Psychology: 197 MCQs with Answers
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Q172. प्रायोगिक विधि के सफलतम प्रयोग के लिए आवश्यक है :
Right Answer: प्रतिभागियों का यादृच्छिक निर्धारण
प्रायोगिक विधि का उद्देश्य स्वतंत्र चर तथा आश्रित चर के बीच कारण-कार्य सम्बन्ध स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रयोगात्मक और नियंत्रित समूह आरम्भ में सभी दृष्टियों से समतुल्य हों। यह केवल प्रतिभागियों के यादृच्छिक निर्धारण से सम्भव होता है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के किसी भी समूह में जाने की सम्भावना समान रहती है। इससे बुद्धि, आयु, अभिप्रेरणा जैसे बाह्य चर दोनों समूहों में समान रूप से बँट जाते हैं और उनका प्रभाव निष्प्रभावी हो जाता है। चरों का संकरण तो प्रयोग का दोष है, जबकि प्राकृतिक निरीक्षण एक भिन्न शोध विधि है।
Q173. निम्नलिखित मापनियों को उनके निर्माता से मिलान कर सही कूट चुनिए :
सूची-I (मापनी)
A. मिनेसोटा मल्टीफेजिक व्यक्तित्व मापनी (MMPI)
B. पर्सनल डेटा शीट
C. सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली
D. नीओ-व्यक्तित्व मापनी - संशोधित
सूची-II (निर्माता)
(i) कोस्टा तथा मैक्री
(ii) हैथवे तथा मैकिनले
(iii) कैटल
(iv) वुडवर्थ
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(iii), (D)-(i)
मिनेसोटा मल्टीफेजिक व्यक्तित्व मापनी का निर्माण स्टार्क हैथवे तथा जे० सी० मैकिनले ने 1943 में किया और यह मानसिक विकृतियों के नैदानिक मूल्यांकन में प्रयुक्त होती है। पर्सनल डेटा शीट रॉबर्ट वुडवर्थ ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सैनिकों की भावनात्मक स्थिरता जाँचने हेतु बनाई और इसे पहली व्यक्तित्व प्रश्नावली माना जाता है। सोलह व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली रेमंड कैटल ने कारक विश्लेषण के आधार पर विकसित की। नीओ-व्यक्तित्व मापनी-संशोधित पॉल कोस्टा तथा रॉबर्ट मैक्री की देन है, जो पंचकारक प्रतिमान को मापती है।
Q174. बेडली (1996) के अनुसार कॉर्टेक्स के ललाट पालि की क्षति केन्द्रीय कार्यकारी को नुकसान पहुँचाती है और पीड़ित व्यक्ति अपने प्रसंस्करण संसाधनों को उचित रूप से निर्देशित नहीं कर पाता। यह विकार कहलाता है :
Right Answer: डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम
एलन बेडली के कार्यशील स्मृति प्रतिरूप में केन्द्रीय कार्यकारी सर्वोच्च नियंत्रक इकाई है, जो ध्यान बाँटने, कार्यों के बीच अदल-बदल करने तथा ध्वन्यात्मक लूप और दृश्य-स्थानिक स्केचपैड का संचालन करने का कार्य करती है। ललाट पालि की क्षति से यही इकाई क्षतिग्रस्त हो जाती है और डिसएक्जीक्यूटिव सिंड्रोम उत्पन्न होता है। इसमें रोगी योजना बनाने, कार्य आरम्भ करने, ध्यान बदलने तथा आवेग रोकने में असमर्थ हो जाता है, विचलित होता रहता है और अनुचित व्यवहार दोहराता है। यह अल्जाइमर या पार्किंसन जैसे अपह्रासी रोगों से भिन्न एक कार्यकारी नियंत्रण विकार है।