्गुणित गेहूँ में x छह होता है परन्तु n इक्कीस, क्योंकि उसमें तीन जीनोम सम्मिलित हैं।

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Q47. यकृत निवाहिका तंत्र प्रारंभ होता है :

Right Answer: पाचन तंत्र से यकृत


Explanation:

यकृत निवाहिका तंत्र एक विशिष्ट शिरा-तंत्र है, जो पाचन तंत्र से आरम्भ होकर यकृत में समाप्त होता है। आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, अग्न्याशय तथा प्लीहा से आने वाली शिराएँ मिलकर यकृत निवाहिका शिरा बनाती हैं, जो अवशोषित पोषक तत्वों से भरा रक्त सीधे हृदय भेजने के बजाय पहले यकृत में ले जाती है। यहाँ यकृत ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है, अमीनो अम्लों का विऐमीनीकरण करता है तथा विषैले पदार्थों एवं औषधियों को निष्प्रभावी बनाता है। यह निवाहिका तंत्र इसलिए कहलाता है क्योंकि इसके दोनों सिरों पर केशिका जाल होता है।

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Q48. निम्नलिखित में से कौन - सा लक्षण सभी साइनोबैक्टीरिया के लिए सत्य नहीं है ?

Right Answer: उनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने की क्षमता होती है।


Explanation:

साइनोबैक्टीरिया अर्थात् नील-हरित शैवाल प्रोकैरियोटिक जीव हैं, अतः उनमें झिल्लीबद्ध केन्द्रक तथा अन्य झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते। उनमें क्लोरोफिल-a पाया जाता है, जिससे वे ऑक्सीजन मुक्त करने वाला प्रकाश संश्लेषण करते हैं, और उनकी कोशिका भित्ति सेलुलोज की नहीं बल्कि पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। पहला कथन सभी के लिए सत्य नहीं है, क्योंकि नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता केवल उन्हीं जातियों में होती है जिनमें हेटरोसिस्ट नामक विशिष्ट मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ बनती हैं, जैसे एनाबीना एवं नॉस्टॉक; अनेक अन्य साइनोबैक्टीरिया यह कार्य नहीं करते।

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Q49. निम्नलिखित में से कौन - सा लाख का सर्वाधिक शुद्ध रूप है ?

Right Answer: शैल लाख


Explanation:

लाख लैसिफर लैका नामक कीट के स्राव से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक रेजिन है, जिसे कुसुम, पलाश तथा बेर जैसे पोषक वृक्षों की टहनियों से खुरचकर एकत्र किया जाता है। इसका कच्चा रूप छड़ी लाख कहलाता है, जिसे कूटकर एवं धोकर दानेदार बीज लाख प्राप्त होता है। बीज लाख को गरम कर छानने तथा पतली चादर के रूप में फैलाकर सुखाने पर शैल लाख बनता है, जो लाख का सर्वाधिक शुद्ध एवं परिष्कृत रूप है। शैल लाख का उपयोग वार्निश, पॉलिश, विद्युत रोधक, सीलिंग वैक्स तथा खाद्य पदार्थों की परत चढ़ाने में होता है।

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Q50. विदलन के रेखांशिक तल में, विदलन खाँच का निर्माण होता है :

Right Answer: जन्तु ध्रुव व पीतक ध्रुव के मध्य से गुजरती हुई


Explanation:

विदलन के तल के आधार पर उसे रेखांशिक तथा अक्षांशिक वर्गों में बाँटा जाता है। रेखांशिक अथवा मध्याह्नीय विदलन में विदलन खाँच अण्डे के जन्तु ध्रुव से आरम्भ होकर उसके केन्द्र से गुजरती हुई पीतक ध्रुव तक पहुँचती है, ठीक उसी प्रकार जैसे पृथ्वी पर देशान्तर रेखाएँ दोनों ध्रुवों को जोड़ती हैं। इससे बनने वाली दोनों कोशिकाएँ प्रायः समान आकार की होती हैं और दोनों में पीतक का वितरण भी समान रहता है। इसके विपरीत अक्षांशिक विदलन की खाँच विषुवतीय तल के समानान्तर चलती है और मेढक में यह विषुवतीय तल के कुछ ऊपर पड़ती है।

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Q51. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I
(a) ओपेरिन
(b) लैमार्क
(c) डार्विन
(d) ह्यूगो डीव्रीज

कॉलम-II
(i) अंगों का उपयोग व अनुपयोग
(ii) प्राकृतिक चयन द्वारा विकास
(iii) साल्टेशन
(iv) आजीवात्जनन

Right Answer: (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)


Explanation:

रूसी वैज्ञानिक ए० आई० ओपेरिन ने हैल्डेन के साथ आजीवात्जनन अर्थात् रासायनिक उद्विकास का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार आदिम पृथ्वी की अपचायक परिस्थितियों में सरल अकार्बनिक अणुओं से क्रमशः कार्बनिक अणु एवं जीवन उत्पन्न हुआ; मिलर एवं यूरे ने इसे प्रयोगशाला में सिद्ध किया। लैमार्क ने अंगों के उपयोग एवं अनुपयोग तथा उपार्जित लक्षणों की वंशागति की बात कही। डार्विन ने विभिन्नता, जीवन-संघर्ष तथा प्राकृतिक चयन द्वारा विकास की व्याख्या की। ह्यूगो डीव्रीज ने ईवनिंग प्रिमरोज पर कार्य कर उत्परिवर्तनवाद अर्थात् साल्टेशन का सिद्धांत दिया।

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Q52. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :

कॉलम-I
(a) विभज्योतक ऊतक
(b) सरल ऊतक
(c) स्रावी ऊतक
(d) जटिल ऊतक

कॉलम-II
(i) दृढ़ोतक
(ii) जलरंध्र
(iii) पोषवाह
(iv) एधा

Right Answer: (a)-(iv), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iii)


Explanation:

एधा अर्थात् कैम्बियम एक पार्श्व विभज्योतक है, जिसकी कोशिकाएँ निरन्तर विभाजित होकर द्वितीयक वृद्धि उत्पन्न करती हैं। दृढ़ोतक सरल स्थायी ऊतक है, क्योंकि वह केवल एक ही प्रकार की मोटी लिग्निनयुक्त मृत कोशिकाओं से बना होता है और पौधे को यांत्रिक दृढ़ता देता है। जलरंध्र अर्थात् हाइडेथोड स्रावी ऊतक का उदाहरण है, जिससे बिन्दुस्राव द्वारा तरल जल बाहर निकलता है। पोषवाह अर्थात् फ्लोएम जटिल ऊतक है, क्योंकि वह चालनी नलिका, सखी कोशिका, फ्लोएम मृदूतक तथा फ्लोएम रेशा — इन विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनता है।

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Q53. प्रोस्टेग्लैंडिन व्युत्पन्न हैं :

Right Answer: वसा अम्ल के


Explanation:

प्रोस्टेग्लैंडिन वसा अम्ल से व्युत्पन्न होने वाले जैव-सक्रिय यौगिक हैं, जो बीस कार्बन वाले एरेकिडोनिक अम्ल से साइक्लो-ऑक्सीजिनेज एन्जाइम की क्रिया द्वारा बनते हैं। ये ईकोसैनॉइड वर्ग में आते हैं और इन्हें स्थानीय हार्मोन कहा जाता है, क्योंकि ये किसी विशिष्ट ग्रंथि में नहीं बनते तथा रक्त द्वारा दूर तक न जाकर अपने उत्पत्ति-स्थल के आसपास ही कार्य करते हैं। ये शोथ, ज्वर, पीड़ा-संवेदन, रक्त वाहिनियों के संकुचन-प्रसार, प्लेटलेट एकत्रीकरण तथा गर्भाशय संकुचन में भूमिका निभाते हैं। एस्पिरिन इन्हीं के संश्लेषण को अवरुद्ध कर पीड़ा एवं ज्वर घटाती है।

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Q54. निम्नलिखित में से गलत जोड़ी अथवा जोड़ियों को नीचे दिये गये कूट की सहायता से चुनें :

(a) थियोफ्रेस्टस – स्पीशीज प्लांटेरम
(b) लिनियस – हिस्टोरिया प्लांटेरम
(c) गास्पर्ड बॉहिन – पीनेक्स थियेट्री बोटेनिसाय
(d) बेंथम और हुकर – जेनेरा प्लांटेरम

Right Answer: (a) और (b)


Explanation:

पहले दो युग्म आपस में उलट गए हैं, अतः वही गलत हैं। यूनानी विद्वान थियोफ्रेस्टस, जिन्हें वनस्पति विज्ञान का जनक कहा जाता है, ने ‘हिस्टोरिया प्लांटेरम’ की रचना की और लगभग पाँच सौ पौधों का वर्णन किया। कैरोलस लिनियस ने 1753 में ‘स्पीशीज प्लांटेरम’ प्रकाशित की, जिससे द्विनाम पद्धति स्थापित हुई। शेष दोनों युग्म सही हैं — गास्पर्ड बॉहिन ने ‘पीनेक्स थियेट्री बोटेनिसाय’ लिखी, जिसमें लिनियस से पूर्व ही द्विपद नामकरण का संकेत मिलता है, तथा बेंथम एवं हुकर ने ‘जेनेरा प्लांटेरम’ में प्राकृतिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया।

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Q55. निम्नलिखित में से कौन - सा रोग हाइपरथायरॉइडिज़्म के कारण नहीं होता है ?

Right Answer: हाशिमोटो रोग


Explanation:

अवटु ग्रंथि की अतिसक्रियता अर्थात् हाइपरथायरॉइडिज्म से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। ग्रेव्स रोग, जिसे बेस्डो रोग तथा एक्सोफ्थैल्मिक गॉयटर भी कहा जाता है, इसका सर्वाधिक सामान्य रूप है, जिसमें नेत्रगोलक बाहर की ओर उभर आते हैं। प्लमर रोग अर्थात् विषाक्त बहुगुलिकीय गलगण्ड भी अतिसक्रियता से ही होता है। इसके विपरीत हाशिमोटो रोग एक स्वप्रतिरक्षी अवस्था है, जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली अवटु ग्रंथि पर आक्रमण कर उसे नष्ट करने लगती है और परिणामस्वरूप हाइपोथायरॉइडिज्म अर्थात् हार्मोन की कमी हो जाती है।

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Q56. निम्नलिखित में से कौन - सा कथन गलत है ?

Right Answer: संवर्धनीय मछली विपुल प्रजनक नहीं होनी चाहिए।


Explanation:

मत्स्य संवर्धन के लिए चुनी जाने वाली मछली में कुछ निश्चित गुण अपेक्षित होते हैं। वह तीव्र गति से बढ़ने वाली होनी चाहिए, ताकि कम समय में विपणन योग्य आकार प्राप्त हो; शाकाहारी अथवा प्लवक-भक्षी होनी चाहिए, जिससे आहार-लागत कम रहे; तथा स्वादिष्ट होनी चाहिए, अन्यथा बाजार में माँग नहीं बनेगी। चौथा कथन गलत है, क्योंकि संवर्धनीय मछली का विपुल प्रजनक होना वांछनीय गुण है — इससे पर्याप्त मात्रा में अंगुलिकाएँ सरलता एवं कम लागत पर उपलब्ध हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त उसका रोग-प्रतिरोधी एवं सीमित जल में अनुकूलनशील होना भी आवश्यक है।

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Q57. फलों और बीजों के कठोर और पथरीले छिलकों की विशेषता होती है :

Right Answer: दृढ़कोशिकाएँ


Explanation:

फलों एवं बीजों के कठोर तथा पथरीले छिलके दृढ़कोशिकाओं अर्थात् स्क्लेरीड्स से बनते हैं। ये दृढ़ोतक का एक प्रकार हैं, जिनकी कोशिका भित्ति लिग्निन के जमाव से अत्यधिक मोटी हो जाती है, गुहा लगभग समाप्त हो जाती है और परिपक्व होने पर कोशिका मृत हो जाती है। इनकी भित्ति में सरल गर्त स्पष्ट दिखाई देते हैं। नारियल, अखरोट तथा बादाम के कठोर आवरण, नाशपाती के गूदे के कणिकामय पिण्ड तथा फलियों के बीजचोल इन्हीं से बनते हैं। ये बीज को यांत्रिक चोट, सूखने तथा कीटों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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Q58. मटर में निम्नलिखित में से किस लक्षण का अध्ययन मेंडल द्वारा नहीं किया गया था ?

Right Answer: पुष्प का आकार


Explanation:

ग्रेगर मेंडल ने उद्यान मटर पर अपने प्रयोगों में सात विपर्यासी लक्षण चुने — तने की लम्बाई, पुष्प का रंग, पुष्प की स्थिति, बीज का आकार, बीज का रंग, फली का आकार तथा फली का रंग। पुष्प का आकार इस सूची में सम्मिलित नहीं था। मेंडल की सफलता का बड़ा कारण यही था कि उन्होंने ऐसे लक्षण चुने जिनके केवल दो स्पष्ट एवं परस्पर विपरीत रूप थे, कोई मध्यवर्ती अवस्था नहीं थी। साथ ही मटर स्वपरागित होती है, एक ऋतु में ही जीवन-चक्र पूरा करती है और उसमें कृत्रिम परागण सरल है।

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Q59. निम्नलिखित में से कौन - सी अवरोधिनी, यकृत - अग्न्याशयी वाहिनी की ग्रहणी में प्रवेश को नियंत्रित करती है ?

Right Answer: ओडी अवरोधिनी


Explanation:

यकृत से आने वाली सामान्य पित्त वाहिनी तथा अग्न्याशय से आने वाली अग्न्याशयी वाहिनी मिलकर यकृत-अग्न्याशयी वाहिनी बनाती हैं, जो ग्रहणी में हेपेटोपैंक्रियाटिक एम्पुला के द्वारा खुलती है। इस द्वार को घेरने वाली वर्तुल पेशी ओडी अवरोधिनी कहलाती है, जो पित्त एवं अग्न्याशयी रस के ग्रहणी में प्रवेश को नियंत्रित करती है। भोजन के अभाव में यह संकुचित रहती है, जिससे पित्त पित्ताशय में एकत्र होता रहता है, और वसायुक्त भोजन आने पर कोलेसिस्टोकाइनिन के प्रभाव से शिथिल हो जाती है। बोयडन अवरोधिनी सामान्य पित्त वाहिनी के अन्तिम भाग पर स्थित होती है।

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Q60. काले पानी के बुखार का रोगजनक है :

Right Answer: प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम


Explanation:

काले पानी का बुखार अर्थात् ब्लैकवाटर फीवर मलेरिया की एक गम्भीर एवं प्राणघातक जटिलता है, जिसका रोगजनक प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम है। इसमें लाल रक्त कणिकाओं का व्यापक एवं तीव्र अपघटन होता है, जिससे मुक्त हीमोग्लोबिन रक्त में भर जाता है और वृक्कों द्वारा मूत्र के साथ बाहर निकलने लगता है; इसी कारण मूत्र का रंग गहरा लाल-काला हो जाता है और रोग को यह नाम मिला। इसके साथ तीव्र ज्वर, पीलिया, रक्ताल्पता तथा वृक्क निष्क्रियता हो जाती है। प्लैज़्मोडियम फैल्सीपैरम मस्तिष्कीय मलेरिया के लिए भी उत्तरदायी है।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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